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       <title>Today SC News | Latest SC News | Breaking SC News in English | Latest SC News Headlines - Inkhabar</title>
        <description>आज का SC समाचार:Today SC News ,Latest SC News,Aaj Ka Samachar ,SC समाचार ,Breaking SC News in Hindi, Latest News Headlines - Inkhabar</description>
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        </image><item><title>जीतन राम मांझी ने किया आरक्षण कोटा में कोटा का समर्थन, कहा-आरक्षण में उपवर्गीकरण की जरुरत</title><link>https://bihar.inkhabar.com/politics/jitan-ram-manjhi-supported-quota-in-reservation-said-there-is-a-need-for-sub-classification-in-reservation/</link><pubDate>August 21, 2024, 6:05 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/08/जीतन-राम-मांझी.png</image><category>राजनीति</category><excerpt>पटना : जीतन राम मांझी मंगलवार को पटना के रवींद्र भवन में 18 एससी-एसटी जातियों के सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे. इस दौरान वो आरक्षण को लेकर अलग तेवर में दिखे। उन्होंने आरक्षण कोटा में कोटा का खुल कर समर्थन किया। मौके पर उन्होंने इस मुद्दे को लेकर...</excerpt><content>
&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;&lt;strong&gt;पटना &lt;/strong&gt;: जीतन राम मांझी मंगलवार को पटना के रवींद्र भवन में 18 एससी-एसटी जातियों के सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे. इस दौरान वो आरक्षण को लेकर अलग तेवर में दिखे। उन्होंने आरक्षण कोटा में कोटा का खुल कर समर्थन किया। मौके पर उन्होंने इस मुद्दे को लेकर कहा कि SC-ST की जो जातियां आज भी आरक्षण के लाभ से दूर हैं, उन्हें आरक्षण में उपवर्गीकरण करके इसका फायदा दिया जाना चाहिए। इस दौरान उन्होंने आगे कहा कि संपन्न दलित यह अफवाह फैला रहे हैं कि आरक्षण खत्म करने की साजिश रची जा रही है। आजादी के 78 वर्ष पूरे होने को है ऐसे में संपन्न दलित ही 95% नौकरी और तमाम सुविधाओं का फायदा उठा रहे हैं।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;सम्मेलन में इन 18 जातियों के लोग शामिल&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;बता दें कि जीतन राम मांझी पहले भी आरक्षण को लेकर सुर्ख़ियों में रहे हैं। इन दिनों भी वो आरक्षण के मुद्दे को लकेर चर्चा का विषय बने हुए हैं। इस बीच आरक्षण में बंटवारे को लेकर वो बड़ी तैयारी के मूड में हैं। इस दौरान उन्होंने कहा कि आरक्षण में जातियों के उपवर्गीकरण को जल्द से जल्द लागू कर सर्वोच्च न्यायालय की भावना का सम्मान किया जाना चाहिए। इसे लागू कराने के लिए दबाव बनाने के लिए गांधी मैदान में रैली की जायेगी. बता दें, 18 एससी-एसटी जातियों के सम्मेलन में मुसहर-भुइयां, रजवार, भोक्ता, घुमंतू, डोम, मेहतर तुरी आदि जातियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;भारत बंद को लेकर दिया बयान&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;भारत बंद को लेकर मांझी ने कहा कि यह गलत है। 21 अगस्त को भारत बंद नेतृत्वहीन और अनुचित है। इस बंद में 18 जातियों के लोग शामिल नहीं होंगे. उन्होंने आरक्षण की समीक्षा करने, 18 जातियों को कम से कम दस प्रतिशत आरक्षण देने, हरियाणा की तरह बिहार में भी आरक्षण का वर्गीकरण करने की मांग की. बिहार सरकार के मंत्री डॉ. संतोष कुमार सुमन ने कहा कि हम किसी का विरोध नहीं करते. लेकिन, वह वंचितों के लिए सुविधाओं की वकालत करते हैं। जीतन राम मांझी के नेतृत्व में वंचित वर्ग को आगे बढ़ना चाहिए.&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>पकड़ौआ विवाह पर पटना हाईकोर्ट के फैसले पर SC ने लगाई रोक</title><link>https://bihar.inkhabar.com/top-news/sc-stays-patna-high-courts-decision-on-pakdaua-marriage/</link><pubDate>January 5, 2024, 9:49 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/01/download-2024-01-05T150925.399-300x169.png</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>पटना। बिहार में पकड़ौआ विवाह को रद्द करने वाले पटना हाई कोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। दरअसल पति की याचिका पर सुनवाई करते हुए नवंबर 2023 में पटना हाई कोर्ट ने फैसले में अग्नि के समक्ष सात फेरे पूरे नहीं होने के आधार पर शादी को...</excerpt><content>
&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;&lt;strong&gt;पटना। &lt;/strong&gt;बिहार में पकड़ौआ विवाह को रद्द करने वाले पटना हाई कोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। दरअसल पति की याचिका पर सुनवाई करते हुए नवंबर 2023 में पटना हाई कोर्ट ने फैसले में अग्नि के समक्ष सात फेरे पूरे नहीं होने के आधार पर शादी को क़ानूनी रूप से अमान्य बताया था।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;SC ने जारी किया नोटिस&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;शुक्रवार को दुल्हन की अपील पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की हिमा कोहली और अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ ने पटना हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी। साथ ही इसपर नोटिस जारी किया है।दरअसल पटना हाईकोर्ट ने शादी रद्द करते हुए कहा था कि किसी महिला की मांग में जबरन सिंदूर लगाने से शादी नहीं हो जाती। हिंदू कानून के तहत शादी तब तक वैध नहीं है जब तक वह स्वैच्छिक न हो और &amp;#8216;सप्तपदी&amp;#8217; यानी सात फेरों की रस्म न हो।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;70 के दशक में बढ़ा था ट्रेंड&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;बता दें कि पटना हाईकोर्ट के जस्टिस पीबी बजंथ्री और जस्टिस अरुण कुमार झा ने 10 साल पहले हुए एक पकड़ौआ विवाह के मामले की सुनवाई करते हुए ये बातें कही थीं। साथ ही ऐसी शादी को अमान्य बताया था। नेशनल क्राइम ब्यूरो के मुताबिक साल 2021 में 450 लड़कों का अपहरण शादी के लिए किया गया। 1970 के दशक में बढ़ा ये ट्रेंड अब तक जारी है। पहले के समय में 90 फीसदी से ज्यादा शादी सफल हो जाती थी हालांकि अब शादी असफल होने का ग्राफ अचानक से बढ़ा है।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>यात्रियों के सामान की चोरी के लिए रेलवे नहीं है जिम्मेदार, SC ने सुनाया अहम फैसला</title><link>https://bihar.inkhabar.com/desh-pradesh/railway-is-not-responsible-for-the-theft-of-passengers-luggage-sc-gave-an-important-decision/</link><pubDate>June 16, 2023, 12:11 pm</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/06/download-2023-06-16T173859.735-300x169.png</image><category>देश-प्रदेश</category><excerpt>पटना। भारत में प्रतिदिन लाखों लोग ट्रेन से सफर करते हैं। भारतीय ट्रेनों में लोगों की काफी भीड़ रहती है। इस दौरान अक्सर लोग अपने सामान या पैसा चोरी की शिकायत करते हैं। इसी कड़ी में ट्रेन यात्रा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक महत्वपूर्ण फैस...</excerpt><content>
&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;&lt;strong&gt;पटना। &lt;/strong&gt;भारत में प्रतिदिन लाखों लोग ट्रेन से सफर करते हैं। भारतीय ट्रेनों में लोगों की काफी भीड़ रहती है। इस दौरान अक्सर लोग अपने सामान या पैसा चोरी की शिकायत करते हैं। इसी कड़ी में ट्रेन यात्रा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक महत्वपूर्ण फैसला दिया है। SC ने कहा है कि यदि यात्रा के दौरान यात्री का पैसा या सामान चोरी हो जाता है तो इसे रेलवे की सेवाओं में कमी के रूप में नहीं देखा जायेगा।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;अपने सामान की सुरक्षा खुद करें&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;जस्टिस विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली बेंच ने उपभोक्ता फोरम के फैसले को रद्द करते हुए कहा अगर यात्री अपने सामान की सुरक्षा खुद नहीं कर पाता है तो इसके लिए रेलवे को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। कोर्ट ने कहा यात्री के पास से एक लाख रुपए चोरी होना रेलवे की ओर से सेवा में कमी नहीं कही जा सकती है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;जानिए क्या है मामला&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;दरअसल पूरा मामला 2005 का है। एक यात्री एक लाख रुपए अपने साथ लेकर यात्रा कर रहा था। ट्रेन यात्रा के दौरान यात्री के पास से एक लाख की नकदी की चोरी हो गई। इसके खिलाफ उसने उपभोक्ता फोरम में शिकायत की थी। जिसपर सुनवाई करते हुए उपभोक्ता फोरम ने यात्री को एक लाख रुपए क्षतिपूर्ति के रूप मे रेलवे द्वारा दिए जाने का का फैसला सुनाया था।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;SC ने जताया ताज्जुब&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम समझ नहीं पा रहे हैं कि जब यात्री अपनी चीजों की हिफाजत खुद नहीं कर पा रहे हैं तो ऐसे में चोरी होने पर रेलवे की ओर से सेवाओं में कमी कैसे कही जा सकती है। मालूम हो कि कपड़ा व्यापारी सुरेंद्र भोला अप्रैल 2005 को काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस ट्रेन से नई दिल्ली जा रहे थे। उन्होंने अपने कमर से 1 लाख रुपये बांध रखे थे। अगली सुबह जब वो उठे तो किसी ने 1 लाख रुपये चोरी कर ली थी।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>बिहार: आनंद मोहन की रिहाई पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, क्या फिर जाएंगे जेल?  </title><link>https://bihar.inkhabar.com/politics/supreme-court-hearing-on-anand-mohan-release-todaywill-he-go-to-jail-again-prince-singh-inkhabar/</link><pubDate>May 8, 2023, 4:32 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/05/ANAND-MOHAN-300x169.png</image><category>राजनीति</category><excerpt>पटना : बिहार के बाहुबली नेता और पूर्व सांसद आनंद मोहन की रिहाई के मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होने वाली है. जी. कृष्णैया की पत्नी उमा देवी ने आनंद मोहन की रिहाई के विरोध में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है. ये सुनवाई जस्टिस सूर्यक...</excerpt><content>
&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;&lt;strong&gt;पटना &lt;/strong&gt;: बिहार के बाहुबली नेता और पूर्व सांसद आनंद मोहन की रिहाई के मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होने वाली है. जी. कृष्णैया की पत्नी उमा देवी ने आनंद मोहन की रिहाई के विरोध में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है. ये सुनवाई जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जे.के. माहेश्वरी की बेंच करने वाली है. &lt;/p&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;&lt;strong&gt;क्या फिर जाएंगे जेल ?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;गोपालगंज के डीएम जी. कृष्णैया की हत्या के मामले में आनंद मोहन को उम्रकैद की सजा मिली थी, लेकिन जेल नियमों में बदलाव कर बिहार सरकार ने उन्हें रिहा कर दिया, जिस पर नीतीश सरकार की खूब आलोचना भी हुई. इसके साथ ही जी. कृष्णैया की बेटी और पत्नी ने नीतीश कुमार से आग्रह किया कि वो इस फैसले पर पुर्नविचार करें. उन्होंने कहा था कि अगर नीतीश सरकार अपने फैसले को नहीं बदलती है तो वो सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;&lt;strong&gt;1994 की है घटना&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;5 दिसंबर 1994 को मुजफ्फरपुर में गोपालगंज के डीएम जी कृष्णैया की हत्या हुई थी. इस मामले में आनंद मोहन सिंह को दोषी पाया गया था. जी. कृष्णैया की हत्या के मामले में आनंद मोहन को पहले फांसी की सजा हुई थी, लेकिन बाद में उसे उम्रकैद की सजा में तब्दील कर दिया गया था.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;&lt;strong&gt;रिहाई के लिए बदला नियम&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;साल 2012 में बिहार कारा अधिनियम में कुछ बदलाव किए गए थे, जिसके अनुसार अगर कोई व्यक्ति किसी सरकारी अधिकारी की हत्या में दोषी पाया जाता है तो सजा पूरी होने के बाद भी उसकी रिहाई का प्रवाधान नहीं था, लेकिन अप्रैल 2023 में नीतीश सरकार ने कारा अधिनियम में बदलाव करते हुए आनंद मोहन के साथ 26 अन्य कैदियों को रिहा कर दिया था.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
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