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       <title>Today Anant Chaturdashi 2024 News | Latest Anant Chaturdashi 2024 News | Breaking Anant Chaturdashi 2024 News in English | Latest Anant Chaturdashi 2024 News Headlines - Inkhabar</title>
        <description>आज का Anant Chaturdashi 2024 समाचार:Today Anant Chaturdashi 2024 News ,Latest Anant Chaturdashi 2024 News,Aaj Ka Samachar ,Anant Chaturdashi 2024 समाचार ,Breaking Anant Chaturdashi 2024 News in Hindi, Latest News Headlines - Inkhabar</description>
        <link>https://www.inkhabar.com/tag/anant-chaturdashi-2024</link>
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        </image><item><title>Anant Chaturdashi 2024: अनंत चतुर्दशी आज, ये है व्रत, पूजा और अनंत सूत्र बांधने का शुभ समय</title><link>https://bihar.inkhabar.com/festival/anant-chaturdashi-2024-anant-chaturdashi-today-this-is-the-auspicious-time-for-fasting-worship-and-tying-anant-sutra/</link><pubDate>September 17, 2024, 2:09 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/09/ANA.webp</image><category>त्योहार</category><excerpt>पटना। हिंदू धर्म में अनंत चतुर्दशी का दिन बेहद महत्वपूर्ण माना गया है. आज देश भर में अनंत देव यानी श्री हरि विष्णु की पूजा की जाएगी। ऐसे में इस तिथि पर बप्पा की मूर्ति का विसर्जन करने का भी नियम है. भगवान गणेश की मूर्ति के विसर्जन के साथ ही गणे...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना।&lt;/strong&gt; हिंदू धर्म में अनंत चतुर्दशी का दिन बेहद महत्वपूर्ण माना गया है. आज देश भर में अनंत देव यानी श्री हरि विष्णु की पूजा की जाएगी। ऐसे में इस तिथि पर बप्पा की मूर्ति का विसर्जन करने का भी नियम है. भगवान गणेश की मूर्ति के विसर्जन के साथ ही गणेश उत्सव का समापन हो जाता है.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;आज का दिन भगवान विष्णु को समर्पित&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;इस दिन, भक्त 10 दिनों तक भगवान गणपति की पूजा अर्चना समाप्त करने के बाद उन्हें श्रद्धा भाव से विदाई देने के लिए उनकी मूर्ति का विसर्जन करते हैं और बप्पा से अगले वर्ष फिर से आने की प्रार्थना भी करते हैं। अनंत चतुर्दशी का दिन भगवान गणेश की पूजा और विसर्जन के अलावा भगवान विष्णु को भी समर्पित है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा अर्चना मन से करने वाले को ढेर सारा आशीर्वाद प्राप्त होता है.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;अनंत का भगवान विष्णु से कैसा संबंध?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;महाभारत काल में जब पांडवों पर अनेक प्रकार की मुसीबतें आने लगीं और जुए में सब कुछ हार जाने के बाद उन्हें वन में जाना पड़ा। तब भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें अनंत चतुर्दशी का व्रत करने की सलाह दी। भगवान श्रीकृष्ण की सलाह मानकर पांडवों ने अनंत चतुर्दशी का व्रत रखा।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;व्रत के प्रभाव से महाभारत में मिली जीत&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;इस व्रत के प्रभाव से पांडवों के कष्ट धीरे-धीरे दूर होने लगे। महाभारत युद्ध में पांडवों की बड़ी जीत हुई और उन्हें अपना खोया हुआ राज्य वापस मिल गया। इसलिए इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, व्रत और कथा पढ़ने से बहुत शुभ फल मिलता है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;ये है पूजा तिथि व शुभ मुहूर्त&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;वैदिक पंचांग के अनुसार अनंत चतुर्दशी तिथि सोमवार, 16 सितंबर 2024 को दोपहर 3:10 बजे शुरू होगी और अगले दिन, 17 सितंबर 2024 को सुबह 11:44 बजे समाप्त होगी.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;पूजा का शुभ मुहूर्त&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;पंचांग के अनुसार अनंत चतुर्दशी के दिन पूजा का शुभ समय 17 सितंबर को सुबह 10.43 बजे से 11.15 बजे तक रहेगा.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;गणेश मूर्ति विसर्जन का शुभ समय&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;द्रिक पंचांग के अनुसार अनंत चतुर्दशी के दिन बप्पा की मूर्ति के विसर्जन का शुभ समय सुबह 9.10 बजे से दोपहर 1.47 बजे तक रहेगा.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;परेशानियों को दूर करने के लिए बांधे अनंत सूत्र&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;अनंत चतुर्दशी के दिन शुभ मुहूर्त में पूजा करने के बाद 14 गांठों वाला एक विशेष धागा हाथ में पहना जाता है। मान्यता है कि इस सूत्र को हाथ पर बांधने से भगवान विष्णु की कृपा से जीवन की सभी परेशानियां और बाधाएं दूर हो जाती हैं और हर काम में सफलता मिलती है। मान्यता है कि अनंत चतुर्दशी के दिन विधि-विधान से अनंत सूत्र बांधने और व्रत-पूजन करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Anant Chaturdashi 2024: अनंत चतुर्दशी पर अनंत सूत्र बांधने का क्या रहस्य है, जानें</title><link>https://bihar.inkhabar.com/festival/anant-chaturdashi-2024-know-the-secret-of-tying-anant-sutra-on-anant-chaturdashi/</link><pubDate>September 16, 2024, 5:24 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/09/download-18-300x225.png</image><category>त्योहार</category><excerpt>पटना: भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर बेहद सुख देने वाला पर्व अनंत चतुर्दशी का व्रत मनाया जाता है. हिंदू धर्म के अनुसार, अनंत के दिन श्रीहरि यानी भगवान विष्णु की पूजा कर ली जाए तो आपको 14 वर्ष तक अनंत फल मिलता है. इस साल यह पर्व 1...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना:&lt;/strong&gt; भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर बेहद सुख देने वाला पर्व अनंत चतुर्दशी का व्रत मनाया जाता है. हिंदू धर्म के अनुसार, अनंत के दिन श्रीहरि यानी भगवान विष्णु की पूजा कर ली जाए तो आपको 14 वर्ष तक अनंत फल मिलता है. इस साल यह पर्व 17 सितंबर मंगलवार को मनाया जाएगा।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;पांडवों से जुड़ा है नाता&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;महाभारत में पांडवों को भी इस त्योहार के आशीर्वाद से खोया राजपाठ प्राप्त हुआ था. इस वर्ष अनंत चतुर्दशी 17 सितंबर 2024 को है. ऐसे में चलिए जानते है अनंत चतुर्दशी मनाते क्यों है, इस दिन का क्या है विशेष महत्व और इससे जुड़ी कथा.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;अनंत व्रत की कथा&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;पौराणिक कथा के मुताबिक, बहुत साल पहले सुमंत नाम का एक ब्राह्मण अपनी बेटी दीक्षा और सुशीला के साथ रहता था. बेटी सुशीला जब शादी योग्य हुई तो उसकी मां की मृत्यु हो गई. ब्राह्मण सुमंत ने बेटी सुशीला का शादी कौंडिन्य ऋषि से करवा दी. वहीं कौंडिन्य ऋषि पत्नी सुशीला को लेकर अपने आश्रम की तरफ जा रहे थे, लेकिन बीच रास्ते में रात हो गई तो एक स्थान पर वे दोनों रुक गए. उस जगह कुछ महिलाएं अनंत चतुर्दशी व्रत की पूजा पाठ कर रही थीं.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;ब्राह्मण को भुगतना पड़ा ये गलती&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;ब्राह्मण की पत्नी सुशीला ने भी स्त्रियां से उस व्रत की जानकारी ली और उसने भी 14 गांठों वाला अनंत धागा अपने हाथ में बांध लिया और कौंडिन्य ऋषि के पास पहुंची , लेकिन कौंडिन्य ऋषि ने सुसीला के हाथ से धागे को निकालकर तोड़ दिया और आग में डाल दिया, इससे भगवान अनंत सूत्र की बेइज्जती हुई. भगवान विष्णु के अनंत रूप के अपमान के बाद कौंडिन्य ऋषि की सारी संपत्ति खत्म हो गई और वे उस समय से परेशान रहने लगे.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;इस तरह हुआ जीवन सुखमय&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;तब ऋषि कौंडिन्य उस अनंत धागे को ढूंढने के लिए जंगल में भटकने लगे। एक दिन वह भूख-प्यास के कारण भूमि पर गिर पड़े, तभी भगवान अनंत प्रकट हुए। उन्होंने कहा, कौंडिन्य, तुम्हें अपनी गलती पर पश्चाताप हुआ है। अब घर जाकर अनंत चतुर्दशी का व्रत करो और इस व्रत को 14 वर्ष तक करो। इसके प्रभाव से आपका जीवन सुखमय हो जाएगा और आपकी संपत्ति भी वापस मिल जाएगी। ऋषि कौंडिन्य ने वैसा ही किया, जिसके बाद उनका धन वापस आ गया और जीवन सुखी हो गया।&lt;/p&gt;
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