पटना। कारगिल युद्ध के दौरान अग्रिम पंक्ति में प्राणों का पहला बलिदान बिहार रेजिमेंट प्रथम बटालियन के मेजर एम. सरावनन और उनकी टुकड़ी में शामिल नायक गणेश प्रसाद यादव, सिपाही ओम प्रकाश गुप्ता, सिपाही प्रमोद कुमार और हवलदार हरदेव प्रसाद ने दिया था। 66 दिनों तक चले करगिल युद्ध में जीत के लिए बिहार रेजिमेंट […]
पटना। कारगिल युद्ध के दौरान अग्रिम पंक्ति में प्राणों का पहला बलिदान बिहार रेजिमेंट प्रथम बटालियन के मेजर एम. सरावनन और उनकी टुकड़ी में शामिल नायक गणेश प्रसाद यादव, सिपाही ओम प्रकाश गुप्ता, सिपाही प्रमोद कुमार और हवलदार हरदेव प्रसाद ने दिया था। 66 दिनों तक चले करगिल युद्ध में जीत के लिए बिहार रेजिमेंट के 18 सैनिकों ने जान देकर देश के आन-बान और शान की रक्षा की थी।
बिहार रेजिमेंट के नायक शत्रुघ्न सिंह दुश्मनों की गोली से घायल हो गए थे जिसके 11 दिन बाद वह अपने घर वापस लौटे थे। बता दें कि बिहार रेजिमेंट की प्रथम बटालियन को 28 वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। जो कि बिहार के लोगों के लिए यह गर्व की बात है। जिनमें 6 सेना मेडल और 4 वीर चक्र के साथ बैटल ऑनर ऑफ बटालिक और थिएटर ऑनर ऑफ करगिल से भी सम्मानित किया गया है। साल 1999 में कारगिल वसंत के दौरान ही पाकिस्तान की फौज ने आतंकियों का वेश धारण कर भारत की सीमा में दाखिल हुए औऱ कारगिल की ऊंची पहाड़ियों पर अपने ठिकाने बनाए। उनका मकसद इस क्षेत्र के सड़क मार्ग को काटकर स्थायी रूप से अपने कब्जे मे लेना था। भारतीय फौज को इस बात की जानकारी 17 मई 1999 को मिली थी। उन दिनों बिहार रेजिमेंट की प्रथम बटालियन करगिल जिले के बटालिन सेक्टर में पहले से ही सुरक्षा के लिए तैनात थी। लिहाजा बिहार रेजिमेंट को जुब्बार पहाड़ी को अपने कब्जे मे लेने की जिम्मेदारी सौपी गई।
21 मई को मेजर एम सरवनन अपनी टुकड़ी के साथ रेकी पर निकले थे। करीब 14,229 फीट की ऊंचाई पर बैठे दुश्मनों ने गोलीबारी शुरू कर दी। मेजर सरावनन ने 90 एमएम रॉकेट लाॉंचर अपने कंधे पर उठाकर दुश्मनों पर हमला बोल दिया। पाकिस्तानी दुश्मनों को इससे भारी नुकसान हुआ। पहले ही हमले में पाक के दो घुसपैठियों ने अपनी जान गंवा दी। यहीं से करगिल युद्ध की शुरूआत हो गई। अग्रिम पंक्ति में युद्ध के दौरान नायक गणेश प्रसाद यादव, हरदेव सिंह, सिपाही प्रमोद कुमार और ओम प्रकाश गुप्ता शहीद हो गए। नायक शत्रुघ्न सिंह को गोली लग चुकी थी। वह घायल हो गए। बिहार रेजीमेट के जांबाज सैनिकों ने एक जुलाई को जुब्बार पहाड़ी पर विजय प्राप्त कर कर बिहार रेजिमेंट की वीरता का ध्वज लहरा दिया।