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       <title>Today supreme court news News | Latest supreme court news News | Breaking supreme court news News in English | Latest supreme court news News Headlines - Inkhabar</title>
        <description>आज का supreme court news समाचार:Today supreme court news News ,Latest supreme court news News,Aaj Ka Samachar ,supreme court news समाचार ,Breaking supreme court news News in Hindi, Latest News Headlines - Inkhabar</description>
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        </image><item><title>सुप्रीम कोर्ट BPSC मुद्दे पर नहीं करेगी सुनवाई, पटना हाईकोर्ट जाने की दी नसीहत</title><link>https://bihar.inkhabar.com/top-news/supreme-court-will-not-hear-bpsc-issue-advised-to-go-to-patna-high-court/</link><pubDate>January 7, 2025, 11:01 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2025/01/download-11.png</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>पटना: सुप्रीम कोर्ट ने आज 70वीं बीपीएससी प्रीलिम्स परीक्षा से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने याचिकाकर्ता को इस मामले को पटना हाई कोर्ट में ले जाने की सलाह दी है. इस याचिका पर मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति संज...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना:&lt;/strong&gt; सुप्रीम कोर्ट ने आज 70वीं बीपीएससी प्रीलिम्स परीक्षा से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने याचिकाकर्ता को इस मामले को पटना हाई कोर्ट में ले जाने की सलाह दी है. इस याचिका पर मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ ने सुनवाई की. बता दें कि 13 दिसंबर को आयोजित 70वीं BPSC प्रीलिम्स परीक्षा को लेकर छात्रों में काफी नाराजगी है.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;पहले पटना हाई कोर्ट जाएं&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;बेंच ने बिहार BPSC प्रीलिम्स परीक्षा रद्द करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया. साथ ही याचिकाकर्ता को पहले पटना हाई कोर्ट जाने को कहा. मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले की प्रथम स्तर पर सुनवाई के लिए उचित मंच नहीं है और अनुच्छेद 226 के तहत इसे पटना उच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करना बेहतर है. आगे सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह छात्रों और प्रदर्शनकारियों की भावना को समझता है, पर इस मामले पर सीधे तौर पर हस्तक्षेप करने के बजाय याचिकाकर्ता को पटना हाईकोर्ट जाना चाहिए। कोर्ट ने आगे यह भी कहा कि इस तरह के मामले के लिए स्थानीय कोर्ट अधिक प्रभावी मंच होते हैं।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;परीक्षा रद्द करने की मांग&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;बता दें कि याचिका में BPSC प्रीलिम्स परीक्षा रद्द करने की मांग की गई है. साथ ही प्रदर्शनकारी छात्रों पर लाठीचार्ज के लिए जिम्मेदार जिले के एसपी और डीएम के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की गई. याचिका में बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया है और मांग की गई है कि इसकी जांच सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में सीबीआई से कराई जाए.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;छात्रों पर बेरहमी से लाठीचार्ज&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;वहीं सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि बिहार पुलिस ने अभ्यर्थियों पर बेरहमी से लाठीचार्ज किया है और पटना हाई कोर्ट इस पर स्वत: संज्ञान ले सकता था क्योंकि घटना पटना हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के आवास के बाहर हुई थी. इस पर पीठ ने दलील खारिज कर दी और मामले पर आगे सुनवाई से भी इनकार कर दिया.&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>CJI: जजों के वेतन रोकने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को लगाई फटकार</title><link>https://bihar.inkhabar.com/top-news/cji-supreme-court-reprimands-bihar-government-for-stopping-salaries-of-judges/</link><pubDate>October 1, 2024, 9:27 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/10/zxcvb-300x169.webp</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>पटना। हाईकोर्ट के जजों के बकाया वेतन जारी करने और न्यायिक अधिकारियों के लिए पेंशन निर्धारित करने के मुद्दे से संबंधित मामलों की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को कड़े निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘बिहार सरकार के वर्तमान ...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना।&lt;/strong&gt; हाईकोर्ट के जजों के बकाया वेतन जारी करने और न्यायिक अधिकारियों के लिए पेंशन निर्धारित करने के मुद्दे से संबंधित मामलों की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को कड़े निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘बिहार सरकार के वर्तमान जज न्यायाधीश आर.पी. मिश्रा का वेतन तुरंत उन्हें दिया जाए, जिनका हाईकोर्ट में प्रमोशन के बाद से सैलरी बाकी है।’&lt;br&gt;बिना वेतन के काम की उम्मीद कैसे?&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;सुनवाई चीफ जस्टिस ने की &lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;अदालत ने यह भी निर्देश दिए कि ‘किसी भी जज से वेतन के बिना काम करने की उम्मीद नहीं की जा सकती है।’इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया डी.वाई चंद्रचूड़, न्यायाधीश जे.बी पारदीवाला और न्यायाधीश मनोज मिश्रा की पीठ कर रही थी। इस दौरान गंभीरता से विचार करते हुए सीजेआई ने पटना हाईकोर्ट को फटकार लगाई। उन्होंने कहा, ‘जस्टिस आरपी मिश्रा का वेतन अभी तक उन्हें क्यों नहीं दिया गया? वे उन्हें वेतन देने से मना क्यों कर रहे हैं?&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;अन्य जजों की तरह सेवाएं प्राप्त करेंगे&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि उनके जैसे लोग हाईकोर्ट में नियुक्त होने पर अन्य सभी हाईकोर्ट जजों की तरह सेवाएं प्राप्त करेंगे। सुनवाई के दौरान पीठ ने यह भी कहा, ‘अगर जस्टिस मिश्रा जिला न्यायपालिका में कार्यरत रहते हुए नई पेंशन योजना के तहत शासित थे, लेकिन हाईकोर्ट में प्रमोशन होने पर वे दूसरे हाईकोर्ट न्यायाधीशों के बराबर सेवा शर्तों के अधीन शासित होंगे। जज को सेवा देने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कोर्ट ने राज्य सरकार को जस्टिस मिश्रा का वेतन बकाया राशि के साथ जारी करने का निर्देश दिया।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;7 जजों का वेतन जारी करने के निर्देश&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;सुनवाई के दौरान न्यायालय को याद दिलाया गया कि जस्टिस रुद्र प्रकाश मिश्रा को नवंबर 2023 में उच्च न्यायिक सेवाओं से हाईकोर्ट में प्रमोशन के बाद से अभी तक जीपीएफ नहीं दिया गया। हालांकि उन्होंने सभी औपचारिकताओं को पूर्ण कर लिया है। जज को प्रमोशन के बाद से अब तक वेतन नहीं मिला है। साल 2023 के मार्च में सुप्रीम कोर्ट ने इसी तरह के अंतरिम उपाय में पटना हाईकोर्ट के 7 जजों के वेतन को जारी करने का निर्देश दिया था, जो उनके जीपीएफ अकाउंट बंद करने के बाद से रोके गए थे।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>बिहार : सुप्रीम कोर्ट में गया बिहार जातीय सर्वे का मामला ,6 अक्टूबर को होगी इसकी सुनवाई</title><link>https://bihar.inkhabar.com/top-news/%e0%a4%ac%e0%a4%bf%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%ae-%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%9f-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%97/</link><pubDate>October 3, 2023, 6:04 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/10/2-2-300x169.png</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>पटना। सोमवार को गांधी जयंती के दिन बिहार सरकार ने जाति आधारित गणना कि रिपोर्ट जारी की थी। बताया जा रहा है कि अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट में चला गया है। 6 अक्टूबर को होगी मामले की सुनवाई बिहार में जाति आधारित सर्वे मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने रख...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना।&lt;/strong&gt; सोमवार को गांधी जयंती के दिन बिहार सरकार ने जाति आधारित गणना कि रिपोर्ट जारी की थी। बताया जा रहा है कि अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट में चला गया है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;6 अक्टूबर को होगी मामले की सुनवाई&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;बिहार में जाति आधारित सर्वे मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने रखा गया है। कोर्ट ने 6 अक्टूबर को सुनवाई की बात कही है। यह मामला पहले से सुप्रीम कोर्ट में चल रहा था। बता दें कि कोर्ट ने सर्वे के आंकड़े जारी करने पर कोई रोक नहीं लगाई। कोर्ट का कहना था कि वह रोक का आदेश विस्तृत सुनवाई के बाद ही देगा। दरअसल, इस मामले की सुनवाई आज मंगलवार को होनी थी और याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि बिहार सरकार ने जाति सर्वे के आंकड़े जारी कर दिए हैं। अब कोर्ट शुक्रवार (06 अक्टूबर) को इस मामले की सुनवाई करेगा।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;रिपोर्ट के अनुसार बिहार में किसकी कितनी जनसंख्या&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;जाति आधारित गणना की रिपोर्ट के अनुसार बिहार में सबसे अधिक हिंदुओं की संख्या पाई गई है। बता दें की इसमें में 81.99 प्रतिशत हिंदू हैं। हिंदुओं की संख्या 10 करोड़ 71 लाख 92 हजार 958 है। वहीं बिहार में मुस्लिम की संख्या 17.7% यानी 2 करोड़ 31 लाख 49 हजार 925 है। इसके अलावा ईसाई की संख्या 75238, सिख की संख्या 14753, बौद्ध की संख्या 111201 और जैन की संख्या 12523 है यानी 1% से भी कम है। वहीं बिहार के जातीय गणना के आंकड़े के अनुसार कुल जनसंख्या का 63 प्रतिशत हिस्सा ओबीसी, ईबीसी हैं। आंकड़ों के अनुसार, राज्य की कुल जनसंख्या 13.07 करोड़ से कुछ अधिक है। इसमें अगर वर्गों की आबादी के बारे में बात करें तो सामान्य वर्ग – 15.52%,पिछड़ा वर्ग- 27.12%,अति पिछड़ा वर्ग – 36.1%,अनूसूचित जाति- 19.65% और अनूसचित जनजाति – 1.68% है। वहीं अगर बात करें कि किस में कितनी आबादी है तो ब्राह्मण- 3.67%, राजपूत- 3.45%, भूमिहार- 2.89%, कायस्थ – 0.60%, यादव – 14.26 %, कुरमी- 2.87%, तेली- 2.81%, मुसहर- 3.08% और सोनार-0.68% में हैं।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;जानिए क्या है मामला ?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;दरअसल, जाति जनगणना के आंकड़ों को जारी करने पर रोक लगाने के लिए पटना हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। इस मामले पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने बिहार सरकार के पक्ष में इसका फैसला सुनाया था और सरकार के इस कदम को कानूनी रूप से वैध बताया था। वहीं इसके बाद बिहार सरकार ने जाति गणना का कार्य शुरू कर दिया था। बताया जा रहा है कि पटना हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट पहुंचकर और रिपोर्ट को फिलहाल जारी नहीं करने का अनुरोध किया लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा करने से इनकार कर दिया था।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>बिहार में जातीय जनगणना पर लगेगी रोक! याचिका पर 28 अप्रैल को SC करेगा सुनवाई</title><link>https://bihar.inkhabar.com/top-news/caste-census-will-be-banned-in-bihar-sc-will-hear-the-petition-on-april-28/</link><pubDate>April 21, 2023, 8:21 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/04/Clipboard-27-300x169.jpg</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>पटना: बिहार में हो रहे जातीय जनगणना को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक बार फिर याचिका दाखिल की गयी है। जिस पर सुप्रीम कोर्ट हामी भरते हुए सुनवाई के लिए तैयार हो गया है। मिल रही जानकारी के मुताबिक इसी महीने 28 अप्रैल को जातीय जनगणना पर सुप्रीम...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना:&lt;/strong&gt; बिहार में हो रहे जातीय जनगणना को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक बार फिर याचिका दाखिल की गयी है। जिस पर सुप्रीम कोर्ट हामी भरते हुए सुनवाई के लिए तैयार हो गया है। मिल रही जानकारी के मुताबिक इसी महीने 28 अप्रैल को जातीय जनगणना पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। आपको बता दें कि याचिकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में बिहार में कराये जा रहे जाति आधारित गणना को चुनौती देते हुए अपने याचिका में कहा है कि जातीय गणना कराने का अधिकार सिर्फ केंद्र सरकार को है। राज्य सरकार का नहीं।&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;&lt;strong&gt;जातीय गणना का दूसरा फेज शुरू&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;आपको बता दें कि बिहार में जातीय जनगणना का दूसरा फेज शुरू हो चूका है। पहला फेज पूरा होने के बाद दूसरे फेज में सभी जातियों के कोड को निर्धारित कर दिया गया है। इसके साथ ही लगभग 17 सवालों के जवाब लोगों से मांगे जा रहे हैं। गौरतलब हो इससे पहले भी एक बार बिहार में हो रहे जातीय जनगणना को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाली जा चुकी है लेकिन उस वक़्त सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करने से इंकार कर दिया था। लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के लिए हामी भर दी है। ऐसे में अब अगर कोर्ट से किसी प्रकार का एक्शन लिया जाता है तो नीतीश कुमार के ड्रीम प्रोजेक्ट को झटका लग सकता है।&lt;/p&gt;
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