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       <title>Today Patna High Court News | Latest Patna High Court News | Breaking Patna High Court News in English | Latest Patna High Court News Headlines - Inkhabar</title>
        <description>आज का Patna High Court समाचार:Today Patna High Court News ,Latest Patna High Court News,Aaj Ka Samachar ,Patna High Court समाचार ,Breaking Patna High Court News in Hindi, Latest News Headlines - Inkhabar</description>
        <link>https://www.inkhabar.com/tag/patna-high-court</link>
        <lastBuildDate>April 17, 2026, 11:39 pm</lastBuildDate>
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            <title>Inkhabar</title>
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        </image><item><title>आज 14वें दिन अपना आमरण अनशन तोड़ेंगे पीके, अभ्यर्थियों के अनुरोध पर लिया फैसला</title><link>https://bihar.inkhabar.com/top-news/pk-will-break-his-fast-unto-death-today-on-the-14th-day-decision-taken-on-the-request-of-the-candidates/</link><pubDate>January 16, 2025, 8:49 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2025/01/5656.webp</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>पटना। बिहार लोक सेवा आयोग की 70वीं पीटी परीक्षा को रद्द करने की मांग को लेकर 2 जनवरी से संस्थापक प्रशांत किशोर आमरण अनशन पर हैं। आज गुरुवार को 14वें दिन प्रशांत किशोर आमरण अनशन को खत्म करने वाले हैं। वे आज दोपहर 2 बजे LCT घाट स्थित जनसुराज आश्र...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना। &lt;/strong&gt;बिहार लोक सेवा आयोग की 70वीं पीटी परीक्षा को रद्द करने की मांग को लेकर 2 जनवरी से संस्थापक प्रशांत किशोर आमरण अनशन पर हैं। आज गुरुवार को 14वें दिन प्रशांत किशोर आमरण अनशन को खत्म करने वाले हैं। वे आज दोपहर 2 बजे LCT घाट स्थित जनसुराज आश्रम (कैंप) में अपना आमरण अनशन खत्म करेंगे।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;खराब तबीयत में भी जारी रहा अनशन&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;इसके साथ ही सत्याग्रह के अगले चरण की घोषणा भी करेंगे। बता दें कि जनसुराज संस्थापक प्रशांत किशोर ने 2 जनवरी को पटना के गांधी मैदान से आमरण अनशन की शुरूआत की थी, लेकिन 6 जनवरी को पटना पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। देर शाम उन्हें सिविल कोर्ट से बिना शर्त जमानत भी मिल गई थी। 7 जनवरी को तबीयत खराब होने के बाद उन्हें इलाज के लिए पटना के मेदांता अस्पताल ले जाया गया था। तबीयत खराब होने के बाद भी उन्हें अपना अनशन खत्म नहीं किया था।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;11 जनवरी तबीयत बेहतर होने पर उन्हें अस्पताल में डिस्चार्ज कर दिया गया था। अभी 2 दिन पहले बीपीएससी अभ्यर्थी ने राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान से मुलाकात की थी। इस दौरान राज्यपाल ने अभ्यर्थियों से प्रशांत किशोर का अनशन खत्म करने की अपील की थी। हालांकि उसके बाद भी प्रशांत किशोर ने कहा था कि जब तक मांग पूरी नहीं हो जाती वह अपना अनशन जारी रखेंगे, लेकिन युवाओं और जनसुराज पार्टी नेताओं के अनुरोध पर उन्होंने अनशन तोड़ने का फैसला किया है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;री एग्जाम मुद्दे पर सुनवाई&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;वहीं दूसरी ओर BPSC 70वीं पीटी परीक्षा को रद्द करने की मांग और री-एग्जाम की मांग को लेकर जनसुराज की ओर से याचिका दायर की गई थी। जनसुराज के वकील प्रणव कुमार ने आर्टिकल 226 के तहत याचिका दायर की थी। जिस पर आज पटना हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। बुधवार को चीफ जस्टिस के फेयरवेल के कारण से सुनवाई को टाल दिया गया था।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>&amp;#8216;आरक्षण की सीमा 85%…&amp;#8217;, विधानसभा में तेजस्वी यादव और विजय सिन्हा के बीच कोल्ड वॉर</title><link>https://bihar.inkhabar.com/politics/reservation-limit-is-85-cold-war-between-tejashwi-yadav-and-vijay-sinha-in-the-assembly/</link><pubDate>November 26, 2024, 9:33 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/11/download-13-1-300x168.png</image><category>राजनीति</category><excerpt>पटना: बिहार विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन आज 26 नवंबर आरक्षण के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आए हैं. कांग्रेस और राजद विधायक विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. वहीं, इस मुद्दे पर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा कि महागठबंधन सरक...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना:&lt;/strong&gt; बिहार विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन आज 26 नवंबर आरक्षण के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आए हैं. कांग्रेस और राजद विधायक विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. वहीं, इस मुद्दे पर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा कि महागठबंधन सरकार में जातीय जनगणना करायी गयी थी.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;तेजस्वी यादव आरक्षण को लेकर खूब बरसे&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;तेजस्वी यादव ने कहा यह तो महागंठबंधन सरकार ने ही करवाया था. इसके बाद आरक्षण का दायरा बढ़ाया गया. इसे 50 से बढ़ाकर 65% कर दिया गया. पटना हाईकोर्ट ने इसे रद्द कर दिया. हमें और सीएम नीतीश को भी शक था कि बीजेपी के लोग कोर्ट जाएंगे और किसी तरह बढ़े हुए आरक्षण को रद्द करा देंगे. इन लोगों ने इसे अंजाम दे दिया.&lt;/p&gt;



&lt;h3 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;नीतीश सरकार पर किए सवाल&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;



&lt;p&gt;उन्होंने आगे कहा कि अब बिहार सरकार बताए कि 65 फीसदी आरक्षण कैसे लागू होगा? क्या इसे संविधान की 9वीं अनुसूची में शामिल करने के लिए कोई कदम उठाए जा रहे हैं? हमें बताइए। क्या केंद्र सरकार आरक्षण के पक्ष में है या नहीं? 65% आरक्षण संविधान की 9वीं अनुसूची में शामिल होगा या नहीं? मुझे बताओ।&lt;/p&gt;



&lt;h4 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;विजय सिन्हा ने तेजस्वी पर बोला जवाबी हमला&lt;/strong&gt;&lt;/h4&gt;



&lt;p&gt;वहीं, तेजस्वी यादव के आरोप पर डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने कहा कि बिना सबूत हमारे ऊपर गलत आरोप न लगाएं, बीजेपी के लोग पटना हाई कोर्ट गए और बढ़े हुए आरक्षण को रद्द कराया. तेजस्वी यादव झूठ बोल रहे हैं.&lt;/p&gt;



&lt;h4 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;पटना हाईकोर्ट पर सवाल उठा रहे तेजस्वी&lt;/strong&gt;&lt;/h4&gt;



&lt;p&gt;डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने कहा कि पटना हाईकोर्ट ने बढ़े हुए आरक्षण को रद्द कर दिया है. आप कोर्ट के फैसले पर सवाल उठा रहे हैं. आपके माता-पिता ने 15 वर्ष तक शासन किया। राजद शासनकाल में कितने लोगों को आरक्षण मिला? आप आरक्षण का मजाक उड़ा रहे हैं. मामला सुप्रीम कोर्ट में है.&lt;/p&gt;



&lt;h4 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;तेजस्वी ने आरक्षण की सीमा 85% बढ़ाने की मांग की&lt;/strong&gt;&lt;/h4&gt;



&lt;p&gt;वहीं, वॉकआउट से पहले तेजस्वी यादव ने बिहार में आरक्षण की सीमा बढ़ाकर 85% करने की मांग की. उन्होंने कहा कि कैबिनेट बैठक कर निरस्त किये गये आरक्षण कानून के मसौदे को संशोधित कर इस शीतकालीन सत्र को 2 दिन बढ़ाये और नया कानून बनाये.&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>पटना उच्च न्यायालय ने शिक्षकों को दिया बड़ा झटका, तबादले पर लगा ग्रहण</title><link>https://bihar.inkhabar.com/top-news/patna-high-court-gave-a-big-blow-to-teachers-transfer-was-put-on-hold/</link><pubDate>November 19, 2024, 9:30 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/11/kl-300x168.png</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>पटना: बिहार में तबादले का इंतजार कर रहे शिक्षकों को पटना उच्च न्यायालय ने बड़ा झटका दिया है. बिहार में शिक्षकों के ट्रांसफर-पोस्टिंग पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है. हाईकोर्ट ने बिहार सरकार से ट्रांसफर नीति को और स्पष्ट करने को कहा है. कोर्ट ने सर...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना:&lt;/strong&gt; बिहार में तबादले का इंतजार कर रहे शिक्षकों को पटना उच्च न्यायालय ने बड़ा झटका दिया है. बिहार में शिक्षकों के ट्रांसफर-पोस्टिंग पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है. हाईकोर्ट ने बिहार सरकार से ट्रांसफर नीति को और स्पष्ट करने को कहा है. कोर्ट ने सरकार को तीन हफ्ते का समय भी दिया है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;हलफनामा दाखिल होने पर होगा अंतिम फैसला&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;बता दें कि बिहार सरकार की तरफ से हलफनामा दाखिल होने के बाद इस मामले में अंतिम फैसला लिया जाएगा. हाल ही में बिहार में शिक्षकों के लिए ट्रांसफर-पोस्टिंग नीति लाई गई थी, जिसपर कोर्ट ने रोक लगा दी है. इतना ही नहीं शिक्षा विभाग च्वाइस पोस्टिंग के लिए आवेदन भी ले चुके थे।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;तीन सप्ताह का दिया गया समय&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;पटना हाईकोर्ट ने बिहार की नीतीश सरकार से तीन सप्ताह में इस मामले में सबकुछ स्पष्ट करने को कहा है. वहीं जस्टिस प्रभात कुमार सिंह की बेंच ने ट्रांसफर/पोस्टिंग नीति के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई की. हाईकोर्ट ने फिलहाल शिक्षकों के ट्रांसफर/पोस्टिंग पर लगाम लगा दी है। दूसरी तरफ शिक्षकों का कहना है कि बिहार सरकार इस मामले में गुमराह करने की कोशिश कर रही है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;सीनियर वकील ने मामले पर क्या कहा?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;सीनियर अधिवक्ता ललित किशोर ने कोर्ट को बताया कि सरकार ने शिक्षकों को 22 नवंबर 2024 तक ट्रांसफर/पोस्टिंग के लिए अपना विकल्प देने का निर्देश दिया था. साथ ही सरकार ने यह भी निर्देश दिया था कि अगर शिक्षक इस तय समय के भीतर अपना विकल्प नहीं देते हैं, तो सरकार उन्हें अपने हिसाब से पोस्टिंग कर देगी।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>CJI: जजों के वेतन रोकने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को लगाई फटकार</title><link>https://bihar.inkhabar.com/top-news/cji-supreme-court-reprimands-bihar-government-for-stopping-salaries-of-judges/</link><pubDate>October 1, 2024, 9:27 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/10/zxcvb-300x169.webp</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>पटना। हाईकोर्ट के जजों के बकाया वेतन जारी करने और न्यायिक अधिकारियों के लिए पेंशन निर्धारित करने के मुद्दे से संबंधित मामलों की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को कड़े निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘बिहार सरकार के वर्तमान ...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना।&lt;/strong&gt; हाईकोर्ट के जजों के बकाया वेतन जारी करने और न्यायिक अधिकारियों के लिए पेंशन निर्धारित करने के मुद्दे से संबंधित मामलों की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को कड़े निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘बिहार सरकार के वर्तमान जज न्यायाधीश आर.पी. मिश्रा का वेतन तुरंत उन्हें दिया जाए, जिनका हाईकोर्ट में प्रमोशन के बाद से सैलरी बाकी है।’&lt;br&gt;बिना वेतन के काम की उम्मीद कैसे?&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;सुनवाई चीफ जस्टिस ने की &lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;अदालत ने यह भी निर्देश दिए कि ‘किसी भी जज से वेतन के बिना काम करने की उम्मीद नहीं की जा सकती है।’इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया डी.वाई चंद्रचूड़, न्यायाधीश जे.बी पारदीवाला और न्यायाधीश मनोज मिश्रा की पीठ कर रही थी। इस दौरान गंभीरता से विचार करते हुए सीजेआई ने पटना हाईकोर्ट को फटकार लगाई। उन्होंने कहा, ‘जस्टिस आरपी मिश्रा का वेतन अभी तक उन्हें क्यों नहीं दिया गया? वे उन्हें वेतन देने से मना क्यों कर रहे हैं?&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;अन्य जजों की तरह सेवाएं प्राप्त करेंगे&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि उनके जैसे लोग हाईकोर्ट में नियुक्त होने पर अन्य सभी हाईकोर्ट जजों की तरह सेवाएं प्राप्त करेंगे। सुनवाई के दौरान पीठ ने यह भी कहा, ‘अगर जस्टिस मिश्रा जिला न्यायपालिका में कार्यरत रहते हुए नई पेंशन योजना के तहत शासित थे, लेकिन हाईकोर्ट में प्रमोशन होने पर वे दूसरे हाईकोर्ट न्यायाधीशों के बराबर सेवा शर्तों के अधीन शासित होंगे। जज को सेवा देने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कोर्ट ने राज्य सरकार को जस्टिस मिश्रा का वेतन बकाया राशि के साथ जारी करने का निर्देश दिया।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;7 जजों का वेतन जारी करने के निर्देश&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;सुनवाई के दौरान न्यायालय को याद दिलाया गया कि जस्टिस रुद्र प्रकाश मिश्रा को नवंबर 2023 में उच्च न्यायिक सेवाओं से हाईकोर्ट में प्रमोशन के बाद से अभी तक जीपीएफ नहीं दिया गया। हालांकि उन्होंने सभी औपचारिकताओं को पूर्ण कर लिया है। जज को प्रमोशन के बाद से अब तक वेतन नहीं मिला है। साल 2023 के मार्च में सुप्रीम कोर्ट ने इसी तरह के अंतरिम उपाय में पटना हाईकोर्ट के 7 जजों के वेतन को जारी करने का निर्देश दिया था, जो उनके जीपीएफ अकाउंट बंद करने के बाद से रोके गए थे।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>High Court: पीएम मोदी की जनसभा में बम ब्लास्ट करने वाले 6 आरोपियों की सजा में परिवर्तन, फांसी की सजा को बदला उम्र कैद में</title><link>https://bihar.inkhabar.com/top-news/high-court-change-in-sentence-of-6-accused-who-blasted-bomb-in-pm-modis-public-meeting-death-sentence-changed-to-life-imprisonment/</link><pubDate>September 11, 2024, 9:44 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/09/court-2-300x169.webp</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>पटना। राजधानी के गांधी मैदान में पीएम मोदी की सभा में बम ब्लास्ट करने वाले सभी 4 आरोपियों की सजा को हाईकोर्ट ने उम्र कैद की सजा में बदल दिया है।इन 4 आरोपियों को निचली अदालत ने फांसी की सजा सुनाई थी।11 सितंबर को कोर्ट ने इस मामले में अपना अहम फै...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना।&lt;/strong&gt; राजधानी के गांधी मैदान में पीएम मोदी की सभा में बम ब्लास्ट करने वाले सभी 4 आरोपियों की सजा को हाईकोर्ट ने उम्र कैद की सजा में बदल दिया है।इन 4 आरोपियों को निचली अदालत ने फांसी की सजा सुनाई थी।11 सितंबर को कोर्ट ने इस मामले में अपना अहम फैसला सुनाते हुए इन्हें उम्रकैद की सजा में बदल दिया।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;फांसी की सजा को बदला 30 साल कैद में&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;इस मामले में 4 दोषियों की फांसी की सजा को अब 30 साल कैद में बदल दिया गया है। वहीं आजीवन कारावास की सजा पाए गए 2 लोगों की सजा में कोई परिवर्तन नहीं किया है। सीरियल ब्लास्ट का ये मामला 27 अक्टूबर 2013 का है। जब गांधी मैदान पटना में नरेंद्र मोदी हुंकार रैली में एक जनसभा को संबोधित करने के लिए आए थे। आरोपियों ने निचली अदालत के फैसले को पटना हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;मामले में आज में सुनाया फैसला&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;इस मामले में पटना के गांधी मैदान थाने में शिकायत दर्ज कराई गई थी। जिसके बाद 31 अक्टूबर 2013 को एनआईए ने इस केस को अपने हाथ में ले लिया था। कोर्ट ने बुधवार को दोषी हैदर अली, इम्तियाज आलम, मोजिबुल्ला अंसारी और नुमान अंसारी की फांसी की सजा को बदल दिया है। न्यायाधीश आशुतोष कुमार की खंडपीठ ने इस मामले पर सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला अपने पास सुरक्षित रख लिया था। जिसे आज सुनाया है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;गृह मंत्री ने की एनआईए जांच की मांग&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;बता दें कि साल 2013 में जब ये घटना घटी थी। उस समय गांधी मैदान में बीजेपी की हुंकार रैली का आयोजन किया गया था। उसी दौरान पटना जंक्शन के प्लेटफॉर्म नंबर 10 पर स्थित सुलभ शौचालय के पास पहला बम धमाका हुआ। जिसके बाद एक के बाद एक गांधी मैदान के आस-पास के 6 इलाकों में बम धमाके हुए। इन धमाकों में 6 लोगों की मौत हो गई। इस घटना में 89 लोग घायल हो गए थे। इस घटना के बाद बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने तत्कालीन गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे से एनआईए जांच की मांग की थी।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>High Court: पटना हाईकोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला, ट्रेन से गिरकर हुई मौत पर दिया जाएगा 8 लाख का मुआवजा</title><link>https://bihar.inkhabar.com/states/high-court-patna-high-court-gave-a-big-decision-compensation-of-rs-8-lakh-will-be-given-in-case-of-death-due-to-falling-from-the-train/</link><pubDate>August 9, 2024, 5:44 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/08/qwsr-300x184.webp</image><category>राज्य</category><excerpt>पटना । राजधानी पटना हाईकोर्ट ने ट्रेन से गिरकर होने वाली मौतों के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने यह फैसला शुक्रवार को सुनाया है। उच्च न्यायलय ने रेलवे को ऐसे मामलों में 8 लाख रुपये मुआवजा देने के निर्देश दिए है। अदालत ने फैसला सुनाते ...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना ।&lt;/strong&gt; राजधानी पटना हाईकोर्ट ने ट्रेन से गिरकर होने वाली मौतों के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने यह फैसला शुक्रवार को सुनाया है। उच्च न्यायलय ने रेलवे को ऐसे मामलों में 8 लाख रुपये मुआवजा देने के निर्देश दिए है। अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि ट्रेन से गिरकर हुई मृतक पीड़ित के परिजन को कम से कम 8 लाख रुपये मुआवजा के तौर पर देना अनिवार्य है। न्यायाधीश सुनील दत्त मिश्रा की बेंच ने शत्रुघ्न साहू की तरफ से दायर याचिका पर सुनवाई के बाद यह फैसला लिया है। बिहार में ट्रेन से गिरकर मौत की घटनाएं आम बात है। हाईकोर्ट के इस फैसले से मृतकों के परिजनों को बड़ी राहत मिली है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;मुआवजा 8 लाख रुपये देने का ऐलान&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए रेल मंत्रालय की तरफ से 22 दिसंबर 2016 को जारी गजट नोटिफिकेशन का हवाला दिया। कोर्ट ने कहा कि मुआवजा को लेकर हो रही भ्रम को खत्म करने के लिए मुआवजा राशि 8 लाख रुपये कर दी गई है। कोर्ट ने रेलवे क्लेम न्यायाधिकरण के आदेश को संशोधित करते हुए कहा कि अगर ब्याज सहित मुआवजे की रकम 8 लाख रुपये से कम है तो उसे कम से कम 8 लाख रुपये का मुआवजा देना ही होगा।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;ये हैं पूरा मामला?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;कोर्ट फाइल में बताया गया है कि आवेदक के बेटे ने 1 जून 2014 को गया रेलवे स्टेशन जाने के लिए ट्रेन नंबर 53608 का सेकेंड क्लास का टिकट खरीदा था। अनुग्रह नारायण रोड रेलवे स्टेशन से टिकट खरीदने के बाद ट्रेन में चढ़ा, जहां ट्रेन में सवार यात्रियों की धक्का-मुक्की के कारण वह चलती ट्रेन से गिर गया। ट्रेन से उतरने के बाद बिपुल साव गंभीर रूप से जख्मी हो गया। उसे इलाज के लिए सदर अस्पताल नारायण लाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी जान चली गई।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt; पिता ने केस दायर किया&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;मृतक के पिता ने मुआवजा राशि के लिए पटना स्थित रेलवे क्लेम न्यायाधिकरण में मामला दर्ज कराया था। न्यायाधिकरण ने बेटे की मौत पर 12 प्रतिशत सालाना साधारण ब्याज के साथ चार लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया था। इस आदेश पर रेलवे ने फिर से विचार कर अर्जी दायर किया और ब्याज को चुनौती दी थी। न्यायाधिकरण ने अपने पूर्व के फैसले में संशोधन करते हुए छह प्रतिशत साधारण ब्याज देने का आदेश दिया था, जिसे हाईकोर्ट में आवेदक ने चुनौती दी थी। कोर्ट ने आवेदक और रेलवे की तरफ से पेश दलीलों की सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Bihar Reservation Policy: सुप्रीम कोर्ट से नीतीश सरकार को झटका, 65% आरक्षण आदेश पर रोक वाला फैसला रहेगा बरकरार</title><link>https://bihar.inkhabar.com/top-news/bihar-reservation-policy-shock-to-nitish-government-from-supreme-court-decision-banning-65-reservation-order-will-remain-intact/</link><pubDate>July 29, 2024, 6:40 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/07/download-2-11-300x169.png</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>पटना : बिहार की नीतीश सरकार को आज सोमवार (29 जुलाई) को उच्च न्यायालय से बड़ा झटका लगा है। बिहार में आरक्षण प्रतिशत को 65 प्रतिशत तक सीमित करने का पटना हाईकोर्ट का फैसला जारी रहेगा। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। शीर्ष अदा...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना &lt;/strong&gt;: बिहार की नीतीश सरकार को आज सोमवार (29 जुलाई) को उच्च न्यायालय से बड़ा झटका लगा है। बिहार में आरक्षण प्रतिशत को 65 प्रतिशत तक सीमित करने का पटना हाईकोर्ट का फैसला जारी रहेगा। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि वह सितंबर में इस मामले की विस्तार से सुनवाई करेगी। पटना हाईकोर्ट ने आरक्षण प्रतिशत बढ़ाने के बिहार सरकार के फैसले को रद्द कर दिया था। इसके बाद राज्य सरकार ने अपने फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;सुप्रीम कोर्ट ने किया इनकार&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। हाईकोर्ट ने बिहार सरकार के उस फैसले को रद्द कर दिया था, जिसमें सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में पिछड़े वर्गों के दाखिले में आरक्षण में इजाफा किया गया था। बिहार सरकार ने पिछड़े वर्ग, अनुसूचित जनजाति समाज से आने वाले लोगों को सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में दाखिले के लिए मिलने वाले आरक्षण की सीमा में 50 फीसदी से 65 फीसदी तक की छूट दी थी।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt; पटना हाई कोर्ट में दायर हुई कई याचिका&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;जब बिहार सरकार ने आरक्षण की सीमा बढ़ाई तो इस संबंध में पटना हाईकोर्ट में कई याचिकाएं दायर की गईं, जिसमें प्रदेश अध्यक्ष की संवैधानिक स्थिति को चुनौती दी गई। मार्च में हाईकोर्ट ने इस संबंध में दायर रिट याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। इसके बाद 20 जून को हाईकोर्ट ने बिहार सरकार को बड़ा झटका देते हुए सरकारी नौकरियों और दाखिले में 65 फीसदी की सीमा को रद्द कर दिया।&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Bihar Reservation : आरक्षण रद्द मामले में सामने आया मनोज झा का बयान, कहा &amp;#8211; हम दुर्भाग्यपूर्ण मानते…</title><link>https://bihar.inkhabar.com/states/bihar-reservation-manoj-jhas-statement-came-out-in-the-case-of-reservation-cancellation-said-we-consider-it-unfortunate/</link><pubDate>June 20, 2024, 8:32 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/06/download-6-2-300x168.png</image><category>राज्य</category><excerpt>पटना : बिहार सरकार द्वारा आरक्षण बढ़ाने के फैसले को पटना हाईकोर्ट ने आज गुरुवार को रद्द कर दिया है. हाईकोर्ट ने आज बिहार के उस कानून को ख़ारिज कर दिया, जिसमें पिछड़ा वर्ग, अत्यंत पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण 50 फीस...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना :&lt;/strong&gt; बिहार सरकार द्वारा आरक्षण बढ़ाने के फैसले को पटना हाईकोर्ट ने आज गुरुवार को रद्द कर दिया है. हाईकोर्ट ने आज बिहार के उस कानून को ख़ारिज कर दिया, जिसमें पिछड़ा वर्ग, अत्यंत पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण 50 फीसदी से बढ़ाकर 65 परसेंट कर दिया गया था. इसके बाद से अब लोगों को जाति आधारित 65 फीसदी आरक्षण नहीं दिया जाएगा. ऐसे में राजद नेता मनोज झा का बड़ा बयान सामने आया है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;मनोज झा ने कहा ऐसे फैसले फासले बढ़ाते&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;बता दें कि आरक्षण रद्द को लेकर पटना हाईकोर्ट ने पिछड़ा वर्ग, OBC और SC-ST के लिए 65% आरक्षण को रद्द करने पर राजद नेता मनोज कुमार झा ने कहा, &amp;#8220;…आरक्षण को लेकर जो दायरा नीतीश-तेजस्वी की सरकार में जो बढ़ाया था, उस पर जो रोक लगी है उसे हम दुर्भाग्यपूर्ण मानते हैं। ऐसे फैसले फासले बढ़ाते हैं… तमिलनाडु को भी बहुत समय लगा था, हम भी तैयार हैं… पर्दे के पीछे से ये कौन लोग हैं जो ये काम करवाने के लिए उत्सुक हैं.&lt;/p&gt;



&lt;figure class=&quot;wp-block-embed is-type-rich is-provider-twitter wp-block-embed-twitter&quot;&gt;&lt;div class=&quot;wp-block-embed__wrapper&quot;&gt;
&lt;blockquote class=&quot;twitter-tweet&quot; data-width=&quot;500&quot; data-dnt=&quot;true&quot;&gt;&lt;p lang=&quot;hi&quot; dir=&quot;ltr&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://twitter.com/hashtag/WATCH?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc%5Etfw&quot;&gt;#WATCH&lt;/a&gt; पटना: पटना हाईकोर्ट द्वारा पिछड़ा वर्ग, OBC और SC-ST के लिए 65% आरक्षण को रद्द करने पर राजद नेता मनोज कुमार झा ने कहा, &amp;quot;&amp;#8230;आरक्षण को लेकर जो दायरा नीतीश-तेजस्वी की सरकार में जो बढ़ाया था, उस पर जो रोक लगी है उसे हम दुर्भाग्यपूर्ण मानते हैं। ऐसे फैसले फासले बढ़ाते हैं&amp;#8230;… &lt;a href=&quot;https://t.co/TqnfucZeMo&quot;&gt;pic.twitter.com/TqnfucZeMo&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; ANI_HindiNews (@AHindinews) &lt;a href=&quot;https://twitter.com/AHindinews/status/1803696988149407782?ref_src=twsrc%5Etfw&quot;&gt;June 20, 2024&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt;&lt;script async src=&quot;https://platform.twitter.com/widgets.js&quot; charset=&quot;utf-8&quot;&gt;&lt;/script&gt;
&lt;/div&gt;&lt;/figure&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;इन्होने दायर किया याचिका&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;यूथ फॉर इक्वैलिटी नाम के संगठन ने पटना हाईकोर्ट में इस आरक्षण के मुद्दे को लेकर चुनौती दी थी. उसके अपील पर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की बेंच ने आरक्षण बढ़ाने वाले इस कानून को ख़ारिज करते हुए प्रदेश की नीतीश सरकार को बड़ा झटका दिया है. गौरव कुमार समेत कुछ और याचिकाकर्ताओं ने आरक्षण के मामले को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिस पर 11 मार्च को सुनावाई होने के बाद फैसला सुरक्षित रखा गया था. जिसे आज गुरुवार, 20 जून को कोर्ट की तरफ से सुनाया गया.&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Bihar Reservation: नीतीश सरकार को पटना हाईकोर्ट का झटका, ये आरक्षण हुए खत्म</title><link>https://bihar.inkhabar.com/top-news/bihar-reservation-patna-high-courts-blow-to-nitish-government-these-reservations-ended/</link><pubDate>June 20, 2024, 6:31 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/06/download-2-5-300x169.png</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>पटना : पटना हाईकोर्ट की तरफ से आरक्षण के मुद्दे पर बिहार की नीतीश सरकार को बड़ा झटका लगा है. पटना हाईकोर्ट ने ईबीसी, एससी और एसटी के लिए 65 परसेंट आरक्षण बढ़ाने के सरकारी निर्णय को रद्द कर दिया है. हाईकोर्ट ने प्रदेश में सरकारी नौकरी और उच्च शैक...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना : &lt;/strong&gt;पटना हाईकोर्ट की तरफ से आरक्षण के मुद्दे पर बिहार की नीतीश सरकार को बड़ा झटका लगा है. पटना हाईकोर्ट ने ईबीसी, एससी और एसटी के लिए 65 परसेंट आरक्षण बढ़ाने के सरकारी निर्णय को रद्द कर दिया है. हाईकोर्ट ने प्रदेश में सरकारी नौकरी और उच्च शैक्षणिक संस्थानों के दाखिले में जाति आधारित आरक्षण बढ़ाकर 65 प्रतिशत करने वाले कानून को ख़ारिज करते हुए राज्य सरकार को झटका दिया है.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;महागठबंधन की सरकार में बढ़ाया गया था आरक्षण&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;बता दें कि सीएम नीतीश कुमार के नेतृत्व में महागठबंधन सरकार ने जाति आधारित सर्वे की रिपोर्ट के आधार पर OBC , EBC , दलित और आदिवासियों का आरक्षण बढ़ाकर 65 परसेंट कर दिया था. आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों (सवर्ण) को मिलने वाले 10 फीसदी आरक्षण को मिलाकर बिहार में नौकरी और दाखिले का कोटा बढ़कर 75 फीसदी था.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;यूथ फॉर इक्वैलिटी संगठन ने दायर किया था याचिका&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;हालांकि यूथ फॉर इक्वैलिटी नाम के संगठन ने पटना हाईकोर्ट में इस आरक्षण के मुद्दे को लेकर चुनौती दी थी. उसके अपील पर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की बेंच ने आरक्षण बढ़ाने वाले इस कानून को ख़ारिज करते हुए प्रदेश की नीतीश सरकार को बड़ा झटका दिया है. गौरव कुमार समेत कुछ और याचिकाकर्ताओं ने आरक्षण के मामले को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिस पर 11 मार्च को सुनावाई होने के बाद फैसला सुरक्षित रखा गया था. जिसे आज गुरुवार, 20 जून को कोर्ट की तरफ से सुनाया गया. चीफ जस्टिस के वी चंद्रन की खंडपीठ ने इस मामले पर लंबी सुनवाई की थी. जिसके बाद आज कोर्ट का फैसला सामने आया है। जिसमें कोर्ट ने 65 परसेंट आरक्षण को रद्द कर दिया है.&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Patna High Court: हाई कोर्ट ने बिहार शिक्षक भर्ती पर लगाई रोक,बीपीएससी ने TRE-3 में कुल 87 हजार से ज्यादा पदों पर निकाली भर्ती</title><link>https://bihar.inkhabar.com/states/patna-high-court-high-court-bans-bihar-teacher-recruitment-bpsc-recruits-more-than-87-thousand-posts-in-tre-3/</link><pubDate>May 30, 2024, 4:40 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/05/court-300x169.png</image><category>राज्य</category><excerpt>पटना। पटना हाई कोर्ट( Patna High Court) ने तीसरे चरण में शिक्षक पदों पर होने वाली भर्तियों पर फिलहाल रोक लगा दी है। शिक्षक भर्ती के लिए 7 फरवरी को विज्ञापन( Patna High Court) जारी किए गए थे। संख्या 22/2024 पर हाई कोर्ट ने रोक लगा दी है। परीक्षा...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना।&lt;/strong&gt; पटना हाई कोर्ट( Patna High Court) ने तीसरे चरण में शिक्षक पदों पर होने वाली भर्तियों पर फिलहाल रोक लगा दी है। शिक्षक भर्ती के लिए 7 फरवरी को विज्ञापन( Patna High Court) जारी किए गए थे। संख्या 22/2024 पर हाई कोर्ट ने रोक लगा दी है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;परीक्षा के आधार पर होगी भर्ती&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;इस विज्ञापन के जरिए परीक्षा के आधार पर शिक्षकों के 87,784 पदों को भरा जाएगा। न्यायमूर्ति अंजनी कुमार शरण की एकलपीठ ने संदी कुमार झा समेत 10 अतिरिक्त लोगों के साथ दायर की गई अर्जी पर सुनवाई के बाद अपना फैसला लिया। इसके अलावा हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को 1 महीने के अंदर अनुबंध शिक्षकों की तरह गेस्ट को टीचरों को भी मद्देनजर रखने के बारे में आखिरी निर्णय लेने का आदेश दिया है। कोर्ट ने गेस्ट टीचरों को रोजगार के हर साल के लिए 5 अंक और अधिकतम 25 अंक देने पर राज्य सरकार को जल्दी ही फैसला लेने को कहा गया है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;भर्ती के लिए जारी किए गए थे विज्ञापन&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;आवेदकों की तरफ से अधिवक्ता नित्यानंद मिश्रा और आलोक अभिनव ने कोर्ट को बताया कि शिक्षा विभाग ने अतिथि शिक्षकों की भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किए थे। शिक्षकों के पद पर आए आवेदको की भर्ती के बाद गेस्ट टीचर अपने कर्तव्यों का पालन करने लगें है। यहीं नहीं इन्हें लोकसभा, विधानसभा और पंचायत चुनाव समेत परीक्षा केंद्र पर और मूल्यांकन कार्यों में लगाया गया। कई गेस्ट शिक्षकों को दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड में पीठासीन अधिकारी व मतदान के अधिकारी बना कर भेजा भी जाएगा।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;अनुबंध व गेस्ट शिक्षक में कोई फर्क नहीं है।&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;आवेदकों के अधिवक्ताओं ने कोर्ट को बताया कि अनुबंध शिक्षक व गेस्ट शिक्षक दोनों एक समान कर्तव्यों का पालन कर रहे है। दोनों बतौर शिक्षक स्कूलों में छात्रों को पढ़ा रहे है। अनुबंध शिक्षक और गेस्ट शिक्षक दोनों के बीच कोई फर्क नहीं है। उनका कहना था कि अतिथि शिक्षक को रोजगार के प्रत्येक 1 साल के लिए 5 अंक और अनुबंध शिक्षको को दिए जाने वाले अधिकतम 25 अंकों की तरह भी इसका हकदार होना चाहिए।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Bihar News : बी-फार्मा व एम-फार्मा नहीं बन सकते फार्मासिस्ट</title><link>https://bihar.inkhabar.com/top-news/b-pharma-and-m-pharma-cannot-become-pharmacists/</link><pubDate>December 3, 2023, 5:48 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/12/13-300x225.png</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>पटना। आज बहुत से लोग से अंजान हैं कि बी-फार्मा, एम-फार्मा व डिप्लोमा के पाठ्यक्रम बिल्कुल अलग हैं। जिसमें से सिर्फ डिप्लोमा इन फार्मेसी डिग्रीधारी ही सरकारी विभाग में फार्मासिस्ट बनने की योग्यता रखते हैं। जबकि बी &amp;#8211; फार्मा या एम -फार्मा कर...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना।&lt;/strong&gt; आज बहुत से लोग से अंजान हैं कि बी-फार्मा, एम-फार्मा व डिप्लोमा के पाठ्यक्रम बिल्कुल अलग हैं। जिसमें से सिर्फ डिप्लोमा इन फार्मेसी डिग्रीधारी ही सरकारी विभाग में फार्मासिस्ट बनने की योग्यता रखते हैं। जबकि बी &amp;#8211; फार्मा या एम -फार्मा करने वाले लोग सरकारी विभाग में फार्मासिस्ट नहीं बन सकते। बी-फार्मा व एम-फार्मा दवा-कास्मेटिक निर्माण की फैक्ट्रियों या औषधि निरीक्षक अथवा औषधि नियंत्रण निदेशालय के उच्चतर पदों के योग्य होते हैं। बता दें कि यह आदेश हाईकोर्ट की फुल बेंच ने दिया है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;जानें हाईकोर्ट का आदेश&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;अब ऐसे में बी-फार्मा व एम-फार्मा योग्यताधारी, जिनके पास डिप्लोमा इन फार्मेसी की डिग्री नहीं है, वे फार्मासिस्ट नहीं बन सकते हैं। दरअसल, राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम फार्मासिस्ट एसोसिएशन की तरफ से स्वास्थ्य विभाग में फार्मासिस्ट के रिक्त पदों पर बी-फार्मा डिग्रीधारी को अवसर प्रदान करने के लिए अरविंद कुमार ने याचिका दायर की थी। जिसपर हाईकोर्ट की फुल बेंच ने भी यथावत ये आदेश रखा है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;निर्णय के विरुद्ध दिखे याची&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;बता दें कि न्यायामूर्ति गुन्नू अनुपमा चक्रवर्ती ने 10 जनवरी 2023 को खंडपीठ के निर्णय को पारित कर दिया था। डिप्लोमा फार्मासिस्ट आर्गेनाइजेशन के अध्यक्ष अरविंद कुमार के अनुसार हाईकोर्ट के निर्णय के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी लेकिन उन्होंने कोई हस्तक्षेप नहीं किया।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Bihar Reservation: आरक्षण सीमा बढ़ाने के खिलाफ याचिका पर बोले सुशील मोदी, लिया 2 पार्टियों का नाम का बताया</title><link>https://bihar.inkhabar.com/top-news/bihar-reservation-sushil-modi-spoke-on-the-petition-against-increasing-the-reservation-limit-took-the-names-of-2-parties/</link><pubDate>November 28, 2023, 8:04 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/11/4-7-300x184.png</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>पटना। बिहार में सियासी सरगर्मी बढ़ी हुई है। प्रदेश में इस समय आरोप और प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है। बता दें कि बिहार में बढ़ाई गई आरक्षण की सीमा के खिलाफ पटना हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। जिस पर बिहार में राजनीति शुरू हो गई है। इस...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना।&lt;/strong&gt; बिहार में सियासी सरगर्मी बढ़ी हुई है। प्रदेश में इस समय आरोप और प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है। बता दें कि बिहार में बढ़ाई गई आरक्षण की सीमा के खिलाफ पटना हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। जिस पर बिहार में राजनीति शुरू हो गई है। इस बीच जेडीयू नेता और मंत्री अशोक चौधरी ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि यह तो पता ही था कि होगा। अब इस पर बीजेपी नेता और राज्यसभा सांसद सुशील कुमार मोदी ने सोमवार को बयान जारी करते हुए दो पार्टियों पर साजिश करने का आरोप लगाया।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;पूर्व उपमुख्यमंत्री ने याद गिनाए बीजेपी के कार्य&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;सुशील कुमार मोदी ने कहा कि बीजेपी ने बिहार में जाति आधारित सर्वे कराने से लेकर आरक्षण की सीमा बढ़ाने वाले विधेयक तक हर स्तर पर समर्थन किया, लेकिन पार्टी को बदनाम करने की साजिश के तहत आरजेडी-कांग्रेस ने आरक्षण सीमा बढ़ाने के विरुद्ध हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर करा दी। जिसका नतीजा सबको पता है। देश पर 55 साल राज करने वाली कांग्रेस ने काका कालेलकर समिति से मंडल आयोग तक हमेशा पिछड़ों-दलितों के आरक्षण का विरोध किया। आरजेडी ने 2001 में पिछड़ों को आरक्षण दिए बिना बिहार में पंचायत चुनाव कराए थे। पंचायतों में पिछड़ों को आरक्षण तब मिला, जब बीजेपी और सहयोगी दलों की सरकार बनी। सुशील मोदी ने कहा कि जब बिहार की कर्पूरी ठाकुर सरकार ने पिछड़े वर्गों को पहली बार नौकरी में 27 प्रतिशत आरक्षण दिया था।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;कांग्रेस-आरजेडी पर निशाना साधा&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;इस दौरान प्रधानमंत्री का नाम लेते हुए सुशील मोदी ने कहा कि पिछड़े-गरीब परिवार से आने वाले पीएम नरेंद्र मोदी ने सामान्य वर्ग के गरीबों को 10 फीसदी आरक्षण देने के लिए आरक्षण को 50 फीसदी की अधिकतम सीमा तक तोड़ कर जो रास्ता दिखाया, बिहार सरकार ने उसी का अनुसरण किया। आरजेडी-कांग्रेस गरीब, पिछड़े और वंचित वर्गों के साथ खड़ी बीजेपी को बर्दाश्त नहीं कर पाते इसलिए वो कोर्ट-कचहरी के जरिए राजनीति करते हैं।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;सीएम नीतीश के बयान पर क्या बोले पूर्व उपमुख्यमंत्री&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;वहीं जेडीयू के भीम संसद कार्यक्रम को लेकर सुशील मोदी ने कहा कि नीतीश कुमार का यह कहना सही है कि 2005 के पहले दलितों पर ध्यान नहीं दिया जाता था। आरजेडी सरकार के समय लक्ष्मणपुर बाथे, बथानी टोला जैसे दर्जन भर बड़े नरसंहार हुए लेकिन आज आरजेडी दलितों की हितैषी बन रहा है और खूनी इतिहास को भुलाना चाहती है।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Bihar Reservation: आरक्षण के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका पर ललन सिंह ने बीजेपी पर लगाया आरोप</title><link>https://bihar.inkhabar.com/top-news/bihar-reservation-lalan-singh-blames-bjp-on-petition-in-high-court-against-reservation/</link><pubDate>November 27, 2023, 12:42 pm</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/11/12-3-300x225.png</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>पटना। बिहार की नई आरक्षण नीति के खिलाफ पटना हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। यह महागठबंधन सरकार के लिए बड़ा झटका बताया जा रहा है। वहीं, इसे लेकर जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने सोमवार को प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बीजेपी पर हमला बोल...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना।&lt;/strong&gt; बिहार की नई आरक्षण नीति के खिलाफ पटना हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। यह महागठबंधन सरकार के लिए बड़ा झटका बताया जा रहा है। वहीं, इसे लेकर जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने सोमवार को प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा कि पटना हाई कोर्ट में बीजेपी ने याचिका दाखिल कराई है। उन्होंने कहा कि बीजेपी आरक्षण विरोधी है। बीजेपी नहीं चाहती थी कि आरक्षण का दायरा बढ़ाया जाए।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;ललन सिंह ने बीजेपी पर निशाना साधा&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने कहा कि आंकड़ा हम लोगों के पास है। वह न्यायालय में पेश किया जाएगा। हमारे पास सभी तथ्य हैं। बीजेपी हर बात पर न्यायालय में जाती है। इससे पहले नगर निकाय का चुनाव रुकवाने के लिए भी बीजेपी कोर्ट में गई थी, लेकिन नगर निकाय का चुनाव हुआ। ललन सिंह ने कहा कि आरक्षण व्यवस्था के साथ यही हुआ। बिहार सरकार जाति आधारित जनगणना करा रही थी तो उसको भी रुकवाने के लिए बीजेपी, पटना हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक गई।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;आरक्षण का दायरा बढ़ाने पर याचिका दायर&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;बता दें कि बिहार सरकार द्वारा आरक्षण का दायरा बढ़ाने के फैसले पर पटना हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है। इस दौरान पटना सिविल सोसाइटी की ओर से कोर्ट में याचिका दायर की गई। जिसकी एक कॉपी बिहार के महाधिवक्ता पीके शाही के ऑफिस को भेजी गई है। याचिकाकर्ता ने यह दलील देते हुए तत्काल रोक लगाने की मांग की है कि ये मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Bihar Reservation: महागठबंधन की आरक्षण मुहिम को बड़ा झटका, पटना हाईकोर्ट में दायर याचिका</title><link>https://bihar.inkhabar.com/top-news/bihar-reservation-big-blow-to-grand-alliances-reservation-campaign-petition-filed-in-patna-high-court/</link><pubDate>November 27, 2023, 11:25 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/11/9-5-300x225.png</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>पटना। महागठबंधन के द्वारा क्षेणी गई आरक्षण की मुहिम को बड़ा झटका लगा है। बताया जा रहा है कि इसे लेकर पटना हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। इस याचिका की कॉपी को एडवोकेट जनरल के पास भेजी गई है। दरअसल, बिहार में 65% आरक्षण को पटना हाईकोर्ट में च...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना।&lt;/strong&gt; महागठबंधन के द्वारा क्षेणी गई आरक्षण की मुहिम को बड़ा झटका लगा है। बताया जा रहा है कि इसे लेकर पटना हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। इस याचिका की कॉपी को एडवोकेट जनरल के पास भेजी गई है। दरअसल, बिहार में 65% आरक्षण को पटना हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। इस दौरान याचिकाकर्ता ने दलीलें दी हैं कि ये मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। बता दें कि जाति आधारित जनगणना की रिपोर्ट आने के बाद बिहार सरकार ने आरक्षण का दायरा बढ़ाने का निर्णय लिया। जिसके बाद इसे लेकर विधेयक सर्वसम्मति से विधानसभा में पास करा लिया।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;याचिकाकर्ताओं की दलील&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;वहीं जानकारी के अनुसार ये जनहित याचिका गौरव कुमार व नमन श्रेष्ठ द्वारा दायर की गई है। इस याचिका की एक कॉपी बिहार के महाधिवक्ता पीके शाही के ऑफिस में भी भेजी गई। जिसके अंतर्गत याचिकाकर्ता ने इस पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। इस बीच याचिकाकर्ता ने दलीलें पेश करते हुए कहा कि ये मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व देने के लिए आरक्षण की व्यवस्था की गई थी न कि जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण देने का प्रावधान किया गया था। इन दलीलों के अनुसार 2023 का जो संशोधित अधिनियम बिहार सरकार ने पारित किया है, वह भारतीय संविधान के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;शीतकालीन सत्र में पारित हुआ बिल&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;दरअसल, बिहार सरकार ने सरकारी नौकरी और स्कूल संस्थानों में पिछड़ा, अतिपिछड़ा, दलित और महादलित को मिलने वाले आरक्षण को 50 फीसदी से बढ़ाकर 65 फीसदी कर दिया है। इसके अलावा बिहार में कुल आरक्षण का दायरा 75 फीसदी पहुंच चुका है। इसमें अगड़ी जातियों में से आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों के लिए 10 फीसदी आरक्षण देने की सीमा है। जबकि बिहार विधानमंडल के शीतकालीन सत्र में विधानसभा और विधानपरिषद से सर्वसम्मति से आरक्षण संसोधन बिल 2023 पारित हुआ। इस बिल को राज्यपाल के पास मंजूरी के लिए भेजा गया था। जहां राज्यपाल ने इसको मंजूरी दे दी है और यह लागू हो गया है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;सीएम नीतीश ने किया था ऐलान&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;गौरतलब है कि बिहार सरकार ने खुद से राज्य में जाति आधारित जनगणना करवाई थी। इसके साथ ही सरकार ने आर्थिक सर्वे भी कराया। बिहार सरकार ने इसकी रिपोर्ट को विधानसभा में पेश किया। जहां चर्चा के दौरान सीएम नीतीश ने आरक्षण के मौजूदा दायरा को बढ़ाने का ऐलान किया था। जिसके लिए सीएम नीतीश ने आरक्षित वर्ग की जनसंख्या और उसकी आर्थिक स्थिति को आधार बनाया।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>आज होगी जातीय आधारित गणना से जुड़ी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, पटना हाई कोर्ट के फैसले को दी गई है चुनौती</title><link>https://bihar.inkhabar.com/top-news/hearing-will-be-held-in-the-supreme-court-today-on-the-petitions-related-to-caste-based-census-the-decision-of-patna-high-court-has-been-challenged/</link><pubDate>September 6, 2023, 10:51 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/09/download3-300x169.png</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>पटना। सुप्रीम कोर्ट आज पटना उच्च न्यायालय के बिहार में जाति आधारित सर्वेक्षण को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज करने के आदेश के खिलाफ दायर विशेष अनुमति याचिकाओं पर आज सुनवाई करेगा। केंद्र सरकार ने हलफनामा वापस ले लिया था शीर्ष अदालत की वेबसा...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना।&lt;/strong&gt; सुप्रीम कोर्ट आज पटना उच्च न्यायालय के बिहार में जाति आधारित सर्वेक्षण को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज करने के आदेश के खिलाफ दायर विशेष अनुमति याचिकाओं पर आज सुनवाई करेगा।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;केंद्र सरकार ने हलफनामा वापस ले लिया था&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;शीर्ष अदालत की वेबसाइट अनुसार न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और एसवीएन भट्टी की पीठ मामले की सुनवाई जारी रखेगी। पिछले हफ्ते केंद्र सरकार ने अपना हलफनामा वापस ले लिया था, जिसमें कहा गया कि उसके अलावा जनगणना जैसी प्रक्रिया करने का हकदार कोई और नहीं है। केंद्रीय गृह मंत्रालय में रजिस्ट्रार जनरल के कार्यालय द्वारा दायर नए हलफनामे में यह कहते हुए पैराग्राफ को वापस ले लिया गया कि संविधान के तहत या अन्यथा कोई अन्य निकाय जनगणना या जनगणना के समान कोई और कार्रवाई करने का हकदार नहीं है। पिछली सुनवाई में जब केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि वह संवैधानिक और कानूनी स्थिति को रिकॉर्ड पर रखना चाहते हैं। तब सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को अपना जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह की अनुमति दी थी।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;शीर्ष अदालत में याचिकाकर्ताओं की दलीलें&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;शीर्ष अदालत के सामने याचिकाकर्ताओं ने यह दलीलें दी थी कि सर्वेक्षण प्रक्रिया गोपनीयता के कानून का उल्लंघन करती है और केवल केंद्र सरकार के पास ही भारत में जनगणना करने का अधिकार है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार के पास जाति आधारित जनगणना के संचालन पर निर्णय लेने और उसे अधिसूचित करने का कोई अधिकार नहीं है। शीर्ष अदालत ने सर्वेक्षण प्रक्रिया या सर्वेक्षण के परिणामों के प्रकाशन पर रोक लगाने के लिए कोई अंतरिम आदेश पारित करने से इनकार कर दिया था, हालांकि यह तर्क दिया गया था कि डेटा के प्रकाशन के बाद मामला व्यर्थ ही हो जाएगा।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;ट्रांसजेंडर समुदाय &amp;#8216;लिंग&amp;#8217; की बजाय &amp;#8216;जाति&amp;#8217;&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;नीतीश कुमार की राज्य सरकार ने कहा है कि बिहार में जाति आधारित सर्वेक्षण पूरा हो चुका है और जल्दी ही परिणाम सार्वजनिक हो जाऐंग। राज्य की जाति सर्वेक्षण प्रक्रिया में ट्रांसजेंडर समुदाय को &amp;#8216;लिंग&amp;#8217; की श्रेणी के बजाय &amp;#8216;जाति&amp;#8217; के रूप में वर्गीकृत करने के बिहार सरकार के फैसले को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत के सामने एक और याचिका दायर की गई है।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>जातीय गणना: हाईकोर्ट के फैसले पर बोले लालू यादव, सीएम और तेजस्वी की कड़ी मेहनत का नतीजा</title><link>https://bihar.inkhabar.com/states/caste-enumeration-lalu-yadav-said-on-the-decision-of-the-high-court-the-result-of-hard-work-of-cm-and-tejashwi/</link><pubDate>August 1, 2023, 11:49 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/08/download-2023-08-01T171852.279-300x169.png</image><category>राज्य</category><excerpt>पटना। बिहार में जातिगत जनगणना पर आज फैसला सुनाया गया है। पटना हाई कोर्ट द्वारा फैसला सुनाते हुए जातिगत जनगणना पर से रोक हटा दी गई है। पटना उच्च न्यायलय के फैसले से जदयू और राजद खेमे में ख़ुशी है। सत्तारूढ़ दल बीजेपी पर इसे लेकर हमलावर हो गये हैं।...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना। &lt;/strong&gt;बिहार में जातिगत जनगणना पर आज फैसला सुनाया गया है। पटना हाई कोर्ट द्वारा फैसला सुनाते हुए जातिगत जनगणना पर से रोक हटा दी गई है। पटना उच्च न्यायलय के फैसले से जदयू और राजद खेमे में ख़ुशी है। सत्तारूढ़ दल बीजेपी पर इसे लेकर हमलावर हो गये हैं। इसी बीच बिहार के पूर्व सीएम एवं राजद प्रमुख लालू यादव का बयान भी सामने आया है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;सीएम और तेजस्वी की कड़ी मेहनत&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;मीडिया से बात करते हुए राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने कहा कि हम हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं। यह सिर्फ एक फैसला नहीं है बल्कि गरीबों के लिए फैसला है। इससे उनके लिए दरवाजे खुलेंगे। उनके सर्वेक्षण के बाद, उनकी आर्थिक स्थिति का पता चलेगा और उस आधार पर सरकार उनके लिए योजनाओं का मसौदा तैयार करेगी और इससे विकास के द्वार खुलेंगे। मैं CM और तेजस्वी यादव को धन्यवाद देता हूं, उन्होंने कड़ी मेहनत की।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;जानिए अब तक क्या-क्या हुआ&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;बता दें कि बिहार में 7 जनवरी से जातिगत जनगणना की शुरुआत हुई थी। 15 अप्रैल से दूसरे चरण की शुरुआत हुई थी। 21 अप्रैल को मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा जहां एससी ने हाईकोर्ट जाने को कहा। 2 और 3 मई को सुनवाई के बाद इस मामले में पटना उच्च न्यायालय ने फैसला सुरक्षित रख लिया। इसके बाद हाईकोर्ट ने 4 मई को गणना पर रोक लगा दी। हाईकोर्ट ने 3 जुलाई को सुनवाई की अगली तारीख रखी। जिसमें बिहार सरकार की तरफ से जल्द सुनवाई की अपील की गयी। हाई कोर्ट ने जल्द सुनवाई से इंकार कर दिया।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;पहले भी हुई थी जातिगत गणना&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;11 मई को बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर किया। 19 मई को सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को हाईकोर्ट जाने को कहा। 3 और 4 जुलाई को हाई कोर्ट में बहस हुई, जिसमें फैसला सुरक्षित रख लिया गया और आज सारी याचिकाएं खारिज करते हुए जनगणना कराने की मंजूरी दे दी गयी है। बता दें कि देश में सबसे पहले जातिगत जनगणना 1931 में हुई थी। 1941 में इसका डेटा एकत्रित कर लिया गया था लेकिन इसे सार्वजानिक नहीं किया गया।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>जातीय गणना: हाईकोर्ट के फैसले पर बोले मंत्री विजय चौधरी, &amp;#8216;बीजेपी एक्सपोज हो गई&amp;#8217;</title><link>https://bihar.inkhabar.com/politics/caste-enumeration-minister-vijay-chowdhary-said-on-the-decision-of-the-high-court-bjp-has-been-exposed/</link><pubDate>August 1, 2023, 11:34 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/08/download-2023-08-01T170337.983-300x169.png</image><category>राजनीति</category><excerpt>पटना। बिहार में जातिगत जनगणना पर आज फैसला सुनाया गया है। पटना हाई कोर्ट द्वारा फैसला सुनाते हुए जातिगत जनगणना पर से रोक हटा दी गई है। पटना उच्च न्यायलय के फैसले से जदयू और राजद खेमे में ख़ुशी है। सत्तारूढ़ दल बीजेपी पर इसे लेकर हमलावर हो गये हैं।...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना। &lt;/strong&gt;बिहार में जातिगत जनगणना पर आज फैसला सुनाया गया है। पटना हाई कोर्ट द्वारा फैसला सुनाते हुए जातिगत जनगणना पर से रोक हटा दी गई है। पटना उच्च न्यायलय के फैसले से जदयू और राजद खेमे में ख़ुशी है। सत्तारूढ़ दल बीजेपी पर इसे लेकर हमलावर हो गये हैं। मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि भाजपा एक्सपोज हो गई है जबकि बिहार सरकार की नीति और नीयत की जीत हुई है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;बीजेपी ने डाला बाधा&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;मंत्री विजय चौधरी ने हाईकोर्ट के फैसले को स्वागत योग्य बताते हुए समाज के लिए प्रगतिशील बताया। उन्होंने कहा कि इस फैसले से पता चलेगा कि समाज में कमजोर वर्ग की कितनी संख्या है। इससे सरकार को उनके लिए विकास की योजना बनाने में मदद मिलेगी। इस दौरान उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि बीजेपी ने जातिगत जनगणना में बाधा डालने का काम किया।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;जानिए अब तक क्या-क्या हुआ&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;बता दें कि बिहार में 7 जनवरी से जातिगत जनगणना की शुरुआत हुई थी। 15 अप्रैल से दूसरे चरण की शुरुआत हुई थी। 21 अप्रैल को मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा जहां एससी ने हाईकोर्ट जाने को कहा। 2 और 3 मई को सुनवाई के बाद इस मामले में पटना उच्च न्यायालय ने फैसला सुरक्षित रख लिया। इसके बाद हाईकोर्ट ने 4 मई को गणना पर रोक लगा दी। हाईकोर्ट ने 3 जुलाई को सुनवाई की अगली तारीख रखी। जिसमें बिहार सरकार की तरफ से जल्द सुनवाई की अपील की गयी। हाई कोर्ट ने जल्द सुनवाई से इंकार कर दिया।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;पहले भी हुई थी जातिगत गणना&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;11 मई को बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर किया। 19 मई को सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को हाईकोर्ट जाने को कहा। 3 और 4 जुलाई को हाई कोर्ट में बहस हुई, जिसमें फैसला सुरक्षित रख लिया गया और आज सारी याचिकाएं खारिज करते हुए जनगणना कराने की मंजूरी दे दी गयी है। बता दें कि देश में सबसे पहले जातिगत जनगणना 1931 में हुई थी। 1941 में इसका डेटा एकत्रित कर लिया गया था लेकिन इसे सार्वजानिक नहीं किया गया।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>जातीय गणना: पटना HC के फैसले पर खुश हुए तेजस्वी यादव, बीजेपी ने भी किया स्वागत</title><link>https://bihar.inkhabar.com/states/caste-census-tejashwi-yadav-happy-with-patna-hcs-decision-bjp-also-welcomed/</link><pubDate>August 1, 2023, 11:23 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/08/download-2023-08-01T165152.265-300x169.png</image><category>राज्य</category><excerpt>पटना। बिहार में जातिगत जनगणना पर आज फैसला सुनाया गया है। पटना हाई कोर्ट द्वारा फैसला सुनाते हुए जातिगत जनगणना पर से रोक हटा दी गई है। दरअसल यह महागठबंधन सरकार की महत्वकांक्षी योजनाओं में एक है। पटना हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ...</excerpt><content>
&lt;p&gt;पटना। बिहार में जातिगत जनगणना पर आज फैसला सुनाया गया है। पटना हाई कोर्ट द्वारा फैसला सुनाते हुए जातिगत जनगणना पर से रोक हटा दी गई है। दरअसल यह महागठबंधन सरकार की महत्वकांक्षी योजनाओं में एक है। पटना हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने इस मामले में दायर सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है। उच्च न्यायलय के फैसले पर बिहार के डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने ख़ुशी जताई है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;खुश हुए तेजस्वी&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;फैसले के बाद उपमुख़्यमंत्री तेजस्वी यादव ने कहा कि जातीय गणना आर्थिक न्याय की दिशा में क्रांतिकारी कदम साबित होगा। हमारी मांग है कि केंद्र जातीय गणना करवाए। वहीं बीजेपी ने भी हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। विजय सिन्हा ने कहा कि बीजेपी जातिगत जनगणना का समर्थक रही हैं। लेकिन बिहार सरकार के नियत में खोट है वो गणना के उद्देश्य को बताने में असफल रही।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;जानिए अब तक क्या-क्या हुआ&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;बता दें कि बिहार में 7 जनवरी से जातिगत जनगणना की शुरुआत हुई थी। 15 अप्रैल से दूसरे चरण की शुरुआत हुई थी। 21 अप्रैल को मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा जहां एससी ने हाईकोर्ट जाने को कहा। 2 और 3 मई को सुनवाई के बाद इस मामले में पटना उच्च न्यायालय ने फैसला सुरक्षित रख लिया। इसके बाद हाईकोर्ट ने 4 मई को गणना पर रोक लगा दी। हाईकोर्ट ने 3 जुलाई को सुनवाई की अगली तारीख रखी। जिसमें बिहार सरकार की तरफ से जल्द सुनवाई की अपील की गयी। हाई कोर्ट ने जल्द सुनवाई से इंकार कर दिया।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;पहले भी हुई थी जातिगत गणना&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;11 मई को बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर किया। 19 मई को सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को हाईकोर्ट जाने को कहा। 3 और 4 जुलाई को हाई कोर्ट में बहस हुई, जिसमें फैसला सुरक्षित रख लिया गया और आज सारी याचिकाएं खारिज करते हुए जनगणना कराने की मंजूरी दे दी गयी है। बता दें कि देश में सबसे पहले जातिगत जनगणना 1931 में हुई थी। 1941 में इसका डेटा एकत्रित कर लिया गया था लेकिन इसे सार्वजानिक नहीं किया गया।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>जातिगत जनगणना दोबारा शुरू होगी, पटना हाईकोर्ट ने नीतीश सरकार को दी बड़ी राहत</title><link>https://bihar.inkhabar.com/top-news/caste-census-will-start-again-patna-high-court-gives-big-relief-to-nitish-government/</link><pubDate>August 1, 2023, 8:29 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/07/download-2023-07-22T170918.199-300x169.png</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>पटना। बिहार में जातिगत जनगणना पर आज फैसला सुनाया गया है। पटना हाई कोर्ट द्वारा फैसला सुनाते हुए जातिगत जनगणना पर से रोक हटा दी गई है। दरअसल यह महागठबंधन सरकार की महत्वकांक्षी योजनाओं में एक है। पटना हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना। &lt;/strong&gt;बिहार में जातिगत जनगणना पर आज फैसला सुनाया गया है। पटना हाई कोर्ट द्वारा फैसला सुनाते हुए जातिगत जनगणना पर से रोक हटा दी गई है। दरअसल यह महागठबंधन सरकार की महत्वकांक्षी योजनाओं में एक है। पटना हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने इस मामले में दायर सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है। बता दें कि बीते 7 जुलाई को ही उच्च न्यायालय ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;रोक की अर्जी खारिज&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;हाई कोर्ट के फैसले के बाद जातिगत जनगणना पर फिर से काम शुरू कर दिया जाएगा। उच्च न्यायालय के फैसले से नीतीश सरकार को बड़ी राहत मिली है। बता दें कि 4 मई को बिहार सरकार को पटना हाई कोर्ट की तरफ से झटका लगा था। उच्च न्यायालय ने जातिगत जनगणना पर अंतरिम रोक लगा दी थी। इसके बाद बिहार सरकार की तरफ से हाई कोर्ट में पुनर्विचार याचिका डाली गई थी फिर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया लेकिन कहीं राहत नहीं मिली। हालांकि अब हाईकोर्ट ने इस मामले में नीतीश सरकार को हरी झंडी दे दी है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;अंतिम फैसला तक सुनवाई नहीं&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;पटना हाई कोर्ट ने नीतीश सरकार के जातिगत जनगणना को संविधान विरोधी कहा था। बाद में इसपर पांच दिन लगातार सुनवाई हुई। जिसके बाद फैसला सुरक्षित रख लिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की याचिका पर सुनवाई करने से मना कर दिया था। एससी का कहना था कि पटना उच्च न्यायालय के फैसले में काफी हद तक स्पष्टता है। जब तक अंतिम फैसला नहीं आ जाता इस मामले में सुप्रीम कोर्ट सुनवाई नहीं करेगी। वहीं अब हाईकोर्ट ने सभी अर्जियों को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि जनगणना कराना केंद्र का काम है ना कि राज्य सरकार का।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गोवा के सीएम को दी नसीहत, बोले ऐसे बयान से…</title><link>https://bihar.inkhabar.com/politics/chief-minister-nitish-kumar-gave-advice-to-the-cm-of-goa-said-from-such-a-statement/</link><pubDate>May 4, 2023, 10:51 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/05/Clipboard-35-300x169.jpg</image><category>राजनीति</category><excerpt>पटना: हाल ही में गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत द्वारा बिहारियों को लेकर की गई अपमानजनक टिप्पणी पर आज बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गोवा के सीएम को नसीहत दी है और उनके बयान की निंदा भी की है नीतीश कुमार ने कहा कि बिहार के लोगों के बारे ...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना:&lt;/strong&gt; हाल ही में गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत द्वारा बिहारियों को लेकर की गई अपमानजनक टिप्पणी पर आज बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गोवा के सीएम को नसीहत दी है और उनके बयान की निंदा भी की है नीतीश कुमार ने कहा कि बिहार के लोगों के बारे में ऐसा बयान कभी नहीं देना चाहिए. लोगों को ऐसे बयानों से बचना चाहिए। आपको बता दें कि गोवा के मुख्यमंत्री के द्वारा बिहारियों के बारे में किए गए टिप्पणी पर उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के साथ-साथ कई लोगों ने आलोचना की है.&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;&lt;strong&gt;गोवा के सीएम ने किया खेद व्यक्त&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;वहीँ बढ़ते विवाद को देखते हुए गोवा के मुक्यमंत्री ने अब सफाई दी है. प्रमोद सावंत ने कहा कि हमारे बयान को तोड़-मड़ोकर पेश किया गया. हमारा भाषण कोंकणी भाषा में था और कुछ नेताओं ने मेरे भाषण को ट्विस्ट कर दिया, अगर वहां वहां मजदूर को दुख पहुंचा हो तो मैं इसके लिए खेद व्यक्त करता हूं.&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;&lt;strong&gt;गोवा के सीएम ने की थी टिप्पणी&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;आपको बता दें कि 1 मई (मजदुर दिवस) के दिन गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने पणजी में एक कार्यक्रम के दौरान दावा किया था कि तटीय राज्य में करीब 90 परसेंट अपराध बिहार, यूपी तथा बाकि इलाक़ों के प्रवासी मजदूरों के द्वारा अंजाम दिए गए हैं। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद से ही उनकी काफी आलोचना होनी शुरू हो गई।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>बिहार: हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएगी नीतीश सरकार</title><link>https://bihar.inkhabar.com/top-news/nitish-government-will-go-to-supreme-court-against-high-courts-decision-prince-singh-inkhabar/</link><pubDate>May 4, 2023, 10:36 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/05/Clipboard-38-300x169.jpg</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>पटना: पटना हाईकोर्ट द्वारा बिहार में चल रही जातीय जनगणना पर रोक लगाने का आदेश दिया गया है. हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद बिहार सरकार के महाधिवक्ता पीके शाही ने कहा कि हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी. बता दें कि जातीय जनग...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना&lt;/strong&gt;: पटना हाईकोर्ट द्वारा बिहार में चल रही जातीय जनगणना पर रोक लगाने का आदेश दिया गया है. हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद बिहार सरकार के महाधिवक्ता पीके शाही ने कहा कि हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी. बता दें कि जातीय जनगणना पर रोक लगाने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए पटना हाईकोर्ट जनगणना पर रोक लगा दी है.&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;&lt;strong&gt;जनगणना पर लगी रोक&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;बिहार में चल रहे जातिगत जनगणना पर पटना हाईकोर्ट ने रोक लगा दिया है. गुरुवार को जातीय जनगणना पर रोक लगाने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए पटना हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि . बता दें कि सुनवाई के दौरान बिहार सरकार के महाधिवक्ता पीके शाही मामले में अपनी दलील दे रहे थे, लेकिन पटना हाईकोर्ट ने जाति जनगणना पर रोक लगा दी है.&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;&lt;strong&gt;हाईकोर्ट ने लगाई रोक&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;इस मामले में पटना हाईकोर्ट ने कहा कि अगली सुनवाई 3 जुलाई को होनी है. इसके साथ ही तब तक कोई डेटा सामने नहीं आएगा. इस मामले में याचिकाकर्ता के वकील ने जानकारी दी कि तीन जुलाई से इस मामले पर डिटेल में सुनवाई की जाएगी. इसके साथ ही कोर्ट के इस फैसले से नीतीश कुमार को बहुत बड़ा झटका लगा है. ऐसे में ये देखना होगा कि जुलाई के बाद इस मामले में क्या कुछ होता है.&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>बिहार: जस्टिस विनोद चंद्रन की बेंच ने दिया आदेश, जातिगत जनगणना पर लगी रोक</title><link>https://bihar.inkhabar.com/top-news/justice-vinod-chandrans-bench-ordered-ban-on-caste-census-prince-singh-inkhabar-bihar/</link><pubDate>May 4, 2023, 9:39 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/05/download-69-300x169.png</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>पटना: बिहार में चल रहे जातिगत जनगणना पर पटना हाईकोर्ट ने रोक लगा दिया है. गुरुवार को जातीय जनगणना पर रोक लगाने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए पटना हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि . बता दें कि सुनवाई के दौरान बिहार सरकार के महाधिवक्ता पीके शाही मामल...</excerpt><content>
&lt;p&gt;पटना: बिहार में चल रहे जातिगत जनगणना पर पटना हाईकोर्ट ने रोक लगा दिया है. गुरुवार को जातीय जनगणना पर रोक लगाने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए पटना हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि . बता दें कि सुनवाई के दौरान बिहार सरकार के महाधिवक्ता पीके शाही मामले में अपनी दलील दे रहे थे, लेकिन पटना हाईकोर्ट ने जाति जनगणना पर रोक लगा दी है.&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;हाईकोर्ट ने लगाई रोक&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;इस मामले में पटना हाईकोर्ट ने कहा कि अगली सुनवाई 3 जुलाई को होनी है. इसके साथ ही तब तक कोई डेटा सामने नहीं आएगा. इस मामले में याचिकाकर्ता के वकील ने जानकारी दी कि तीन जुलाई से इस मामले पर डिटेल में सुनवाई की जाएगी. इसके साथ ही कोर्ट के इस फैसले से नीतीश कुमार को बहुत बड़ा झटका लगा है. ऐसे में ये देखना होगा कि जुलाई के बाद इस मामले में क्या कुछ होता है.&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;गुरुवार को कोर्ट ने लगाई रोक&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को आज पटना हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। उच्च न्यायालय ने राज्य में जातिगत जनगणना पर रोक लगा दी है। बता दें कि पटना उच्च न्यायलय ने जनगणना पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दिया है। इस मामले पर अगली सुनवाई 3 जुलाई को होगी।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>पटना हाईकोर्ट ने जातीय गणना पर नीतीश सरकार से पूछे कई सवाल, फैसले की तारीख हुई तय</title><link>https://bihar.inkhabar.com/top-news/patna-high-court-asked-many-questions-to-nitish-government-on-caste-enumeration-date-of-decision-fixed/</link><pubDate>May 3, 2023, 2:52 pm</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/05/Clipboard-38-300x169.jpg</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>पटना: बिहार में एक तरफ जहाँ इस वक़्त जातीय गणना का काम जोर-शोर से चल रहा है। तो दूसरी तरफ इसे रोकने के लिए पटना हाईकोर्ट में सुनवाई जारी है। जिसे लेकर बुधवार को कोर्ट में सुनवाई भी पूरी हुई। पिछले दो दिनों से दोनों पक्ष के वकील दलील पेश कर रहे थ...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना:&lt;/strong&gt; बिहार में एक तरफ जहाँ इस वक़्त जातीय गणना का काम जोर-शोर से चल रहा है। तो दूसरी तरफ इसे रोकने के लिए पटना हाईकोर्ट में सुनवाई जारी है। जिसे लेकर बुधवार को कोर्ट में सुनवाई भी पूरी हुई। पिछले दो दिनों से दोनों पक्ष के वकील दलील पेश कर रहे थे। दोनों तरफ की दलील सुनने के बाद पटना हाईकोर्ट ने गुरुवार को फैसला सुनाने की तारीख तय की है। वहीँ कोर्ट ने सुनवाई के दौरान नीतीश सरकार से कई सवाल किए हैं।&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;&lt;strong&gt;कोर्ट ने सरकार से पूछा&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;



&lt;ul class=&quot;wp-block-list&quot;&gt;
&lt;li&gt;क्या आर्थिक सर्वेक्षण कराना क़ानूनी बाध्यता है ?&lt;/li&gt;



&lt;li&gt;जातीय गणना कराना सरकार के अधिकार क्षेत्र में है या नहीं ?&lt;/li&gt;



&lt;li&gt;जातीय गणना कराने का उद्देश्य क्या है ?&lt;/li&gt;



&lt;li&gt;क्या जातीय गणना को लेकर कोई कानून भी बनाया गया है ?&lt;/li&gt;
&lt;/ul&gt;



&lt;p&gt;&lt;strong&gt;कोर्ट में सरकार की दलील&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;सरकार की तरफ से कोर्ट में दलील देते हुए महाधिवक्ता पीके शाही ने कहा कि जन कल्याण की योजनाओं के लिए ये गणना कराया जा रहा है। और जातीय गणना का फैसला बिहार के दोनों सदन बिहार विधानसभा और विधानपरिषद से प्रस्ताव पारित होने के बाद लिया गया है। ये राज्य सरकार का नीतिगत फैसला है। और इसके लिए बजट में प्रावधान किया गया है। वहीँ इस गणना से सरकार को गरीबों के लिए योजना बनाने में आसानी होगी।&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;&lt;strong&gt;दाखिल की गई थी याचिका&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;आपको बता दें कि जातीय गणना कराने को लेकर सरकार के फैसले को कोर्ट में चुनौती दी गई थी। कोर्ट में याचिका दाखिल कर इस पर रोक लगाने की मांग की गई थी। याचिका में कहा गया है कि राज्य सरकार के पास जातियों की गिनती करने का अधिकार नहीं है। सरकार का यह फैसला संविधान का उल्लंघन कर रही है। याचिका में ये भी कहा गया है कि सरकार जातिगत गणना में लोगों की जाति के साथ-साथ उनके कामकाज और योग्यता की भी जानकारी मांग रही है। जो उनके गोपनीयता के अधिकार का हनन है।&lt;/p&gt;
</content></item></channel></rss>