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Bihar Phase 7 Voting : बिहार के जहानाबाद लोकसभा में ग्रामीणों ने किया वोट बहिष्कार, मोकमचक गांव में भी मतदान नहीं

पटना। बिहार में आज सातवें (Bihar Phase 7 Voting) और अंतिम चरण की वोटिंग जारी है। इसे लेकर जहां एक तरफ प्रशासन मतदाता जागरूकता अभियान चलाकर लोगों से अधिक संख्या में वोट करने की अपील कर रहा है, तो वहीं दूसरी तरफ जहानाबाद लोकसभा क्षेत्र के गया जिले में अतरी विधानसभा क्षेत्र के मोकमचक गांव […]

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Bihar Phase 7 Voting: Villagers boycotted voting in Jehanabad Lok Sabha of Bihar, no voting in Mokamchak village also
  • June 1, 2024 11:24 am IST, Updated 10 months ago

पटना। बिहार में आज सातवें (Bihar Phase 7 Voting) और अंतिम चरण की वोटिंग जारी है। इसे लेकर जहां एक तरफ प्रशासन मतदाता जागरूकता अभियान चलाकर लोगों से अधिक संख्या में वोट करने की अपील कर रहा है, तो वहीं दूसरी तरफ जहानाबाद लोकसभा क्षेत्र के गया जिले में अतरी विधानसभा क्षेत्र के मोकमचक गांव के ग्रामीण इस चुनाव का बहिष्कार कर मतदान नहीं करने पर अड़े हुए हैं। बता दें कि ये पूरा मामला ग्रामीणों के रास्ते से आवागमन से जुड़ा है।

दबंगों के अतिक्रमण से आवागमन बंद

जानकारी के अनुसार, गांव के सरकारी रास्ते पर गांव के ही दबंगों ने कब्जा कर सड़क को अतिक्रमण कर आवागमन बंद कर दिया है। जिसके चलते अब गांव के ग्रामीणों को दूसरे रास्ते से निकलकर जाना पड़ रहा है। लेकिन, इस बीच 671 वोटिंग वाले गांव के लोग अधिक परेशान हैं। उन्हें गांव से बाहर निकलने के लिए दूसरे रास्ते से आना-जाना पड़ रहा है। इस मामले में सभी ग्रामीण जिला प्रशासन और नेताओं को भी अवगत करा चुके हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। जिसके बाद अब ग्रामीणों ने लोकसभा चुनाव में वोट न कर चुनाव का बहिष्कार करने की बात कही है।

वहीं मिली जानकारी के अनुसार, मोकमचक गांव के सामुदायिक भवन में बूथ संख्या 124 बनाया गया है। यहां बूथ पर कुल 671 मतदाता हैं। लेकिन, सड़क और विधालय नहीं होने के कारण एक भी मतदाता ने मतदान नहीं किया है।

ग्रामीणों का दिखा आक्रोश

यहां वोट बहिष्कार (Bihar Phase 7 Voting) की सूचना मिलने पर जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन के बड़े अधिकारी मतदान केंद्र पहुंचे। लेकिन लोग मौजूद अधिकारियों के सामने मतदान केन्द्र के पास जमे रहे और ‘सड़क नहीं तो वोट नहीं’ का नारा लगाते रहे। अधिकारियों के समझाने बुझाने के बाद भी जब गांव के लोग नहीं माने, तो अधिकारी बैरन लौट गए।


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