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       <title>Today religion news News | Latest religion news News | Breaking religion news News in English | Latest religion news News Headlines - Inkhabar</title>
        <description>आज का religion news समाचार:Today religion news News ,Latest religion news News,Aaj Ka Samachar ,religion news समाचार ,Breaking religion news News in Hindi, Latest News Headlines - Inkhabar</description>
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        </image><item><title>देवी दुर्गा कहां से आईं और उन्होंने महिषासुर का वध कैसे किया?</title><link>https://bihar.inkhabar.com/festival/where-did-goddess-durga-come-from-and-how-did-she-kill-mahishasura/</link><pubDate>October 6, 2024, 9:24 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/10/download-25-1.png</image><category>त्योहार</category><excerpt>पटना: नवरात्रि का आज चौथा दिन है, इस दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। ऐसे में नवरात्रि के नौ दिनों में मां भवानी के नौ रूपों की पूजा अर्चना की जाती है। मां दुर्गा ने कई दैत्यों और राक्षसों का अंत किया था। सभी देवता महिषासुर का अंत करने के ...</excerpt><content>
&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;&lt;strong&gt;पटना: &lt;/strong&gt;नवरात्रि का आज चौथा दिन है, इस दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। ऐसे में नवरात्रि के नौ दिनों में मां भवानी के नौ रूपों की पूजा अर्चना की जाती है। मां दुर्गा ने कई दैत्यों और राक्षसों का अंत किया था। सभी देवता महिषासुर का अंत करने के लिए व्याकुल थे। तब सभी देवता भगवान शंकर और विष्णु के पास पहुंचे। उसके बाद मां दुर्गा सभी देवताओं के तेज के साथ प्रकट हुईं, तो आइए जानते हैं कि देवी दुर्गा कैसे प्रकट हुईं और उन्होंने महिषासुर का अंत कैसे किया?&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;कथाओं के अनुसार&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;पौराणिक काल में महिषासुर नाम का एक राक्षस हुआ करता था। जब वह बड़ा हुआ तो राक्षसों का सम्राट बन गया। देवताओं से वरदान पाकर वह अत्यंत शक्तिशाली हो गया। एक दिन उसने इंद्रलोक पर आक्रमण कर दिया और इंद्र सहित देवताओं को देवलोक से बाहर निकाल दिया।&lt;/p&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;देवताओं के इंद्रलोक छोड़ने के बाद महिषासुर देवलोक से ही तीनों लोकों पर शासन करने लगा। तब एक दिन सभी देवता ब्रह्माजी के पास पहुंचे और उन्हें महिषासुर के अत्याचारों के बारे में बताया। देवताओं की पीड़ा सुनकर भगवान ब्रह्मा सभी को भगवान शिव और विष्णु के पास ले गए।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;कैसे आईं मां दुर्गा?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;कथाओं के अनुसार, ब्रह्माजी भगवान शिव और विष्णु के पास पहुंचे और महिषासुर द्वारा देवताओं पर किए जा रहे अत्याचारों के बारे में बताया। ब्रह्मा जी की बात सुनकर भगवान विष्णु और शिव क्रोधित हो गए। उन दोनों को क्रोधित देखकर सभी देवता भी क्रोधित हो गए। क्रोध में भगवान विष्णु के मुख से अग्नि निकली.&lt;/p&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;उसके बाद भगवान शिव सहित सभी देवताओं के शरीर से एक तेज निकला। सभी देवताओं का तेज एक स्थान पर एकत्रित हुआ और उससे अग्नि के समान एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई। इस खूबसूरत महिला को मां दुर्गा कहा गया। तब सभी देवताओं ने मां दुर्गा को अस्त्र-शस्त्र दिए। उसके बाद सभी देवताओं ने मिलकर माता की स्तुति की। जिसके बाद मां दुर्गा जोर से गरजने लगी।&lt;/p&gt;



&lt;figure class=&quot;wp-block-image size-full is-resized&quot;&gt;&lt;img loading=&quot;lazy&quot; decoding=&quot;async&quot; width=&quot;246&quot; height=&quot;205&quot; src=&quot;https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/10/image-7.png&quot; alt=&quot;&quot; class=&quot;wp-image-12289&quot; style=&quot;width:526px;height:auto&quot; srcset=&quot;https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/10/image-7.png 246w, https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/10/image-7-150x125.png 150w&quot; sizes=&quot;auto, (max-width: 246px) 100vw, 246px&quot; /&gt;&lt;/figure&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;माता दुर्गा ने किया सेनापतियों का वध&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;उधर, देवलोक में बैठे राक्षस समझ गए कि यह युद्ध का आह्वान है। उन सभी ने अपने हथियार उठा लिए। तब अपने राजा महिषासुर का आदेश मिलते ही सभी राक्षस उस हुंकार की ओर दौड़ पड़े। जैसे ही वह वहां पहुंचा और देवी दुर्गा को देखा, महिषासुर के सेनापति चिक्षुर ने देवी पर हमला कर दिया।&lt;/p&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;देवी दुर्गा ने कुछ ही समय में सभी सैनिकों को नष्ट कर दिया। सैनिकों के रक्त से उस युद्धभूमि में अनेक रक्त कुण्ड बन गए। सैनिकों के मरते ही सेनापति चिक्षुरा क्रोध से लाल हो गये और मां दुर्गा पर बाणों से आक्रमण करने लगे। देवी दुर्गा ने भी अपने बाणों से उसके सभी बाणों को काट डाला। इसके बाद चिक्षुरा ने देवी पर शूल से प्रहार किया। शूल बीच में ही टुकड़े टुकड़े हो गए। उसके बाद मां दुर्गा ने अपने शूल से चिक्षुर का वध कर दिया।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;महिषासुर का खात्मा&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;जैसे ही सेनापति चिक्षुरा की मृत्यु हुई, महिषासुर देवी की ओर झपटा। उसने भैंसे का रूप धारण कर लिया और माता के वाहन सिंह पर भी आक्रमण कर दिया। यह देखकर देवी दुर्गा क्रोधित हो गईं। तब मां दुर्गा ने महिषासुर को पाश से बांध दिया.&lt;/p&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;पाश से बंधते ही महिषासुर ने सिंह का रूप धारण कर लिया। इसी प्रकार देवी दुर्गा के आक्रमण से बचने के लिए कभी उन्होंने मनुष्य का रूप धारण किया तो कभी हाथी का रूप धारण किया। जैसे ही उसने हाथी का रूप धारण किया, देवी दुर्गा ने उसकी सूंड काट दी। सूंड कटते ही महिषासुर ने फिर से भैंसे का रूप धारण कर लिया।&lt;/p&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;इस बार मां दुर्गा ने उसे अपने पैर से दबा दिया. उसे अपने पैरों के नीचे दबाते ही महिषासुर का ऊपरी भाग मनुष्य का हो गया। इसके बाद मां ने त्रिशूल से उनकी हत्या कर दी। महिषासुर के मरते ही सभी देवता देवी भगवती की स्तुति करने लगे और उन पर पुष्प वर्षा करने लगे। तब मां दुर्गा ने देवताओं को आशीर्वाद दिया और अंतर्ध्यान हो गईं।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Mahalaya: आज है महालया, धरती पर भक्तों को आशीर्वाद देने आएंगी मां दुर्गा</title><link>https://bihar.inkhabar.com/festival/mahalaya-today-is-mahalaya-maa-durga-will-come-to-earth-to-bless-the-devotees/</link><pubDate>October 2, 2024, 5:55 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/10/rtyu-300x169.webp</image><category>त्योहार</category><excerpt>पटना। आज महालया है। आज के दिन दुर्गा मां धरती पर आएंगी। मां के लिए चंडी पाठ किया जाएगा। लोग अपने पितरों को आखिरी विदाई देंगे। साथ ही उनसे पूरे परिवार की रक्षा के लिए कामना करेंगे। वहीं दूसरी ओर माता के आगमन की खुशी मनाई जाएगी। इस मौके पर बंगाली...</excerpt><content>
&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;&lt;strong&gt;पटना।&lt;/strong&gt; आज महालया है। आज के दिन दुर्गा मां धरती पर आएंगी। मां के लिए चंडी पाठ किया जाएगा। लोग अपने पितरों को आखिरी विदाई देंगे। साथ ही उनसे पूरे परिवार की रक्षा के लिए कामना करेंगे। वहीं दूसरी ओर माता के आगमन की खुशी मनाई जाएगी। इस मौके पर बंगाली पंडालों में दुर्गा पूजा की तैयारी शुरु हो जाएगी।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;देवी शैलपुत्री की पूजा&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;मंडपों में महिषासुर मर्दिनी का मंचन होगा। बांग्ला मंडपों में इसकी रिकॉर्डिंग को बजाया जाएगा। वहीं गुरुवार यानी कल से शारदीय नवरात्र शुरु हो रहे है। भक्तों में नवरात्र को लेकर खासा उत्साह दिखाई दे रहा है। सभी मां की आराधना की तैयारी में जुट गये हैं। 3 अक्तूबर को कलश स्थापित किया जाएगा। पहले दिन मां दुर्गा के पहले स्वरूप शैलपुत्री की पूजा की जाएगी। देवी को चंदन, त्रिफला और कनगी चढ़ाने का महत्व है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;कलश का शुभ मुहूर्त&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;गुरुवार सुबह 6:06 बजे से मां की आराधना का शुभ मुहूर्त आरंभ होगा। जो रात 1.11 बजे तक समाप्त हो जाएगा। जिस कारण भक्तों को देवी मां की पूजा-अर्चना के लिए काफी समय मिलेगा। दोपहर 3:17 बजे तक कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त माना जा रहा है। पंडित कौशल कुमार मिश्र ने कहा कि नवरात्र के पहले दिन दोपहर 3.18 बजे तक हस्ता नक्षत्र का योग है। इसके बाद चित्रा लग जायेगा, जिसे सनातन धर्म में काफी शुभ माना जा रहा है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;माता का आगमन डोली पर&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;इसके अतिरिक्त ऐंद्र योग होगा। जो इस दिन को और शुभ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। इस नवरात्र में चतुर्थी तिथि की वृद्धि हुई। वाराणसी पंचांग के मुताबिक इस नवरात्र में मां का आगमन दोला (डोली) और गमन चरणायुद्ध (मुर्गा) पर होगा। मां के आने और जाने का मुहूर्त शुभ नहीं है। नवरात्र के पहले दिन अभिजीत मुहूर्त का समय दिन के 11.36 से 12.22 बजे तक है। वहीं बांग्ला पंचांग की माने तो माता का आगमन डोली पर हो रहा है। वहीं गमन घटक है। इसका फल छत्रभंग है।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>शिव भक्त क्यों करते हैं कांवड़ यात्रा, जानें इसके लाभ और महत्व</title><link>https://bihar.inkhabar.com/festival/why-do-shiva-devotees-do-kanwar-yatra-know-its-benefits-and-importance/</link><pubDate>July 21, 2024, 8:04 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/07/download-5-6-300x149.png</image><category>त्योहार</category><excerpt>पटना : सावन माह की शुरुआत होते ही सभी शिव मंदिरों में भक्तों की भीड़ शिव की पूजा आराधना करने के लिए उमड़ पड़ती है. खासकर सावन के माह में कांवड़ यात्रा का बेहद खास महत्व बताया गया है. बता दें कि कांवड़ यात्रा के दौरान शिव भक्त किसी भी पवित्र नदी से ...</excerpt><content>
&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;&lt;strong&gt;पटना &lt;/strong&gt;: सावन माह की शुरुआत होते ही सभी शिव मंदिरों में भक्तों की भीड़ शिव की पूजा आराधना करने के लिए उमड़ पड़ती है. खासकर सावन के माह में कांवड़ यात्रा का बेहद खास महत्व बताया गया है. बता दें कि कांवड़ यात्रा के दौरान शिव भक्त किसी भी पवित्र नदी से जल भरकर पैदल मंदिर पहुंचते हैं. इस दौरान भक्त भगवान शिव को जल चढ़ाते हैं. माना जाता है कि सावन में जो भी भक्त भगवान शिव के ऊपर जलाभिषेक करते हैं. उनकी सभी मनोकामनाएं भगवान भोलेनाथ अवश्य पूर्ण करते हैं. तो ऐसे में चलिए जानते हैं सावन में कांवड़ यात्रा का क्या महत्व है?&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;सोमवार से सावन की शुरुआत&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;सावन माह को लेकर बहुत सारे ज्योतिषाचार्य का कहना है कि इस साल सावन में बहुत सालों के बाद दुर्लभ संयोग बना है. 22 जुलाई, सोमवार से सावन माह की शुरुआत हो रही है. वहीं सावन का अंत भी सोमवार दिन से ही हो रहा है. सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित है। सावन माह भोलेनाथ को बेहद प्रिय है. माना जाता है कि इस माह में कांवड़ यात्रा कर भगवान भोलेनाथ के ऊपर जल चढाने से भक्तों के सभी कष्ट समाप्त हो जाते हैं.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;सावन में ही भगवान शिव ने विष पिया&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;वहीं कुछ धार्मिक ग्रंथों में तो यह भी बताया गया है कि सावन के महीने में ही समुद्र मंथन के दौरान निकले विष को भगवान भोलेनाथ ने अपने कंठ में रख लिया था. जिस वजह से उनका शरीर अधिक गर्म होकर नीले रंग का हो गया। तभी सभी देवताओं ने मन बनाया कि गंगा से जल लेकर भगवान शंकर के ऊपर चढ़ाया जाए, जिससे भगवान शिव बेहद खुश हो गए.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;कुछ ग्रंथों की मानें तो परशुराम ने की सबसे पहले शुरुआत&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;मान्यता है कि सावन में कांवड़ यात्रा की शुरुआत सबसे पहले महान शिव भक्त भगवान परशुराम ने की थी। तभी से ऋषि-मुनियों की कांवड़ यात्रा शुरू हुई। जो भी भक्त सावन के महीने में कांवड़ यात्रा करता है और भगवान भोलेनाथ के दर पर उन्हें जल चढ़ाता है, उसकी मनोकामनाएं अवश्य पूरी होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि बढ़ती है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;कुछ मान्यताओं के अनुसार, प्रभु राम ने शुरू की कांवड़ यात्रा&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;कुछ पौराणिक धार्मिक ग्रंथों के मुताबिक, सबसे पहले कांवड़ यात्रा की शुरुआत भगवान राम ने की थी। प्रभु राम ने बिहार राज्य के सुल्तानगंज से लाए गंगाजल से बाबा धाम के शिवलिंग का जलाभिषेक किया था। तभी से ही कांवड़ यात्रा की शुरुआत मानी जाती है।&lt;/p&gt;
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