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       <title>Today Radha Ashtami 2024 Date News | Latest Radha Ashtami 2024 Date News | Breaking Radha Ashtami 2024 Date News in English | Latest Radha Ashtami 2024 Date News Headlines - Inkhabar</title>
        <description>आज का Radha Ashtami 2024 Date समाचार:Today Radha Ashtami 2024 Date News ,Latest Radha Ashtami 2024 Date News,Aaj Ka Samachar ,Radha Ashtami 2024 Date समाचार ,Breaking Radha Ashtami 2024 Date News in Hindi, Latest News Headlines - Inkhabar</description>
        <link>https://www.inkhabar.com/tag/radha-ashtami-2024-date</link>
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        </image><item><title>Radha Ashtami 2024:  राधा अष्टमी पर लाडली जी को बेहद प्रिय है ये 5 चीजें, जान लें झटपट सभी के नाम</title><link>https://bihar.inkhabar.com/festival/radha-ashtami-radha-ashtami-festival-on-11th-september-know-information-related-to-puja-2/</link><pubDate>September 10, 2024, 11:35 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/09/download-10.png</image><category>त्योहार</category><excerpt>पटना: हिन्दू धर्म में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मदिवस को जन्माष्टमी के तौर पर मनाया जाता है, तो वहीं राधा जी का जिस दिन जन्म हुआ था, उस तिथि को हम भक्त राधा अष्टमी पर्व के रूप में मनाते आ रहे हैं। यह त्योहार भादो मास में शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि क...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना&lt;/strong&gt;: हिन्दू धर्म में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मदिवस को जन्माष्टमी के तौर पर मनाया जाता है, तो वहीं राधा जी का जिस दिन जन्म हुआ था, उस तिथि को हम भक्त राधा अष्टमी पर्व के रूप में मनाते आ रहे हैं। यह त्योहार भादो मास में शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;11 सितंबर को राधा अष्टमी&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;इस पर्व को देश के सभी राधाकृष्ण मंदिरों में बहुत ही हर्ष उल्लास के साथ मनाया जाता है, लेकिन बरसाना, वृंदावन और रावल में इस त्योहार को विशेष तौर पर मनाया जाता है। त्योहार के मौके पर भक्तों की भारी भीड़ जुटती है। इस वर्ष 11 सितंबर को यह त्योहार मनाया जाएगा। ऐसे में चलिए जानते है व्रत के दिन किशोरी जी को कौन सी चीजें बेहद प्रिय है, जिसे चढ़ाने से भक्तों को जीवन में सुख शांति आती है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;किशोरी जी के कई नाम&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;राधा जी के अनेक नाम हैं। उन्हें किशोरी जी, लाडली जी, राधा रानी, ऊंची अटारी वाली, कृष्णप्रिया, श्री वृषभानु दुलारी आदि अनेक नामों से जाना जाता है। राधा जी स्वयं प्रेम का प्रतीक मानी जाती हैं। ऐसा माना जाता है कि जो व्यक्ति सच्चे मन से उनकी पूजा करता है, उसका जीवन प्रेम और खुशियों से भर जाता है। राधा रानी की पूजा और प्रार्थना करने से व्यक्ति का आत्म-ज्ञान, भक्ति और प्रेम बढ़ता है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;पूजा के दौरान चढ़ाएं ये वस्तु&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;बांसुरी: राधा जी को भगवान कृष्ण की आह्लादिनी (लोगों को खुश करने वाली) कहा जाता है। इसके बाद भगवान कृष्ण की दूसरी सबसे प्रिय चीज़ बांसुरी है। ऐसा कहा जाता है कि जब भी कृष्ण बांसुरी बजाते थे, तो राधा रानी की आवाज़ उसकी धुन के रूप में प्रसारित होती थी। मान्यता है कि राधा रानी को बांसुरी अर्पित करने से वे शीघ्र प्रसन्न होती हैं और मनोकामनाएं पूरी करती हैं।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;रंग-बिरंगे फूल और माला चढ़ाएं&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;व्रत वाले दिन लाडली जी को रंग-बिरंगे फूल का माला तैयार कर उन्हे पहनाएं। इस उपाय को खास उपाय बताया गया है, क्योंकि राधा रानी को सुंदर, ताजे और रंग-बिरंगे फूल बेहद प्रिय हैं। राधाष्टमी के अवसर पर किशोरी जी को गुलाब, मोगरा, और चंपा के फूल अवश्य चढ़ाएं। इन फूलों से राधा रानी की मूर्ति को सजाएं और उनकी पूजा अर्चना करें। यह एक आसान लेकिन बहुत प्रभावी उपाय है, जिससे आपके जीवन में किशोरी जी की कृपा हमेशा बरसती है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;किशोरी जी को जरूर चढ़ाएं चूड़ा&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;बता दें कि किशोरी जी बेहद दयालु हैं। उनेके भीतर इतनी दया की भावना है कि वे अपने भक्तों को कभी भी निराश नहीं देख पाती हैं। उन्हें खुश करने के लिए राधाष्टमी के अवसर पर श्री राधा जी को हाथ में पहनने वाले चूड़ा जरूर चढ़ाएं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान कृष्ण को राधा जी के हाथ में कड़े बेहद प्रिय है ।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;घी का दीपक जलाएं&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;राधा अष्टमी की पूजा के दौरान गाय के घी का दीपक जलाने का भी बहुत महत्व है। इस दिन घी का दीपक जलाने और राधा रानी की आरती करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। ऐसा माना जाता है कि इससे राधा रानी का आशीर्वाद मिलता है और घर में सुख-शांति बनी रहती है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;मोर पंख चढ़ाएं&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;मोर पंख भगवान श्रीकृष्ण को अत्यंत प्रिय वस्तुओं में से एक है। मोर पंख उनके प्रेम और भक्ति का प्रतीक है। इसलिए लाड़ली जी को भी यह बहुत पसंद है। साथ ही मोर पंख को सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इसे पूजा में शामिल करने से भक्तों के जीवन में सुख-समृद्धि आती है। राधा अष्टमी के दिन इसे अर्पित करने से जीवन में खुशियां ही खुशियां आती है।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Radha Ashtami: 11 सितंबर को राधा अष्टमी का त्योहार, जान लें पूजा से जुड़ी जानकारी</title><link>https://bihar.inkhabar.com/festival/radha-ashtami-radha-ashtami-festival-on-11th-september-know-information-related-to-puja/</link><pubDate>September 10, 2024, 11:32 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/09/download-9-3-300x225.png</image><category>त्योहार</category><excerpt>पटना: सनातन धर्म में सभी त्योहार को बेहद ही महत्वपूर्ण माना गया है। इसी प्रकार श्री राधा रानी को समर्पित राधा अष्टमी के व्रत का अलग महत्व है। यह त्योहार जन्माष्टमी के बाद मनाया जाता है। इस अवसर पर भक्त उपवास रखते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसा...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना:&lt;/strong&gt; सनातन धर्म में सभी त्योहार को बेहद ही महत्वपूर्ण माना गया है। इसी प्रकार श्री राधा रानी को समर्पित राधा अष्टमी के व्रत का अलग महत्व है। यह त्योहार जन्माष्टमी के बाद मनाया जाता है। इस अवसर पर भक्त उपवास रखते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस नियम का पालन करने से किशोरी जी प्रसन्न होती हैं। राधा अष्टमी को श्री राधा रानी का जन्म हुआ था,  इस  वजह से इस दिन को अवतरण दिवस के रूप में मनाया जाता है।  तो  राधा अष्टमी का व्रत रखने से पहले जान लें पूजा विधि एवं शुभ मुहूर्त।    &lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;ये है शुभ मुहूर्त&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 10 सितंबर को रात 11 बजकर 11 मिनट पर शुरू होगी। वहीं, यह तिथि 11 सितंबर को रात 11 बजकर 46 मिनट पर समाप्त होगी। सनातन धर्म में तिथि की गणना सूर्योदय से की जाती है। ऐसे में राधा अष्टमी 11 सितंबर को मनाई जाएगी। इस दिन पूजा करने का शुभ मुहूर्त इस प्रकार है।&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;राधा अष्टमी पर राधा रानी की पूजा सुबह 11:03 बजे से लेकर दोपहर 01:32 बजे तक कर सकते हैं।&amp;nbsp;&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;इस तरह करें राधा अष्टमी व्रत&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;राधा अष्टमी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर देवी-देवताओं का ध्यान करके दिन की शुरुआत करें। नित्यकर्म से निवृत्त होकर गंगाजल से स्नान करें। फिर पूजा का संकल्प लें।&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;घर और मंदिर की विशेष सफाई करें। चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और राधा कृष्ण की मूर्ति रखें. व्रत का संकल्प लें साथ ही उनका श्रृंगार करें. देसी घी का दीपक जलाकर आरती करें और मंत्रों का जाप करें।&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;इसके बाद राधा कृष्ण से जीवन में सुख, समृद्धि और शांति के लिए प्रार्थना करें। इस दौरान दिन भर व्रत रखें। संध्याकाल में आरती कर फलाहार करें। इसके बाद अगले दिन पूजा-अर्चना करने के बाद व्रत का पारण करें।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;जानें व्रत के नियम&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;व्रत के दिन तामसिक भोजन करने से परहेज करें।&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;अपने से बड़े और बुजुर्गों का अपमान भूल कर भी न करें।&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;br&gt;किसी के लिए अपने अंदर गलत विचार धारण न होने दें।&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;घर में गंदगी न फैलाएं।&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;व्रत के दौरान दिन में भूलकर भी नींद न लें।&lt;/p&gt;
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