<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?>
<rss version="2.0"
    xmlns:ag="http://purl.org/rss/1.0/modules/aggregation/"  
    xmlns:annotate="http://purl.org/rss/1.0/modules/annotate/" 
    xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app"
    xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
    xmlns:company="http://purl.org/rss/1.0/modules/company"
    xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
    xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
    xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/"
    xmlns:email="http://purl.org/rss/1.0/modules/email/"
    xmlns:ev="http://purl.org/rss/1.0/modules/event/"
    xmlns:rdf="http://www.w3.org/1999/02/22-rdf-syntax-ns#"
    xmlns:rdfs="http://www.w3.org/2000/01/rdf-schema#"
    xmlns:ref="http://purl.org/rss/1.0/modules/reference/"
    xmlns:taxo="http://purl.org/rss/1.0/modules/taxonomy/"
    xmlns:atom10="http://www.w3.org/2005/Atom">
    <channel>
       <title>Today शुभ मुहूर्त News | Latest शुभ मुहूर्त News | Breaking शुभ मुहूर्त News in English | Latest शुभ मुहूर्त News Headlines - Inkhabar</title>
        <description>आज का शुभ मुहूर्त समाचार:Today शुभ मुहूर्त News ,Latest शुभ मुहूर्त News,Aaj Ka Samachar ,शुभ मुहूर्त समाचार ,Breaking शुभ मुहूर्त News in Hindi, Latest News Headlines - Inkhabar</description>
        <link>https://www.inkhabar.com/tag/%e0%a4%b6%e0%a5%81%e0%a4%ad-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%b9%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a4</link>
        <lastBuildDate>June 3, 2026, 6:10 am</lastBuildDate>
        <copyright>Inkhabar</copyright>
        <generator>Inkhabar</generator>
        <language>hi</language>
        <image>
            <url>https://www.inkhabar.com/wp-content/themes/inkhabar/images/inkhbar-logo.png</url>
            <title>Inkhabar</title>
            <link>https://www.inkhabar.com/</link>
            <description>Feed provided by Inkhabar.</description>
        </image><item><title>Govardhan Puja: आज है गोवर्धन पूजा, जाने शुभ मुहूर्त और पूजा विधि</title><link>https://bihar.inkhabar.com/festival/govardhan-puja-today-is-govardhan-puja-know-the-auspicious-time-and-method-of-worship/</link><pubDate>November 1, 2024, 5:54 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/11/yti.webp</image><category>त्योहार</category><excerpt>पटना। सनातन धर्म में गोवर्धन पूजा को अति महत्व होता है। दीवाली के दूसरे दिन गोवर्धन पूजा को मनाया जाता है। इस दिन पूरे मोहल्ले में हर्षोउल्लास का माहौल होता है। इस बार गोवर्धन पूजा का त्योहार 2 नवंबर को मनाया जाएगा। इस मौके पर गाय के गोबर से भग...</excerpt><content>
&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;&lt;strong&gt;पटना।&lt;/strong&gt; सनातन धर्म में गोवर्धन पूजा को अति महत्व होता है। दीवाली के दूसरे दिन गोवर्धन पूजा को मनाया जाता है। इस दिन पूरे मोहल्ले में हर्षोउल्लास का माहौल होता है। इस बार गोवर्धन पूजा का त्योहार 2 नवंबर को मनाया जाएगा। इस मौके पर गाय के गोबर से भगवान श्रीकृष्ण का चित्रण किया जाता है। जिनकी विधि-विधान से पूजा की जाती है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;दान-पून्य किया जाता है&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;साथ ही भगवान श्री कृष्ण को उनका प्रिय भोग अर्पित किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि गोवर्धन पर श्री कृष्ण की पूजा करने से सुख-समृद्धी की प्राप्ति होती है। साथ ही जीवन में सफलता पाने के लिए दान-पून्य भी किया जाता है। आइए जानते है गोवर्धन पूजा का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;शुभ मुहूर्त&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;पंचांग के मुताबिक कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की गोवर्धन पूजा की शुरूआत 01 नवंबर को शाम 06 बजकर 16 मिनट से होगी। वहीं, इसकी समाप्ति 02 नवंबर रात 08 बजकर 21 मिनट पर होगी। ऐसे में गोवर्धन पूजा का त्योहार 02 नवंबर को मनाया जाएगा। इस दिन पूजा करने का शुभ मुहूर्त इस प्रकार है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;गोधूलि मुहूर्त&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt; प्रातःकाल मुहूर्त &amp;#8211; सुबह 06:34 से 08: 46 मिनट तक, संध्याकाल मुहूर्त &amp;#8211; दोपहर 03: 23 से 05: 35 मिनट तक, गोधूलि मुहूर्त- शाम 06: 05 मिनट से लेकर 06: 30 मिनट तक, विजय मुहूर्त- दोपहर 02: 09 मिनट से 02: 56 मिनट तक। त्रिपुष्कर योग- रात्रि 08:21 मिनट तक, 3 नवंबर को सुबह 05: 58 मिनट तक।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;गोवर्धन पूजा का महत्व&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;गोवर्धन पूजा के दिन ब्रजवासी भगवान श्रीकृष्ण को अन्नकूट का भोग अर्पित करते हैं। ‘अन्नकूट’ का अर्थ है अन्न का पहाड़। इस दिन सभी लोग अपने-अपने घरों से भगवान श्री कृष्ण को अलग-अलग व्यंजनों का भोग लगाते है, जैसे चावल, दाल, सब्जियां और अन्य कई तरह के पकवान। इसके साथ ही नंदलला को 56 भोग भी चढ़ाया जाता है। इस दिन भगवान श्री कृष्ण की पूजा करने से भक्तों पर नंदलला की कृपा बनी रहती है। इस दिन माखन को भोग लगाने से श्रीकृष्ण प्रसन्न होते है।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Dhanteras Puja: कल है धनतेरस, जाने शुभ मुहूर्त और धनतेरस का महत्व</title><link>https://bihar.inkhabar.com/festival/dhanteras-puja-dhanteras-is-tomorrow-know-the-auspicious-time-and-importance-of-dhanteras/</link><pubDate>October 28, 2024, 4:03 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/10/DHAN-300x169.webp</image><category>त्योहार</category><excerpt>पटना। धनतेरस का पर्व कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को मनाया जाता है, जो आमतौर पर दिवाली से दो दिन पूर्व आता है. हिंदू पंचांग के अनुसार, इस वर्ष त्रयोदशी 29 अक्टूबर, मंगलवार को है। आइए जानते हैं कि धनतेरस कब है और इसकी पूजा का शुभ मुहूर्...</excerpt><content>
&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;&lt;strong&gt;पटना।&lt;/strong&gt; धनतेरस का पर्व कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को मनाया जाता है, जो आमतौर पर दिवाली से दो दिन पूर्व आता है. हिंदू पंचांग के अनुसार, इस वर्ष त्रयोदशी 29 अक्टूबर, मंगलवार को है। आइए जानते हैं कि धनतेरस कब है और इसकी पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;शुभ मुहूर्त&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;सूर्योदय – सुबह 6.13 पर&lt;br&gt;चन्द्रोदय- सुबह 4. 27 पर&lt;br&gt;सूर्यास्त – शाम 5. 38 पर&lt;br&gt;चंद्रास्त- शाम 3. 57 पर&lt;br&gt;विजय मुहूर्त – दोपहर 1. 56 मिनट से 2. 40 तक&lt;br&gt;निशिता मुहूर्त – रात्रि 11. 39 से 12. 31 तक&lt;br&gt;गोधूलि मुहूर्त – शाम 5. 38 मिनट से 6.04 तक&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;धनतेरस का महत्व&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;धनतेरस के मौके पर माता लक्ष्मी, कुबेर और धन्वंतरि की विधि-विधान से पूजा की जाती है। इस दिन सभी की पूजा करने से श्रद्धालुओं की सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। धनतेरस के दिन मां लक्ष्मी और कुबेर की पूजा करने से व्यक्ति के धन- संपत्ति में वृद्धि होती है। इस दिन की पूजा से सुख और समृद्धि में वृद्धि होती है। धन्वंतरि की पूजा करने से व्यक्ति की स्वास्थ्य में भी सुधार होता है। परिवार के सदस्य स्वस्थ रहते हैं।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Anant Chaturdashi 2024: अनंत चतुर्दशी आज, ये है व्रत, पूजा और अनंत सूत्र बांधने का शुभ समय</title><link>https://bihar.inkhabar.com/festival/anant-chaturdashi-2024-anant-chaturdashi-today-this-is-the-auspicious-time-for-fasting-worship-and-tying-anant-sutra/</link><pubDate>September 17, 2024, 2:09 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/09/ANA-300x169.webp</image><category>त्योहार</category><excerpt>पटना। हिंदू धर्म में अनंत चतुर्दशी का दिन बेहद महत्वपूर्ण माना गया है. आज देश भर में अनंत देव यानी श्री हरि विष्णु की पूजा की जाएगी। ऐसे में इस तिथि पर बप्पा की मूर्ति का विसर्जन करने का भी नियम है. भगवान गणेश की मूर्ति के विसर्जन के साथ ही गणे...</excerpt><content>
&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;&lt;strong&gt;पटना।&lt;/strong&gt; हिंदू धर्म में अनंत चतुर्दशी का दिन बेहद महत्वपूर्ण माना गया है. आज देश भर में अनंत देव यानी श्री हरि विष्णु की पूजा की जाएगी। ऐसे में इस तिथि पर बप्पा की मूर्ति का विसर्जन करने का भी नियम है. भगवान गणेश की मूर्ति के विसर्जन के साथ ही गणेश उत्सव का समापन हो जाता है.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;आज का दिन भगवान विष्णु को समर्पित&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;इस दिन, भक्त 10 दिनों तक भगवान गणपति की पूजा अर्चना समाप्त करने के बाद उन्हें श्रद्धा भाव से विदाई देने के लिए उनकी मूर्ति का विसर्जन करते हैं और बप्पा से अगले वर्ष फिर से आने की प्रार्थना भी करते हैं। अनंत चतुर्दशी का दिन भगवान गणेश की पूजा और विसर्जन के अलावा भगवान विष्णु को भी समर्पित है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा अर्चना मन से करने वाले को ढेर सारा आशीर्वाद प्राप्त होता है.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;अनंत का भगवान विष्णु से कैसा संबंध?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;महाभारत काल में जब पांडवों पर अनेक प्रकार की मुसीबतें आने लगीं और जुए में सब कुछ हार जाने के बाद उन्हें वन में जाना पड़ा। तब भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें अनंत चतुर्दशी का व्रत करने की सलाह दी। भगवान श्रीकृष्ण की सलाह मानकर पांडवों ने अनंत चतुर्दशी का व्रत रखा।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;व्रत के प्रभाव से महाभारत में मिली जीत&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;इस व्रत के प्रभाव से पांडवों के कष्ट धीरे-धीरे दूर होने लगे। महाभारत युद्ध में पांडवों की बड़ी जीत हुई और उन्हें अपना खोया हुआ राज्य वापस मिल गया। इसलिए इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, व्रत और कथा पढ़ने से बहुत शुभ फल मिलता है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;ये है पूजा तिथि व शुभ मुहूर्त&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;वैदिक पंचांग के अनुसार अनंत चतुर्दशी तिथि सोमवार, 16 सितंबर 2024 को दोपहर 3:10 बजे शुरू होगी और अगले दिन, 17 सितंबर 2024 को सुबह 11:44 बजे समाप्त होगी.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;पूजा का शुभ मुहूर्त&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;पंचांग के अनुसार अनंत चतुर्दशी के दिन पूजा का शुभ समय 17 सितंबर को सुबह 10.43 बजे से 11.15 बजे तक रहेगा.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;गणेश मूर्ति विसर्जन का शुभ समय&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;द्रिक पंचांग के अनुसार अनंत चतुर्दशी के दिन बप्पा की मूर्ति के विसर्जन का शुभ समय सुबह 9.10 बजे से दोपहर 1.47 बजे तक रहेगा.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;परेशानियों को दूर करने के लिए बांधे अनंत सूत्र&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;अनंत चतुर्दशी के दिन शुभ मुहूर्त में पूजा करने के बाद 14 गांठों वाला एक विशेष धागा हाथ में पहना जाता है। मान्यता है कि इस सूत्र को हाथ पर बांधने से भगवान विष्णु की कृपा से जीवन की सभी परेशानियां और बाधाएं दूर हो जाती हैं और हर काम में सफलता मिलती है। मान्यता है कि अनंत चतुर्दशी के दिन विधि-विधान से अनंत सूत्र बांधने और व्रत-पूजन करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Parivartani Ekadashi: आज है परिवर्तिनी एकादशी, जाने शुभ मुहूर्त और पूजा विधि</title><link>https://bihar.inkhabar.com/festival/parivartani-ekadashi-today-is-parivartani-ekadashi-know-the-auspicious-time-and-method-of-worship/</link><pubDate>September 14, 2024, 8:18 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/09/EKA-300x169.webp</image><category>त्योहार</category><excerpt>पटना। इस साल की परिवर्तिनी एकादशी आज यानी 14 सितंबर को मनाई जा रही है। आज के दिन कई महिलाए और लड़किया व्रत रखती है। आज के दिन भगवान विष्णु के 5वें अवतार वामन देव की पूजा की जाती है। जो लोग वामन परिवर्तनी का व्रत रखते है। उनको हजारों अश्वमेध यज्...</excerpt><content>
&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;&lt;strong&gt;पटना।&lt;/strong&gt; इस साल की परिवर्तिनी एकादशी आज यानी 14 सितंबर को मनाई जा रही है। आज के दिन कई महिलाए और लड़किया व्रत रखती है। आज के दिन भगवान विष्णु के 5वें अवतार वामन देव की पूजा की जाती है। जो लोग वामन परिवर्तनी का व्रत रखते है। उनको हजारों अश्वमेध यज्ञ कराने के बराबर पुण्य प्राप्त होता है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;पूजा का शुभ मुहूर्त&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;परिवर्तनी एकादशी का व्रत करने से मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस साल परिवर्तिनी एकादशी के दिन शुभ योग भी बन रहे हैं। विष्णु पूजा के दौरान रवि योग और शोभन योग बनेगा। 14 सितंबर को परिवर्तिनी एकादशी का मुहूर्त सुबह 6 बजकर 6 मिनट से आरंभ होगा। व्रत के दिन राहुकाल सुबह 09:11 बजे से 10:44 बजे तक है। जिसमें भगवान की पूजा करना वर्जित है। रवि और शोभन योग में आपको भगवान वामन की पूजा कर लेनी चाहिए। इस दिन पाताल की भद्रा सुबह 09:41 बजे से रात 08:41 बजे तक रहेगी।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;पूजा करने की विधि&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लेना चाहिए। नहाने के बाद सूर्य देव को जल अर्पित करें। फिर हाथ में जल और फूल लेकर परिवर्तिनी एकादशी के अवतार वामन देवता की पूजा करें। उसके बाद शुभ मुहूर्त में भगवान वामन या फिर श्रीहरि विष्णु की मूर्ति या को स्थापित करे। मूर्ति को गंगाजल और पंचामृत चढ़ाए। फिर चंदन, फूल, माला, पीले वस्त्र आदि से उनका श्रृंगार करें। उसके बाद पीले अक्षत्, फूल, तुलसी के पत्ते, गुड़, हल्दी, रोली, फल, नैवेद्य आदि अर्पित करें। वामन देवता की पूजा करें।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Chaurchan Puja 2024: चौरचन पूजा आज, ये है पर्व के शुभ मुहूर्त और महत्व</title><link>https://bihar.inkhabar.com/festival/chaurchan-puja-2024-chaurchan-puja-today-this-is-the-auspicious-time-and-significance-of-the-festival/</link><pubDate>September 6, 2024, 2:54 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/09/CHORCHAN-300x169.webp</image><category>त्योहार</category><excerpt>पटना। हर वर्ष गणेश चतुर्थी से एक दिन पहले चौरचन का त्योहार मनाया जाता है. इस पर्व को लोग भगवान चौठ यानी चंद्रमा का आशीर्वाद पाने के लिए करते हैं. माना गया है कि इस तिथि पर 12 घंटे निर्जला व्रत रखने से भक्तों की सभी मनोकना पूर्ण होती है। इन राज्...</excerpt><content>
&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;&lt;strong&gt;पटना।&lt;/strong&gt; हर वर्ष गणेश चतुर्थी से एक दिन पहले चौरचन का त्योहार मनाया जाता है. इस पर्व को लोग भगवान चौठ यानी चंद्रमा का आशीर्वाद पाने के लिए करते हैं. माना गया है कि इस तिथि पर 12 घंटे निर्जला व्रत रखने से भक्तों की सभी मनोकना पूर्ण होती है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;इन राज्यों में मनाया जाता यह पर्व&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को चौरचन का त्योहार मनाया जाता है. यह पर्व विशेष तौर पर बिहार, झारखंड, मिथिला और यूपी में मनाया जाता है. इस पर्व को हम चौरचन या चौथ चंद्र के नाम से भी जानते है. इस दिन महिलाएं भगवान गणेश और चंद्र देव की पूजा &amp;#8211; आराधना करती हैं. माना जाता है कि इस व्रत को महिलाएं अपने पति के साथ-साथ अपने संतानों की लंबी उम्र की कामना के लिए रखती हैं.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;ये है पूजा के शुभ मुहूर्त&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;हिंदू पंचांग के मुताबिक, चौरचन पूजा का शुभ मुहूर्त चतुर्थी तिथि को सूर्य अस्त होने के बाद होता है. इस पूजा की तिथि की शुरुआत आज 06 सितम्बर की दोपहर 03:01 बजे पर होगी और इसका समापन 07 सितम्बर की शाम 05:37 बजे पर होगी.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;जानें पूजा करने की विधि&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर सुबह जल्दी उठें और स्नान आदि करके पूजा का संकल्प लें। सुबह से लेकर शाम तक उपवास रखें. शाम के समय अपने घर के आंगन को गाय के गोबर से लिप लें. इसके बाद आप कच्चे चावल को पीसकर आंगन में चांद के आकार की रंगोली बनाएं फिर इस तरह से आंगन को अच्छे से सजाएं.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;व्रत पर इन चीजों का लगाएं भोग&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;बता दें कि पूजा में तरह-तरह के मीठे पकवान बनाए जाते है। जैसे खीर, गुझिया, मिठाई और फल भगवान को भोग के रूप में चढ़ाएं. पश्चिम दिशा की तरफ मुख करके रोहिणी नक्षत्र समेत चतुर्थी में चांद की पूजा करें. इस पूजा में दही का होना विशेष महत्व है. इसलिए इस व्रत में मिट्टी के बर्तन में दही जमाना शुभ माना जाता है. फिर इस दही को पूजा के समय उपयोग किया जाता है. इसके बाद बांस के चंगेरा या डाली में सभी प्रसाद को रखकर भगवान चंद्रमा का दर्शन करते है और सभी प्रसाद का भोग भगवान चंद्रदेव को लगाया जाता है.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;चौरचन पर्व का महत्व&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;हिंदू धर्म के अनुसार, भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि के दौरान ही भगवान चंद्रमा पर आरोप लगा था. इसलिए इस तिथि पर जो भी भक्तजन भगवान गणपति के साथ-साथ चंद्रमा की पूजा करते हैं. उन्हें चंद्र दोष से छुटकारा मिलता हैं. इस पर्व को महिलाएं अपने संतानों की लंबी आयु के साथ उनकी सुख समृद्धि और उज्जवल भविष्य के लिए करती हैं. इस दिन उपवास रखने से जीवन में सुख शान्ति बनी रहती है।&lt;/p&gt;
</content></item></channel></rss>