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       <title>Today VTR News | Latest VTR News | Breaking VTR News in English | Latest VTR News Headlines - Inkhabar</title>
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        </image><item><title>Bihar News: अफ्रीकन पर्यटकों ने किया वीटीआर में भ्रमण, भोजपूरी बोलते देख लोग हुए दंग</title><link>https://bihar.inkhabar.com/top-news/african-tourists-took-a-tour-in-vtr-people-were-stunned-to-see-bhojpuri-speaking/</link><pubDate>November 30, 2023, 9:25 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/11/9-6.png</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>पटना। बिहार में साउथ अफ्रीका से आई मां-बेटी टैम मुलेनार और किम ठाकुर ने जंगल कैंप में उपस्थित वनकर्मियों और पत्रकारों का भोजपुरी व हिंदी भाषा में अभिवादन करते हुए सबका दिल जीत लिया। बताया जा रहा है कि दोनों विदेशी महिलाओं ने हाथ जोड़कर भोजपुरी ...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना।&lt;/strong&gt; बिहार में साउथ अफ्रीका से आई मां-बेटी टैम मुलेनार और किम ठाकुर ने जंगल कैंप में उपस्थित वनकर्मियों और पत्रकारों का भोजपुरी व हिंदी भाषा में अभिवादन करते हुए सबका दिल जीत लिया। बताया जा रहा है कि दोनों विदेशी महिलाओं ने हाथ जोड़कर भोजपुरी भाषा में कहा कि हम बिहार से बानी। ये सुनकर कैंप में मौजूद सभी लोगों ने तालियां बजाकर अपनी प्रसन्नत जाहिर की।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;शादी समारोह में शामिल होने पहुंची&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;दरअसल, किम मोलेनार ठाकुर मूल रूप से साउथ अफ्रीका की निवासी हैं। इस समय वह रामनगर निवासी इंजीनियर अमित कुमार ठाकुर से शादी कर साउथ अफ्रीका में रह रही हैं। अपने पति के साथ रहते-रहते किम एवं उनकी मां टैम मोलेनार हिंदी एवं भोजपुरी भाषा को बोलने और समझने लगी हैं। इस वक्त दोनों मां-बेटी रामनगर में एक शादी समारोह में शामिल होने के लिए आई हैं।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;किम हैं पहली साउथ अफ्रीकन पर्यटक&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;इस दौरान वन विभाग जंगल कैंप की इंचार्ज वनरक्षी अर्चिता कुमारी ने बताया कि यह ये पहली बार है जब कोई साउथ अफ्रीकन पर्यटक वीटीआर में भ्रमण के लिए आए हैं। इस बाबत किम के पति अमित कुमार ठाकुर ने बताया कि मेरी पत्नी और सासु मां के साथ मेरे ससुर भी यहां आए हुए हैं लेकिन उनकी तबीयत खराब होने के कारण वे वीटीआर भ्रमण करने नहीं आ पाए। इस दौरान किम ने बताया कि हम दो दिन बाद साउथ अफ्रीका के लिए वापस रवाना हो जाएंगे। यहां वाल्मीकिनगर में भ्रमण कर हमारा परिवार बहुत खुश है और बिहार की सभ्यता, संस्कृति से हम लोग काफी प्रभावित हैं।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>बिहार: अब कैमूर वन्यजीव अभयारण्य में भी सुनाई देगी बाघ की दहाड़</title><link>https://bihar.inkhabar.com/top-news/bihar-now-the-roar-of-the-tiger-will-be-heard-in-kaimur-wildlife-sanctuary-also/</link><pubDate>September 28, 2023, 5:24 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/09/1-6-300x249.png</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>पटना। बिहार सरकार NTCA को फिर से कैमूर वन्यजीव अभयारण्य का प्रस्ताव भेजने जा रही है। इस बार अभयारण्य को मान्यता मिलने की संभावना की जा रही है। इसके लिए 450 वर्ग किलोमीटर जंगल को चिन्हित किया गया है। बाघों के 450 वर्ग किलोमीटर जंगल प्रदेश के पश्...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना।&lt;/strong&gt; बिहार सरकार NTCA को फिर से कैमूर वन्यजीव अभयारण्य का प्रस्ताव भेजने जा रही है। इस बार अभयारण्य को मान्यता मिलने की संभावना की जा रही है। इसके लिए 450 वर्ग किलोमीटर जंगल को चिन्हित किया गया है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;बाघों के 450 वर्ग किलोमीटर जंगल&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;प्रदेश के पश्चिमी चंपारण वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के बाद अब कैमूर वन्यजीव अभयारण्य बनने का रास्ता साफ होता दिख रहा है। बतादें कि राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण यानी NTCA की कुछ आपत्तियों के बाद बिहार सरकार फिर से ये प्रस्ताव भेजने की तैयारी कर रही है और अगर सब कुछ सही रहा तो इसी साल के अंत में इस अभयारण्य को मान्यता भी मिल जाएगी। इस अभयारण्य के अंतर्गत बाघों के रहने के लिए 450 वर्ग किलोमीटर जंगल को चुना गया है। वहीं इससे पहले 900 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र चिह्नित किया गया था। इसके साथ ही यहां 1,050 वर्ग किमी में बफर जोन भी बनाया जाएगा।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;कैमूर में प्रवासी पक्षी भी आते हैं&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;कैमूर के वन क्षेत्रों में भालू, तेंदुआ, हिरण सहित कई जानवरों की मौजूदगी बताई जाती है। यहीं नहीं यहां विभिन्न प्रकार के प्रवासी पक्षी भी देखने को मिलते हैं। कैमूर वन क्षेत्र इतना बड़ा है की इसकी सीमा झारखंड, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के जंगलों से मिलती है। ऐसे में यहां टाइगर रिजर्व जुड़े होने से बाघों का आना-जाना लगा रहता है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;वाल्मीकि टाइगर रिजर्व बिहार का एकमात्र बाघ अभ्यारण्य&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;बताया जा रहा है कि कैमूर अभयारण्य से यूपी के सोनभद्र और मिर्जापुर होते हुए मध्य प्रदेश तक करीब 450 वर्ग किमी लंबा कॉरिडोर है। यहां झारखंड के दक्षिण में पलामू टाइगर रिजर्व और गढ़वा जंगल हैं। यहां यह भी बताया जाता है कि इस क्षेत्र में 1990 के मध्य में बाघ के आशियाने थे, लेकिन उसके बाद ये आशियानें छीन लिए गए जिसके बाद 2016-17 के बीच बाघ फिर से नजर आने लगे। वहीं मार्च 2020 में एक नर बाघ को कैमरा ट्रैप में देखा गया था। बता दें कि बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले में स्थित वाल्मीकि टाइगर रिजर्व बिहार का एकमात्र बाघ अभ्यारण्य है। बता दें कि 800 वर्ग किमी से भी अधिक क्षेत्र में फैले इस रिजर्व में पेड़-पौधों की लगभग सैकड़ों प्रजातियां मौजूद हैं। यहां जंगली जानवरों की 60, पक्षियों की 300 और रेप्टाइल्स की 30 प्रजातियां देखी जा सकती हैं।&lt;/p&gt;
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