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       <title>Today Pitru Paksha 2024 News | Latest Pitru Paksha 2024 News | Breaking Pitru Paksha 2024 News in English | Latest Pitru Paksha 2024 News Headlines - Inkhabar</title>
        <description>आज का Pitru Paksha 2024 समाचार:Today Pitru Paksha 2024 News ,Latest Pitru Paksha 2024 News,Aaj Ka Samachar ,Pitru Paksha 2024 समाचार ,Breaking Pitru Paksha 2024 News in Hindi, Latest News Headlines - Inkhabar</description>
        <link>https://www.inkhabar.com/tag/pitru-paksha-2024</link>
        <lastBuildDate>April 15, 2026, 7:10 pm</lastBuildDate>
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            <title>Inkhabar</title>
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            <description>Feed provided by Inkhabar.</description>
        </image><item><title>Sarva Pitru Amavasya: पितरों को प्रसन्न करने का आखिरी मौका है सर्वपितृ अमावस्या, इस प्रकार करें उन्हें विदा</title><link>https://bihar.inkhabar.com/festival/sarva-pitru-amavasya-sarva-pitru-amavasya-is-the-last-chance-to-please-the-ancestors-bid-them-farewell-in-this-way/</link><pubDate>September 27, 2024, 5:24 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/09/download-1-9.png</image><category>त्योहार</category><excerpt>पटना:  पितृ पक्ष में आने वाली सर्वपितृ अमावस्या को पितरों की विदाई का समय माना जाता है। इस तिथि पर परिवार के उन मृत सदस्यों का श्राद्ध किया जाता है जिनकी मृत्यु तिथि हम भूल गए हों या जिनकी मृत्यु अमावस्या, पूर्णिमा या चतुर्दशी तिथि को हुई हो। इ...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना:&lt;/strong&gt;  पितृ पक्ष में आने वाली सर्वपितृ अमावस्या को पितरों की विदाई का समय माना जाता है। इस तिथि पर परिवार के उन मृत सदस्यों का श्राद्ध किया जाता है जिनकी मृत्यु तिथि हम भूल गए हों या जिनकी मृत्यु अमावस्या, पूर्णिमा या चतुर्दशी तिथि को हुई हो। इसके अलावा यह तिथि नाराज पितरों को मनाने और उनका आशीर्वाद लेने का आखिरी मौका भी है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;तिथि का विशेष मुहूर्त&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;आश्विन मास की अमावस्या तिथि का आरंभ 01 अक्टूबर 2024 को रात्रि 09:39 बजे हो रहा है. साथ ही यह तिथि 03 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 18 मिनट पर समाप्त हो रही है. ऐसे में सर्वपितृ अमावस्या 02 अक्टूबर, बुधवार को मनाई जाएगी। इस दिन के अन्य शुभ मुहूर्त इस प्रकार होंगे। &amp;#8211;&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;कुतुप मुहूर्त &amp;#8211; 11:46 बजे से 12:34 बजे तक&lt;br&gt;रौहिण मुहूर्त &amp;#8211; 12:34 बजे से 13:21 बजे तक&lt;br&gt;अपराह्न काल &amp;#8211; 13:21 बजे से 15:43 बजे तक&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;इस तरह करें पितरों को विदा&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;सर्वपितृ अमावस्या के दिन सुबह जल्दी उठकर किसी पवित्र नदी में स्नान करें। अगर ऐसा करना संभव न हो तो आप घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं। इसके बाद पितरों को तर्पण और पिंडदान करें।साथ ही इस दिन पंचबलि यानी गाय, कुत्ता, कौआ, देवता और चींटी को भी श्राद्ध तर्पण करें।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;ब्राह्मण को भोजन जरूर कराएं&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;इसके बाद अपनी क्षमता के अनुसार 1, 3 या 5 ब्राह्मणों को भोजन कराएं। ब्राह्मणों को यथाशक्ति दान-दक्षिणा देकर विदा करें। सर्वपितृ अमावस्या के तर्पण के दौरान खीर पूरी जरूर बनानी चाहिए। इन सभी बातों का ख्याल रखने पर हमारे पूर्वज प्रसन्न होकर पितृलोक को लौट जाते हैं और हमें सुख-समृद्धि जीवन का खूब आशीर्वाद देते हैं।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;जरूर रखें इन बातों का ध्यान&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;बता दें कि सर्वपितृ अमावस्या की तिथि पर गलती से भी&amp;nbsp; तामसिक भोजन नहीं खाएं और न ही इस दिन श्मशान घाट या किसी सूनसान स्थान पर जाएं। क्योंकि ऐसा कहा जाता है कि अमावस्या के दिन नकारात्मक शक्तियां एक्टिव हो जाती हैं। इतना ही नहीं इस दिन ब्रह्मचर्य का पालन करें। इन बातों का ख्याल न रखने पर पितृ नाखुश हो सकते हैं, जिससे आपको जीवन में परेशानी हो सकती है।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Pitru Paksha: क्या पितृ पक्ष के दौरान बहू-बेटी भी कर सकती हैं पिंडदान? जानिए क्या हैं नियम</title><link>https://bihar.inkhabar.com/festival/pitru-paksha-can-daughter-in-law-and-daughter-also-do-pind-daan-during-pitru-paksha-know-what-the-rules-are/</link><pubDate>September 21, 2024, 5:54 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/09/download-1-7-300x169.png</image><category>त्योहार</category><excerpt>पटना: 17 सितंबर से पितृ पक्ष शुरू हो चुका है. पितृ पक्ष के दौरान पितरों का पिंडदान किया जाता है। पिंड विशेष रूप से मृत पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए चढ़ाए जाते हैं। पितृ पक्ष हर वर्ष भाद्रपद माह की पूर्णिमा से शुरू होता है और आश्विन महीने क...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना:&lt;/strong&gt; 17 सितंबर से पितृ पक्ष शुरू हो चुका है. पितृ पक्ष के दौरान पितरों का पिंडदान किया जाता है। पिंड विशेष रूप से मृत पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए चढ़ाए जाते हैं। पितृ पक्ष हर वर्ष भाद्रपद माह की पूर्णिमा से शुरू होता है और आश्विन महीने की अमावस्या तक चलता है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;पितृ पक्ष सभी के लिए बेहद महत्वपूर्ण पल&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;बता दें कि पितृ पक्ष के दौरान हिंदू परिवार अपने पूर्वजों को याद करते हैं और उनका श्राद्ध करते हैं। यह समय उन लोगों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जिन्होंने परिवार के किसी सदस्य को खो चुके है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;मान्यताओं के अनुसार बेटा पात्र&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;पितृ पक्ष के दौरान दिवंगत आत्मा को पिंडदान करने से उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है। आमतौर पर पिंडदान पुत्र द्वारा किया जाता है। मान्यताओं के अनुसार एक पुत्र ही अपने पिता और पूर्वजों की आत्मा को शांति प्रदान कर सकता है। लेकिन, अब सवाल ये है कि क्या बहू या बेटी इस काम को कर सकती हैं?&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;बेटियां व बहुएं भी कर सकती हैं पिंडदान&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;कई विद्वानों का मानना है कि बहुएं और बेटियां भी पिंडदान कर सकती हैं, खासकर जब परिवार में कोई बेटा न हो। कई परिवारों में पिंडदान बहू या बेटी से करवाने की परंपरा भी देखी जा रही है। लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि पिंडदान के दौरान उनके पति का उनके साथ रहना जरूरी है। इसलिए अगर आप बहू या बेटी हैं और अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि देना चाहती हैं तो पितृ पक्ष आपके लिए महत्वपूर्ण समय है। ऐसा माना जाता है कि वे अपने पूर्वजों को भी सम्मान दे सकते हैं।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;पितृ पक्ष में मृत परिजनों को दे पानी&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;धार्मिक जानकारों का कहना है कि अगर परिवार में बेटा नहीं है तो बहू या बेटी को पिंडदान करने का अधिकार है। बता दें कि पितृ पक्ष के दौरान मृत परिजनों का पिंडदान करना बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, किसी भी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसे भूत-प्रेत से बचाने के लिए पितृ तर्पण करना जरूरी होता है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;पिंडदान नहीं करने से होते है ये नुकसान&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;माना जाता है कि पितृ पक्ष के दौरान पितरों को किया गया तर्पण उन्हें मुक्ति दिलाता है और उन्हें प्रेत लोक से मुक्ति मिल जाती है। ऐसा कहा जाता है कि अगर पितरों का पिंडदान नहीं किया जाए तो पितरों की आत्माएं अप्रसन्न और असंतुष्ट रहती हैं।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Pitru Paksha 2024: प्रेमानंद महाराज के विचार से क्या सही में लगानी चाहिए घर में पितरों की तस्वीर</title><link>https://bihar.inkhabar.com/culture/pitru-paksha-2024-according-to-premanand-maharaj-should-the-pictures-of-ancestors-be-kept-in-the-house/</link><pubDate>September 13, 2024, 12:52 pm</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/09/download-14-1-300x168.png</image><category>संस्कृति</category><excerpt>पटना: हिंदू पौराणिक कथाओं के मुताबिक, हमारे पूर्वज हमें हमेशा आशीर्वाद देने और हमारी परेशानियों का रास्ता निकालने के लिए पितृ पक्ष के दौरान धरती पर आते हैं. बता दें पितृ पक्ष कुछ ही दिनों में शुरू होने जा रहा है. पितृ पक्ष 18 सितंबर से शुरू होक...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना:&lt;/strong&gt; हिंदू पौराणिक कथाओं के मुताबिक, हमारे पूर्वज हमें हमेशा आशीर्वाद देने और हमारी परेशानियों का रास्ता निकालने के लिए पितृ पक्ष के दौरान धरती पर आते हैं. बता दें पितृ पक्ष कुछ ही दिनों में शुरू होने जा रहा है. पितृ पक्ष 18 सितंबर से शुरू होकर 2 अक्टूबर तक चलने वाला है. ऐसे में हम अपने घरों में पूर्वजों की कई फोटोज लगाते हैं. आइए पितृ पक्ष से पहले जानते है पितरों की फोटोज को लेकर प्रेमानंद जी महाराज के विचार।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;लड़की के पूछने पर महाराज जी ने बताई वजह&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;हाल ही में, प्रेमानंद महाराज जी के आश्रम में कथा के दौरान एक लड़की ने पूछा कि क्या हमें अपने पूर्वजों की फोटोज अपने मंदिरों में लगानी चाहिए. हालांकि, कई लोगों का कहना ​​है कि राधा रानी और कुंज बिहारी के आसपास अपने पूर्वज की तस्वीर नहीं लगानी चाहिए. तो इस प्रश्न का जवाब प्रेमानंद महाराज देते हुए बोले हैं कि यदि आपको ऐसा लगता है कि हमारे रक्षक ठाकुर जी के जीवन में कोई परेशानी नहीं है। इस स्थिति में ठाकुर जी का रूप कैसा है ये आपके अंदर के आत्मा ने मान लिया, आप जिस मन से उसे देखेंगे आपको ठाकुर जी की वैसी ही छवि दिखेगी।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;पूर्वजों की पूजा भगवान के पूजा के सामान&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;बता दें कि प्रेमानंद महाराज का कहना हैं कि अगर आपके अंदर देवी देवता को लेकर भावनाएं हैं तो इसमें कुछ भी खराब या गलत नहीं है. यदि ऐसा आपके जीवन में नहीं है, तो आपके पूर्वजों की फोटोज नहीं सहेज सकते है. यदि आप सच्ची भावना से अपने पूर्वजों की तस्वीर लगाते हैं और विश्वास करते हैं कि ये लोग मेरे भगवान के सामान हैं और सच्ची श्रद्धा भाव से उनकी सेवा करते रहते हैं, तो आपको अवश्य भगवान का आशीर्वाद मिलेगा।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Pitru Paksha: जाने कब होगी पितृपक्ष की शुरूआत और समाप्ति, जानें पिंड दान का सबसे उत्तम समय</title><link>https://bihar.inkhabar.com/festival/pitru-paksha-know-when-pitru-paksha-will-start-and-end-know-the-best-time-for-pind-daan/</link><pubDate>September 10, 2024, 6:13 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/09/pitr-300x169.webp</image><category>त्योहार</category><excerpt>पटना। पितृपक्ष को श्राद्ध पक्ष भी कहा जाता है। इसे मृतक पूर्वजों को समर्पित करने के लिए महत्वपूर्ण अवधि माना जाता है। हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का बहुत महत्व होता है। इस दौरान लोग अपने पितरों को खुश और संतुष्ट करने की कोशिश करते है। ऐसा माना जात...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना।&lt;/strong&gt; पितृपक्ष को श्राद्ध पक्ष भी कहा जाता है। इसे मृतक पूर्वजों को समर्पित करने के लिए महत्वपूर्ण अवधि माना जाता है। हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का बहुत महत्व होता है। इस दौरान लोग अपने पितरों को खुश और संतुष्ट करने की कोशिश करते है। ऐसा माना जाता है कि पितृ पक्ष की शुरुआत भाद्रपद पूर्णिमा तिथि से होती है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;पितृपक्ष की शुरूआत&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;इस दिन उन पूर्वजों के सम्मान में श्राद्ध किया जाता है। मान्याता है कि पितृ पक्ष के दौरान पूर्वजों की आत्माएं धरती पर आती हैं। पितृपक्ष के दौरान पितरों का श्राद्ध करने से जन्म कुंडली में पाए गए पितृ दोष से भी छुटकारा पाया मिलता है। इस साल पितृ पक्ष का शुरूआत कब से हो रही है इसे लेकर लोगों को कंफ्यूजन है। हिंदू पंचांग की माने तो पितृ पक्ष का शुरूआत 17 सितंबर से हो रही है, लेकिन इस दिन श्राद्ध नहीं किया जा सकता।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;पितृपक्ष की समाप्ति&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;इस दिन भाद्रपद पूर्णिमा का श्राद्ध है और पितृपक्ष में श्राद्ध कर्म के काम तिथि और समय के मुताबिक ही किए जाते है, इसलिए 17 तारीख को ऋषियों के नाम से जल का दान किया जायेगा। श्राद्ध पक्ष का आरंभ प्रतिपदा तिथि के अनुसार ही होता है। ऐसे में 18 सितंबर से पिंडदान, तर्पण, ब्राह्मण भोजन, दान आदि कामों की शुरूआत हो जाएगी। पितृ पक्ष का आरंभ देखा जाये तो 18 सितंबर से हो रहा है और इसकी समाप्ति 2 अक्टूबर को होगी।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;मुहूर्त के मुताबिक करें श्राद्ध कर्म&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;शास्त्रों के मुताबिक पितृ पक्ष में सुबह और शाम के वक्त देवी- देवताओं की पूजा को शुभ बताया गया है। साथ ही पितरों की पूजा के लिए दोपहर का समय उत्तम होता है। वहीं पितरों की पूजा के लिए सबसे उत्तम समय 11:30 से 12:30 बजे तक बताया जाता है, इसलिए आपको पंचांग में अभिजीत मुहूर्त देखने के बाद श्राद्ध कर्म करना चाहिए।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Pitru Paksha 2024: कब से शुरू हो रहा पितृ पक्ष, चावल के पिंड अर्पित करना शुभ</title><link>https://bihar.inkhabar.com/festival/pitru-paksha-2024-when-is-pitru-paksha-starting-offering-rice-balls-is-auspicious/</link><pubDate>August 30, 2024, 1:06 pm</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/08/download-12-3-300x176.png</image><category>त्योहार</category><excerpt>पटना : पितृ पक्ष, जिसे पितृ पक्ष या श्राद्ध के नाम से भी हम जानते है, हिंदू धर्म में अपने पूर्वजों के आदर और सम्मान के लिए इस महत्वपूर्ण अवधि में पिंड दान करते है. हिंदू कैलेंडर के मुताबिक, यह समय आश्विन माह के दौरान 16 चंद्र दिनों में मनाई जात...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना &lt;/strong&gt;: पितृ पक्ष, जिसे पितृ पक्ष या श्राद्ध के नाम से भी हम जानते है, हिंदू धर्म में अपने पूर्वजों के आदर और सम्मान के लिए इस महत्वपूर्ण अवधि में पिंड दान करते है. हिंदू कैलेंडर के मुताबिक, यह समय आश्विन माह के दौरान 16 चंद्र दिनों में मनाई जाती है. ऐसे में चलिए जानते हैं पितृ पक्ष कब से शुरू हो रहा है.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;17 सितंबर से शुरू होगा पितृ पक्ष&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;इस वर्ष 2024 में, पितृ पक्ष मंगलवार, 17 सितंबर, 2024 को शुरू होगा और बुधवार, 2 अक्टूबर, 2024 को समाप्त होगा। पूर्णिमा तिथि (पूर्णिमा) की शुरुआत पितृ पक्ष की शुरुआत और अमावस्या तिथि (नया चंद्रमा) का समापन पितृ पक्ष के अंत का प्रतीक है.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;इस तरह करें पूजा&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;पितृ पक्ष के दौरान घर पर पितृ पूजा करना अपने पूर्वजों से जुड़ने का एक गहरा सार्थक तरीका है। आप अपने घर में एक पवित्र स्थान स्थापित कर सकते हैं जहां आप भगवान श्री कृष्ण की पूजा करते हैं, श्री कृष्ण को धूप, दीप जलाएं और फूल चढ़ाएं; और अपने पितरों को कृष्ण प्रसाद अर्पित करें। वैदिक पूजा में आमतौर पर मंत्रों का जाप करना और अपने परिवार की खुशहाली के लिए आशीर्वाद मांगना शामिल होता है। श्रद्धापूर्वक भोजन, जल और अन्य चीजें चढ़ाना न भूलें।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;पितृ पक्ष के दौरान ये हैं मुख्य अनुष्ठान&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;तर्पण: पितरों को काले तिल मिला जल चढ़ाना&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;पिंड दान: तिल और जौ के आटे के साथ चावल के गोले (पिंड) चढ़ाना&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;ब्राह्मणों और जरूरतमंदों को खाना खिलाना: पितृ पक्ष के दौरान ब्राह्मणों को खाना खिलाएं और गरीबों को अन्न दान के तौर पर जरूर दें।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>बिहार: गया पहुंचे हैं पंडित धीरेंद्र शास्त्री, रिसॉर्ट के हॉल में ही हुआ श्री हरि प्रवचन का आयोजन</title><link>https://bihar.inkhabar.com/top-news/bihar-pandit-dhirendra-shastri-has-reached-gaya-shri-hari-discourse-was-organized-in-the-hall-of-the-resort-itself/</link><pubDate>October 3, 2023, 8:18 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/10/5-1-300x225.png</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>पटना। बिहार के गया में सोमवार को पंडित धीरेंद्र शास्त्री के पहुंचने की सूचना मिली थी। बताया जा रहा है कि वो यहां तीन दिनों तक ठहरेंगे। गया पहुंचे हैं पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री बाबा बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र शास्त्री के सोमवार को गया पह...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना।&lt;/strong&gt; बिहार के गया में सोमवार को पंडित धीरेंद्र शास्त्री के पहुंचने की सूचना मिली थी। बताया जा रहा है कि वो यहां तीन दिनों तक ठहरेंगे।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;गया पहुंचे हैं पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;बाबा बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र शास्त्री के सोमवार को गया पहुंचने की सूचना सामने आई थी। बताया जा रहा है कि बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री तीन दिनों के प्रवास पर बोधगया आए हुए हैं। बता दें कि सोमवार की शाम गया की धरती पर उनका स्वागत किया गया है। पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री अबकी बार अपने दूसरे बिहार दौरे पर आए हैं। इससे पहले वह राजधानी पटना के नौबतपुर में स्थित तरेत पाली मठ में हनुमंत कथा कहने के लिए आए थे। बता दें कि इस बार पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री अपने पितरों के मोक्ष की कामना को लेकर गया जी धाम के विभिन्न पिंडवेदियों पर पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध कर्म करने आए हैं।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;श्री हरि प्रवचन का आयोजन किया गया&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;दरअसल, पंडित धीरेंद्र शास्त्री सोमवार की देर शाम बारिश के बीच रिसॉर्ट पहुंचे थे। बताया जा रहा है कि इस दौरान सैकड़ों भक्तों ने घंटों पानी में खड़े होकर उनके दर्शन किए और मिलने के लिए लालायित दिखाई दिए। इस बीच बाबा बागेश्वर धाम सरकार के सचिव उपेंद्र सिंह ने बताया कि धीरेंद्र शास्त्री के सार्वजनिक प्रवचन कार्यक्रम के लिए जिला प्रशासन से अनुमति मांगी गई थी लेकिन पितृपक्ष मेले की भीड़ को देखते हुए अनुमति नहीं मिल पाई थी। सचिव&lt;br&gt;उपेंद्र सिंह ने बताया कि पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री बोधगया के एक रिसॉर्ट में तीन दिनों तक ठहरेंगे। यहां वो चार अक्टूबर तक वह अपने विशेष श्रद्धालुओं से मिलेंगे। यहीं नहीं सोमवार की देर रात तक रिसॉर्ट के हॉल में ही पंडित धीरेंद्र शास्त्री के द्वारा पितृ पक्ष में पितृ दोष निवारण के लिए श्री हरि प्रवचन का आयोजन किया गया था।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;पंडित धीरेंद्र शास्त्री गया में करेंगे तर्पण&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;बताया जा रहा है कि इस प्रवचन कार्यक्रम में सिर्फ विशेष श्रद्धालु ही शामिल हो सके थे। पंडित धीरेंद्र शास्त्री के आवासन स्थल के बाहर जिला प्रशासन द्वारा कड़ी सुरक्षा की व्यवस्था की गई है। यह बताया जा रहा है कि बागेश्वर सरकार अपने पूर्वजों के लिए तर्पण करने के लिए गया आए हैं। यहीं नहीं पंडित धीरेंद्र शास्त्री के सैकड़ों भक्त इसके पूर्व से ही गया पहुंचे हैं जो विभिन्न पिंड वेदियों पर पिंडदान कर रहे हैं।&lt;/p&gt;
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