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       <title>Today Navratri 2024 News | Latest Navratri 2024 News | Breaking Navratri 2024 News in English | Latest Navratri 2024 News Headlines - Inkhabar</title>
        <description>आज का Navratri 2024 समाचार:Today Navratri 2024 News ,Latest Navratri 2024 News,Aaj Ka Samachar ,Navratri 2024 समाचार ,Breaking Navratri 2024 News in Hindi, Latest News Headlines - Inkhabar</description>
        <link>https://www.inkhabar.com/tag/navratri-2024</link>
        <lastBuildDate>June 10, 2026, 1:30 am</lastBuildDate>
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            <title>Inkhabar</title>
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        </image><item><title>Navratri: आज है नवरात्रि का सातवां दिन, जाने मां कालरात्रि का स्वरूप और पूजा विधि</title><link>https://bihar.inkhabar.com/festival/navratri-today-is-the-seventh-day-of-navratri-know-the-form-and-method-of-worship-of-maa-kalratri/</link><pubDate>October 9, 2024, 2:35 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/10/o0iu.webp</image><category>त्योहार</category><excerpt>पटना। आज नवरात्रि का 7वां दिन है। आज का दिन मां कालरात्रि के स्वरुप के समर्पित है। 7वें दिन देवी दुर्गा के कालरात्रि स्वरूप की पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि इस स्वरूप की आराधना करने से भक्त बुरी शक्तियों से दूर रहते है। कालरात्रि की पूजा...</excerpt><content>
&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;&lt;strong&gt;पटना। &lt;/strong&gt;आज नवरात्रि का 7वां दिन है। आज का दिन मां कालरात्रि के स्वरुप के समर्पित है। 7वें दिन देवी दुर्गा के कालरात्रि स्वरूप की पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि इस स्वरूप की आराधना करने से भक्त बुरी शक्तियों से दूर रहते है। कालरात्रि की पूजा करने से अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;मां कालरात्रि का स्वरुप&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;इसके अतिरिक्त ऐसा भी कहा जाता है कि इनकी पूजा करने से विभिन्न सिद्धियों की प्राप्ति होती है। 9 अक्टूबर 2024 यानी आज नवरात्रि का सातवां दिन है। जिसे सप्तमी भी कहा जाता है। यह दिन दुर्गा के 9 स्वरूपों में से एक है। सप्तमी नवमी मां कालरात्रि को समर्पित होती है। मां कालरात्रि का शरीर अंधकार के समान काला है। उनके बाल लंबे, घने और बिखरे होते है। मां के गले में एक माला है, जो बिजली की तरह चमकती रहती है। मां कालरात्रि के चार हाथ हैं, जिनमें लौह शस्त्र, खड्ग, मुद्रा और वरमुद्रा विद्यमान हैं।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;मां कालरात्रि की पूजा विधि&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;नवमी के सातंवे दिन देवी दुर्गा के सातवें स्वरुप की पूजा सुबह और शाम की जाती है। सबसे पहले स्नान करके मां देवी काली की प्रतिमा के चारों ओर गंगाजल छिड़कें। मां कालरात्रि की प्रतिमा के सामने घी का दीपक जलाएं। इसके बाद अक्षत, रोली और गुड़हल के फूल माता को समर्पित करें। मां कालरात्रि की आरती उतारें और मां के नाम के जयकारे लगाएं। सुबह और शाम आरती के साथ दुर्गा चालीसा का पाठ करें। इसके अलावा मां कालरात्रि की रुद्राक्ष की माला से मंत्रों का जाप करना भी लाभ देता हैं।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Navratri: नवरात्रि के छठे दिन करें मां कात्यानी की पूजा, सभी दुख होंगे दूर</title><link>https://bihar.inkhabar.com/festival/navratri-worship-mother-katyani-on-the-sixth-day-of-navratri-all-sorrows-will-go-away/</link><pubDate>October 8, 2024, 3:57 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/10/6789-300x169.webp</image><category>त्योहार</category><excerpt>पटना। आज नवरात्रि का छठा दिन है। आज का दिन मां कत्यानी को समर्पित है। इस दिन मां कत्यानी की विधि-विधान से पूजा की जाती है। यह रुप मां दुर्गा के नौ रूपों में से सबसे अलग रूप माना जाता है। माता कत्यानी को त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु, महेश ने अपनी शक्...</excerpt><content>
&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;&lt;strong&gt;पटना। &lt;/strong&gt;आज नवरात्रि का छठा दिन है। आज का दिन मां कत्यानी को समर्पित है। इस दिन मां कत्यानी की विधि-विधान से पूजा की जाती है। यह रुप मां दुर्गा के नौ रूपों में से सबसे अलग रूप माना जाता है। माता कत्यानी को त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु, महेश ने अपनी शक्ति को इकट्ठा करके असुरों से देवता को सुरक्षा दिलाने के लिए माता कात्यानी को प्रकट किया था।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;भक्तों का कल्याण &lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;मां कात्यानी असुरों को नाश करती है और अपने भक्तो के कल्याण करती है। देवी भगवती पुराण के मुताबिक जंगल में कत नाम के ऋषि निवास करते थे, ऋषि के बेटे का नाम कात्या था। कात्या के बेटे के जो बेटे हुऐ उसका नाम कात्यान रखा गया। कात्यान मां दुर्गा से वरदान मिला था कि उनके घर में दुर्गा के स्वरुप जन्म लेगा। उस समय असुर का आतंक बढ़ गया था। महिषासुर नाम के राक्षस ने देवताओ को हरा दिया। सभी देवता उससे परेशान हो गए और आकाश मार्ग द्वारा त्रिदेवों के पास गए।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;पूजा का महत्व&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;अपनी रक्षा करने के लिए त्रिदेव से विनती की, तब त्रिदेव ने उन्होंने कात्यान ऋषि के घर में दुर्गा के रूप में पुत्री का जन्म हुआ, जिसे इनका नाम कात्यानी रखा गया है। कात्यानी माता की विधि-विधान पूजा करने से व्यक्ति का मस्तिक चक्र ठीक रहता है। इनके पूजन में एकाग्रता में वृद्धि होती है। मां की पूजा करने इससे व्यक्ति जल्द बिमार नहीं पड़ता है। मां कत्यानी अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करती है। यदि शत्रुओं का भय हो तो मां कत्यानी को याद करना चाहिए।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;गोधूली बेला में करें पूजा&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;मां कत्यानी का पूजन गोधूली बेला में करने से बहुत लाभ होता है। नवरात्रि के तीसरे दिन मां कत्यानी के पूजन में शहद का भोग लगाए। शहद का भोग लगाने से मां अपने भक्तो की सभी मनोकामना पूरी करती हैं। मां की विधि-विधान से पूजा की जानी चाहिए। जो व्यक्ति मां कात्यानी की सच्चे मन से पूजा करते है, वह धन्य- धान्य से परिपूर्ण होते हैं।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Durga Ashtami 2024: दुर्गाअष्टमी को लेकर ना हों कंफ्यूज, यहां जाने सबकुछ</title><link>https://bihar.inkhabar.com/festival/durga-ashtami-2024-dont-be-confused-about-durga-ashtami-know-everything-here/</link><pubDate>October 7, 2024, 12:19 pm</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/10/download-38-1-300x240.png</image><category>त्योहार</category><excerpt>पटना: आश्विन माह में मनाया जाने वाला दुर्गा पूजा एक बहुप्रतीक्षित हिंदू त्योहार है, खासकर बंगालियों के लिए। यह पवित्र त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का जश्न मनाते हुए बहुत धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया जाता है, जिसमें देवी दुर्गा ने भैंस राक्षस...</excerpt><content>
&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;&lt;strong&gt;पटना&lt;/strong&gt;: आश्विन माह में मनाया जाने वाला दुर्गा पूजा एक बहुप्रतीक्षित हिंदू त्योहार है, खासकर बंगालियों के लिए। यह पवित्र त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का जश्न मनाते हुए बहुत धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया जाता है, जिसमें देवी दुर्गा ने भैंस राक्षस महिषासुर को हराया था। इस साल दुर्गाष्टमी व्रत की तिथि को लेकर लोगों के मन में असमंजस की स्थिति है. तो आइए जानते हैं दुर्गा अष्टमी व्रत की तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;11 अक्टूबर को महाअष्टमी&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;वैदिक पंचांग के अनुसार आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 10 अक्टूबर को दोपहर 12:35 बजे शुरू होगी और 11 अक्टूबर को दोपहर 12:05 बजे समाप्त होगी. इस वर्ष सप्तमी व्रत 10 अक्टूबर को मनाया जाएगा, जबकि सप्तमी और अष्टमी व्रत एक साथ नहीं रखे जाते हैं। अत: 11 अक्टूबर 2014, शुक्रवार को दुर्गाष्टमी का व्रत रखा जाएगा और उसी दिन महानवमी का व्रत भी रखा जाएगा।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;दुर्गा अष्टमी मुहूर्त 2024&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;चर – सामान्य – 06:20 am से 07:47 am&lt;br&gt;लाभ – उन्नति – 07:47 am से 09:14 am&lt;br&gt;अमृत – सर्वोत्तम – 09:14 am से 10:41 amवार वेला&lt;br&gt;शुभ – उत्तम – 12:08 pm से 01:34 pm&lt;br&gt;चर – सामान्य – 04:28 pm से 05:55 pm&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;अष्टमी के दिन महागौरी की पूजा&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;माता दुर्गा के 9 स्वरूपों में अष्टमी के दिन पूजी जाने वाली देवी महागौरी हैं. महागौरी माता पार्वती का एक दिव्य रूप मानी जाती हैं. उनके नाम से ही स्पष्ट है कि उनका रंग पूरी तरह से गोरा है. उनकी उपमा शंख, चंद्र और कुंद के फूल से की गई है.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;महागौरी के स्वरुप का वर्णन&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;भवेद् गौरी के अनुसार, उनकी आयु आठ वर्ष मानी जाती है. उनके सभी आभूषण और वस्त्र सफेद रंग के होते हैं, इसलिए उन्हें श्वेताम्बरधरा के नाम से भी जाना जाता है। महागौरी के चार भुजाएं हैं और उनका वाहन वृषभ है, इसीलिए उन्हें वृषारूढ़ा भी कहा जाता है. उनके दाहिने हाथ में अभय मुद्रा है, जबकि नीचे वाले हाथ में त्रिशूल है. ऊपर वाले बाएं हाथ में डमरू है और नीचे वाले हाथ में वर मुद्रा धारण की गई है.&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>बिहार का ऐसा मंदिर जहां नवरात्रि में महिलाओं को नहीं मिलती एंट्री, जानें इसके पीछे का रहस्य</title><link>https://bihar.inkhabar.com/festival/such-a-temple-in-bihar-where-women-are-not-allowed-to-enter-during-navratri-know-the-secret-behind-it/</link><pubDate>October 6, 2024, 6:21 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/10/download-19-1-300x168.png</image><category>त्योहार</category><excerpt>पटना: इन दिनों देशभर में नवरात्रि की धूम मची है। इस बीच बिहार के नालंदा जिले के मां आशापुरी मंदिर में नवरात्र में 9 दिन महिलाओं के एंट्री पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है. महिलाओं को मंदिर कैंपस में भी एंट्री करने की अनुमति नहीं मिलती है. इसके साथ ...</excerpt><content>
&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;&lt;strong&gt;पटना:&lt;/strong&gt; इन दिनों देशभर में नवरात्रि की धूम मची है। इस बीच बिहार के नालंदा जिले के मां आशापुरी मंदिर में नवरात्र में 9 दिन महिलाओं के एंट्री पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है. महिलाओं को मंदिर कैंपस में भी एंट्री करने की अनुमति नहीं मिलती है. इसके साथ ही पुरुष भी नवरात्रि के नौ दिनों तक मंदिर के गर्भगृह में नहीं जाते हैं. मंदिर की यह प्रथा वर्षों पुरानी है. मां आशापुरी मंदिर गिरियक ब्लॉक के घोसरावां गांव में है.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;नवरात्रि के दौरान विशेष तंत्र-मंत्र अनुष्ठान&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;मंदिर परिसर और गर्भगृह में पुरुषों और महिलाओं का प्रवेश बंद करने के पीछे मुख्य कारण तांत्रिक अनुष्ठानों का चलन है। आपको बता दें कि नवरात्रि के दौरान मंदिर में विशेष तंत्र-मंत्र अनुष्ठान किए जाते हैं। जिससे बुरी शक्तियां सक्रिय हो जाती हैं। ऐसा डर रहता है कि अगर इस दौरान महिलाएं मौजूद रहीं तो उनके शरीर में बुरी शक्तियां प्रवेश कर सकती हैं। इससे पूजा असफल हो जायेगी.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;9वीं सदी से चली आ रही यह परंपरा&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;स्थानीय लोगों का कहना है कि यह परंपरा 9वीं सदी से चली आ रही है. नौवीं शताब्दी में यह दुनिया का सबसे लोकप्रिय बौद्ध ध्यान केंद्र था। बौद्ध लोग यहां आकर तंत्र-मंत्र की साधना करते थे। दूर-दूर से तांत्रिक भी आते थे और नवरात्रि के दौरान विशेष पूजा-अर्चना करते थे।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;गर्भगृह में सिर्फ तीन पुजारी ही प्रवेश करते&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नवरात्रि के मौके पर मां आशापुरी मंदिर के गर्भगृह में सिर्फ तीन पुजारी ही प्रवेश करते हैं. सुबह-शाम 4 से 5 घंटे चंडी पाठ होता है, जिसमें विशेष रूप से तांत्रिक विधि भी अपनाई जाती है। नवरात्रि के आखिरी दिन विशेष हवन के बाद महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की अनुमति दी जाती है। यही बात पुरुषों पर भी लागू होती है. हालांकि, पुरुष मंदिर परिसर में आ सकते हैं.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;मां के दरबार में कई बॉलीवुड हस्तियां पहुंच चुके हैं&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;बता दें कि अभिनेता संजय दत्त के पिता सुनील दत्त के साथ-साथ कई बॉलीवुड हस्तियां भी मां के दरबार में हाजिरी लगा चुके हैं. बिहार के राज्यपाल व सीएम सहित कई राजनेता भी मंदिर में हाजिरी लगा चुके हैं. मंदिर में शिलापट्ट पर आशापुरी महारानी की मूर्ति 300 ईसा पूर्व की है। मध्य प्रदेश के राजा यशोवर्मन ने आठवीं शताब्दी में यशोवर्मपुर नामक इस क्षेत्र को बसाया था।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Navratri: नवरात्रि के दूसरे दिन करें मां ब्रह्माचारिणी की पूजा, जाने महत्व और विधि</title><link>https://bihar.inkhabar.com/festival/navratri-worship-goddess-brahmacharini-on-the-second-day-of-navratri-know-its-importance-and-method/</link><pubDate>October 4, 2024, 5:18 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/10/FHJ-300x169.webp</image><category>त्योहार</category><excerpt>पटना। 4 अक्टूबर यानी आज शारदीय नवरात्रि का दूसरा दिन है। यह दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी को समर्पित होता है। इस दिन मां ब्रह्माचारिण की विधि-विधान से पूजा की जाती है। मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने का उद्देश्य जीवन में सफलता हासिल करना और सिद्धियो...</excerpt><content>
&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;&lt;strong&gt;पटना।&lt;/strong&gt; 4 अक्टूबर यानी आज शारदीय नवरात्रि का दूसरा दिन है। यह दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी को समर्पित होता है। इस दिन मां ब्रह्माचारिण की विधि-विधान से पूजा की जाती है। मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने का उद्देश्य जीवन में सफलता हासिल करना और सिद्धियों की प्राप्ति करना है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;मां ब्रह्माचारिणी की पूजा विधि&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;मां ब्रह्मचारिणी देवी का यह स्वरूप शादीशुदा नहीं है। इनके एक हाथ में कमंडल और दूसरे हाथ में जाप माला होती है। आज माता ब्रह्मचारिणी का खास दिन है। नवरात्रि के दूसरे दिन यानी आज मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। इस अवसर पर आप माता को फूल, चंदन, अक्षत और रोली चढ़ाते है। ब्रह्मचारिणी मां को पंचामृत का भोग लगाया जाता है। इसके साथ ही मिठाई का भोग भी लगाया जाता है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;मां ब्रह्माचारिणी की पूजा का महत्व&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;इसके अलावा मां को लौंग, पान और सुपारी भी अर्पित किया जाता है। इसके बाद मां दुर्गा का पाठ किया जाता है। अंत में देवी ब्रह्मचारिणी के मंत्रों का जाप करें और मां की उतारें। मां ब्रह्माचारिणी मां दुर्गा का दूसरा रूप हैं। नवरात्रि की 9 शक्तियों में से दूसरी शक्ति मानी जाती हैं। यह मां दुर्गा का ज्योर्तिमय स्वरूप हैं। इन्हें त्याग का प्रतीक माना जाता हैं। मां की पूजा करने से सदाचार, मनुष्य में वैराग्य, तप, त्याग और संयम की भावना का विकास होता है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;मां ब्रह्माचारिणी का मंत्र जाप&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;या देवी सर्वभू‍तेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता.&lt;br&gt;नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:..&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Shardiya Navratri 2024: शारदीय नवरात्रि 3 अक्टूबर से शुरूआत, जाने पालकी की सवारी से कैसा होगा माहौल</title><link>https://bihar.inkhabar.com/festival/shardiya-navratri-2024-shardiya-navratri-starts-from-3rd-october-know-how-the-atmosphere-will-be-with-the-palanquin-ride/</link><pubDate>October 2, 2024, 10:10 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/10/्ुंनवु-300x169.webp</image><category>त्योहार</category><excerpt>पटना। शारदीय नवरात्रि की शुरुआत इस साल 3 अक्‍टूबर से हो रही है। इस बार मां दुर्गा की सवारी पालकी होने वाला है। मां भवानी हर बार अलग-अलग सवारी पर सवार होकर धरती लोक पहुंचती हैं। बता दें कि मां दुर्गा किस जिस भी वाहन से आती हैं इसका पूरा असर देश ...</excerpt><content>
&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;&lt;strong&gt;पटना।&lt;/strong&gt;  शारदीय नवरात्रि की शुरुआत इस साल 3 अक्‍टूबर से हो रही है। इस बार मां दुर्गा की सवारी पालकी होने वाला है। मां भवानी हर बार अलग-अलग सवारी पर सवार होकर धरती लोक पहुंचती हैं। बता दें कि मां दुर्गा किस जिस भी वाहन से आती हैं इसका पूरा असर देश और दुनिया पर देखने को मिल जाता है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt; सवारी का संकेत अच्छा नहीं&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां दुर्गा का पालकी पर सवार होकर आना देश व दुनिया की सुरक्षा और आर्थिक व्‍यवस्‍था के लिए शुभ संकेत नहीं है। तो आइए जानते हैं नवरात्रि कब से कब तक रहने वाला हैं और साथ ही मां भवानी के पालकी पर आने से किन सब बातों का अनुमान लगाया जा रहा है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;नवरात्रि कब से कब तक&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;इस साल शारदीय नवरात्रि 3 अक्‍टूबर से शुरू होगी और 11 अक्‍टूबर की महानवमी है। जबकि 12 अक्‍टूबर को दशहरा और मां दुर्गा का विर्सजन किया जाएगा। 3 अक्‍टूबर को कलश स्‍थापना होने के साथ प्रथम रूप मां शैलपुत्री की पूजा होगी।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;मां दुर्गा करेंगी पालकी की सवारी&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा किस वाहन पर सवार होती हैं यह इस बात पर निर्भर करता है कि नवरात्रि किस दिन शुरू होती है। जब नवरात्रि मंगलवार और शनिवार को शुरू होती है तो मां दुर्गा की सवारी अश्व यानी घोड़ा मानी जाती है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt; प्रथम दिन पर निर्भर है वाहन&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;यदि नवरात्रि गुरुवार और शुक्रवार को शुरू होती है तो मां दुर्गा को डोली और पालकी पर सवार माना जाता है। यदि मां दुर्गा रविवार और सोमवार को आती हैं तो उनका वाहन हाथी है। जो सबसे शुभ माना जाता है.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt; सवारी से ऐसा होगा असर&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;ज्योतिष और धर्म के जानकार लोगों का कहना है कि जब मां दुर्गा डोली या पालकी पर सवार होती हैं तो यह अच्छा संकेत नहीं होता है। पालकी पर मां दुर्गा का आगमन सभी के लिए चिंता बढ़ाने वाला माना जाता है। अर्थव्यवस्था के चौपट होने से लोगों का कारोबार मंदा पड़ने की आशंका है.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;महामारी फैलने का भी डर&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;माता की पालकी की सवारी के कारण देश-दुनिया में महामारी फैलने का भी डर है. लोगों को किसी बड़ी अप्राकृतिक घटना का सामना करना पड़ सकता है। स्वास्थ्य में भारी गिरावट आ सकती है। दूसरे देशों से हिंसा की ख़बरें आ सकती हैं.&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Mahalaya: आज है महालया, धरती पर भक्तों को आशीर्वाद देने आएंगी मां दुर्गा</title><link>https://bihar.inkhabar.com/festival/mahalaya-today-is-mahalaya-maa-durga-will-come-to-earth-to-bless-the-devotees/</link><pubDate>October 2, 2024, 5:55 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/10/rtyu-300x169.webp</image><category>त्योहार</category><excerpt>पटना। आज महालया है। आज के दिन दुर्गा मां धरती पर आएंगी। मां के लिए चंडी पाठ किया जाएगा। लोग अपने पितरों को आखिरी विदाई देंगे। साथ ही उनसे पूरे परिवार की रक्षा के लिए कामना करेंगे। वहीं दूसरी ओर माता के आगमन की खुशी मनाई जाएगी। इस मौके पर बंगाली...</excerpt><content>
&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;&lt;strong&gt;पटना।&lt;/strong&gt; आज महालया है। आज के दिन दुर्गा मां धरती पर आएंगी। मां के लिए चंडी पाठ किया जाएगा। लोग अपने पितरों को आखिरी विदाई देंगे। साथ ही उनसे पूरे परिवार की रक्षा के लिए कामना करेंगे। वहीं दूसरी ओर माता के आगमन की खुशी मनाई जाएगी। इस मौके पर बंगाली पंडालों में दुर्गा पूजा की तैयारी शुरु हो जाएगी।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;देवी शैलपुत्री की पूजा&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;मंडपों में महिषासुर मर्दिनी का मंचन होगा। बांग्ला मंडपों में इसकी रिकॉर्डिंग को बजाया जाएगा। वहीं गुरुवार यानी कल से शारदीय नवरात्र शुरु हो रहे है। भक्तों में नवरात्र को लेकर खासा उत्साह दिखाई दे रहा है। सभी मां की आराधना की तैयारी में जुट गये हैं। 3 अक्तूबर को कलश स्थापित किया जाएगा। पहले दिन मां दुर्गा के पहले स्वरूप शैलपुत्री की पूजा की जाएगी। देवी को चंदन, त्रिफला और कनगी चढ़ाने का महत्व है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;कलश का शुभ मुहूर्त&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;गुरुवार सुबह 6:06 बजे से मां की आराधना का शुभ मुहूर्त आरंभ होगा। जो रात 1.11 बजे तक समाप्त हो जाएगा। जिस कारण भक्तों को देवी मां की पूजा-अर्चना के लिए काफी समय मिलेगा। दोपहर 3:17 बजे तक कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त माना जा रहा है। पंडित कौशल कुमार मिश्र ने कहा कि नवरात्र के पहले दिन दोपहर 3.18 बजे तक हस्ता नक्षत्र का योग है। इसके बाद चित्रा लग जायेगा, जिसे सनातन धर्म में काफी शुभ माना जा रहा है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;माता का आगमन डोली पर&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;इसके अतिरिक्त ऐंद्र योग होगा। जो इस दिन को और शुभ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। इस नवरात्र में चतुर्थी तिथि की वृद्धि हुई। वाराणसी पंचांग के मुताबिक इस नवरात्र में मां का आगमन दोला (डोली) और गमन चरणायुद्ध (मुर्गा) पर होगा। मां के आने और जाने का मुहूर्त शुभ नहीं है। नवरात्र के पहले दिन अभिजीत मुहूर्त का समय दिन के 11.36 से 12.22 बजे तक है। वहीं बांग्ला पंचांग की माने तो माता का आगमन डोली पर हो रहा है। वहीं गमन घटक है। इसका फल छत्रभंग है।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Navratri 2024: त्योहारी सीजन से पहले महंगाई की मार, काजू-बादाम के साथ बढ़े सब्जियों के दाम</title><link>https://bihar.inkhabar.com/festival/navratri-2024-inflation-hits-before-the-festive-season-prices-of-vegetables-increase-along-with-cashew-nuts-and-almonds/</link><pubDate>October 1, 2024, 11:41 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/10/download-20-300x168.png</image><category>त्योहार</category><excerpt>पटना: इस बार जो लोग नवरात्रि में व्रत रखने वाले हैं उन्हें पूजा प्रसाद और फल चढ़ाने के लिए ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ेंगे. पूजा में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले नारियल की कीमत में इस बार 80 रुपये प्रति किलो का इजाफा हुआ है. इतना ही नहीं आगे जा...</excerpt><content>
&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;&lt;strong&gt;पटना:&lt;/strong&gt; इस बार जो लोग नवरात्रि में व्रत रखने वाले हैं उन्हें पूजा प्रसाद और फल चढ़ाने के लिए ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ेंगे. पूजा में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले नारियल की कीमत में इस बार 80 रुपये प्रति किलो का इजाफा हुआ है. इतना ही नहीं आगे जान लीजिए त्योहारी सीजन में महंगाई का आपके जेब पर कितना असर पड़ने वाला है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;काजू और बादाम की कीमत में बढ़ोतरी&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;वहीं, काजू और बादाम की कीमत में 200 से 300 रुपये की बढ़ोतरी हुई है. जो मखाना 650 से 700 रुपये प्रति किलो बिक रहा था, वह इस बार 1200 से 1800 रुपये प्रति किलो बिक रहा है. वहीं चिरौंजी 1600-1700 रुपये से बढ़कर 1900-2000 रुपये प्रति किलो हो गई है.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;3 अक्टूबर से नवरात्रि की शुरुआत&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;3 अक्टूबर से नवरात्रि का त्योहार शुरू हो रहा है. ऐसे में बाजार व्यवस्थित हो जाते हैं. पूजन सामग्री के साथ-साथ फल और मेवे का बाजार भी गर्म है। महंगाई का असर हर तरफ देखने को मिल रहा है. थोक बाजार में नारियल छिलके की कीमत पिछले साल की तुलना में 50 रुपये प्रति किलो और काजू-बादाम की कीमत 100 से 150 रुपये प्रति किलो तक बढ़ गयी है. वहीं, खुदरा बाजार में ये और महंगे हो गए हैं. हालाँकि, अन्य फल फसलों सिंघाड़ा आटा, कुट्टू आटा, मूंगफली, रामदाना और साबूदाना की कीमतों में मामूली अंतर ही है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;सब्जियों के भी दाम बढे&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;त्योहार से पहले ही जहां सब्जियों के दाम बढ़ रहे हैं, वहीं सूखे मेवे भी इससे अछूते नहीं हैं. महंगाई का असर जहां दालों और सब्जियों पर दिख रहा था वहीं अब इसका असर मखाना, काजू और किशमिश जैसे सूखे मेवों पर भी दिखने लगा है.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;पिछले दो तीन माह में रेट बढ़ा&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;पिछले दो-तीन महीनों में ड्राई फ्रूट्स की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. ड्राई फ्रूट्स की कीमत बढ़ने के साथ ही मांग भी कम हो गई है. इसका असर उनके सहयोगियों की जेब पर भी पड़ने लगा. ड्राई फ्रूट्स के दाम दिन-ब-दिन आसमान छू रहे हैं. हालात ये हैं कि पिछले दो से तीन महीने में कुछ ड्राई फ्रूट्स के दाम दोगुने हो गए हैं. ऐसे में ग्राहक ड्राई फ्रूट्स की ओर रुचि नहीं ले रहे हैं.&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Dussehra 2024: शिक्षकों ने मांगी दशहरा की छुट्टी, समर्थन में बोलते दिखे गिरिराज सिंह, सीएम नीतीश से कर दी ये मांग</title><link>https://bihar.inkhabar.com/top-news/dussehra-2024-teachers-asked-for-dussehra-leave-giriraj-singh-was-seen-speaking-in-support-made-this-demand-to-cm-nitish/</link><pubDate>September 28, 2024, 8:34 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/09/download-23-300x169.png</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>पटना: पिछले साल शिक्षकों की दशहरा छुट्टी को लेकर खूब राजनीति हुई थी. शिक्षा विभाग ने छुट्टियां कम कर दी थीं. पिछले साल शिक्षा विभाग ने दशहरे पर तीन दिन की छुट्टी दी थी. इस बार भी सिर्फ तीन दिन की ही छुट्टी मिली है, जिसके कारण शिक्षक हंगामा कर र...</excerpt><content>
&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;&lt;strong&gt;पटना: &lt;/strong&gt;पिछले साल शिक्षकों की दशहरा छुट्टी को लेकर खूब राजनीति हुई थी. शिक्षा विभाग ने छुट्टियां कम कर दी थीं. पिछले साल शिक्षा विभाग ने दशहरे पर तीन दिन की छुट्टी दी थी. इस बार भी सिर्फ तीन दिन की ही छुट्टी मिली है, जिसके कारण शिक्षक हंगामा कर रहे हैं. दस दिन की छुट्टी की मांग कर रहे हैं. वहीं, इस मांग को लेकर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी सोशल मीडिया &amp;#8216;एक्स&amp;#8217; पर ट्वीट किया है. उन्होंने सीएम नीतीश कुमार से 2 अक्टूबर से 12 अक्टूबर तक छुट्टी देने का अनुरोध किया है.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;शिक्षकों की पक्ष में गिरिराज सिंह की प्रतिक्रिया&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;इस संबंध में गिरिराज सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर ट्वीट किया है। उन्होंने एक्स पर लिखा कि &amp;#8216;मैं माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी से अनुरोध करता हूं कि दुर्गा पूजा को देखते हुए शिक्षकों को 2 से 12 तक की छुट्टी दी जाए.&amp;#8221;&lt;/p&gt;



&lt;figure class=&quot;wp-block-image size-full&quot;&gt;&lt;img loading=&quot;lazy&quot; decoding=&quot;async&quot; width=&quot;534&quot; height=&quot;280&quot; src=&quot;https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/09/image-4.png&quot; alt=&quot;&quot; class=&quot;wp-image-12050&quot; srcset=&quot;https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/09/image-4.png 534w, https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/09/image-4-300x157.png 300w, https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/09/image-4-150x79.png 150w&quot; sizes=&quot;auto, (max-width: 534px) 100vw, 534px&quot; /&gt;&lt;/figure&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;विधायक संदीप सौरभ ने उठाया सवाल&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;वहीं, शिक्षकों का मुद्दा लगातार उठाने वाले सीपीआई एमएल विधायक संदीप सौरभ ने भी &amp;#8216;एक्स&amp;#8217; पर प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने लिखा कि &amp;#8216;दशहरा की छुट्टी रद्द करना बिहार के शिक्षकों के अधिकारों और परंपराओं के साथ अन्याय है. हर किसी को त्योहारों के दौरान आराम करने और परिवार के साथ समय बिताने का अधिकार है। जब त्योहारों में बच्चे स्कूल नहीं आते तो शिक्षकों को स्कूल क्यों बुलाया जा रहा है? क्या यह सिर्फ उन्हें परेशान और अपमानित करने के लिए है? ये बिल्कुल भी उचित नहीं है.&amp;#8221;&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;शिक्षकों की मांग एक्स पर कर रहा ट्रेंड&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;बता दें कि शिक्षकों की मांग है कि पहले की तरह शिक्षा विभाग दशहरा पर पूरे 10 दिनों की छुट्टी दे। इस अवधि में कई शिक्षक फास्टिंग में रहते हैं। ऐसे में स्कूल पहुंचना शिक्षकों के लिए चुनौतीपूर्ण होता है। इसको देखते हुए शिक्षकों ने एक्स पर अभियान भी शुरू कर दिया है। बता दें कि शिक्षकों की मांग एक्स पर ट्रेंड भी कर रहा है। वहीं, इस बार शिक्षा विभाग ने दशहरा के कारण शिक्षकों को 9 अक्टूबर से 11 अक्टूबर तक छुट्टी दी है.&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Shardiya Navratri 2024: शारदीय नवरात्रि 3 अक्टूबर से शुरू, पालकी की सवारी से इस साल कैसा रहेगा माहौल</title><link>https://bihar.inkhabar.com/festival/shardiya-navratri-2024-shardiya-navratri-starts-from-october-3-how-will-be-the-atmosphere-this-year-with-palanquin-ride/</link><pubDate>September 15, 2024, 10:41 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/09/download-14-3-300x168.png</image><category>त्योहार</category><excerpt>पटना: शारदीय नवरात्रि की शुरुआत इस साल 3 अक्‍टूबर से हो रही है। इस बार मां दुर्गा की सवारी पालकी होने वाला है। मां भवानी हर बार अलग-अलग सवारी पर सवार होकर धरती लोक पहुंचती हैं। बता दें कि मां दुर्गा किस जिस भी वाहन से आती हैं इसका पूरा असर देश ...</excerpt><content>
&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;&lt;strong&gt;पटना: &lt;/strong&gt;शारदीय नवरात्रि की शुरुआत इस साल 3 अक्‍टूबर से हो रही है। इस बार मां दुर्गा की सवारी पालकी होने वाला है। मां भवानी हर बार अलग-अलग सवारी पर सवार होकर धरती लोक पहुंचती हैं। बता दें कि मां दुर्गा किस जिस भी वाहन से आती हैं इसका पूरा असर देश और दुनिया पर देखने को मिल जाता है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;पालकी की सवारी का संकेत अच्छा नहीं&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां दुर्गा का पालकी पर सवार होकर आना देश व दुनिया की सुरक्षा और आर्थिक व्‍यवस्‍था के लिए शुभ संकेत नहीं है। तो आइए जानते हैं नवरात्रि कब से कब तक रहने वाला हैं और साथ ही मां भवानी के पालकी पर आने से किन सब बातों का अनुमान लगाया जा रहा है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;नवरात्रि कब से कब तक&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;इस साल शारदीय नवरात्रि 3 अक्‍टूबर से शुरू होगी और 11 अक्‍टूबर की महानवमी है। जबकि 12 अक्‍टूबर को दशहरा और मां दुर्गा का विर्सजन किया जाएगा। 3 अक्‍टूबर को कलश स्‍थापना होने के साथ प्रथम रूप मां शैलपुत्री की पूजा होगी।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;मां दुर्गा करेंगी पालकी की सवारी&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा किस वाहन पर सवार होती हैं यह इस बात पर निर्भर करता है कि नवरात्रि किस दिन शुरू होती है। जब नवरात्रि मंगलवार और शनिवार को शुरू होती है तो मां दुर्गा की सवारी अश्व यानी घोड़ा मानी जाती है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;नवरात्रि की प्रथम दिन पर निर्भर करता है वाहन&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;यदि नवरात्रि गुरुवार और शुक्रवार को शुरू होती है तो मां दुर्गा को डोली और पालकी पर सवार माना जाता है। यदि मां दुर्गा रविवार और सोमवार को आती हैं तो उनका वाहन हाथी है। जो सबसे शुभ माना जाता है.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;पालकी की सवारी से ऐसा होगा असर&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;ज्योतिष और धर्म के जानकार लोगों का कहना है कि जब मां दुर्गा डोली या पालकी पर सवार होती हैं तो यह अच्छा संकेत नहीं होता है। पालकी पर मां दुर्गा का आगमन सभी के लिए चिंता बढ़ाने वाला माना जाता है। अर्थव्यवस्था के चौपट होने से लोगों का कारोबार मंदा पड़ने की आशंका है.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;महामारी फैलने का भी डर&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;माता की पालकी की सवारी के कारण देश-दुनिया में महामारी फैलने का भी डर है. लोगों को किसी बड़ी अप्राकृतिक घटना का सामना करना पड़ सकता है। स्वास्थ्य में भारी गिरावट आ सकती है। दूसरे देशों से हिंसा की ख़बरें आ सकती हैं.&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>इस नवरात्रि जरूर करें श्री दुर्गा सप्तशती का पाठ, इन 13 अध्यायों में छिपा है जीवन के दुखों का समाधान</title><link>https://bihar.inkhabar.com/festival/this-navratri-definitely-read-shri-durga-saptashati-the-solution-to-the-sorrows-of-life-is-hidden-in-these-13-chapters/</link><pubDate>September 10, 2024, 11:42 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/09/download-11-2-300x168.png</image><category>त्योहार</category><excerpt>पटना: हिंदू धर्म में नवरात्रि को प्रमुख त्योहार माना गया है. इस साल शारदीय नवरात्रि की शुरुआत गुरुवार, 3 अक्टूबर से जो शनिवार 12 अक्टूबर तक चलेगी. ऐसे में नवरात्रि शुरू होने से पहले जान लें कुछ खास बातें। नवरात्रि के दौरान दुर्गा सप्तशती का पाठ...</excerpt><content>
&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;&lt;strong&gt;पटना:&lt;/strong&gt; हिंदू धर्म में नवरात्रि को प्रमुख त्योहार माना गया है. इस साल शारदीय नवरात्रि की शुरुआत गुरुवार, 3 अक्टूबर से जो शनिवार 12 अक्टूबर तक चलेगी. ऐसे में नवरात्रि शुरू होने से पहले जान लें कुछ खास बातें। नवरात्रि के दौरान दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से क्या लाभ होता है आदि सबकुछ जानेंगे इस आर्टिकल में।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;दुर्गा सप्तशती का पाठ करना अति लाभकारी&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;नवरात्रि के दौरान श्री दुर्गा सप्तशती का पाठ अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दुर्गा सप्तशती को शतचंडी, नवचंडी या चंडी पाठ के नाम से भी जाना जाता है। रामायण में भगवान राम ने भी लंका पर आक्रमण करने से पहले इस चंडी पाठ का आयोजन किया था, जिसे आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तिथि तक शारदीय नवरात्रि के रूप में मनाया जाता है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;सभी अध्याय से मिलता है अलग-अलग लाभ&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;दुर्गा सप्तशती के सभी 13 अध्यायों का अपना एक अलग ही महत्व है. यदि इसका पाठ श्रद्धापूर्वक किया जाए तो फल बहुत जल्दी प्राप्त होता है, लेकिन लोभ से किया गया पाठ कोई फल नहीं देता। दुर्गा सप्तशती के प्रत्येक अध्याय का क्या फल है और दुर्गा सप्तशती के पाठ का क्या अलौकिक महत्व है। आज यहां हम दुर्गा सप्तशती पाठ के बारे में सभी आवश्यक और महत्वपूर्ण बात जानेंगे.&lt;/p&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;&lt;strong&gt;अध्याय 1-&lt;/strong&gt; इसके पाठ को करने से सभी तरह की चिंता से मुक्ति मिलती हैं और शत्रु का भी डर हमारे अंदर से दूर हो जाता है. इतना ही नहीं, दुर्गा सप्तशती के प्रथम अध्याय का पाठ करने से शत्रुओं का नाश होता है। यह पाठ सभी प्रकार की चिंताओं को दूर करने, मानसिक विकारों से उत्पन्न बाधाओं को दूर करने, मन को सही दिशा में लगाने और खोई हुई चेतना को वापस लाने में जबरदस्त प्रभाव दिखाता है।&lt;/p&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;&lt;strong&gt;अध्याय 2-&lt;/strong&gt; इसका पाठ करने से किसी भी प्रकार के विवाद या वाद-विवाद में, मकान या जमीन पर कब्जा कर लेने वाले प्रबल शत्रु के विरुद्ध विजय प्राप्त होती है। कोर्ट-कचहरी, लड़ाई-झगड़े आदि में विजय पाने के लिए यह पाठ बहुत उपयोगी है। लेकिन झूठ बोलने वालों और गलत काम करने वालों को इससे कोई लाभ नहीं मिलता।&lt;/p&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;&lt;strong&gt;अध्याय 3-&lt;/strong&gt; तृतीय अध्याय के पाठ से युद्ध व कोर्ट-कचहरी में विजय मिलती है तथा शत्रुओं से मुक्ति मिलती है। शत्रुओं से मुक्ति पाने के लिए यदि आपके अकारण ही शत्रु हो रहे हैं और आप यह पता नहीं लगा पा रहे हैं कि ऐसा कौन कर रहा है तो यह पाठ उपयुक्त है।&lt;/p&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;&lt;strong&gt;अध्याय 4- &lt;/strong&gt;इस अध्याय को पढ़ने से धन-संपत्ति, सुंदर जीवनसाथी और मां की भक्ति प्राप्त होती है। भक्ति, शक्ति और तत्वज्ञान के लिए यह पाठ उन लोगों के लिए फलदायी है जो साधना में लगे हैं और समाज के हित के लिए साधना को चेतना देना चाहते हैं।&lt;/p&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;&lt;strong&gt;अध्याय 5-&lt;/strong&gt; इस अध्याय को पढ़ने से भक्ति मिलती है और भय, बुरे स्वप्न और भूत-प्रेत से मुक्ति मिलती है। भक्ति, शक्ति और दर्शन के लिए जो लोग जीवन से परेशान हैं और सोचते हैं कि हर मंदिर और दरगाह पर जाने के बाद भी उन्हें कुछ नहीं मिला, उन्हें इस अध्याय को नियमित रूप से पढ़ना चाहिए।&lt;/p&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;&lt;strong&gt;अध्याय 6-&lt;/strong&gt; इस अध्याय को पढ़ने से सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं और सभी मनोवांछित फल प्राप्त होते हैं। यदि भय, शंका, बाधाएं हों, राहु बहुत खराब हो, केतु पीड़ित हो, तंत्र, जादू, भूत-प्रेत आदि का भय हो तो यह अध्याय अवश्य पढ़ना चाहिए।&lt;/p&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;&lt;strong&gt;अध्याय 7-&lt;/strong&gt; इस अध्याय को पढ़ने से मन की सभी इच्छाएं या कोई विशेष गुप्त इच्छा पूरी हो जाती है। आप सच्चे मन से जो भी कामना करें और किसी को नुकसान न पहुंचाएं, यह अध्याय हर इच्छा को पूरा करने में कारगर है।&lt;/p&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;अध्याय 8- इस अध्याय को पढ़ने से धन लाभ के साथ-साथ वशीकरण भी प्रबल होता है। मिलन और वशीकरण के लिए यह अध्याय बहुत कारगर माना जाता है। हालांकि गलत इरादे से किया गया वशीकरण आपको बुरे परिणाम भी दे सकता है। इसके तहत वशीकरण केवल अच्छे के लिए ही किया जाना चाहिए।&lt;/p&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;&lt;strong&gt;अध्याय 9- &lt;/strong&gt;इस अध्याय के पाठ से खोई हुई वस्तु को खोजने में सफलता मिलती है। धन-संपत्ति की प्राप्ति होती है। खोई हुई सामान ढूंढने, हर प्रकार की इच्छा पूरी करने तथा पुत्र प्राप्ति आदि के लिए यह पाठ कई लोगों के लिए घर से बाहर जाने या खो जाने के बाद वापस आने का साधन बन जाता है।&lt;/p&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;&lt;strong&gt;अध्याय 10-&lt;/strong&gt; इस अध्याय को पढ़ने से गुम हुए व्यक्ति को ढूंढने में सफलता मिलती है। संतान प्राप्ति की शक्ति और सुख की प्राप्ति होती है। गुम हुए व्यक्ति को ढूंढने के लिए, हर मनोकामना पूरी करने के लिए, पुत्र प्राप्ति के लिए, अच्छे पुत्र की कामना करने वालों के लिए या गलत रास्ते पर जा रहे बच्चों को सही रास्ते पर लाने के लिए यह अध्याय बहुत फलदायी है।&lt;/p&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;&lt;strong&gt;अध्याय 11-&lt;/strong&gt; ग्यारहवें अध्याय का पाठ करने से सभी प्रकार की चिंताओं से मुक्ति मिलती है, व्यापार में सफलता मिलती है और सुख-संपत्ति की प्राप्ति होती है। व्यापार में सुख-संपत्ति प्राप्त करने के लिए। यदि आपको व्यापार में घाटा हो रहा है, पैसा टिकता नहीं है या बेकार की चीजों पर बर्बाद हो रहा है, तो यह पाठ आपके जीवन को बदल सकता है।&lt;/p&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;&lt;strong&gt;अध्याय 12-&lt;/strong&gt; इस अध्याय को पढ़ने से रोगों से मुक्ति, निर्भयता और समाज में सम्मान मिलता है। मान-सम्मान और लाभ मिलता है। सम्मान जीवन का एक हिस्सा है। अगर कोई आप पर इसका आरोप लगाता है, तो यह अध्याय अवश्य पढ़ना चाहिए।&lt;/p&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;&lt;strong&gt;अध्याय 13- &lt;/strong&gt;इस अध्याय को पढ़ने से देवी की भक्ति प्राप्त होती है तथा सभी इच्छित वस्तुएं प्राप्त होती हैं। भक्ति प्राप्ति के लिए पूर्ण भक्ति हेतु साधना के बाद इस अध्याय को पढ़ना चाहिए।&lt;/p&gt;
</content></item></channel></rss>