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       <title>Today Astrology Today News | Latest Astrology Today News | Breaking Astrology Today News in English | Latest Astrology Today News Headlines - Inkhabar</title>
        <description>आज का Astrology Today समाचार:Today Astrology Today News ,Latest Astrology Today News,Aaj Ka Samachar ,Astrology Today समाचार ,Breaking Astrology Today News in Hindi, Latest News Headlines - Inkhabar</description>
        <link>https://www.inkhabar.com/tag/astrology-today</link>
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        </image><item><title>Ahoi Ashtami: आज है अहोई अष्टमी का व्रत, जाने शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और पूजा सामग्री</title><link>https://bihar.inkhabar.com/festival/ahoi-ashtami-today-is-the-fast-of-ahoi-ashtami-know-the-auspicious-time-worship-method-and-worship-materials/</link><pubDate>October 24, 2024, 2:10 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/10/ahoi.webp</image><category>त्योहार</category><excerpt>पटना। आज है अहोई अष्टमी का व्रत। इस बार अहोई अष्टमी का पर्व 24 अक्टूबर 2024 को किया जा रहा है। इस दिन माताएं अपने बेटों की लंबी उम्र के लिए निर्जला व्रत रखती हैं, वहीं निःसंतान महिलाएं भी बेटों की प्राप्ति के लिए इस व्रत को करती हैं। व्रत का शु...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना।&lt;/strong&gt; आज है अहोई अष्टमी का व्रत। इस बार अहोई अष्टमी का पर्व 24 अक्टूबर 2024 को किया जा रहा है। इस दिन माताएं अपने बेटों की लंबी उम्र के लिए निर्जला व्रत रखती हैं, वहीं निःसंतान महिलाएं भी बेटों की प्राप्ति के लिए इस व्रत को करती हैं।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;व्रत का शुभ मुहूर्त&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;यह व्रत खास तौर से उत्तर भारत में मनाया जाता है। इस दिन अहोई माता के साथ-साथ स्याही माता की भी पूजा-अर्चना की जाती है। महिलाएं शाम को अहोई माता की विधि-विधान से पूजा करती है और कथा सुनती है। इस व्रत का पारण तारे देखने के बाद ही किया जाता हैं। पंचांग के मुताबित कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 24 अक्टूबर को रात 01 बजकर 18 मिनट पर शुरु होगी। जो अगले दिन, 25 अक्टूबर को रात 01 बजकर 58 मिनट पर समाप्त होगी।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;व्रत की पूजा विधि&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;सनातन धर्म में उदया तिथि को महत्वपूर्ण माना जाता है। इस कारण पूरे देश में अहोई अष्टमी का व्रत 24 अक्टूबर को किया जाएगा। अहोई अष्टमी के मौके पर व्रत करने वाली महिलाएं सारे काम निपटाकर स्नान कर लेती है। इस बाद वह व्रत का संकल्प करती है। इस दिन महिलाएं विधि-विधान से अहोई माता और स्याही माता की पूजा करती है। व्रत के साथ ही अहोई माता की व्रत कथा सुनती है। पूजा के लिए दीवार पर अहोई माता की तस्वीर या प्रतिमा बनाई जाती है, जिसके सामने सात प्रकार के अनाज और जल से भरे लोटे के साथ पूजा को किया जाता है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;व्रत की पूजा सामग्री&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;पूजा के समय दूध, मिठाई, रोली, चावल, और फल अहोई माता को अर्पित किए जाते हैं। शाम के समय, जब तारों के दर्शन होते है, तब अहोई माता की पूजा की जाती है। इसके बाद ही व्रत का पारण किया जाता है। तारे दर्शन का समय – शाम 06:06 बजे है। ऐसा माना जाता है कि यदि तारे नहीं दिखाई देते है तो चंद्र दर्शन के बाद भी व्रत को खोला जा सकता है। चंद्र दर्शन का समय रात 11:56 मिनट है।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Navratri: आज है नवरात्रि का सातवां दिन, जाने मां कालरात्रि का स्वरूप और पूजा विधि</title><link>https://bihar.inkhabar.com/festival/navratri-today-is-the-seventh-day-of-navratri-know-the-form-and-method-of-worship-of-maa-kalratri/</link><pubDate>October 9, 2024, 2:35 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/10/o0iu-300x169.webp</image><category>त्योहार</category><excerpt>पटना। आज नवरात्रि का 7वां दिन है। आज का दिन मां कालरात्रि के स्वरुप के समर्पित है। 7वें दिन देवी दुर्गा के कालरात्रि स्वरूप की पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि इस स्वरूप की आराधना करने से भक्त बुरी शक्तियों से दूर रहते है। कालरात्रि की पूजा...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना। &lt;/strong&gt;आज नवरात्रि का 7वां दिन है। आज का दिन मां कालरात्रि के स्वरुप के समर्पित है। 7वें दिन देवी दुर्गा के कालरात्रि स्वरूप की पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि इस स्वरूप की आराधना करने से भक्त बुरी शक्तियों से दूर रहते है। कालरात्रि की पूजा करने से अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;मां कालरात्रि का स्वरुप&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;इसके अतिरिक्त ऐसा भी कहा जाता है कि इनकी पूजा करने से विभिन्न सिद्धियों की प्राप्ति होती है। 9 अक्टूबर 2024 यानी आज नवरात्रि का सातवां दिन है। जिसे सप्तमी भी कहा जाता है। यह दिन दुर्गा के 9 स्वरूपों में से एक है। सप्तमी नवमी मां कालरात्रि को समर्पित होती है। मां कालरात्रि का शरीर अंधकार के समान काला है। उनके बाल लंबे, घने और बिखरे होते है। मां के गले में एक माला है, जो बिजली की तरह चमकती रहती है। मां कालरात्रि के चार हाथ हैं, जिनमें लौह शस्त्र, खड्ग, मुद्रा और वरमुद्रा विद्यमान हैं।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;मां कालरात्रि की पूजा विधि&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;नवमी के सातंवे दिन देवी दुर्गा के सातवें स्वरुप की पूजा सुबह और शाम की जाती है। सबसे पहले स्नान करके मां देवी काली की प्रतिमा के चारों ओर गंगाजल छिड़कें। मां कालरात्रि की प्रतिमा के सामने घी का दीपक जलाएं। इसके बाद अक्षत, रोली और गुड़हल के फूल माता को समर्पित करें। मां कालरात्रि की आरती उतारें और मां के नाम के जयकारे लगाएं। सुबह और शाम आरती के साथ दुर्गा चालीसा का पाठ करें। इसके अलावा मां कालरात्रि की रुद्राक्ष की माला से मंत्रों का जाप करना भी लाभ देता हैं।&lt;/p&gt;
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