<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?>
<rss version="2.0"
    xmlns:ag="http://purl.org/rss/1.0/modules/aggregation/"  
    xmlns:annotate="http://purl.org/rss/1.0/modules/annotate/" 
    xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app"
    xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
    xmlns:company="http://purl.org/rss/1.0/modules/company"
    xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
    xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
    xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/"
    xmlns:email="http://purl.org/rss/1.0/modules/email/"
    xmlns:ev="http://purl.org/rss/1.0/modules/event/"
    xmlns:rdf="http://www.w3.org/1999/02/22-rdf-syntax-ns#"
    xmlns:rdfs="http://www.w3.org/2000/01/rdf-schema#"
    xmlns:ref="http://purl.org/rss/1.0/modules/reference/"
    xmlns:taxo="http://purl.org/rss/1.0/modules/taxonomy/"
    xmlns:atom10="http://www.w3.org/2005/Atom">
    <channel>
       <title>Today astrology News | Latest astrology News | Breaking astrology News in English | Latest astrology News Headlines - Inkhabar</title>
        <description>आज का astrology समाचार:Today astrology News ,Latest astrology News,Aaj Ka Samachar ,astrology समाचार ,Breaking astrology News in Hindi, Latest News Headlines - Inkhabar</description>
        <link>https://www.inkhabar.com/tag/astrology</link>
        <lastBuildDate>May 7, 2026, 3:06 pm</lastBuildDate>
        <copyright>Inkhabar</copyright>
        <generator>Inkhabar</generator>
        <language>hi</language>
        <image>
            <url>https://www.inkhabar.com/wp-content/themes/inkhabar/images/inkhbar-logo.png</url>
            <title>Inkhabar</title>
            <link>https://www.inkhabar.com/</link>
            <description>Feed provided by Inkhabar.</description>
        </image><item><title>Bhanu Saptami: आज भानू सप्तमी व्रत, जान लें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व</title><link>https://bihar.inkhabar.com/top-news/bhanu-saptami-today-bhanu-saptami-fast-know-the-auspicious-time-worship-method-and-importance/</link><pubDate>December 8, 2024, 6:05 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/12/download-14-2.png</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>पटना: हिंदू धर्म में भानू सप्तमी का अपना ही महत्व है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन सूर्य देव की पूजा करने से व्यक्ति की कुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत होती है। इसके अलावा हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त होती है। तो आइए जानते हैं व्रत का शुभ मुहूर्...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना:&lt;/strong&gt; हिंदू धर्म में भानू सप्तमी का अपना ही महत्व है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन सूर्य देव की पूजा करने से व्यक्ति की कुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत होती है। इसके अलावा हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त होती है। तो आइए जानते हैं व्रत का शुभ मुहूर्त और पूजा विधी।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;सूर्यदेव की होती है पूजा&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;वैदिक पंचांग के मुताबिक, हर वर्ष मार्गशीर्ष महीने की सप्तमी तिथि के दिन भानू सप्तमी का व्रत रखा जाता है. यह दिन सूर्य देव को समर्पित है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक सूर्य देव की पूजा और व्रत करने से जीवन की कई समस्याओं से मुक्ति मिलती है। इसके अलावा भाग्य में वृद्धि के साथ आत्मविश्वास भी बढ़ता है।&lt;/p&gt;



&lt;h3 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;भानू सप्तमी व्रत डेट&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;



&lt;p&gt;पंचांग के अनुसार इस बार मार्गशीर्ष मास की सप्तमी तिथि 7 दिसंबर को रात 11.05 बजे शुरू होगी. वही तिथि अगले दिन 8 दिसंबर को सुबह 9 बजकर 44 मिनट पर समाप्त होगी. उदया तिथि के अनुसार भानु सप्तमी का व्रत 8 दिसंबर को रखा जाएगा.&lt;/p&gt;



&lt;h4 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;शुभ मुहूर्त&lt;/strong&gt;&lt;/h4&gt;



&lt;p&gt;भानु सप्तमी के दिन सूर्य देव की पूजा का शुभ समय सुबह 6 बजकर 01 मिनट से 6 बजकर 33 मिनट तक रहेगा। इस दौरान श्रद्धालु सूर्य देव को अर्घ्य दे सकते हैं और विधि-विधान से पूजा कर सकते हैं।&lt;/p&gt;



&lt;h4 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;पूजा विधि&lt;/strong&gt;&lt;/h4&gt;



&lt;p&gt;भानु सप्तमी के दिन पूजा करने के लिए ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें। इसके बाद एक कलश में जल, गुड़, रोली, लाल फूल और गंगाजल डालकर उगते सूर्य को अर्घ्य दें। वैदिक मंत्रों का जाप करें और भगवान सूर्य की चालीसा का पाठ करें. इस दिन गंगा नदी में स्नान करने की भी परंपरा है। इसके बाद सूर्यदेव की आरती के साथ पूजा का समापन करें।&lt;/p&gt;



&lt;h4 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;भानू सप्तमी पूजा मंत्र&lt;/strong&gt;&lt;/h4&gt;



&lt;p&gt;ॐ घृणिं सूर्य्य: आदित्य:&lt;br&gt;ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय सहस्रकिरणराय मनोवांछित फलम् देहि देहि स्वाहा..&lt;br&gt;ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजो राशे जगत्पते, अनुकंपयेमां भक्त्या, गृहाणार्घय दिवाकर।&lt;/p&gt;



&lt;h4 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;व्रत के दौरान करें ये काम&lt;/strong&gt;&lt;/h4&gt;



&lt;p&gt;किसी जरूरतमंद व्यक्ति को गुड़ और लाल वस्त्र दान करें।&lt;br&gt;गाय को रोटी और गुड़ खिलाएं।&lt;br&gt;सूर्य मंदिर में जाकर दीपक जलाएं।&lt;br&gt;सूर्य देव को लाल रंग पसंद है इसलिए लाल वस्त्र पहनें।&lt;br&gt;सूर्य नमस्कार करने से शरीर स्वस्थ और मन शांत रहता है।&lt;/p&gt;



&lt;h4 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;व्रत का महत्व&lt;/strong&gt;&lt;/h4&gt;



&lt;p&gt;धार्मिक मान्यता के अनुसार, भानु सप्तमी के दिन सूर्य देव की पूजा करने से रोगों से मुक्ति मिलती है। साथ ही सेहत भी अच्छी रहती है. इस दिन विधि-विधान से व्रत और पूजा करने से सूर्य देव की कृपा प्राप्त होती है। इसके अलावा जीवन के सभी दुख और कष्ट दूर हो जाते हैं।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>इस सप्ताह प्रदोष व्रत से लेकर करवा चौथ का व्रत, यहां देखें सही डेट</title><link>https://bihar.inkhabar.com/festival/this-week-from-pradosh-vrat-to-karva-chauth-vrat-see-the-exact-date-here/</link><pubDate>October 15, 2024, 5:37 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/10/download-1-1-300x168.png</image><category>त्योहार</category><excerpt>पटना: हिंदू धर्म में व्रत और त्योहार के लिहाज से अक्टूबर माह बेहद खास है। इस महीने में दशहरा, धनतेरस, करवा चौथ से लेकर नरक चतुर्थी तक का पर्व मनाया जाएगा। इसके अलावा इस माह में भगवान शिव को समर्पित प्रदोष व्रत भी आज मंगलवार को रखा जाएगा। 14 से ...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना:&lt;/strong&gt; हिंदू धर्म में व्रत और त्योहार के लिहाज से अक्टूबर माह बेहद खास है। इस महीने में दशहरा, धनतेरस, करवा चौथ से लेकर नरक चतुर्थी तक का पर्व मनाया जाएगा। इसके अलावा इस माह में भगवान शिव को समर्पित प्रदोष व्रत भी आज मंगलवार को रखा जाएगा।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;14 से 20 अक्टूबर तक के दिन बेहद खास&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;बता दें कि 14 अक्टूबर से लेकर 20 अक्टूबर तक के ये 7 दिन बेहद महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इन सात दिनों के भीतर आश्विन माह का समापन और कार्तिक महीने की शुरुआत होगी। इसके अतिरिक्त, कृष्ण पक्ष शरद पूर्णिमा के एक दिन बाद 17 अक्टूबर को शुरू होगा, जो धन की देवी देवी लक्ष्मी और चंद्रमा भगवान को समर्पित है। तो आइए अब जानते हैं अक्टूबर के इस सप्ताह के प्रमुख व्रत और त्योहारों की सही तारीखों के बारे में।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;आश्विन मास का आखिरी प्रदोष व्रत आज&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;वैदिक पंचांग के अनुसार आश्विन मास का आखिरी प्रदोष व्रत आज 15 अक्टूबर को मनाया जाएगा, जिसे भौम प्रदोष व्रत भी कहा जा सकता है. इस दौरान भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती की पूजा करना बेहद शुभ माना जाता है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;16 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;आश्विन मास के आखिरी प्रदोष व्रत के अगले दिन 16 अक्टूबर 2024 को शरद पूर्णिमा का त्योहार मनाया जाएगा। इस दिन धन की देवी देवी लक्ष्मी और चंद्रमा भगवान की पूजा की जाती है। इसके साथ ही खीर बनाकर पूरी रात चांदनी में रखा जाता है, जिसे अगले दिन प्रसाद के रूप में खाया जाता है। देश के कई राज्यों में शरद पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा भी बोला जाता है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;17 अक्टूबर को वाल्मिकी व मीराबाई जयंती&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;बता दें कि जब सूर्य देव अपनी राशि बदलते हैं तो उस तिथि को संक्रांति कहा जाता है। 17 अक्टूबर 2024 को सूर्य देव तुला राशि में गोचर करेंगे, इस दिन तुला संक्रांति का त्योहार मनाया जाएगा। इसके अलावा इसी दिन महर्षि वाल्मिकी का प्रकट उत्सव यानी वाल्मिकी जयंती और मीराबाई जयंती भी मनाई जाएगी.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;19 अक्टूबर को कार्तिगाई त्योहार&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;वैदिक कैलेंडर के अनुसार, भगवान शिव और भगवान कार्तिकेय को समर्पित मासिक कार्तिगाई त्योहार हर महीने मनाया जाता है, जिसका व्रत इस बार 19 अक्टूबर 2024 को मनाया जाएगा।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;20 अक्टूबर को करवा चौथ&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;करवा चौथ व्रत विवाहित महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है, जो इस बार 20 अक्टूबर 2024 को मनाया जाएगा। इस दिन निर्जला व्रत रखने के साथ-साथ भगवान शिव, देवी पार्वती, माता करवा और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। करवा चौथ के अलावा 20 अक्टूबर 2024 को वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी का व्रत भी रखा जाएगा.&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Janmashtami 2024 Date: कल मनाया जाएगा श्रीकृष्ण का जन्मदिन, जानें शुभ मुहूर्त</title><link>https://bihar.inkhabar.com/top-news/janmashtami-2024-date-shri-krishnas-birthday-will-be-celebrated-tomorrow-know-the-auspicious-time/</link><pubDate>August 25, 2024, 9:40 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/08/download-9-6-300x225.png</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>पटना : कल सोमवार 26 अगस्त को पूरे भारत में जन्माष्टमी का पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा। यह हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण और पवित्र त्योहार है, जो हर साल भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। मान्यता है कि द्वापर युग में इसी तिथि...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना &lt;/strong&gt;: कल सोमवार 26 अगस्त को पूरे भारत में जन्माष्टमी का पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा। यह हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण और पवित्र त्योहार है, जो हर साल भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। मान्यता है कि द्वापर युग में इसी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में रात के 12 बजे मथुरा नगरी कंस के कारागार में श्री कृष्ण का जन्म हुआ था। कृष्ण देवकी की 8वीं संतान थे। इसलिए हर साल जन्माष्टमी का त्यौहार कृष्ण जन्मोत्सव के रूप में धूमधाम से मनाया जाता है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;इस तरह मनाया जाता है कृष्ण जन्मोत्सव&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;इस दिन मंदिरों और घरों में भजन-कीर्तन किए जाते हैं, झांकियां सजाई जाती हैं, व्रत-उपवास और पूजा-अर्चना की जाती है, श्री कृष्ण के बाल स्वरूप का श्रृंगार किया जाता है और कई जगहों पर दही-हांडी (दही हांडी 2024) का भी आयोजन किया जाता है। आइए जानते हैं इस साल 2024 में जन्माष्टमी का त्योहार कब मनाया जा रहा है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;सोमवार को मनाई जाएगी जन्माष्टमी&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;इस साल श्री कृष्ण जन्माष्टमी 26 अगस्त 2024 को मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 26 अगस्त सुबह 03:39 बजे शुरू होगी, जो 27 अगस्त को रात 02:19 बजे समाप्त होगी। ऐसे में उदयातिथि के अनुसार 26 अगस्त को जन्माष्टमी मनाई जाएगी और इसी दिन व्रत और पूजा की जाएगी।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;दो दिन मनाई जाती है जन्माष्टमी&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;बता दें कि जन्माष्टमी दो दिन मनाई जाती है। दरअसल, अलग-अलग तिथियों के कारण स्मार्त और वैष्णव संप्रदाय में जन्माष्टमी अलग-अलग तरीके से मनाई जाती है। जन्माष्टमी की पहली तिथि को स्मार्त संप्रदाय द्वारा पूजा-अर्चना की जाती है और दूसरी तिथि को वैष्णव संप्रदाय द्वारा पूजा-अर्चना की जाती है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;इस तिथि पर बन रहे कई दुर्लभ योग&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;इस साल जन्माष्टमी के दिन यानी 26 अगस्त को शुभ योग के साथ जयंती योग भी बन रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार द्वापर युग में श्री कृष्ण के जन्म के समय जो योग बना था, वही योग इस साल भी जन्माष्टमी पर बन रहा है। ज्योतिष शास्त्र में इसे जयंती योग कहा जाता है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;अष्टमी रोहिणी नक्षत्र में हुआ था जन्म&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;धार्मिक मान्यताओं के अनुसार द्वापर युग में श्री कृष्ण का जन्म भाद्रपद अष्टमी रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। उस समय चंद्रमा वृषभ राशि में था। इस साल भी जन्माष्टमी पर चंद्रमा वृषभ राशि में रहेगा। जबकि रोहिणी नक्षत्र 26 अगस्त को दोपहर 3:55 से अगले दिन दोपहर 3:38 तक रहेगा।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;सिर्फ 45 मिनट ही शुभ मुहूर्त&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;इसके साथ ही सर्वार्थ सिद्धि योग भी इस तिथि पर बन रहा है। जन्माष्टमी पर बाल गोपाल की पूजा का शुभ मुहूर्त 26 अगस्त की रात 12:01 बजे से 12:45 बजे तक है। ऐसे में जन्माष्टमी पूजन के लिए सिर्फ 45 मिनट का समय ही रहेगा।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Numerology : पीएम मोदी ने 18 अंक को क्यों कहा शुभ, जानें हिंदू धर्म में इसका महत्व</title><link>https://bihar.inkhabar.com/ajab-gajab/numerology-why-did-pm-modi-call-the-number-18-auspicious-know-its-importance-in-hindu-religion/</link><pubDate>June 25, 2024, 12:02 pm</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/06/download-11-10-300x169.png</image><category>अजब-गजब</category><excerpt>पटना : बीते दिन सोमवार, 24 जून को 18वीं लोकसभा में नए सांसदों का शपथ ग्रहण समारोह हुआ. इस दौरान नई संसद भवन में नवनिर्वाचित सांसदों ने शपथ ग्रहण लिया. इस सत्र की शुरुआती में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई मुद्दों पर अपना बात रखते हुए वेद-पुराण...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना &lt;/strong&gt;: बीते दिन सोमवार, 24 जून को 18वीं लोकसभा में नए सांसदों का शपथ ग्रहण समारोह हुआ. इस दौरान नई संसद भवन में नवनिर्वाचित सांसदों ने शपथ ग्रहण लिया. इस सत्र की शुरुआती में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई मुद्दों पर अपना बात रखते हुए वेद-पुराणों और हिंदू धर्म का भी जिक्र किया.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;हिंदू धर्म में 18 अंक अति शुभ&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;बता दें कि वैदिक ज्योतिष से लेकर हिंदू धर्म में 18 अंक को अति शुभ बताया गया है. वहीं इस अंक को ज्योतिष के मुताबिक 18 अंक का मूलांक 9 है, जिसे अति शक्तिशाली, गुरु से प्रभावित व मंगल ग्रह का अंक बताया जाता है. सत्र के दौरान पीएम मोदी ने 18वीं लोकसभा और 18 अंक के संयोग के महत्व के बारे में भी जिक्र किया. तो आइए जानते हैं पीएम मोदी ने 18 अंक के बारे में ऐसा क्या कहा, जो इतनी तेजी से वायरल हो रहा है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;पहले सत्र में पीएम मोदी ने बताएं 18 अंक के इतिहास&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;लोकसभा के पहले सत्र में प्रधानमंत्री मोदी ने देश को संबोधित करते हुए कहा कि 18वीं लोकसभा पर नए संकल्पों के साथ कार्यों की शुरुआत करें. उन्होंने 18 अंक को लेकर कहा कि, 18 अंक हमें कर्म, कर्तव्य और करुणा का संदेश देता है. हमारे पुराणों और लोकपुराणों का नंबर भी 18 है. इस दौरान उन्होंने आगे कहा कि हमारे देश में 18 साल में ही मताधिकार दिया जाता है. ऐसे में 18वीं लोकसभा का गठन भी एक शुभ संकेत है. यह लोकसभा भारत के अमृतकाल की लोकसभा होगी.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;हिंदू धर्म में 18 अंक का महत्व&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Mahabharat &lt;/strong&gt;: हिंदू धर्म में 18 अंक का अपना एक अलग महत्व है. गीता और महाभारत जैसे धर्म ग्रंथों में 18 अध्याय हैं. महाभारत का युद्ध भी 18 दिनों तक चला था. सनातन धर्म में पुराणों का नंबर भी 18 है.&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;&lt;strong&gt;18 विद्याएं&lt;/strong&gt;: हिंदू धर्म में छह वेदांग और चार वेद हैं. इसके साथ-साथ मीमांसा, न्यायशास्त्र, पुराण, धर्मशास्त्र, अर्थशास्त्र, आयुर्वेद, धनुर्वेद और गंधर्ववेद सभी को मिलाकर 18 तरह की विद्याएं हैं.&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;श्रीकृष्ण के 18 अंक: गीता में भी 18 अध्याय है, जिसका ज्ञान संपूर्ण जगत को श्री कृष्ण ने दिया था।&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;मां भगवती के रूप भी 18 हैं। इसके साथ मां भगवती की 18 भुजाएं भी हैं।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>May Panchak 2024: आज से न भूलकर भी न करें किसी नए काम की शुरूआत, शुरू हो रहे हैं मई माह के दूसरे पंचक</title><link>https://bihar.inkhabar.com/culture/may-panchak-2024-do-not-start-any-new-work-even-by-mistake-from-today-the-second-panchak-of-the-month-of-may-is-starting/</link><pubDate>May 29, 2024, 1:53 pm</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/05/13-7-300x170.png</image><category>संस्कृति</category><excerpt>पटना। ज्योतिष शास्त्र में पंचक काल (May Panchak 2024) को अशुभ माना गया है। ऐसे में 5 दिन बहुत संभलकर रहना चाहिए। ऐसा कहा जाता है कि पंचक में किए गए कार्य अशुभ फल देते हैं। ऐसे में व्यक्ति को भविष्य में धन हानि, रोग से पीड़ित और आग लगने का डर आदि...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना।&lt;/strong&gt; ज्योतिष शास्त्र में पंचक काल (May Panchak 2024) को अशुभ माना गया है। ऐसे में 5 दिन बहुत संभलकर रहना चाहिए। ऐसा कहा जाता है कि पंचक में किए गए कार्य अशुभ फल देते हैं। ऐसे में व्यक्ति को भविष्य में धन हानि, रोग से पीड़ित और आग लगने का डर आदि समस्याओं से जूझना पड़ सकता है। ऐसे में पंचक के अशुभ प्रभाव व्यक्ति के जीवन पर न पड़े, इसके लिए कोई भी शुभ कार्य नहीं करने चाहिए। पंचक हर महीने आते हैं लेकिन इस बार मई 2024 में पंचक दूसरी बार लग रहे हैं। जानें पंचक के शुरू होने और समाप्त होने का समय।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;कब से कब तक रहेंगे पंचक&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;इस बार 29 मई 2024 को रात 08.06 बजे पंचक शुरू हो जाएंगे। जिसके बाद इसका समापन 3 जून 2024, सोमवार को प्रात: 1 बजकर 40 मिनट पर होगा। ऐसे में अगर आप कोई काम शुरू करना चाहते हैं तो 3 जून तक का इंतजार करें।&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, पंचक वार (May Panchak 2024) के अनुसार तय होते हैं। साथ ही चंद्रमा (Moon) धनिष्ठा, पूर्वा भाद्रपद, रेवती, उत्तरा भाद्रपद, शतभिषा, नक्षत्र में से गुजरता है तो पंचक लगते हैं। वहीं बुधवार से शुरू होने वाले पंचक दोष रहित (Panchak dosh) होते हैं। इन्हें अशुभ नहीं माना जाता है। हालांकि, बुधवार से शुरू होने वाले पंचक में भी कुछ काम करना वर्जित होता है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;इन कामों को न करें&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;पंचक के दौरान शादी, मुंडन, गृह प्रवेश, गृह निर्माण आदि जैसे शुभ कार्य नहीं करने चाहिए। पंचक की अवधि में चारपाई बनवाने या छत ढलवाने जैसे कार्य करना भी अशुभ माना गया है। साथ ही पंचक के दौरान पैसों के लेन-देन से जुड़े कार्य भी नहीं करने चाहिए। इससे धन हानि की संभवाना बनी रहती है। इसके अलावा दक्षिण दिशा में यात्रा नहीं करनी चाहिए। पंचक के दौरान लकड़ी इक्ठ्‌ठा न करें। पंचक में किसी की मृत्यु हो जाए तो दाह संस्कार के समय शव के साथ पांच कुश या आटे के पुतले जलाएं।&lt;/p&gt;
</content></item></channel></rss>