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       <title>Today cancer News | Latest cancer News | Breaking cancer News in English | Latest cancer News Headlines - Inkhabar</title>
        <description>आज का cancer समाचार:Today cancer News ,Latest cancer News,Aaj Ka Samachar ,cancer समाचार ,Breaking cancer News in Hindi, Latest News Headlines - Inkhabar</description>
        <link>https://www.inkhabar.com/tag/cancer</link>
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        </image><item><title>आप भी खा रहे कुकिंग ऑयल की जगह पर जहर! हो सकता है कैंसर का खतरा, अमेरिकी स्टडी ने खोली पोल</title><link>https://bihar.inkhabar.com/national/you-too-are-eating-poison-instead-of-cooking-oil-there-may-be-a-risk-of-cancer-american-study-exposed/</link><pubDate>December 13, 2024, 7:02 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/12/download-39.png</image><category>देश</category><excerpt>पटना: हम खाना पकाने के लिए तेल का उपयोग करते हैं। लेकिन क्या हम जो तेल उपयोग कर रहे हैं वह कितना शुद्ध हैं। इसका पता लगाना आज के समय में बेहद कठिन हो गया है। ऐसे में अमेरिकी स्टडी ने खाना पकाने वाला तेल को लेकर बड़ा खुलासा किया है। कुकिंग तेल बन...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना: &lt;/strong&gt;हम खाना पकाने के लिए तेल का उपयोग करते हैं। लेकिन क्या हम जो तेल उपयोग कर रहे हैं वह कितना शुद्ध हैं। इसका पता लगाना आज के समय में बेहद कठिन हो गया है। ऐसे में अमेरिकी स्टडी ने खाना पकाने वाला तेल को लेकर बड़ा खुलासा किया है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;कुकिंग तेल बना रहा युवाओं को अधिक शिकार&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;लेकिन क्या आप जानते हैं कि खाना पकाने का तेल भी कैंसर का कारण बन सकता है। जी हां, अमेरिकी सरकार द्वारा किए गए एक अध्ययन में कहा गया है कि खाना पकाने का तेल कैंसर का कारण बन सकता है, खासकर युवाओं में। मेडिकल जर्नल गट में प्रकाशित एक अध्ययन से पता चलता है कि सूरजमुखी, अंगूर के बीज, कैनोला और मकई जैसे बीज के तेल के अत्यधिक सेवन से कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;80 मरीजों पर किया गया रिसर्च&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;जब कोलन कैंसर से पीड़ित 80 मरीजों पर शोध किया गया तो देखा गया कि उनमें बायोएक्टिव लिपिड का स्तर उच्च था जो बीज के तेल के टूटने के बाद बनता है। शोध में 30 से 85 वर्ष की आयु के लोगों के 81 ट्यूमर नमूनों को देखा गया और निर्धारित किया गया कि उनके कैंसरग्रस्त ट्यूमर में लिपिड का उच्च स्तर बीज के तेल के कारण था।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;शरीर में सूजन होने की चांसेस&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;इससे पहले हुए शोध में बीज के तेल के स्वास्थ्य पर हानिकारक प्रभाव का खुलासा हुआ था। इससे शरीर में सूजन हो सकती है. हालांकि, बीज का तेल जिन बायोएक्टिव लिपिड को तोड़ता है, वे कोलन कैंसर को तेजी से विकसित करने में मदद कर सकते हैं और शरीर को ट्यूमर से लड़ने से भी रोक सकते हैं।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;इन चीजों के कारण होता है कैंसर&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;बीज के तेल में ओमेगा-6 और पॉलीअनसेचुरेटेड फैटी एसिड होते हैं। शोध के अनुसार, बीज के तेल के अत्यधिक सेवन से होने वाली सूजन कैंसर के विकास को बढ़ावा दे सकती है। हालांकि , इस पर शोध अभी भी जारी है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;खाना पकाने का तेल कैसे चुनें?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;&lt;strong&gt;स्वास्थ्य के लिए&lt;/strong&gt;: यदि आप हेल्दी डायट लेते है, तो हल्का तेल, जैसे जैतून का तेल या सूरजमुखी का तेल यूज़ करना बेहतर होगा।&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;&lt;strong&gt;खाना पकाने की विधि के आधार पर:&lt;/strong&gt; मूंगफली या सोयाबीन का तेल तलने के लिए अच्छा है, जबकि जैतून का तेल सलाद और हल्का भोजन बनाने के लिए एक बढ़िया विकल्प है।&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;&lt;strong&gt;स्वाद और सुगंध के लिए&lt;/strong&gt;: अगर आप खास स्वाद चाहते हैं तो तिल का तेल या नारियल का तेल इस्तेमाल कर सकते हैं.&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>अब सॉफ्टवेयर से चलेगा कैंसर का पता, IIIT भागलपुर में रिसर्च जारी</title><link>https://bihar.inkhabar.com/states/now-cancer-will-be-detected-through-software-research-continues-in-iiit-bhagalpur/</link><pubDate>September 7, 2023, 12:53 pm</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/09/download-6-2-300x122.png</image><category>राज्य</category><excerpt>पटना। टीबी के बाद अब ब्लडकैंसर की जांच भी आसान होगी। जिसे लेकर IIIT भागलपुर में रिसर्च जारी है। शोधकर्ता डॉ. चंदन कुमार ने सॉफ्टवेयर के बारे में बात की। कैंसर मरीजों की वृद्धि भागलपुर जिले में लगातार नई चीज़ों पर रिसर्च जारी है। बता दें कि टीबी...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना।&lt;/strong&gt; टीबी के बाद अब ब्लडकैंसर की जांच भी आसान होगी। जिसे लेकर IIIT भागलपुर में रिसर्च जारी है। शोधकर्ता डॉ. चंदन कुमार ने सॉफ्टवेयर के बारे में बात की।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;कैंसर मरीजों की वृद्धि&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;भागलपुर जिले में लगातार नई चीज़ों पर रिसर्च जारी है। बता दें कि टीबी के बाद अब ब्लडकैंसर की जांच भी आसानी से होगी। IIIT भागलपुर में इसे लेकर रिसर्च जारी है और बहुत जल्द सॉफ्टवेयर तैयार हो जाएगा। इस सॉफ्टवेयर पर काम कर रहै IIIT भागलपुर के शोधकर्ता डॉ. चंदन कुमार ने बताया कि कैंसर मरीजों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। आज के समय में ब्लड कैंसर को पहचानना या उसकी जांच करना थोड़ा मुश्किल हो गया है। लेकिन इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद इसे पहचानना थोड़ा आसान हो जाएगा।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;ऐसे काम करेगा ये सॉफ्टवेयर&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;शोधकर्ता डॉ. चंदन ने बताया कि वह ब्लड इमेज एनालिसिस के जरिए लक्यूमिया डिटेक्शन पर काम कर रहे हैं।साथ ही इलबरी लेबल पर जीआई के जरिये डिटेक्ट करने का काम कर रहे हैं। जिसमें 90% से ज्यादा है, इसे और सुधार करने की कोशिश की जा रही है। वह सभी चीजों को डेवलप करके एक अच्छा सॉफ्टवेयर बना रहे हैं। इसमें ब्लड सेम्पल का इमेज लेकर ब्लास्ट सेल को काउंट करके इसकी पहचान करेगा। जिससे कैंसर है या नहीं पता चल जाएगा। आज डॉक्टर्स को इसका पता काफी मशक्कत से चलता है। अभी तक डॉक्टर लोगों को बताया करते थे, लेकिन अब मशीन से ही इसकी जानकारी हो जाया करेगी। इससे कोई भी आसानी से कैंसर की जांच कर सकेगा। डॉ. चंदन ने बताया कि कम दाम में लोगों को सुविधा उपलब्ध हो पाए इसका भी विशेष ध्यान रखा जा रहा है।&lt;/p&gt;
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