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       <title>Today Sawan News | Latest Sawan News | Breaking Sawan News in English | Latest Sawan News Headlines - Inkhabar</title>
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        </image><item><title>Sawan Vinayak Chaturthi 2024: सावन मास की विनायक चतुर्थी व्रत कल, जानें शुभ मुहूर्त</title><link>https://bihar.inkhabar.com/festival/sawan-vinayak-chaturthi-2024-vinayak-chaturthi-fast-of-sawan-month-tomorrow-know-the-auspicious-time/</link><pubDate>August 7, 2024, 9:16 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/08/download-12.png</image><category>त्योहार</category><excerpt>पटना : कल 8 अगस्त दिन गुरुवार को सावन माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि है. इस दिन लोग विनायक चतुर्थी का व्रत रखते है. सभी महीने की चतुर्थी तिथि भगवान गणपति को समर्पित है. भक्त इस दिन विनायक चतुर्थी का व्रत रखकर विघ्नहर्ता भगवान गणेश की पूजा-अर...</excerpt><content>
&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;&lt;strong&gt;पटना &lt;/strong&gt;: कल 8 अगस्त दिन गुरुवार को सावन माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि है. इस दिन लोग विनायक चतुर्थी का व्रत रखते है. सभी महीने की चतुर्थी तिथि भगवान गणपति को समर्पित है. भक्त इस दिन विनायक चतुर्थी का व्रत रखकर विघ्नहर्ता भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करते है. इस वर्ष सावन विनायक चतुर्थी के व्रत के दिन शिव योग और रवि योग का विशेष संयोग बन रहा है. इसके साथ-साथ इस तिथि पर उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र का भी संयोग है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;विनायक चतुर्थी पर चंद्रमा को न देखें&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;विनायक चतुर्थी व्रत के दिन चंद्रमा को देखना शुभ नहीं माना जाता है. माना जाता है कि विनायक चतुर्थी के अवसर पर चंद्रमा देखने से जातक पर गलत आरोप लगने शुरू हो जाते हैं. वह झूठे आरोपों का हिस्सा बन जाता है. इसलिए विनायक चतुर्थी के अवसर पर चंद्रमा नहीं देखना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चतुर्थी व्रत करने से जीवन के सभी संकट समाप्त हो जाते हैं और जीवन में खुशिया ही खुशिया आती है. तो चलिए जानते हैं सावन की विनायक चतुर्थी व्रत से जुड़ी अहम जानकारी।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;8 अगस्त को रखा जाएगा व्रत&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;पंचांग के मुताबिक, श्रावण माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरुआत 7 अगस्त दिन बुधवार की रात 10: 05 बजे पर होगी. वहीं श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि की समापन 8 अगस्त दिन गुरुवार की देर रात 12: 36 बजे पर होगी. वहीं उदयातिथि के मुताबिक, सावन की विनायक चतुर्थी 8 अगस्त को मनाई जाएगी। 8 अगस्त दिन गुरुवार को चतुर्थी का व्रत रखेंगे।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>MadhuShravani: मिथिलांचल की अनोखी परंपरा, पहले सावन में नई दुल्हन को करना होगा मधुश्रावणी का उपवास</title><link>https://bihar.inkhabar.com/culture/madhushravani-a-unique-tradition-of-mithila-the-new-bride-has-to-fast-on-madhushravani-in-the-first-sawan/</link><pubDate>July 6, 2024, 7:58 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/07/MADU-300x169.png</image><category>संस्कृति</category><excerpt>पटना। मिथिलांचल के लोकापर्व में सुहागिन महिलाओं द्वारा एक अनोखा पर्व मनाया जाता है जिसे मधुश्रावणी व्रत कहा जाता है। मधुश्रावणी पर्व श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि सोमवार से शुरू हो रहा है। यह पर्व 18 से 31 जुलाई तक चलेगा। मधुश्रावणी के...</excerpt><content>
&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;&lt;strong&gt;पटना।&lt;/strong&gt; मिथिलांचल के लोकापर्व में सुहागिन महिलाओं द्वारा एक अनोखा पर्व मनाया जाता है जिसे मधुश्रावणी व्रत कहा जाता है। मधुश्रावणी पर्व श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि सोमवार से शुरू हो रहा है। यह पर्व 18 से 31 जुलाई तक चलेगा।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;मधुश्रावणी के व्रत के साथ अग्निपरीक्षा भी देनी होती है&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;इस पर्व में मिथिला की नई दुल्हनों को अपने पति की लंबी उम्र के लिए उपवास करना होता है। यह उपवास माता गौरी और भगवान भोलेनाथ को समर्पित है। इस दिन भगवान शंकर और माता गौरी की पूजा- अर्चना की जाती है। पूरे 14 दिन चलने वाले इस व्रत में बिना नमक का भोजन खाया जाता है। इस पूजा में पंडितों की भूमिका भी महिलाएं ही अदा करती हैं। इस अनुष्ठान के पहले और अंतिम चरण में बड़े विधि-विधान से साथ पूजा की जाती है। ऐसी धार्मिक मान्यता है कि इस दौरान माता पार्वती की पूजा को विशेष महत्व दिया जाता है। इसके साथ ही इस पर्व की अनोखी परंपरा भी मिथिला में देखने को मिलती है। नई दुल्हन जो पहले सावन में पति के लिए उपवास करती है वे उनकी अग्निपरीक्षा भी लेती हैं।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;अग्निपरीक्षा में दुल्हन का जलाया जाता है घुटना&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;बिहार के मिथिलांचल में प्यार का पता लगाने के लिए एक अनोखी परंपरा का पालन किया जाता है जिसमें महिला को अग्निपरीक्षा देनी होती हैं। जिसमे महिला का घुटना जलाया जाता है। पति अपनी पत्नी के घुटने पर पूजा घर में रखे गए दीपक की बाती से प्यार के साथ उसका घुटना जलाता है। इससे दोनों का करुण सार देखने को मिलता है।जब महिला को जलाया जात है। वह उफ्फ तक नहीं करती। ऐसा माना जाता है कि इस परीक्षा में विवाहिता के घुटने में जितना बड़ा फफोला पड़ता है। पति-पत्नी का प्यार उतना ही गहरा होता है।&lt;/p&gt;
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