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       <title>Today सुप्रीम कोर्ट News | Latest सुप्रीम कोर्ट News | Breaking सुप्रीम कोर्ट News in English | Latest सुप्रीम कोर्ट News Headlines - Inkhabar</title>
        <description>आज का सुप्रीम कोर्ट समाचार:Today सुप्रीम कोर्ट News ,Latest सुप्रीम कोर्ट News,Aaj Ka Samachar ,सुप्रीम कोर्ट समाचार ,Breaking सुप्रीम कोर्ट News in Hindi, Latest News Headlines - Inkhabar</description>
        <link>https://www.inkhabar.com/tag/%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%ae-%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%9f</link>
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            <title>Inkhabar</title>
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            <description>Feed provided by Inkhabar.</description>
        </image><item><title>सुप्रीम कोर्ट BPSC मुद्दे पर नहीं करेगी सुनवाई, पटना हाईकोर्ट जाने की दी नसीहत</title><link>https://bihar.inkhabar.com/top-news/supreme-court-will-not-hear-bpsc-issue-advised-to-go-to-patna-high-court/</link><pubDate>January 7, 2025, 11:01 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2025/01/download-11.png</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>पटना: सुप्रीम कोर्ट ने आज 70वीं बीपीएससी प्रीलिम्स परीक्षा से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने याचिकाकर्ता को इस मामले को पटना हाई कोर्ट में ले जाने की सलाह दी है. इस याचिका पर मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति संज...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना:&lt;/strong&gt; सुप्रीम कोर्ट ने आज 70वीं बीपीएससी प्रीलिम्स परीक्षा से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने याचिकाकर्ता को इस मामले को पटना हाई कोर्ट में ले जाने की सलाह दी है. इस याचिका पर मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ ने सुनवाई की. बता दें कि 13 दिसंबर को आयोजित 70वीं BPSC प्रीलिम्स परीक्षा को लेकर छात्रों में काफी नाराजगी है.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;पहले पटना हाई कोर्ट जाएं&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;बेंच ने बिहार BPSC प्रीलिम्स परीक्षा रद्द करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया. साथ ही याचिकाकर्ता को पहले पटना हाई कोर्ट जाने को कहा. मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले की प्रथम स्तर पर सुनवाई के लिए उचित मंच नहीं है और अनुच्छेद 226 के तहत इसे पटना उच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करना बेहतर है. आगे सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह छात्रों और प्रदर्शनकारियों की भावना को समझता है, पर इस मामले पर सीधे तौर पर हस्तक्षेप करने के बजाय याचिकाकर्ता को पटना हाईकोर्ट जाना चाहिए। कोर्ट ने आगे यह भी कहा कि इस तरह के मामले के लिए स्थानीय कोर्ट अधिक प्रभावी मंच होते हैं।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;परीक्षा रद्द करने की मांग&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;बता दें कि याचिका में BPSC प्रीलिम्स परीक्षा रद्द करने की मांग की गई है. साथ ही प्रदर्शनकारी छात्रों पर लाठीचार्ज के लिए जिम्मेदार जिले के एसपी और डीएम के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की गई. याचिका में बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया है और मांग की गई है कि इसकी जांच सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में सीबीआई से कराई जाए.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;छात्रों पर बेरहमी से लाठीचार्ज&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;वहीं सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि बिहार पुलिस ने अभ्यर्थियों पर बेरहमी से लाठीचार्ज किया है और पटना हाई कोर्ट इस पर स्वत: संज्ञान ले सकता था क्योंकि घटना पटना हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के आवास के बाहर हुई थी. इस पर पीठ ने दलील खारिज कर दी और मामले पर आगे सुनवाई से भी इनकार कर दिया.&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>सुप्रीम कोर्ट ने शराब पर पलटा फैसला, CJI ने कही ये बात</title><link>https://bihar.inkhabar.com/top-news/supreme-court-reversed-its-decision-on-liquor-cji-said-this/</link><pubDate>October 23, 2024, 7:56 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/10/download-89-1-300x168.png</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>पटना: साल 1990 में सिंथेटिक्स एंड केमिकल्स मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र के पक्ष में फैसला सुनाया था. संविधान पीठ ने कहा कि राज्य समवर्ती सूची के तहत भी औद्योगिक शराब को विनियमित करने का दावा नहीं कर सकते। राज्यों के पास है इसके पूरे अधिकार...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना:&lt;/strong&gt; साल 1990 में सिंथेटिक्स एंड केमिकल्स मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र के पक्ष में फैसला सुनाया था. संविधान पीठ ने कहा कि राज्य समवर्ती सूची के तहत भी औद्योगिक शराब को विनियमित करने का दावा नहीं कर सकते।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;राज्यों के पास है इसके पूरे अधिकार&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्यों को भी औद्योगिक शराब के उत्पादन और आपूर्ति के संबंध में कानून बनाने का अधिकार है, इसलिए &amp;#8220;राज्य की शक्ति छीनी नहीं जा सकती&amp;#8221;।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;डीवाई चंद्रचूड़ ने फैसला सुनाते हुए क्या कहा?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;CJI डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस हृषिकेश रॉय, उज्जवल भुइयां, मनोज मिश्रा, एससी शर्मा, एएस ओका, जेबी पारदीवाला और एजी मसीह के बहुमत ने फैसला सुनाया कि राज्यों को उपभोक्ता शराब को विनियमित करने का पूरा अधिकार है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;GST आने के बाद सुप्रीम कोर्ट का लिया था सहारा&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;वहीं, जस्टिस बीवी नागरत्ना ने इस फैसले से असहमति जताई और कहा कि औद्योगिक शराब को नियंत्रित करने का विधायी अधिकार केवल केंद्र के पास होगा. इस मामले में याचिकाकर्ताओं ने कहा कि जीएसटी लागू होने के बाद औद्योगिक शराब पर टैक्स लगाने का अधिकार बहुत महत्वपूर्ण हो गया है.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;34 साल पहले सुनाई गई थी फैसला&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;34 साल पहले 7 जजों की संविधान पीठ ने इस मामले में औद्योगिक शराब उत्पादन और नियमन की शक्ति केंद्र सरकार को सौंपने पर सहमति जताई थी. कोर्ट की नई बेंच ने इस फैसले को पलट दिया और साफ कर दिया कि औद्योगिक शराब का इस्तेमाल पीने के लिए नहीं किया जाता है. अतः इसे संविधान के अनुसार गैर विषैले अल्कोहल की श्रेणी में वर्गीकृत किया जाना चाहिए।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Rection: बृजबिहारी प्रसाद हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पत्नी रमा देवी की पहली प्रतिक्रिया</title><link>https://bihar.inkhabar.com/politics/rection-wife-rama-devis-first-reaction-to-the-supreme-courts-decision-in-the-brijbihari-prasad-murder-case/</link><pubDate>October 4, 2024, 3:28 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/10/HKL-300x169.webp</image><category>राजनीति</category><excerpt>पटना। राज्य के पूर्व मंत्री बृजबिहारी प्रसाद हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद उनकी पत्नी व पूर्व सांसद रमा देवी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने जो न्याय किया है। उसके लिए धन्यवाद। इस मामले में जो आरोपी बच गए हैं उनको मां भगवती देख लें...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना।&lt;/strong&gt; राज्य के पूर्व मंत्री बृजबिहारी प्रसाद हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद उनकी पत्नी व पूर्व सांसद रमा देवी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने जो न्याय किया है। उसके लिए धन्यवाद। इस मामले में जो आरोपी बच गए हैं उनको मां भगवती देख लेंगी।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;सुरक्षा के कारण गवाही नहीं दी&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;इस मामले में फैसला आने में देरी पर उन्होंने कहा कि इससे अपराध में वृद्धि होती है। जल्द न्याय मिलने से अपराध में कमी आती है। अपने पति की हत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद रमा देवी गुरुवार को ब्रह्मपुरा स्थित आवास पर मीडिया से बातचीत कर रही थीं। उन्होंने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने 8 आरोपियों को सजा सुनाई। इसमें से कई लोग मर गए हैं। मामले में कई गवाही देने को तैयार थे, लेकिन उन्हें सुरक्षा नहीं दी गई। इसलिए वे कोर्ट में गवाही देने नहीं गए।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;न्याय मिलने में देरी&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;घटना के संबंध में बातचीत के दौरान वह भावुक हो गईं। कहती हैं, छोड़िए अब इससे क्या फायदा? बताती हैं कि जिस समय यह घटना हुई उस समय वह सांसद थीं। पहली बार चुनाव जीती थीं। इसके बावजूद उन्हें न्याय मिलने में देरी हुई। बता दें कि बिहार के पूर्व मंत्री बृज बिहारी प्रसाद की साल 1998 में हुई हत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया। मुन्ना शुक्ला और एक अन्य आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;कॉन्ट्रैक्ट किलिंग का मामला&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;वहीं पूर्व सांसद सूरजभान सिंह और पांच अन्य आरोपियों को बरी कर दिया गया। यह फैसला ट्रायल कोर्ट के आदेश के मुताबिक है।यह हत्याकांड एक समय काफी चर्चा का विषय था। ऐसा कहा जाता है कि इस घटना को खतरनाक अपराधी श्रीप्रकाश शुक्ला ने अंजाम दिया था। यह एक कॉन्ट्रैक्ट किलिंग की घटना थी।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>CJI: जजों के वेतन रोकने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को लगाई फटकार</title><link>https://bihar.inkhabar.com/top-news/cji-supreme-court-reprimands-bihar-government-for-stopping-salaries-of-judges/</link><pubDate>October 1, 2024, 9:27 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/10/zxcvb-300x169.webp</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>पटना। हाईकोर्ट के जजों के बकाया वेतन जारी करने और न्यायिक अधिकारियों के लिए पेंशन निर्धारित करने के मुद्दे से संबंधित मामलों की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को कड़े निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘बिहार सरकार के वर्तमान ...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना।&lt;/strong&gt; हाईकोर्ट के जजों के बकाया वेतन जारी करने और न्यायिक अधिकारियों के लिए पेंशन निर्धारित करने के मुद्दे से संबंधित मामलों की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को कड़े निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘बिहार सरकार के वर्तमान जज न्यायाधीश आर.पी. मिश्रा का वेतन तुरंत उन्हें दिया जाए, जिनका हाईकोर्ट में प्रमोशन के बाद से सैलरी बाकी है।’&lt;br&gt;बिना वेतन के काम की उम्मीद कैसे?&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;सुनवाई चीफ जस्टिस ने की &lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;अदालत ने यह भी निर्देश दिए कि ‘किसी भी जज से वेतन के बिना काम करने की उम्मीद नहीं की जा सकती है।’इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया डी.वाई चंद्रचूड़, न्यायाधीश जे.बी पारदीवाला और न्यायाधीश मनोज मिश्रा की पीठ कर रही थी। इस दौरान गंभीरता से विचार करते हुए सीजेआई ने पटना हाईकोर्ट को फटकार लगाई। उन्होंने कहा, ‘जस्टिस आरपी मिश्रा का वेतन अभी तक उन्हें क्यों नहीं दिया गया? वे उन्हें वेतन देने से मना क्यों कर रहे हैं?&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;अन्य जजों की तरह सेवाएं प्राप्त करेंगे&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि उनके जैसे लोग हाईकोर्ट में नियुक्त होने पर अन्य सभी हाईकोर्ट जजों की तरह सेवाएं प्राप्त करेंगे। सुनवाई के दौरान पीठ ने यह भी कहा, ‘अगर जस्टिस मिश्रा जिला न्यायपालिका में कार्यरत रहते हुए नई पेंशन योजना के तहत शासित थे, लेकिन हाईकोर्ट में प्रमोशन होने पर वे दूसरे हाईकोर्ट न्यायाधीशों के बराबर सेवा शर्तों के अधीन शासित होंगे। जज को सेवा देने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कोर्ट ने राज्य सरकार को जस्टिस मिश्रा का वेतन बकाया राशि के साथ जारी करने का निर्देश दिया।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;7 जजों का वेतन जारी करने के निर्देश&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;सुनवाई के दौरान न्यायालय को याद दिलाया गया कि जस्टिस रुद्र प्रकाश मिश्रा को नवंबर 2023 में उच्च न्यायिक सेवाओं से हाईकोर्ट में प्रमोशन के बाद से अभी तक जीपीएफ नहीं दिया गया। हालांकि उन्होंने सभी औपचारिकताओं को पूर्ण कर लिया है। जज को प्रमोशन के बाद से अब तक वेतन नहीं मिला है। साल 2023 के मार्च में सुप्रीम कोर्ट ने इसी तरह के अंतरिम उपाय में पटना हाईकोर्ट के 7 जजों के वेतन को जारी करने का निर्देश दिया था, जो उनके जीपीएफ अकाउंट बंद करने के बाद से रोके गए थे।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>पॉक्सो एक्ट में बदलाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला</title><link>https://bihar.inkhabar.com/top-news/big-decision-of-supreme-court-regarding-changes-in-pocso-act/</link><pubDate>September 23, 2024, 7:21 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/09/download-9-7-300x168.png</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>पटना: सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि चाइल्ड पोर्नोग्राफी से जुड़ी सामग्री डाउनलोड करना और अपने पास रखना अपराध है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर कोई व्यक्ति ऐसी सामग्री को डिलीट नहीं करता है या पुलिस को इसकी जानकारी नहीं देता है तो POCSO एक...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना&lt;/strong&gt;: सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि चाइल्ड पोर्नोग्राफी से जुड़ी सामग्री डाउनलोड करना और अपने पास रखना अपराध है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर कोई व्यक्ति ऐसी सामग्री को डिलीट नहीं करता है या पुलिस को इसकी जानकारी नहीं देता है तो POCSO एक्ट की धारा 15 इसे अपराध मानती है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;मद्रास हाई कोर्ट के फैसले को किया खारिज&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में मद्रास हाई कोर्ट के फैसले को पलट दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कानूनी तौर पर ऐसी सामग्री रखना भी अपराध है. हाई कोर्ट ने एक शख्स के खिलाफ दर्ज केस यह कहते हुए रद्द कर दिया था कि उसने सिर्फ चाइल्ड पोर्नोग्राफी डाउनलोड की थी और अपने पास रखी थी. उसने इसे किसी और को नहीं सेंड किया.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;चाइल्ड पोर्नोग्राफी शब्द में बदलाव के आदेश&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को POCSO एक्ट में बदलाव करने और चाइल्ड पोर्नोग्राफी शब्द को चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज एंड एक्सप्लॉइटेटिव मटेरियल (CSAEM) से बदलने की सलाह दी है। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच के सदस्य जस्टिस जेबी पारदीवाला ने 200 पेज का यह फैसला लिखा है.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;आदेशों में सीएसएईएम ही लिखें&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;उन्होंने कहा कि जब तक POCSO एक्ट में बदलाव को संसद से मंजूरी नहीं मिल जाती, तब तक अध्यादेश लाया जाना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने देशभर की अदालतों को अपने आदेश में CSAEM लिखने की सलाह भी दी है.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;&amp;#8216;POCSO एक्ट की उपधारा 1 अपने आप में पूर्ण &amp;#8216;&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;POCSO (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण) अधिनियम की धारा 15 की उपधारा 1 बच्चों के लिए अश्लील सामग्री रखने को अपराध मानती है। इसके लिए 5,000 रुपये से लेकर 3 साल की कैद तक के जुर्माने का प्रावधान है. धारा 15 की उपधारा 3 में ऐसी सामग्री के प्रसारण और व्यावसायिक उपयोग को अपराध घोषित किया गया है। मद्रास हाई कोर्ट ने उपधारा 2 और 3 के आधार पर आरोपियों को राहत दी थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि उपधारा 1 ही पर्याप्त है.&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>NEET-UG Row: नीट मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला, &amp;#8216;कोई व्यवस्थागत उल्लंघन नहीं हुआ, लीक सिर्फ पटना और हजारीबाग तक सीमित&amp;#8217;</title><link>https://bihar.inkhabar.com/top-news/neet-ug-row-supreme-courts-decision-in-neet-case-no-systemic-violation-took-place-leak-limited-only-to-patna-and-hazaribagh/</link><pubDate>August 2, 2024, 6:00 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/08/Clipboard-28-300x168.webp</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>पटना : नीट मामले में आज शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि NEET-UG 2024 के पेपर में व्यवस्था का कोई उल्लंघन नहीं हुआ है। पेपर लीक केवल पटना और हजारीबाग तक सीमित था। सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि केंद्र द्वारा बनाई गई कमेटी को परीक्षा...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना &lt;/strong&gt;: नीट मामले में आज शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि NEET-UG 2024 के पेपर में व्यवस्था का कोई उल्लंघन नहीं हुआ है। पेपर लीक केवल पटना और हजारीबाग तक सीमित था। सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि केंद्र द्वारा बनाई गई कमेटी को परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा में कमजोरियों की पहचान करने, जांच बढ़ाने की प्रक्रिया, तकनीकी प्रगति के लिए SOP तैयार करने पर भी विचार करेगी।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;NTA को लेकर सुनाया फैसला&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसने अपने फैसले में NTA की संरचनात्मक प्रक्रियाओं में सभी खामियों को उजागर किया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम छात्रों की बेहतरी के लिए उनकी ऐसी स्थिति नहीं होने देंगे। इसलिए जो मुद्दा उठाया गया है, उसे केंद्र को इसी साल ठीक करना चाहिए, ताकि ऐसा फिर से न हो।&lt;/p&gt;



&lt;figure class=&quot;wp-block-embed is-type-rich is-provider-twitter wp-block-embed-twitter&quot;&gt;&lt;div class=&quot;wp-block-embed__wrapper&quot;&gt;
&lt;blockquote class=&quot;twitter-tweet&quot; data-width=&quot;500&quot; data-dnt=&quot;true&quot;&gt;&lt;p lang=&quot;hi&quot; dir=&quot;ltr&quot;&gt;NEET-UG 2024: सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि NEET-UG 2024 के पेपर में कोई प्रणालीगत उल्लंघन नहीं हुआ था, लीक केवल पटना और हज़ारीबाग तक ही सीमित था। &lt;a href=&quot;https://t.co/GYnPeDjlCx&quot;&gt;pic.twitter.com/GYnPeDjlCx&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; ANI_HindiNews (@AHindinews) &lt;a href=&quot;https://twitter.com/AHindinews/status/1819242643693466089?ref_src=twsrc%5Etfw&quot;&gt;August 2, 2024&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt;&lt;script async src=&quot;https://platform.twitter.com/widgets.js&quot; charset=&quot;utf-8&quot;&gt;&lt;/script&gt;
&lt;/div&gt;&lt;/figure&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;उम्मीदवारों के साथ-साथ माता-पिता भी शामिल&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;इससे पहले, नीट यूजी पेपर लीक मामले में CBI द्वारा दायर पहली चार्जशीट में उम्मीदवारों के साथ उसके माता-पिता, एक इंजीनियर और पेपर लीक के मास्टरमाइंड का नाम शामिल हैं। CBI ने यह भी कहा कि जांच अभी जारी है और मामले में एक पूरक चार्जशीट भी दायर की जाएगी। पहली आरोप पत्र में 13 आरोपियों के नाम हैं, जिनमें 4 नीट कैंडिडेट, एक जूनियर इंजीनियर और पेपर लीक के दो मास्टरमाइंड शामिल हैं।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;अब तक इतने लोग हुए गिरफ्तार&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;नीट यूजी पेपर लीक मामले में 6 FIR दर्ज की गई हैं। नीट परीक्षा में धांधली के आरोपों पर पटना पुलिस ने सबसे पहले 5 मई को केस दर्ज किया था, जिसके बाद 23 जून को CBI को सौंप दिया गया था। 5 मई को हुई नीट परीक्षा में 23 लाख छात्र शामिल हुए थे। इस मामले में अब तक 40 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिसमें से 15 लोगों को बिहार पुलिस ने पकड़ा है और अब तक इस मामले में 58 जगहों पर छापेमारी हुई है।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>NEET-UG : सुप्रीम कोर्ट ने NEET-UG 2024 परीक्षा रद्द करने से किया इनकार</title><link>https://bihar.inkhabar.com/top-news/neet-ug-supreme-court-refuses-to-cancel-neet-ug-2024-exam/</link><pubDate>July 23, 2024, 11:56 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/07/download-14-1-300x169.png</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>पटना :सुप्रीम कोर्ट ने आज मंगलवार को सुनवाई के बाद NEET-UG परीक्षा पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने एक अहम फैसला भी सुनाया। जिसमें कहा गया कि दोबारा NEET-UG परीक्षा नहीं होगी। याचिका में री एग्जाम की मांग की गई थी। सु...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना &lt;/strong&gt;:सुप्रीम कोर्ट ने आज मंगलवार को सुनवाई के बाद NEET-UG परीक्षा पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने एक अहम फैसला भी सुनाया। जिसमें कहा गया कि दोबारा NEET-UG परीक्षा नहीं होगी। याचिका में री एग्जाम की मांग की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, दोबारा परीक्षा की मांग सही नहीं है, इससे 24 लाख छात्र प्रभावित होंगे.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;जस्टिस चंद्रचूड़ ने बताई री एग्जाम न होने की वजह&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि हमारा निष्कर्ष यह है कि पेपर लीक हजारीबाग से हुआ और पटना पहुंचा यह निर्विवाद है. आदेश देते हुए उन्होंने कहा कि दोनों जगह के अभी तक 155 छात्र लाभार्थी की लिस्ट में सामने देखे गए हैं।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;केंद्र से भी मांगा था जवाब&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;सीजेआई ने आगे कहा कि अभी तक जांच अधूरी है। हमने केंद्र से भी जवाब मांगा था कि 4750 एग्जाम सेंटरों में से कहां-कहां गड़बड़ी पाया गया। हालांकि, IIT मद्रास ने भी इस मामले की समीक्षा की। अभी तक उपलब्ध सामग्री के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि मामले की पवित्रता पूरी तरह प्रभावित हुई है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;दोबारा एग्जाम से 20 लाख से ज्यादा अभ्यार्थी होंगे परेशान&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम इस साल के परिणामों के आंकड़ों की तुलना पिछले 3 सालों के आंकड़ों से भी की हैं। इससे भी ऐसा नहीं लगता कि कोई बड़े पैमाने पर अनियमितता हुई है। उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि अनुचित तरीकों से कोई भी छात्र इसका फायदा न उठा पाए और न ही भविष्य में दाखिला पा सकें। उन्होंने आगे कहा कि हमारा मानना ​​है कि दोबारा एग्जाम का 20 लाख से ज्यादा छात्रों पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। इस वजह से पढ़ाई में देरी होगी। इसलिए हम दोबारा परीक्षा को उचित नहीं मानते।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Article 370: सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर चिराग पासवान ने जताई खुशी</title><link>https://bihar.inkhabar.com/top-news/chirag-paswan-expressed-happiness-on-the-decision-of-supreme-court/</link><pubDate>December 11, 2023, 11:42 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/12/7-5-300x169.png</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>पटना। सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाना संवैधानिक रूप से सही है। जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और भारत का संविधान जम्मू कश्मीर के संवि...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना।&lt;/strong&gt; सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाना संवैधानिक रूप से सही है। जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और भारत का संविधान जम्मू कश्मीर के संविधान से ऊंचा है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर एलजेपी आर के प्रमुख चिराग पासवान ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि हम लोगों को इस फैसले की उम्मीद थी।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;कोर्ट के फैसले का किया समर्थन&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;एलजेपी आर के प्रमुख चिराग पासवान ने कहा, जम्मू-कश्मीर राज्य में अनुच्छेद 370 को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट से जो फैसला आया है इस पर हम खुश हैं। सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर को राज्य के रूप में बहाल करने को लेकर जो बातें कही हैं इस पर नरेंद्र मोदी सरकार पहले से ही कमिटेड है। सरकार जल्द चुनाव भी कराएगी। चिराग पासवान ने कहा कि अनुच्छेद 370 पर सरकार के फैसले पर विपक्षी नेता बार-बार सवाल उठा रहे थे। हम लोगों ने हमेशा इस फैसले का समर्थन किया। सदन में जब इस प्रस्ताव को लाया गया था तब मैंने ही अपनी पार्टी की तरफ से मत रखते हुए इसका समर्थन किया था।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;अनुच्छेद 370 पर उच्चतम न्यायालय का फैसला&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर राज्य को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को निरस्त किए जाने के सरकार के फैसले को बरकरार रखा है। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार अगले साल 30 सितंबर तक विधानसभा चुनाव कराने के लिए कदम उठाए जाने चाहिए। यही नहीं सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा जल्द से जल्द बहाल किया जाए।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>B.Ed Row Hearing In SC: सुप्रीम कोर्ट ने मंजूर की बीएड अभ्यर्थियों की याचिका, अब 3 नवंबर को होगी सुनवाई</title><link>https://bihar.inkhabar.com/politics/b-ed-row-hearing-in-sc-supreme-court-approves-the-petition-of-b-ed-candidates-now-hearing-will-be-held-on-november-3/</link><pubDate>October 30, 2023, 8:01 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/10/3-22-300x169.png</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>पटना। सुप्रीम कोर्ट में आज सोमवार को बिहार बीएड के अभ्यर्थियों की सुनवाई की गई है। बताया जा रहा है कि इस मामले में रिजल्ट पर स्टे लगाने वाली याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने मंजूर कर लिया है। वहीं अब इसकी सुनवाई चीफ जस्टिस वाली बेंच करेगी। बता दें कि...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना।&lt;/strong&gt; सुप्रीम कोर्ट में आज सोमवार को बिहार बीएड के अभ्यर्थियों की सुनवाई की गई है। बताया जा रहा है कि इस मामले में रिजल्ट पर स्टे लगाने वाली याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने मंजूर कर लिया है। वहीं अब इसकी सुनवाई चीफ जस्टिस वाली बेंच करेगी। बता दें कि इस मामले की सुनवाई की तारीख 3 नवंबर कर दी गई है। याचिकाकर्ता दीपांकर गौरव ने इस बात की जानकारी दी है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;रिट याचिका पेंडिंग होने के बावजूद धोखा&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;दरअसल बिहार प्रारंभिक युवा शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष दीपांकर गौरव ने याचिका दायर की है। बता दें कि दीपांकर गौरव ने बीएड अभ्यर्थियों की रिट याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की थी। दीपांकर गौरव का कहना है कि बीपीएससी ने रिट याचिका पेंडिंग होने के बावजूद बीएड अभ्यर्थियों के साथ धोखा किया है। बीएड और डीएलएड अभ्यर्थियों का रिजल्ट एक साथ जारी होना चाहिए था। अब सुप्रीम कोर्ट बीएड अभ्यर्थियों के साथ न्याय करेगा और इस बहाली में बीएड योग्यताधारियों को मौका दिया जाएगा।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;अभ्यार्थियों के साथ सौतेला व्यवहार&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;बिहार प्रारंभिक युवा शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष दीपांकर गौरव ने इससे पहले कहा था कि इस मामले पर अभी सुनवाई लंबित है। उन्होंने कहा था कि मुख्य न्यायाधीश वाली बेंच इस पर सुनवाई करेगी। इसी बीच में बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा प्राथमिक का रिजल्ट जारी कर दिया। इसे लेकर हम लोगों ने आयोग की तरफ से जारी किए गए प्रारंभिक शिक्षक के रिजल्ट को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। दीपांकर गौरव ने आगे बताया कि बीएड अभ्यर्थियों को छांटकर प्रारंभिक के 72 हजार रिजल्ट सिर्फ डीएलएड अभ्यर्थियों के बीच में दे दिया गया है। ऐसा करके आयोग ने बीएड अभ्यर्थियों के साथ सौतेला सा व्यवहार किया है।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>बिहार: सुप्रीम कोर्ट से बिहार सरकार को बड़ा झटका, जानिए क्या है कोर्ट का फैसला?</title><link>https://bihar.inkhabar.com/politics/bihar-big-blow-to-bihar-government-from-supreme-court-know-what-is-the-decision-of-the-court/</link><pubDate>October 9, 2023, 11:25 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/10/6-2-300x169.png</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>पटना। शिक्षक बहाली के मामले में प्राइमरी टीचर के लिए बीएड की योग्यता पर रोक लगा दिया गया है। बताया जा रहा है कि अब राज्य सरकार नई याचिका दायर करने की तैयारी कर रही है। सुप्रीम कोर्ट से बीएड अभ्यार्थियों को कोई राहत नहीं प्रदेश में 1 लाख 70 हजार...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना। &lt;/strong&gt;शिक्षक बहाली के मामले में प्राइमरी टीचर के लिए बीएड की योग्यता पर रोक लगा दिया गया है। बताया जा रहा है कि अब राज्य सरकार नई याचिका दायर करने की तैयारी कर रही है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;सुप्रीम कोर्ट से बीएड अभ्यार्थियों को कोई राहत नहीं&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;प्रदेश में 1 लाख 70 हजार से ज्यादा शिक्षकों की नियुक्ति के मामले में बिहार सरकार को सुप्रीम कोर्ट ने झटका दे दिया है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट से बीएड कैंडिडेट्स को कोई भी राहत नहीं मिली है। बताया जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई दूसरे बेंच को ट्रांसफर कर दी है। हालांकि, बिहार सरकार ने कहा है कि वह याचिका में बदलाव करेगी और नए सिरे से दूसरी याचिका दाखिल की जाएगी।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह है पूरा मामला&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में राजस्थान में शिक्षक बहाली के मामले में प्राइमरी टीचर के लिए बीएड की योग्यता पर प्रतिबंध लगा दिया है। सिर्फ बीटीसी या डीएलएड डिग्री वाले छात्र ही कक्षा पांचवीं तक पढ़ाने के लिए पात्र माने जाएंगे। अहम बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला तब आया था जब बिहार में भी शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया चल रही थी। बता दें कि बिहार लोक सेवा आयोग यानी बीपीएससी ने लगभग दो सप्ताह पहले ये तय किया था कि बीएड पास अभ्यार्थी प्राइमरी टीचर नहीं बन पाएंगे। यहीं नहीं इसके बाद शिक्षक भर्ती में शामिल 3 लाख 90 हजार बीएड अभ्यार्थियों के रिजल्ट रोक दिया गया। वहीं बीपीएससी ने यह तय किया है कि सिर्फ डीएलएड पास उम्मीदवारों का ही रिजल्ट जारी किया जायेगा। बीपीएससी ने ये फैसला सुप्रीम कोर्ट के आदेश के कारण लिया है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;हाईकोर्ट ने भी खारिज की थी दलील&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;बता दें कि यह मामला पटना हाईकोर्ट में भी पहुंचा था। जहां पटना हाईकोर्ट में बिहार सरकार ने दलील दी थी कि बीएड वाले अभ्यार्थियों को प्राइमरी टीचर नहीं बनाने का सुप्रीम कोर्ट का फैसला बिहार के संबंध में नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से ये साफ नहीं हो रहा है कि बिहार में ये आदेश लागू होगा या नहीं। वहीं 22 सितंबर को पटना हाईकोर्ट ने बिहार सरकार की इस दलील को खारिज कर दिया और कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला बिहार में भी लागू होगा। पटना हाईकोर्ट के इसी फैसले को आधार बना कर बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर कर दी है। फिलहाल बिहार सरकार का यह मानना है कि बीएड पास अभ्यर्थियों को प्राइमरी टीचर के पद पर नियुक्ति करने की इजाजत दी जाए।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>बिहार : आज सीएम नीतीश करेंगे सर्वदलीय बैठक, डेटा में गड़बड़ी को लेकर सवाल उठाएगी बीजेपी</title><link>https://bihar.inkhabar.com/politics/bihar-today-cm-nitish-will-hold-an-all-party-meeting-bjp-will-raise-questions-regarding-data-irregularities/</link><pubDate>October 3, 2023, 7:19 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/10/3-2-300x169.png</image><category>राजनीति</category><excerpt>पटना। बिहार में जाति आधारित गणना को लेकर आज मंगलवार को सीएम नीतीश कुमार की अध्यक्षता में सर्वदलीय बैठक की जाएगी। इस दौरान बीजेपी आंकड़ों को लेकर राज्य सरकार को घेर सकती है। आज होगी सर्वदलीय बैठक बिहार में जाति आधारित जनगणना की रिपोर्ट जारी की ज...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना।&lt;/strong&gt; बिहार में जाति आधारित गणना को लेकर आज मंगलवार को सीएम नीतीश कुमार की अध्यक्षता में सर्वदलीय बैठक की जाएगी। इस दौरान बीजेपी आंकड़ों को लेकर राज्य सरकार को घेर सकती है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;आज होगी सर्वदलीय बैठक&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;बिहार में जाति आधारित जनगणना की रिपोर्ट जारी की जा चुकी है। बताया जा रहा है कि आज मंगलवार (3 अक्टूबर) को जाति आधारित जनगणना में साथ रहे दलों के नेताओं की सर्वदलीय बैठक होनी है। बता दें कि यह बैठक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में होगी। इसमें जाति जनगणना की रिपोर्ट पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सभी दलों से बातचीत करेंगे। बता दें कि जाति आधारित जनगणना में साथ रहे दलों के नेताओं को भी अगड़ी जातियों और बनिया की जनसंख्या घटने पर आश्चर्य हो रहा है। इसमें डेटा के अनुसार अगड़ी जाति और बनिया जाति के जो आंकड़े प्रकाशित किए गए हैं उन्हें लेकर आज भाजपा विरोध भी जताएगी। बता दें कि सर्वदलीय बैठक के दौरान भाजपा उन आंकड़ों पर सरकार को घेरने की तैयारी कर रही है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;सीएम नीतीश ने क्या कहा&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा था कि मंगलवार को सर्वदलीय बैठक में जाति आधारित जनगणना की सारी बातें सबके सामने रखी जाएगी। इसके साथ ही इस बैठक में सबकी राय लेकर सरकार द्वारा सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे। नीतीश कुमार ने आगे यह भी कहा कि बिहार में जो जाति आधारित गणना हुई है वो पूरे देश में भी होनी चाहिए।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;जाति गणना का मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट में&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;दरअसल, जाति जनगणना की रिपोर्ट जारी होते ही मामला फिर से सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया है। चूंकि रिपोर्ट को प्रकाशित नहीं करने की बात की गई थी लेकिन इसके बावजूद डाटा को प्रकाशित कर दिया गया है। जाति जनगणना के आंकड़ों को जारी करने पर रोक लगाने के लिए पटना हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। इस मामले पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने बिहार सरकार के पक्ष में इसका फैसला सुनाया था और सरकार के इस कदम को कानूनी रूप से वैध बताया था। वहीं इसके बाद बिहार सरकार ने जाति गणना का कार्य शुरू कर दिया था। बताया जा रहा है कि पटना हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट पहुंचकर और रिपोर्ट को फिलहाल जारी नहीं करने का अनुरोध किया लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा करने से इनकार कर दिया था। अब इसको लेकर फिर से कोर्ट में यह मामला कोर्ट में चला गया है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है कि इस मामले पर 6 अक्टूबर को ही आपकी दलीलें सुनी जाएंगी।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>बिहार : सुप्रीम कोर्ट में गया बिहार जातीय सर्वे का मामला ,6 अक्टूबर को होगी इसकी सुनवाई</title><link>https://bihar.inkhabar.com/top-news/%e0%a4%ac%e0%a4%bf%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%ae-%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%9f-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%97/</link><pubDate>October 3, 2023, 6:04 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/10/2-2-300x169.png</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>पटना। सोमवार को गांधी जयंती के दिन बिहार सरकार ने जाति आधारित गणना कि रिपोर्ट जारी की थी। बताया जा रहा है कि अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट में चला गया है। 6 अक्टूबर को होगी मामले की सुनवाई बिहार में जाति आधारित सर्वे मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने रख...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना।&lt;/strong&gt; सोमवार को गांधी जयंती के दिन बिहार सरकार ने जाति आधारित गणना कि रिपोर्ट जारी की थी। बताया जा रहा है कि अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट में चला गया है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;6 अक्टूबर को होगी मामले की सुनवाई&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;बिहार में जाति आधारित सर्वे मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने रखा गया है। कोर्ट ने 6 अक्टूबर को सुनवाई की बात कही है। यह मामला पहले से सुप्रीम कोर्ट में चल रहा था। बता दें कि कोर्ट ने सर्वे के आंकड़े जारी करने पर कोई रोक नहीं लगाई। कोर्ट का कहना था कि वह रोक का आदेश विस्तृत सुनवाई के बाद ही देगा। दरअसल, इस मामले की सुनवाई आज मंगलवार को होनी थी और याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि बिहार सरकार ने जाति सर्वे के आंकड़े जारी कर दिए हैं। अब कोर्ट शुक्रवार (06 अक्टूबर) को इस मामले की सुनवाई करेगा।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;रिपोर्ट के अनुसार बिहार में किसकी कितनी जनसंख्या&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;जाति आधारित गणना की रिपोर्ट के अनुसार बिहार में सबसे अधिक हिंदुओं की संख्या पाई गई है। बता दें की इसमें में 81.99 प्रतिशत हिंदू हैं। हिंदुओं की संख्या 10 करोड़ 71 लाख 92 हजार 958 है। वहीं बिहार में मुस्लिम की संख्या 17.7% यानी 2 करोड़ 31 लाख 49 हजार 925 है। इसके अलावा ईसाई की संख्या 75238, सिख की संख्या 14753, बौद्ध की संख्या 111201 और जैन की संख्या 12523 है यानी 1% से भी कम है। वहीं बिहार के जातीय गणना के आंकड़े के अनुसार कुल जनसंख्या का 63 प्रतिशत हिस्सा ओबीसी, ईबीसी हैं। आंकड़ों के अनुसार, राज्य की कुल जनसंख्या 13.07 करोड़ से कुछ अधिक है। इसमें अगर वर्गों की आबादी के बारे में बात करें तो सामान्य वर्ग – 15.52%,पिछड़ा वर्ग- 27.12%,अति पिछड़ा वर्ग – 36.1%,अनूसूचित जाति- 19.65% और अनूसचित जनजाति – 1.68% है। वहीं अगर बात करें कि किस में कितनी आबादी है तो ब्राह्मण- 3.67%, राजपूत- 3.45%, भूमिहार- 2.89%, कायस्थ – 0.60%, यादव – 14.26 %, कुरमी- 2.87%, तेली- 2.81%, मुसहर- 3.08% और सोनार-0.68% में हैं।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;जानिए क्या है मामला ?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;दरअसल, जाति जनगणना के आंकड़ों को जारी करने पर रोक लगाने के लिए पटना हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। इस मामले पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने बिहार सरकार के पक्ष में इसका फैसला सुनाया था और सरकार के इस कदम को कानूनी रूप से वैध बताया था। वहीं इसके बाद बिहार सरकार ने जाति गणना का कार्य शुरू कर दिया था। बताया जा रहा है कि पटना हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट पहुंचकर और रिपोर्ट को फिलहाल जारी नहीं करने का अनुरोध किया लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा करने से इनकार कर दिया था।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>आज होगी जातीय आधारित गणना से जुड़ी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, पटना हाई कोर्ट के फैसले को दी गई है चुनौती</title><link>https://bihar.inkhabar.com/top-news/hearing-will-be-held-in-the-supreme-court-today-on-the-petitions-related-to-caste-based-census-the-decision-of-patna-high-court-has-been-challenged/</link><pubDate>September 6, 2023, 10:51 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/09/download3-300x169.png</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>पटना। सुप्रीम कोर्ट आज पटना उच्च न्यायालय के बिहार में जाति आधारित सर्वेक्षण को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज करने के आदेश के खिलाफ दायर विशेष अनुमति याचिकाओं पर आज सुनवाई करेगा। केंद्र सरकार ने हलफनामा वापस ले लिया था शीर्ष अदालत की वेबसा...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना।&lt;/strong&gt; सुप्रीम कोर्ट आज पटना उच्च न्यायालय के बिहार में जाति आधारित सर्वेक्षण को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज करने के आदेश के खिलाफ दायर विशेष अनुमति याचिकाओं पर आज सुनवाई करेगा।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;केंद्र सरकार ने हलफनामा वापस ले लिया था&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;शीर्ष अदालत की वेबसाइट अनुसार न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और एसवीएन भट्टी की पीठ मामले की सुनवाई जारी रखेगी। पिछले हफ्ते केंद्र सरकार ने अपना हलफनामा वापस ले लिया था, जिसमें कहा गया कि उसके अलावा जनगणना जैसी प्रक्रिया करने का हकदार कोई और नहीं है। केंद्रीय गृह मंत्रालय में रजिस्ट्रार जनरल के कार्यालय द्वारा दायर नए हलफनामे में यह कहते हुए पैराग्राफ को वापस ले लिया गया कि संविधान के तहत या अन्यथा कोई अन्य निकाय जनगणना या जनगणना के समान कोई और कार्रवाई करने का हकदार नहीं है। पिछली सुनवाई में जब केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि वह संवैधानिक और कानूनी स्थिति को रिकॉर्ड पर रखना चाहते हैं। तब सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को अपना जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह की अनुमति दी थी।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;शीर्ष अदालत में याचिकाकर्ताओं की दलीलें&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;शीर्ष अदालत के सामने याचिकाकर्ताओं ने यह दलीलें दी थी कि सर्वेक्षण प्रक्रिया गोपनीयता के कानून का उल्लंघन करती है और केवल केंद्र सरकार के पास ही भारत में जनगणना करने का अधिकार है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार के पास जाति आधारित जनगणना के संचालन पर निर्णय लेने और उसे अधिसूचित करने का कोई अधिकार नहीं है। शीर्ष अदालत ने सर्वेक्षण प्रक्रिया या सर्वेक्षण के परिणामों के प्रकाशन पर रोक लगाने के लिए कोई अंतरिम आदेश पारित करने से इनकार कर दिया था, हालांकि यह तर्क दिया गया था कि डेटा के प्रकाशन के बाद मामला व्यर्थ ही हो जाएगा।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;ट्रांसजेंडर समुदाय &amp;#8216;लिंग&amp;#8217; की बजाय &amp;#8216;जाति&amp;#8217;&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;नीतीश कुमार की राज्य सरकार ने कहा है कि बिहार में जाति आधारित सर्वेक्षण पूरा हो चुका है और जल्दी ही परिणाम सार्वजनिक हो जाऐंग। राज्य की जाति सर्वेक्षण प्रक्रिया में ट्रांसजेंडर समुदाय को &amp;#8216;लिंग&amp;#8217; की श्रेणी के बजाय &amp;#8216;जाति&amp;#8217; के रूप में वर्गीकृत करने के बिहार सरकार के फैसले को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत के सामने एक और याचिका दायर की गई है।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>बीएड वाले अब नहीं बन सकेंगे प्राथमिक स्कूल में टीचर, SC के फैसले का BPSC बिहार शिक्षक भर्ती पर क्या पड़ेगा असर?</title><link>https://bihar.inkhabar.com/states/ed-people-will-no-longer-be-able-to-become-teachers-in-primary-schools-what-will-be-the-effect-of-scs-decision-on-bpsc-bihar-teacher-recruitment/</link><pubDate>August 12, 2023, 1:38 pm</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/08/teacher-300x169.png</image><category>राज्य</category><excerpt>पटना। बिहार कर्मचारी चयन आयोग द्वारा जून 2023 में राज्य में शिक्षक पदों पर कुल 170461 रिक्तियां निकाली गयी थी। इस परीक्षा से संबंधित जरुरी नोटिफिकेशन अब बीपीएससी ने जारी किया है। दरअसल B.Ed vs BSTC विवाद मामले में शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने ब...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना।&lt;/strong&gt; बिहार कर्मचारी चयन आयोग द्वारा जून 2023 में राज्य में शिक्षक पदों पर कुल 170461 रिक्तियां निकाली गयी थी। इस परीक्षा से संबंधित जरुरी नोटिफिकेशन अब बीपीएससी ने जारी किया है। दरअसल B.Ed vs BSTC विवाद मामले में शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया। जिसमें BSTC करने वाले उम्मीदवारों को राहत देते हुए B.Ed धारकों को प्राथमिक विद्यालय में टीचर बनने के लिए अपात्र घोषित कर दिया। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला राजस्थान में आये हुए एक मामले को लेकर आया है लेकिन इसका असर अन्य राज्यों में भी पड़ सकता है। जल्द ही बिहार में एक लाख 70 हज़ार शिक्षकों की भर्ती होने वाली है तो इस फैसले का सीधा असर उनके ऊपर भी पड़ेगा।&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;&lt;strong&gt;बिहार शिक्षक भर्ती पर असर&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;मालूम हो कि बिहार कर्मचारी चयन आयोग ने जून 2023 में शिक्षकों के लिए 170461 पदों पर रिक्तियां निकाली थी। जिसमें प्राइमरी टीचर यानी कक्षा 1 से 5 तक के कुल 79943 पद, टीजीटी टीचर कक्षा 9-10 के 32916 पद और पीजीटी टीचर यानी कक्षा 11-12 तक के 57602 पद शामिल हैं। इसमें से कक्षा 1 से 5 तक के लिए 7.4 लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है जिसमें B.Ed वालों की संख्या 5 लाख के करीब है।&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;&lt;strong&gt;नया नोटिस जारी नहीं&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;अब बिहार में कक्षा 1 से 5 तक नियुक्ति के लिए बीएड डिग्री वालों के सामने यह शर्त है कि उन्हें नियुक्ति के 2 साल के अंदर 6 महीने का ब्रिज कोर्स करना होगा। वर्तमान में BPSC ने भर्ती के लिए जो प्रक्रिया लागू किया है। उसमें यहीं प्रावधान लागू है। आयोग ने अभी इससे संबंधित कोई नया नोटिस जारी किया है।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>बिहार: मनीष कश्यप की सुनवाई से SC  ने किया इंकार, कहा हाईकोर्ट जाइए</title><link>https://bihar.inkhabar.com/top-news/sc-refuses-to-hear-manish-kashyap-says-go-to-high-court-prince-singh/</link><pubDate>May 8, 2023, 6:13 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/05/manish-300x169.png</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>पटना: यूट्यूबर मनीष कश्यप को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है. डीवााई चंद्रचूड़ की पीठ ने मनीष कश्यप की सुनवाई से इंकार कर दिया है. बता दें कि मनीष कश्यप ने केस क्लब करने की मांग की थी. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पहले हाईकोर्ट में जाकर सुनवाई करिए....</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना:&lt;/strong&gt; यूट्यूबर मनीष कश्यप को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है. डीवााई चंद्रचूड़ की पीठ ने मनीष कश्यप की सुनवाई से इंकार कर दिया है. बता दें कि मनीष कश्यप ने केस क्लब करने की मांग की थी. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पहले हाईकोर्ट में जाकर सुनवाई करिए. मनीष कश्यप केस की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टल गई है. &lt;/p&gt;



&lt;p&gt;&lt;strong&gt;आज होने वाली थी सुनवाई&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;तमिलनाडु में बिहारी मजदूरों की पिटाई की फेक खबरें और वीडियो वायरल करने के मामले में जेल में बंद बिहार के यूट्यूबर मनीष कश्यप केस में आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होने वाली है. आज की सुनवाई में तमिलनाडु सरकार सुप्रीम कोर्ट में इसका जवाब देगी कि किस आधार पर मनीष कश्यप पर NSA लगाया गया है. बता दें इससे पहले 28 अप्रैल की सुनवाई में कोर्ट ने सरकार से ये सवाल पूछा था कि मनीष कश्यप पर NSA क्यों लगाया गया है, जिस पर सरकार की ओर से कुछ दिनों का समय मांगा गया था.&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;&lt;strong&gt;मनीष की तीन मांगें&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;मनीष कश्यप केस में सुप्रीम कोर्ट में आज तीन अहम मुद्दों पर सुनवाई होने वाली है. पिछली सुनवाई के दौरान मनीष कश्यप की ओर से तीन मांगें की गई थीं, जिनमें NSA एक्ट हटाने, रेगुलर बेल देने और कई राज्यों में दर्ज केसों को क्लब करने की मांग शामिल है. इस केस की सुनवाई उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति नरसिम्हा की पीठ द्वारा की जा रही है.&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;&lt;strong&gt;मनीष पर दर्ज हैं 6 केस&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;इससे पहले मनीष कश्यप पर NSA लगाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को नोटिस जारी किया था. साथ ही मनीष कश्यप को मदुरै जेल से कही और शिफ्ट ना करने का निर्देश भी दिया गया था. बता दें, फेक न्यूज फैलाने के मामले में कई राज्यों में मनीष कश्यप के ऊपर 6 केस दर्ज किए गए हैं&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>बिहार: मनीष कश्यप केस में आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, तमिलनाडु सरकार बताएगी क्यों लगाया NSA ?</title><link>https://bihar.inkhabar.com/top-news/hearing-in-supreme-court-today-in-manish-kashyap-case-tamil-nadu-government-will-explain-why-nsa-was-imposed-prince-singh-inkhabar/</link><pubDate>May 8, 2023, 3:45 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/05/manish-300x169.png</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>पटना: तमिलनाडु में बिहारी मजदूरों की पिटाई की फेक खबरें और वीडियो वायरल करने के मामले में जेल में बंद बिहार के यूट्यूबर मनीष कश्यप केस में आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होने वाली है. आज की सुनवाई में तमिलनाडु सरकार सुप्रीम कोर्ट में इसका जवाब देग...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना&lt;/strong&gt;: तमिलनाडु में बिहारी मजदूरों की पिटाई की फेक खबरें और वीडियो वायरल करने के मामले में जेल में बंद बिहार के यूट्यूबर मनीष कश्यप केस में आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होने वाली है. आज की सुनवाई में तमिलनाडु सरकार सुप्रीम कोर्ट में इसका जवाब देगी कि किस आधार पर मनीष कश्यप पर NSA लगाया गया है. बता दें इससे पहले 28 अप्रैल की सुनवाई में कोर्ट ने सरकार से ये सवाल पूछा था कि मनीष कश्यप पर NSA क्यों लगाया गया है, जिस पर सरकार की ओर से कुछ दिनों का समय मांगा गया था.  &lt;/p&gt;



&lt;p&gt;&lt;strong&gt;मनीष की तीन मांगें&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;मनीष कश्यप केस में सुप्रीम कोर्ट में आज तीन अहम मुद्दों पर सुनवाई होने वाली है. पिछली सुनवाई के दौरान मनीष कश्यप की ओर से तीन मांगें की गई थीं, जिनमें NSA एक्ट हटाने, रेगुलर बेल देने और कई राज्यों में दर्ज केसों को क्लब करने की मांग शामिल है. इस केस की सुनवाई उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति नरसिम्हा की पीठ द्वारा की जा रही है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;&lt;strong&gt;क्यों लगा NSA ?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;इससे पहले मनीष कश्यप पर NSA लगाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को नोटिस जारी किया था. साथ ही मनीष कश्यप को मदुरै जेल से कही और शिफ्ट ना करने का निर्देश भी दिया गया था. बता दें, फेक न्यूज फैलाने के मामले में कई राज्यों में मनीष कश्यप के ऊपर 6 केस दर्ज किए गए हैं.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>बिहार: हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएगी नीतीश सरकार</title><link>https://bihar.inkhabar.com/top-news/nitish-government-will-go-to-supreme-court-against-high-courts-decision-prince-singh-inkhabar/</link><pubDate>May 4, 2023, 10:36 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/05/Clipboard-38-300x169.jpg</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>पटना: पटना हाईकोर्ट द्वारा बिहार में चल रही जातीय जनगणना पर रोक लगाने का आदेश दिया गया है. हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद बिहार सरकार के महाधिवक्ता पीके शाही ने कहा कि हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी. बता दें कि जातीय जनग...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना&lt;/strong&gt;: पटना हाईकोर्ट द्वारा बिहार में चल रही जातीय जनगणना पर रोक लगाने का आदेश दिया गया है. हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद बिहार सरकार के महाधिवक्ता पीके शाही ने कहा कि हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी. बता दें कि जातीय जनगणना पर रोक लगाने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए पटना हाईकोर्ट जनगणना पर रोक लगा दी है.&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;&lt;strong&gt;जनगणना पर लगी रोक&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;बिहार में चल रहे जातिगत जनगणना पर पटना हाईकोर्ट ने रोक लगा दिया है. गुरुवार को जातीय जनगणना पर रोक लगाने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए पटना हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि . बता दें कि सुनवाई के दौरान बिहार सरकार के महाधिवक्ता पीके शाही मामले में अपनी दलील दे रहे थे, लेकिन पटना हाईकोर्ट ने जाति जनगणना पर रोक लगा दी है.&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;&lt;strong&gt;हाईकोर्ट ने लगाई रोक&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;इस मामले में पटना हाईकोर्ट ने कहा कि अगली सुनवाई 3 जुलाई को होनी है. इसके साथ ही तब तक कोई डेटा सामने नहीं आएगा. इस मामले में याचिकाकर्ता के वकील ने जानकारी दी कि तीन जुलाई से इस मामले पर डिटेल में सुनवाई की जाएगी. इसके साथ ही कोर्ट के इस फैसले से नीतीश कुमार को बहुत बड़ा झटका लगा है. ऐसे में ये देखना होगा कि जुलाई के बाद इस मामले में क्या कुछ होता है.&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>बिहार: बेटे के तिलक समारोह से आनंद मोहन की तस्वीरें आईं सामने</title><link>https://bihar.inkhabar.com/top-news/pictures-of-anand-mohan-surfaced-from-sons-tilak-ceremony-prince-singh/</link><pubDate>May 1, 2023, 9:56 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/05/download-61-300x169.png</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>पटना: बिहार के बाहुबली नेता और पूर्व सांसद आनंद मोहन की रिहाई पर रार छिड़ा हुआ है. आनंद मोहन की रिहाई को लेकर लगातार राज्य का सियासी पारा हाई है. आज सुबह खबर आई कि जी. कृष्णैया की पत्नी ने आनंद मोहन की रिहाई को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दिया है....</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना&lt;/strong&gt;: बिहार के बाहुबली नेता और पूर्व सांसद आनंद मोहन की रिहाई पर रार छिड़ा हुआ है. आनंद मोहन की रिहाई को लेकर लगातार राज्य का सियासी पारा हाई है. आज सुबह खबर आई कि जी. कृष्णैया की पत्नी ने आनंद मोहन की रिहाई को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दिया है. इसको लेकर 8 मई को सुनवाई भी होने वाली है. इसी बीच आनंद मोहन के बेटे चेतन आनंद के तिलक की तस्वीरें सामने आई हैं.&lt;/p&gt;



&lt;figure class=&quot;wp-block-image size-full is-resized&quot;&gt;&lt;img loading=&quot;lazy&quot; decoding=&quot;async&quot; src=&quot;https://www.inkhabarbihar.com/wp-content/uploads/2023/05/image.png&quot; alt=&quot;&quot; class=&quot;wp-image-2634&quot; width=&quot;720&quot; height=&quot;540&quot; srcset=&quot;https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2023/05/image.png 720w, https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2023/05/image-300x225.png 300w, https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2023/05/image-150x113.png 150w, https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2023/05/image-696x522.png 696w&quot; sizes=&quot;auto, (max-width: 720px) 100vw, 720px&quot; /&gt;&lt;/figure&gt;



&lt;p&gt;&lt;strong&gt;चेतन आनंद की शादी की तस्वीरें&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;इन तस्वीरों में देखा जा सकता है कि आनंद मोहन अपने बेटे की शादी में रस्मों को अदा कर रहे हैं. बता दें कि चेतन आनंद की 3 मई को शादी होने वाली है. इस शादी में बेहद कम लोगों को बुलाया गया है. काफी हद तक शादी को प्राइवेट रखने की कोशिश की गई है. रविवार के दिन चेतन आनंद की शादी की रस्में हुईं. जिसमें देखा जा सकता है कि आनंद मोहन बेटे को आशिर्वाद देते नजर आ रहे हैं.&lt;/p&gt;



&lt;figure class=&quot;wp-block-image size-full&quot;&gt;&lt;img loading=&quot;lazy&quot; decoding=&quot;async&quot; width=&quot;790&quot; height=&quot;444&quot; src=&quot;https://www.inkhabarbihar.com/wp-content/uploads/2023/05/Untitled-design-2.png&quot; alt=&quot;&quot; class=&quot;wp-image-2636&quot; srcset=&quot;https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2023/05/Untitled-design-2.png 790w, https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2023/05/Untitled-design-2-300x169.png 300w, https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2023/05/Untitled-design-2-768x432.png 768w, https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2023/05/Untitled-design-2-150x84.png 150w, https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2023/05/Untitled-design-2-696x391.png 696w&quot; sizes=&quot;auto, (max-width: 790px) 100vw, 790px&quot; /&gt;&lt;/figure&gt;



&lt;p&gt;&lt;strong&gt;आठ मई को होगी सुनवाई&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;पूर्व सांसद आनंद मोहन की रिहाई के बाद से लागातार उनकी रिहाई को लेकर सवाल उठाया जा रहा था. इस मामले को लेकर राज्य की नीतीश सरकार भी सवालों के घेरे में आ रही है. इस मामले में अब जानकारी सामने आ रही है कि आनंद मोहन की रिहाई पर सुप्रीम कोर्ट में 8 मई को सुनवाई होने वाली है. डीएम जी. कृष्णैया की पत्नी ने सुप्रीम कोर्ट में उनके रिहाई को चुनौती दी थी. इस मामले में शीर्ष आदालत 8 मई को सुनवाई करने वाली है.&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;&lt;strong&gt;रिहाई के फैसले पर लगेगा रोक?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;गोपालगंज के डीएम जी. कृष्णैया के हत्या के मामले सजा काट रहे आनंद मोहन को बीते दिनों जेल से रिहा कर दिया गया. इस मामले में जी. कृष्णैया की पत्नी ने शीर्ष आदालत में उनकी रिहाई को चुनौती दी थी. इस मामले में अब 8 मई को सुनवाई होने वाली है. इसके साथ ही बताया जा रहा है कि अगर सुप्रीम कोर्ट उनकी रिहाई के फैसले पर रोक लगा देती है तो आनंद मोहन को एक बार फिर से जेल जाना पड़ सकता है.&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>बिहार: आनंद मोहन की रिहाई पर 8 मई को होने वाली है सुनवाई, फिर जाएंगे जेल?</title><link>https://bihar.inkhabar.com/top-news/hearing-on-the-release-of-anand-mohan-is-going-to-be-held-on-may-will-go-to-jail-again-prince-singh/</link><pubDate>May 1, 2023, 6:47 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/05/download-60-300x169.png</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>पटना: पूर्व सांसद आनंद मोहन की रिहाई के बाद से लागातार उनकी रिहाई को लेकर सवाल उठाया जा रहा था. इस मामले को लेकर राज्य की नीतीश सरकार भी सवालों के घेरे में आ रही है. इस मामले में अब जानकारी सामने आ रही है कि आनंद मोहन की रिहाई पर सुप्रीम कोर्ट ...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना&lt;/strong&gt;: पूर्व सांसद आनंद मोहन की रिहाई के बाद से लागातार उनकी रिहाई को लेकर सवाल उठाया जा रहा था. इस मामले को लेकर राज्य की नीतीश सरकार भी सवालों के घेरे में आ रही है. इस मामले में अब जानकारी सामने आ रही है कि आनंद मोहन की रिहाई पर सुप्रीम कोर्ट में 8 मई को सुनवाई होने वाली है. डीएम जी. कृष्णैया की पत्नी ने सुप्रीम कोर्ट में उनके रिहाई को चुनौती दी थी. इस मामले में शीर्ष आदालत 8 मई को सुनवाई करने वाली है.&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;&lt;strong&gt;रिहाई के फैसले पर लगेगा रोक?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;गोपालगंज के डीएम जी. कृष्णैया के हत्या के मामले सजा काट रहे आनंद मोहन को बीते दिनों जेल से रिहा कर दिया गया. इस मामले में जी. कृष्णैया की पत्नी ने शीर्ष आदालत में उनकी रिहाई को चुनौती दी थी. इस मामले में अब 8 मई को सुनवाई होने वाली है. इसके साथ ही बताया जा रहा है कि अगर सुप्रीम कोर्ट उनकी रिहाई के फैसले पर रोक लगा देती है तो आनंद मोहन को एक बार फिर से जेल जाना पड़ सकता है.&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>मनीष कश्यप पर NSA लगाने के सवाल पर तमिलनाडु सरकार ने SC में दिया जवाब, कहा-FIR रद्द नहीं कर सकते</title><link>https://bihar.inkhabar.com/politics/on-the-question-of-imposing-nsa-on-manish-kashyap-the-tamil-nadu-government-replied-in-the-sc-said-that-the-fir-cannot-be-canceled/</link><pubDate>April 28, 2023, 9:50 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/04/Clipboard-20-300x169.jpg</image><category>राजनीति</category><excerpt>पटना: यूट्यूबर मनीष कश्यप पर NSA लगाने और उनकी गिरफ्तारी के मामले की सुनवाई आज यानी कि 28 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में हुई। जहाँ तमिनलाडु की सरकार ने अपना जवाब चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया डीवाई चंद्रचूड़ और पीएस नरसिम्हा के सामने रखा। जिसमें बताया गया क...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना:&lt;/strong&gt; यूट्यूबर मनीष कश्यप पर NSA लगाने और उनकी गिरफ्तारी के मामले की सुनवाई आज यानी कि 28 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में हुई। जहाँ तमिनलाडु की सरकार ने अपना जवाब चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया डीवाई चंद्रचूड़ और पीएस नरसिम्हा के सामने रखा। जिसमें बताया गया की आखिर मनीष कश्यप पर NSA क्यों लगाया गया ?&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;&lt;strong&gt;तमिलनाडु सरकार ने क्या कहा&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;तमिलनाडु सरकार ने मनीष कश्यप के मामले का जवाब देते हुए शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में एक एफिडेविट दाखिल किया। जिसमें NSA लगाने की वजह बताई गयी है। सरकार ने कहा कि मनीष कश्यप के खिलाफ दर्ज़ FIR को रद्द नहीं किया जा सकता है। और न ही उन पर लगे NSA को, क्योंकि मनीष कश्यप ने तमिलनाडु में बिहार के प्रवासियों की पिटाई कर हत्या की बात करते हुए गलत वीडियो बनाए और उसके बैकग्राउंड में फ़र्ज़ी वीडियो का भी इस्तेमाल किया गया।&lt;br&gt;तमिलनाडु सरकार ने कहा कि जब मनीष कश्यप तमिलनाडु आये तो उन्होंने तमिलनाडु में रह रहे बिहारियों से जानबूझकर उकसाने वाले सवाल किए। उनके सवालों में वैमनस्य का दृष्टिकोण साफ तौर पर जाहिर हो रहा था।&lt;br&gt;इसके साथ ही सरकार ने कहा कि मनीष कश्यप ने जानबूझकर वीडियो से छेड़छाड़ की और फेक न्यूज़ फैलाए, क्योंकि सांप्रदायिक हिंसा भड़काना उनका मकसद था।&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;&lt;strong&gt;मनीष कश्यप की सुप्रीम कोर्ट से मांग&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;बता दें कि यूट्यूबर मनीष कश्यप ने पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की है। जिसमे बिहार और तमिलनाडु में अपने ऊपर दर्ज़ हुए FIR को क्लब करने की मांग के साथ जमानत की भी मांग की है। गौरतलब हो कि मनीष कश्यप को पहले बिहार पुलिस ने गिरफ्तार किया था, उसके बाद तमिलनाडु को सौंप दिया था। मनीष कश्यप पर दोनों राज्यों में कुल 6 FIR दर्ज़ है। जिसमें फेक न्यूज़ फैलाने और सांप्रदायिक हिंसा भड़काने का आरोप लगा है।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>सुप्रीम कोर्ट का बिहार सरकार से सवाल, क्या शराबबंदी कानून लागू होने के बाद खपत कम हुई ?</title><link>https://bihar.inkhabar.com/top-news/supreme-courts-question-to-the-bihar-government-did-the-consumption-decrease-after-the-prohibition-law-was-implemented-prince-singh-inkhabar/</link><pubDate>April 13, 2023, 8:28 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/04/lkd-300x169.png</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>पटना: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सुनवाई करते हुए बिहार सरकार से पूछा कि क्या सरकार के पास ऐसा कोई डाटा है, जिससे यह पता लग सके कि शराबबंदी कानून लागू होने के बाद से राज्य में शराब की खपत में कितनी कमी आई है. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि हम राज्य...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना&lt;/strong&gt;: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सुनवाई करते हुए बिहार सरकार से पूछा कि क्या सरकार के पास ऐसा कोई डाटा है, जिससे यह पता लग सके कि शराबबंदी कानून लागू होने के बाद से राज्य में शराब की खपत में कितनी कमी आई है. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि हम राज्य सरकार की मंशा पर कोई सवाल खड़ा नहीं कर रहे हैं, लेकिन हमें जमानत के लिए जो याचिकाएं मिल रही हैं उनमें से कई सारी शराबबंदी कानून से जुड़ी हैं.&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;&lt;strong&gt;सुप्रीम कोर्ट में आ रही हैं याचिकाएं&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;बुधवार को जस्टिस केएम जोसेफ, कृष्ण मुरारी और बीवी नागरत्ना की पीठ ने शराबबंदी से जुड़े एक मामले पर सवाल उठाया. बेंच ने अनिल कुमार को अग्रिम जमानत देने पर सवाल खड़ा किया. साल 2015 में मधुबनी जिले के निवासी अनिल कुमार की कार से 25 लीटर से अधिक विदेशी शराब पकड़ा गया था. इस मामले में राज्य के वकील की दलिलों को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उनपर सवाल खड़ा किया.&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;&lt;strong&gt;शराबबंदी से क्या खपत कम हुई ?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;पीठ ने कहा कि क्या आप जानते हैं कि सुप्रीम कोर्ट में बिहार से जमानत के लिए कितनी याचिकाएं आ रही हैं ? इसका बड़ा हिस्सा शराबबंदी कानून से जुड़ा हुआ है. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि क्या राज्य सरकार के पास ऐसा कोई डाटा है, जिससे यह साबित हो सके कि शराबबंदी कानून लागू होने के बाद से बिहार में शराब की खपत में कमी आई है.&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Youtuber Manish Kashyap: मनीष कश्यप को नहीं मिली बेल, सुनवाई टली, जाने क्यों ?</title><link>https://bihar.inkhabar.com/states/youtuber-manish-kashyap-manish-kashyap-did-not-get-bail-hearing-postponed-dont-know-why/</link><pubDate>April 11, 2023, 8:26 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/04/Clipboard-300x169.jpg</image><category>राज्य</category><excerpt>पटना: तमिलनाडु में बिहारी मजदूरों की कथित तौर पर पिटाई का फ़र्ज़ी वीडियो फैलाने के आरोप में जेल में बंद मनीष कश्यप को आज यानी कि (10 मार्च) को भी सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) से रहत नहीं मिली। सुप्रीम कोर्ट में इस केस की सुनवाई के लिए जस्टिस कृष...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पटना:&lt;/strong&gt; तमिलनाडु में बिहारी मजदूरों की कथित तौर पर पिटाई का फ़र्ज़ी वीडियो फैलाने के आरोप में जेल में बंद मनीष कश्यप को आज यानी कि (10 मार्च) को भी सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) से रहत नहीं मिली। सुप्रीम कोर्ट में इस केस की सुनवाई के लिए जस्टिस कृष्ण मुरारी (Justice Krishna Murari) और जस्टिस संजय करोल (Justice Sanjay Karol) की पीठ को कोर्ट नंबर 13 में सूचीबद्ध किया गया था। और मनीष कश्यप के मामले की सुनवाई के लिए 10 अप्रैल की तारीख तय की गयी थी।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;इस वजह से टली सुनवाई&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;मनीष कश्यप का केस जिसका नंबर 63 है, जिसकी सुनवाई आज सुप्रीम कोर्ट में होने वाली थी। उसकी सुनवाई इस वजह से नहीं हो पायी की भोजनावकाश तक कुल 43 कैसे की ही सुनवाई हो पायी, और इस दौरान मनीष कश्यप के केस का नंबर ही नहीं आया, वही जब लंच ख़त्म हुआ तो मनीष के केस की सुनवाई करने वाले दोनों जज जस्टिस संजय करोल (Justice Sanjay Karol) और जस्टिस कृष्ण मुरारी (Justice Krishna Murari) किसी और मामले की सुनवाई करने के लिए किसी और कोर्ट में चले गए जिसकी वजह से मनीष के केस की सुनवाई नहीं हो पायी। अब आगे इस केस की सुनवाई तभी होगी जब फिर से इसे सूचीबद्ध कर अगली तारीख मिलेगी।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;पहले भी नहीं मिली थी राहत&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;आपको बता दें कि मनीष कश्यप के तरफ से सुप्रीम कोर्ट में पिछले गुरुवार को याचिका दायर की गयी थी। जिसमे याचिकाकर्ता के वकील अंतरिम राहत के लिए अदालत से गुहार लगायी थी और इसके साथ मनीष के वकील ने कोर्ट से मांग की थी की तमिलनाडु प्रकरण में उनके खिलाफ चल रहे सभी मामले को एक जगह क्लब किया जाए और कश्यप पर लगे एनएसए (NSA) को भी हटा दिया जाए। वहीँ इस पर तमिलनाडु राज्य की तरफ से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े और अमित आनंद तिवारी ने इसका विरोध किया था और अधिवक्ता हेगड़े ने इस पर कहा कि मनीष न्यायिक आदेश से ही हिरासत में हैं और यह अवैध हिरासत का मामला बिलकुल भी नहीं है. जिसके बाद पीठ ने कहा था कि जब वह हिरासत में है, तो उन्हें अंतरिम राहत नहीं दिया जा सकता है. जिसके बाद जस्टिस चंद्रचूड़ ने मामले की सुनवाई करते हुए राहत देने से इनकार कर दिया था और सुनवाई की तारीख 10 अप्रैल दे दी थी.&lt;/p&gt;
</content></item></channel></rss>