<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?>
<rss version="2.0"
    xmlns:ag="http://purl.org/rss/1.0/modules/aggregation/"  
    xmlns:annotate="http://purl.org/rss/1.0/modules/annotate/" 
    xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app"
    xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
    xmlns:company="http://purl.org/rss/1.0/modules/company"
    xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
    xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
    xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/"
    xmlns:email="http://purl.org/rss/1.0/modules/email/"
    xmlns:ev="http://purl.org/rss/1.0/modules/event/"
    xmlns:rdf="http://www.w3.org/1999/02/22-rdf-syntax-ns#"
    xmlns:rdfs="http://www.w3.org/2000/01/rdf-schema#"
    xmlns:ref="http://purl.org/rss/1.0/modules/reference/"
    xmlns:taxo="http://purl.org/rss/1.0/modules/taxonomy/"
    xmlns:atom10="http://www.w3.org/2005/Atom">
    <channel>
       <title>Today Shardiya navratri 2024 News | Latest Shardiya navratri 2024 News | Breaking Shardiya navratri 2024 News in English | Latest Shardiya navratri 2024 News Headlines - Inkhabar</title>
        <description>आज का Shardiya navratri 2024 समाचार:Today Shardiya navratri 2024 News ,Latest Shardiya navratri 2024 News,Aaj Ka Samachar ,Shardiya navratri 2024 समाचार ,Breaking Shardiya navratri 2024 News in Hindi, Latest News Headlines - Inkhabar</description>
        <link>https://www.inkhabar.com/tag/shardiya-navratri-2024</link>
        <lastBuildDate>June 3, 2026, 6:22 am</lastBuildDate>
        <copyright>Inkhabar</copyright>
        <generator>Inkhabar</generator>
        <language>hi</language>
        <image>
            <url>https://www.inkhabar.com/wp-content/themes/inkhabar/images/inkhbar-logo.png</url>
            <title>Inkhabar</title>
            <link>https://www.inkhabar.com/</link>
            <description>Feed provided by Inkhabar.</description>
        </image><item><title>अष्टमी पूजा आज, मां महागौरी को भोग में पसंद हैं ये मिठाई</title><link>https://bihar.inkhabar.com/top-news/ashtami-puja-today-maa-mahagauri-likes-these-sweets-to-offer/</link><pubDate>October 10, 2024, 2:33 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/10/download-60.png</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>पटना: हिंदू धर्म में नवरात्रि के त्योहार को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान भक्त देवी दुर्गा के 9 रूपों की पूजा करते हैं और उनका आशीर्वाद लेते हैं। नवरात्रि की अष्टमी तिथि को मां महागौरी की पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि जो भक्त वि...</excerpt><content>
&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;&lt;strong&gt;पटना: &lt;/strong&gt;हिंदू धर्म में नवरात्रि के त्योहार को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान भक्त देवी दुर्गा के 9 रूपों की पूजा करते हैं और उनका आशीर्वाद लेते हैं। नवरात्रि की अष्टमी तिथि को मां महागौरी की पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि जो भक्त विधि-विधान से मां महागौरी की पूजा करते हैं, उनके सभी बिगड़े काम बन जाते हैं और उन्हें सभी प्रकार के रोगों से भी मुक्ति मिल जाती है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;पूजा का शुभ मुहूर्त&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;वैदिक पंचांग के अनुसार देवी महागौरी की पूजा का शुभ समय सुबह 11:45 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक रहेगा. इस शुभ समय पर पूजा करना शुभ रहेगा।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;ये है पूजा विधि&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा करने के लिए सुबह स्नान करके सफेद वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल को साफ करें और मां महागौरी की मूर्ति या तस्वीर को गंगा जल से साफ करें। मां महागौरी को सफेद रंग अत्यंत प्रिय है इसलिए पूजा में सफेद फूल चढ़ाना बहुत शुभ माना जाता है।&lt;/p&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;इसके बाद मां को रोली और कुमकुम का तिलक लगाएं, फिर मिठाई, सूखे मेवे और फल का भोग लगाएं. अष्टमी के दिन देवी महागौरी की पूजा करते समय उन्हें काले चने का भोग लगाना चाहिए। अष्टमी तिथि पर कन्या पूजन भी शुभ माना जाता है। इसके बाद आरती और मंत्रों का जाप करें।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;मां का प्रिय भोग&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;मां महागौरी को मोगरा का फूल बेहद पसंद है। मान्यता है कि इस दिन यह फूल देवी मां के चरणों में चढ़ाना चाहिए। इसके साथ ही मां को नारियल की बर्फी और लड्डू का भोग लगाने से मां बहुत खुश होती हैं. क्योंकि नारियल को मां का पसंदीदा भोग बताया गया है.&lt;/p&gt;



&lt;figure class=&quot;wp-block-image size-full is-resized&quot;&gt;&lt;img loading=&quot;lazy&quot; decoding=&quot;async&quot; width=&quot;293&quot; height=&quot;172&quot; src=&quot;https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/10/image-9.png&quot; alt=&quot;&quot; class=&quot;wp-image-12409&quot; style=&quot;width:534px;height:auto&quot; srcset=&quot;https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/10/image-9.png 293w, https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/10/image-9-150x88.png 150w&quot; sizes=&quot;auto, (max-width: 293px) 100vw, 293px&quot; /&gt;&lt;/figure&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;जानें पूजा का महत्व&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;मान्यता है कि मां महागौरी की पूजा करने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं. व्यक्ति के सभी रोग और दोष दूर हो जाते हैं। मां महागौरी की पूजा से वैवाहिक जीवन, व्यापार, धन और सुख में वृद्धि होती है। इसके अलावा मां महागौरी की पूजा करने से विवाह में आ रही सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>कभी सोचा है नवरात्रि नौ दिनों तक ही क्यों मनाई जाती है? जानें इसके पीछे का कारण</title><link>https://bihar.inkhabar.com/festival/have-you-ever-wondered-why-navratri-is-celebrated-only-for-nine-days-know-the-reason-behind-this/</link><pubDate>October 8, 2024, 12:14 pm</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/10/Clipboard-3-300x168.webp</image><category>त्योहार</category><excerpt>पटना: नवरात्रि हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण त्योहार है जो साल में दो बार मनाया जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि नवरात्रि नौ दिनों तक ही क्यों मनाई जाती है? हिंदू धर्म में नौ नंबर बेहद खास हिंदू धर्म में नौ नंबर को बहुत पवित्र माना जाता है...</excerpt><content>
&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;&lt;strong&gt;पटना:&lt;/strong&gt; नवरात्रि हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण त्योहार है जो साल में दो बार मनाया जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि नवरात्रि नौ दिनों तक ही क्यों मनाई जाती है?&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;हिंदू धर्म में नौ नंबर बेहद खास&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;हिंदू धर्म में नौ नंबर को बहुत पवित्र माना जाता है। नौ ग्रह, नौ रातें, नौ रूपों में देवी दुर्गा सभी नौ अंक से जुड़े हैं। लेकिन क्या सिर्फ एक संख्या ही इस त्योहार की अवधि तय करती है? या फिर इसके पीछे कोई गहरा मतलब छिपा है? क्या नौ रातों का ये सफर सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान है या फिर कोई और वजह है, आइए जानते हैं…&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;मां दुर्गा और महिषासुर के बीच हुई थी युद्ध&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;पौराणिक कथा के अनुसार, देवी दुर्गा ने महिषासुर नामक एक शक्तिशाली राक्षस से युद्ध किया था। यह युद्ध 9 दिनों तक चला। देवी दुर्गा ने महिषासुर को हराने के लिए अपने सभी रूपों के साथ युद्ध किया जो देवताओं को परेशान कर रहा था और पृथ्वी पर आतंक फैला रहा था। अंततः नवमी की रात को मां दुर्गा ने महिषासुर का वध कर दिया। इस जीत के बाद देवी की शक्ति को समर्पित करने के लिए नवरात्रि का त्योहार मनाया जाने लगा।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;नवरात्रि के इन 9 दिनों में मां दुर्गा के 9 रूपों की पूजा की जाती है। इन रूपों में शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री शामिल हैं। हर दिन एक स्वरूप की पूजा की जाती है और भक्त व्रत रखते हैं।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;व्रत, भक्ति, गरबा एवं डांडिया&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;नवरात्रि के दौरान भक्त श्रद्धापूर्वक माता रानी की पूजा करते हैं। इस त्योहार पर न केवल पूजा-अर्चना की जाती है, बल्कि दुर्गा पूजा के साथ-साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं, जिनमें गरबा, डांडिया और अन्य लोक नृत्य शामिल होते हैं।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;नवरात्रि का खास संदेश&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;इस प्रकार, नवरात्रि का त्योहार न केवल देवी दुर्गा की पूजा करने का अवसर है, बल्कि यह शक्ति, श्रद्धा और साहस का भी प्रतीक है। यह हमें सिखाता है कि मुश्किलें चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हों, सच्ची मेहनत और समर्पण से हर बाधा को दूर किया जा सकता है।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Navratri: नवरात्रि के छठे दिन करें मां कात्यानी की पूजा, सभी दुख होंगे दूर</title><link>https://bihar.inkhabar.com/festival/navratri-worship-mother-katyani-on-the-sixth-day-of-navratri-all-sorrows-will-go-away/</link><pubDate>October 8, 2024, 3:57 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/10/6789-300x169.webp</image><category>त्योहार</category><excerpt>पटना। आज नवरात्रि का छठा दिन है। आज का दिन मां कत्यानी को समर्पित है। इस दिन मां कत्यानी की विधि-विधान से पूजा की जाती है। यह रुप मां दुर्गा के नौ रूपों में से सबसे अलग रूप माना जाता है। माता कत्यानी को त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु, महेश ने अपनी शक्...</excerpt><content>
&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;&lt;strong&gt;पटना। &lt;/strong&gt;आज नवरात्रि का छठा दिन है। आज का दिन मां कत्यानी को समर्पित है। इस दिन मां कत्यानी की विधि-विधान से पूजा की जाती है। यह रुप मां दुर्गा के नौ रूपों में से सबसे अलग रूप माना जाता है। माता कत्यानी को त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु, महेश ने अपनी शक्ति को इकट्ठा करके असुरों से देवता को सुरक्षा दिलाने के लिए माता कात्यानी को प्रकट किया था।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;भक्तों का कल्याण &lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;मां कात्यानी असुरों को नाश करती है और अपने भक्तो के कल्याण करती है। देवी भगवती पुराण के मुताबिक जंगल में कत नाम के ऋषि निवास करते थे, ऋषि के बेटे का नाम कात्या था। कात्या के बेटे के जो बेटे हुऐ उसका नाम कात्यान रखा गया। कात्यान मां दुर्गा से वरदान मिला था कि उनके घर में दुर्गा के स्वरुप जन्म लेगा। उस समय असुर का आतंक बढ़ गया था। महिषासुर नाम के राक्षस ने देवताओ को हरा दिया। सभी देवता उससे परेशान हो गए और आकाश मार्ग द्वारा त्रिदेवों के पास गए।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;पूजा का महत्व&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;अपनी रक्षा करने के लिए त्रिदेव से विनती की, तब त्रिदेव ने उन्होंने कात्यान ऋषि के घर में दुर्गा के रूप में पुत्री का जन्म हुआ, जिसे इनका नाम कात्यानी रखा गया है। कात्यानी माता की विधि-विधान पूजा करने से व्यक्ति का मस्तिक चक्र ठीक रहता है। इनके पूजन में एकाग्रता में वृद्धि होती है। मां की पूजा करने इससे व्यक्ति जल्द बिमार नहीं पड़ता है। मां कत्यानी अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करती है। यदि शत्रुओं का भय हो तो मां कत्यानी को याद करना चाहिए।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;गोधूली बेला में करें पूजा&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;मां कत्यानी का पूजन गोधूली बेला में करने से बहुत लाभ होता है। नवरात्रि के तीसरे दिन मां कत्यानी के पूजन में शहद का भोग लगाए। शहद का भोग लगाने से मां अपने भक्तो की सभी मनोकामना पूरी करती हैं। मां की विधि-विधान से पूजा की जानी चाहिए। जो व्यक्ति मां कात्यानी की सच्चे मन से पूजा करते है, वह धन्य- धान्य से परिपूर्ण होते हैं।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Navratri: नवरात्रि का पांचवा दिन, मां स्कंदमाता को समर्पित, जाने शुभ मुहूर्त और प्रिय रंग</title><link>https://bihar.inkhabar.com/festival/navratri-fifth-day-of-navratri-dedicated-to-mother-skandmata-know-the-auspicious-time-and-favorite-color/</link><pubDate>October 7, 2024, 2:41 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/10/TYU-300x255.webp</image><category>त्योहार</category><excerpt>पटना। सनातन धर्म में नवरात्रों का बहुत महत्व होता है । आज नवरात्रि का पांचवा दिन है। पांचवा नवरात्रि स्कंदमाता को समर्पित होता है। आज के दिन स्कंदमाता की विधि-विधान से पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि स्कंदमाता की पूजा-अर्चना करने से और इस ...</excerpt><content>
&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;&lt;strong&gt;पटना।&lt;/strong&gt; सनातन धर्म में नवरात्रों का बहुत महत्व होता है । आज नवरात्रि का पांचवा दिन है। पांचवा नवरात्रि स्कंदमाता को समर्पित होता है। आज के दिन स्कंदमाता की विधि-विधान से पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि स्कंदमाता की पूजा-अर्चना करने से और इस दिन व्रत रखने से जीवन में सभी तरह के सुखों की प्राप्ति होती है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;शुभ मुहूर्त&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;पंचांग के मुताबिक आश्विन माह के शुक्ल की पंचमी तिथि का आरंभ 07 अक्टूबर को सुबह 09 बजकर 48 मिनट से होगी। वही, इसका समापन 08 अक्टूबर को सुबह 11 बजकर 18 मिनट पर होगा। शारदीय नवरात्रि के पांचवें दिन जल्दी उठकर स्नान करें। नहाने के बाद साफ कपड़े पहने। मंदिरों की साफ-सफाई करें और पूजा की तैयारी करें। स्कंदमाता को कुमकुम, चंदन, फल, फूल समेत को चढ़ाए। स्कंदमाता की विधि विधान से पूजा करें।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;मां का प्रिय रंग&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;स्कंदमाता के सामने दीपक जलाकर आरती करें और स्कंदमाता के मंत्रों का जप करें। स्कंदमाता चालीसा का पाठ करें। मां को केले और मिठाई का भोग लगाएं। मां से जीवन में सुख-शांति की प्राप्ति के लिए कामना करें। स्कंदमाता की पूजा के दौरान सफेद और पीला रंग के पहनना शुभ होता है, क्योंकि सफेद और पीला रंग देवी को अति प्रिय है। इन रंग के वस्त्र धारण करने से मां प्रसन्न होंगी।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Navratri: नवरात्रि के दूसरे दिन करें मां ब्रह्माचारिणी की पूजा, जाने महत्व और विधि</title><link>https://bihar.inkhabar.com/festival/navratri-worship-goddess-brahmacharini-on-the-second-day-of-navratri-know-its-importance-and-method/</link><pubDate>October 4, 2024, 5:18 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/10/FHJ-300x169.webp</image><category>त्योहार</category><excerpt>पटना। 4 अक्टूबर यानी आज शारदीय नवरात्रि का दूसरा दिन है। यह दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी को समर्पित होता है। इस दिन मां ब्रह्माचारिण की विधि-विधान से पूजा की जाती है। मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने का उद्देश्य जीवन में सफलता हासिल करना और सिद्धियो...</excerpt><content>
&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;&lt;strong&gt;पटना।&lt;/strong&gt; 4 अक्टूबर यानी आज शारदीय नवरात्रि का दूसरा दिन है। यह दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी को समर्पित होता है। इस दिन मां ब्रह्माचारिण की विधि-विधान से पूजा की जाती है। मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने का उद्देश्य जीवन में सफलता हासिल करना और सिद्धियों की प्राप्ति करना है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;मां ब्रह्माचारिणी की पूजा विधि&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;मां ब्रह्मचारिणी देवी का यह स्वरूप शादीशुदा नहीं है। इनके एक हाथ में कमंडल और दूसरे हाथ में जाप माला होती है। आज माता ब्रह्मचारिणी का खास दिन है। नवरात्रि के दूसरे दिन यानी आज मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। इस अवसर पर आप माता को फूल, चंदन, अक्षत और रोली चढ़ाते है। ब्रह्मचारिणी मां को पंचामृत का भोग लगाया जाता है। इसके साथ ही मिठाई का भोग भी लगाया जाता है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;मां ब्रह्माचारिणी की पूजा का महत्व&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;इसके अलावा मां को लौंग, पान और सुपारी भी अर्पित किया जाता है। इसके बाद मां दुर्गा का पाठ किया जाता है। अंत में देवी ब्रह्मचारिणी के मंत्रों का जाप करें और मां की उतारें। मां ब्रह्माचारिणी मां दुर्गा का दूसरा रूप हैं। नवरात्रि की 9 शक्तियों में से दूसरी शक्ति मानी जाती हैं। यह मां दुर्गा का ज्योर्तिमय स्वरूप हैं। इन्हें त्याग का प्रतीक माना जाता हैं। मां की पूजा करने से सदाचार, मनुष्य में वैराग्य, तप, त्याग और संयम की भावना का विकास होता है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;मां ब्रह्माचारिणी का मंत्र जाप&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;या देवी सर्वभू‍तेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता.&lt;br&gt;नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:..&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Shardiya Navratri 2024: शारदीय नवरात्रि 3 अक्टूबर से शुरूआत, जाने पालकी की सवारी से कैसा होगा माहौल</title><link>https://bihar.inkhabar.com/festival/shardiya-navratri-2024-shardiya-navratri-starts-from-3rd-october-know-how-the-atmosphere-will-be-with-the-palanquin-ride/</link><pubDate>October 2, 2024, 10:10 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/10/्ुंनवु-300x169.webp</image><category>त्योहार</category><excerpt>पटना। शारदीय नवरात्रि की शुरुआत इस साल 3 अक्‍टूबर से हो रही है। इस बार मां दुर्गा की सवारी पालकी होने वाला है। मां भवानी हर बार अलग-अलग सवारी पर सवार होकर धरती लोक पहुंचती हैं। बता दें कि मां दुर्गा किस जिस भी वाहन से आती हैं इसका पूरा असर देश ...</excerpt><content>
&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;&lt;strong&gt;पटना।&lt;/strong&gt;  शारदीय नवरात्रि की शुरुआत इस साल 3 अक्‍टूबर से हो रही है। इस बार मां दुर्गा की सवारी पालकी होने वाला है। मां भवानी हर बार अलग-अलग सवारी पर सवार होकर धरती लोक पहुंचती हैं। बता दें कि मां दुर्गा किस जिस भी वाहन से आती हैं इसका पूरा असर देश और दुनिया पर देखने को मिल जाता है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt; सवारी का संकेत अच्छा नहीं&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां दुर्गा का पालकी पर सवार होकर आना देश व दुनिया की सुरक्षा और आर्थिक व्‍यवस्‍था के लिए शुभ संकेत नहीं है। तो आइए जानते हैं नवरात्रि कब से कब तक रहने वाला हैं और साथ ही मां भवानी के पालकी पर आने से किन सब बातों का अनुमान लगाया जा रहा है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;नवरात्रि कब से कब तक&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;इस साल शारदीय नवरात्रि 3 अक्‍टूबर से शुरू होगी और 11 अक्‍टूबर की महानवमी है। जबकि 12 अक्‍टूबर को दशहरा और मां दुर्गा का विर्सजन किया जाएगा। 3 अक्‍टूबर को कलश स्‍थापना होने के साथ प्रथम रूप मां शैलपुत्री की पूजा होगी।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;मां दुर्गा करेंगी पालकी की सवारी&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा किस वाहन पर सवार होती हैं यह इस बात पर निर्भर करता है कि नवरात्रि किस दिन शुरू होती है। जब नवरात्रि मंगलवार और शनिवार को शुरू होती है तो मां दुर्गा की सवारी अश्व यानी घोड़ा मानी जाती है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt; प्रथम दिन पर निर्भर है वाहन&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;यदि नवरात्रि गुरुवार और शुक्रवार को शुरू होती है तो मां दुर्गा को डोली और पालकी पर सवार माना जाता है। यदि मां दुर्गा रविवार और सोमवार को आती हैं तो उनका वाहन हाथी है। जो सबसे शुभ माना जाता है.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt; सवारी से ऐसा होगा असर&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;ज्योतिष और धर्म के जानकार लोगों का कहना है कि जब मां दुर्गा डोली या पालकी पर सवार होती हैं तो यह अच्छा संकेत नहीं होता है। पालकी पर मां दुर्गा का आगमन सभी के लिए चिंता बढ़ाने वाला माना जाता है। अर्थव्यवस्था के चौपट होने से लोगों का कारोबार मंदा पड़ने की आशंका है.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;महामारी फैलने का भी डर&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;माता की पालकी की सवारी के कारण देश-दुनिया में महामारी फैलने का भी डर है. लोगों को किसी बड़ी अप्राकृतिक घटना का सामना करना पड़ सकता है। स्वास्थ्य में भारी गिरावट आ सकती है। दूसरे देशों से हिंसा की ख़बरें आ सकती हैं.&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Shardiya Navratri 2024: कल से होगी नवरात्रि की शुरूआत, इस विधि से करें मां शैलपुत्री की आराधना</title><link>https://bihar.inkhabar.com/festival/shardiya-navratri-2024-navratri-will-start-from-tomorrow-worship-goddess-shailputri-with-this-method/</link><pubDate>October 2, 2024, 4:45 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/10/download-29-300x168.png</image><category>त्योहार</category><excerpt>पटना: शक्ति की उपासना का महापर्व शारदीय नवरात्र गुरुवार को आश्विन मास की शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि पर देवी शैलपुत्री की पूजा के साथ शुरू होने जा रहा है। कलश स्थापना करने के बाद मां शैलपुत्री की पूजा करते है. पूजा करने के दौरान पहने सफेद वस्त्र म...</excerpt><content>
&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;&lt;strong&gt;पटना:&lt;/strong&gt; शक्ति की उपासना का महापर्व शारदीय नवरात्र गुरुवार को आश्विन मास की शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि पर देवी शैलपुत्री की पूजा के साथ शुरू होने जा रहा है। कलश स्थापना करने के बाद मां शैलपुत्री की पूजा करते है.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;पूजा करने के दौरान पहने सफेद वस्त्र&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;मां शैलपुत्री के वस्त्रों की बात करें तो वह सफेद वस्त्र धारण करती हैं। मां के दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल सुशोभित है। मां के मस्तक पर चन्द्रमा की आभा है। साथ ही मां का वाहन नंदी है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;मां शैलपुत्री का स्वरूप सफेद&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;मां शैलपुत्री के स्वरूप का वर्णन करते हुए कहा जा सकता है कि इनका रंग सफेद है। माता ने श्वेत वस्त्र धारण किये हुए हैं। इनका वाहन वृषभ यानि बैल है। मां शैलपुत्री के दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल है। उनका यह रूप सौम्यता, करुणा, स्नेह और धैर्य का प्रतीक है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;ये है पूजा करने की विधि&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;-नवरात्रि के पहले दिन सुबह नहा-धोकर तैयार हो जाएं.&lt;/p&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;-इसके बाद देवी मां का ध्यान करते हुए कलश की स्थापना करें।&lt;/p&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;-कलश स्थापित करने के बाद मां शैलपुत्री का चित्र स्थापित करें.&lt;/p&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;-मां को कुमकुम और अक्षत चढ़ाएं.&lt;/p&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;-मां शैलपुत्री का ध्यान करें और उनके मंत्रों का जाप करें।&lt;/p&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;-उन्हें सफेद फूल अर्पित करें।&lt;/p&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;-अंत में मां शैलपुत्री की आरती करें और भोग लगाएं।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;पूजा करने का मंत्र&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;ऊँ देवी शैलपुत्र्यै नमः ।।&lt;br&gt;या देवी सर्वभूतेषु शैलपुत्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नम:।।&lt;br&gt;वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्। वृषारुढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्।।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Shardiya Navratri 2024: शारदीय नवरात्रि 3 अक्टूबर से शुरू, पालकी की सवारी से इस साल कैसा रहेगा माहौल</title><link>https://bihar.inkhabar.com/festival/shardiya-navratri-2024-shardiya-navratri-starts-from-october-3-how-will-be-the-atmosphere-this-year-with-palanquin-ride/</link><pubDate>September 15, 2024, 10:41 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/09/download-14-3-300x168.png</image><category>त्योहार</category><excerpt>पटना: शारदीय नवरात्रि की शुरुआत इस साल 3 अक्‍टूबर से हो रही है। इस बार मां दुर्गा की सवारी पालकी होने वाला है। मां भवानी हर बार अलग-अलग सवारी पर सवार होकर धरती लोक पहुंचती हैं। बता दें कि मां दुर्गा किस जिस भी वाहन से आती हैं इसका पूरा असर देश ...</excerpt><content>
&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;&lt;strong&gt;पटना: &lt;/strong&gt;शारदीय नवरात्रि की शुरुआत इस साल 3 अक्‍टूबर से हो रही है। इस बार मां दुर्गा की सवारी पालकी होने वाला है। मां भवानी हर बार अलग-अलग सवारी पर सवार होकर धरती लोक पहुंचती हैं। बता दें कि मां दुर्गा किस जिस भी वाहन से आती हैं इसका पूरा असर देश और दुनिया पर देखने को मिल जाता है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;पालकी की सवारी का संकेत अच्छा नहीं&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां दुर्गा का पालकी पर सवार होकर आना देश व दुनिया की सुरक्षा और आर्थिक व्‍यवस्‍था के लिए शुभ संकेत नहीं है। तो आइए जानते हैं नवरात्रि कब से कब तक रहने वाला हैं और साथ ही मां भवानी के पालकी पर आने से किन सब बातों का अनुमान लगाया जा रहा है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;नवरात्रि कब से कब तक&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;इस साल शारदीय नवरात्रि 3 अक्‍टूबर से शुरू होगी और 11 अक्‍टूबर की महानवमी है। जबकि 12 अक्‍टूबर को दशहरा और मां दुर्गा का विर्सजन किया जाएगा। 3 अक्‍टूबर को कलश स्‍थापना होने के साथ प्रथम रूप मां शैलपुत्री की पूजा होगी।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;मां दुर्गा करेंगी पालकी की सवारी&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा किस वाहन पर सवार होती हैं यह इस बात पर निर्भर करता है कि नवरात्रि किस दिन शुरू होती है। जब नवरात्रि मंगलवार और शनिवार को शुरू होती है तो मां दुर्गा की सवारी अश्व यानी घोड़ा मानी जाती है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;नवरात्रि की प्रथम दिन पर निर्भर करता है वाहन&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;यदि नवरात्रि गुरुवार और शुक्रवार को शुरू होती है तो मां दुर्गा को डोली और पालकी पर सवार माना जाता है। यदि मां दुर्गा रविवार और सोमवार को आती हैं तो उनका वाहन हाथी है। जो सबसे शुभ माना जाता है.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;पालकी की सवारी से ऐसा होगा असर&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;ज्योतिष और धर्म के जानकार लोगों का कहना है कि जब मां दुर्गा डोली या पालकी पर सवार होती हैं तो यह अच्छा संकेत नहीं होता है। पालकी पर मां दुर्गा का आगमन सभी के लिए चिंता बढ़ाने वाला माना जाता है। अर्थव्यवस्था के चौपट होने से लोगों का कारोबार मंदा पड़ने की आशंका है.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;महामारी फैलने का भी डर&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;माता की पालकी की सवारी के कारण देश-दुनिया में महामारी फैलने का भी डर है. लोगों को किसी बड़ी अप्राकृतिक घटना का सामना करना पड़ सकता है। स्वास्थ्य में भारी गिरावट आ सकती है। दूसरे देशों से हिंसा की ख़बरें आ सकती हैं.&lt;/p&gt;
</content></item></channel></rss>