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       <title>Today Pitru Paksha News | Latest Pitru Paksha News | Breaking Pitru Paksha News in English | Latest Pitru Paksha News Headlines - Inkhabar</title>
        <description>आज का Pitru Paksha समाचार:Today Pitru Paksha News ,Latest Pitru Paksha News,Aaj Ka Samachar ,Pitru Paksha समाचार ,Breaking Pitru Paksha News in Hindi, Latest News Headlines - Inkhabar</description>
        <link>https://www.inkhabar.com/tag/pitru-paksha</link>
        <lastBuildDate>April 17, 2026, 5:22 pm</lastBuildDate>
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            <title>Inkhabar</title>
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        </image><item><title>गया पितृपक्ष मेले में बड़ा हादसा, भीड़ नियंत्रित कर रहे कैडेट गिरे डैम में</title><link>https://bihar.inkhabar.com/states/major-accident-in-gaya-pitru-paksha-fair-cadets-controlling-the-crowd-fell-into-the-dam/</link><pubDate>October 2, 2024, 7:32 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/10/download-32.png</image><category>राज्य</category><excerpt>पटना: बिहार के गया जिले से बड़ी दुखद खबर सामने आई है, जहां पितृ पक्ष मेला में बड़ी दुर्घटना हुई है। स्काउट एंड गाइड के पांच कैडेट फल्गु नदी पर बने रबर डैम में गिर गये. (Gaya Pitru Paksha) इनमें से दो की मौत हो गई. दो कैडेट घायल है, जिनका अस्पताल ...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना:&lt;/strong&gt; बिहार के गया जिले से बड़ी दुखद खबर सामने आई है, जहां पितृ पक्ष मेला में बड़ी दुर्घटना हुई है। स्काउट एंड गाइड के पांच कैडेट फल्गु नदी पर बने रबर डैम में गिर गये. (Gaya Pitru Paksha) इनमें से दो की मौत हो गई. दो कैडेट घायल है, जिनका अस्पताल में इलाज चल रहा है, जबकि एक लापता बताया जा रहा है. घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;हादसे के बाद लोगों की जुटी भीड़&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;बता दें कि हादसे के बाद आसपास लोगों की भीड़ लग गई। गोताखोरों की मदद से चार कैडेटों को बाहर निकाला गया। इनमें से दो की मौत हो गई. (Gaya Pitru Paksha) दो की हालत गंभीर है. उन्हें अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;5 कैडेट बांध में गिरे&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;बता दें कि भीड़ नियंत्रण के लिए देवघाट पर तैनात स्काउट एंड गाइड के 5 कैडेट बांध में गिर गया. इनमें से दो की जान चली गई. मृतकों की पहचान बेलागंज निवासी आलोक कुमार और रिया कुमारी के रूप में की गई है. (Gaya Pitru Paksha) ये लोग एक किशोर को बचाने के लिए ही कूदे थे. दोनों के शव बाहर निकाल लिए गए हैं. घटना के बाद जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया है.&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Pitru Paksha: क्या पितृ पक्ष के दौरान बहू-बेटी भी कर सकती हैं पिंडदान? जानिए क्या हैं नियम</title><link>https://bihar.inkhabar.com/festival/pitru-paksha-can-daughter-in-law-and-daughter-also-do-pind-daan-during-pitru-paksha-know-what-the-rules-are/</link><pubDate>September 21, 2024, 5:54 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/09/download-1-7-300x169.png</image><category>त्योहार</category><excerpt>पटना: 17 सितंबर से पितृ पक्ष शुरू हो चुका है. पितृ पक्ष के दौरान पितरों का पिंडदान किया जाता है। पिंड विशेष रूप से मृत पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए चढ़ाए जाते हैं। पितृ पक्ष हर वर्ष भाद्रपद माह की पूर्णिमा से शुरू होता है और आश्विन महीने क...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना:&lt;/strong&gt; 17 सितंबर से पितृ पक्ष शुरू हो चुका है. पितृ पक्ष के दौरान पितरों का पिंडदान किया जाता है। पिंड विशेष रूप से मृत पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए चढ़ाए जाते हैं। पितृ पक्ष हर वर्ष भाद्रपद माह की पूर्णिमा से शुरू होता है और आश्विन महीने की अमावस्या तक चलता है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;पितृ पक्ष सभी के लिए बेहद महत्वपूर्ण पल&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;बता दें कि पितृ पक्ष के दौरान हिंदू परिवार अपने पूर्वजों को याद करते हैं और उनका श्राद्ध करते हैं। यह समय उन लोगों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जिन्होंने परिवार के किसी सदस्य को खो चुके है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;मान्यताओं के अनुसार बेटा पात्र&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;पितृ पक्ष के दौरान दिवंगत आत्मा को पिंडदान करने से उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है। आमतौर पर पिंडदान पुत्र द्वारा किया जाता है। मान्यताओं के अनुसार एक पुत्र ही अपने पिता और पूर्वजों की आत्मा को शांति प्रदान कर सकता है। लेकिन, अब सवाल ये है कि क्या बहू या बेटी इस काम को कर सकती हैं?&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;बेटियां व बहुएं भी कर सकती हैं पिंडदान&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;कई विद्वानों का मानना है कि बहुएं और बेटियां भी पिंडदान कर सकती हैं, खासकर जब परिवार में कोई बेटा न हो। कई परिवारों में पिंडदान बहू या बेटी से करवाने की परंपरा भी देखी जा रही है। लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि पिंडदान के दौरान उनके पति का उनके साथ रहना जरूरी है। इसलिए अगर आप बहू या बेटी हैं और अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि देना चाहती हैं तो पितृ पक्ष आपके लिए महत्वपूर्ण समय है। ऐसा माना जाता है कि वे अपने पूर्वजों को भी सम्मान दे सकते हैं।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;पितृ पक्ष में मृत परिजनों को दे पानी&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;धार्मिक जानकारों का कहना है कि अगर परिवार में बेटा नहीं है तो बहू या बेटी को पिंडदान करने का अधिकार है। बता दें कि पितृ पक्ष के दौरान मृत परिजनों का पिंडदान करना बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, किसी भी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसे भूत-प्रेत से बचाने के लिए पितृ तर्पण करना जरूरी होता है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;पिंडदान नहीं करने से होते है ये नुकसान&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;माना जाता है कि पितृ पक्ष के दौरान पितरों को किया गया तर्पण उन्हें मुक्ति दिलाता है और उन्हें प्रेत लोक से मुक्ति मिल जाती है। ऐसा कहा जाता है कि अगर पितरों का पिंडदान नहीं किया जाए तो पितरों की आत्माएं अप्रसन्न और असंतुष्ट रहती हैं।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Pitru Paksha 2024: प्रेमानंद महाराज के विचार से क्या सही में लगानी चाहिए घर में पितरों की तस्वीर</title><link>https://bihar.inkhabar.com/culture/pitru-paksha-2024-according-to-premanand-maharaj-should-the-pictures-of-ancestors-be-kept-in-the-house/</link><pubDate>September 13, 2024, 12:52 pm</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/09/download-14-1-300x168.png</image><category>संस्कृति</category><excerpt>पटना: हिंदू पौराणिक कथाओं के मुताबिक, हमारे पूर्वज हमें हमेशा आशीर्वाद देने और हमारी परेशानियों का रास्ता निकालने के लिए पितृ पक्ष के दौरान धरती पर आते हैं. बता दें पितृ पक्ष कुछ ही दिनों में शुरू होने जा रहा है. पितृ पक्ष 18 सितंबर से शुरू होक...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना:&lt;/strong&gt; हिंदू पौराणिक कथाओं के मुताबिक, हमारे पूर्वज हमें हमेशा आशीर्वाद देने और हमारी परेशानियों का रास्ता निकालने के लिए पितृ पक्ष के दौरान धरती पर आते हैं. बता दें पितृ पक्ष कुछ ही दिनों में शुरू होने जा रहा है. पितृ पक्ष 18 सितंबर से शुरू होकर 2 अक्टूबर तक चलने वाला है. ऐसे में हम अपने घरों में पूर्वजों की कई फोटोज लगाते हैं. आइए पितृ पक्ष से पहले जानते है पितरों की फोटोज को लेकर प्रेमानंद जी महाराज के विचार।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;लड़की के पूछने पर महाराज जी ने बताई वजह&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;हाल ही में, प्रेमानंद महाराज जी के आश्रम में कथा के दौरान एक लड़की ने पूछा कि क्या हमें अपने पूर्वजों की फोटोज अपने मंदिरों में लगानी चाहिए. हालांकि, कई लोगों का कहना ​​है कि राधा रानी और कुंज बिहारी के आसपास अपने पूर्वज की तस्वीर नहीं लगानी चाहिए. तो इस प्रश्न का जवाब प्रेमानंद महाराज देते हुए बोले हैं कि यदि आपको ऐसा लगता है कि हमारे रक्षक ठाकुर जी के जीवन में कोई परेशानी नहीं है। इस स्थिति में ठाकुर जी का रूप कैसा है ये आपके अंदर के आत्मा ने मान लिया, आप जिस मन से उसे देखेंगे आपको ठाकुर जी की वैसी ही छवि दिखेगी।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;पूर्वजों की पूजा भगवान के पूजा के सामान&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;बता दें कि प्रेमानंद महाराज का कहना हैं कि अगर आपके अंदर देवी देवता को लेकर भावनाएं हैं तो इसमें कुछ भी खराब या गलत नहीं है. यदि ऐसा आपके जीवन में नहीं है, तो आपके पूर्वजों की फोटोज नहीं सहेज सकते है. यदि आप सच्ची भावना से अपने पूर्वजों की तस्वीर लगाते हैं और विश्वास करते हैं कि ये लोग मेरे भगवान के सामान हैं और सच्ची श्रद्धा भाव से उनकी सेवा करते रहते हैं, तो आपको अवश्य भगवान का आशीर्वाद मिलेगा।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Pitru Paksha: जाने कब होगी पितृपक्ष की शुरूआत और समाप्ति, जानें पिंड दान का सबसे उत्तम समय</title><link>https://bihar.inkhabar.com/festival/pitru-paksha-know-when-pitru-paksha-will-start-and-end-know-the-best-time-for-pind-daan/</link><pubDate>September 10, 2024, 6:13 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/09/pitr-300x169.webp</image><category>त्योहार</category><excerpt>पटना। पितृपक्ष को श्राद्ध पक्ष भी कहा जाता है। इसे मृतक पूर्वजों को समर्पित करने के लिए महत्वपूर्ण अवधि माना जाता है। हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का बहुत महत्व होता है। इस दौरान लोग अपने पितरों को खुश और संतुष्ट करने की कोशिश करते है। ऐसा माना जात...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना।&lt;/strong&gt; पितृपक्ष को श्राद्ध पक्ष भी कहा जाता है। इसे मृतक पूर्वजों को समर्पित करने के लिए महत्वपूर्ण अवधि माना जाता है। हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का बहुत महत्व होता है। इस दौरान लोग अपने पितरों को खुश और संतुष्ट करने की कोशिश करते है। ऐसा माना जाता है कि पितृ पक्ष की शुरुआत भाद्रपद पूर्णिमा तिथि से होती है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;पितृपक्ष की शुरूआत&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;इस दिन उन पूर्वजों के सम्मान में श्राद्ध किया जाता है। मान्याता है कि पितृ पक्ष के दौरान पूर्वजों की आत्माएं धरती पर आती हैं। पितृपक्ष के दौरान पितरों का श्राद्ध करने से जन्म कुंडली में पाए गए पितृ दोष से भी छुटकारा पाया मिलता है। इस साल पितृ पक्ष का शुरूआत कब से हो रही है इसे लेकर लोगों को कंफ्यूजन है। हिंदू पंचांग की माने तो पितृ पक्ष का शुरूआत 17 सितंबर से हो रही है, लेकिन इस दिन श्राद्ध नहीं किया जा सकता।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;पितृपक्ष की समाप्ति&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;इस दिन भाद्रपद पूर्णिमा का श्राद्ध है और पितृपक्ष में श्राद्ध कर्म के काम तिथि और समय के मुताबिक ही किए जाते है, इसलिए 17 तारीख को ऋषियों के नाम से जल का दान किया जायेगा। श्राद्ध पक्ष का आरंभ प्रतिपदा तिथि के अनुसार ही होता है। ऐसे में 18 सितंबर से पिंडदान, तर्पण, ब्राह्मण भोजन, दान आदि कामों की शुरूआत हो जाएगी। पितृ पक्ष का आरंभ देखा जाये तो 18 सितंबर से हो रहा है और इसकी समाप्ति 2 अक्टूबर को होगी।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;मुहूर्त के मुताबिक करें श्राद्ध कर्म&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;शास्त्रों के मुताबिक पितृ पक्ष में सुबह और शाम के वक्त देवी- देवताओं की पूजा को शुभ बताया गया है। साथ ही पितरों की पूजा के लिए दोपहर का समय उत्तम होता है। वहीं पितरों की पूजा के लिए सबसे उत्तम समय 11:30 से 12:30 बजे तक बताया जाता है, इसलिए आपको पंचांग में अभिजीत मुहूर्त देखने के बाद श्राद्ध कर्म करना चाहिए।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Pitru Paksha 2024: कब से शुरू हो रहा पितृ पक्ष, चावल के पिंड अर्पित करना शुभ</title><link>https://bihar.inkhabar.com/festival/pitru-paksha-2024-when-is-pitru-paksha-starting-offering-rice-balls-is-auspicious/</link><pubDate>August 30, 2024, 1:06 pm</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/08/download-12-3-300x176.png</image><category>त्योहार</category><excerpt>पटना : पितृ पक्ष, जिसे पितृ पक्ष या श्राद्ध के नाम से भी हम जानते है, हिंदू धर्म में अपने पूर्वजों के आदर और सम्मान के लिए इस महत्वपूर्ण अवधि में पिंड दान करते है. हिंदू कैलेंडर के मुताबिक, यह समय आश्विन माह के दौरान 16 चंद्र दिनों में मनाई जात...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना &lt;/strong&gt;: पितृ पक्ष, जिसे पितृ पक्ष या श्राद्ध के नाम से भी हम जानते है, हिंदू धर्म में अपने पूर्वजों के आदर और सम्मान के लिए इस महत्वपूर्ण अवधि में पिंड दान करते है. हिंदू कैलेंडर के मुताबिक, यह समय आश्विन माह के दौरान 16 चंद्र दिनों में मनाई जाती है. ऐसे में चलिए जानते हैं पितृ पक्ष कब से शुरू हो रहा है.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;17 सितंबर से शुरू होगा पितृ पक्ष&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;इस वर्ष 2024 में, पितृ पक्ष मंगलवार, 17 सितंबर, 2024 को शुरू होगा और बुधवार, 2 अक्टूबर, 2024 को समाप्त होगा। पूर्णिमा तिथि (पूर्णिमा) की शुरुआत पितृ पक्ष की शुरुआत और अमावस्या तिथि (नया चंद्रमा) का समापन पितृ पक्ष के अंत का प्रतीक है.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;इस तरह करें पूजा&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;पितृ पक्ष के दौरान घर पर पितृ पूजा करना अपने पूर्वजों से जुड़ने का एक गहरा सार्थक तरीका है। आप अपने घर में एक पवित्र स्थान स्थापित कर सकते हैं जहां आप भगवान श्री कृष्ण की पूजा करते हैं, श्री कृष्ण को धूप, दीप जलाएं और फूल चढ़ाएं; और अपने पितरों को कृष्ण प्रसाद अर्पित करें। वैदिक पूजा में आमतौर पर मंत्रों का जाप करना और अपने परिवार की खुशहाली के लिए आशीर्वाद मांगना शामिल होता है। श्रद्धापूर्वक भोजन, जल और अन्य चीजें चढ़ाना न भूलें।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;पितृ पक्ष के दौरान ये हैं मुख्य अनुष्ठान&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;तर्पण: पितरों को काले तिल मिला जल चढ़ाना&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;पिंड दान: तिल और जौ के आटे के साथ चावल के गोले (पिंड) चढ़ाना&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;ब्राह्मणों और जरूरतमंदों को खाना खिलाना: पितृ पक्ष के दौरान ब्राह्मणों को खाना खिलाएं और गरीबों को अन्न दान के तौर पर जरूर दें।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>बिहार: आज से शुरु हो रहा है पितृपक्ष, गया धाम में पिंडदान के दौरान बरतें ये सावधानियां</title><link>https://bihar.inkhabar.com/culture/bihar-pitru-paksha-is-starting-from-today-take-these-precautions-during-pind-daan-in-gaya-dham/</link><pubDate>September 29, 2023, 12:38 pm</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/09/6-1-300x180.png</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>पटना। बिहार के गया जी धाम में 15 दिनों की अवधि के दौरान देश-विदेश से लाखों तीर्थयात्री पिंडदान करने पहुंचते हैं। पितृपक्ष अवधि में अनेक नियमों और धर्मों का पालन करने के लिए बताया गया है। जानिए पूरी जानकारी। आज से शुरु हो रहा है पितृपक्ष गया में...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना।&lt;/strong&gt; बिहार के गया जी धाम में 15 दिनों की अवधि के दौरान देश-विदेश से लाखों तीर्थयात्री पिंडदान करने पहुंचते हैं। पितृपक्ष अवधि में अनेक नियमों और धर्मों का पालन करने के लिए बताया गया है। जानिए पूरी जानकारी।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;आज से शुरु हो रहा है पितृपक्ष&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;गया में विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेला 28 सितंबर से शुरू हो चुका है। यह मेला 14 अक्टूबर तक चलेगा। बता दें कि आज शुक्रवार से पितृपक्ष की शुरुआत हो गई है। इस दौरान देश-विदेश से लाखों की संख्या में हिंदू सनातन धर्मावलंबी गया जी पहुंचते हैं। यह कहा जाता है कि ये मान्यता है कि पितरों को जल और तिल से पितृपक्ष में तर्पण किया जाता है। यहीं नहीं पितृपक्ष अवधि में गया जी धाम में पिंडदान करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार गरुड़ पुराण में वर्णित है कि पृथ्वी के सभी तीर्थों में गया सर्वोत्तम तीर्थ है। वहीं, मत्स्य पुराण में गया को पितृतीर्थ भी कहा गया है। इसी कारण गया जी धाम में 15 दिनों की अवधि में देश-विदेश से लाखों तीर्थयात्री पिंडदान, तर्पण और कर्मकांडो को पूरा करने के लिए आते हैं।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;क्या है श्राद्ध&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;बता दें कि गया के विष्णुपद मंदिर स्थित वैदिक मंत्रालय के पंडित राजा आचार्य ने बताया कि भारतीय हिंदुत्व और सनातन में अपने पूर्वज पितरों को समर्पित भाव से जो कार्य किया जाता है वही श्राद्ध होता है। जीवित अवस्था में पितृ अपने बच्चों का अच्छे से पालन-पोषण करते हैं। घर, भोजन आदि सहित जीवन कैसे जीना है? यह माता पिता ही सिखाते हैं। इसके साथ ही वह पूर्वज मृत्यु के बाद यह कामना करते हैं कि हमारी संतान हमारे मृत्यु के बाद हमारे उद्धार के लिए श्राद्ध करे और श्रद्धा से होने वाला पिंडदान ही श्राद्ध होता है। बताया जाता है कि जब सूर्य कन्या राशि में प्रवेश कर जाता है और पहले कृष्णपक्ष को महालया पक्ष यानी पितृपक्ष होता है इस अवधि में श्रद्धा से किए गए श्राद्ध से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति और उद्धार मिलता है। इससे पितर प्रसन्न होते हैं और अपनी संतान को सुखी रहने का आशीर्वाद देते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार साधू व संतों और बच्चों का पिंडदान नहीं किया जाता है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;पितृपक्ष के दौरान इन नियमों का करें पालन&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;बताया जाता है कि पितृपक्ष अवधि में अनेक नियमों और धर्म का पालन किया जाता है। इस दौरान पिंडदानी को दूसरे के घर का भोजन नहीं करना चाहिए, झूठ नहीं बोलें, कपट न करें, पितृपक्ष में एक समय ही भोजन करें, इसके अलावा रात्रि भोजन का त्याग दें, वहीं अगर आप यात्रा में हों तो अपने भगवान और पितरों का ध्यान करें, किसी के साथ अपशब्द नहीं बोलें, ब्रह्मचर्य का पालन करें, गरीबों को भोजन कराएं, पशु-पक्षियों को भोजन दें, पितरों को तिल तर्पण करें, शुद्ध सात्विक अवस्था में रहें, 15 दिनों तक नित्य पितरों का ध्यान करें और विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें। भागवत या रामायण जी का पाठ अगर नहीं कर सकते हैं तो किसी ब्राह्मण से पाठ कराकर सुनना जरूरी होता है। पितृपक्ष की पूरी अवधि में इन नियमों का पालन करते हुए जीवन को सफल बनाया जा सकता है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;इन सामग्रियों से करें पिंडदान&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;पितृ पक्ष के दौरान गया में पिंडदान करने से पितर तृप्त होते हैं और इसी के साथ ही वो संतान को आशीर्वाद भी प्रदान करते हैं। इसीलिए श्राद्ध करना बहुत ज्यादा जरूरी होता है। श्राद्ध में तर्पण करने के लिए तिल, जल, चावल, कुशा, गंगाजल आदि का उपयोग अवश्य ही किया जाना चाहिए। उड़द, सफेद पुष्प, केले, गाय के दूध, घी, खीर, स्वांक के चावल, जौ, मूंग, गन्ने आदि का इस्तेमाल करते हैं तो इससे श्राद्ध में पितर प्रसन्न होते हैं और घर में सुख शांति बनी रहती है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;इन बातों का विशेष ध्यान&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;पिंडदान के समय कुछ बातों का ध्यान रखना बेहद आवश्यक है जैसे जब भी मृत व्यक्ति के घरवाले मृतक का पिंडदान करें तो सबसे पहले चावल या फिर जौ के आटे में दूध और तिल को मिलाकर उस आटे को गूथ लें। इसके बाद उसका गोला बना लें। वहीं जब भी आप तर्पण करने जाएं तो ध्यान रखें कि आप पीतल के बर्तन या फिर पीतल की थाली ही लें और उसमें एकदम साफ जल भरें। इसके बाद उसमें दूध व काला तिल डालकर अपने सामने रख लें और अपने सामने एक खाली बर्तन भी रखें। अब अपने दोनों हाथों को मिला लें। इसके बाद मृत व्यक्ति का नाम लेकर तृप्यन्ताम बोलते हुए अंजुली में भरे हुए जल को सामने रखे खाली बर्तन में डाल दें। इसके अलावा जल से तर्पण करते समय आप उसमें जौ, कुशा, काला तिल और सफेद फूल अवश्य मिला लें। ऐसा करने से पितर तृप्त हो जाते हैं। इसके बाद ब्राह्मणों को भोजन करवाएं और उन्हें दान-दक्षिणा दें।&lt;/p&gt;
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