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                    <title><![CDATA[आज है मासिक शिवरात्रि, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि]]></title>
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                    <description><![CDATA[पटना। हर महीने में एक बार मासिक शिवरात्रि आती है। इस बार मासिक शिवरात्रि 26 अप्रैल यानी आज है। यह दिन भगवान शिव को समर्पित होता है। इस दिन भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा की जाती है। इस खास दिन को भगवान शिव के भक्त अत्यंत श्रद्धा के साथ मनाते हैं। इस दिन महिलाएं [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-37.jpg"/><strong>पटना।</strong> हर महीने में एक बार मासिक शिवरात्रि आती है। इस बार मासिक शिवरात्रि 26 अप्रैल यानी आज है। यह दिन भगवान शिव को समर्पित होता है। इस दिन भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा की जाती है। इस खास दिन को भगवान शिव के भक्त अत्यंत श्रद्धा के साथ मनाते हैं। इस दिन महिलाएं व्रत भी रखती हैं। ऐसा माना जाता है कि इस दिन सच्चे मन से जो भी मांगे वो पूरा हो जाता है। इस दिन की गई भगवान शिव की पूजा से जीवन में सुख और शांति का आगमन होता है। आइए जानते हैं इस दिन का शुभ समय, पूजा विधि के बारे में।
<h2><strong>मासिक शिवरात्रि का शुभ समय</strong></h2>
सनातन धर्म में मासिक शिवरात्रि के दिन भगवान शिव की पूजा का खास महत्व होता है। मासिक शिवरात्रि के दिन की गई पूजा लाभकारी मानी जाती है। इस बार मासिक शिवरात्रि का व्रत 26 अप्रैल यानी आज रखा जाएगा। मासिक शिवरात्रि के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 53 मिनट से आरंभ होगा, जो रात को 9 बजकर 3 मिनट पर समाप्त होगा। पूजा के लिए शुभ समय 2 घंटे 10 मिनट का माना गया है। इस अवधि में की गई पूजा से खास फल की प्राप्ति होती है। इस समय की गई पूजा से भगवान शिव काफी प्रसन्न होंगे।
<h3><strong>मासिक शिवरात्रि की पूजा विधि</strong></h3>
मासिक शिवरात्रि पर भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करने से सभी इच्छाओं की पूर्ति होती है। जो महिलाएं मासिक शिवरात्रि का व्रत रखती हैं, उनके जीवन में हमेशा खुशियां बनी रहती हैं। मासिक शिवरात्रि के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान कर लेना चाहिए। स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लेना चाहिए। इसके बाद मंदिर की साफ-सफाई करके भगवान शिव की प्रतिमा या शिवलिंग को स्थापित करना चाहिए। इसके बाद शिवलिंग पर गंगाजल चढ़ाना चाहिए। फिर दही, शहद, दूध और बेलपत्र अर्पित करना चाहिए।
<h3><strong>भगवान शिव का मंत्र</strong></h3>
फिर ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करना चाहिए। इस मंत्र का जाप कम से कम 108 बार करना चाहिए। इसके बाद भगवान शिव को सच्चे दिल से याद करें। सूर्यास्त होने के बाद दोबारा शिव जी की पूजा करें। साथ ही भगवान शिव की कथा का पाठ करें।]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 26, 2025, 2:24 am</pubDate>
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                    <title><![CDATA[आज है चैत्र नवरात्रि का 5वां दिन, जानें स्कंदमाता की पूजा विधि और महत्त्व]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/religious/today-is-the-5th-day-of-chaitra-navratri-know-the-method-and-importance-of-skandmata-worship/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व जारी है और आज पांचवें दिन मां स्कंदमाता की उपासना की जा रही है। सनातन धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व है, जिसमें मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधिपूर्वक पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि इन दिनों देवी स्वयं धरती पर विराजमान रहती हैं और भक्तों [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-37.jpg"/><strong>पटना।</strong> चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व जारी है और आज पांचवें दिन मां स्कंदमाता की उपासना की जा रही है। सनातन धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व है, जिसमें मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधिपूर्वक पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि इन दिनों देवी स्वयं धरती पर विराजमान रहती हैं और भक्तों को आशीर्वाद देती हैं। इस बीच आइए जानते हैं कि आप स्कंदमाता का आशीर्वाद किस तरह उनकी पूजा-अर्चना कर प्राप्त कर सकते है.
<h2><strong>स्कंदमाता का स्वरूप</strong></h2>
मां स्कंदमाता चार भुजाओं वाली देवी हैं। वे अपने दाहिने हाथ से भगवान स्कंद (कार्तिकेय) को गोद में पकड़े हुए हैं, जबकि उनके अन्य हाथों में कमल का पुष्प और वरदमुद्रा स्थित है। इन्हें पद्मासना देवी भी कहा जाता है क्योंकि वे कमल पर विराजमान रहती हैं। धार्मिक मान्यता है कि इनकी पूजा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
<h2><strong>पूजा विधि और भोग</strong></h2>
मां स्कंदमाता की पूजा सूर्योदय से पूर्व स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद प्रारंभ की जाती है। लेकिन अगर आप सूर्योदय से पहले माता की पूजा नहीं कर पाएं है तो आप उसके बाद भी देवी को गंगाजल से स्नान कराकर, उन्हें चुनरी और वस्त्र अर्पित किए जाते हैं। इसके बाद रोली, कुमकुम और पुष्प चढ़ाकर, मिठाई व फलों का भोग लगाकर उनकी आरती की जाती है। इस दिन माता को केले का भोग अर्पित करने का विशेष महत्व है। मान्यता है कि ऐसा करने से संतान सुख एवं उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।
<h2><strong>स्कंदमाता के मंत्र</strong></h2>
मां को प्रसन्न करने के लिए भक्त विशेष मंत्रों का जाप कर सकते हैं "सिंहासना गता नित्यं पद्माश्रि तकरद्वया। शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी।।" नवरात्रि के इस पावन अवसर पर मां स्कंदमाता की विधिपूर्वक पूजा करने से भक्तों को फल की प्राप्ति होती है।]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 26, 2025, 2:24 am</pubDate>
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                    <title><![CDATA[भारत में आज मनाई जा रही ईद, जानें इस त्योहार का मनाने की वजह]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/religious/eid-is-being-celebrated-in-india-today-know-the-reason-for-celebrating-this-festival/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। इस साल भारत में रमजान का आगाज़ 2 मार्च यानी रविवार को हुआ। यहां नया चांद 1 मार्च की रात को देखा गया था। वहीं, सऊदी अरब में रमजान एक दिन पहले, यानी 1 मार्च से शुरू हो चुका था। आज यानी 31 मार्च को ईद की नमाज अदा की गई। वहीं सऊदी अरब [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-37.jpg"/><strong>पटना।</strong> इस साल भारत में रमजान का आगाज़ 2 मार्च यानी रविवार को हुआ। यहां नया चांद 1 मार्च की रात को देखा गया था। वहीं, सऊदी अरब में रमजान एक दिन पहले, यानी 1 मार्च से शुरू हो चुका था। आज यानी 31 मार्च को ईद की नमाज अदा की गई। वहीं सऊदी अरब में ईद की नमाज एक दिन पहले यानी 30 मार्च को पढ़ी गई। आज पूरा देश धूमधाम से ईद का त्योहार मना रहा है। आइए जानते हैं ईद उल फितर का मतलब।
<h2><strong>इबादत और दान का महीना</strong></h2>
ईद उल फितर का अर्थ है ‘रोजा खोलने का त्योहार’। यह रमजान के समाप्ति का उत्सव है, जो इबादत, दान और आत्म-ज्ञान का महीना माना जाता है। इसे इस्लाम की पांच प्रमुख शिक्षाओं में से एक माना जाता है और इसे आभार, पुरस्कार और आनंद के रूप में पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है। ईद उल फितर इस्लाम धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। इसे रमजान के पवित्र महीने के बाद मनाया जाता है। यह त्योहार भाईचारे, दान और खुशियों का त्योहार है। यह त्योहार रमजान के पूरे महीने रोजा रखने के बाद आता है।
<h2><strong>पिछले साल 11 अप्रैल को ईद</strong></h2>
यह इबादत और संयम का महीना माना जाता है। इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक रमजान के बाद शव्वाल की पहली तारीख को ईद उल फितर मनाया जाता है। इस खास त्योहार की सुबह नमाज पढ़कर की जाती है। इस त्योहार में हजारों लोग एक साथ अल्लाह से दुआ मांगते हैं। इस बार रमजान की शुरुआत 2 मार्च से शुरु हुई थी। 30 जनवरी को देश में पूरा चांद दिखा, इसलिए 31 मार्च यानी आज ईद मनाई जा रही है।
<h2><strong>पिछले साल 11 अप्रैल को ईद</strong></h2>
इस दिन लोग एक-दूसरे को गले लगाकर ईद की बधाई देते हैं। साथ ही ईद उल फितर को मीठी ईद भी कहा जाता है। इस दिन सेवइयां और कई तरह के व्यंजन खाए जाते हैं ।
भारत में पिछले साल 10 अप्रैल को ईद का चांद दिखाई दिया था। 2024 में सऊदी अरब में 9 अप्रैल को चांद देखा गया, जिसके बाद 10 अप्रैल को ईद-उल-फितर की नमाज पढ़ी गई। वहीं, भारत में 10 अप्रैल को चांद दिखा और 11 अप्रैल को ईद की नमाज अदा की गई।]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 26, 2025, 2:24 am</pubDate>
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                    <title><![CDATA[गुरु प्रदोष व्रत में इन उपायों को अपनाने से होंगी सभी परेशानियां दूर]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/religious/all-your-problems-will-be-solved-by-adopting-these-measures-during-guru-pradosh-fast/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। इस बार प्रदोष व्रत 27 मार्च यानी आज रखा जा रहा है। यह दिन भगवान शिव को समर्पित होता है। इस दिन भगवान शिव की विधिपूर्वक पूजा की जाती है। इस बार प्रदोष व्रत महीने के आखिर में पड़ रहा है, जिस वजह से इसे गुरू [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-37.jpg"/><strong>पटना।</strong> त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। इस बार प्रदोष व्रत 27 मार्च यानी आज रखा जा रहा है। यह दिन भगवान शिव को समर्पित होता है। इस दिन भगवान शिव की विधिपूर्वक पूजा की जाती है। इस बार प्रदोष व्रत महीने के आखिर में पड़ रहा है, जिस वजह से इसे गुरू प्रदोष व्रत भी कहा जा रहा है। अलग-अलग महीने में पड़ने वाले प्रदोष की महिमा अलग होती है।
<h2><strong>प्रदोष व्रत के कुछ उपाय</strong></h2>
इस दिन व्रत करने वाले की हर इच्छा पूरी होती है। गुरु प्रदोष व्रत से संतान संबंधी मनोकामनाएं भी पूरी होती हैं। गुरु प्रदोष व्रत रखने से शत्रु और विरोधी शांत होते हैं। इस दिन सच्चे मन से भगवान शंकर की पूजा करने से मुकदमों और विवादों में सफलता मिलती है। भगवान भोलेनाथ पूजा करने मात्र से ही अपने भक्तों से प्रसन्न हो जाते हैं, लेकिन गुरु प्रदोष व्रत में शिव की आराधना के कुछ खास नियम हैं। ऐसा माना जाता है कि इस व्रत का पूरा फल तभी मिलता है जब आप इस व्रत के सारे नियमों का पालन करें।
<h2><strong>बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए</strong></h2>
एक पीतल के लोटे में पानी, हल्दी, गुड़ और चने की दाल डालें। इसे केले के पेड़ की जड़ में डाल दें। इसे डालने के बाद पेड़ के सामने गाय के घी का दिया जलाएं। वहीं बृहस्पति स्तोत्र का तीन बार पाठ करें। घर वापस आते समय केले के पेड़ की जड़ से मिट्टी लें और इसे अपने बच्चों के माथे पर लगा दें। इससे आपके बच्चे का भविष्य उज्जवल बनेगा।
<h2><strong>सकारात्मक ऊर्जा के लिए</strong></h2>
अपने स्नान के जल में सात चुटकी हल्दी डालकर उस पानी से नहां लें। अपने घर की उत्तर पूर्व दिशा में मिट्टी के बर्तन में जल भरकर रख दें। समय-समय पर इसे बदलते रहें। ऐसा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। घर में मौजूद सारी नकारात्मक ऊर्जा गायब हो जाती है।
<h2><strong>भगवान की कृपा के लिए</strong></h2>
पीले आसन पर बैठकर पूर्व दिशा की तरफ मुंह रखें। हल्दी की माला से गुरुवार को भगवान शिव के मंत्रों का जाप करें। ऐसा करने से भगवान शिव की कृपा आप पर बनी रहती है। आप सच्चे दिल से जो भी ईश्वर से मांगते हो, वो पूरा हो जाता है।
<h2><strong>परेशानियों को दूर करने के लिए</strong></h2>
प्रदोष व्रत के दिन जरूरतमंद लोगों को पीला कपड़ा, पीली मिठाई, चने की दाल, हल्दी और गुड़ का दान करना चाहिए। ऐसा करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं। साथ ही आपकी जीवन में आ रही किसी भी तरह की कठिनाई दूर हो जाती है।
<h2><strong>घर की सुख-शांति के लिए</strong></h2>
घर में सुख-शांति बनाए रखने के लिए प्रदोष काल में भगवान शिव की विधिपूर्वक पूजा करें। शिवजी को पीले फूल अर्पित करें। साथ ही "ॐ नमो भगवते रुद्राय" मंत्र का 11 माला जाप करें। ऐसा करने से भगवान शिव घर में मौजूद किसी भी तरह की नकारात्मक शक्ति का नाश करते हैं।]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 26, 2025, 2:24 am</pubDate>
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                    <title><![CDATA[खुशहाल होली, सुरक्षित होली: बच्चों को केमिकल रंगों से बचाने के तरीके]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/lifestyle/happy-holi-safe-holi-ways-to-protect-children-from-chemical-colours/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। होली रंगों का त्योहार है। इसे पूरे भारत में धूमधाम से मनाया जाता है। होली का त्योहार बच्चों के लिए खुशी और उत्साह लेकर आता है। लेकिन, इस त्योहार में इस्तेमाल होने वाले केमिकल रंग आपकी और बच्चों की हेल्थ के लिए नुकसानदायक होते है। केमिक वाले रंग नाजुक त्वचा और आंखों नुकसान पहुंचा [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-37.jpg"/><strong>पटना।</strong> होली रंगों का त्योहार है। इसे पूरे भारत में धूमधाम से मनाया जाता है। होली का त्योहार बच्चों के लिए खुशी और उत्साह लेकर आता है। लेकिन, इस त्योहार में इस्तेमाल होने वाले केमिकल रंग आपकी और बच्चों की हेल्थ के लिए नुकसानदायक होते है। केमिक वाले रंग नाजुक त्वचा और आंखों नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए, होली खेलते समय बच्चों की सुरक्षा का खास ध्यान रखना जरूरी है। आइए जानें कैसे होली पर बच्चों को सेफ रख सकते हैं।
<h2><strong>केमिकल वाले रंगों से बचें</strong></h2>
होली खेलते समय बच्चों को सिंथेटिक रंगों से बचाना चाहिए,क्योंकि इनमें हानिकारक केमिकल होते हैं। जो त्वचा और आंखों को हानि पहुंचाते हैं। कई बार तो इन रंगों में कांच मिला होता है जो त्वचा को नुकसान पहुंचाता है। हो सके तो नेचुरल रंगों का इस्तेमाल करें, जो फूलों आदि से बने होते हैं।
<h2><strong>पूरे शरीर पर तेल लगाएं</strong></h2>
होली खेलने से पहले बच्चों के पूरे शरीर पर नारियल या सरसों का तेल अच्छी तरह से लगाना चाहिए। तेल रंगों को त्वचा में गहराई तक जाने से रोकने का काम करता है। साथ ही यह पक्के या कच्चे रंगों को आसानी से उतारने में मदद करता है।
<h2><strong>फुल स्लीव्स के कपड़े पहनाएं</strong></h2>
होली में बच्चों को फुल स्लीव्स के कपड़े पहनाएं, ताकि उनकी त्वचा पर कम से कम रंग जाए। फुल स्लीवस के कपड़े पहनने से बच्चों का केमिकल रंगों से संपर्क कम होता है। जिससे केमिकल वाले रंग उनके शरीर से दूर रहते है। फुल स्लीव्स के कपड़े बच्चों को गुब्बारे जैसी तेज लगने वाली चीजों से भी बचाते है।
<h2><strong>नहाने के बाद मॉश्चराइजर लगाएं</strong></h2>
होली खेलने के पहले और खेलने के बाद बच्चों की त्वचा पर मॉश्चराइजर लगाएं। ऐसा करने से रंगा ज्यादा समय तक शरीर पर नहीं रहते। ना ही त्वचा रूखी होती है। बच्चे के होली खेलने के बाद उससे अच्छे से नहलाकर उसके पूरे शरीर पर मॉश्चराइजर लगाना जरूरी होता है।
<h2><strong>माल्ड साबुन का उपयोग करें</strong></h2>
होली खेलने के बाद बच्चों को नहलाने के लिए ज्यादा हार्श साबुन का इस्तेमाल न करें। इससे बच्चों की नाजुक त्वचा को नुकसान पहुंचता है। हो सके तो बच्चों के माइल्ड शैम्पू या साबुन का इस्तेमाल करें। ऐसा करने से इनकी त्वचा मुलायम रहेगी।]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 26, 2025, 2:24 am</pubDate>
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                    <title><![CDATA[क्यों मनाई जाती है रंग पंचमी, क्या है इसका महत्व]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/religious/why-is-rang-panchami-celebrated-what-is-its-importance/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। होली के 5 दिन बाद रंग पंचमी पड़ती है। रंग पंचमी को श्रीपंचमी के नाम से भी जाना जाता है। रंग पंचमी के दिन रंग और गुलाल खेलने की परंपरा है। इस साल रंग पंचमी का पर्व 19 मार्च को है। इस दिन होली के बाद एक बार फिर रंगों से होली खेली जाती [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-37.jpg"/><strong>पटना।</strong> होली के 5 दिन बाद रंग पंचमी पड़ती है। रंग पंचमी को श्रीपंचमी के नाम से भी जाना जाता है। रंग पंचमी के दिन रंग और गुलाल खेलने की परंपरा है। इस साल रंग पंचमी का पर्व 19 मार्च को है। इस दिन होली के बाद एक बार फिर रंगों से होली खेली जाती है। इस दिन पूरे ब्रज की भूमि एक बार फिर से रंगों में नहाती है।
<h2><strong>रंग पंचमी का महत्व</strong></h2>
होली और रंग पंचमी दोनों ही रंगों से जुड़े त्योहार हैं, लेकिन इनका महत्व काफी अलग है। होली पर लोग एक-दूसरे पर रंग लगाकर प्यार और भाईचारा बढ़ाते हैं। रंग पंचमी पर देवी-देवताओं को रंग लगाया जाता है। इस दिन आसमान में रंग उड़ाए जाते हैं। उड़ाए गए रंगों से देवता खुश होते हैं और अपना आशीर्वाद देते हैं। ऐसा माना जाता है कि होली आपसी प्रेम का त्योहार है। जबकि रंग पंचमी देवी-देवताओं की आराधना का त्योहार है।
<h2><strong>रंग पचंमी का शुभ मुहूर्त</strong></h2>
रंग पंचमी पर गुलाल को हवा में उछालकर देवताओं को चढ़ाया जाता है। इससे देवी- देवता प्रसन्न होते हैं और कृपा बरसाते हैं। आइए देखते हैं रंग पंचमी पर अपने घर पर किस तरह से पूजा की जाती है, साथ ही यह भी जानें कि यह शुभ तिथि कब से कब तक की होती है। रंग पंचमी 19 मार्च को मनाई जाएगी। चैत्र महीने के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि 18 मार्च रात 10 बजकर 9 मिनट पर शुरू होगी। यह 20 मार्च रात 12 बजकर 37 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि के मुताबिक रंग पंचमी 19 मार्च को ही मनाई जाएगी।
<h2><strong>गुलाल उड़ाने की परंपरा</strong></h2>
मतलब जिस दिन सूर्योदय के समय पंचमी तिथि हो, उसी दिन त्योहार मनाया जाता है। इसलिए 19 मार्च को रंगों का यह दूसरा पर्व धूम-धाम से मनाया जाएगा। रंग पंचमी को लेकर ऐसी मान्‍यता है इस दिन श्रीकृष्ण और राधा रानी ने होली मनाई थी। स्वर्ग से देवी-देवता भी इस दिन पुष्प वर्षा करते हैं। इसलिए रंग पंचमी पर अबीर-गुलाल उड़ाने की परंपरा है। पंचमी के दिन रंगों का उत्सव दैवीय शक्तियों को प्रसन्न करने के लिए मनाया जाता है। इससे लोगों के कष्ट दूर होते हैं और जीवन में सुख-शांति आती है।
<h2><strong>देवियों को गुलाल अर्पित करना</strong></h2>
इस दिन की दैवीय कृपा से घर में समृद्धि बनी रहती है। यह त्योहार खुशियां और सकारात्मकता का प्रतीक है। रंग पंचमी का त्योहार हमें आपसी प्रेम और भाईचारे का संदेश देता है। रंग पंचमी के दिन लक्ष्‍मी माता और राधा रानी की प्रतिमा पर गुलाल अपर्ति करने से घर में संपन्‍नता आती है। साथ ही मां लक्ष्‍मी का आगमन होता है।]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 26, 2025, 2:24 am</pubDate>
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                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[आज है महाशिवरात्रि, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/festival/today-is-mahashivratri-know-the-auspicious-time-and-method-of-worship/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। महाशिवरात्रि का व्रत करने से भगवान शिव अति शीघ्र प्रसन्‍न होकर आपकी सभी इच्‍छाएं पूर्ण करते हैं और आपके सभी कष्‍ट दूर करके आपके जीवन को खुशियों से भर देते हैं। शिवपुराण में बताया गया है कि महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह संपन्‍न हुआ था। महाशिवरात्रि का शुभ मुहूर्त [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-37.jpg"/><strong>पटना।</strong> महाशिवरात्रि का व्रत करने से भगवान शिव अति शीघ्र प्रसन्‍न होकर आपकी सभी इच्‍छाएं पूर्ण करते हैं और आपके सभी कष्‍ट दूर करके आपके जीवन को खुशियों से भर देते हैं। शिवपुराण में बताया गया है कि महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह संपन्‍न हुआ था।
<h2><strong>महाशिवरात्रि का शुभ मुहूर्त</strong></h2>
महाशिवरात्रि पर भक्त शिव जी को प्रसन्न करने के लिए जलाभिषेक करते हैं। सुबह का समय विशेष फलदायी माना जाता है। लेकिन दिन और रात में भी पूजा के लिए अच्छे मुहूर्त हैं। जलाभिषेक ब्रह्म मुहूर्त से ही शुरू हो जाता है। सुबह 6 बजकर 48 मिनट से 9 बजकर 41 मिनट तक का सबसे उत्तम समय है। इसके बाद 11 बजकर 7 मिनट से लेकर 12 बजकर 34 मिनट तक का समय भी शुभ मुहूर्त है। शाम को 3 बजकर 26 मिनट से लेकर 6 बजकर 9 मिनट तक और फिर रात में 8 बजकर 53 मिनट से लेकर 12 बजकर 1 मिनट तक भी पूजा कर सकते हैं।
<h3><strong>शिवरात्रि की पूजा विधि</strong></h3>
व्रती को सुबह स्नान कर ले। स्नान के बाद भस्म और त्रिपुण्ड तिलक लगाएं। गले में रुद्राक्ष की माला धारण करके हाथ में जल लेकर मंत्र का जाप करें। पूजा के दौरान शिवरात्रिव्रतं ह्येतत् करिष्येऽहं महाफलम् । निर्विघ्नमस्तु मे चात्र त्वत्प्रसादाञ्जगत्पते । शाम के समय हो सके तो एक बार फिर स्नान कर लें। मंदिर जाकर शिव जी की पूजा करें। भगवान को पुष्प, बेल पत्र, धतूरा, केला, धूप अर्पित करें। भगवान को मीठे का भोग लगाएं। शिवलिंग पर दूध चढ़ाना चाहिए।]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 26, 2025, 2:24 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/festival/today-is-mahashivratri-know-the-auspicious-time-and-method-of-worship/</guid>
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                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Mahashivratri 2025: भोलेनाथ को महाशिवरात्रि पर चढ़ाएं ये फूल, मिलेंगे खूब आशीर्वाद]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/festival/vishal-dadlani-challenged-cm-yogi-on-what-issue-the-connection-is-with-mahakumbh/</link>
                    <description><![CDATA[पटना: महाशिवरात्रि भगवान शिव से जुड़े कई त्योहारों में से एक है, जो फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। शिव आराधना के लिए महाशिवरात्रि का पर्व बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस साल महाशिवरात्रि 26 फरवरी 2025 को मनाई जाएगी. भगवान शिव की विशेष पूजा महाशिवरात्रि पर भगवान शिव [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-37.jpg"/><strong>पटना:</strong> महाशिवरात्रि भगवान शिव से जुड़े कई त्योहारों में से एक है, जो फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। शिव आराधना के लिए महाशिवरात्रि का पर्व बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस साल महाशिवरात्रि 26 फरवरी 2025 को मनाई जाएगी.
<h2><strong>भगवान शिव की विशेष पूजा</strong></h2>
महाशिवरात्रि पर भगवान शिव की विशेष पूजा की जाती है। महाशिवरात्रि पर दिन के साथ-साथ रात के भी चारों प्रहर की पूजा करने की परंपरा है। यह शिव पूजा के लिए सर्वोत्तम दिन माना जाता है। इसलिए महाशिवरात्रि पर सुबह से ही शिव मंदिरों में भक्तों की भीड़ लगी रहती है. हालांकि, यदि महादेव को श्रद्धापूर्वक एक लोटा शुद्ध जल भी अर्पित किया जाए तो वे प्रसन्न हो जाते हैं। ऐसे में इस दिन भक्त भगवान को उनकी पसंदीदा चीजें अर्पित करते हैं और अपनी मनोकामना पूरी होने का आशीर्वाद पाते हैं।
<h3><strong>फूल-माला चढ़ाने की परंपरा</strong></h3>
महाशिवरात्रि के दिन भी भक्त भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए फूल-मालाएं चढ़ाते हैं। लेकिन जहां कुछ फूल भगवान को बेहद प्रिय होते हैं वहीं कुछ फूल ऐसे भी होते हैं जो भगवान शिव को पसंद नहीं होते हैं, अगर आप इन फूलों को चढ़ाएंगे तो महादेव नाराज हो जाएंगे। इसलिए चलिए जानते हैं महाशिवरात्रि पर महादेव को कौन से फूल चढ़ाने चाहिए और कौन से नहीं।

<strong>धतूरे का फूल-</strong> धतूरा भी भगवान शिव की पसंदीदा चीजों में से एक है, जिसके फूल आप उन्हें अर्पित कर सकते हैं. ऐसा माना जाता है कि शिवलिंग पर श्रद्धापूर्वक धतूरे का फूल चढ़ाने से व्यक्ति को पुण्य की प्राप्ति होती है और उसके सभी पाप धुल जाते हैं।

<strong>आक का फूल-</strong> शिवलिंग पर आक का फूल चढ़ाने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इसलिए महाशिवरात्रि की पूजा के दौरान भगवान शिव को आक का फूल जरूर चढ़ाएं।

<strong>कनेर का फूल-</strong> भगवान शिव की पूजा में कनेर का फूल चढ़ाना शुभ होता है. मान्यता है कि इस सफेद और लाल फूल को चढ़ाने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं।

&nbsp;]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 26, 2025, 2:24 am</pubDate>
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                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[आज है शिवाजी महाराज की जयंती, जानें कैसे बचाई थी उन्होंने अपनी जान]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/festival/today-is-shivaji-maharajs-birth-anniversary-know-how-he-saved-his-life/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। मराठा सम्राट छत्रपति शिवाजी महाराज भारतीय इतिहास के सबसे वीर योद्धाओं में से एक हैं। इनकी वीर गाथा के हर जगह प्रचलित है। शिवाजी महाराज का नाम हर मराठा गर्व से लेता है। वह केवल महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि पूरे देश में वीरता की एक मिसाल हैं। छत्रपति शिवाजी का जन्म छत्रपति शिवाजी न [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-37.jpg"/><strong>पटना।</strong> मराठा सम्राट छत्रपति शिवाजी महाराज भारतीय इतिहास के सबसे वीर योद्धाओं में से एक हैं। इनकी वीर गाथा के हर जगह प्रचलित है। शिवाजी महाराज का नाम हर मराठा गर्व से लेता है। वह केवल महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि पूरे देश में वीरता की एक मिसाल हैं।
<h2><strong>छत्रपति शिवाजी का जन्म</strong></h2>
छत्रपति शिवाजी न केवल रणनीतिक बुद्धिमत्ता के लिए जाने जाते है, बल्कि एक सशक्त मराठा साम्राज्य की नींव रखने के लिए भी जाना जाते है। शिवाजी महाराज की जयंती हर साल 19 फरवरी को मनाई जाती है। इस दिन उनकी वीरता, शौर्य और नेतृत्व जीवन को याद किया जाता है। आइए जानते हैं छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन से जुड़े रोचक तथ्य। शिवाजी महाराज का जन्म 19 फरवरी 1630 को शिवनेरी किले में हुआ था। उनके पिता शाहजी भोंसले बीजापुर के एक सेनापति थे।
<h3><strong>मराठा साम्राज्य की नींव रखी</strong></h3>
शिवाजी महाराज की माता जीजाबाई ने उन्हें बचपन से ही धर्म, नैतिकता और युद्ध कौशल की शिक्षा दी थी। कहा जाता है कि जीजाबाई ने उन्हें रामायण और महाभारत की कहानियां सुनाकर एक महान योद्धा बनने के लिए प्रेरित किया। शिवाजी महाराज ने 16 साल की उम्र में ही बीजापुर के तोरणा किले पर कब्जा कर लिया था। यह उनकी पहली जीत थी, जिसने उनकी वीरता को साबित किया। इसके बाद उन्होंने कई अन्य किलों को जीता और मराठा साम्राज्य की नींव रखी।
<h3>नाखून से किया अफजल का वध</h3>
बीजापुर के सुल्तान ने शिवाजी महाराज को हराने के लिए अफजल खान नामक एक क्रूर सेनापति को भेजा था। उसने शिवाजी को धोखे से मारने का प्लान बनाया। इसके लिए अफजल खान ने उन्हें मिलने के लिए बुलाया, लेकिन शिवाजी महाराज ने पहले ही उसकी चाल को भांप लिया था। जब अफजल खान ने शिवाजी को गले लगाने के बहाने उन पर हमला करने की कोशिश की तो उन्होंने अपने नाखून जैसे हथियार से उससे मार डाला।
<h3>किले से बाहर निकलने की योजना बनाई</h3>
औरंगजेब ने शिवाजी महाराज को आगरा बुलाकर धोखे से कैदी बना लिया। उन्हें आगरा के किले में कड़े पहरे के बीच रखा गया। लेकिन शिवाजी ने महाराज ने अपनी बुद्धि का इस्तेमाल करते हुए खुद को बचा लिया। उन्होंने बीमार होने का नाटक किया और अपने भोजन की टोकरियों में खुद को छिपाकर बाहर निकलने का प्लान बनाया। इस चतुराई भरी योजना के जरिए वे आगरा किले से बचकर सफलतापूर्वक बाहर आए और वापिस महाराष्ट्र लौट गए।]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 26, 2025, 2:24 am</pubDate>
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                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[आज है जया एकादशी, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/festival/today-is-jaya-ekadashi-know-the-auspicious-time-worship-method-and-importance/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। फरवरी महीने में जया एकादशी और विजया एकादशी का व्रत किया जाता है। आज यानी 7 फरवरी को जया एकादशी मनाई जा रही है। यह एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित होती है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन सृष्टि के पालनकर्ता श्री हरि और माता लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करने से सभी इच्छाओं [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-37.jpg"/><strong>पटना।</strong> फरवरी महीने में जया एकादशी और विजया एकादशी का व्रत किया जाता है। आज यानी 7 फरवरी को जया एकादशी मनाई जा रही है। यह एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित होती है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन सृष्टि के पालनकर्ता श्री हरि और माता लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करने से सभी इच्छाओं की पूर्ति होती है।
<h2><strong>जया एकादशी का शुभ मुहूर्त</strong></h2>
जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। आइए जानते है जया एकादशी का शुभ मुहूर्त और महत्व। जया एकादशी 07 फरवरी 2025 रात 09 बजकर 26 मिनट पर शुरू होगी। जो अगले दिन यानी 08 फरवरी 2025 को रात 08 बजकर 15 मिनट पर खत्म होगी। जया एकादशी के दिन पूजा का ब्रह्म मुहूर्त सुबह 05:21 से 06:13 बजे तक का है। वहीं रवि योग सुबह 07:05 से शाम 06:07 बजे तक का होगा। अमृत काल की शुरूआत सुबह 09:31 से शुरू होकर 11:05 तक रहेगा।
<h3><strong>जया एकादशी का महत्व</strong></h3>
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक जया एकादशी का व्रत रखने से सभी तरह के पापों से मुक्ति मिलती है। जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। ऐसा माना जाता है कि भगवान श्रीराम ने भी लंका पर विजय प्राप्त करने से इसी व्रत का पालन किया था। इस व्रत को करने से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। वहीं मोक्ष की भी प्राप्ति होती है। ऐसा कहा जाता है कि जया एकादशी के दिन व्रत करने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है। इस दिन व्रत करने से सभी तरह की इच्छाएं पूरी होती हैं।
<h3><strong>जया एकादशी की पूजा विधि</strong></h3>
इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लेना चाहिए। स्नान करने के बाद साफ कपड़े पहनने चाहिए। व्रत का संकल्प लेना चाहिए। । घर में पूजा स्थान में भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित करें। भगवान विष्णु को पीले फूल, धूप, तुलसी दल, दीप, फल, मिष्ठान आदि अर्पित करने चाहिए। भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें। जैसे ॐ नमो भगवते वासुदेवाय। जया एकादशी की कथा का पाठ करें। भगवान विष्णु की आरती करें। भगवान विष्णु को भोग लगाकर सब में प्रसाद बांट दें।]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 26, 2025, 2:24 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/festival/today-is-jaya-ekadashi-know-the-auspicious-time-worship-method-and-importance/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[आज है बसंत पंचमी, इस मुहूर्त में करें दान पुण्य का काम]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/festival/today-is-basant-panchami-do-charity-work-in-this-auspicious-time/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। आज पूरे देश में भक्ति-भाव के साथ बसंत पंचमी का त्योहार मनाया जा रहा है। आज के शुभ अवसर पर सोमवार को मां शारदे की विधि-विधान से पूजी की जाती है। रविवार को माघ शुक्ल पंचमी शुरू हो गई है, लेकिन उदयातिथि के कारण पटना में सरस्वती पूजा सोमवाीर के दिन मनाई जा रही [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-37.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पटना।</strong> आज पूरे देश में भक्ति-भाव के साथ बसंत पंचमी का त्योहार मनाया जा रहा है। आज के शुभ अवसर पर सोमवार को मां शारदे की विधि-विधान से पूजी की जाती है। रविवार को माघ शुक्ल पंचमी शुरू हो गई है, लेकिन उदयातिथि के कारण पटना में सरस्वती पूजा सोमवाीर के दिन मनाई जा रही है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>बसंत पंचमी का शुभ मुहूर्त</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>सोमवार को श्रद्धालु रेवती नक्षत्र में सिद्धि एवं साध्य योगी के मेल के बीच ज्योतिषाचार्य पीके युग बताते है कि पंचमी तिथि सोमवार को सुबह 9.36 बजे तक ही रहेगी। इसके पहले पूजा करना श्रेयस्कर होगा। वैसे उदयातिथि के कारण पूरे दिन मां सरस्वती की पूजा की जाएगी। उन्होंने बताया कि ब्रह्मवैवर्त पुराण में इस तिथि को अक्षारमभ ,विद्यारम्भ आदि के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। इस दिन छोटे बच्चों को खल्ली छूने की परंपरा से उसके पढ़ाई-लिखाई की शुरूआत कराने का विधान होता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>इस दिन करने चाहिए शुभ कार्य</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस दिन से खल्ली छूने की परंपरा से पैरेंट्स की ओर से अपने बच्चों की पढ़ाई-लिखाई की शुरूआत किया जाता है। ज्योतिषाचार्य पीके युग ने बताया कि बसंत पंचमी के दिन अबूझ मुहूर्त होता है। इसका मतलब है कि इस दिन मुंडन, गृह प्रवेश, संस्कार, भवन निर्माण की नींव डालना, जमीन और वाहन आदि की खरीदारी की जा सकती है। इस दिन पीले या सफेद कपड़े पहनने चाहिए। इसके बाद पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुंह करके पूजा की शुरूआत की जाती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>मीठी खीर का भोग लगाएं</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>सूर्योदय या सूर्यास्त के बाद के ढाई घंटे बाद पूजा की शुरूआत करनी चाहिए। मां सरस्वती को चंदन और पीले या सफेद फूल अर्पित करने चाहिए। प्रसाद में मिश्री, दही और लावा का भोग लगाकर बांटना चाहिए। केसर से बनी खीर भी मां सरस्वती को अर्पित कर सकते है। इसके बाद मां सरस्वी के मूल मंत्र का जाप करना चाहिए।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 26, 2025, 2:24 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/festival/today-is-basant-panchami-do-charity-work-in-this-auspicious-time/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[गुप्त नवरात्रि में इन देवियों की होती है पूजा, मिलता है मनचाहा फल]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/festival/these-goddesses-are-worshiped-during-gupt-navratri-one-gets-the-desired-results/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। पूरे एक साल में 4 नवरात्रि आते हैं। पहले दो चैत्र और शारदीय नवरात्रि है। बाकि दो नवरात्रि माघ और आषाढ़ के समय आते है,जिन्हें गुप्त नवरात्रि के नाम से जाना जाता है। इस साल गुप्त नवरात्रि की शुभारंभ 30 जनवरी 2025 आरंभ है। शुक्ल पक्ष में मनाए जाते गुप्त नवरात्र माघ मास के [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-37.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पटना।</strong> पूरे एक साल में 4 नवरात्रि आते हैं। पहले दो चैत्र और शारदीय नवरात्रि है। बाकि दो नवरात्रि माघ और आषाढ़ के समय आते है,जिन्हें गुप्त नवरात्रि के नाम से जाना जाता है। इस साल गुप्त नवरात्रि की शुभारंभ 30 जनवरी 2025 आरंभ है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>शुक्ल पक्ष में मनाए जाते गुप्त नवरात्र</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>माघ मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तक गुप्त नवरात्रि मनाई जाती है। इस साल गुप्त नवरात्र का शुभारंभ 30 जनवरी 2025, गुरुवार से शुरू होकर 07 फरवरी 2025, शुक्रवार को समाप्त होगा। इस दौरान जिन 10 महाविद्याओं की पूजा की जाती है वह कुछ इस तरह हैं- तारा देवी, मां काली, भुवनेश्वरी, त्रिपुर सुंदरी, माता छिन्नमस्ता, मां धूमावती, त्रिपुर भैरवी, माता मातंगी, माता बगलामुखी और कमला देवी। गुप्ता नवरात्रि में इन 10 महाविधियों की विधि-विधान से पूजा की जाती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>सिद्धि प्राप्ति के लिए करते है पूजा</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>यह पूजा तांत्रिक, अघोरी गुप्त नवरात्रि मे तंत्र- मंत्र की सिद्धि प्राप्ति करने के लिए की जाती है। वहीं चैत्र और शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के 9 रूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। सभी नवरात्रि का शुभारंभ वैदिक पंचांग के मुताबिक कलश स्थापना से शुरू हो जाता है। इन नवरात्रियों के दौरान देवी साधना से देवी शीघ्र प्रसन्न होती हैं और इच्छाओं की पूर्ति करती हैं। साधना की गोपनीयता जितनी ज्यादा होगी, फल भी उतना ही जल्दी मिलेगा। इन दिनों श्री दुर्गा सप्तशती, मंत्र जाप और हवन के माध्यम से देवी की साधना की जाती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>अखंड जोत से माता प्रसन्न</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>अगर हवन या अन्य कर्मकांड करने में असहज महसूस होता हैं, तो इन नौ दिनों किसी भी प्रकार का संकल्प ले सकते हैं, जैसे सवा लाख मंत्रों का जाप कर अनुष्ठान करना। इसके अलावा राम रक्षा स्त्रोत, देवी भागवत आदि का नौ दिन का संकल्प लेकर पाठ भी कर सकते है। अखंड जोत जलाकर साधना करने से माता प्रसन्न होती हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 26, 2025, 2:24 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/festival/these-goddesses-are-worshiped-during-gupt-navratri-one-gets-the-desired-results/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Basant Panchami 2025: बसंत पंचमी पर अपने किताब में रख लें ये एक चीज, मिलेगी सफलता ही सफलता]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/festival/basant-panchami-2025-keep-this-one-thing-in-your-book-on-basant-panchami-you-will-get-success-only/</link>
                    <description><![CDATA[पटना: सरस्वती पूजा या बसंत पंचमी माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है। इस साल यह त्योहार 3 फरवरी, सोमवार को पड़ रहा है। इस दिन शाही या अमृत स्नान करने का भी योग है। ऐसे में इस त्योहार का महत्व और भी बढ़ जाता है. जहां एक ओर बसंत [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-37.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पटना: </strong>सरस्वती पूजा या बसंत पंचमी माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है। इस साल यह त्योहार 3 फरवरी, सोमवार को पड़ रहा है। इस दिन शाही या अमृत स्नान करने का भी योग है। ऐसे में इस त्योहार का महत्व और भी बढ़ जाता है. जहां एक ओर बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा करने से ज्ञान बढ़ता है और जीवन में सफलता के रास्ते खुलते हैं, वहीं दूसरी ओर अगर इस दिन मां सरस्वती का ध्यान करते हुए किताब में एक चीज रखी जाए तो इससे जीवन में आने वाली सभी बाधाएं दूर हो सकती हैं। तो चलिए जानते है इसके बारे में।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>मोर पंख</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>ऐसा माना जाता है कि सरस्वती पूजा के दिन किसी किताब में मोर पंख रखना ज्ञान और बुद्धि का प्रतीक है। इससे पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलती है और छात्र का ध्यान और समझ बेहतर होती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>सकारात्मक ऊर्जा</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>सरस्वती पूजा के दिन मोर पंख को किताब में रखने से सकारात्मक ऊर्जा आती है। इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और वातावरण शुद्ध होता है जिससे मन विचलित नहीं होता और एकाग्रता बढ़ती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>देवी लक्ष्मी की कृपा</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>कहा जाता हैं कि बिना ज्ञान के लक्ष्मी कहां, ऐसे में अगर सरस्वती पूजा के दिन किताब में मोर का पंख हो तो इससे देवी लक्ष्मी की कृपा मिलती है। शिक्षा से धन का मार्ग खुलता है और घर की आर्थिक स्थिति में सुधार होता है। मोर पंख का एक और फायदा यह है कि यह मानसिक शांति प्रदान करता है। ऐसे में सरस्वती पूजा के दिन किसी किताब में मोर पंख रखने से तनाव दूर होता है और व्यक्ति को मानसिक शक्ति और मजबूत होती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>किताब अपने पास ही रखें</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बता दें कि सरस्वती पूजा के दिन न केवल छात्र अपनी किताबों में मोर पंख रख सकते हैं, बल्कि नौकरीपेशा लोग या बिजनेस करने वाले लोग या फिर अच्छा करियर चाहने वाले लोग किसी भी किताब में मोर पंख रख सकते हैं। इस नियम को ध्यान में रखना होगा कि फिर आपको वह किताब अपने पास रखनी होगी। किसी भी किताब में मोर पंख न रखें और फिर उस किताब को कहीं भी पड़ा हुआ न छोड़ें। आप धार्मिक पुस्तकों में भी मोर पंख रख सकते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 26, 2025, 2:24 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/festival/basant-panchami-2025-keep-this-one-thing-in-your-book-on-basant-panchami-you-will-get-success-only/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[आज है प्रदोष व्रत, जानें इसका शुभ मुहूर्त और पूजा विधि]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/festival/today-is-pradosh-vrat-know-its-auspicious-time-and-method-of-worship/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। सनातन धर्म में प्रदोष व्रत और मासिक शिवरात्रि का बहुत ज्यादा महत्व होता है। हर महीने में कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत और चर्तुदशी तिथि पर मासिक शिवरात्रि पड़ती है। प्रदोष व्रत और मासिक शिवरात्रि पर भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा की जाती है। प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त माघ [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-37.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पटना।</strong> सनातन धर्म में प्रदोष व्रत और मासिक शिवरात्रि का बहुत ज्यादा महत्व होता है। हर महीने में कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत और चर्तुदशी तिथि पर मासिक शिवरात्रि पड़ती है। प्रदोष व्रत और मासिक शिवरात्रि पर भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा की जाती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>माघ माह में प्रदोष व्रत और मासिक शिवरात्रि एक ही दिन यानी 27 जनवरी को पड़ती है। प्रदोष व्रत उदयातिथि के नियम के मुताबिक रखा जाता है। शिवरात्रि में रात को पूजा करने का अलग महत्व होता है। जिस वजह से प्रदोष व्रत और मासिक शिवरात्रि एक ही दिन मनाई जा रही है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक मासिक शिवरात्रि और प्रदोष व्रत का संयोग बेहद शुभ माना जाता है। प्रदोष व्रत का शुभ मूहूर्त सुबह में 7 बजकर 11 मिनट से 8 बजकर 32 मिनट तक है। वहीं रात्रि पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह में 9 बजकर 52 मिनट से 11 बजकर 13 मिनट तक है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>प्रदोष व्रत की पूजा विधि</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें। स्नान करने के बाद साफ कपड़े पहने लें। घर में मंदिर की साफ-सफाई करें। साफ-सफाई करने के बाद भगवान शिव की प्रतिमा स्थापित करें। प्रतिमा के सामने घी का दीया जलाएं। भगवान भोलेनाथ का गंगा जल से अभिषेक करें। साथ ही फूल चढ़ाएं। इस दिन भोलेनाथ के साथ माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा साथ ही तीनों भगवान को मीठे का भोग लगाएं। साथ ही प्रसाद को सब में वितरित करें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 26, 2025, 2:24 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/festival/today-is-pradosh-vrat-know-its-auspicious-time-and-method-of-worship/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[गांधी मैदान में राज्यपाल ने फहराया झंडा, कहा 12 लाख लोगों को मिलेगी सरकारी नौकरी]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/festival/governor-hoisted-the-flag-at-gandhi-maidan-said-12-lakh-people-will-get-government-jobs/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। देश भर में आज 76वां गणतंत्र का दिवस मनाया जा रहा है। इस अवसर पर पटना के गांधी मैदान में गणतंत्र दिवस का आयोजन किया गया है। वहीं राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने तिरंगा फहराया। झंडा फहराने के बाद राज्यपाल ने कहा कि इस साल सरकार ने 12 लाख लोगों को सरकारी नौकरी देने [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-37.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पटना।</strong> देश भर में आज 76वां गणतंत्र का दिवस मनाया जा रहा है। इस अवसर पर पटना के गांधी मैदान में गणतंत्र दिवस का आयोजन किया गया है। वहीं राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने तिरंगा फहराया। झंडा फहराने के बाद राज्यपाल ने कहा कि इस साल सरकार ने 12 लाख लोगों को सरकारी नौकरी देने का वादा किया। साथ ही 34 लाख लोगों को रोजगार के मौके दिए जाएंगे।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>9 लाख लोगों को नौकरी दी</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>राज्यपाल ने सरकार की उपलब्धि गिनाते हुए कहा कि बीते सालों में लगभग 9 लाख लोगों को नौकरियां दी गई। साथ ही शिक्षा, महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में भी सरकार ने बेहतर काम किया है। राज्यपाल आरिफ मोहम्मद ने कहा कि सरकार नौकरी और रोजगार के क्षेत्र में भी तेजी से काम कर रही है। इस साल 12 लाख लोगों को सरकारी नौकरी मिलेगी। वहीं 34 लाख लोगों को रोजगार दिया जाएगा। राज्यपाल ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि बिहार में पहले स्कूलों और शिक्षकों की संख्या कम थी। इसलिए बड़ी संख्या में स्कूल खोले गए हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>बड़े पैमान पर शिक्षकों की भर्ती</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>स्कूल की आधारभूत संरचनाओं को भी मजबूत दी गई है। नियोजित शिक्षकों की नियुक्ति की गई। बिहार लोक सेवा आयोग के द्वारा बड़े पैमाने पर शिक्षकों की भर्ती की गई है। नियोजित शिक्षकों की परीक्षा लेकर उन्हें सरकारी शिक्षक बनाया जा रहा है। राज्यपाल ने कहा कि सरकार महिला सशक्तिकरण पर भी जोर दिया जा रहा है। साल 2006 में पंचायती राज संस्थाओं और नगर निकाय में महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण दिया जा रहा है। वर्तमान में पुलिस में महिलाओं की संख्या 30 हजार है, जो देश में सबसे ज्यादा है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>कब्रिस्तान की घेराबंदी की</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>2016 से सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 35% आरक्षण दिया गया है। बिहार में जीविका के तहत 10 लाख से ज्यादा स्वयं सहायता समूह बनाए है। राज्यपाल आरिफ मोहम्मद ने गणतंत्र दिवस पर लोगों को संबोधित करते हुए कहा, 'राज्य सरकार ने साल 2006 से ही कब्रिस्तान की घेराबंदी शुरू की।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 26, 2025, 2:24 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/festival/governor-hoisted-the-flag-at-gandhi-maidan-said-12-lakh-people-will-get-government-jobs/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[इस साल महाशिवरात्रि कब? जानें पूजा से जुड़ी कुछ अहम बातें]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/festival/when-is-mahashivratri-this-year-know-some-important-things-related-to-puja/</link>
                    <description><![CDATA[पटना: सनातन धर्म के अनुयायियों के लिए महाशिवरात्रि का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिसे भगवान शिव और देवी गौरी के विवाह उत्सव के रूप में मनाया जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, प्राचीन काल में फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को भगवान शिव और देवी शक्ति का मिलन हुआ था, जिसे महाशिवरात्रि [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-37.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पटना: </strong>सनातन धर्म के अनुयायियों के लिए महाशिवरात्रि का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिसे भगवान शिव और देवी गौरी के विवाह उत्सव के रूप में मनाया जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, प्राचीन काल में फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को भगवान शिव और देवी शक्ति का मिलन हुआ था, जिसे महाशिवरात्रि कहा जाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>चार प्रहर की पूजा का प्रावधान</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>शास्त्रों में चार प्रहर की पूजा का प्रावधान है, इन प्रहर की पूजा से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>रात्रि प्रथम प्रहर पूजा का समय - शाम 06:29 बजे से रात 09:34 बजे तक<br>रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा का समय- 27 फरवरी को रात्रि 09:34 बजे से 12:39 बजे तक<br>रात्रि तृतीया प्रहर पूजा समय- 27 फरवरी को दोपहर 12:39 बजे से 03:45 बजे तक<br>रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा समय- 27 फरवरी सुबह 03:45 बजे से सुबह 06:50 बजे तक</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>महाशिवरात्रि का महत्व</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि का महत्व है, इस दिन महाशक्ति मां पार्वती और भगवान शिव का विवाह हुआ था। इसी कारण से इस दिन भगवान शिव की पूजा और अभिषेक किया जाता है और पौराणिक कथाओं के अनुसार माता पार्वती और भगवान शिव का विवाह कराया जाता है। शिव का मानना ​​है कि इस दिन भगवान शिव की विधिवत पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है, साथ ही सभी प्रकार के दुखों से मुक्ति मिलती है। इस साल की महाशिवरात्रि बेहद खास है क्योंकि इस दिन 12 साल बाद प्रयागराज महाकुंभ का आखिरी शाही स्नान होगा.</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 26, 2025, 2:24 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/festival/when-is-mahashivratri-this-year-know-some-important-things-related-to-puja/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[आज है संकष्टी चतुर्थी, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/festival/today-is-sankashti-chaturthi-know-the-auspicious-time-and-method-of-worship/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। हिंदू धर्म में माघ माह में आने वाली सकट चौथ का बहुत महत्व होता है। यह व्रत भगवान गणेश को समर्पित होता है। इस दिन माताएं अपनी संताने की लंबी उम्र और सफलता के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। इस साल सकट चौथ का व्रत 17 जनवरी आज मनाया जा रहा है। सकट चौथ [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-37.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पटना।</strong> हिंदू धर्म में माघ माह में आने वाली सकट चौथ का बहुत महत्व होता है। यह व्रत भगवान गणेश को समर्पित होता है। इस दिन माताएं अपनी संताने की लंबी उम्र और सफलता के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। इस साल सकट चौथ का व्रत 17 जनवरी आज मनाया जा रहा है। सकट चौथ को संकष्टी चतुर्थी, तिलकुटा चौथ और वक्रकुंडी चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>संकष्टी चतुर्थी का शुभ मुहूर्त</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>संकष्टी चतुर्थी का व्रत वैसे तो हर महीने मनाया जाता है, लेकिन माघ महीने में पड़ने वाली संकट चौथ की महिलाओं के लिए बहुत खास होती है। उदयातिथि के मुताबिक सकट चौथ का व्रत इस साल 17 जनवरी 2025 को रखा जा रहा है। सकट चौथ की चतुर्थी की शुरूआत आज सुबह 4: 06 मिनट पर शुरू होगा। जिसकी समाप्ति 18 जनवरी यानी कल सुबह 8: 30 मिनट पर होगी। सकट चौथ के पूजन का शुभ मुहूर्त आज सुबह 5 बजकर 27 मिनट से 6 बजकर 21 मिनट तक रहेगा। साथ ही, चंद्रमा को अर्घ्य देने का समय रात 9 बजकर 09 मिनट पर होगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>संकष्टी चतुर्थी की पूजा विधि</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद लाल रंग के कपड़े पहनने चाहिए। नहाने के बाद भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए। पूजा करते समय ध्यान रहे कि माता लक्ष्मी की मूर्ति भी रखी जाए। पूजा के साथ दी निर्जला उपवास करने का संकल्प लें। दिनभर निर्जला उपवास रखने के बाद रात में चांद को अर्घ्य दें। अर्घ्य देने के बाद गणेश जी की पूजा कर फल खाए। केवल खाए उसके साथ नमक वाली किसी चीज का सेवन ना करें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>सभी मनोकामना पूरी होती है</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>ऐसी माना जाता है कि जो माताएं सकट चौथ के दिन निर्जला व्रत रखती हैं और पूरी श्रद्धा से भगवान गणेश की पूजा करते है , उनकी संतान हमेशा निरोग रहती है। ये व्रत करने वालों पर गणपति भगवान की विशेष कृपा बनी रहती है। कहा जाता है कि इस दिन भगवान गणेश और चंद्र देव की पूजा करने से सारी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 26, 2025, 2:24 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/festival/today-is-sankashti-chaturthi-know-the-auspicious-time-and-method-of-worship/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[आखिर क्यों मनाया जाता है मकर संक्रांति का पर्व, जानें इससे जुड़ी 4 पौराणिक कथाएं]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/festival/why-is-the-festival-of-makar-sankranti-celebrated-know-the-4-mythological-stories-related-to-it/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। आज 14 जनवरी 2025 को पूरे देश में मकर संक्रांति का त्योहार धूमधाम से मनाया जा रहा है। मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं। इससे उत्तरायण का आरंभ होता है। हिंदू धर्म में ऐसी मान्यता है कि इस दिन से सूर्य देव की कृपा बरसती है और नए [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-37.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पटना।</strong> आज 14 जनवरी 2025 को पूरे देश में मकर संक्रांति का त्योहार धूमधाम से मनाया जा रहा है। मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं। इससे उत्तरायण का आरंभ होता है। हिंदू धर्म में ऐसी मान्यता है कि इस दिन से सूर्य देव की कृपा बरसती है और नए साल की शुरुआत होती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>कथाएं जीवन जीने का सबक सिखाती है</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>मकर संक्रांति का यह पर्व केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक भी है। मकर संक्रांति का त्योहार लोगों को एक साथ जोड़ता है और रिश्तों के मजबूत बनाता है। इस दिन से जुड़ी कई पौराणिक कथाएं भी हमारे ग्रंथों में मिलती हैं, जो हमें जीवन सही तरीके से जीने का सबक सिखाती हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:list {"ordered":true} -->
<ol class="wp-block-list"><!-- wp:list-item -->
<li><strong>सूर्य देव और शनि देव की कथा</strong></li>
<!-- /wp:list-item --></ol>
<!-- /wp:list -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस कथा के अनुसार, एक बार सूर्य देव और शनि देव के बीच आपसी मतभेद हो गया था। क्रोध में आकर सूर्य देव ने शनि देव को श्राप दे दिया था। शनि देव को सूर्य देव द्वारा दिए गए इस कठोर श्राप के कारण बहुत कष्ट उठाना पड़ा, लेकिन बाद में सूर्य देव को अपनी गलती का एहसास हुआ। वह आत्मग्लानि से निराश हो गए। इसके बाद सूर्य देव ने अपनी गलती के लिए शनि देव से क्षमा मांगी। सूर्य देव को भी शनि देव ने क्षमा कर दिया और उसी दिन से सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करने लगे। इस कथा के अनुसार, सूर्य देव और शनि देव का मिलन मकर संक्रांति के दिन होता है और इसी दिन से सभी भक्तों पर सूर्य देव की कृपा बरसती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:list {"ordered":true,"start":2} -->
<ol start="2" class="wp-block-list"><!-- wp:list-item -->
<li><strong>भगीरथ और गंगा की कथा</strong></li>
<!-- /wp:list-item --></ol>
<!-- /wp:list -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस कथा के अनुसार, पने पूर्वजों के मोक्ष के लिए राजा भगीरथ गंगा नदी को धरती पर लेकर आए थे। गंगा नदी इतनी शक्तिशाली थी कि धरती को नष्ट कर सकती थी। इसी कारण से राजा भगीरथ भगवान शिव के पास गए और उनसे सहायता मांगी। इसके बाद भगवान शिव ने गंगा नदी को अपने जटाओं में बांध लिया। बाद में भगीरथ के अनुरोध पर भगवान शिव ने गंगा नदी को धरती पर छोड़ दिया। इस कथा के अनुसार गंगा नदी मकर संक्रांति के दिन ही धरती पर आई थी। इसलिए मकर संक्रांति के दिन गंगा स्नान का काफी महत्व है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:list {"ordered":true,"start":3} -->
<ol start="3" class="wp-block-list"><!-- wp:list-item -->
<li><strong>यशोदा और श्रीकृष्ण की कथा</strong></li>
<!-- /wp:list-item --></ol>
<!-- /wp:list -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>माता यशोदा ने श्रीकृष्ण को प्राप्त करने के लिए मकर संक्रांति का व्रत रखा था। इस कथा के अनुसार, मकर संक्रांति का व्रत रखने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इन कथाओं के अलावा भी मकर संक्रांति से जुड़ी कई अन्य कथाएं हैं। इन कथाओं का उद्देश्य लोगों को धर्म और संस्कृति से जोड़ना है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:list {"ordered":true,"start":4} -->
<ol start="4" class="wp-block-list"><!-- wp:list-item -->
<li><strong>भगवान विष्णु का वामन अवतार</strong></li>
<!-- /wp:list-item --></ol>
<!-- /wp:list -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस कथा के अनुसार, एक बार असुर राजा बलि को भगवान विष्णु ने धोखा देकर पाताल लोक भेज दिया था। बलि ने भगवान विष्णु से तीन पग भूमि मांगी थी। भगवान विष्णु ने तीन पग में ही तीनों लोकों को नाप लिया था। कुछ मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु ने मकर संक्रांति के दिन ही बलि को पाताल लोक भेजा था।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:list {"ordered":true,"start":5} -->
<ol start="5" class="wp-block-list"><!-- wp:list-item -->
<li><strong>कथाओं का आध्यात्मिक महत्व</strong></li>
<!-- /wp:list-item --></ol>
<!-- /wp:list -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>मकर संक्रांति से जुड़ी ये कथाएं न केवन जीवन के लिए एक मागदर्शक का काम करती है, बल्कि इनमें गहरा आध्यात्मिक महत्व भी छिपा होता है। ये कथाएं हमें जीवन के कई महत्वपूर्ण सबक सिखाती हैं। कुछ कथाएं समाज सुधार का संदेश देती हैं। जैसे कि भगवान विष्णु का वामन अवतार, जो अधर्म का नाश करने और धर्म की स्थापना करने के लिए लिया गया था। कई कथाएं प्रकृति के महत्व को दर्शाती हैं। जैसे कि गंगा नदी का धरती पर आना। यह हमें प्रकृति के संरक्षण का महत्व सिखाता है। ये कथाएं हमें आध्यात्मिक विकास की ओर प्रेरित करती हैं। हमें सिखाती हैं कि हमें अपने अंदर के देवता को जगाना चाहिए और अच्छे कर्म करने चाहिए।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 26, 2025, 2:24 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/festival/why-is-the-festival-of-makar-sankranti-celebrated-know-the-4-mythological-stories-related-to-it/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[मकर संक्रांति आज, तिल डालकर क्यों करते हैं स्नान]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/festival/makar-sankranti-is-today-why-do-we-take-bath-by-adding-sesame-seeds/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। सूर्य जिस दिन मकर राशि में प्रवेश करते हैं, उस दिन मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है. साल में 12 संक्रांति होती है लेकिन मकर संक्रांति सभी में महत्वपूर्ण है. इस दिन पवित्र नदी में स्नान और दान करने वालों को पुण्य मिलता है. इसे सूर्य उत्तरायण पर्व के नाम से भी जाना [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-37.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पटना।</strong> सूर्य जिस दिन मकर राशि में प्रवेश करते हैं, उस दिन मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है. साल में 12 संक्रांति होती है लेकिन मकर संक्रांति सभी में महत्वपूर्ण है. इस दिन पवित्र नदी में स्नान और दान करने वालों को पुण्य मिलता है. इसे सूर्य उत्तरायण पर्व के नाम से भी जाना जाता है. इस साल मकर संक्रांति का पर्व आज 14 जनवरी को है. इस दिन महाकुंभ का शाही स्नान भी किया जाएगा.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>क्या है मान्यता?</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>मकर संक्रांति के दिन सूर्य अपना क्रोध त्यागने शनिदेव के घर गए थे। मान्यता है कि इस दिन पानी में काले तिल मिलाकर स्नान करने से शनिदेव बहुत प्रसन्न होते हैं। इस दिन स्नान करने से भक्त को 7 अश्वमेध यज्ञ करने जितना पुण्य मिलता है। मकर संक्रांति के दिन स्नान करने से पहले कुछ भी खाना-पीना नहीं चाहिए। मकर संक्रांति के दिन तिल का दान करना बहुत शुभ होता है। इस दिन काले तिल का दान करने से शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या से राहत मिलती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>सूर्य पूजा करने की विधि</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>मकर संक्रांति के अवसर पर एक लोटे में जल, सिंदूर, लाल फूल और तिल मिलाकर सूर्य उदय होने पर सूर्य को अर्घ्य दें। सूर्य देव का ध्यान करते हुए जल अर्पित करें और 'ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः' मंत्र का तीन बार जाप करें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>माघ माह की शुरुआत</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस साल मकर संक्रांति से माघ महीने की शुरुआत भी हो रही है। माघ महीने में स्नान और दान का महत्व दोगुना बढ़ जाता है। इसके प्रभाव से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और सभी परेशानियों से मुक्ति मिलती है। मकर संक्रांति पर सूर्य दक्षिण से उत्तर की ओर गति करता है, इसलिए दिन बड़े और रातें छोटी होने लगती हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>खरमास होगा खत्म</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>मकर संक्रांति के साथ ही खरमास भी खत्म हो जाएगा। खरमास में शादी, विवाह, मुंडन और गृह प्रवेश जैसे शुभ और मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं। ऐसे में मकर संक्रांति के साथ ही शुभ और मांगलिक कार्यों पर लगी रोक भी हट जाएगी।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 26, 2025, 2:24 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/festival/makar-sankranti-is-today-why-do-we-take-bath-by-adding-sesame-seeds/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[आज मनाया जा रहा है पौष पूर्णिमा, जानें शुभ मुहूर्त पूजा विधि]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/festival/paush-purnima-is-being-celebrated-today-know-the-auspicious-time-and-method-of-worship/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। पौष पूर्णिमा का दिन बहुत ही पवित्र माना जाता है। इस दिन देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करने से भगवान प्रसन्न होते हैं। पौष, हिंदू कैलेंडर का दसवां महीना है। यही कारण है कि इस दौरान पड़ने वाली पूर्णिमा का बहुत महत्व होता है। माना जाता है कि इस दिन [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-37.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पटना।</strong> पौष पूर्णिमा का दिन बहुत ही पवित्र माना जाता है। इस दिन देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करने से भगवान प्रसन्न होते हैं। पौष, हिंदू कैलेंडर का दसवां महीना है। यही कारण है कि इस दौरान पड़ने वाली पूर्णिमा का बहुत महत्व होता है। माना जाता है कि इस दिन गंगा स्नान और दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>पोष पूर्णिमा की शुरूआत</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस दिन व्रत करने से सभी पापों का नाश होता है। साथ ही भगवान विष्णु से जुड़े धार्मिक कार्य करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। हिंदू पंचांग के मुताबिक पौष पूर्णिमा तिथि 13 जनवरी को दोपहर 05 बजकर 03 मिनट पर शुरू होगी। वहीं, इसकी समाप्ति अगले दिन यानी 14 जनवरी को रात 03 बजकर 56 मिनट पर खत्म होगी। उदया तिथि को देखते हुए पौष पूर्णिमा 13 जनवरी को मनाई जाएगी। इसी दिन से महाकुंभ की पावन शुभारंभ हो गया।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>ब्रह्म मुहूर्त का समय</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>पूर्णिमा के दिन कभी भी स्नान-दान कर सकते हैं, लेकिन ब्रह्म मुहूर्त को सबसे ज्यादा शुभ माना जाता है। इस मौके पर ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5. 27 मिनट से 6. 21 मिनट तक रहेगा। इसके साथ ही अभिजित मुहूर्त दोपहर 12. 09 मिनट से 12. 51 मिनट तक रहेगा। फिर विजय मुहूर्त दोपहर 02 बजकर 15 मिनट से 02 बजकर 57 मिनट तक रहेगा। इसके अतिरिक्त रवि योग सुबह 07 बजकर 15 मिनट से 10 बजकर 38 मिनट तक का होगा। इस दौरान किसी भी तरह के शुभ कार्य किए जा सकते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>पूर्णिमा की पूजा विधि</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>जल्दी उठकर स्नान कर लें। स्नान करने के बाद भगवान को अर्घ्य दें। सूर्य देव को अर्घ्य देने के बाद भगवान मधुसूदन की पूजा करें। इसके बाद ब्रह्माण या किसी गरीब या जरुरतमंद को भोजन कराएं। इस दिन कंबल, गुड़, तिल जैसी चीजों को दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। पोष सूर्य देव का महीना कहलाता है। इस महीने में सूर्य देव की विधिपूर्व पूजा की जाती है। इस दिन विधि-विधान से पूजा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 26, 2025, 2:24 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/festival/paush-purnima-is-being-celebrated-today-know-the-auspicious-time-and-method-of-worship/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[आज है पुत्रदा एकादशी, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/festival/today-is-putrada-ekadashi-know-the-auspicious-time-and-method-of-worship/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। हिंदू धर्म में साल भर में 24 एकादशी के व्रत आते है, जो हर महीने में 2 बार पड़ती हैं। महीने में पहला एकादशी व्रत कृष्ण पक्ष और दूसरा शुक्ल पक्ष में पड़ता है। धार्मिक मान्यता के मुताबिक एकादशी तिथि पर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की खास पूजा करने से दोनों का आशीर्वाद [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-37.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पटना।</strong> हिंदू धर्म में साल भर में 24 एकादशी के व्रत आते है, जो हर महीने में 2 बार पड़ती हैं। महीने में पहला एकादशी व्रत कृष्ण पक्ष और दूसरा शुक्ल पक्ष में पड़ता है। धार्मिक मान्यता के मुताबिक एकादशी तिथि पर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की खास पूजा करने से दोनों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस दिन व्रत करने वाली महिलाओं की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>एकादशी का शुभ</strong> मुहूर्त</h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>वहीं आज यानी शुक्रवार, 10 जनवरी को साल की पहली एकादशी है, जिसे पुत्रदा और वैकुंठ एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से संतान की प्राप्ति होती है। जिन महिलाओं की संतान नहीं है अगर वह यह व्रत करेंगी तो उन्हें संतान की प्राप्ति होगी। वैदिक पंचांग के मुताबिक साल की पहली एकादशी यानी पुत्रदा एकादशी तिथि की शुरुआत पौष माह में 9 जनवरी दोपहर 1 बजकर 12 मिनट से आरंभ होगा। जिसकी समाप्ति अगले दिन यानी 10 जनवरी को दोपहर 12 बजकर 43 मिनट पर होगी।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>पारण का सही समय</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>ऐसे में उदया तिथि के मुताबिक पुत्रदा एकादशी का व्रत 10 जनवरी को ही रखा जा रहा है। आज पुत्रदा एकादशी पूरे दिन मनाई जाने वाली है। पुत्रदा एकादशी के व्रत का पारण 11 जनवरी को सुबह 7 बजकर 15 मिनट से 8 बजकर 21 मिनट के बीच किया जाएगा। यह समय सबसे शुभ है। इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। पुत्रदा एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर नहा लेना चाहिए। इस दिन पीले रंग के वस्त्र पहनने चाहिए। मंदिर की साफ-सफाई करनी चाहिए।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>एकादशी की पूजा विधि</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की मूर्ति स्थापित करनी चाहिए। दोनों की विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए। मां लक्ष्मी को 16 श्रृंगार अर्पित करना चाहिए। प्रतिमा के सामने घी का दीपक जलाना चाहिए। दोनों की आरती उतारें और मंत्रों का उच्चारण करें। अब एकादशी की कथा को सुने। इसके बाद दोनों को मीठे का भोग लगाना चाहिए। आखिर में दोनों का आशीर्वाद ले और क्षमा प्रार्थना करें। सभी में प्रसाद बांट दें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 26, 2025, 2:24 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/festival/today-is-putrada-ekadashi-know-the-auspicious-time-and-method-of-worship/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[10 जनवरी को मनाते है हिंदी दिवस, जानें इसका महत्व और उद्देश्य]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/festival/hindi-day-is-celebrated-on-10th-january-know-its-importance-and-purpose/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस मनाया जाता है, जो हिंदी भाषा के महत्व और इसके वैश्विक प्रसार को बढ़ावा देने के लिए समर्पित है। इस दिन 2006 में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह द्वारा घोषित किया गया था। इस मौके पर हिंदी भाषा के महत्व को समझाने के लिए कई कार्यक्रमों का आयोजन [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-37.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पटना। </strong>10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस मनाया जाता है, जो हिंदी भाषा के महत्व और इसके वैश्विक प्रसार को बढ़ावा देने के लिए समर्पित है। इस दिन 2006 में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह द्वारा घोषित किया गया था। इस मौके पर हिंदी भाषा के महत्व को समझाने के लिए कई कार्यक्रमों का आयोजन होता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>हिंदी दिवस का उद्देश्य</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>विश्व स्तर पर हिंदी को एक सम्मानजनक स्थान दिलाने के लिए इस दिन को मनाना महत्वपूर्ण हो जाता है। यह दिन हिंदी भाषा की अहमियत और उसके वैश्विक प्रचार-प्रसार के लिए महत्वपूर्ण होता है। हिंदी दिवस का उद्देश्य हिंदी को वैश्विक स्तर पर एक सम्मानजनक स्थान दिलाना है। विश्व हिंदी दिवस की शुरुआत 10 जनवरी 2006 को भारत सरकार ने की थी। इस दिन को खास तौर पर हिंदी भाषा के प्रचार और प्रसार के लिए सेलिब्रेट किया जाता है। इसके माध्यम से भारतीय संस्कृति और भाषा की वैश्विक पहचान बनाने का प्रयास किया जाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>हिंदी भाषा का महत्व</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>हिंदी, जो दुनिया में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषाओं में से एक है। यह भारत में आमतौर पर सबसे ज्यादा बोली जाती है। हिंदी दिवस को उचित स्थान दिलाने के लिए यह एक महत्वपूर्ण कदम है। विश्व हिंदी दिवस का मुख्य उद्देश्य हिंदी भाषा को वैश्विक मंच पर प्रोत्साहित करना है। इसे अन्य देशों में भी साहित्य, कला और शिक्षा के माध्यम से लोकप्रिय बनाने का प्रयास किया है। साथ ही, यह दिन हिंदी बोलने वालों को अपने भाषा के प्रति गर्व और सम्मान महसूस करवाना है। इसका उद्देश्य हिंदी को एक अंतर्राष्ट्रीय भाषा के रूप में स्थान दिलाना है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong> कई गतिविधियों का आयोजन</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>विश्व हिंदी दिवस के मौके पर कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जैसे हिंदी सेमिनार, साहित्य सम्मेलन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां। भारत और विदेशों में सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाएं हिंदी के प्रचार के लिए कई तरह की गतिविधियां और प्रतियोगिताएं आयोजित करती हैं। इसके अतिरिक्त कई विश्वविद्यालयों और संस्थानों में खास हिंदी भाषण और लेखन प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 26, 2025, 2:24 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/festival/hindi-day-is-celebrated-on-10th-january-know-its-importance-and-purpose/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Lohri 2025: लोहड़ी नजदीक, जानें इससे जुड़ी कुछ रोचक बातें]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/festival/lohri-2025-lohri-is-near-know-some-interesting-things-related-to-it/</link>
                    <description><![CDATA[पटना: लोहड़ी पंजाबियों का एक प्रमुख त्यौहार है। यह मकर संक्रांति से एक दिन पहले शाम को मनाया जाता है। पंजाबी समुदाय के लोग इस त्यौहार को बहुत ही हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं और गीत गाकर जश्न मनाते हैं। लेकिन आजकल देशभर में इस त्योहार को बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है. लोहड़ी [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-37.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पटना: </strong>लोहड़ी पंजाबियों का एक प्रमुख त्यौहार है। यह मकर संक्रांति से एक दिन पहले शाम को मनाया जाता है। पंजाबी समुदाय के लोग इस त्यौहार को बहुत ही हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं और गीत गाकर जश्न मनाते हैं। लेकिन आजकल देशभर में इस त्योहार को बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>लोहड़ी कब हैं?</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>पंचांग के अनुसार लोहड़ी का त्योहार मकर संक्रांति से एक दिन पहले आता है. इस वर्ष 2025 में मकर संक्रांति 14 जनवरी को और लोहड़ी 13 जनवरी 2025 को मनाई जाएगी। लोहड़ी का त्योहार आस्था और पारंपरिक उत्सवों के साथ-साथ कृषि के महत्व का भी जश्न मनाता है। इसलिए इस त्योहार को रबी फसल की कटाई के खुशी में मनाया जाता है.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>इस त्योहार में अग्नि क्यों जलाते हैं</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>लोहड़ी पर आग जलाने की परंपरा वर्षों पुरानी है। जिस प्रकार होली से एक दिन पहले होलिका दहन किया जाता है और लकड़ियों का ढेर इकट्ठा कर आग जलाई जाती है। उसी प्रकार लोहड़ी में आग जलाने का भी महत्व है। लोहड़ी की आग को पवित्र माना जाता है.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>इन चीजों को डालते हैं अग्नि में</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस अग्नि में कुछ विशेष चीजें भी अर्पित की जाती हैं, जिसे चरखा आहुति भी कहा जाता है। ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास के अनुसार लोहड़ी पर जलाई जाने वाली आग का संबंध सूर्य देव और अग्नि देव से है। इसके साथ ही यह अग्नि वातावरण को भी शुद्ध करती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ाती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>प्रसाद भी बांटा जाता</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>लोग लोहड़ी की पवित्र अग्नि में मूंगफली, गजक, रेवड़ी, तिल, फुलिया यानी पॉपकॉर्न आदि डालते हैं और अग्नि की सात बार परिक्रमा करते हैं। परिक्रमा करते समय लोग सुख-समृद्धि की प्रार्थना भी करते हैं। अग्नि में डाली गई इन चीजों को प्रसाद के रूप में बांटा और खाया जाता है। इसके बाद सभी लोग परिवार के साथ ढोल-नगाड़ों की थाप के साथ गिद्दा और भांगड़ा करके इस त्योहार का आनंद लेते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 26, 2025, 2:24 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/festival/lohri-2025-lohri-is-near-know-some-interesting-things-related-to-it/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[6 जनवरी को गुरु गोबिंद सिंह की जयंती, मौके पर भव्य तैयारियों का आयोजन]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/festival/guru-gobind-singhs-birth-anniversary-on-6th-january-grand-preparations-organized-on-the-occasion/</link>
                    <description><![CDATA[पटना: हर साल पौष मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को गुरु गोबिंद सिंह जयंती मनाई जाती है। इस मौके पर गुरुद्वारे में लंगर का आयोजन किया जाता है. साथ ही इस दिन गुरु गोबिंद सिंह की शिक्षाओं और उपदेशों को भी याद किया जाता है। 10वें गुरु बता दें कि गुरु गोबिंद सिंह [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-37.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पटना: </strong>हर साल पौष मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को गुरु गोबिंद सिंह जयंती मनाई जाती है। इस मौके पर गुरुद्वारे में लंगर का आयोजन किया जाता है. साथ ही इस दिन गुरु गोबिंद सिंह की शिक्षाओं और उपदेशों को भी याद किया जाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>10वें गुरु</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बता दें कि गुरु गोबिंद सिंह को सिख धर्म के दसवें गुरु के रूप में याद किया जाता है। ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार, उनका जन्म 01 जनवरी, 1667 को हुआ था, जबकि हिंदू कैलेंडर के अनुसार, उनका जन्म विक्रम संवत 1723 में पौष महीने के शुक्ल पक्ष के सातवें दिन हुआ था।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>किस दिन है जयंती?</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>6 जनवरी को गुरु गोबिंद सिंह जयंती का आयोजन किया जाएगा. विक्रम संवत के कैलेंडर के अनुसार इनकी जयंती पौष माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाता है। यह तिथि 5 जनवरी को रात 8:15 बजे शुरू होगी और 6 जनवरी को शाम 6:23 बजे समाप्त होगी.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>जयंती का धार्मिक महत्व</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>सिख समुदाय में गुरु गोबिंद सिंह की जयंती का बहुत महत्व है। इस खास मौके पर उनके अनुयायी उनके जीवन और शिक्षाओं को श्रद्धांजलि देते हैं। गुरु गोबिंद सिंह ने सिख धर्म को एक नई दिशा दी, जिसमें खालसा पंथ की स्थापना और 5 ककार अनिवार्य करना जैसे महत्वपूर्ण कार्य शामिल थे। उन्होंने धार्मिक सहिष्णुता, साहस और आत्मनिर्भरता का संदेश फैलाया।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 26, 2025, 2:24 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/festival/guru-gobind-singhs-birth-anniversary-on-6th-january-grand-preparations-organized-on-the-occasion/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[साल में दो बार सोमवती अमावस्या, स्नान-दान करने से मिलता है पितरों का आशीर्वाद, देखें शुभ मुहूर्त]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/festival/somvati-amavasya-twice-a-year-bathing-and-donating-gives-blessings-of-ancestors-see-auspicious-time/</link>
                    <description><![CDATA[पटना: इस बार सोमवती अमावस्या 30 दिसंबर यानी सोमवार को मनाई जाएगी। सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या कहा जाता है। हिंदू धर्म में अमावस्या को बहुत ही महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है। 30 दिसंबर को अमावस्या हिंदू धर्म में अमावस्या [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-37.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पटना</strong>: इस बार सोमवती अमावस्या 30 दिसंबर यानी सोमवार को मनाई जाएगी। सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या कहा जाता है। हिंदू धर्म में अमावस्या को बहुत ही महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>30 दिसंबर को अमावस्या</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>हिंदू धर्म में अमावस्या को बहुत महत्वपूर्ण दिन माना जाता है और यह पितरों को समर्पित होता है। इस बार सोमवती अमावस्या 30 दिसंबर, सोमवार को मनाई जाएगी। सोमवती अमावस्या साल में दो बार आती है। इस दिन पवित्र नदी में स्नान और दान करने से अक्षय फल की प्राप्ति होती है और कालसर्प दोष और पितृ दोष से भी मुक्ति मिलती है। सोमवती अमावस्या के दिन माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा करने की परंपरा है और पीपल के पेड़ की भी पूजा की जाती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>शुभ मुहूर्त</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>हिंदू कैलेंडर के अनुसार, सोमवती अमावस्या की तिथि 30 दिसंबर को सुबह 4:01 बजे शुरू होगी और तिथि 31 दिसंबर को सुबह 3:56 बजे समाप्त होगी। इस दिन स्नान और दान का शुभ समय 5:24 बजे से रहेगा। प्रातः 6.19 बजे तक.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>साल में दो बार सोमवती अमावस्या</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>साल में दो बार सोमवती अमावस्या आती है। ऐसे में साल की आखिरी सोमवती अमावस्या बहुत खास मानी जाती है। इस बार सोमवती अमावस्या पर वृद्धि योग, ध्रुव योग, शिववास योग, नक्षत्र योग का संयोग बनने जा रहा है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>पूजन विधि</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>सोमवती अमावस्या के दिन पूजा करने के लिए सबसे पहले ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। इस दिन गंगा स्नान का अधिक महत्व है इसलिए इस दिन गंगा स्नान अवश्य करना चाहिए और उसके बाद सूर्य देव को अर्घ्य देना चाहिए। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से विशेष आशीर्वाद मिलता है और पूजा के बाद अपनी क्षमता के अनुसार दान करें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 26, 2025, 2:24 am</pubDate>
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                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Christmas Day: आज है क्रिसमस डे, जाने बड़े दिन का महत्व और इतिहास]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/festival/christmas-day-today-is-christmas-day-know-the-importance-and-history-of-the-big-day/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। क्रिसमस ईसाई समुदाय का सबसे महत्वपूर्ण उत्सव होता है। ईसाई धर्म में क्रिसमस सबसे बड़ा उत्सव होता है, इसलिए इस दिन को बड़ा दिन भी कहा जाता है। ईसाई धर्म के लोग इस मौके को अत्यंत धूमधाम के साथ मनाते हैं। इस साल भी 25 दिसंबर को क्रिसमस का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-37.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पटना।</strong> क्रिसमस ईसाई समुदाय का सबसे महत्वपूर्ण उत्सव होता है। ईसाई धर्म में क्रिसमस सबसे बड़ा उत्सव होता है, इसलिए इस दिन को बड़ा दिन भी कहा जाता है। ईसाई धर्म के लोग इस मौके को अत्यंत धूमधाम के साथ मनाते हैं। इस साल भी 25 दिसंबर को क्रिसमस का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन ईसाई लोग केक काटकर यीशु मसीह का जन्मदिन मनाते है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>आपसी प्रेम का त्योहार</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>एक-दूसरे का मुंह मीठा कराते हैं। सभी को उपहार देते है। गिरजाघरों में इस दिन की भव्यता अद्वितीय होती है। 25 दिसंबर, जिसे क्रिसमस भी कहा जाता है। ईसाई धर्म का सबसे प्रमुख त्योहार क्रिसमस है। ईसाई लोग इस दिन का बेसब्री से इंतजार करते हैं। क्रिसमस को ईसा मसीह के जन्मदिन के रूप में सेलिब्रेट किया जाता है, इसलिए इसे बड़ा दिन भी माना जाता है। क्रिसमस का त्योहार आपसी प्रेम और भाईचारे को प्रोत्साहित करता है। आपसी प्रेम और भाईचारे के त्योहार को 25 दिसंबर को सेलिब्रेट किया जाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>क्रिसमस शब्द की उत्पत्ति</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस दिन को लेकर कई मान्यताएं प्रचलित हैं, जिनमें से एक यह है कि इसी दिन जीजस क्रिस्ट का जन्म हुआ था, जिन्हें भगवान का पुत्र माना जाता है। उनके नाम क्राइस्‍ट से ही क्रिसमस शब्द की उत्पत्ति हुई है। प्राचीन कथाओं की माने तो ईसाई धर्म के संस्थापक यीशु का जन्म क्रिसमस के दिन हुआ था, इसलिए इसे पूरी दुनिया में क्रिसमस-डे के रूप में मनाती है। इस त्योहार का एक प्राचीन इतिहास रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक “क्रिसमस” शब्द “क्राइस्ट” से निकला है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>पहली बार रोम में मना त्योहार</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>पहली बार इस खास त्योहार का आयोजन रोम में 336 ईस्वी में किया गया था। जिसके बाद से, यह त्योहार विश्वभर में लोकप्रियता प्राप्त करता गया और आज अन्य कई धर्मों के लोग भी इसे बड़े उत्साह के साथ मनाते हैं। कई धर्म के लोग इस दिन केक काटकर इस यीशु मसीह के जन्मदिन को सेलिब्रेट करते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 26, 2025, 2:24 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/festival/christmas-day-today-is-christmas-day-know-the-importance-and-history-of-the-big-day/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Christmas 2024: मुस्लिम ईसा मसीह को मानते हैं पर क्रिसमस क्यों नहीं सेलिब्रेट करते? जानें यहां]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/festival/christmas-2024-muslims-believe-in-jesus-christ-but-why-dont-they-celebrate-christmas-know-here/</link>
                    <description><![CDATA[पटना: देश-दुनिया में कल यानी 25 दिसंबर को क्रिसमस बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जाएगा। क्रिसमस ईसाइयों का प्रमुख और सबसे बड़ा त्योहार है। ईसाई धर्म के लोग क्रिसमस को प्रभु यीशु के जन्मदिन के रूप में मनाते हैं। हालांकि, हिंदू धर्म और इस्लाम सहित अन्य धर्मों के कैलेंडर में 25 दिसंबर की तारीख [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-37.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पटना:</strong> देश-दुनिया में कल यानी 25 दिसंबर को क्रिसमस बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जाएगा। क्रिसमस ईसाइयों का प्रमुख और सबसे बड़ा त्योहार है। ईसाई धर्म के लोग क्रिसमस को प्रभु यीशु के जन्मदिन के रूप में मनाते हैं। हालांकि, हिंदू धर्म और इस्लाम सहित अन्य धर्मों के कैलेंडर में 25 दिसंबर की तारीख को पवित्र नहीं माना जाता है। मुसलमानों में भले ही 25 दिसंबर को क्रिसमस मनाने की परंपरा न हो, लेकिन मुसलमान ईसा मसीह का बहुत सम्मान करते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>कुरान में ईसा मसीह की मां का जिक्र</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस्लाम की पवित्र किताब कुरान में भी ईसा मसीह और उनकी मां मरियम का जिक्र है। मुस्लिम धर्म में कहा जाता है कि ईसा मसीह ईसाइयों के पैगंबर थे. इस्लाम में ईसा मसीह को ईसाइयों के पैगंबर के रूप में देखा जाता है। जबकि कुरान में मैरी का जिक्र मरियम के तौर पर किया गया है. कुरान में ईसा मसीह और मरियम पर एक पूरा अध्याय है। इस पूरे अध्याय में ईसा मसीह के जन्म का भी जिक्र किया गया है.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>रेगिस्तान में जन्मे थे ईसा मसीह</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>ईसा मसीह के जन्म की पूरी कहानी कुरान की सूरह मरियम (19:24-25) में मिलती है। दरअसल, कुरान में ईसा मसीह के जन्म की कहानी में कहीं भी जोसेफ और फरिश्तों का जिक्र नहीं है। कुरान के अनुसार मरियम ने रेगिस्तान में अकेले ही ईसा मसीह को जन्म दिया था। मुसलमानों के क्रिसमस न मनाने को लेकर इस्लाम के लोग कहते हैं कि मेरी क्रिसमस कहने वाले का मानना ​​है कि अल्लाह का एक ही बेटा है. इसीलिए इस्लाम में क्रिसमस नहीं मनाया जाता.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>बाइबिल में इस्लाम शब्द का कोई जिक्र नहीं</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>जहां एक ओर कुरान में ईसा मसीह का जिक्र है, वहीं दूसरी ओर ईसाइयों की पवित्र पुस्तक बाइबिल में इस्लाम शब्द का कही कोई जिक्र नहीं है। इतना ही नहीं, बेल्जियम के एक चर्च में 17वीं सदी की एक मूर्ति में इस्लाम के पैगंबर को स्वर्गीय फरिश्तों के पैरों के नीचे दबे हुए दिखाया गया है। हालाँकि, ईसाई धर्म में अभी ऐसी सोच के लिए कोई जगह नहीं है। भले ही लोग क्रिसमस नहीं मनाते हैं, लेकिन वे ईसाइयों को उनके त्योहार की बधाई देते हैं। मौका मिलने पर लोग क्रिसमस पार्टियों में भी शामिल होते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 26, 2025, 2:24 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/festival/christmas-2024-muslims-believe-in-jesus-christ-but-why-dont-they-celebrate-christmas-know-here/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Saphala Ekadashi: साल की आखिरी एकादशी 25 या 26 दिसंबर को, जानें सबकुछ यहां]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/festival/saphala-ekadashi-last-ekadashi-of-the-year-on-25th-or-26th-december-know-everything-here/</link>
                    <description><![CDATA[पटना: सफला एकादशी का व्रत हर साल पौष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को रखा जाता है। लेकिन इस बार लोगों में 25 या 26 दिसंबर को लेकर संसय बना हुआ है। इसको लेकर भक्तों के मन में कई सवाल है. वहीं इस व्रत का महत्व बहुत अधिक है, क्योंकि इसे करने से जीवन [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-37.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पटना</strong>: सफला एकादशी का व्रत हर साल पौष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को रखा जाता है। लेकिन इस बार लोगों में 25 या 26 दिसंबर को लेकर संसय बना हुआ है। इसको लेकर भक्तों के मन में कई सवाल है. वहीं इस व्रत का महत्व बहुत अधिक है, क्योंकि इसे करने से जीवन में समृद्धि और सफलता मिलती है। अगर आप भी इस व्रत के सही दिन और समय को लेकर असमंजस में हैं तो यहां जानें इसकी सही तारीख और पूजा का समय।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>हिंदू धर्म में सफला एकादशी खास</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>सफला एकादशी हिंदू धर्म में एक विशेष दिन माना जाता है, जो पौष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्री विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से समृद्धि, शुभता आती है और मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इस वर्ष सफला एकादशी का व्रत 25 दिसंबर 2024 को रात 10:29 बजे शुरू होगा और 27 दिसंबर 2024 को सुबह 12:43 बजे समाप्त होगा। इसलिए व्रती 27 दिसंबर को पारण करेंगी.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>व्रत रखने से वैकुंठ की प्राप्ति</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>सफला एकादशी का व्रत हिंदू धर्म में विशेष महत्वपूर्ण माना जाता है। यह व्रत न केवल व्यक्तिगत सफलता पाने के लिए है बल्कि जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करने का भी उपाय है। जो भक्त इस दिन भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करते हैं, उन्हें भगवान विष्णु के दिव्य निवास वैकुंठ की प्राप्ति होती है, जिसे मोक्ष का प्रवेश द्वार माना जाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>ये है पूजा मुहूर्त</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>शुभ समय: सुबह 7:11 से 8:29 तक<br>लाभ मुहूर्त: दोपहर 12:21 से 1:39 बजे तक<br>अमृत ​​मुहूर्त: दोपहर 1:39 बजे से 2:56 बजे तक<br>शुभ समय: शाम 4:13 बजे से शाम 5:31 बजे तक<br>अमृत ​​मुहूर्त: शाम 5:31 बजे से शाम 7:13 बजे तक</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 26, 2025, 2:24 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/festival/saphala-ekadashi-last-ekadashi-of-the-year-on-25th-or-26th-december-know-everything-here/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Kharmas: खरमास में पति-पत्नी के बीच प्यार बढ़ाने के लिए करें ये उपाय]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/festival/kharmas-do-these-remedies-to-increase-love-between-husband-and-wife-in-kharmas/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। सूर्य जब धनु राशि में प्रवेश करती हैं, तो इसे खरमास और धनु संक्रांति के नाम से जाना जाता है। पौराणिक मान्यता के मुताबिक खरमास में मांगलिक कार्य जैसे विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश आदि नहीं किया जाता। इससे पीछे की मान्यता यह है कि खरमास के दौरान सूर्यदेव का रथ खर यानी गधे खींचते [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-37.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पटना। </strong>सूर्य जब धनु राशि में प्रवेश करती हैं, तो इसे खरमास और धनु संक्रांति के नाम से जाना जाता है। पौराणिक मान्यता के मुताबिक खरमास में मांगलिक कार्य जैसे विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश आदि नहीं किया जाता। इससे पीछे की मान्यता यह है कि खरमास के दौरान सूर्यदेव का रथ खर यानी गधे खींचते हैं, जिससे कि सूर्य की गति और तेज दोनों धीमे पड़ जाते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>पति-पत्नी में झगड़े से शांति के उपाय</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>ऐसे में खरमास के दौरान किए गए मांगलिक कार्यों के सफल होने का फीसदी बहुत कम माना जाता है। खरमास में विवाह नहीं हो सकते, लेकिन खरमास का महीना पूजा-पाठ और धार्मिक कार्यों के लिए खास होता है। खरमास में कुछ ऐसे उपाय करने चाहिए जिससे कि वैवाहिक जीवन में प्रेम बना रहे। आइए जानते हैं खरमास में घर में सुख-शांति के लिए विशेष उपाय। खरमास में अगर पति-पत्नी के बीच रोज झगड़े होते है, तो मानसिक रूप से शांति की जरुरत है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>तुलसी में नियमित रुप से जल चढ़ाए</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>खरमास में पति-पत्नी दोनों को तुलसी में नियमित रूप से जल चढ़ाना चाहिए। साथ ही 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः' के मंत्र का जाप करना चाहिए। ऐसा करने से घर में शांति बनी रहती है। यह उपाय घर में सकारात्मक ऊर्जा लाता है। खरमास में सूर्य को अर्ध्य देना बहुत शुभ माना जाता है। रोज सुबह तांबे के लोटे से जल, अक्षत और लाल रोली मिलाकर सूर्य देव को अर्ध्य देना चाहिए। इससे कुंडली में सूर्य बलवान होता है। यह सरल उपाय आपके जीवन में सकारात्मक प्रभाव ला सकता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>रिश्ते में मधुरता बनी रहती है</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>नित्य सूर्य को अर्घ्य देने से घर में सुख-शांति बनी रहती है। गुरुवार और शुक्रवार के दिन यह खास उपाय को अपनाना चाहिए। गुरुवार और शुक्रवार को एक मिट्टी के दीये में दो कपूर के टुकड़े डालकर उसमे आग लगाए। इसके धुएं को पूरे घर में फैला दें। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है। इससे दांपत्य जीवन बुरी नजर से दूर रहती है। रिश्ते में मधुरता बनी रहती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 26, 2025, 2:24 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/festival/kharmas-do-these-remedies-to-increase-love-between-husband-and-wife-in-kharmas/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Kharmas 2024: शुरू हो रहा है खरमास, भूलकर भी न करें ये काम]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/festival/kharmas-2024-kharmas-is-starting-do-not-do-this-work-even-by-mistake/</link>
                    <description><![CDATA[पटना: सनातन धर्म में खरमास के दिनों को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है, जो साल में दो बार आते हैं। पहला खरमास तब होता है जब सूर्य धनु राशि में प्रवेश करता है और दूसरा खरमास मीन संक्रांति के समय होता है, जब सूर्य मीन राशि में प्रवेश करता है। यह अवधि कुल मिलाकर एक [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-37.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पटना: </strong>सनातन धर्म में खरमास के दिनों को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है, जो साल में दो बार आते हैं। पहला खरमास तब होता है जब सूर्य धनु राशि में प्रवेश करता है और दूसरा खरमास मीन संक्रांति के समय होता है, जब सूर्य मीन राशि में प्रवेश करता है। यह अवधि कुल मिलाकर एक माह तक चलती है, और इस दौरान शुभ कार्य करने पर रोक होती है। आइए जानते हैं खरमास किस दिन से प्रारंभ होता है और इस दौरान कौन से कार्य नहीं करने चाहिए।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>कब से शुरू हो रहा है खरमास</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>वैदिक पंचांग के अनुसार इस वर्ष पौष कृष्ण पक्ष 16 दिसंबर से प्रारंभ हो रहा है। इस दिन सुबह 7 बजकर 40 मिनट पर सूर्य धनु राशि में प्रवेश करेगा. सूर्य इस राशि में 14 जनवरी 2025 तक रहेंगे. इसलिए 16 दिसंबर 2024 से 14 जनवरी 2025 तक का समय खरमास माना जाएगा.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>खरमास के दौरान इन कार्यों से बचें</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>खरमास के महीने में किसी भी तरह का शुभ कार्य करना उचित नहीं होता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>शास्त्रों में इस पर स्पष्ट निषेध है। इस दौरान विवाह, मुंडन आदि समारोहों का आयोजन नहीं करना चाहिए।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इसके अलावा खरमास में नया घर, प्लॉट या फ्लैट खरीदने से भी बचना चाहिए।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस समय नए घर में जाना भी शुभ नहीं माना जाता है, क्योंकि यह आपके लिए परेशानियां खड़ी कर सकता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>खरमास के दौरान उपनयन संस्कार, नया व्रत या पूजा अनुष्ठान शुरू नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह शुभ नहीं माना जाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 26, 2025, 2:24 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/festival/kharmas-2024-kharmas-is-starting-do-not-do-this-work-even-by-mistake/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Geeta Jayanti: आज है गीता जयंती, जानें पूजा के लाभ और विधि]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/festival/geeta-jayanti-today-is-geeta-jayanti-know-the-benefits-and-method-of-worship/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। हर साल मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को गीता जयंती मनाई जाती है। ऐसा माना जाता है कि इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया था। यह दिन कई मायनों से महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस जयंती के कई धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। इस बार गीता जयंती [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-37.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पटना। </strong>हर साल मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को गीता जयंती मनाई जाती है। ऐसा माना जाता है कि इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया था। यह दिन कई मायनों से महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस जयंती के कई धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। इस बार गीता जयंती आज 11 दिसंबर बुधवार को मनाई जा रही है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>गीता जयंती की पूजा विधि</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>गीता जयंती के मौके पर प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में सुबह उठकर स्नान करना चाहिए। स्नान करने के बाद साफ और स्वच्छ कपड़े पहनने चाहिए। मंदिर की साफ-सफाई करनी चाहिए। भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान करते हुए उनकी विधि-विधान से पूजा करना चाहिए। पूजा के बाद सूर्य देव को जल अर्पित करना चाहिए। इसके बाद भगवान श्री कृष्ण की मूर्ति पर चंदन, पुष्प अर्पित करना चाहिए। इसके बाद भगवान की मूर्ति के आगे दीप जलाएं। भगवद्गीता के ग्रंथ को चंदन और कुमकुम का टीका लगाकर पूजा करें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>गीता जयंती के लाभ</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इसके बाद गीता के श्लोकों का पाठ करें। गीता की आरती उतारें। शास्त्रों के मुताबिक गीता का नियमित पाठ करना चाहिए। इससे घर में सुख और समृद्धि का आगमन होता है। साथ ही नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। यह ग्रंथ धर्म नीति, कर्म, सफलता, सुख और जीवन प्रबंधन के महत्वपूर्ण सिद्धांतों से परिपूर्ण है। गीता का पाठ न केवल आत्मबल को बढ़ावा देता है, बल्कि व्यक्ति को हर परिस्थिति का सामना करने की क्षमता भी देता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 26, 2025, 2:24 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/festival/geeta-jayanti-today-is-geeta-jayanti-know-the-benefits-and-method-of-worship/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[मोक्षदा एकादशी व्रत आज, फास्ट रखने से होगा मोक्ष की प्राप्ति, श्री कृष्ण से जुड़ी है कहानी]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/festival/mokshada-ekadashi-fast-today-keeping-fast-will-lead-to-salvation-story-is-related-to-shri-krishna/</link>
                    <description><![CDATA[पटना: सनातन धर्म में मार्गशीर्ष माह को बहुत ही पवित्र माना जाता है। इस माह में पड़ने वाले सभी व्रत और त्योहारों का विशेष महत्व होता है। इस माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मोक्षदा एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस साल मोक्षदा एकादशी व्रत आज यानी 11 दिसंबर को रखा [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-37.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पटना: </strong>सनातन धर्म में मार्गशीर्ष माह को बहुत ही पवित्र माना जाता है। इस माह में पड़ने वाले सभी व्रत और त्योहारों का विशेष महत्व होता है। इस माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मोक्षदा एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस साल मोक्षदा एकादशी व्रत आज यानी 11 दिसंबर को रखा जाएगा.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>व्रत रखने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>मोक्षदा एकादशी का व्रत करने से सुख-समृद्धि आती है।<br>मान्यता है कि मोक्षदा एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति के जीवन में सुख, समृद्धि और खुशहाली आती है। इसके अलावा साधक को मोक्ष की भी प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं कि मोक्षदा एकादशी का व्रत करने से किस प्रकार मोक्ष की प्राप्ति होती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>आज है मोक्षदा एकादशी</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>मोक्षदा एकादशी तिथि 11 दिसंबर को सुबह 3:42 बजे शुरू होगी और 12 दिसंबर को सुबह 1:09 बजे समाप्त होगी, इसलिए मोक्षदा एकादशी व्रत आज 11 दिसंबर को रखा जाएगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>मोक्ष की प्राप्ति</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>मोक्षदा एकादशी का व्रत करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।<br>मोक्षदा एकादशी का व्रत करने से मोक्ष मिलता है या नहीं, इस पर विचार करते हुए पौराणिक कथाएं हमें बताती हैं कि इस दिन कई योद्धा कुरुक्षेत्र के युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए थे और मोक्ष प्राप्त किया था। इस व्रत को करने से सीधे तौर पर मोक्ष की प्राप्ति नहीं होती है, लेकिन पुण्य का फल जरूर मिलता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>पापों से मिलती है मुक्ति</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>ऐसा माना जाता है कि मोक्षदा एकादशी का व्रत करने से आत्मा और मन की पवित्रता बनी रहती है। इस व्रत को करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है और उसके जीवन में सुख-शांति आती है। कहा जाता है कि इस दिन गीता का पाठ करने और उसकी शिक्षाओं का पालन करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>श्री कृष्ण के कारण मोक्ष की प्राप्ति</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>मोक्ष का अर्थ है जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्ति या सुख और दुःख से परे होना। भगवान कृष्ण के ज्ञान के कारण कई लोगों को ज्ञान प्राप्त हुआ, जो मोक्ष के मार्ग की ओर बढ़ने का संकेत है। ऐसे कई भक्त थे जिन्होंने भगवान श्री कृष्ण के सानिध्य में रहकर यह ज्ञान प्राप्त किया था।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 26, 2025, 2:24 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/festival/mokshada-ekadashi-fast-today-keeping-fast-will-lead-to-salvation-story-is-related-to-shri-krishna/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Maha Kumbh: महाकुंभ में शाही स्नान से होते है सारे पाप दूर, जानें तारीख]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/festival/maha-kumbh-all-sins-are-washed-away-by-taking-a-royal-bath-in-maha-kumbh-know-the-date/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। हिंदू धर्म में कुंभ मेले का खास महत्व होता है। कुंभ की भव्यता अद्भूत होती है। इसकी मान्यता का प्रमाण इस बात से मिलता है कि इसमें स्नान करने के लिए लाखों श्रद्धालु महाकुंभ मेले में आते हैं। अगला महाकुंभ प्रयागराज, इलाहाबाद में होने वाला है। इन महाकुंभ का आयोजन केवल हरिद्वार, उज्जैन, नासिक [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-37.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पटना। </strong>हिंदू धर्म में कुंभ मेले का खास महत्व होता है। कुंभ की भव्यता अद्भूत होती है। इसकी मान्यता का प्रमाण इस बात से मिलता है कि इसमें स्नान करने के लिए लाखों श्रद्धालु महाकुंभ मेले में आते हैं। अगला महाकुंभ प्रयागराज, इलाहाबाद में होने वाला है। इन महाकुंभ का आयोजन केवल हरिद्वार, उज्जैन, नासिक और प्रयागराज में ही होता है, जिसके पीछे एक प्राचीन कथा है। आइए, इसके पीछे कथा जानते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>श्रद्धालुओं को मोक्ष की प्राप्ति </strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>एक सौ वाजपेय यज्ञ , एक लाख पृथ्वी की परिक्रमा और एक हजार अश्वमेध यज्ञ का जो फल प्राप्त होता है, वही फल इंसान को ‘कुम्भ स्नान’करने से प्राप्त होता है। प्रयागराज में 2025 में महाकुम्भ के आयोजन के दौरान गंगा, यमुना और सरस्वती के पवित्र तीनों नदियों के संगम पर अनगिनत श्रद्धालु मोक्ष की प्राप्ति के लिए यहां आते हैं और स्नान करते हैं। धार्मिक मान्यता के मुताबिक कुंभ के समय श्रद्धा से स्नान करने वाले व्यक्तियों के सभी पाप दूर हो जाते हैं और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>शाही स्नान की तारीख</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>13 जनवरी: महाकुंभ 2025 का पहला शाही स्नान 13 जनवरी को होगा जो पौष पूर्णिमा के दिन पड़ रहा है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>14 जनवरी: मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर दूसरा शाही स्नान का होगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>29 जनवरी: 29 जनवरी को अमावस्या है, मौनी अमावस्या के दिन श्रद्धालु शाही स्नान करेंगे।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>3 फरवरी: 3 फरवरी को बसंत पंचमी के मौके पर शाही स्नान का आयोजन किया जाएगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>12 फरवरी: माघ पूर्णिमा के मौके पर भी शाही स्नान का आयोजन होगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>26 फरवरी: महाशिवरात्रि के पर भी श्रद्धालु शाही स्नान के लिए आएंगे।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 26, 2025, 2:24 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/festival/maha-kumbh-all-sins-are-washed-away-by-taking-a-royal-bath-in-maha-kumbh-know-the-date/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Bhanu Saptami: आज भानू सप्तमी व्रत, जान लें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/top-news/bhanu-saptami-today-bhanu-saptami-fast-know-the-auspicious-time-worship-method-and-importance/</link>
                    <description><![CDATA[पटना: हिंदू धर्म में भानू सप्तमी का अपना ही महत्व है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन सूर्य देव की पूजा करने से व्यक्ति की कुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत होती है। इसके अलावा हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त होती है। तो आइए जानते हैं व्रत का शुभ मुहूर्त और पूजा विधी। सूर्यदेव [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-37.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पटना:</strong> हिंदू धर्म में भानू सप्तमी का अपना ही महत्व है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन सूर्य देव की पूजा करने से व्यक्ति की कुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत होती है। इसके अलावा हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त होती है। तो आइए जानते हैं व्रत का शुभ मुहूर्त और पूजा विधी।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>सूर्यदेव की होती है पूजा</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>वैदिक पंचांग के मुताबिक, हर वर्ष मार्गशीर्ष महीने की सप्तमी तिथि के दिन भानू सप्तमी का व्रत रखा जाता है. यह दिन सूर्य देव को समर्पित है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक सूर्य देव की पूजा और व्रत करने से जीवन की कई समस्याओं से मुक्ति मिलती है। इसके अलावा भाग्य में वृद्धि के साथ आत्मविश्वास भी बढ़ता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading {"level":3} -->
<h3 class="wp-block-heading"><strong>भानू सप्तमी व्रत डेट</strong></h3>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>पंचांग के अनुसार इस बार मार्गशीर्ष मास की सप्तमी तिथि 7 दिसंबर को रात 11.05 बजे शुरू होगी. वही तिथि अगले दिन 8 दिसंबर को सुबह 9 बजकर 44 मिनट पर समाप्त होगी. उदया तिथि के अनुसार भानु सप्तमी का व्रत 8 दिसंबर को रखा जाएगा.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading {"level":4} -->
<h4 class="wp-block-heading"><strong>शुभ मुहूर्त</strong></h4>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>भानु सप्तमी के दिन सूर्य देव की पूजा का शुभ समय सुबह 6 बजकर 01 मिनट से 6 बजकर 33 मिनट तक रहेगा। इस दौरान श्रद्धालु सूर्य देव को अर्घ्य दे सकते हैं और विधि-विधान से पूजा कर सकते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading {"level":4} -->
<h4 class="wp-block-heading"><strong>पूजा विधि</strong></h4>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>भानु सप्तमी के दिन पूजा करने के लिए ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें। इसके बाद एक कलश में जल, गुड़, रोली, लाल फूल और गंगाजल डालकर उगते सूर्य को अर्घ्य दें। वैदिक मंत्रों का जाप करें और भगवान सूर्य की चालीसा का पाठ करें. इस दिन गंगा नदी में स्नान करने की भी परंपरा है। इसके बाद सूर्यदेव की आरती के साथ पूजा का समापन करें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading {"level":4} -->
<h4 class="wp-block-heading"><strong>भानू सप्तमी पूजा मंत्र</strong></h4>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>ॐ घृणिं सूर्य्य: आदित्य:<br>ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय सहस्रकिरणराय मनोवांछित फलम् देहि देहि स्वाहा..<br>ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजो राशे जगत्पते, अनुकंपयेमां भक्त्या, गृहाणार्घय दिवाकर।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading {"level":4} -->
<h4 class="wp-block-heading"><strong>व्रत के दौरान करें ये काम</strong></h4>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>किसी जरूरतमंद व्यक्ति को गुड़ और लाल वस्त्र दान करें।<br>गाय को रोटी और गुड़ खिलाएं।<br>सूर्य मंदिर में जाकर दीपक जलाएं।<br>सूर्य देव को लाल रंग पसंद है इसलिए लाल वस्त्र पहनें।<br>सूर्य नमस्कार करने से शरीर स्वस्थ और मन शांत रहता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading {"level":4} -->
<h4 class="wp-block-heading"><strong>व्रत का महत्व</strong></h4>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>धार्मिक मान्यता के अनुसार, भानु सप्तमी के दिन सूर्य देव की पूजा करने से रोगों से मुक्ति मिलती है। साथ ही सेहत भी अच्छी रहती है. इस दिन विधि-विधान से व्रत और पूजा करने से सूर्य देव की कृपा प्राप्त होती है। इसके अलावा जीवन के सभी दुख और कष्ट दूर हो जाते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 26, 2025, 2:24 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/top-news/bhanu-saptami-today-bhanu-saptami-fast-know-the-auspicious-time-worship-method-and-importance/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Guru Pradosh: आज है गुरु प्रदोष व्रत, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/festival/guru-pradosh-today-is-guru-pradosh-vrat-learn-the-auspicious-time-and-puja-method/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। सनातन धर्म में कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को बहुत शुभ माना जाता है, क्योंकि इस दिन प्रदोष व्रत का रखा जाता है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा की जाती है। इस बार मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 28 नवंबर 2024 यानी आज [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-37.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पटना।</strong> सनातन धर्म में कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को बहुत शुभ माना जाता है, क्योंकि इस दिन प्रदोष व्रत का रखा जाता है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा की जाती है। इस बार मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 28 नवंबर 2024 यानी आज है। जिसे गुरु प्रदोष व्रत के रूप में मनाया जाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>प्रदोष व्रत की पूजा विधि</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>ऐसा माना जाता है कि इस व्रत को करने से व्रत करने वाली की सभी इच्छाएं पूरी हो जाती है। ज्योतिषियों के मुताबिक इस प्रदोष व्रत के मौके पर दुर्लभ सौभाग्य योग के साथ कई शुभ योग भी बन रहे हैं। प्रदोष व्रत के मौके पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने की परंपरा है। इस दिन सुबह जल्दी स्नान करके साफ वस्त्र धारण करने चाहिए। मंदिर या पूजा स्थल की सफाई करें। मंदिर साफ करने के बाद शिव परिवार की प्रतिमा स्थापित करें। इस प्रदोष व्रत में भगवान शिव और पार्वती की विधि-विधान से पूजा करते है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>भगवान शिव को जल अर्पित करें</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>प्रदोष व्रत पूजा में भगवान शिव और माता पार्वती को अक्षत, बेल पत्र, धूप आदि अर्पित करना चाहिए। इन सभी सामग्री से भगवान शिव की पूजा में शामिल करना चाहिए। यह व्रत निर्जला या फलाहार के साथ किसी भी तरह से रखा जा सकता है। पूरे दिन उपवास करने के बाद सूर्यास्त से पहले कुछ खा लेना चाहिए। हो सके तो शाम को पुनः स्नान करें। इसके बाद भगवान शिव की विधिपूर्वक पूजा करें और गुरु प्रदोष व्रत की कथा सुनें। अंत में शिव जी की आरती करके भोग लगाए। इस दिन ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करते हुए जल चढ़ाना ना भूलें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>पंचांग के मुताबिक मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 28 नवंबर को सुबह 06: 23 मिनट पर आरंभ होगी। इसके पश्चात 29 नवंबर को सुबह 08: 39 मिनट पर खत्म हो जाएगी। इस तरह 28 नवंबर को मार्गशीर्ष माह का पहला प्रदोष व्रत किया जाएगा। इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 05 बजकर 24 मिनट से लेकर 08: 06 मिनट तक रहेगा।इस दिन कई सौभाग्य योग का निर्माण हो रहा है, जो 28 नवंबर की संध्या 4 बजकर 1 मिनट तक ही रहेगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>वैवाहिक जीवन में शांति</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस समय चित्रा नक्षत्र का भी यो बन रहा है। इस मुहूर्त में शिव परिवार की पूजा करने से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। साथ ही सभी प्रकार के दुख-दर्द खत्म होते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 26, 2025, 2:24 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/festival/guru-pradosh-today-is-guru-pradosh-vrat-learn-the-auspicious-time-and-puja-method/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Scorpio: आज है वृश्चिक संक्रांति, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/festival/scorpio-today-is-scorpio-sankranti-know-the-auspicious-time-and-method-of-worship/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में दाखिल होना संक्रांति के रूप में जाना जाता है। मेष, मिथुन, मकर, धनु और कर्क राशि संक्रांति में खास महत्व रखती है। आज 16 नवंबर 2024 यानी आज वृश्चिक संक्रांति है। वृश्चिक संक्रांति का संबंध प्रकृति, खगोल विज्ञान, कृषि, और ऋतु परिवर्तन से होता है, इसलिए [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-37.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पटना।</strong> सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में दाखिल होना संक्रांति के रूप में जाना जाता है। मेष, मिथुन, मकर, धनु और कर्क राशि संक्रांति में खास महत्व रखती है। आज 16 नवंबर 2024 यानी आज वृश्चिक संक्रांति है। वृश्चिक संक्रांति का संबंध प्रकृति, खगोल विज्ञान, कृषि, और ऋतु परिवर्तन से होता है, इसलिए प्रत्येक संक्रांति का अपना एक खास महत्व होता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>वृश्चिक संक्रांति का शुभ मुहूर्त</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>वृश्चिक संक्रांति को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इस दिन सभी शुभ कार्य भी संपन्न किए जाते हैं। हर संक्रांति की अपनी विशेष प्रथा होती है। सूर्य देव मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि यानी 16 नवंबर को सुबह 07 बजकर 41 मिनट पर वृश्चिक राशि में प्रवेश करेंगे। इस दिन का शुभ मुहूर्त सुबह 06 बजकर 45 मिनट से शुरू होगा। जो 07 बजकर 41 मिनट पर समाप्त हो जाएगा। इसी तरह महा पुण्य काल का मुहूर्त भी सुबह 06 बजकर 45 मिनट से 07 बजकर 41 मिनट तक निश्चित है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>वृश्चिक संक्रांति की पूजा विधि</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>वृश्चिक संक्रांति के मौके पर सूर्योदय से पहले स्नान कर साफ और स्वच्छ कपड़े पहन लेने चाहिए। इसके बाद पूजा की तैयारी करें। इस दिन सूर्य देव की पूजा होती है तो इसके लिए एक तांबे के लोटे में पानी भर लें। पानी में काला तिल, रोली, हल्दी, चंदन, और सिंदूर डालकर सूर्य देव को चढ़ाए। फिर धूप और दीप जलाकर भगवान सूर्य की आरती उतारें। साथ ही सूर्य देव के मंत्रों का जाप करें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>हलवे का भोग लगाए</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इसके बाद, सूर्य देव को लाल फूल चढ़ाए। इस दिन, घी और लाल चंदन का लेप लगाकर भगवान सूर्य नारायण के सामने घी की दीपक जलाए। आखिर में, गुड़ से बने हलवे का भोग सूर्य देव को लगाए।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 26, 2025, 2:24 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/festival/scorpio-today-is-scorpio-sankranti-know-the-auspicious-time-and-method-of-worship/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Pradosh Vrat: आज है प्रदोष व्रत, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/festival/pradosh-vrat-today-is-pradosh-vrat-know-the-auspicious-time-worship-method-and-importance/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। भगवान शिव के अनुयायी हर महीने में दो बार प्रदोष व्रत रखते हैं। यह व्रत माह के दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि पर आयोजित किया जाता है। प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है। इस दिन भगवान शिव की अराधना की जाती है। इस दिन भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा की जाती [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-37.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पटना।</strong> भगवान शिव के अनुयायी हर महीने में दो बार प्रदोष व्रत रखते हैं। यह व्रत माह के दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि पर आयोजित किया जाता है। प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है। इस दिन भगवान शिव की अराधना की जाती है। इस दिन भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा की जाती है। इस साल प्रदोष व्रत 13 नवंबर को मनाया जाएगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक इस दिन उपवास करने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। शिव परिवार की पूजा करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। प्रदोष व्रत का पालन इसलिए भी किया जाता है क्योंकि इससे जीवन में सुख और समृद्धि का संचार होता है। 13 नवंबर को प्रदोष पूजा का शुभ मूहुर्त शाम 5 बजकर 28 मिनट से 8 बजकर 7 मिनट तक रहेगा। जो कुल 2 घंटे 39 मिनट का है। इस दिन प्रदोष काल का सही समय इसी अवधि में है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>प्रदोष व्रत की पूजा विधि</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>प्रदोष व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लेना चाहिए। इसके बाद मंदिर की साफ-सफाई करनी चाहिए। शिवलिंग को स्थापित करें। उस पर जल चढ़ाए। शिवलिंग पर जल अर्पित करें। मंदिर में भगवान शिव की प्रतिमा के आगे दीपक जलाएं। शिव-गौरी और गणेशजी की विधि-विधान के साथ पूजा करें। शिव परिवार की आरती उतारें। साथ ही संध्या पूजा की तैयारी करें। अगर संभव हो तो शाम को समय दोबार स्नान करने के बाद ही पूजा करें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>प्रदोष व्रत के लाभ</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इसके बाद शिव मंदिर जाकर भगवान शिव के दर्शन करें। घर पर भी शिवलिंग स्थापित कर उसकी पूजा करें। शिवलिंग पर मदार, फल, बिल्वपत्र, फूल, चंदन और भांग अर्पित करें। शिवजी के मंत्रों का जाप करें। मान्यता है कि प्रदोष व्रत करने से प्रदोष काल में विधिपूर्वक भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है। इस दिन विशेष पूजा करने से आपको शुभ फल की प्राप्ति होती है। साथ ही घर में सुख-समृद्धि के अवसर बनते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 26, 2025, 2:24 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/festival/pradosh-vrat-today-is-pradosh-vrat-know-the-auspicious-time-worship-method-and-importance/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Chhath puja: आज है छठ का तीसरा दिन, डूबते सूर्य को देंगे अर्घ्य]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/festival/chhath-puja-today-is-evening-prayer-we-will-offer-prayer-to-the-setting-sun/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। लोक आस्था का महान पर्व छठ धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। इस मौके पर सूर्य देव और छठी मैया की विधि-विधान से पूजा की जाती है। यह व्रत संतान की सुख-समृद्धि और लंबी उम्र के लिए किया जाता है। व्रती महिलाएं 36 घंटे तक निर्जला उपवास रखते हैं। शाम होते [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-37.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पटना।</strong> लोक आस्था का महान पर्व छठ धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। इस मौके पर सूर्य देव और छठी मैया की विधि-विधान से पूजा की जाती है। यह व्रत संतान की सुख-समृद्धि और लंबी उम्र के लिए किया जाता है। व्रती महिलाएं 36 घंटे तक निर्जला उपवास रखते हैं। शाम होते ही घाट पर जाती है और डूबते व उगते सूर्य को अर्घ्य देती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>डूबते सूर्य को अर्घ्य देते हैं</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>छठ महापर्व के तीसरे दिन 07 नवंबर को, डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। 08 नवंबर को छठ के चौथे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया जाता है। छठ पूजा के तीसरे दिन कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि होती है। इस दिन डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया जाता है। इस दिन यानी संध्य अर्घ्य को भक्तगण शाम के समय किसी घाट के किनारे खड़े होकर सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>सभी ग्रहों का राजा सूर्य</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इसके पीछे की मान्यता यह है कि सूर्य देव अपनी दूसरी पत्नी प्रत्यूषा के साथ होते हैं, और इस समय अर्घ्य अर्पित करने से जीवन की सभी परेशानी दूर हो जाती हैं। वहीं व्रती महिलाओं की सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं। ऐसा करने से जीवन में सुख और समृद्धि का आगमन होता है। भगवान सूर्य को देवताओं में सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। ज्योतिष शास्त्र में भी सूर्य को सभी ग्रहों का राजा माना जाता है। सूर्य की पूजा करने से व्यक्ति स्वस्थ रहता है और उसे विभिन्न रोगों से बचाव मिलता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>नेत्र रोगों से राहत मिलती है</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>सूर्य देव के आशीर्वाद से व्यक्ति के घर में सुख-समृद्धि और धन-धान्य भरा रहता है। इसके साथ ही, जीवन की सभी कठिनाइयां भी दूर होती है। सूर्य की उपासना और अर्घ्य अर्पित करने से इच्छाएं पूर्ण होती हैं और नेत्र रोगों से भी राहत मिलती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 26, 2025, 2:24 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/festival/chhath-puja-today-is-evening-prayer-we-will-offer-prayer-to-the-setting-sun/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Chhath Puja: आज है खरना, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा का महत्व]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/festival/chhath-puja-today-is-kharna-know-the-auspicious-time-and-importance-of-puja/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। छठ महापर्व 2024 की शुरूआत कल नहाय-खाय से हो चुकी है। आज पर्व का दूसरा दिन है, जिसे खरना के नाम से जाना जाता है। यह छठ पूजा का दूसरा दिन होता है। खरना के दिन महिलाएं निर्जला उपवास करती हैं और छठी मैया की आराधना में लगी रहती है। इसके बाद शाम को [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-37.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पटना।</strong> छठ महापर्व 2024 की शुरूआत कल नहाय-खाय से हो चुकी है। आज पर्व का दूसरा दिन है, जिसे खरना के नाम से जाना जाता है। यह छठ पूजा का दूसरा दिन होता है। खरना के दिन महिलाएं निर्जला उपवास करती हैं और छठी मैया की आराधना में लगी रहती है। इसके बाद शाम को प्रसाद बनाने और ग्रहण करने की परंपरा को किया जाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>खरना की तैयारी</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>छठ पूजा के दूसरे दिन 6 नवंबर को खरना होता है। आज खरना की तैयारी की जाती है। इस दिन सूर्यास्त के बाद गुड़, दूध से बनी खीर और रोटी का प्रसाद बनाया जाता है। खरना के मौके पर महिलाएं सूर्य देव को भोग लगाती है। उसके बाद प्रसाद को ग्रहण करती हैं, जिसके बाद उनका 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू हो जाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>खरना का शुभ मुहूर्त</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>नहाय खाय का शुभ मुहूर्त सुबह 6.39 मिनट पर आरंभ होगा। जो सूर्यास्त शाम 5.41पर होगी। खरना का शुभ मुहूर्त 6 नवंबर को 6.37 मिनट पर शुरू होगा, जिसकी समाप्ति 5.32 मिनट पर होगी। इस दिन महिलाएं पूरे दिन उपवास करती है। रात के समय खीर का महा प्रसाद ग्रहण करती है। छठ व्रत का पारण उगते सूर्य को अर्घ्य देने के पश्चात ही किया जाता है। इस दिन गुड़, चावल और दूध से महाप्रसाद तैयार किया जाता है। व्रती महिलाएं और पुरुष को इस दिन नमक से बने खाने का सेवन नहीं करते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>छठ पूजा का महत्व</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>मान्यता है कि इस दिन सूर्य देव और छठी मईया की पूजा करने से निसंतान महिलाओं की संतान की प्राप्ति होती है। साथ ही संतान की सुख, समृद्धि और लंबी आयु का आशीर्वाद भी मिलता है। सनातन धर्म में छठ पूजा का बहुत महत्व होता है। खास तौर पर पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में यह पर्व धूम-धाम के साथ मनाया जाता है। पौराणिक कथाओं के मुताबिक इस पूजा की शुरुआत सूर्य पुत्र और महान योद्धा कर्ण ने की थी। मान्यता है कि इस दिन सूर्य देव और छठी मईया की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 26, 2025, 2:24 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/festival/chhath-puja-today-is-kharna-know-the-auspicious-time-and-importance-of-puja/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Chhath Festival: छठ महापर्व की शुरूआत, नहाय खाए में भूलकर भी ना करें ये काम, सूर्य देवता हो जाएंगे नाराज]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/festival/chhath-festival-beginning-of-chhath-festival-do-not-do-these-things-even-by-mistake-while-taking-bath-sun-god-will-get-angry/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। छठ पूजा की शुरूआत 5 नवंबर 2024 यानी आज से हो गई है। छठ महापर्व चार दिवसीय उत्सव होता है। छठ महापर्व की शुरूआत नहाय-खाय के साथ होती है। इस छठ महापर्व में भक्त 36 घंटे का कठिन ‘निर्जला’ व्रत रखते हैं। दीवाली के छठे दिन से छठ महापर्व की शुरूआत हो जाती है। [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-37.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पटना।</strong> छठ पूजा की शुरूआत 5 नवंबर 2024 यानी आज से हो गई है। छठ महापर्व चार दिवसीय उत्सव होता है। छठ महापर्व की शुरूआत नहाय-खाय के साथ होती है। इस छठ महापर्व में भक्त 36 घंटे का कठिन ‘निर्जला’ व्रत रखते हैं। दीवाली के छठे दिन से छठ महापर्व की शुरूआत हो जाती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>कुछ खास नियम</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>यह पर्व सूर्य देव और उनकी बहन छठी मैया को समर्पित होता है। आज छठ महापर्व का पहला दिन है, जिसे नहाय-खाय के रुप में जाना जाता है। जिसके कुछ खास नियम है, जिसे भूलकर भी तोड़ना नहीं चाहिए, आइए जानते है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>इन कार्यों को करने से बचें</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>नहाय खाय के दिन झूठ बोलने या किसी को अपशब्द बोलने से बचना चाहिए। ऐसा करने से व्रत के पुण्य की प्राप्ति नहीं होती।<br>इस दिन तामसिक भोजन से परहेज करना चाहिए। साबुत अनाज या तले हुए खाद्य पदार्थों को भी नहीं खाना चाहिए। ऐसा करने से मनोकामनाओं की पूर्ति नहीं होती।<br>नहाय खाय के दिन व्रती महिलाओं को काले रंग की साड़ी नहीं पहननी चाहिए, शुभ और मांगलिक कार्यों में काले रंग के कपड़े अशुभ माने जाते हैं।<br>नहाय खाय के दिन मांस भी नहीं खाना चाहिए, वरना व्रत करना व्यर्थ माना जाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>इन राज्यों में मनाया जाता है छठ</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>हिन्दू धर्म में, छठ का खास महत्व होता है। इसे दीवाली के छठे दिन से मनाया जाता है। यह एक 4 दिवसीय उत्सव है। इस पर्व को खास तौर पर यूपी, बिहार, झारखंड, और उत्तराखंड में मनाया जाता है। यह पर्व महिलाओं के लिए बेहद खास होता है। इसके अलावा यह देश के अन्य राज्यों में भी बड़े श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। साथ ही इस व्रत को विदेशों में कई महिलाएं करती है। जानकारी के मुताबित छठ महापर्व की धूम अन्य देशों में भी देखी जा सकती है, जिनमें फिजी, गुयाना और मॉरीशस आदि शामिल है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 26, 2025, 2:24 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/festival/chhath-festival-beginning-of-chhath-festival-do-not-do-these-things-even-by-mistake-while-taking-bath-sun-god-will-get-angry/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Chhath Puja: छठ महापर्व का पहला दिन, नहाय-खाय को लेकर तैयारी शुरू]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/festival/chhath-puja-first-day-of-chhath-festival-preparations-begin-for-nahay-khay/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। सूर्य उपासना व लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा का चार दिन चलने वाला अनुष्ठान आज यानी 5 नवंबर से शुरू हो रहा है। धार्मिक विद्वानों की माने तो छठ पूजा की शुरूआत कार्तिक शुक्ल चतुर्थी से होती है और इसकी समाप्ति कार्तिक शुक्ल को होती है। छठ महापर्व के पहले दिन को नहाय [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-37.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पटना।</strong> सूर्य उपासना व लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा का चार दिन चलने वाला अनुष्ठान आज यानी 5 नवंबर से शुरू हो रहा है। धार्मिक विद्वानों की माने तो छठ पूजा की शुरूआत कार्तिक शुक्ल चतुर्थी से होती है और इसकी समाप्ति कार्तिक शुक्ल को होती है। छठ महापर्व के पहले दिन को नहाय खाय के रूप में मनाया जाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>नहाय-खाय का दिन</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>नहाय खाय के दूसरे दिन कार्तिक शुक्ल पंचमी को खरना के रुप में मनाया जाता है। इस दिन, खासकर कद्दू, चिउड़े, चावल, लौकी का प्रसाद, दाल और चटनी का सेवन किया जाता है। पंचमी को पूरे दिन खरना का व्रत रखने वाले महिलाएं शाम के समय गुड़ से बनी खीर, रोटी और फल का सेवन करती हैं। घर की सुख- समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति का यह पर्व सभी धर्म-जाति के लोग धूम-धाम से मनाते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>साड़ी की दुकानों पर भीड़</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बता दें कि छठ पूजा की शुरूआत को महाभारत काल के समय से देखा जा सकता हैं। षष्ठी देवी सूर्य देव की बहन हैं और उन्हीं को खुश करने के लिए भगवान सूर्य की पूजा और अराधना की जाती है। किसी भी नदी, पोखर या घाट के पानी में खड़े इस पूजा को किया जाता है। छठ को लेकर साड़ी की दुकानों के साथ साथ चूड़ी, लहठी की दुकानों पर भी महिलाओं की भीड़ को देखा जा सकता है। चूड़ी, लहठी दुकानदारों ने बताया कि जयपुरी लहठी के साथ साथ कामदार शीशे वाली चूड़ी की मांग महिलाओं में ज्यादा हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong> छठ को लेकर खास व्यवस्था</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>छठ को लेकर खिरिया घाट, उतरवारी पोखरा, नगर के संतघाट, पथरी घाट, ऑफिसर्स क्लब कोईरी टोला घाट, दुर्गा मंदिर घाट, सागर पोखरा, स्टेशन चौक पोखरा, हरिवाटिका पोखरा पर बनने वाले पंडाल का कार्य लगभग समाप्त होने वाला है। सभी घाटों पर लाइटिंग और बैरिकेटिंग की व्यवस्था की जा रही है। सड़क से लेकर घाट को लाइटों और लड़ियों से सजाया जा रहा है। व्रतियों को किसी प्रकार की दिक्कत न हो, इसके लिए जिला प्रशासन द्वारा घाटों पर आतिशबाजी न करने के निर्देश जारी किए गए है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 26, 2025, 2:24 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/festival/chhath-puja-first-day-of-chhath-festival-preparations-begin-for-nahay-khay/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Chhath Puja: जो लोग पहली बार कर रहे हैं छठ? इन खास बातों का रखें ख्याल]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/festival/chhath-puja-people-who-are-doing-chhath-for-the-first-time-take-care-of-these-special-things/</link>
                    <description><![CDATA[पटना: छठ पूजा बिहार, यूपी, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के लोगों के लिए एक विशेष त्योहार है। अगर हम कहे बिहार की पहचान महापर्व छठ से होती है तो इसमें कोई दो राय नहीं है। इस त्यौहार का अपना एक अलग और विशेष महत्व भी है. हर साल दिवाली के छह दिन बाद इन [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-37.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पटना:</strong> छठ पूजा बिहार, यूपी, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के लोगों के लिए एक विशेष त्योहार है। अगर हम कहे बिहार की पहचान महापर्व छठ से होती है तो इसमें कोई दो राय नहीं है। इस त्यौहार का अपना एक अलग और विशेष महत्व भी है. हर साल दिवाली के छह दिन बाद इन राज्यों सहित देश के कोने-कोने में भगवान सूर्य और छठी मैया को समर्पित छठ पूजा का चार दिवसीय महापर्व मनाया जाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>कब मनाया जाता है छठ पूजा?</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>यह महापर्व कार्तिक शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को शुरू होता है और सप्तमी तिथि को समाप्त होता है। आपको बता दें, छठ पूजा बहुत ही कठिन व्रत है, क्योंकि इसमें श्रद्धालु 36 घंटे तक निर्जला व्रत रखते हैं। ऐसे में अगर आप पहली बार छठ मना रहे हैं तो आपको इससे जुड़े इन खास नियमों का ध्यान जरूर रखना चाहिए. अन्यथा आपको व्रत का पूरा लाभ नहीं मिल पाएगा। आइए अब जानते हैं छठ से जुड़े उन खास नियमों के बारे में।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देने का नियम</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस चार दिवसीय छठ पूजा में सूर्यदेव और छठी मैया की पूजा की जाती है। 36 घंटे के व्रत के दौरान डूबते सूर्य और उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इसके बाद व्रत खोला जाता है और यह महापर्व समाप्त होता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, छठ व्रत खासतौर पर महिलाएं अपनी संतान की लंबी उम्र और सुखी जीवन के लिए रखती हैं। मान्यता है कि अगर माताएं सच्चे मन से यह व्रत रखती हैं तो छठी मैया उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी करती हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>ये है छठ पूजा की तिथियां</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस महापर्व की शुरुआत नहाय-खाय से होती है. और 4 दिन बाद उगते सूर्य को अर्घ्य देकर इसका समापन होता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>नहाय-खाय: 5 नवंबर 2024</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>खरना: 6 नवंबर 2024</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>संध्या सूर्य अर्घ्य: 7 नवंबर 2024</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>प्रातः सूर्य अर्घ्य: 8 नवंबर 2024</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>व्रत का पारण: 8 नवंबर 2024</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>जानें छठ पूजा से जुड़े नियम</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>नहाय-खाय के दिन घर की साफ-सफाई की जाती है. उस दिन परिवार के सभी सदस्यों को सात्विक भोजन करना चाहिए और साफ धुले हुए कपड़े पहनने चाहिए।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस महापर्व में इस्तेमाल होने वाले प्रसाद को मिट्टी के चूल्हे पर ही बनाना शुभ माना जाता है. यह भी माना जाता है कि छठ का प्रसाद केवल उन्हीं को बनाना चाहिए जिन्होंने व्रत रखा हो। प्रसाद बनाते समय पवित्रता का विशेष ध्यान रखें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>छठ व्रत करने वाली महिलाओं को इन चार दिनों में जमीन पर सोना चाहिए।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 26, 2025, 2:24 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/festival/chhath-puja-people-who-are-doing-chhath-for-the-first-time-take-care-of-these-special-things/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Bhai dooj 2024: भाई दूज आज, इस समय करें अपने भाइयों का तिलक, राहुकाल से बचें]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/festival/bhai-dooj-2024-bhai-dooj-today-do-tilak-of-your-brothers-at-this-time-avoid-rahukaal/</link>
                    <description><![CDATA[पटना: भाई दूज का त्योहार भाई-बहन के मजबूत रिश्ते का प्रतीक है। यह हर साल दिवाली के दो दिन बाद बहुत धूमधाम और भव्यता के साथ मनाया जाता है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, यह कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की द्वितीया या द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। बहन और भाई से जुड़ा है यह [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-37.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पटना:</strong> भाई दूज का त्योहार भाई-बहन के मजबूत रिश्ते का प्रतीक है। यह हर साल दिवाली के दो दिन बाद बहुत धूमधाम और भव्यता के साथ मनाया जाता है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, यह कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की द्वितीया या द्वितीया तिथि को मनाया जाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>बहन और भाई से जुड़ा है यह त्योहार</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस साल भाई दूज आज 3 नवंबर को मनाया जा रहा है. इस शुभ दिन पर बहनें अपने भाइयों की लंबी और खुशहाल जिंदगी के लिए प्रार्थना करती हैं और उन्हें तिलक लगाती हैं। इस बार भाई दूज पर राहुकाल की भी संभावना है, ऐसे में आइए जानते हैं कि राहुकाल और तिलक का शुभ समय कब तक रहेगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>तिलक का शुभ मुहूर्त</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस बार आप तीन शुभ मुहूर्त में तिलक कर सकते हैं। घड़ियाल मुहूर्त में तिलक करना अच्छा माना जाता है। यह मुहूर्त 3 तारीख को सुबह 7:57 बजे से सुबह 9:19 बजे तक रहेगा. इसके बाद दूसरा चौघड़िया मुहूर्त सुबह 9.20 से 10.41 बजे तक रहेगा। अमृत चौघड़िया का शुभ समय दोपहर 12 बजे के बीच रहेगा.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>शाम के समय टीका का मुहूर्त</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>भाई दूज के दिन तिलक का शुभ समय शाम 6 बजे से रात 9 बजे तक रहेगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>राहुकाल कब है?</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>वहीं इस दिन राहुकाल शाम 4:30 बजे से 6 बजे तक रहेगा. इस दिन कोई भी शुभ कार्य करने से बचना चाहिए।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>जानें भाई दूज का महत्व</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, ऐसा माना जाता है कि राक्षस नरकासुर का वध करने के बाद, भगवान कृष्ण अपनी बहन सुभद्रा से मिलने गए थे। उन्होंने मिठाइयों और फूलों से उनका स्वागत किया और उनके माथे पर तिलक लगाया। तब से, यह अपने भाई के प्रति बहन के प्यार को उजागर करने वाले भाई दूज उत्सव का प्रतीक बन गया है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 26, 2025, 2:24 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/festival/bhai-dooj-2024-bhai-dooj-today-do-tilak-of-your-brothers-at-this-time-avoid-rahukaal/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Govardhan Puja: आज है गोवर्धन पूजा, जाने शुभ मुहूर्त और पूजा विधि]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/festival/govardhan-puja-today-is-govardhan-puja-know-the-auspicious-time-and-method-of-worship/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। सनातन धर्म में गोवर्धन पूजा को अति महत्व होता है। दीवाली के दूसरे दिन गोवर्धन पूजा को मनाया जाता है। इस दिन पूरे मोहल्ले में हर्षोउल्लास का माहौल होता है। इस बार गोवर्धन पूजा का त्योहार 2 नवंबर को मनाया जाएगा। इस मौके पर गाय के गोबर से भगवान श्रीकृष्ण का चित्रण किया जाता [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-37.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पटना।</strong> सनातन धर्म में गोवर्धन पूजा को अति महत्व होता है। दीवाली के दूसरे दिन गोवर्धन पूजा को मनाया जाता है। इस दिन पूरे मोहल्ले में हर्षोउल्लास का माहौल होता है। इस बार गोवर्धन पूजा का त्योहार 2 नवंबर को मनाया जाएगा। इस मौके पर गाय के गोबर से भगवान श्रीकृष्ण का चित्रण किया जाता है। जिनकी विधि-विधान से पूजा की जाती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>दान-पून्य किया जाता है</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>साथ ही भगवान श्री कृष्ण को उनका प्रिय भोग अर्पित किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि गोवर्धन पर श्री कृष्ण की पूजा करने से सुख-समृद्धी की प्राप्ति होती है। साथ ही जीवन में सफलता पाने के लिए दान-पून्य भी किया जाता है। आइए जानते है गोवर्धन पूजा का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>शुभ मुहूर्त</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>पंचांग के मुताबिक कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की गोवर्धन पूजा की शुरूआत 01 नवंबर को शाम 06 बजकर 16 मिनट से होगी। वहीं, इसकी समाप्ति 02 नवंबर रात 08 बजकर 21 मिनट पर होगी। ऐसे में गोवर्धन पूजा का त्योहार 02 नवंबर को मनाया जाएगा। इस दिन पूजा करने का शुभ मुहूर्त इस प्रकार है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>गोधूलि मुहूर्त</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p> प्रातःकाल मुहूर्त - सुबह 06:34 से 08: 46 मिनट तक, संध्याकाल मुहूर्त - दोपहर 03: 23 से 05: 35 मिनट तक, गोधूलि मुहूर्त- शाम 06: 05 मिनट से लेकर 06: 30 मिनट तक, विजय मुहूर्त- दोपहर 02: 09 मिनट से 02: 56 मिनट तक। त्रिपुष्कर योग- रात्रि 08:21 मिनट तक, 3 नवंबर को सुबह 05: 58 मिनट तक।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>गोवर्धन पूजा का महत्व</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>गोवर्धन पूजा के दिन ब्रजवासी भगवान श्रीकृष्ण को अन्नकूट का भोग अर्पित करते हैं। ‘अन्नकूट’ का अर्थ है अन्न का पहाड़। इस दिन सभी लोग अपने-अपने घरों से भगवान श्री कृष्ण को अलग-अलग व्यंजनों का भोग लगाते है, जैसे चावल, दाल, सब्जियां और अन्य कई तरह के पकवान। इसके साथ ही नंदलला को 56 भोग भी चढ़ाया जाता है। इस दिन भगवान श्री कृष्ण की पूजा करने से भक्तों पर नंदलला की कृपा बनी रहती है। इस दिन माखन को भोग लगाने से श्रीकृष्ण प्रसन्न होते है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 26, 2025, 2:24 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/festival/govardhan-puja-today-is-govardhan-puja-know-the-auspicious-time-and-method-of-worship/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Diwali: दीवाली के मौके पर इन चीजों का लगाएं भोग]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/festival/diwali-offer-these-things-on-the-occasion-of-diwali/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। दीवाली का त्योहार सतानत धर्म में बहुत महत्व होता है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई का प्रतीक है। इस साल दीवाली 31 अक्टूबर और 1 नवंबर को मनाया जाता है। ऐसा माना जाता है जो लोग इस दिन माता लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करते है। उन्हें अपार धन और दौलत की प्राप्ति होती [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-37.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पटना।</strong> दीवाली का त्योहार सतानत धर्म में बहुत महत्व होता है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई का प्रतीक है। इस साल दीवाली 31 अक्टूबर और 1 नवंबर को मनाया जाता है। ऐसा माना जाता है जो लोग इस दिन माता लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करते है। उन्हें अपार धन और दौलत की प्राप्ति होती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>जाने किन चीजों का लगाएं भोग</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस दिन माता लक्ष्मी पृथ्वी पर आती है अपने भक्तों के दुख दूर करने के लिए। साथ ही अपने भक्तों पर अपनी कृपा बनाए रखते हैं। बता दें, इस साल दीवाली आज यानी 31 अक्टूबर को मनाई जा रही है, तो आइए जानते है इस दिन दीवाली में किस चीज का भोग लगाते है?</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>हलवे का भोग लगाए</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>दीवाली पर मां लक्ष्मी को गुड़ के हलवे का भोग लगाना लगाना शुभ माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि मां लक्ष्मी को हलवे का भोग लगाने पर मां प्रसन्न होती है। मां को गुड़, सूजी और मेवों से बने हलवे का भोग लगाना चाहिए। इससे परिवार में खुशियां आती हैं। साथ ही घर में बरकत बनी रहती है। दूध, दही, शहद, घी और चीनी ये चीजें हैं, जिनसे पंचामृत बनाया जाता है। इसे देवी लक्ष्मी की पूजा में जरूर शामिल करना चाहिए।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>पंचामृत अर्पित करें</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>ऐसा कहा जाता है कि माता लक्ष्मी को पंचामृत का भोग लगाने से वह प्रसन्न होती हैं। मां लक्ष्मी कृपा से घर में धन-दौलत की कोई कमी नहीं रहती है। वहीं, बाद में प्रसाद के रूप में इसे स्वयं भी ग्रहण करें। घर में बनी खीर देवी लक्ष्मी के पसंदीदा व्यंजों में से एक है। ऐसा माना जाता है कि खीर का भोग लगाने से शुक्र ग्रह मजबूत होता है, जिससे श्रद्धालुओं को विभिन्न प्रकार के भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है। साथ ही माता लक्ष्मी की कृपा से धन के नए-नए मार्ग मिलते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>बूंदी के लड्डू</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>दीवाली पर मां लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश की भी पूजा करनी चाहिए। बूंदी के लड्डू, या सामान्य तौर पर लड्डू भगवान गणेश को बेहद प्रिय हैं, इसलिए दीपावली पर बूंदी के लड्डू भगवान गणेश और देवी लक्ष्मी को भोग लगाने से दोनों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इससे घर में संपन्नता आती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p></p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 26, 2025, 2:24 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/festival/diwali-offer-these-things-on-the-occasion-of-diwali/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Diwali puja: दीवाली पूजन में जाने शुभ मुहूर्त और रखें इन बातों का खास ध्यान]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/festival/diwali-puja-know-the-auspicious-time-for-diwali-puja-and-keep-these-things-in-mind/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। दीवाली का त्योहार 31 अक्टूबर यानी गुरुवार को मनाया जाएगा। दिवाली के दिन प्रदोष काल और वृषभ काल में भगवान गणेश , माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा की जाती है। वृषभ और सिंह स्थिर लग्न में मां लक्ष्मी की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है। सुख-संपदा का आगमन ऐसा माना जाता [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-37.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पटना।</strong> दीवाली का त्योहार 31 अक्टूबर यानी गुरुवार को मनाया जाएगा। दिवाली के दिन प्रदोष काल और वृषभ काल में भगवान गणेश , माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा की जाती है। वृषभ और सिंह स्थिर लग्न में मां लक्ष्मी की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>सुख-संपदा का आगमन</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>ऐसा माना जाता है कि दिवाली के दिन गणेश-लक्ष्मी पूजा करने से जीवन में सुख-संपदा का आगमन आता है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को दीवाली का त्योहार मनाया जाता है। कार्तिक के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को दीवाली का त्योहार मनाया जाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>दीवाली पूजन का शुभ मुहूर्त</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>विजय मुहूर्त- शाम 1.54 से 2.39<br>ब्रह्ना मुहू्र्त- सुबह 4.48 से 5.40<br>अभिजित मुहूर्त- सुबह 11.41 से 12.26<br>संध्या- सुबह 5.14 से 6.32<br>गोलूधि मुहूर्त- शाम 5.36 से 6.01<br>सायाह्म संध्या- 5.36 से 6.53<br>चौघड़िया मुहूर्त- 5.36 से7.13</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>किन बातों का रखे ध्यान</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>दिवाली के दिन शाम को किसी को भी दूध, दही और इसमे बनी चीजें नही देनी चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इस इन चीजों को देने से घर की बरकत चली गई।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस दिन दिवाली के बाद शाम के समय दूध को दान में नहीं देना चाहिए। ऐसा कहा जाता है नमक का संबंध शुक्र और चंद्रमा ग्रह से है। इसलिए इसे भी दिवाली के दिन नहीं देना चाहिए। इससे ऐश्वर्य का ग्रह खराब होता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>हल्दी का इस्तेमाल शुभ कार्यों में होता है। इसका संबंध गुरु ग्रह से है। इसलिए हल्दी का दान देने से इस दिन गुरु ग्रह खराब हो जाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>दीवाली के मौके पर चीनी का दान नहीं देना चाहिए। इससे चीनी का दान देने से मां लक्ष्मी का वास नहीं होता है। ऐसा माना जाता है कि चीनी गन्ने से बनती है। गन्ना मां लक्ष्मी को प्रिय होते है। इसलिए चीनी का दान दने से परहेज करना चाहिए।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 26, 2025, 2:24 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/festival/diwali-puja-know-the-auspicious-time-for-diwali-puja-and-keep-these-things-in-mind/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Dhanteras: आज है धनतेरस, जाने शुभ मुहूर्त और पूजा विधि]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/festival/dhanteras-today-is-dhanteras-know-the-auspicious-time-and-method-of-worship/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। इस साल धनतेरस का त्योहार 29 अक्टूबर 2024 यानी आज मनाया जाएगा। धनतेरस के आने के साथ ही दीपावली के तैयारी शुरू हो जाती है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन विधिपूर्वक मां लक्ष्मी, भगवान कुबेर और धन्तवरी की विधि-विधान से पूजा की जाती है। इस दिन सभी देवी-देवताओं की पूजा करने में [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-37.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पटना।</strong> इस साल धनतेरस का त्योहार 29 अक्टूबर 2024 यानी आज मनाया जाएगा। धनतेरस के आने के साथ ही दीपावली के तैयारी शुरू हो जाती है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन विधिपूर्वक मां लक्ष्मी, भगवान कुबेर और धन्तवरी की विधि-विधान से पूजा की जाती है। इस दिन सभी देवी-देवताओं की पूजा करने में हमेशा सुख और समृद्धि बनी रहती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>धनतेरस का शुभ मुहूर्त</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>पंचांग के मुताबिक कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 29 अक्टूबर 2024, सुबह 10:31 बजे से आरंभ होगी। जिसका समापन 30 अक्टूबर 2024 बुधवार को दोपहर 01:15 बजे होगा। यह बात देने वाली है कि धनतेरस की पूजा रात्रि में की जाती है, इसलिए यह पर्व इस साल 29 अक्टूबर 2024, मंगलवार को मनाया जाएगा। इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त 29 अक्टूबर को शाम 06:30 से रात्रि 08:12 तक रहेगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>धनतेरस की पूजा विधि</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>धनतेरस के दिन उत्तर दिशा में कुबेर और धन्वंतरि देव की मूर्ति को स्थापित करें। साथ ही धन देवी मां लक्ष्मी और गणेश जी की प्रतिमा रखें। प्रतिमाओं के सामने दीप जलाना चाहिए और विधिपूर्वक पूजा करनी चाहिए। सभी देवताओं को तिलक लगाए और उसके बाद फूल और फलों को अर्पित करें। कुबेर देवता को सफेद मिष्ठान और धन्वंतरि देव को पीली मिठाई का भोग लगाना चाहिए।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 26, 2025, 2:24 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/festival/dhanteras-today-is-dhanteras-know-the-auspicious-time-and-method-of-worship/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Dhanteras 2024: धनतेरस पर झाड़ू खरीदने से पहले ध्यान रखें कुछ जरुरी बातें]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/festival/dhanteras-2024-keep-some-important-things-in-mind-before-buying-a-broom-on-dhanteras/</link>
                    <description><![CDATA[पटना: कार्तीक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन भगवान कुबेर और माता लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व है. ऐसे में लोग इस दिन कई तरह के आभूषण और चीजें खरीदते है। वहीं इस दिन झाड़ू खरीदना भी बहुत शुभ माना जाता है। नई झाड़ू [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-37.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पटना: </strong>कार्तीक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन भगवान कुबेर और माता लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व है. ऐसे में लोग इस दिन कई तरह के आभूषण और चीजें खरीदते है। वहीं इस दिन झाड़ू खरीदना भी बहुत शुभ माना जाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>नई झाड़ू खरीदना शुभ</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बता दें कि धनतेरस पर ज्यादातर लोग अपने घर के लिए नई झाड़ू खरीदते हैं। हालांकि इस झाड़ू को खरीदने से पहले कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना जरूरी है। आइए जानें इससे जुड़ी अहम बाते।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>मोटी झाड़ू खरीदें</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>धनतेरस के दिन जब आप झाड़ू खरीदने बाजार जाएं तो ध्यान रखें कि आपको मोटी झाड़ू खरीदनी चाहिए। ऐसा माना जाता है कि झाड़ू जितनी घनी होगी, उसका सकारात्मक प्रभाव उतना ही अधिक होगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>टूटी हुई झाड़ू खरीदने से बचें</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>अगर आप धनतेरस पर झाड़ू खरीदने की सोच रहे हैं तो ध्यान रखें कि झाड़ू टूटी हुई नहीं होनी चाहिए। टूटी हुई झाड़ू अशुभ मानी जाती है और गरीबी का कारण बन सकती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>प्लास्टिक की झाड़ू खरीदने से दूर रहें</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>कहा जाता है कि धनतेरस के दिन प्लास्टिक की झाड़ू नहीं खरीदनी चाहिए। प्लास्टिक की झाड़ू इस शुभ अवसर के लिए उपयुक्त नहीं मानी जाती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>झाड़ू को साफ सुथरा जगह पर ही रखें</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>जब आप झाड़ू खरीदकर घर लाएं तो उसे सावधानी से किसी सुरक्षित स्थान पर रखें। गंदे स्थान पर झाड़ू रखने से देवी लक्ष्मी नाराज हो जाती हैं। इसके अलावा झाड़ू को हमेशा घर में ऐसी जगह पर रखें जहां किसी की नजर उस पर न पड़े। ऐसा करने से आपके घर में कभी दरिद्रता प्रवेश नहीं करती.</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 26, 2025, 2:24 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/festival/dhanteras-2024-keep-some-important-things-in-mind-before-buying-a-broom-on-dhanteras/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Dhanteras Puja: कल है धनतेरस, जाने शुभ मुहूर्त और धनतेरस का महत्व]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/festival/dhanteras-puja-dhanteras-is-tomorrow-know-the-auspicious-time-and-importance-of-dhanteras/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। धनतेरस का पर्व कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को मनाया जाता है, जो आमतौर पर दिवाली से दो दिन पूर्व आता है. हिंदू पंचांग के अनुसार, इस वर्ष त्रयोदशी 29 अक्टूबर, मंगलवार को है। आइए जानते हैं कि धनतेरस कब है और इसकी पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है. शुभ मुहूर्त सूर्योदय [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-37.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पटना।</strong> धनतेरस का पर्व कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को मनाया जाता है, जो आमतौर पर दिवाली से दो दिन पूर्व आता है. हिंदू पंचांग के अनुसार, इस वर्ष त्रयोदशी 29 अक्टूबर, मंगलवार को है। आइए जानते हैं कि धनतेरस कब है और इसकी पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>शुभ मुहूर्त</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>सूर्योदय – सुबह 6.13 पर<br>चन्द्रोदय- सुबह 4. 27 पर<br>सूर्यास्त – शाम 5. 38 पर<br>चंद्रास्त- शाम 3. 57 पर<br>विजय मुहूर्त – दोपहर 1. 56 मिनट से 2. 40 तक<br>निशिता मुहूर्त – रात्रि 11. 39 से 12. 31 तक<br>गोधूलि मुहूर्त – शाम 5. 38 मिनट से 6.04 तक</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>धनतेरस का महत्व</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>धनतेरस के मौके पर माता लक्ष्मी, कुबेर और धन्वंतरि की विधि-विधान से पूजा की जाती है। इस दिन सभी की पूजा करने से श्रद्धालुओं की सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। धनतेरस के दिन मां लक्ष्मी और कुबेर की पूजा करने से व्यक्ति के धन- संपत्ति में वृद्धि होती है। इस दिन की पूजा से सुख और समृद्धि में वृद्धि होती है। धन्वंतरि की पूजा करने से व्यक्ति की स्वास्थ्य में भी सुधार होता है। परिवार के सदस्य स्वस्थ रहते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 26, 2025, 2:24 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/festival/dhanteras-puja-dhanteras-is-tomorrow-know-the-auspicious-time-and-importance-of-dhanteras/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Ahoi Ashtami: आज है अहोई अष्टमी का व्रत, जाने शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और पूजा सामग्री]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/festival/ahoi-ashtami-today-is-the-fast-of-ahoi-ashtami-know-the-auspicious-time-worship-method-and-worship-materials/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। आज है अहोई अष्टमी का व्रत। इस बार अहोई अष्टमी का पर्व 24 अक्टूबर 2024 को किया जा रहा है। इस दिन माताएं अपने बेटों की लंबी उम्र के लिए निर्जला व्रत रखती हैं, वहीं निःसंतान महिलाएं भी बेटों की प्राप्ति के लिए इस व्रत को करती हैं। व्रत का शुभ मुहूर्त यह व्रत [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-37.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पटना।</strong> आज है अहोई अष्टमी का व्रत। इस बार अहोई अष्टमी का पर्व 24 अक्टूबर 2024 को किया जा रहा है। इस दिन माताएं अपने बेटों की लंबी उम्र के लिए निर्जला व्रत रखती हैं, वहीं निःसंतान महिलाएं भी बेटों की प्राप्ति के लिए इस व्रत को करती हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>व्रत का शुभ मुहूर्त</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>यह व्रत खास तौर से उत्तर भारत में मनाया जाता है। इस दिन अहोई माता के साथ-साथ स्याही माता की भी पूजा-अर्चना की जाती है। महिलाएं शाम को अहोई माता की विधि-विधान से पूजा करती है और कथा सुनती है। इस व्रत का पारण तारे देखने के बाद ही किया जाता हैं। पंचांग के मुताबित कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 24 अक्टूबर को रात 01 बजकर 18 मिनट पर शुरु होगी। जो अगले दिन, 25 अक्टूबर को रात 01 बजकर 58 मिनट पर समाप्त होगी।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>व्रत की पूजा विधि</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>सनातन धर्म में उदया तिथि को महत्वपूर्ण माना जाता है। इस कारण पूरे देश में अहोई अष्टमी का व्रत 24 अक्टूबर को किया जाएगा। अहोई अष्टमी के मौके पर व्रत करने वाली महिलाएं सारे काम निपटाकर स्नान कर लेती है। इस बाद वह व्रत का संकल्प करती है। इस दिन महिलाएं विधि-विधान से अहोई माता और स्याही माता की पूजा करती है। व्रत के साथ ही अहोई माता की व्रत कथा सुनती है। पूजा के लिए दीवार पर अहोई माता की तस्वीर या प्रतिमा बनाई जाती है, जिसके सामने सात प्रकार के अनाज और जल से भरे लोटे के साथ पूजा को किया जाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>व्रत की पूजा सामग्री</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>पूजा के समय दूध, मिठाई, रोली, चावल, और फल अहोई माता को अर्पित किए जाते हैं। शाम के समय, जब तारों के दर्शन होते है, तब अहोई माता की पूजा की जाती है। इसके बाद ही व्रत का पारण किया जाता है। तारे दर्शन का समय – शाम 06:06 बजे है। ऐसा माना जाता है कि यदि तारे नहीं दिखाई देते है तो चंद्र दर्शन के बाद भी व्रत को खोला जा सकता है। चंद्र दर्शन का समय रात 11:56 मिनट है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 26, 2025, 2:24 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/festival/ahoi-ashtami-today-is-the-fast-of-ahoi-ashtami-know-the-auspicious-time-worship-method-and-worship-materials/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item></channel></rss>