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       <title>Today cji chandrachud News | Latest cji chandrachud News | Breaking cji chandrachud News in English | Latest cji chandrachud News Headlines - Inkhabar</title>
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        </image><item><title>सुप्रीम कोर्ट ने शराब पर पलटा फैसला, CJI ने कही ये बात</title><link>https://bihar.inkhabar.com/top-news/supreme-court-reversed-its-decision-on-liquor-cji-said-this/</link><pubDate>October 23, 2024, 7:56 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/10/download-89-1.png</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>पटना: साल 1990 में सिंथेटिक्स एंड केमिकल्स मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र के पक्ष में फैसला सुनाया था. संविधान पीठ ने कहा कि राज्य समवर्ती सूची के तहत भी औद्योगिक शराब को विनियमित करने का दावा नहीं कर सकते। राज्यों के पास है इसके पूरे अधिकार...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना:&lt;/strong&gt; साल 1990 में सिंथेटिक्स एंड केमिकल्स मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र के पक्ष में फैसला सुनाया था. संविधान पीठ ने कहा कि राज्य समवर्ती सूची के तहत भी औद्योगिक शराब को विनियमित करने का दावा नहीं कर सकते।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;राज्यों के पास है इसके पूरे अधिकार&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्यों को भी औद्योगिक शराब के उत्पादन और आपूर्ति के संबंध में कानून बनाने का अधिकार है, इसलिए &amp;#8220;राज्य की शक्ति छीनी नहीं जा सकती&amp;#8221;।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;डीवाई चंद्रचूड़ ने फैसला सुनाते हुए क्या कहा?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;CJI डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस हृषिकेश रॉय, उज्जवल भुइयां, मनोज मिश्रा, एससी शर्मा, एएस ओका, जेबी पारदीवाला और एजी मसीह के बहुमत ने फैसला सुनाया कि राज्यों को उपभोक्ता शराब को विनियमित करने का पूरा अधिकार है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;GST आने के बाद सुप्रीम कोर्ट का लिया था सहारा&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;वहीं, जस्टिस बीवी नागरत्ना ने इस फैसले से असहमति जताई और कहा कि औद्योगिक शराब को नियंत्रित करने का विधायी अधिकार केवल केंद्र के पास होगा. इस मामले में याचिकाकर्ताओं ने कहा कि जीएसटी लागू होने के बाद औद्योगिक शराब पर टैक्स लगाने का अधिकार बहुत महत्वपूर्ण हो गया है.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;34 साल पहले सुनाई गई थी फैसला&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;34 साल पहले 7 जजों की संविधान पीठ ने इस मामले में औद्योगिक शराब उत्पादन और नियमन की शक्ति केंद्र सरकार को सौंपने पर सहमति जताई थी. कोर्ट की नई बेंच ने इस फैसले को पलट दिया और साफ कर दिया कि औद्योगिक शराब का इस्तेमाल पीने के लिए नहीं किया जाता है. अतः इसे संविधान के अनुसार गैर विषैले अल्कोहल की श्रेणी में वर्गीकृत किया जाना चाहिए।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>CJI: जजों के वेतन रोकने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को लगाई फटकार</title><link>https://bihar.inkhabar.com/top-news/cji-supreme-court-reprimands-bihar-government-for-stopping-salaries-of-judges/</link><pubDate>October 1, 2024, 9:27 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/10/zxcvb-300x169.webp</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>पटना। हाईकोर्ट के जजों के बकाया वेतन जारी करने और न्यायिक अधिकारियों के लिए पेंशन निर्धारित करने के मुद्दे से संबंधित मामलों की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को कड़े निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘बिहार सरकार के वर्तमान ...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना।&lt;/strong&gt; हाईकोर्ट के जजों के बकाया वेतन जारी करने और न्यायिक अधिकारियों के लिए पेंशन निर्धारित करने के मुद्दे से संबंधित मामलों की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को कड़े निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘बिहार सरकार के वर्तमान जज न्यायाधीश आर.पी. मिश्रा का वेतन तुरंत उन्हें दिया जाए, जिनका हाईकोर्ट में प्रमोशन के बाद से सैलरी बाकी है।’&lt;br&gt;बिना वेतन के काम की उम्मीद कैसे?&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;सुनवाई चीफ जस्टिस ने की &lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;अदालत ने यह भी निर्देश दिए कि ‘किसी भी जज से वेतन के बिना काम करने की उम्मीद नहीं की जा सकती है।’इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया डी.वाई चंद्रचूड़, न्यायाधीश जे.बी पारदीवाला और न्यायाधीश मनोज मिश्रा की पीठ कर रही थी। इस दौरान गंभीरता से विचार करते हुए सीजेआई ने पटना हाईकोर्ट को फटकार लगाई। उन्होंने कहा, ‘जस्टिस आरपी मिश्रा का वेतन अभी तक उन्हें क्यों नहीं दिया गया? वे उन्हें वेतन देने से मना क्यों कर रहे हैं?&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;अन्य जजों की तरह सेवाएं प्राप्त करेंगे&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि उनके जैसे लोग हाईकोर्ट में नियुक्त होने पर अन्य सभी हाईकोर्ट जजों की तरह सेवाएं प्राप्त करेंगे। सुनवाई के दौरान पीठ ने यह भी कहा, ‘अगर जस्टिस मिश्रा जिला न्यायपालिका में कार्यरत रहते हुए नई पेंशन योजना के तहत शासित थे, लेकिन हाईकोर्ट में प्रमोशन होने पर वे दूसरे हाईकोर्ट न्यायाधीशों के बराबर सेवा शर्तों के अधीन शासित होंगे। जज को सेवा देने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कोर्ट ने राज्य सरकार को जस्टिस मिश्रा का वेतन बकाया राशि के साथ जारी करने का निर्देश दिया।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;7 जजों का वेतन जारी करने के निर्देश&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;सुनवाई के दौरान न्यायालय को याद दिलाया गया कि जस्टिस रुद्र प्रकाश मिश्रा को नवंबर 2023 में उच्च न्यायिक सेवाओं से हाईकोर्ट में प्रमोशन के बाद से अभी तक जीपीएफ नहीं दिया गया। हालांकि उन्होंने सभी औपचारिकताओं को पूर्ण कर लिया है। जज को प्रमोशन के बाद से अब तक वेतन नहीं मिला है। साल 2023 के मार्च में सुप्रीम कोर्ट ने इसी तरह के अंतरिम उपाय में पटना हाईकोर्ट के 7 जजों के वेतन को जारी करने का निर्देश दिया था, जो उनके जीपीएफ अकाउंट बंद करने के बाद से रोके गए थे।&lt;/p&gt;
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