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        <lastBuildDate>April 17, 2026, 6:30 pm</lastBuildDate>
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                    <title><![CDATA[शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी को अर्पित करें ये चीजें, कभी नहीं होगी आर्थिक तंगी]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/religious/offer-these-things-to-goddess-lakshmi-on-fridays-you-will-never-face-financial-crisis/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। शुक्रवार का दिन माता लक्ष्मी को समर्पित होता है। इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। ज्योतिषशास्त्र में शुक्रवार के कुछ खास उपाय बताए गए हैं, जिन्हें अपनाने से घर की सारी परेशानी दूर हो जाती है। साथ ही [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/05/Clipboard-33.jpg"/><strong>पटना।</strong> शुक्रवार का दिन माता लक्ष्मी को समर्पित होता है। इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। ज्योतिषशास्त्र में शुक्रवार के कुछ खास उपाय बताए गए हैं, जिन्हें अपनाने से घर की सारी परेशानी दूर हो जाती है। साथ ही घर में मां लक्ष्मी का वास होता है। ऐसे में जानते हैं किन उपायों को अपनाना फलदायी होता है। सच्चे मन से मां लक्ष्मी को ये चीजें भेंट करने से जीवन के समस्त दुखों से छुटकारा मिलता है।
<h2><strong>लाल चुड़ियां</strong></h2>
शनिवार के दिन मां लक्ष्मी को लाल चुड़ियां भेंट करनी चाहिए। ऐसा करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। इस उपाय को सुहागिन महिलाओं द्वारा करना चाहिए। अगर सुहागिन महिलाएं लाल चुड़ियों का दान करती हैं तो उन्हें मां लक्ष्मी का आशीर्वाद मिलता है। ऐसा करने से माता लक्ष्मी का वास रहता है। साथ ही मां लक्ष्मी हमेशा साथ देती हैं। शुक्रवार को ये उपाय करने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
<h3><strong>पान का पत्ता</strong></h3>
शुक्रवार को माता लक्ष्मी की पूजा के दौरान एक पान पर लौंग और शहद लगाकर अर्पित करना चाहिए। ऐसा करने से जीवन में आने वाली सभी तरह की परेशानी दूर होती है। पान का पत्ता हर पूजा में शुभ माना जाता है। साथ ही यह मां लक्ष्मी को काफी प्रिय होता है। पान का पत्ता दान करने से आपकी सभी इच्छाओं की पूर्ति होती है। साथ ही घर में सुख-समृद्धि आती है।
<h3><strong>लौंग और शहद</strong></h3>
शुक्रवार को माता लक्ष्मी को लौंग और शहद भेंट करनी चाहिए। ऐसा करने से जीवन में तरक्की आती है। साथ ही आपको करियर में सफलता मिलती है। अगर संभव हो, तो लौंग और शहद के साथ एक कपूर डालकर देवी लक्ष्मी को चढ़ा सकते हैं। ऐसा करने से आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो सकती हैं। साथ ही घर में खुशहाली आती है।
<h3><strong>खीर का भोग लगाएं</strong></h3>
मां लक्ष्मी की पूजा के दौरान खीर का भोग लगाना चाहिए। खीर मां लक्ष्मी को काफी प्रिय होती है। ऐसा करने से जातक के जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। साथ ही जीवन में आने वाली बाधाओं से भी मुक्ति मिलती है। ऐसा माना जाता है कि हर शुक्रवार को माता लक्ष्मी को खीर का भोग लगाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और नकारात्मकता दूर होती है।
<h3><strong>कनेर के फूल</strong></h3>
मां लक्ष्मी को कनेर के फूल बहुत प्रिय होते हैं। ऐसे में हर शुक्रवार को मां लक्ष्मी को कनेर के फूल अर्पित करने चाहिए। ऐसा करने से बिगड़ते काम बनने लगते हैं। साथ ही जरूरी कार्यों में सफलता हासिल होती है। शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी को कनेर के फूल चढ़ाने से घर की आर्थिक स्थिति ठीक रहती है। आपको जीवन में तंगी का सामना नहीं करना पड़ता।]]></content:encoded>
                    <pubDate>May 30, 2025, 7:05 am</pubDate>
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                    <title><![CDATA[आज है वट सावित्री का व्रत, बन रहे शुभ संयोग, इस तरह करें पूजा]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/religious/today-is-vat-savitri-fast-auspicious-coincidences-are-being-made-worship-in-this-way/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। आज महिलाएं वट सावित्री का व्रत कर रही हैं। यह व्रत हिंदू धर्म में सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास माना जाता है। यह व्रत हर साल ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस व्रत को करने से पति की आयु लंबी होती है। साथ ही [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/05/Clipboard-33.jpg"/><strong>पटना।</strong> आज महिलाएं वट सावित्री का व्रत कर रही हैं। यह व्रत हिंदू धर्म में सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास माना जाता है। यह व्रत हर साल ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस व्रत को करने से पति की आयु लंबी होती है। साथ ही दांपत्य जीवन में खुशियां आती हैं। इस दिन महिलाएं पूरे दिन व्रत रखती हैं और वट वृक्ष की विधिपूर्वक पूजा करती हैं।
<h2><strong>व्रत पर बन रहे शुभ संयोग</strong></h2>
पौराणिक कथा के मुताबिक माता सावित्री ने वट वृक्ष के नीचे ही अपने मृत पति सत्यवान की जान बचाई थी। साथ ही उनके प्राण यमराज से वापस लाएथे। तभी से वट वृक्ष की पूजा का खास महत्व होता है। शास्त्रों में वट वृक्ष को पूजनीय माना जाता है। इस वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश- तीनों देवों का वास होता है। हिंद पचांग के मुताबिक इस साल वट सावित्री व्रत 26 मई 2025, सोमवार यानी आज रखा जा रहा है। अमावस्या तिथि 26 मई को दोपहर 12:11 बजे शुरू होगी, जिसकी समाप्ति अगले दिन 27 मई को सुबह 8:31 बजे होगी। व्रत वाले दिन भरणी नक्षत्र, अतिगण्ड योग और शोभन योग का शुभ संयोग बन रहा है।
<h3><strong>वट सावित्री की पूजा विधि</strong></h3>
इस बार वट सावित्री व्रत की खास बात यह है कि व्रत सोमवार को पड़ा है, जिससे यह सोमवती अमावस्या भी बन गया। यह संयोग अत्यंत दुर्लभ और सौभाग्यशाली माने जाते हैं। साथ ही, चंद्रमा इस दिन अपनी उच्च राशि वृषभ में प्रवेश करेगा जो शुभ संकेत देता है। वट सावित्री व्रत के लिए सबसे पहले सुबह स्नान कर लें। स्नान करने के बाद नए कपड़े धारण करें। इसके बाद वट सावित्री व्रत की पूजा में सावित्री-सत्यवान की प्रतिमा स्थापित करनी होती है। भगवान को धूप, रोली, चंदन, बांस की टोकरी, अक्षत और जल भरा कलश अर्पित करना होता है।
<h3><strong>वट वृक्ष को जल अर्पित करें</strong></h3>
इसके साथ ही वट वृक्ष को जल अर्पित करना होता है। साथ ही 7 बार कलावे से परिक्रमा करनी होती है। हर बार परिक्रमा करते समय अपने पति की लंबी आयु की प्रार्थना करनी होती है। इसके बाद वट वृक्ष और सावित्री-सत्यवान का आशीर्वाद लें। अपनी भूल-चूक के लिए माफी मांगें। आरती उतारें और भोग लगाएं।]]></content:encoded>
                    <pubDate>May 30, 2025, 7:05 am</pubDate>
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                  </item><item>
                    <title><![CDATA[शनि प्रदोष व्रत के दिन जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/religious/know-the-auspicious-time-and-method-of-worship-on-the-day-of-shani-pradosh-vrat/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। इस साल का दूसरा प्रदोष व्रत शनि के दिन होगा, जिस वजह से इसे शनि प्रदोष व्रत के नाम से जाना जाएगा। इस दिन भगवान शिव और शनि देव की विधिपूर्वक पूजा की जाती है। पंचांग के मुताबिक शनि प्रदोष व्रत के दिन आयुष्मान और सौभाग्य का संयोग बन रहा है, जिसे अत्यंत शुभ [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/05/Clipboard-33.jpg"/><strong>पटना।</strong> इस साल का दूसरा प्रदोष व्रत शनि के दिन होगा, जिस वजह से इसे शनि प्रदोष व्रत के नाम से जाना जाएगा। इस दिन भगवान शिव और शनि देव की विधिपूर्वक पूजा की जाती है। पंचांग के मुताबिक शनि प्रदोष व्रत के दिन आयुष्मान और सौभाग्य का संयोग बन रहा है, जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं केअनुसार, इस दिन कुछ खास उपाय करने से शनि देव की साढ़ेसाती और ढैय्या के नकारात्मक प्रभावों से बचा जा सकता है।
<h2><strong>शनि प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त</strong></h2>
वैदिक पंचांग के मुताबिक ज्येष्ठ माह के त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 24 मई को शाम 7:20 बजे शुरू होगी। वहीं इसकी समाप्ति 25 मई को सुबह 3:51 बजे होगी। इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से सभी तरह की परेशानी दूर होती है। इसलिए, ज्येष्ठ माह का पहला प्रदोष व्रत 24 मई को मनाया जाएगा। इस साल प्रदोष व्रत शनिवार को होने के कारण इसे शनि प्रदोष व्रत भी कहा जाता है। इस बार प्रदोष व्रत पर एक खास संयोग बन रहा है। इस दिन शनिवार होने के कारण शनि प्रदोष व्रत भी मनाया जाएगा। साथ ही, इस दिन शिववास भी होगी। जिस दिन शिववास होता है, उस दिन भगवान शिव स्वयं धरती पर आते हैं। धरती पर आकर नदी के किनारे बैठकर विचरण करते हैं। यही कारण है कि जेठ माह के पहले प्रदोष का महत्व और भी बढ़ जाता है।
<h3><strong>शनि प्रदोष व्रत का महत्व</strong></h3>
त्रयोदशी का व्रत शनि प्रदोष व्रत कहलाता है। शनि के दिन प्रदोष व्रत पड़ने के कारण इसे शनि प्रदोष व्रत कहा जाता है। सूर्यास्त के बाद और रात से पहले का समय प्रदोष काल का समय होता है। इस व्रत में भगवान भोलेनाथ और शनि देव की पूजा की जाती है। व्रती महिलाएं त्रयोदशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए। स्नान करने के बाद बेलपत्र, गंगाजल, अक्षत, धूप, दीप आदि भगवान शिव को अर्पित किया जाता है। इस व्रत में महिलाएं निर्जला व्रत रखतीहैं। सूरज डूबने के बाद शाम के समय में पुनः भगवान शिव और शनि देव की पूजा करनी चाहिए। मान्यता है कि इस व्रत करने से महिलाओं को संतान की प्राप्ति होती है।]]></content:encoded>
                    <pubDate>May 30, 2025, 7:05 am</pubDate>
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                    <title><![CDATA[शुक्रवार को करें ये खास उपाय, मां लक्ष्मी की होगी विशेष कृपा]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/religious/do-this-special-remedy-on-friday-goddess-lakshmi-will-bless-you/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। शुक्रवार का दिन मां लक्ष्मी को समर्पित होता है। इस दिन मां लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा की जाती है। मां लक्ष्मी को धन, समृद्धि और ऐश्वर्य की देवी कहा जाता है। शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी की पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। शास्त्रों के मुताबिक शुक्रवार को कुछ खास [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/05/Clipboard-33.jpg"/><strong>पटना।</strong> शुक्रवार का दिन मां लक्ष्मी को समर्पित होता है। इस दिन मां लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा की जाती है। मां लक्ष्मी को धन, समृद्धि और ऐश्वर्य की देवी कहा जाता है। शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी की पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। शास्त्रों के मुताबिक शुक्रवार को कुछ खास उपाय करने से व्यक्ति की आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है। आइए जानते हैं किन उपायों को करने से जीवन में खुशियां आती हैं।
<h2><strong>घी का दीपक जलाएं</strong></h2>
शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी की विधिपूर्वक पूजा करने से व्यापार में लाभ मिलता है। आज के दिन मां लक्ष्मी के सामने घी का दीपक जलाने से कारोबार में सफलता मिलती है। घी का दीपक प्रज्वलित करने से रुके हुए सारे काम पूरे हो जाते हैं।
<h3><strong>मां लक्ष्मी की प्रतिमा खरीदें</strong></h3>
अगर आप चाहते हैं कि आपके जीवन में खुशियां बनी रहें तो शुक्रवार के दिन बाजार से मां लक्ष्मी की कमल के फूल वाली प्रतिमा को खरीद लें। ध्यान रहे ऐसी मूर्ति का चुनाव करें जिसमें मां लक्ष्मी कमल पर विराजमान हों। प्रतिमा को खरीदकर अपने मंदिर में स्थापित करें। इसके बाद देवी मां की विधि-विधान से पूजा करें।
<h3><strong>प्रतिमा के सामने सिक्का रखें</strong></h3>
सौभाग्य प्राप्ति के लिए आप शुक्रवार को एक रुपये का सिक्का घर के मंदिर में मां लक्ष्मी के सामने रखते हैं तो इसे सौभाग्य बना रहता है। मां लक्ष्मी को धन की देवी माना जाता है। ऐसे में उनके सामने धन रखने से सौभाग्य बना रहता है। मां लक्ष्मी के सामने सिक्का रखने के बाद दोनों की पूजा करें। इस सिक्के को अगले दिन लाल कपड़े में बांधकर अपने पास रखें।
<h3><strong>मां लक्ष्मी को शंख चढ़ाएं</strong></h3>
बेहतर स्वास्थ्य के लिए शुक्रवार के दिन की गई पूजा लाभकारी होती है। इस दिन मां लक्ष्मी को शंख चढ़ाएं। साथ ही देवी को घी और मखाने का भोग अर्पित करें। साथ ही हाथ जोड़कर अच्छे स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना करें।
<h3><strong>कलश में चावल भरकर दान करें</strong></h3>
धन की वृद्धि के लिए एक छोटे मिट्टी के कलश में चावल भरें। चावल भरने के बाद कलश के ऊपर एक सिक्का और हल्दी की गांठ रखें। फिर इसे ढक्कन से बंद करके मां लक्ष्मी का आशीर्वाद लें। आशीर्वाद लेने के बाद इसे किसी पवित्र स्थान पर दान करें।]]></content:encoded>
                    <pubDate>May 30, 2025, 7:05 am</pubDate>
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                    <title><![CDATA[आज है अक्षय तृतीया, जानें किस मुहूर्त में खरीदें सोना]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/religious/today-is-akshaya-tritiya-know-when-to-buy-gold/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। आज पूरे भारत में अक्षय तृतीया का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। हिंदू मान्यता के मुताबिक हर साल वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया मनाई जाती है। यह दिन बेहद खास और शुभ मुहूर्त वाला माना जाता है। इस दिन किए गए हर शुभ कार्य अच्छे से [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/05/Clipboard-33.jpg"/><strong>पटना।</strong> आज पूरे भारत में अक्षय तृतीया का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। हिंदू मान्यता के मुताबिक हर साल वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया मनाई जाती है। यह दिन बेहद खास और शुभ मुहूर्त वाला माना जाता है। इस दिन किए गए हर शुभ कार्य अच्छे से हो जाते हैं।
<h2><strong>अक्षय तृतीया पर करें शुभ काम</strong></h2>
अक्षय तृतीया के दिन मुख्यरूप से देवी लक्ष्मी और कुबेर देवता की पूजा की जाती है। अक्षय तृतीया के दिन विवाह, गृह प्रवेश और कई चीजों की खरीदना शुभ माना जाता है। वहीं, इस दिन सोना-चांदी खरीदने से कई फायदे होते हैं। हिंदू पंचांग के मुताबिक वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की अक्षय तृतीया 29 अप्रैल यानी कल शाम 5 बजकर 31 मिनट से आरंभ हो चुकी है। वहीं इस तिथि की समाप्ति 30 अप्रैल यानी आज दोपहर 2 बजकर 12 मिनट पर होगी।
<h3><strong>सोना खरीदने का शुभ मुहूर्त</strong></h3>
उदयातिथि के मुताबिक अक्षय तृतीया 30 अप्रैल यानी आज पूरे देशभर में मनाई जा रही है। अक्षय तृतीया पर पूजा करने का शुभ मुहूर्त सुबह 5 बजकर 41 मिनट से शुरू होगा, जो दोपहर 12 बजकर 18 मिनट पर खत्म होगा। 30 अप्रैल यानी आज सुबह 5 बजकर 41 मिनट से लेकर दोपहर 2 बजकर 12 मिनट तक सोना खरीदना काफी शुभ होगा। यदि आप सोना खरीदने में असमर्थ हैं तो मिट्टी और पीतल के बर्तन या पीली सरसों भी खरीद सकते हैं। ये भी शुभ माने जाते हैं।
<h3>अक्षय तृतीया का पूजा विधि</h3>
अक्षय तृतीया के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लेना चाहिए। आज के दिन पीले वस्त्र पहनना चाहिए, पीला वस्त्र शुभ होता है। मंदिर की साफ-सफाई करें और भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति स्थापित करें। विष्णु-लक्ष्मी जी की मूर्ति को गंगाजल से स्नान कराएं। इसके बाद तुलसी, पीले फूलों की माला अर्पित करें। इसके बाद धूप और घी की बाती का दीपक जलाकर प्रतिमा के सामने रखें। इसके बाद विष्णु चालीसा का पाठ करें। फिर आखिर में विष्णु-लक्ष्मी जी की आरती उतारें।]]></content:encoded>
                    <pubDate>May 30, 2025, 7:05 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/religious/today-is-akshaya-tritiya-know-when-to-buy-gold/</guid>
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                    <title><![CDATA[मोहिनी एकादशी के दिन भूलकर भी न करें ये काम, वरना हो सकते हैं परेशान]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/religious/do-not-do-this-work-even-by-mistake-on-the-day-of-mohini-ekadashi-otherwise-you-may-get-into-trouble/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। हर साल वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोहिनी एकादशी होती है। इस दिन मां तुलसी की विधिपूर्वक पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता के मुताबिक मोहिनी एकादशी के दिन तुलसी के नियमों का पालन करने से मां लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है। धन की तिजोरी हमेशा भरी रहती है। साथ [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/05/Clipboard-33.jpg"/><strong>पटना।</strong> हर साल वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोहिनी एकादशी होती है। इस दिन मां तुलसी की विधिपूर्वक पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता के मुताबिक मोहिनी एकादशी के दिन तुलसी के नियमों का पालन करने से मां लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है। धन की तिजोरी हमेशा भरी रहती है। साथ ही जीवन के सभी दुखों का नाश होता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि मोहिनी एकादशी से जुड़े नियम के बारे में।
<h2><strong>तुलसी में जल न दें</strong></h2>
मोहिनी एकादशी के दिन मां तुलसी और लक्ष्मी की पूजा की जाती है। इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं। ऐसे में एकादशी के दिन तुलसी को जल देने से तुलसी मां खंडित हो जाती है। साथ ही तुलसी में जल चढ़ाने से आपका व्रत भी टूट सकता है। इसी वजह से एकादशी के दिन तुलसी में जल नहीं देना चाहिए।
<h3><strong>तुलसी के पत्ते न तोड़े</strong></h3>
मोहिनी एकादशी के दिन मां तुलसी की पूजा की जाती है। ऐसे में कहा जाता है कि इस दिन तुलसी में न तो जल देना चाहिए, न ही तुलसी के पत्ते तोड़ने चाहिए। ऐसा करने से मां लक्ष्मी क्रोधित हो जाती हैं। एकादशी के दिन मां तुलसी के पत्ते तोड़ना अशुभ होता है।
<h3><strong>जूते-चप्पल न उतारें</strong></h3>
एकदशी के दिन घर में मां लक्ष्मी का वास होता है। मां लक्ष्मी उसी घर में वास करती हैं, जिस घर में साफ-सफाई होती है। ऐसे में मंदिर और तुलसी के पास साफ-सफाई का खास ध्यान रखना चाहिए। मोहिनी एकादशी के दिन ध्यान रखें कि आप तुलसी के आस-पास जूते-चप्पल न उतारें। ऐसा करने से मां तुलसी खंडित हो जाती हैं।
<h3><strong>तुलसी के पास झाड़ू न रखें</strong></h3>
ध्यान रखें कि इस दिन मां तुलसी के पास गलती से भी झाड़ू नहीं रखनी चाहिए। ऐसा कहा जाता है कि इस तरह की गलती करने से साधक को मां लक्ष्मी की नाराजगी झेलनी पड़ती है। मां लक्ष्मी के वास के पास या मां तुलसी की जगह को साफ रखना चाहिए। वहां कोई भी अशुद्ध चीज नहीं रखनी चाहिए।
<h3><strong>मांस का सेवन न करें</strong></h3>
मोहिनी एकादशी के दिन घर में मांस-मछली नहीं बनानी चाहिए और न ही इसके सेवन करना चाहिए। ऐसा करने से मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु का प्रकोप झेलना पड़ता है। मोहिनी एकादशी के दिन इन सब चीजों से परहेज करना ही अच्छा होता है।]]></content:encoded>
                    <pubDate>May 30, 2025, 7:05 am</pubDate>
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                    <title><![CDATA[आज है मासिक शिवरात्रि, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि]]></title>
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                    <description><![CDATA[पटना। हर महीने में एक बार मासिक शिवरात्रि आती है। इस बार मासिक शिवरात्रि 26 अप्रैल यानी आज है। यह दिन भगवान शिव को समर्पित होता है। इस दिन भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा की जाती है। इस खास दिन को भगवान शिव के भक्त अत्यंत श्रद्धा के साथ मनाते हैं। इस दिन महिलाएं [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/05/Clipboard-33.jpg"/><strong>पटना।</strong> हर महीने में एक बार मासिक शिवरात्रि आती है। इस बार मासिक शिवरात्रि 26 अप्रैल यानी आज है। यह दिन भगवान शिव को समर्पित होता है। इस दिन भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा की जाती है। इस खास दिन को भगवान शिव के भक्त अत्यंत श्रद्धा के साथ मनाते हैं। इस दिन महिलाएं व्रत भी रखती हैं। ऐसा माना जाता है कि इस दिन सच्चे मन से जो भी मांगे वो पूरा हो जाता है। इस दिन की गई भगवान शिव की पूजा से जीवन में सुख और शांति का आगमन होता है। आइए जानते हैं इस दिन का शुभ समय, पूजा विधि के बारे में।
<h2><strong>मासिक शिवरात्रि का शुभ समय</strong></h2>
सनातन धर्म में मासिक शिवरात्रि के दिन भगवान शिव की पूजा का खास महत्व होता है। मासिक शिवरात्रि के दिन की गई पूजा लाभकारी मानी जाती है। इस बार मासिक शिवरात्रि का व्रत 26 अप्रैल यानी आज रखा जाएगा। मासिक शिवरात्रि के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 53 मिनट से आरंभ होगा, जो रात को 9 बजकर 3 मिनट पर समाप्त होगा। पूजा के लिए शुभ समय 2 घंटे 10 मिनट का माना गया है। इस अवधि में की गई पूजा से खास फल की प्राप्ति होती है। इस समय की गई पूजा से भगवान शिव काफी प्रसन्न होंगे।
<h3><strong>मासिक शिवरात्रि की पूजा विधि</strong></h3>
मासिक शिवरात्रि पर भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करने से सभी इच्छाओं की पूर्ति होती है। जो महिलाएं मासिक शिवरात्रि का व्रत रखती हैं, उनके जीवन में हमेशा खुशियां बनी रहती हैं। मासिक शिवरात्रि के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान कर लेना चाहिए। स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लेना चाहिए। इसके बाद मंदिर की साफ-सफाई करके भगवान शिव की प्रतिमा या शिवलिंग को स्थापित करना चाहिए। इसके बाद शिवलिंग पर गंगाजल चढ़ाना चाहिए। फिर दही, शहद, दूध और बेलपत्र अर्पित करना चाहिए।
<h3><strong>भगवान शिव का मंत्र</strong></h3>
फिर ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करना चाहिए। इस मंत्र का जाप कम से कम 108 बार करना चाहिए। इसके बाद भगवान शिव को सच्चे दिल से याद करें। सूर्यास्त होने के बाद दोबारा शिव जी की पूजा करें। साथ ही भगवान शिव की कथा का पाठ करें।]]></content:encoded>
                    <pubDate>May 30, 2025, 7:05 am</pubDate>
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                    <title><![CDATA[चैत्र नवरात्र में कन्या पूजन के दिन करें हवन, जानें इसका महत्व]]></title>
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                    <description><![CDATA[पटना। नवरात्र में हवन अष्टमी या नवमी किसी भी तारीख में कर सकते हैं, जो साधक अष्टमी के दिन नवरात्र व्रत का पारण करते हैं, वे अष्टमी के दिन हवन करेंगे। वहीं जो लोग नवमी के दिन व्रत का पारण करते हैं, वे नवमी के दिन हवन-पूजन करें। ऐसा माना जाता है कि हवन व [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/05/Clipboard-33.jpg"/><strong>पटना।</strong> नवरात्र में हवन अष्टमी या नवमी किसी भी तारीख में कर सकते हैं, जो साधक अष्टमी के दिन नवरात्र व्रत का पारण करते हैं, वे अष्टमी के दिन हवन करेंगे। वहीं जो लोग नवमी के दिन व्रत का पारण करते हैं, वे नवमी के दिन हवन-पूजन करें। ऐसा माना जाता है कि हवन व कन्या पूजन के बाद ही नवरात्र व्रत के फल की प्राप्ति होती है। ऐसे में जो लोग इस व्रत का पालन कर रहे हैं, वे हवन जरूर करें, तो चलिए जानते हैं हवन से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातों के बारे में।
<h2><strong>नवरात्र में हवन करना जरूरी</strong></h2>
हिंदू पंचांग के मुताबिक चैत्र नवरात्र के प्रमुख पूजा-पाठ में हवन भी शामिल है। अष्टमी और नवमी तिथि के दिन हवन करना शुभ माना जाता है। इन तिथियों में ब्रह्म मुहूर्त में हवन करना सबसे ज्यादा लाभकारी होता है। वहीं, नवमी तिथि पर हवन के लिए कई दुर्लभ योग बन रहे हैं। दरअसल, इस दिन रवि योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि पुष्य योग का शुभ संयोग बन रहा है। ऐसे में पूरे दिन हवन किया जा सकता है। अष्टमी और नवमी पर पूरे दिन हवन का शुभ मुहूर्त है।
<h2><strong>हवन का शुभ मुहूर्त</strong></h2>
इस साल चैत्र नवरात्र की अष्टमी 5 अप्रैल को और नवमी 6 अप्रैल को मनाई जाएगी। अष्टमी के दिन हवन का मुहूर्त सुबह 11:59 मिनट से दोपहर 12: 49 मिनट तक रहेगा। वहीं, नवमी का हवन मुहूर्त सुबह 11: 58 मिनट से दोपहर 12: 49 मिनट तक रहेगा। हवन करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। हवन से वातावरण शुद्ध होता है। हवन से मां दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है।
<h2><strong>हवन का पूजा विधि</strong></h2>
हवन के लिए एक हवन कुंड तैयार करना होगा। हवन कुंड तैयार होने के बाद हवन शुरू किया जाएगा। हवन में आग जलाई जाएगी। आग में घी, तिल, गुग्गल, जौ, लोबान, और अन्य हवन सामग्री की आहूति दी जाएगी। हवन के बीच मां दुर्गा का ध्यान करते हुए उनके मंत्रों का जाप करें। हवन के बाद मां दुर्गा की आरती करें। आरती उतारने के बाद मां को भोग लगाएं और प्रसाद का वितरण करें।]]></content:encoded>
                    <pubDate>May 30, 2025, 7:05 am</pubDate>
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                    <title><![CDATA[उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ चैती छठ की समाप्ति, इस तरह किया जाता है कठोर व्रत]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/religious/chaiti-chhath-ends-with-offering-arghya-to-the-rising-sun-this-is-how-the-strict-fast-is-observed/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। आज सूर्यउदय को अर्घ्य देने के साथ ही चैती छठ महापर्व की समाप्ति हो गई। चार दिवसीय लोक आस्था के इस पर्व के आखिरी दिन व्रती महिलाओं ने उदीयमान सूर्य को अर्घ्य दिया। शुक्रवार को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ व्रती महिलाओं का यह कठोर व्रत खत्म हो गया। अब इस साल [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/05/Clipboard-33.jpg"/><strong>पटना।</strong> आज सूर्यउदय को अर्घ्य देने के साथ ही चैती छठ महापर्व की समाप्ति हो गई। चार दिवसीय लोक आस्था के इस पर्व के आखिरी दिन व्रती महिलाओं ने उदीयमान सूर्य को अर्घ्य दिया। शुक्रवार को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ व्रती महिलाओं का यह कठोर व्रत खत्म हो गया। अब इस साल कार्तिक माह में दोबारा छठ महापर्व का आयोजन किया जाएगा।
<h2><strong>छठ पूजा की विधि</strong></h2>
इस व्रत की शुरुआत नहाय-खाय (25 अक्टूबर 2025) से हुई थी। इस दिन माताएं नदी या तालाब के किनारे जाकर स्नान करती हैं। साथ ही छठ पूजा के लिए एक वेदी तैयार करती हैं। व्रत के दूसरे दिन खरना (26 अक्टूबर 2025) होता है। खरना के दिन शाम को खीर और पूरी का भोग लगाकर 36 घंटे का व्रत शुरू किया जाता है। छठ का तीसरा दिन संध्या अर्घ्य (27 अक्टूबर 2025) का होता है। इस दिन व्रती महिलाएं किसी नदी या तालाब के पास जाकर डूबते सुर्यो को अर्घ्य अर्पित करती हैं। वहीं चौथे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य (28 अक्टूबर 2025) दिया जाता है।
<h2><strong>छठ पूजा का महत्व</strong></h2>
चौथे दिन यानी सुबह अर्घ्य के दिन महिलाएं सुबह ही नदी किनारे जाकर उगते सूर्य देवता को अर्घ्य देती हैं। सूर्य देवता को अर्घ्य देने के साथ ही पूजा की समाप्ति होती है। इस पूजा के बाद व्रति कच्चे दूध का शरबत पीकर और प्रसाद ग्रहण करके अपना व्रत खोलती हैं, जिसे पारण कहा जाता है। छठ पूजा हिंदुओं का एक प्रमुख त्योहार है, जो सूर्य देवता को समर्पित है। यह पर्व साल में दो बार मनाया जाता है। एक बार गर्मियों के समय और दूसरा सर्दियों के समय। यह खास तौर पर बिहार और यूपी के लोगों द्वारा मनाया जाता है।]]></content:encoded>
                    <pubDate>May 30, 2025, 7:05 am</pubDate>
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                    <title><![CDATA[आज है चैत्र नवरात्रि का 5वां दिन, जानें स्कंदमाता की पूजा विधि और महत्त्व]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/religious/today-is-the-5th-day-of-chaitra-navratri-know-the-method-and-importance-of-skandmata-worship/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व जारी है और आज पांचवें दिन मां स्कंदमाता की उपासना की जा रही है। सनातन धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व है, जिसमें मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधिपूर्वक पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि इन दिनों देवी स्वयं धरती पर विराजमान रहती हैं और भक्तों [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/05/Clipboard-33.jpg"/><strong>पटना।</strong> चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व जारी है और आज पांचवें दिन मां स्कंदमाता की उपासना की जा रही है। सनातन धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व है, जिसमें मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधिपूर्वक पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि इन दिनों देवी स्वयं धरती पर विराजमान रहती हैं और भक्तों को आशीर्वाद देती हैं। इस बीच आइए जानते हैं कि आप स्कंदमाता का आशीर्वाद किस तरह उनकी पूजा-अर्चना कर प्राप्त कर सकते है.
<h2><strong>स्कंदमाता का स्वरूप</strong></h2>
मां स्कंदमाता चार भुजाओं वाली देवी हैं। वे अपने दाहिने हाथ से भगवान स्कंद (कार्तिकेय) को गोद में पकड़े हुए हैं, जबकि उनके अन्य हाथों में कमल का पुष्प और वरदमुद्रा स्थित है। इन्हें पद्मासना देवी भी कहा जाता है क्योंकि वे कमल पर विराजमान रहती हैं। धार्मिक मान्यता है कि इनकी पूजा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
<h2><strong>पूजा विधि और भोग</strong></h2>
मां स्कंदमाता की पूजा सूर्योदय से पूर्व स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद प्रारंभ की जाती है। लेकिन अगर आप सूर्योदय से पहले माता की पूजा नहीं कर पाएं है तो आप उसके बाद भी देवी को गंगाजल से स्नान कराकर, उन्हें चुनरी और वस्त्र अर्पित किए जाते हैं। इसके बाद रोली, कुमकुम और पुष्प चढ़ाकर, मिठाई व फलों का भोग लगाकर उनकी आरती की जाती है। इस दिन माता को केले का भोग अर्पित करने का विशेष महत्व है। मान्यता है कि ऐसा करने से संतान सुख एवं उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।
<h2><strong>स्कंदमाता के मंत्र</strong></h2>
मां को प्रसन्न करने के लिए भक्त विशेष मंत्रों का जाप कर सकते हैं "सिंहासना गता नित्यं पद्माश्रि तकरद्वया। शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी।।" नवरात्रि के इस पावन अवसर पर मां स्कंदमाता की विधिपूर्वक पूजा करने से भक्तों को फल की प्राप्ति होती है।]]></content:encoded>
                    <pubDate>May 30, 2025, 7:05 am</pubDate>
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                    <title><![CDATA[भारत का एक ऐसा राज्य, जहां नवरात्रि में खाया जाता है मांस, दी जाती हैं जानवरों की बलि]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/religious/there-is-a-state-in-india-where-meat-is-eaten-during-navratri-and-animals-are-sacrificed/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। हिंदू धर्म में नवरात्रि का बड़ा महत्व होता है। नवरात्र में मां दुर्गा के 9 स्वरुपों की पूजा की जाती है। इन 9 दिनों में कुछ खास चीजों का परहेज किया जाता है ताकि मां दुर्गा नाराज न हों। ऐसे में जिस चीज का खास ध्यान रखा जाता है वह नॉनवेज। नवरात्र में नॉनवेज [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/05/Clipboard-33.jpg"/><strong>पटना।</strong> हिंदू धर्म में नवरात्रि का बड़ा महत्व होता है। नवरात्र में मां दुर्गा के 9 स्वरुपों की पूजा की जाती है। इन 9 दिनों में कुछ खास चीजों का परहेज किया जाता है ताकि मां दुर्गा नाराज न हों। ऐसे में जिस चीज का खास ध्यान रखा जाता है वह नॉनवेज। नवरात्र में नॉनवेज खाने पर प्रतिबंध होता है। ऐसा कहा जाता है कि नवरात्र में मीट खाना पाप करना है। लेकिन एक ऐसा भी राज्य है जहां नवरात्रि के दौरान केवल नॉनवेज खाया जाता है। आइए जानते हैं कौन सा है ऐसा राज्य, आखिर क्यों नवरात्रि में मांस नहीं खा सकते?
<h2><strong>क्यों खाया जाता है सात्विक भोजन</strong></h2>
हिंदूओं में नवरात्रि के दिन 9 बेहद खास और पवित्र होते हैं। इस दौरान शुद्धता और पवित्रता का खास ध्यान रखा जाता है। नवरात्र में मां दुर्गा के 9 स्वरुपो की पूजा की जाती है। ऐसे में मां दुर्गा वास के लिए खास नियमों का पालन करना होता है। इनमें से एक है नॉनवेज से परहेज। नवरात्र में केवल सात्विक भोजन खाया जाता है, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि सात्विक भोजन करने से व्यक्ति की इंद्रियां काबू में रहती हैं, जिससे वह ईश्वर से संपर्क साधने में कामयाब होता है। सात्विक भोजन का सेवन करने से पूजा-पाठ से उसका मन नहीं भटकता है।
<h2><strong>नॉनवेज खाने से परहेज</strong></h2>
ऐसे में नवरात्रि के दौरान संतुलित भोजन न किया जाए तो व्यक्ति अपनी इंद्रियों पर काबू नहीं रख पाता। पूजन के दौरान कई तरह के अवरोध पैदा होने लगते हैं। आयुर्वेद और ज्योतिष के अनुसार तामसिक भोजन यानी नॉनवेज खाने से व्यक्ति के अंदर क्रोध, आलस, अहंकार, ललसा की भावना पैदा होती है। यही वजह है कि नवरात्रि के दौरान हिंदू धर्म में नॉनवेज खाना पाप होता है। इससे व्यक्ति का ध्यान आध्यात्म से भटक जाता है।
<h2><strong>इस राज्य में खाते हैं तामसिक भोजन</strong></h2>
भारत में एक ऐसा राज्य है जहां नवरात्र में केवल तामसिक भोजन का ही सेवन कियया जाता है। जहां पूजा में मवेशियों की बलि दी जाती है। बलि के बाद प्राप्त मांस को प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है। शारदीय नवरात्रि के समय बंगाल में मांसाहार खाने का चलन है। उनका मानना है कि शारदीय नवरात्रि की दुर्गा पूजा के दौरान देवी मां खुद अपने बच्‍चों के साथ उनके घर में रहने आती है, उनके घर पर ही उनके साथ समय गुजारती हैं। इस कारण ही बंगाली मां के लिए सभी तरह के नॉनवेज पकवान तैयार करते हैं, जो वे खुद भी खाते हैं।]]></content:encoded>
                    <pubDate>May 30, 2025, 7:05 am</pubDate>
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                    <title><![CDATA[भारत में आज मनाई जा रही ईद, जानें इस त्योहार का मनाने की वजह]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/religious/eid-is-being-celebrated-in-india-today-know-the-reason-for-celebrating-this-festival/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। इस साल भारत में रमजान का आगाज़ 2 मार्च यानी रविवार को हुआ। यहां नया चांद 1 मार्च की रात को देखा गया था। वहीं, सऊदी अरब में रमजान एक दिन पहले, यानी 1 मार्च से शुरू हो चुका था। आज यानी 31 मार्च को ईद की नमाज अदा की गई। वहीं सऊदी अरब [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/05/Clipboard-33.jpg"/><strong>पटना।</strong> इस साल भारत में रमजान का आगाज़ 2 मार्च यानी रविवार को हुआ। यहां नया चांद 1 मार्च की रात को देखा गया था। वहीं, सऊदी अरब में रमजान एक दिन पहले, यानी 1 मार्च से शुरू हो चुका था। आज यानी 31 मार्च को ईद की नमाज अदा की गई। वहीं सऊदी अरब में ईद की नमाज एक दिन पहले यानी 30 मार्च को पढ़ी गई। आज पूरा देश धूमधाम से ईद का त्योहार मना रहा है। आइए जानते हैं ईद उल फितर का मतलब।
<h2><strong>इबादत और दान का महीना</strong></h2>
ईद उल फितर का अर्थ है ‘रोजा खोलने का त्योहार’। यह रमजान के समाप्ति का उत्सव है, जो इबादत, दान और आत्म-ज्ञान का महीना माना जाता है। इसे इस्लाम की पांच प्रमुख शिक्षाओं में से एक माना जाता है और इसे आभार, पुरस्कार और आनंद के रूप में पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है। ईद उल फितर इस्लाम धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। इसे रमजान के पवित्र महीने के बाद मनाया जाता है। यह त्योहार भाईचारे, दान और खुशियों का त्योहार है। यह त्योहार रमजान के पूरे महीने रोजा रखने के बाद आता है।
<h2><strong>पिछले साल 11 अप्रैल को ईद</strong></h2>
यह इबादत और संयम का महीना माना जाता है। इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक रमजान के बाद शव्वाल की पहली तारीख को ईद उल फितर मनाया जाता है। इस खास त्योहार की सुबह नमाज पढ़कर की जाती है। इस त्योहार में हजारों लोग एक साथ अल्लाह से दुआ मांगते हैं। इस बार रमजान की शुरुआत 2 मार्च से शुरु हुई थी। 30 जनवरी को देश में पूरा चांद दिखा, इसलिए 31 मार्च यानी आज ईद मनाई जा रही है।
<h2><strong>पिछले साल 11 अप्रैल को ईद</strong></h2>
इस दिन लोग एक-दूसरे को गले लगाकर ईद की बधाई देते हैं। साथ ही ईद उल फितर को मीठी ईद भी कहा जाता है। इस दिन सेवइयां और कई तरह के व्यंजन खाए जाते हैं ।
भारत में पिछले साल 10 अप्रैल को ईद का चांद दिखाई दिया था। 2024 में सऊदी अरब में 9 अप्रैल को चांद देखा गया, जिसके बाद 10 अप्रैल को ईद-उल-फितर की नमाज पढ़ी गई। वहीं, भारत में 10 अप्रैल को चांद दिखा और 11 अप्रैल को ईद की नमाज अदा की गई।]]></content:encoded>
                    <pubDate>May 30, 2025, 7:05 am</pubDate>
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                    <title><![CDATA[आज है नवरात्र का दूसरा दिन, आइए जानें मां ब्रह्मचारिणी की पौराणिक कथा]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/religious/today-is-the-second-day-of-navratri-lets-know-the-mythological-story-of-maa-brahmacharini/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। आज चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन है। यह दिन मां ब्रह्मचारिणी को समर्पित होता है। इस दिन देवी ब्रह्मचारिणी की विधिपूर्वक पूजा की जाती है। मां ब्रह्मचारिणी को ज्ञान, तपस्या और वैराग्य की देवी कहा जाता है।  मां ब्रह्मचारिणी की पूजा मान्यता के अनुसार, मां कठोर साधना और ब्रह्म देव की भक्ति में मग्न [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/05/Clipboard-33.jpg"/><strong>पटना।</strong> आज चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन है। यह दिन मां ब्रह्मचारिणी को समर्पित होता है। इस दिन देवी ब्रह्मचारिणी की विधिपूर्वक पूजा की जाती है। मां ब्रह्मचारिणी को ज्ञान, तपस्या और वैराग्य की देवी कहा जाता है।
<h2><strong> मां ब्रह्मचारिणी की पूजा</strong></h2>
मान्यता के अनुसार, मां कठोर साधना और ब्रह्म देव की भक्ति में मग्न रहने के कारण मां ब्रह्मचारिणी के रूप में पूजा जातीहै। वहीं कहा जाता है कि जिनका चंद्रमा कमजोर है, उन लोगों को मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करनी चाहिए। इससे उन्हें विशेष लाभ मिलता है। आइए जानते हैं मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की विधि के बारे में।
<h2><strong>पूजन विधि</strong></h2>
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से पहले पीले या सफेद वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है। इसके साथ ही पूजा के दौरान मां को सफेद वस्तुएं जैसे मिसरी, शक्कर और पंचामृत अर्पित करने की परंपरा है। वहीं मां की पूजा-अर्चना करते समय "ऊं ऐं नमः" मंत्र का जाप करना शुभ मानाजाताहै,साथ ही यह घर में सुख-शांति लेकरआता है।
<h2><strong>भोग और प्रसाद</strong></h2>
मां ब्रह्मचारिणी को नवरात्र के दूसरे दिन शक्कर का भोग लगाया जाता है। भोग चढ़ाने के बाद इसे घर के सभी सदस्यों में बांटने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
<h2><strong>पौराणिक कथा</strong></h2>
कथाओं के अनुसार, देवी पार्वती ने ब्रह्मचारिणी रूप में जन्म लिया था और भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। हजारों वर्षों तक उन्होंने फल, फूल और बिल्व पत्र खाकर तपस्या की। इसके बाद, उन्होंने अन्न और जल का भी त्याग कर दिया, जिससे उनका एक नाम ‘अर्पणा’ भी पड़ा। उनकी घोर तपस्या से भगवान शिव प्रसन्न हुए और पार्वती को पत्नी रूप में स्वीकार किया।]]></content:encoded>
                    <pubDate>May 30, 2025, 7:05 am</pubDate>
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                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[गुरु प्रदोष व्रत में इन उपायों को अपनाने से होंगी सभी परेशानियां दूर]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/religious/all-your-problems-will-be-solved-by-adopting-these-measures-during-guru-pradosh-fast/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। इस बार प्रदोष व्रत 27 मार्च यानी आज रखा जा रहा है। यह दिन भगवान शिव को समर्पित होता है। इस दिन भगवान शिव की विधिपूर्वक पूजा की जाती है। इस बार प्रदोष व्रत महीने के आखिर में पड़ रहा है, जिस वजह से इसे गुरू [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/05/Clipboard-33.jpg"/><strong>पटना।</strong> त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। इस बार प्रदोष व्रत 27 मार्च यानी आज रखा जा रहा है। यह दिन भगवान शिव को समर्पित होता है। इस दिन भगवान शिव की विधिपूर्वक पूजा की जाती है। इस बार प्रदोष व्रत महीने के आखिर में पड़ रहा है, जिस वजह से इसे गुरू प्रदोष व्रत भी कहा जा रहा है। अलग-अलग महीने में पड़ने वाले प्रदोष की महिमा अलग होती है।
<h2><strong>प्रदोष व्रत के कुछ उपाय</strong></h2>
इस दिन व्रत करने वाले की हर इच्छा पूरी होती है। गुरु प्रदोष व्रत से संतान संबंधी मनोकामनाएं भी पूरी होती हैं। गुरु प्रदोष व्रत रखने से शत्रु और विरोधी शांत होते हैं। इस दिन सच्चे मन से भगवान शंकर की पूजा करने से मुकदमों और विवादों में सफलता मिलती है। भगवान भोलेनाथ पूजा करने मात्र से ही अपने भक्तों से प्रसन्न हो जाते हैं, लेकिन गुरु प्रदोष व्रत में शिव की आराधना के कुछ खास नियम हैं। ऐसा माना जाता है कि इस व्रत का पूरा फल तभी मिलता है जब आप इस व्रत के सारे नियमों का पालन करें।
<h2><strong>बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए</strong></h2>
एक पीतल के लोटे में पानी, हल्दी, गुड़ और चने की दाल डालें। इसे केले के पेड़ की जड़ में डाल दें। इसे डालने के बाद पेड़ के सामने गाय के घी का दिया जलाएं। वहीं बृहस्पति स्तोत्र का तीन बार पाठ करें। घर वापस आते समय केले के पेड़ की जड़ से मिट्टी लें और इसे अपने बच्चों के माथे पर लगा दें। इससे आपके बच्चे का भविष्य उज्जवल बनेगा।
<h2><strong>सकारात्मक ऊर्जा के लिए</strong></h2>
अपने स्नान के जल में सात चुटकी हल्दी डालकर उस पानी से नहां लें। अपने घर की उत्तर पूर्व दिशा में मिट्टी के बर्तन में जल भरकर रख दें। समय-समय पर इसे बदलते रहें। ऐसा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। घर में मौजूद सारी नकारात्मक ऊर्जा गायब हो जाती है।
<h2><strong>भगवान की कृपा के लिए</strong></h2>
पीले आसन पर बैठकर पूर्व दिशा की तरफ मुंह रखें। हल्दी की माला से गुरुवार को भगवान शिव के मंत्रों का जाप करें। ऐसा करने से भगवान शिव की कृपा आप पर बनी रहती है। आप सच्चे दिल से जो भी ईश्वर से मांगते हो, वो पूरा हो जाता है।
<h2><strong>परेशानियों को दूर करने के लिए</strong></h2>
प्रदोष व्रत के दिन जरूरतमंद लोगों को पीला कपड़ा, पीली मिठाई, चने की दाल, हल्दी और गुड़ का दान करना चाहिए। ऐसा करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं। साथ ही आपकी जीवन में आ रही किसी भी तरह की कठिनाई दूर हो जाती है।
<h2><strong>घर की सुख-शांति के लिए</strong></h2>
घर में सुख-शांति बनाए रखने के लिए प्रदोष काल में भगवान शिव की विधिपूर्वक पूजा करें। शिवजी को पीले फूल अर्पित करें। साथ ही "ॐ नमो भगवते रुद्राय" मंत्र का 11 माला जाप करें। ऐसा करने से भगवान शिव घर में मौजूद किसी भी तरह की नकारात्मक शक्ति का नाश करते हैं।]]></content:encoded>
                    <pubDate>May 30, 2025, 7:05 am</pubDate>
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                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[चैत्र नवरात्र में लगाएं ये पौधे, होगा मां दुर्गा का वास]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/religious/%e0%a4%9a%e0%a5%88%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%a8%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b2%e0%a4%97%e0%a4%be%e0%a4%8f%e0%a4%82-%e0%a4%af/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। चैत्र नवरात्र के पर्व को बहुत शुभ माना जाता है। चैत्र नवरात्र मां दुर्गा और उनके 9 रूपों को समर्पित होते है। चैत्र नवरात्र में मां दुर्गा के मंदिरों में खास तरह की रौनक देखने को मिलती है। चैत्र नवरात्रों में मां दुर्गा की विधि-विधान से पूजा की जाती है। साथ ही जीवन में [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/05/Clipboard-33.jpg"/><strong>पटना।</strong> चैत्र नवरात्र के पर्व को बहुत शुभ माना जाता है। चैत्र नवरात्र मां दुर्गा और उनके 9 रूपों को समर्पित होते है। चैत्र नवरात्र में मां दुर्गा के मंदिरों में खास तरह की रौनक देखने को मिलती है। चैत्र नवरात्रों में मां दुर्गा की विधि-विधान से पूजा की जाती है। साथ ही जीवन में सभी सुखों की प्राप्ति के लिए व्रत भी रखे जाते हैं।
<h2><strong>इन पौधे को लगाने से होगी समृद्धि</strong></h2>
वहीं, जीवन में सुख-समृद्धि के लिए कई तरह के उपाय भी किए जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि चैत्र नवरात्र के दौरान घर में कुछ शुभ पौधों को लगाने से किस्मत बदल सकती है। साथ ही जीवन में शुभ परिणाम देखने को मिलते है। ऐसे में आइए जानते हैं कि चैत्र नवरात्र में किन पौधों को घर में लगाना फायदेमंद हो सकता है।
<h2><strong>तुलसी का पौधा</strong></h2>
सनातन धर्म में तुलसी का पौधे को पूजनीय माना जाता है। धार्मिक मान्यता के मुताबिक इस पौधे में धन की देवी मां लक्ष्मी का वास होता है। तुलसी के पौधे को घर में लगाने से सुख-शांति का वास होता है। ऐसे में आप चैत्र नवरात्र के दौरान घर में तुलसी का पौधा लगा सकते हैं। इस पौधे को उत्तर या पूर्व दिशा में लगाने से फायदा होगा। मान्यता है कि इस उपाय को करने से घर मां लक्ष्मी का आगमन होता है। जिससे घर में कभी भी धन की कमी नहीं होती।
<h2><strong>शंखपुष्पी का पौधा</strong></h2>
तुलसी के अलावा सनातन धर्म में शंखपुष्पी के पौधे का भी अलग महत्व होता है। अगर आप भी चाहते है कि आपके घर में मां दुर्गा का वास हो तो इसके लिए शंखपुष्पी का पौधा लगाएं। इस चैत्र नवरात्र में घर में शंखपुष्पी का पौधा लाने से वातावरण में शुद्धि होती है। ऐसी मान्यता है कि इस पौधे को घर में लगाने से मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही व्यक्ति के रुके हुए काम जल्द ही पूरे होने लगते है।
<h2><strong>केले का पौधा</strong></h2>
केले के पौधे को हिंदू धर्म में काफी पवित्र माना जाता है। केले का पौधा घर में लगाने से सुख-शांति बनी रहती है। ऐसी मान्यता है कि इस पौधे को घर में लगाने से परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है। इस पौधे में भगवान विष्णु का वास होता है, तो ऐसे में चैत्र नवरात्र में इस पौधे को जरूर लगाना चाहिए। इससे श्रीहरि प्रसन्न होते है और उनकी कृपा बनी रहती है। इस पौधे की पूजा करने से वैवाहिक जीवन से जुड़ी हर समस्या दूर होती है। साथ गुरु दोष से भी छुटकारा मिलता है।]]></content:encoded>
                    <pubDate>May 30, 2025, 7:05 am</pubDate>
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                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[मीन संक्राति पर राशि के मुताबिक करें दान, मिलेगा सूर्य देव का आशीर्वाद]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/religious/donate-according-to-your-zodiac-sign-on-pisces-sankranti-you-will-get-blessings-of-sun-god/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। होली के दिन एक संयोग बन रहा है। होली के दिन मीन संक्राति भी है। 14 मार्च को होली और मीन संक्रांति दोनों मनाई जा रही है। सनातन धर्म में मीन संक्रांति का खास महत्व होता है। यह पर्व सूर्य देव के मीन राशि में गोचर करने की तिथि के उपलक्ष्य पर मनाया जाता [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/05/Clipboard-33.jpg"/><strong>पटना।</strong> होली के दिन एक संयोग बन रहा है। होली के दिन मीन संक्राति भी है। 14 मार्च को होली और मीन संक्रांति दोनों मनाई जा रही है। सनातन धर्म में मीन संक्रांति का खास महत्व होता है। यह पर्व सूर्य देव के मीन राशि में गोचर करने की तिथि के उपलक्ष्य पर मनाया जाता है। इस दिन श्रद्धालु गंगा समेत पवित्र नदियों में स्नान-ध्यान कर सूर्य देव की पूजा करते हैं। पूजा के बाद आर्थिक स्थिति के मुताबिक दान-पुण्य करते हैं।
<h2><strong>सूर्य देव की करें पूजा</strong></h2>
सूर्य देव की साधना करने से व्यक्ति को सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है। ऐसा माना जाता है संक्रांति के दिन भगवान सूर्य की पूजा करने से साधक पर सूर्य देव की कृपा बरसती है। उनकी कृपा से साधक की हर मनोकामना पूरी होती हैं। साथ ही जीवन में खुशियां और सुख-समृद्धि आती है। अगर आप भी सूर्य देव की कृपा पाना चाहते हैं, तो मीन संक्रांति के दिन स्नान-ध्यान के बाद सूर्य देव की पूजा करें। वहीं, पूजा के बाद राशि मुताबिक इन चीजों का दान करें।
<h2><strong>मीन राशि का शुभ मुहूर्त</strong></h2>
मीन संक्रांति के दिन पुण्य काल दोपहर 12 बजकर 39 मिनट से शुरू होगी जो शाम 06 बजकर 29 मिनट पर जाकर खत्म होगा। वहीं महा पुण्य काल शाम 04 बजकर 29 मिनट से आरंभ होगा जो 6 बजकर 29 मिनट पर समाप्त होगा। पुण्य काल के दौरान साधक स्नान-ध्यान कर सूर्य देव की पूजा करतेहैं। हालांकि, ग्रहण के लिए अपने नजदीक के योग्य पंडित से अवश्य पूछ लें।
<h2>ये राशि इन चीजों को करें दान</h2>
मेष राशि के जातक को मीन संक्रांति के दिन मोतीचूर के लड्डू का दान करना चाहिए।

वृषभ राशि के लोगों को मीन संक्राति के मौके पर सफेद चीज दान करनी चाहिए।

मिथुन राशि के जातकों को हरी सब्जियों को दान में देना चाहिए।

कर्क राशि के लोग सूर्य देव की कृपा पाने के लिए चावल और आटे का दान करें।

सिंह राशि के जातकों को गेंहू और गुड़ दान में देना चाहिए।

कन्या राशि के जातक हरे कपड़े दान कर सकते हैं।

तुला राशि के लोगों को दान और नमक दान करना चाहिए।

वृश्चिक राशि के जातक मीन संक्रांति के दिन आलू और शकरकंद दान करें।

धनु राशि के जातकों को पीले वस्त्र दान करने चाहिए।

मीन राशि के लोग किसी भी रंगे के वस्त्र का दान करें।

कुंभ राशि के लोग चमड़े के चप्पल-जूते और छाता का दान करें।]]></content:encoded>
                    <pubDate>May 30, 2025, 7:05 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/religious/donate-according-to-your-zodiac-sign-on-pisces-sankranti-you-will-get-blessings-of-sun-god/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[होलिका दहन पर करें ये अचूक उपाय, हर तरह की समस्या से मिलेगा छुटकारा]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/religious/do-this-infallible-remedy-on-holika-dahan-you-will-get-relief-from-every-kind-of-problem/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। होली के त्योहार का हिंदू धर्म में काफी महत्व होता है, लेकिन इससे पहले होलिका दहन की जाती है। होलिका दहन फाल्गुन पूर्णिमा की तिथि के दिन किया जाता है। होलिका दहन का अपना महत्व होता है, इसे बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाया जाता है। होलिका दहन का महत्व होलिका [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/05/Clipboard-33.jpg"/><strong>पटना।</strong> होली के त्योहार का हिंदू धर्म में काफी महत्व होता है, लेकिन इससे पहले होलिका दहन की जाती है। होलिका दहन फाल्गुन पूर्णिमा की तिथि के दिन किया जाता है। होलिका दहन का अपना महत्व होता है, इसे बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाया जाता है।
<h2><strong>होलिका दहन का महत्व</strong></h2>
होलिका दहन के दिन बुराइयों को होलिका की आग में जलाया जाता हैं। बुराइयों को होलिका में दहन करके अच्छाई के मार्ग पर चलने की सीख ली जाती है। मान्यता है कि विधि-विधान से होलिका दहन की पूजा करने से जीवन की सभी परेशानी दूर हो जातही है। जीवन में सुख-संपत्ति का आगमन होता है। होलिका दहन के दौरान होलिका की परिक्रमा करने का भी काफी महत्व है। क्योंकि होलिका दहन महानिशा की रात मानी जाती है। इस त्योहार के जरिए हम अग्नि देवता के प्रति भी अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हैं।
<h2><strong> तंगी से छुटकारा पाने के लिए</strong></h2>
होलिका दहन के दिन कुछ ज्योतिषीय उपाय करने से पैसों की तंगी से छुटकारा मिलता है। आइए जानते हैं होलिका दहन पर किए जाने वाले कुछ प्रमुख उपायों के बारे में। अगर आपको अपने जीवन में पैसों की तंगी का सामना करना पड़ रहा है तो आप होलिका दहन पर इस अचूक उपाय को करके इससे छुटकारा पा सकते हैं। होलिका दहन की रात को 21 गोमती चक्र को शिवलिंग पर अर्पित करने से पैसों की तंगी से छुटकारा मिलता है। ऐसा माना जाता है कि 21 गोमती चक्र को लाल कपड़े में बांधकर अपनी अलमारी या तिजोरी में रखने से पैसों से जुड़ी कोई भी समस्या दूर हो जाती है।
<h2><strong>देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए</strong></h2>
क्या आपके भी बनते काम बिगड़ रहे हैं। जीवन में किसी तरह की कोई सफलता नहीं मिल रही है, तो समझ जाइए कि आपके जीवन में शत्रु बाधा का प्रभाव है। इसे दूर करने का सबसे अच्छा दिन होलिका दहन है। होलिका दहन के दिन पूरी श्रद्धा के साथ भगवान से प्रार्थना करते हुए 7 गोमती चक्र को होलिका की आग में डाल देना चाहिए। ऐसा करने से शत्रु दोष दूर हो जाता है। लक्ष्मी मां को प्रसन्न करने के लिए सरसों के दाने से उपाय कर सकते हैं। मां लक्ष्मी को याद करते हुए होलिका की आग में कुछ दाने सरसों के चढ़ाने से देवी लक्ष्मी प्रसन्न होती है।
<h2><strong>जिंदगी में तरक्की करने के लिए</strong></h2>
अगर आप अपनी जिंदगी में तरक्की करना चाहते है तो होलिका दहन के दिन इस उपाय को करने से आपको जीवन नें सफलता मिल सकती है। इसके लिए आपको होलिका की राख का इस्तेमाल करना होगा। होलिका दहन के दिन होलिका की राख को छेद वाले 7 तांबे के सिक्कों के साथ लाल कपड़े में बांध लें। इसके बाद इस तिजोरी या अलमारी में संभालकर रख दें। इसके अलावा इसे पर्स में भी रख सकते हैं। ऐसा करने से जीवन में तरक्की के साथ आय में भी सफलता मिलेगी।]]></content:encoded>
                    <pubDate>May 30, 2025, 7:05 am</pubDate>
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                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
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                    <title><![CDATA[सोई किस्मत को चमकाती है ये 4 चीजें, धन की होती है वर्षा]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/religious/these-4-things-brighten-your-sleeping-luck-and-money-rains-down/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। माता लक्ष्मी को धन और वैभव की देवी माना जाता है। पौराणिक मान्यता के मुताबिक जिस व्यक्ति पर माता लक्ष्मी की कृपा होती है। उसे जीवन में कभी भी पैसों की कमी नहीं होती है। वास्तु शास्त्र के मुताबिक कुछ चीजें ऐसी होती हैं, जिनकी ऊर्जा लक्ष्मी प्राप्ति के लिए काफी प्रभावशाली होती हैं। [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/05/Clipboard-33.jpg"/><strong>पटना।</strong> माता लक्ष्मी को धन और वैभव की देवी माना जाता है। पौराणिक मान्यता के मुताबिक जिस व्यक्ति पर माता लक्ष्मी की कृपा होती है। उसे जीवन में कभी भी पैसों की कमी नहीं होती है। वास्तु शास्त्र के मुताबिक कुछ चीजें ऐसी होती हैं, जिनकी ऊर्जा लक्ष्मी प्राप्ति के लिए काफी प्रभावशाली होती हैं। इन चीजों को पर्स में रखने से कभी भी धन की कमी नहीं होती है।
<h2><strong>कुबेर यंत्र</strong></h2>
आइए, जानते हैं लक्ष्मी प्राप्ति के लिए पर्स में किन चीजों को रखना चाहिए। भगवान कुबेर को धन का देवता माना जाता है। कुबेर यंत्र धन प्राप्ति के लिए काफी शुभ होता है। कुबेर यंत्र को पर्स में रखने से धन और समृद्धि काआगमन होता है। इसे पीले कपड़े में लपेटकर पर्स में रखना चाहिए। ऐसा करने से कुबेर महाराज खुश होते है और व्यक्ति की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।
<h2><strong>चावल के दाने</strong></h2>
वास्तु शास्त्र के मुताबिक पैसों की कमी होने पर पर्स में हल्दी लगे चावल रखने चाहिए। चावल समृद्धि का प्रतीक होता है। गुरुवार के दिन चावल पर हल्दी लगाकर इसे भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के सामने रखें। इसके बाद शुक्रवार के दिन हल्दी के दानों को अपने पर्स में डाल लें। इससे धन की कोई कमी नहीं होगी।
<h2><strong>गोमती चक्र</strong></h2>
लक्ष्मी मां को गोमती चक्र काफी प्रिय होता है। इसे पर्स में रखने से कर्ज से मुक्ति मिलती है। साथ ही धन लाभ होता है। गोमती चक्र को अपने पर्स में रखने से पहले इस पर लाल रंग का तिलक लगाना चाहिरए। इसके बाद लक्ष्मी मंत्र 'ॐ श्रींह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद, श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्मी नमः का जाप करके गोमती चक्र को पर्स में रख लेना चाहिए।
<h2><strong>चांदी का सिक्का</strong></h2>
चांदी के सिक्के समृद्धि का प्रतीक माने जाते हैं। वास्तु शास्त्र के मुताबिक चांदी का सिक्का पर्स में रखने से आर्थिक स्थिति बेहतर बनती है। मां लक्ष्मी को चांदी का सिक्का अर्पित करें। मां लक्ष्मी को चांदी का सिक्का अर्पित करने के बाद इसे पर्स में रखना चाहिए। इससे धन में वृद्धि होती है। चांदी के सिक्के को पर्स में रखने से पहले कच्चे दूध में भिगोकर रखना चाहिए।]]></content:encoded>
                    <pubDate>May 30, 2025, 7:05 am</pubDate>
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                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[क्यों मनाई जाती है रंग पंचमी, क्या है इसका महत्व]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/religious/why-is-rang-panchami-celebrated-what-is-its-importance/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। होली के 5 दिन बाद रंग पंचमी पड़ती है। रंग पंचमी को श्रीपंचमी के नाम से भी जाना जाता है। रंग पंचमी के दिन रंग और गुलाल खेलने की परंपरा है। इस साल रंग पंचमी का पर्व 19 मार्च को है। इस दिन होली के बाद एक बार फिर रंगों से होली खेली जाती [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/05/Clipboard-33.jpg"/><strong>पटना।</strong> होली के 5 दिन बाद रंग पंचमी पड़ती है। रंग पंचमी को श्रीपंचमी के नाम से भी जाना जाता है। रंग पंचमी के दिन रंग और गुलाल खेलने की परंपरा है। इस साल रंग पंचमी का पर्व 19 मार्च को है। इस दिन होली के बाद एक बार फिर रंगों से होली खेली जाती है। इस दिन पूरे ब्रज की भूमि एक बार फिर से रंगों में नहाती है।
<h2><strong>रंग पंचमी का महत्व</strong></h2>
होली और रंग पंचमी दोनों ही रंगों से जुड़े त्योहार हैं, लेकिन इनका महत्व काफी अलग है। होली पर लोग एक-दूसरे पर रंग लगाकर प्यार और भाईचारा बढ़ाते हैं। रंग पंचमी पर देवी-देवताओं को रंग लगाया जाता है। इस दिन आसमान में रंग उड़ाए जाते हैं। उड़ाए गए रंगों से देवता खुश होते हैं और अपना आशीर्वाद देते हैं। ऐसा माना जाता है कि होली आपसी प्रेम का त्योहार है। जबकि रंग पंचमी देवी-देवताओं की आराधना का त्योहार है।
<h2><strong>रंग पचंमी का शुभ मुहूर्त</strong></h2>
रंग पंचमी पर गुलाल को हवा में उछालकर देवताओं को चढ़ाया जाता है। इससे देवी- देवता प्रसन्न होते हैं और कृपा बरसाते हैं। आइए देखते हैं रंग पंचमी पर अपने घर पर किस तरह से पूजा की जाती है, साथ ही यह भी जानें कि यह शुभ तिथि कब से कब तक की होती है। रंग पंचमी 19 मार्च को मनाई जाएगी। चैत्र महीने के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि 18 मार्च रात 10 बजकर 9 मिनट पर शुरू होगी। यह 20 मार्च रात 12 बजकर 37 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि के मुताबिक रंग पंचमी 19 मार्च को ही मनाई जाएगी।
<h2><strong>गुलाल उड़ाने की परंपरा</strong></h2>
मतलब जिस दिन सूर्योदय के समय पंचमी तिथि हो, उसी दिन त्योहार मनाया जाता है। इसलिए 19 मार्च को रंगों का यह दूसरा पर्व धूम-धाम से मनाया जाएगा। रंग पंचमी को लेकर ऐसी मान्‍यता है इस दिन श्रीकृष्ण और राधा रानी ने होली मनाई थी। स्वर्ग से देवी-देवता भी इस दिन पुष्प वर्षा करते हैं। इसलिए रंग पंचमी पर अबीर-गुलाल उड़ाने की परंपरा है। पंचमी के दिन रंगों का उत्सव दैवीय शक्तियों को प्रसन्न करने के लिए मनाया जाता है। इससे लोगों के कष्ट दूर होते हैं और जीवन में सुख-शांति आती है।
<h2><strong>देवियों को गुलाल अर्पित करना</strong></h2>
इस दिन की दैवीय कृपा से घर में समृद्धि बनी रहती है। यह त्योहार खुशियां और सकारात्मकता का प्रतीक है। रंग पंचमी का त्योहार हमें आपसी प्रेम और भाईचारे का संदेश देता है। रंग पंचमी के दिन लक्ष्‍मी माता और राधा रानी की प्रतिमा पर गुलाल अपर्ति करने से घर में संपन्‍नता आती है। साथ ही मां लक्ष्‍मी का आगमन होता है।]]></content:encoded>
                    <pubDate>May 30, 2025, 7:05 am</pubDate>
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                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
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                    <title><![CDATA[होलाष्टक में भूलकर भी न करें ये काम, नहीं तो लग जाएगी असुरों की नजर]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/religious/dont-do-this-work-even-by-mistake-during-holashtak-otherwise-you-will-be-cursed-by-the-evil-eye/</link>
                    <description><![CDATA[लखनऊ। हर साल फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से होलाष्टक की शुरूआत होती है। होलाष्टक होलिका दहन के पहले 8 दिन होते हैं। होलिका दहन के बाद होलाष्टक की समाप्ति हो जाती है। आम भाषा में कहे तो होली से ठीक पहले 8 दिन को होलाष्टक कहा जाता है। होलाष्टक की शुरूआत [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/05/Clipboard-33.jpg"/><strong>लखनऊ।</strong> हर साल फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से होलाष्टक की शुरूआत होती है। होलाष्टक होलिका दहन के पहले 8 दिन होते हैं। होलिका दहन के बाद होलाष्टक की समाप्ति हो जाती है। आम भाषा में कहे तो होली से ठीक पहले 8 दिन को होलाष्टक कहा जाता है।
<h2><strong>होलाष्टक की शुरूआत</strong></h2>
ऐसा माना जाता है कि इन 8 दिनों में कोई भी शुभ काम नहीं करना चाहिए, क्योंकि इन दिनों में नकारात्मक शक्तियां जागृत हो जाती हैं। जिस वजह से शुभ कार्य पूरा नहीं हो पाता है। इस साल होलाष्टक की शुरूआत 7 मार्च से होलाष्टक यानी आज से हो गई है। वहीं इसकी समाप्ति 13 को होगी। ऐसा कहा जाता है कि इस कामदेव को भगवान शिव ने भस्म कर दिया था, क्योंकि भगवान शिव की तपस्या तोड़ने के लिए कामदेव ने अपने 5 बाण से भगवान शिव पर प्रहार किया था।
<h2><strong>होलाष्टक के पीछ की कथा</strong></h2>
कामदेव भगवान शिव की तपस्या इसलिए तोड़ना चाहते थे ताकि वह माता पार्वती से विवाह ना करें। कामदेव के भगवान शिव की तपस्या भंग करने पर शिवजी क्रोधित हो गए और उन्होंने अपनी तीसरी आंख खोल ली। तीसरी आंख के खुलते ही कामदेव जलकर भस्म हो गए थे। यहीं कारण है कि जन्म और मृत्यु के बाद किए जाने वाले सभी काम होलाष्टक में नहीं किए जाते हैं। अगर किसी बच्चे का जन्म होली के दिनों में हुआ हो तो उसकी छठी होलाष्टक के दिनों में कर सकते हैं।
<h2><strong>इन कार्यों को करने से बचें</strong></h2>
वहीं बात करें शादी, दुल्हन विदाई, भूमि पूजन, गृह प्रवेश, नाम करण और जनेऊ जैसे शुभ कार्यों की तो वह होलाष्टक के दिनों में नहीं किए जाते हैं। इन कार्यों को होलाष्टक में करने से इन कामों पर बुरा असर पड़ता है। कहा जाता है कि होलाष्टक के इन 8 दिनों में प्रह्लाद को हिरणकश्यप ने बंदी बनाया था। प्रह्लाद को जाने से मारने के लिए कई तरह की यातनाएं दी गई थी। यहीं कारण है कि होलाष्टक के इन 8 दिनों को अशुभ माना जाता है। इन दिनों में कोई भी शुभ कार्य नहीं करने चाहिए। इन 8 दिनों में होली की तैयारी जैसे गोबर की गुलरिया बनाना, सामान खरीद कर लाना कर सकते हैं।]]></content:encoded>
                    <pubDate>May 30, 2025, 7:05 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/religious/dont-do-this-work-even-by-mistake-during-holashtak-otherwise-you-will-be-cursed-by-the-evil-eye/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
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                  </item><item>
                    <title><![CDATA[अगर है पैसों की तंगी तो वीरवार के दिन करें ये उपाय, धन की होगी वर्षा]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/religious/if-you-are-short-of-money-then-do-this-remedy-on-thursday-there-will-be-a-shower-of-money/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। गुरुवार का दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु को अति प्रिय है। इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है। साथ ही देवगुरु बृहस्पति की भी आराधना की जाती है। धार्मिक मान्यताएं हैं कि गुरुवार के दिन विष्णु जी की पूजा करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/05/Clipboard-33.jpg"/><strong>पटना।</strong> गुरुवार का दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु को अति प्रिय है। इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है। साथ ही देवगुरु बृहस्पति की भी आराधना की जाती है। धार्मिक मान्यताएं हैं कि गुरुवार के दिन विष्णु जी की पूजा करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है। वहीं, करियर और कारोबार में भी ऊंचा मुकाम हासिल होता है।
<h2><strong>विष्णु जी की पूजा करें</strong></h2>
अतः साधक गुरुवार के दिन आराध्य विष्णु जी की पूजा करते हैं। इस दिन विशेष उपाय भी किए जाते हैं। इन उपायों को करने से आय और सौभाग्य में वृद्धि होती है। आइए, उपाय जानते हैं।
<h2><strong>सूर्य देव को अर्घ्य दें</strong></h2>
वीरवार के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लेना चाहिए। स्नान करने के बाद सूर्य देव को अर्घ्य देना चाहिए। इसके बाद लक्ष्मी और नारायण की पूजा करनी चाहिए। ऐसा माना जाता है कि वीरवार के दिन भगवान विष्णु को कमल अर्पित करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है।
<h3><strong>नारियल को तिजोरी में रखें</strong></h3>
वीरवार के दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए। इस दिन उनकी विधिपूर्वक पूजा करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। पूजा करने के बाद नारियल को उस जगह रख दें जहां आप अपना पैसा रखते हैं।
<h3><strong>दूध से जलाभिषेक करें</strong></h3>
वीरवार का दिन भगवान विष्णु जी को अर्पित होता है। इस दिन केसर मिश्रित दूध से भगवान का जलाभिषेक करने से धन से जुड़ी समस्याएं दूर हो जाती है। ऐसे उपाय करने से भगवान विष्णु खुश होते हैं।
<h3><strong>हल्दी की गांठ अर्पित करें</strong></h3>
नई करियर या कारोबार की शुरूआत करना चाहते है तो वीरवार का दिन शुभ होगा। इस दिन किसी पास के मंदिर में जाकर भगवान विष्णु की पूजा करें। पूजा के दौरान 7 हल्दी की गांठ धन की देवी लक्ष्मी को अर्पित करें। इस उपाय से इच्छाओं की पूर्ति होती है।]]></content:encoded>
                    <pubDate>May 30, 2025, 7:05 am</pubDate>
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                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[महाशिवरात्रि में रखें सेहत का खास ध्यान, व्रत में ऊर्जा के लिए अपनाएं ये जरूरी उपाय]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/religious/take-special-care-of-your-health-on-mahashivratri-follow-these-important-measures-to-get-energy-during-the-fast/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव के भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन भक्त उपवास रखते हैं और रात्रि जागरण कर भगवान शिव की आराधना करते हैं। लेकिन लंबा उपवास और कम पानी पीने से शरीर पर प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में जरूरी है कि उपवास के दौरान कुछ महत्वपूर्ण सेहत [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/05/Clipboard-33.jpg"/><strong>पटना।</strong> महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव के भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन भक्त उपवास रखते हैं और रात्रि जागरण कर भगवान शिव की आराधना करते हैं। लेकिन लंबा उपवास और कम पानी पीने से शरीर पर प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में जरूरी है कि उपवास के दौरान कुछ महत्वपूर्ण सेहत संबंधी सावधानियों का पालन किया जाए, जिससे ऊर्जा बनी रहे और कमजोरी महसूस न हो। आइए जानते हैं कि महाशिवरात्रि के दिन उपवास रखते समय अपनी सेहत का ध्यान कैसे रखें।

<strong>1. हाइड्रेशन का रखें ध्यान</strong>

महाशिवरात्रि के व्रत में कई लोग पूरा दिन बिना पानी पिए उपवास रखते हैं, लेकिन यह शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है। शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) से सिरदर्द, चक्कर आना और थकान जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए अगर संभव हो तो बीच-बीच में गुनगुना पानी, नारियल पानी, नींबू पानी या फलों का रस लें, ताकि शरीर हाइड्रेटेड रहे।

<strong>2. ज्यादा देर खाली पेट न रहें</strong>

लंबे समय तक खाली पेट रहने से एसिडिटी और कमजोरी हो सकती है। अगर व्रत में फलाहार कर सकते हैं, तो समय-समय पर फल, मेवे, दूध, दही, मखाने या साबूदाने का सेवन करें। इससे शरीर को जरूरी पोषक तत्व मिलेंगे और दिनभर एनर्जी बनी रहेगी।

<strong>3. हल्का और संतुलित भोजन करें</strong>

अगर आप व्रत खोल रहे हैं, तो एकदम से भारी और तला-भुना खाना न खाएं। इससे पाचन तंत्र पर अचानक दबाव पड़ सकता है। व्रत खोलने के बाद फलों, छाछ, खिचड़ी, साबूदाने की खीर या हल्की सब्जियां खाएं, जिससे पेट को आराम मिले और पाचन सही बना रहे।

<strong>4. अत्यधिक चाय-कॉफी से बचें</strong>

कई लोग उपवास के दौरान अधिक चाय या कॉफी पीते हैं, जिससे शरीर में कैफीन की मात्रा बढ़ जाती है। यह डिहाइड्रेशन और एसिडिटी बढ़ा सकता है। इसकी जगह बिल्कुल हल्का दूध, नारियल पानी, हर्बल टी या तुलसी का काढ़ा लेना फायदेमंद रहेगा।

<strong>5. ज्यादा मीठा खाने से बचें</strong>

व्रत में लोग ज्यादा मीठा खा लेते हैं, जिससे शुगर लेवल अचानक बढ़ सकता है और शरीर सुस्त महसूस कर सकता है। बेहतर होगा कि मीठे में आप गुड़, शहद या प्राकृतिक मिठास वाले फल का सेवन करें, ताकि शरीर को फायदेमंद पोषण मिले।]]></content:encoded>
                    <pubDate>May 30, 2025, 7:05 am</pubDate>
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                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[महाशिवरात्रि के दिन भूलकर भी न करें ये गलती, वरना शिव जी हो जाएंगे नाराज,]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/religious/do-not-commit-this-mistake-on-mahashivratri-otherwise-lord-shiva-will-get-angry/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। महाशिवरात्रि के इस शुभ दिन पर भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति को विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है। यह दिन भक्तों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इस दिन व्रत और रात्रि जागरण करने से सभी पापों का नाश होता है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। लेकिन इस पावन दिन पर [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/05/Clipboard-33.jpg"/><strong>पटना।</strong> महाशिवरात्रि के इस शुभ दिन पर भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति को विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है। यह दिन भक्तों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इस दिन व्रत और रात्रि जागरण करने से सभी पापों का नाश होता है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। लेकिन इस पावन दिन पर कुछ गलतियां करने से पूजा का फल प्राप्त नहीं होता।

इन नियमों का पालन ना करने से भगवान शिव की कृपा भी नहीं मिलती। आइए जानते हैं कि महाशिवरात्रि के दिन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए और व्रत के खास नियम क्या हैं।
<h2><strong>महाशिवरात्रि व्रत के खास नियम</strong></h2>
1. <strong>स्नान और शुद्धता का विशेष ध्यान रखें:</strong> महाशिवरात्रि के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और शुद्ध वस्त्र धारण करें। अशुद्ध शरीर से पूजा करने से पुण्य की प्राप्ति नहीं होती।

2. <strong>पूजा में तामसिक चीजों का उपयोग न करें:</strong> शिवलिंग पर तुलसी, हल्दी, कुमकुम और नारियल पानी चढ़ाना वर्जित माना गया है। भगवान शिव को ये चीजें प्रिय नहीं हैं, इसलिए पूजा में इनका प्रयोग न करें।

3. <strong>शिवलिंग पर केतकी और केवड़ा फूल न चढ़ाएं:</strong> मान्यता है कि केतकी और केवड़ा के फूल भगवान शिव को अपशकुनकारक लगते हैं। इसलिए इन फूलों का प्रयोग पूजा में न करें।

4. <strong>शिव पूजा में कांस्य और स्टील के बर्तनों का प्रयोग न करें:</strong> पूजा में हमेशा तांबे, चांदी या मिट्टी के पात्रों का ही प्रयोग करें। स्टील और कांस्य के बर्तनों में जल अर्पण करना अशुभ माना जाता है।

5. <strong>महाशिवरात्रि व्रत में अनाज और नमक का सेवन न करें:</strong> इस दिन पूर्ण रूप से फलाहार करें। कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा, साबूदाना, दूध और फलों का सेवन करना उत्तम माना जाता है।]]></content:encoded>
                    <pubDate>May 30, 2025, 7:05 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/religious/do-not-commit-this-mistake-on-mahashivratri-otherwise-lord-shiva-will-get-angry/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[शुक्रवार के दिन पूजा करने से होगी पैसों की बरसात, बस करें ये काम]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/religious/worshiping-on-friday-will-bring-rain-of-money-just-do-this-work/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। माता लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व है, विशेषकर यदि कोई जातक शुक्रवार के दिन उनकी आराधना करता है. इस दिन माता की पूजा करने का एक अलग महत्व है, जिसे समझना आवश्यक है. मां लक्ष्मी को समृद्धि और धन की देवी माना जाता है. उनकी पूजा से घर में धन और समृद्धि की [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/05/Clipboard-33.jpg"/><strong>पटना।</strong> माता लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व है, विशेषकर यदि कोई जातक शुक्रवार के दिन उनकी आराधना करता है. इस दिन माता की पूजा करने का एक अलग महत्व है, जिसे समझना आवश्यक है. मां लक्ष्मी को समृद्धि और धन की देवी माना जाता है. उनकी पूजा से घर में धन और समृद्धि की वृद्धि होती है.
<h2><strong>माता लक्ष्मी की पूजा का महत्व</strong></h2>
धार्मिक मान्यता के मुताबिक अगर कोई व्यक्ति शुक्रवार के दिन सच्चे मन से मां लक्ष्मी की पूजा करता है, तो उसकी आर्थिक समस्याएं खत्म हो जाती हैं। मां लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करने से आर्थिक तंगी खत्म हो जाती है। इस दिन दुर्गा माता, संतोषी माता, और शुक्र की भी पूजा-अर्चना की जाती है। शुक्रवार के दिन माता लक्ष्मी की पूजा करने से जीवन में सुख, शांति बनी रहती है। साथ ही समृद्धि में वृद्धि होती है। माता लक्ष्मी की पूजा से मन की शांति बनी रहती है।
<h3><strong>आर्थिक तंगी कम होती है</strong></h3>
ऐसा माना जाता है कि लक्ष्मी जी की पूजा से परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम बना रहता है। गृह क्लेश में कमी आती है। शुक्रवार के दिन धन में वृद्धि के साथ-साथ बुद्धि की भी बढ़ोत्तरी होती है। यही कारण है कि इस दिन माता लक्ष्मी और माता संतोषी की पूजा की जाती है। इस दिन सफेद या गुलाबी रंग के कपड़े पहनने चाहिए। शुक्रवार के दिन शुभ मुहूर्त देखकर माता लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए।
<h3><strong>माता लक्ष्मी की पूजा विधि</strong></h3>
शुक्रवार के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लेना चाहिए। स्नान करने के बाद मां लक्ष्मी की प्रतिमा को स्थापित करना चाहिए। ध्यान रहे कि प्रतिमा की स्थापना उत्तर दिशा में की जाएगी। प्रतिमा के सामने घी का दीपक जलाएं। मां लक्ष्मी को फूल, लड्डू, चावल और हल्दी चढ़ानी चाहिए। माता लक्ष्मी के मंत्रों का जाप करना चाहिए। उनकी आरती उतारनी चाहिए। पूजा के बाद जरूरतमंद व्यक्तियों को अन्न, वस्त्र और धन का दान करना चाहिए।]]></content:encoded>
                    <pubDate>May 30, 2025, 7:05 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/religious/worshiping-on-friday-will-bring-rain-of-money-just-do-this-work/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
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                  </item><item>
                    <title><![CDATA[महाकुंभ के लिए बिहार से 8 स्पेशल ट्रेनों का होगा संचालन, देखें लिस्ट]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/good-news/8-special-trains-will-operate-from-bihar-for-mahakumbh-see-list/</link>
                    <description><![CDATA[पटना: महाशिवरात्रि पर प्रयागराज महाकुंभ में अंतिम अमृत स्नान होने वाला है। इस वजह से बिहार से महाकुंभ के लिए आठ विशेष ट्रेनें चलाई जाएंगी। अंतिम अमृत स्नान के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ महाकुंभ में पहुचेंगी। श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए समस्तीपुर रेल मंडल ने प्रयागराज के लिए आठ स्पेशल गाड़ियां चलाने [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/05/Clipboard-33.jpg"/><strong>पटना:</strong> महाशिवरात्रि पर प्रयागराज महाकुंभ में अंतिम अमृत स्नान होने वाला है। इस वजह से बिहार से महाकुंभ के लिए आठ विशेष ट्रेनें चलाई जाएंगी। अंतिम अमृत स्नान के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ महाकुंभ में पहुचेंगी। श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए समस्तीपुर रेल मंडल ने प्रयागराज के लिए आठ स्पेशल गाड़ियां चलाने का फैसला किया है। यह ट्रेनें 21 से 25 फरवरी के बीच चलाई जाएंगी।

&nbsp;
<h2><strong>देखें ट्रेनों की लिस्ट</strong></h2>
जयनगर: सुबह 11 बजे और शाम 4.45 बजे प्रयागराज के लिए ट्रेन।

दरभंगा-जलगांव: दोपहर 12 बजे ट्रेन खुलेगी।

नरकटियागंज : शाम 4 बजे प्रयागराज के लिए ट्रेन चलेंगी।

रक्सौल: शाम 4 बजे और रात 8 बजे प्रयागराज के लिए दो ट्रेनें चलाई जाएंगी.

पूर्णिया कोर्ट: सुबह 11 बजे प्रयागराज के लिए ट्रेन खुलेगी.

सहरसा: दोपहर 3 बजे ट्रेन प्रयागराज के लिए निकलेगी.

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<h2><strong>अमृत स्नान के लिए स्पेशल ट्रेन</strong></h2>
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महाशिवरात्रि पर होने वाली अमृत स्नान के लिए जयनगर से 25 तक रोजाना विशेष ट्रेन चलाई जायेगी। पहली ट्रेन: दोपहर 12 बजे, दरभंगा, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, हाजीपुर, छपरा होते हुए प्रयागराज पहुंचेगी।
दूसरी ट्रेन: शाम 4.45 बजे पाटलिपुत्र, पंडित दीन दयाल जंक्शन होते हुए प्रयागराज पहुंचेगी।]]></content:encoded>
                    <pubDate>May 30, 2025, 7:05 am</pubDate>
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                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
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                    <title><![CDATA[महाकुंभ जाने की होड़ में लगे श्रद्धालु, वाहनों की एंट्री पर लगी रोक, सड़कों पर लगा महाजाम]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/religious/devotees-are-in-a-race-to-go-to-maha-kumbh-entry-of-vehicles-is-banned-there-is-a-huge-traffic-jam-on-the-roads/</link>
                    <description><![CDATA[लखनऊ। यूपी के प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ में जाने के लिए श्रद्धालुओं में होड़ मच गई है। बिहार के भी कई लोग कुंभ स्नान के लिए वहां जल्दी से जल्दी पहुंचना चाहते हैं। लोगों की भारी भीड़ की वजह से सड़क पर यातायात व्यवस्था चरमरा गई है। महाकुंभ जाने वाले लोगों की भीड़ इतनी [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/05/Clipboard-33.jpg"/><strong>लखनऊ।</strong> यूपी के प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ में जाने के लिए श्रद्धालुओं में होड़ मच गई है। बिहार के भी कई लोग कुंभ स्नान के लिए वहां जल्दी से जल्दी पहुंचना चाहते हैं। लोगों की भारी भीड़ की वजह से सड़क पर यातायात व्यवस्था चरमरा गई है। महाकुंभ जाने वाले लोगों की भीड़ इतनी ज्यादा है कि इसे नियंत्रित करने में प्रशासन को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।
<h2><strong>नेशनल हाइवे-2 बंद कर दिया गया</strong></h2>
अब सासाराम जिले में नेशनल हाइवे-2 को बंद कर दिया गया है। ट्रैफिक व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए भारी गाड़ियों को यूपी में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया गया है। जिससे जीटी रोड पर जाम लग गया है। डेहरी से रोहतास सीमा खुरमाबाद बर्डर तक गाड़ियों की लंबी लाइन लगी है। गाड़ी के ड्राइवर और उसमे बैठे यात्रियों के लोगों को इस महाजाम का सामना करना पड़ रहा है। केवल सड़क पर ही नहीं बल्कि भीड़ का प्रभाव ट्रेनों पर भी पड़ रहा है। कुंभ में बढ़ती भीड़ को लेकर आरा-सासाराम मेमू पैसेंजर ट्रेन को रद्द कर दिया गया है।
<h3><strong>ऑटो और बसों मे काफी भीड़</strong></h3>
जिससे स्थानीय लोगों की परेशानी बढ़ गई है। इस दौरान ऑटो और बसों में भी काफी भीड़ हो रही है। महाकुंभ मेले में पूर्णिमा के अवसर पर अमृत स्नान के दौरान संभावित भीड़ को देखते हुए सोमवार शाम से बिहार से यूपी तक भारी वाहनों की एंट्री पर रोक लगा दी गई है। बिहार में कैमूर पुलिस और यूपी सीमा पर तैनात पुलिस पूरी तरह अलर्ट पर हैं। पुलिस ने रोहतास और बक्सर से आने वाले भारी वाहनों को एनएच-2 पर रोककर सड़क किनारे सुरक्षित खड़ा कराने की व्यवस्था की है। यूपी में न केवल भारी वाहनों की एंट्री पर रोक लगा दी गई है।]]></content:encoded>
                    <pubDate>May 30, 2025, 7:05 am</pubDate>
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                    <copyright>Inkhabar</copyright>
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                    <title><![CDATA[जया एकादशी पर इन खास उपायों को करने से होगी धन की वर्षा]]></title>
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                    <description><![CDATA[पटना। माघ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी, जिसे जया एकादशी के नाम से जाना जाता है, इस वर्ष 8 फरवरी 2025 को मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करने से जीवन के समस्त कष्टों से मुक्ति मिलती है और अपार धन-धान्य की प्राप्ति होती है। जया एकादशी का [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/05/Clipboard-33.jpg"/><strong>पटना।</strong> माघ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी, जिसे जया एकादशी के नाम से जाना जाता है, इस वर्ष 8 फरवरी 2025 को मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करने से जीवन के समस्त कष्टों से मुक्ति मिलती है और अपार धन-धान्य की प्राप्ति होती है।
<h2><strong>जया एकादशी का महत्व</strong></h2>
हिंदू धर्म में एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित है। जया एकादशी के दिन व्रत रखने और श्री हरि की उपासना करने से व्यक्ति के सभी दुख दूर होते हैं और जीवन सुखमय बनता है। ऐसी मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से पिशाच योनि से मुक्ति मिलती है और यह व्रत अश्वमेध यज्ञ के बराबर फलदायी होता है।
<h3><strong>जया एकादशी व्रत के नियम</strong></h3>
जया एकादशी व्रत से एक दिन पूर्व, दशमी तिथि को, हल्का भोजन या केवल फलाहार करना चाहिए, ताकि एकादशी के दिन पेट में कोई अवशिष्ट भोजन न रहे। एकादशी के दिन सूर्योदय से पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। दिनभर फलाहार व्रत रखें और अनाज का सेवन न करें। रात्रि में जागरण करते हुए भगवान विष्णु का स्मरण करें। द्वादशी तिथि पर सूर्योदय के बाद शुभ मुहूर्त में व्रत का पारण करें।
<h3><strong>जया एकादशी व्रत के विशेष उपाय</strong></h3>
जया एकादशी के दिन कुछ विशेष उपाय करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। व्यापार में वृद्धि के लिए: पीले कपड़े में 2 हल्दी की गांठ, एक चांदी का सिक्का, और एक पीली कौड़ी रखकर पोटली बनाएं। इसे धन स्थान पर रखें। करियर में उन्नति के लिए: शाम के समय घी का दीपक जलाकर "ॐ नमो भगवते नारायणाय" मंत्र का 11 बार जाप करें। कर्ज से मुक्ति के लिए: जटा वाले नारियल पर लाल मौली बांधकर बहते जल में प्रवाहित करें। कच्चे सफेद सूत के धागे को पीपल के पेड़ की 11 परिक्रमा करते हुए लपेटें। इन उपायों से जीवन के विभिन्न कष्टों से मुक्ति मिलती है।]]></content:encoded>
                    <pubDate>May 30, 2025, 7:05 am</pubDate>
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