पटना। नवरात्र में हवन अष्टमी या नवमी किसी भी तारीख में कर सकते हैं, जो साधक अष्टमी के दिन नवरात्र व्रत का पारण करते हैं, वे अष्टमी के दिन हवन करेंगे। वहीं जो लोग नवमी के दिन व्रत का पारण करते हैं, वे नवमी के दिन हवन-पूजन करें। ऐसा माना जाता है कि हवन व […]
पटना। नवरात्र में हवन अष्टमी या नवमी किसी भी तारीख में कर सकते हैं, जो साधक अष्टमी के दिन नवरात्र व्रत का पारण करते हैं, वे अष्टमी के दिन हवन करेंगे। वहीं जो लोग नवमी के दिन व्रत का पारण करते हैं, वे नवमी के दिन हवन-पूजन करें। ऐसा माना जाता है कि हवन व कन्या पूजन के बाद ही नवरात्र व्रत के फल की प्राप्ति होती है। ऐसे में जो लोग इस व्रत का पालन कर रहे हैं, वे हवन जरूर करें, तो चलिए जानते हैं हवन से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातों के बारे में।
हिंदू पंचांग के मुताबिक चैत्र नवरात्र के प्रमुख पूजा-पाठ में हवन भी शामिल है। अष्टमी और नवमी तिथि के दिन हवन करना शुभ माना जाता है। इन तिथियों में ब्रह्म मुहूर्त में हवन करना सबसे ज्यादा लाभकारी होता है। वहीं, नवमी तिथि पर हवन के लिए कई दुर्लभ योग बन रहे हैं। दरअसल, इस दिन रवि योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि पुष्य योग का शुभ संयोग बन रहा है। ऐसे में पूरे दिन हवन किया जा सकता है। अष्टमी और नवमी पर पूरे दिन हवन का शुभ मुहूर्त है।
इस साल चैत्र नवरात्र की अष्टमी 5 अप्रैल को और नवमी 6 अप्रैल को मनाई जाएगी। अष्टमी के दिन हवन का मुहूर्त सुबह 11:59 मिनट से दोपहर 12: 49 मिनट तक रहेगा। वहीं, नवमी का हवन मुहूर्त सुबह 11: 58 मिनट से दोपहर 12: 49 मिनट तक रहेगा। हवन करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। हवन से वातावरण शुद्ध होता है। हवन से मां दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है।
हवन के लिए एक हवन कुंड तैयार करना होगा। हवन कुंड तैयार होने के बाद हवन शुरू किया जाएगा। हवन में आग जलाई जाएगी। आग में घी, तिल, गुग्गल, जौ, लोबान, और अन्य हवन सामग्री की आहूति दी जाएगी। हवन के बीच मां दुर्गा का ध्यान करते हुए उनके मंत्रों का जाप करें। हवन के बाद मां दुर्गा की आरती करें। आरती उतारने के बाद मां को भोग लगाएं और प्रसाद का वितरण करें।