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       <title>Today method of worship News | Latest method of worship News | Breaking method of worship News in English | Latest method of worship News Headlines - Inkhabar</title>
        <description>आज का method of worship समाचार:Today method of worship News ,Latest method of worship News,Aaj Ka Samachar ,method of worship समाचार ,Breaking method of worship News in Hindi, Latest News Headlines - Inkhabar</description>
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        </image><item><title>Geeta Jayanti: आज है गीता जयंती, जानें पूजा के लाभ और विधि</title><link>https://bihar.inkhabar.com/festival/geeta-jayanti-today-is-geeta-jayanti-know-the-benefits-and-method-of-worship/</link><pubDate>December 11, 2024, 10:00 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/12/y6t8.webp</image><category>त्योहार</category><excerpt>पटना। हर साल मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को गीता जयंती मनाई जाती है। ऐसा माना जाता है कि इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया था। यह दिन कई मायनों से महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस जयंती के कई धार्मिक और आध्यात्मिक मह...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना। &lt;/strong&gt;हर साल मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को गीता जयंती मनाई जाती है। ऐसा माना जाता है कि इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया था। यह दिन कई मायनों से महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस जयंती के कई धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। इस बार गीता जयंती आज 11 दिसंबर बुधवार को मनाई जा रही है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;गीता जयंती की पूजा विधि&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;गीता जयंती के मौके पर प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में सुबह उठकर स्नान करना चाहिए। स्नान करने के बाद साफ और स्वच्छ कपड़े पहनने चाहिए। मंदिर की साफ-सफाई करनी चाहिए। भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान करते हुए उनकी विधि-विधान से पूजा करना चाहिए। पूजा के बाद सूर्य देव को जल अर्पित करना चाहिए। इसके बाद भगवान श्री कृष्ण की मूर्ति पर चंदन, पुष्प अर्पित करना चाहिए। इसके बाद भगवान की मूर्ति के आगे दीप जलाएं। भगवद्गीता के ग्रंथ को चंदन और कुमकुम का टीका लगाकर पूजा करें।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;गीता जयंती के लाभ&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;इसके बाद गीता के श्लोकों का पाठ करें। गीता की आरती उतारें। शास्त्रों के मुताबिक गीता का नियमित पाठ करना चाहिए। इससे घर में सुख और समृद्धि का आगमन होता है। साथ ही नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। यह ग्रंथ धर्म नीति, कर्म, सफलता, सुख और जीवन प्रबंधन के महत्वपूर्ण सिद्धांतों से परिपूर्ण है। गीता का पाठ न केवल आत्मबल को बढ़ावा देता है, बल्कि व्यक्ति को हर परिस्थिति का सामना करने की क्षमता भी देता है।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Parivartani Ekadashi: आज है परिवर्तिनी एकादशी, जाने शुभ मुहूर्त और पूजा विधि</title><link>https://bihar.inkhabar.com/festival/parivartani-ekadashi-today-is-parivartani-ekadashi-know-the-auspicious-time-and-method-of-worship/</link><pubDate>September 14, 2024, 8:18 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/09/EKA-300x169.webp</image><category>त्योहार</category><excerpt>पटना। इस साल की परिवर्तिनी एकादशी आज यानी 14 सितंबर को मनाई जा रही है। आज के दिन कई महिलाए और लड़किया व्रत रखती है। आज के दिन भगवान विष्णु के 5वें अवतार वामन देव की पूजा की जाती है। जो लोग वामन परिवर्तनी का व्रत रखते है। उनको हजारों अश्वमेध यज्...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना।&lt;/strong&gt; इस साल की परिवर्तिनी एकादशी आज यानी 14 सितंबर को मनाई जा रही है। आज के दिन कई महिलाए और लड़किया व्रत रखती है। आज के दिन भगवान विष्णु के 5वें अवतार वामन देव की पूजा की जाती है। जो लोग वामन परिवर्तनी का व्रत रखते है। उनको हजारों अश्वमेध यज्ञ कराने के बराबर पुण्य प्राप्त होता है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;पूजा का शुभ मुहूर्त&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;परिवर्तनी एकादशी का व्रत करने से मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस साल परिवर्तिनी एकादशी के दिन शुभ योग भी बन रहे हैं। विष्णु पूजा के दौरान रवि योग और शोभन योग बनेगा। 14 सितंबर को परिवर्तिनी एकादशी का मुहूर्त सुबह 6 बजकर 6 मिनट से आरंभ होगा। व्रत के दिन राहुकाल सुबह 09:11 बजे से 10:44 बजे तक है। जिसमें भगवान की पूजा करना वर्जित है। रवि और शोभन योग में आपको भगवान वामन की पूजा कर लेनी चाहिए। इस दिन पाताल की भद्रा सुबह 09:41 बजे से रात 08:41 बजे तक रहेगी।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;पूजा करने की विधि&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लेना चाहिए। नहाने के बाद सूर्य देव को जल अर्पित करें। फिर हाथ में जल और फूल लेकर परिवर्तिनी एकादशी के अवतार वामन देवता की पूजा करें। उसके बाद शुभ मुहूर्त में भगवान वामन या फिर श्रीहरि विष्णु की मूर्ति या को स्थापित करे। मूर्ति को गंगाजल और पंचामृत चढ़ाए। फिर चंदन, फूल, माला, पीले वस्त्र आदि से उनका श्रृंगार करें। उसके बाद पीले अक्षत्, फूल, तुलसी के पत्ते, गुड़, हल्दी, रोली, फल, नैवेद्य आदि अर्पित करें। वामन देवता की पूजा करें।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Shani Pradosh Vrat: आज है शनि प्रदोष व्रत, जानिए व्रत का महत्व और पूजा विधि</title><link>https://bihar.inkhabar.com/festival/shani-pradosh-vrat-today-is-shani-pradosh-vrat-know-the-importance-of-the-fast-and-method-of-worship/</link><pubDate>August 17, 2024, 4:23 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/08/ा्ी-1-300x169.webp</image><category>त्योहार</category><excerpt>पटना। आज सावन मास की शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि, विशेषकर शनिवार को पड़ती है, हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन को शनि प्रदोष व्रत के रूप में मनाया जाता है। शनि देव को समर्पित यह व्रत, न केवल धार्मिक दृष्टिकोण...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना।&lt;/strong&gt; आज सावन मास की शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि, विशेषकर शनिवार को पड़ती है, हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन को शनि प्रदोष व्रत के रूप में मनाया जाता है। शनि देव को समर्पित यह व्रत, न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से बल्कि ज्योतिषीय दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। आइए, इस जानते है शनि प्रदोष व्रत का महत्व और पूजा विधि&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;व्रत का महत्व&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;शनि देव को न्याय का देवता कहा जाता है। इस व्रत को रखने से शनि देव अपने भक्तों से प्रसन्न हो जाते है। वह व्रत रखने वालों पर सदैव अपने कृपा बनाए रखते है। हिंदू में भगवान शनि को कर्मफल दाता माना जाता है। शनि प्रदोष के व्रत के जरिए भक्त अपने पिछले जन्मों के बुरे कर्मों का प्रायश्चित करते हैं। पिछले जन्म में किए हुए बुरे कर्मों को व्रत करने के माध्यम से कम कर सकते है। प्रदोष व्रत करने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। ऐसा माना जाता है कि इस व्रत को करने वाले व्यक्ति की सभी इच्छाएं पूरी हो जाती है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;व्रत की पूजा विधि&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;व्रत रखने के लिए सभी काम को जल्दी से निपटा कर स्नान कर लेना चाहिए। स्नान करने के बाद भगवान शनि की विधि-विधान के साथ पूजा करनी चाहिए। शनि देव को तेल अर्पित करना चाहिए। तेल के साथ ही काले तिल के दाने भी अर्पित करने चाहिए। शनि देव के सामने तेल का दीपक जलाना चाहिए। शनि देव के मंत्र का जाप करना चाहिए। गरीब और जरूरमंद को दान करना चाहिए। &lt;/p&gt;
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