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       <title>Today Health News | Latest Health News | Breaking Health News in English | Latest Health News Headlines - Inkhabar</title>
        <description>आज का Health समाचार:Today Health News ,Latest Health News,Aaj Ka Samachar ,Health समाचार ,Breaking Health News in Hindi, Latest News Headlines - Inkhabar</description>
        <link>https://www.inkhabar.com/tag/health</link>
        <lastBuildDate>April 22, 2026, 9:12 pm</lastBuildDate>
        <copyright>Inkhabar</copyright>
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        </image><item><title>World Aids Day: एड्स के मरीजों में दिखते है ये शुरुआती लक्षण, स्तनपान से भी बीमारी का खतरा</title><link>https://bihar.inkhabar.com/desh-pradesh/world-aids-day-these-initial-symptoms-are-seen-in-aids-patients-there-is-a-risk-of-disease-even-through-breastfeeding/</link><pubDate>December 1, 2024, 8:04 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/12/download-34.png</image><category>देश-प्रदेश</category><excerpt>पटना: एड्स एक गंभीर बीमारी है जिसका नाम ही डराने के लिए काफी है। यह एक लाइलाज बीमारी है. दुनिया भर में एड्स का खतरा बढ़ता जा रहा है। एचआईवी से होने वाली इस बीमारी के प्रति जागरूकता और रोकथाम के लिए हर साल 1 दिसंबर को विश्व एड्स दिवस मनाया जाता ...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना: &lt;/strong&gt;एड्स एक गंभीर बीमारी है जिसका नाम ही डराने के लिए काफी है। यह एक लाइलाज बीमारी है. दुनिया भर में एड्स का खतरा बढ़ता जा रहा है। एचआईवी से होने वाली इस बीमारी के प्रति जागरूकता और रोकथाम के लिए हर साल 1 दिसंबर को विश्व एड्स दिवस मनाया जाता है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;AIDS DAY क्यों मनाया जाता?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;AIDS DAY मनाने के पीछे का उद्देश्य लोगों को इस बीमारी के प्रति जागरूक करना और सावधानियां बरतना है। तो आइए जानते हैं कि एड्स की बीमारी कितनी खतरनाक है, एड्स के शुरुआती लक्षण क्या हैं और इसका इलाज कब शुरू करना चाहिए।&lt;/p&gt;



&lt;h3 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;जानें क्या है एड्स?&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;



&lt;p&gt;एड्स एचआईवी वायरस के संक्रमण से होने वाली बीमारी है। यह प्रतिरक्षा प्रणाली को नुकसान पहुंचाता है और शरीर की क्षमता को कमजोर करता है। यौन संचारित संक्रमणों के अलावा इस संक्रमण का खतरा संक्रमित रक्त चढ़ाने, संक्रमित व्यक्ति को दिए गए इंजेक्शन के इस्तेमाल, गर्भावस्था या स्तनपान के माध्यम से भी मां से बच्चे में देखा जा सकता है।&lt;/p&gt;



&lt;h4 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;एड्स का खतरा सबसे ज्यादा किसे है&lt;/strong&gt;&lt;/h4&gt;



&lt;ol class=&quot;wp-block-list&quot;&gt;
&lt;li&gt;असुरक्षित यौन संबंध बनाने से कोई भी व्यक्ति एचआईवी की चपेट में आ सकता है।&lt;/li&gt;



&lt;li&gt;संक्रमित व्यक्ति से खून लेने पर संक्रमण का खतरा हो सकता है।&lt;/li&gt;



&lt;li&gt;संक्रमण गर्भावस्था या प्रसव के दौरान या स्तनपान के दौरान संक्रमित मां से उसके बच्चे में फैल सकता है। गर्भावस्था के दौरान एचआईवी टेस्ट के माध्यम से इस जोखिम को कम करने का प्रयास किया जा सकता है।&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;



&lt;h4 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;एड्स के लक्षण&lt;/strong&gt;&lt;/h4&gt;



&lt;ol class=&quot;wp-block-list&quot;&gt;
&lt;li&gt;एचआईवी संक्रमण या एड्स की पुष्टि रक्त परीक्षण से होती है। हालांकि, इसे कुछ लक्षणों के जरिए भी पहचाना जा सकता है।&lt;/li&gt;



&lt;li&gt;एचआईवी से संक्रमित लोगों को वायरस के शरीर में प्रवेश करने के 2-4 सप्ताह के भीतर फ्लू जैसी बीमारी होने लगती है। इसके अलावा बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, गले और मुंह में घाव और वजन कम होना भी इस बीमारी के लक्षण माने जाते हैं।&lt;/li&gt;



&lt;li&gt;अगर समय रहते इस बीमारी पर ध्यान न दिया जाए तो खून में वायरल लोड बढ़ जाता है, जिससे यह बीमारी खतरनाक हो सकती है।&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
</content></item><item><title>सर्दियों में अस्थमा की प्रॉब्लम, ऐसे 3 आयुर्वेदिक इलाज जो देंगे तुरंत राहत</title><link>https://bihar.inkhabar.com/desh-pradesh/asthma-problem-in-winter-3-such-ayurvedic-treatments-which-will-give-instant-relief/</link><pubDate>November 30, 2024, 7:54 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/11/download-19-1-300x200.png</image><category>देश-प्रदेश</category><excerpt>पटना: अस्थमा एक गंभीर श्वसन रोग है। जिसमें श्वसन नली में सूजन आ जाती है। सर्दियां शुरू होते ही सिर्फ बड़े ही नहीं बल्कि छोटे बच्चे भी बीमार पड़ सकते हैं। हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार सांस लेने में तकलीफ, खांसी और खांसते समय सीने में दर्द अस्थमा क...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना:&lt;/strong&gt; अस्थमा एक गंभीर श्वसन रोग है। जिसमें श्वसन नली में सूजन आ जाती है। सर्दियां शुरू होते ही सिर्फ बड़े ही नहीं बल्कि छोटे बच्चे भी बीमार पड़ सकते हैं। हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार सांस लेने में तकलीफ, खांसी और खांसते समय सीने में दर्द अस्थमा के मुख्य लक्षण हैं।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;नजरअंदाज न करें&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;बता दें कि अस्थमा के लक्षण दिखने पर उसे नजरअंदाज न करें बल्कि सही समय पर इसका इलाज कराएं। अगर अस्थमा का ठीक से इलाज न किया जाए तो इसके लक्षण बढ़ने लगते हैं। आयुर्वेदिक विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ आसान आयुर्वेदिक उपायों को अपनाकर अस्थमा के लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है। यहां ऐसे आयुर्वेदिक उपायों के बारे में बताया गया है जो अस्थमा के इलाज में मददगार हैं।&lt;/p&gt;



&lt;h3 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;तुलसी&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;



&lt;p&gt;तुलसी में कफ को दूर करने वाले गुण होते हैं. इसके सेवन से श्वास नली में जमा कफ निकल जाता है और श्वास नली की सूजन भी कम होती है. 5-10 तुलसी के पत्तों को पानी में उबालें और जब यह गुनगुना हो जाए तो इसमें शहद मिलाकर पी लें. दिन में एक या दो बार इसे पीने से खांसी से राहत मिलती है और गले में जमा कफ निकल जाता है.&lt;/p&gt;



&lt;h4 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;अदरक&lt;/strong&gt;&lt;/h4&gt;



&lt;p&gt;अदरक का उपयोग सर्दियों में अधिक किया जाता है। कुछ लोग तो चाय में इसका इस्तेमाल करते हैं तो कुछ लोग सब्जियों के स्वाद बढ़ाने के लिए करते हैं। ऐसे में आयुर्वेद का कहना है कि अगर आप कफ से ग्रसित है तो अदरक का इस्तेमाल अधिक करें. यह अस्थमा के रोगियों के लिए बहुत फायदेमंद माना गया है।&lt;/p&gt;



&lt;h4 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;मुलेठी&lt;/strong&gt;&lt;/h4&gt;



&lt;p&gt;आयुर्वेद के अनुसार यह खांसी की एक बेहतरीन औषधि है जो गले में कफ जमा होने से रोकती है। मुलेठी में खांसी को शांत करने के गुण होते हैं। यह रोगियों के लिए बहुत उपयोगी है। यह गले में कफ जमने से रोकता है और खांसी से तुरंत राहत दिलाता है। मुलेठी के पाउडर को शहद या गुनगुने पानी में मिलाकर पीने से फेफड़ों की समस्याओं से राहत मिलती है।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>लड़कियां हो जाएं सावधान! नेल पेंट लगाने से हो सकती है ये खतरनाक बीमारियां</title><link>https://bihar.inkhabar.com/ajab-gajab/girls-be-careful-applying-nail-paint-can-cause-these-dangerous-diseases/</link><pubDate>November 26, 2024, 11:54 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/11/download-18-1-300x187.png</image><category>अजब-गजब</category><excerpt>पटना: इन दिनों फैशन की दौड़ में लड़कियां नाखूनों की मैनीक्योर और पेडीक्योर करवाती हैं. पिछले कुछ सालों से मार्केट में नेल केयर प्रोडक्ट्स की डिमांड अधिक तेज है. खासकर लड़कियां अपने हाथों को खूबसूरत बनाने के लिए नेल पेंट्स का यूज़ अधिक करती है. ज...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना:&lt;/strong&gt; इन दिनों फैशन की दौड़ में लड़कियां नाखूनों की मैनीक्योर और पेडीक्योर करवाती हैं. पिछले कुछ सालों से मार्केट में नेल केयर प्रोडक्ट्स की डिमांड अधिक तेज है. खासकर लड़कियां अपने हाथों को खूबसूरत बनाने के लिए नेल पेंट्स का यूज़ अधिक करती है.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;जानलेवा है अलग-अलग रंग की नेल पॉलिश&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;बाजार में अलग-अलग रंग की नेल पॉलिश आसानी से मिल जाते हैं। महिलाएं इन्हें बड़े शौक से लगाती हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये नेल पेंट जानलेवा बीमारियों का कारण भी बन सकते हैं। इनसे शरीर के कई अंगों पर हानिकारक प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए सावधान रहने की जरूरत है. आइए जानते हैं क्यों हानिकारक हैं नेल पेंट…&lt;/p&gt;



&lt;h3 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;नेल पेंट्स में मौजूद है ये हानिकारक केमिकल्स&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;



&lt;p&gt;कैम्फर&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;डिप्रोपाइल थैलेट&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;टोल्यूनि&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;फॉर्मल्डिहाइड&lt;/p&gt;



&lt;h4 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;नेल पेंट के कई साइड इफेक्ट्स&lt;/strong&gt;&lt;/h4&gt;



&lt;ol class=&quot;wp-block-list&quot;&gt;
&lt;li&gt;नेल पॉलिश हमेशा लगाने से नाखूनों का रंग खराब हो सकता है।&lt;/li&gt;



&lt;li&gt;जेल नेल पॉलिश को सुखाने के लिए उपयोग किए जाने वाले लैंप यूवी किरणें उत्पन्न करते हैं, जो त्वचा कैंसर और समय से पहले बूढ़ा होने का कारण बन सकते हैं।&lt;/li&gt;



&lt;li&gt;केमिकल प्रोडक्ट्स से नेल पॉलिश हटाने से नाखूनों का प्राकृतिक रंग ख़राब हो सकता है। जब नाखून टूटते हैं, तो बैक्टीरिया शरीर में प्रवेश कर सकते हैं, जिससे संक्रमण हो सकता है।&lt;/li&gt;



&lt;li&gt;नेल पॉलिश में मौजूद केमिकल नाखूनों में घुस सकते हैं और कई समस्याएं पैदा कर सकते हैं।&lt;/li&gt;



&lt;li&gt;इससे त्वचा संबंधी समस्याएं हो सकती हैं.&lt;/li&gt;



&lt;li&gt;केमिकल नेल पॉलिश से सांस संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।&lt;/li&gt;



&lt;li&gt;नेल पॉलिश दिल की खतरनाक बीमारियों का कारण भी बन सकती है।&lt;/li&gt;



&lt;li&gt;कई अध्ययनों से पता चला है कि नेल पॉलिश से कैंसर का भी खतरा होता है।&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;



&lt;h4 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;इससे कैसे बचें&lt;/strong&gt;&lt;/h4&gt;



&lt;ol class=&quot;wp-block-list&quot;&gt;
&lt;li&gt;नेल पॉलिश को ज्यादा देर तक लगा न रहने दें।&lt;/li&gt;



&lt;li&gt;जेल या पाउडर डिप पॉलिश को स्वयं न हटाएं। किसी मैनीक्योरिस्ट से सलाह लें.&lt;/li&gt;



&lt;li&gt;UV लाइट से बचें।&lt;/li&gt;



&lt;li&gt;नेल पॉलिश केवल खास मौकों पर ही लगाएं।&lt;/li&gt;



&lt;li&gt;कम केमिकल वाले नेल पॉलिश ब्रांड आज़माएं।&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
</content></item><item><title>Health Tips: क्या आप भी हो रहे कम उम्र में इस खतरनाक बिमारी के शिकार, जानें लक्षण</title><link>https://bihar.inkhabar.com/ajab-gajab/health-tips-are-you-also-becoming-a-victim-of-this-dangerous-disease-at-a-young-age-know-the-symptoms/</link><pubDate>July 3, 2024, 12:09 pm</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/07/download-13-300x243.png</image><category>अजब-गजब</category><excerpt>पटना : इन दिनों लोगों को मॉडर्न लाइफस्टाइल से जीना बेहद ही पसंद आता है। ऐसे जीवन जीने की सैली को लोग अच्छा और सुगम मानते हैं। क्योंकि इस जीवन में लोगों को आसानी से सबकुछ मिल जाता है। लेकिन कभी आपने सोचा है इतनी आसानी से मिली चीजें आपके शरीर पर ...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना &lt;/strong&gt;: इन दिनों लोगों को मॉडर्न लाइफस्टाइल से जीना बेहद ही पसंद आता है। ऐसे जीवन जीने की सैली को लोग अच्छा और सुगम मानते हैं। क्योंकि इस जीवन में लोगों को आसानी से सबकुछ मिल जाता है। लेकिन कभी आपने सोचा है इतनी आसानी से मिली चीजें आपके शरीर पर क्या प्रभाव छोड़ता है। जी हां इस मॉडर्न लाइफस्टाइल में अधिकांश लोग इन दिनों ओवरथिकिंग के शिकार हो रहे हैं। जिस वजह से उन्हें कई सारी बीमारियों के होने का खतरा भी बढ़ रहा है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;जितनी मॉडर्न लाइफस्टाइल उतनी अधिक परेशानी&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;हेल्थ एक्सपर्ट का मानना है कि अगर आप सरल और सुगम जीवन सैली में जीते है तो आपको सौ बिमारी होने के चांसेस है। वहीं इन दिनों लोगों के जीने का तरीका बेहद मॉडर्न होते जा रहा है, जिस वजह से कई सारी बिमारी आपके ऊपर हावी होते जा रहे हैं। ऐसे में आप कम उम्र यानी अपनी जवानी में ही बहुत सारी बीमारियों से ग्रसित होने लगते हैं। मॉडर्न लाइफस्टाइल भले ही आपके जीवन से जुड़े चीजों को आसान कर देता है, वहीं दूसरी तरफ आपके अंदर एंग्जायटी और पार्किंसंस जैसे गंभीर बिमारी को भी एंट्री देता हैं।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;जिनके लाइफ मॉडर्न उन्हें सबसे अधिक दिक्कत&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;एक स्टडी में पाया गया है कि जिन लोगों का लाइफ बिल्कुल मॉडर्न हो चुका हैं, उनके जीवन में कई तरह की परेशानी आ रही है। उनके अंदर एंग्जायटी और पार्किंसंस की बीमारी दोगुना होते जा रही है. जानकारी के लिए बता दें कि पार्किंसंस नर्वस सिस्टम और ब्रेन से जुड़ी खतरनाक बीमारी है. जो पूरी दुनिया के 10 मिलियन लोगों को अपना शिकार बना चुकी है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;ये हैं पार्किसन्स के लक्षण&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (यूसीएल) के वैज्ञानिकों के अनुसार पार्किंसंस की वजह से लोगों में डिप्रेशन, नींद में समस्या, थकान, हाइपोटेंशन, कंपकंपी, अकड़न और शरीर में दर्द के साथ कब्ज की परेशानी हमेशा बनी रहती है.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;पार्किंसंस रोगी में देख सकते हैं ये सामान्य लक्षण&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;हमेशा ऐंठन होना&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;मुंह से लार टपकना&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;निगलने में दिक्कत होना&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;मांसपेशियों में लगातार कंपन होना&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;शरीर के अंगों को हिलाने में दिक्कत होना&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;शरीर में बैलेंस नहीं मिल पाना&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;आंखों को झपकाने में परेशानी होना&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;आवाज का धीमा होना&lt;/p&gt;
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