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       <title>Today Sharad Purnima 2024 News | Latest Sharad Purnima 2024 News | Breaking Sharad Purnima 2024 News in English | Latest Sharad Purnima 2024 News Headlines - Inkhabar</title>
        <description>आज का Sharad Purnima 2024 समाचार:Today Sharad Purnima 2024 News ,Latest Sharad Purnima 2024 News,Aaj Ka Samachar ,Sharad Purnima 2024 समाचार ,Breaking Sharad Purnima 2024 News in Hindi, Latest News Headlines - Inkhabar</description>
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        </image><item><title>Kojagara: आज है कोजागरा लोकापर्व, व्रत का पालन कर पाए खुशहाल दाम्पत्य जीवन</title><link>https://bihar.inkhabar.com/festival/kojagara-today-is-kojagara-lokaparva-people-can-observe-the-fast-and-have-a-happy-married-life/</link><pubDate>October 16, 2024, 8:16 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/10/KOJA.webp</image><category>त्योहार</category><excerpt>पटना। शारदीय नवरात्रि के बाद नवविवाहिताओं के लिए कोजागरा का पर्व उतना ही महत्व रखता है, जितना करवा चौथ। कोजागरा लोकपर्व आज बिहार समेत पूरे उत्तर भारत में उत्साह से मनाया जा रहा है। कोजागरा की रात चांद की दूधिया रोशनी पृथ्वी पर पड़ती है, जिससे प...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना।&lt;/strong&gt; शारदीय नवरात्रि के बाद नवविवाहिताओं के लिए कोजागरा का पर्व उतना ही महत्व रखता है, जितना करवा चौथ। कोजागरा लोकपर्व आज बिहार समेत पूरे उत्तर भारत में उत्साह से मनाया जा रहा है। कोजागरा की रात चांद की दूधिया रोशनी पृथ्वी पर पड़ती है, जिससे पृथ्वी की खूबसूरती और निखर जाती है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;विवाह के पहले साल में पाएं समृद्धि&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;शास्त्रों के मुताबिक आश्विन पूर्णिमा की रात जगत की अधिष्ठात्री मां लक्ष्मी जब वैकुंठ धाम से पृथ्वी पर आती है कि उनके भक्त उनके आने की खुशी में जागरण कर रहे हैं या नहीं इसी कारण रात्रि जागरण को कोजागरा कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि आश्विन पूर्णिमा की रात चांद से अमृत बरसाता है। जो रात भर जागता है वहीं अमृत भी पाता है। उसके घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। खास तौर पर नव विवाहित व्यक्ति अपने विवाह के पहले साल में इस समृद्धि को प्राप्त कर सकते हैं।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;खीर का लगाया जाता है भोग&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;इस दिन वर अपने बड़े बुजुर्ग से आशिवार्द लेते हैं, जिसे मिथिला में चुमाउन कहा जाता है। ऐसा करने पर दंपती का दाम्पत्य जीवन सुखद बना रहता है। इसी कामना को लेकर यह लोकपर्व हर्षों-उल्लास के साथ मनाया जाता है। कोजागरा जिसे बंगाल में लखि पूजा के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन मुख्य रूप से लक्ष्मी के विभिन्न स्वरुपों की विधि-विधान से पूजा की जाती है। कमल के पन्ने जिसे पुरैन कहते हैं, उसपर कौमुदी के बीज भेंट का चावल और मखाने का खीर मां अन्नपूर्णा को भोग लगाई जाती है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;धन से ज्यादा अन्न का महत्व&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;कोजागरा के दिन धन से अधिक अन्न को महत्व दिया जाता है। लोग सोना और चांदी के सिक्के की पूजा कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं, लेकिन मुख्य रूप से दौलत का मतलब अन्न की समृद्धि से है न कि धन की समृद्धि से। ऐसा माना जाता है कि कोजागरा की रात अमृत वर्षा होती है, ऐसे में लोग आंगन या छत पर दही को पूरी रात रखते हैं और सुबह उसे अमृत मानकर खाते हैं।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Kojagara Puja 2024: मिथिला का लोकपर्व कोजागरा कल, जानें व्रत से जुड़ीं कुछ अहम बातें</title><link>https://bihar.inkhabar.com/festival/kojagara-puja-2024-mithilas-folk-festival-kojagara-tomorrow-know-some-important-things-related-to-the-fast/</link><pubDate>October 15, 2024, 11:53 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/10/download-14-1-300x200.png</image><category>त्योहार</category><excerpt>पटना: शरद पूर्णिमा कई मायनों में बहुत खास मानी जाती है। आश्विन माह के अंतिम दिन यानी पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहा जाता है, इस रात खीर बनाकर रात भर चांदनी में रखने की परंपरा है, कहा जाता है कि शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा 16 कलाओं से पूर्ण हो जाता है...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना&lt;/strong&gt;: शरद पूर्णिमा कई मायनों में बहुत खास मानी जाती है। आश्विन माह के अंतिम दिन यानी पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहा जाता है, इस रात खीर बनाकर रात भर चांदनी में रखने की परंपरा है, कहा जाता है कि शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा 16 कलाओं से पूर्ण हो जाता है। माना जाता है कि इस दौरान आसमान से अमृत की बारिश भी होती है। इसी दिन यानी कल बुधवार को मिथिला का लोकपर्व कोजागरा मनाया जाएगा।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;रात के समय खुले आसमान के निचे रखें खीर&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;ऐसा माना जाता है कि रात के समय खीर रखने से इसमें अमृत के गुण आ जाते हैं और इसे खाने से स्वास्थ्य अच्छा रहता है। दिवाली से पहले शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी की विशेष पूजा का महत्व होता है। इसे कोजागरा पूजा भी कहा जाता है. तो चलिए जानते है कोजागरा पूजा से जुड़ी कुछ अहम जानकारी।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;कल है कोजागरा पूजा&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;बता दें कि कोजागरा पूर्णिमा या कोजागरा पूजा 16 अक्टूबर को है। यह त्योहार मुख्य रूप से बिहार, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल और असम में अश्विन पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माना जाता है कि इस दिन देवी लक्ष्मी अपने भक्तों के घर आती हैं। देवी लक्ष्मी के आठ रूप हैं, इनमें से किसी भी रूप का ध्यान करने से देवी लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;कोजागरा पूजा शुभ मुहूर्त&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;अश्विन पूर्णिमा तिथि शुरू &amp;#8211; 16 अक्टूबर 2024, रात 08.40&lt;br&gt;अश्विन पूर्णिमा तिथि समाप्त &amp;#8211; 17 अक्टूबर 2024, शाम 04.55&lt;br&gt;कोजागरा पूजा निशिता काल &amp;#8211; रात 11:42 &amp;#8211; प्रात: 12.32, अक्टूबर 17&lt;br&gt;कोजागरा पूजा के दिन चन्द्रोदय &amp;#8211; शाम 05:05&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;क्यों की जाती है कोजागरा पूजा?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;कोजागरा पूजा का महत्व वालखिल्य ऋषि ने बताया है। कोजागरा पूजा की रात, देवी लक्ष्मी जागरण करने वाले भक्तों को वरदान देने के लिए पृथ्वी पर भ्रमण करने आती हैं। दरिद्रता से घिरे सभी भक्तों को यह व्रत अवश्य करना चाहिए।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;जानें पूजा करने का महत्व&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;बता दें कि, जो कोई भी इस दिन व्रत रखता है और रात में देवी लक्ष्मी की पूजा करता है, उसे न केवल इस जीवन में बल्कि अन्य जन्मों में भी समृद्धि, स्वास्थ्य और पुत्र-पौत्रों का सुख मिलता है। कोजागरा व्रत कथा के अनुसार, आश्विन पूर्णिमा की रात को देवी लक्ष्मी विश्व भ्रमण पर निकलती हैं और जो भी भक्त उन्हें जागते हुए मिलता है, देवी मां उसे धन-संपत्ति प्रदान करती हैं।&lt;/p&gt;
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