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        <title></title>
        <description></description>
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        <lastBuildDate>April 15, 2026, 3:26 pm</lastBuildDate>
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                    <title><![CDATA[भाइयां ये यूपी नहीं बिहार बा, मौनी अमावस्या पर बगहा में त्रिवेणी संगम पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/culture/brothers-this-is-not-up-but-bihar-huge-crowd-of-devotees-at-triveni-sangam-in-bagaha-on-mauni-amavasya/</link>
                    <description><![CDATA[पटना: आज मौनी अमावस्या है। इस मौके पर यूपी के प्रयागराज महाकुंभ में आज दूसरा अमृत स्नान है। दूसरे शाही स्नान से पहले ही महाकुंभ में अधिक भीड़ होने से मंगलवार देर रात भगदड़ मच गई। जिसमें कई लोगों की मौत की खबर सामने आई हैं। इस बीच बिहार के बगहा जिले स्थित त्रिवेणी संगम [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/01/download-46-2.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पटना:</strong> आज मौनी अमावस्या  है। इस मौके पर यूपी के प्रयागराज महाकुंभ में आज दूसरा अमृत स्नान है। दूसरे शाही स्नान से पहले ही महाकुंभ में अधिक भीड़ होने से मंगलवार देर रात भगदड़ मच गई। जिसमें कई लोगों की मौत की खबर सामने आई हैं। इस बीच बिहार के बगहा जिले स्थित त्रिवेणी संगम की कई तस्वीरें सामने आई है। जिससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि बगहा त्रिवेणी में स्नान करने के लिए भारी संख्या में लोग पहुंचे हुए हैं। जिस कारण से वाहनों की लंबी कतार देखने को मिली। इससे यातायात काफी प्रभावित भी हुआ है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>नारायणी गंडक में स्नान कर रहें श्रद्धालु</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>आज मौनी अमावस्या पर ब्रह्म मुहूर्त से ही नारायणी गंडक के पवित्र जल में डुबकी लगाने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ पहुंच रही है। भक्तों ने नदी में डुबकी लगाने के दौरान भगवान विष्णु, भोलेनाथ और सूर्य देव की आराधना की। दान-पुण्य किया। वाल्मीकि नगर सटे होने की वजह से नेपाल से भी भक्तों की भारी भीड़ पहुंच रही है। यूपी से सटे इलाके हैं वहां से भी लोग वाल्मीकि नगर पहुंचकर स्नान करते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>प्रशासन अलर्ट</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>मौनी अमावस्या  पर बिहार सरकार का मानना था कि अधिक भीड़ होगी। इसके लिए पहले से ही प्रशासन अलर्ट थी। जगह-जगह पर सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किये गए हैं। सरकार भक्तों की भीड़ को कंट्रोल में रखने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। भक्त सही से स्नान कर रहे हैं। यहां कोई अनहोनी न हो इसके लिए पूरी तैयारी है। हालांकि भीड़ अधिक होने के कारण ट्रैफिक अधिक है। जगह-जगह पर लोगों को सड़क जाम का सामना करना पड़ रहा है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>January 29, 2025, 9:57 am</pubDate>
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                  </item><item>
                    <title><![CDATA[आठ दिवसीय दौरे पर बिहार आ रही जया किशोरी, भक्तों में प्रवचन को लेकर अति उत्साह]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/culture/jaya-kishori-coming-to-bihar-on-an-eight-day-tour-great-enthusiasm-among-the-devotees-about-the-sermon/</link>
                    <description><![CDATA[पटना: प्रसिद्ध कथा वाचक जया किशोरी आठ दिवसीय भागवत ज्ञान यज्ञ में प्रवचन देने के लिए बिहार आ रही हैं. यह आयोजन गया जिले के परैया प्रखंड के दखनेर गांव में 1 फरवरी से 8 फरवरी तक आयोजित किया जा रहा है. आयोजन के लिए पांच समितियों का भी गठन किया गया है. इसे लेकर [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/01/download-46-2.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पटना:</strong> प्रसिद्ध कथा वाचक जया किशोरी आठ दिवसीय भागवत ज्ञान यज्ञ में प्रवचन देने के लिए बिहार आ रही हैं. यह आयोजन गया जिले के परैया प्रखंड के दखनेर गांव में 1 फरवरी से 8 फरवरी तक आयोजित किया जा रहा है. आयोजन के लिए पांच समितियों का भी गठन किया गया है. इसे लेकर शुक्रवार को प्रशासनिक अधिकारियों ने कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण किया.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>डीएसपी समेत अन्य अधिकारी पहुंचे निरक्षण करने</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>तैयारियों का निरीक्षण करने पहुंचे डीएसपी सुशांत कुमार चंचल, बीडीओ लौंग काल, सीओ केशव किशोर व थानाध्यक्ष सर्वनारायण ने कार्यक्रम आयोजन समिति के सदस्यों के साथ बैठक कर आयोजन को लेकर आवश्यक निर्देश दिये.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>27 जनवरी तक लिखित में दें रिपोर्ट</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>अधिकारियों ने आयोजन समिति को 27 जनवरी तक आयोजन से संबंधित सभी तैयारियों की लिखित रिपोर्ट अनुमंडल कार्यालय को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है. उन्होंने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर प्रशासनिक सहयोग उपलब्ध कराया जायेगा. इसके अलावा मेला स्थल, वाहन पार्किंग, दुकानों और ठेलों को लेकर भी योजना बनाई गई है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>8 दिनों तक चलेगा प्रवचन</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>जया किशोरी का प्रवचन 8 दिनों तक चलेगा, जिसके लिए विशेष पंडाल और मंच तैयार किए जा रहे हैं. उम्मीद है कि इस कार्यक्रम में प्रखंड क्षेत्र के साथ-साथ अन्य प्रखंडों व जिलों सहित पूरे देश से हजारों की संख्या में श्रद्धालु भाग लेंगे. कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो इसके लिए प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर रहा है. अतिथियों के आगमन, आवास, भोजन आदि सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समिति द्वारा की जा रही हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>January 29, 2025, 9:57 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/culture/jaya-kishori-coming-to-bihar-on-an-eight-day-tour-great-enthusiasm-among-the-devotees-about-the-sermon/</guid>
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                  </item><item>
                    <title><![CDATA[कर्तव्य पथ पर बिहार की झांकी रहेगी आकर्षण का केंद्र, जानिए क्या कुछ होगा स्पेशल]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/culture/bihars-tableau-will-be-the-center-of-attraction-on-the-duty-path-know-what-will-be-special/</link>
                    <description><![CDATA[पटना: 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस पर दिल्ली के कर्तव्य पथ पर बिहार की झांकी भी दिखेगी. आठ साल बाद बिहार की झांकी को गणतंत्र दिवस परेड में शामिल होने का मौका मिल रहा है. बिहार की यह झांकी ज्ञान की भूमि नालंदा की प्राचीन विरासत और इसे संरक्षित करने के लिए किए जा रहे [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/01/download-46-2.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पटना:</strong> 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस पर दिल्ली के कर्तव्य पथ पर बिहार की झांकी भी दिखेगी. आठ साल बाद बिहार की झांकी को गणतंत्र दिवस परेड में शामिल होने का मौका मिल रहा है. बिहार की यह झांकी ज्ञान की भूमि नालंदा की प्राचीन विरासत और इसे संरक्षित करने के लिए किए जा रहे प्रयासों को दिखाया जाएगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>झांकी में भगवान बुद्ध की अलौकिक रूप दिखेगा</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बता दें कि इसके अलावा झांकी में भगवान बुद्ध की अलौकिक और भव्य प्रतिमा के साथ घोड़ा कटोरा झील को इको टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने का अनूठा प्रयास भी दिखाया गया है. झांकी के अग्रभाग में बोधिवृक्ष यह संदेश दे रहा है कि ज्ञान का प्रकाश इस धरती से पूरे विश्व में फैल चुका है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>ज्ञान और शांति की समृद्ध परंपरा</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बिहार राज्य की झांकी में बिहार की ज्ञान और शांति की समृद्ध परंपरा को प्रदर्शित किया गया है. झांकी में भगवान बुद्ध को शांति का संदेश देते हुए प्रदर्शित किया गया है. भगवान बुद्ध की यह अलौकिक प्रतिमा राजगीर के घोड़ा कटोरा जलाशय में स्थित है, जिसे देखने हर साल लाखों पर्यटक आते हैं। वर्ष 2018 में स्थापित एक ही पत्थर से बनी भगवान बुद्ध की 70 फीट की अलौकिक एवं भव्य प्रतिमा के साथ घोड़ा कटोरा झील का विकास, इको-टूरिज्म के क्षेत्र में बिहार सरकार का एक अनूठा प्रयास है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय भी दिखेंगे</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>झांकी में प्राचीन नालंदा महाविहार (विश्वविद्यालय) के खंडहरों को भी दर्शाया गया है, जो इस बात का प्रमाण है कि चीन, जापान और मध्य एशिया जैसे दूर देशों से छात्र ज्ञान प्राप्त करने के लिए यहां आते थे। नालंदा विश्वविद्यालय के खंडहर प्राचीन भारत की ज्ञान परंपरा के प्रतीक हैं। भारतीय संस्कृति की विरासत को सुरक्षित रखने के लिए इन खंडहरों का संरक्षण एवं संवर्धन अत्यंत आवश्यक है। बिहार सरकार द्वारा किये जा रहे प्रयासों से नालन्दा का प्राचीन गौरव पुनः स्थापित हो रहा है। झांकी में दीवार चित्रों के माध्यम से बिहार की प्राचीन और समृद्ध विरासत को भी दर्शाया गया है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>January 29, 2025, 9:57 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/culture/bihars-tableau-will-be-the-center-of-attraction-on-the-duty-path-know-what-will-be-special/</guid>
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                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[दर्जनों कुर्सियां तोड़ीं, जज की गाड़ी पर चढ़े लोग…राजगीर महोत्सव में जुबिन नौटियाल का दीदार करने के लिए पागल हुए दर्शक]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/desh-pradesh/dozens-of-chairs-were-broken-people-climbed-on-the-judges-car-audience-went-crazy-to-see-jubin-nautiyal-in-rajgir-mahotsav/</link>
                    <description><![CDATA[पटना: राजगीर में शनिवार से तीन दिवसीय राजगीर महोत्सव शुरू हो गया है. राजगीर महोत्सव के पहले दिन मशहूर गायक जुबिन नौटियाल का कार्यक्रम आयोजित किया गया. इस दौरान लोगों की भारी भीड़ पहुंची. जिन्होंने कुर्सियां ​​तक ​​तोड़ दीं, इतना ही नहीं जब उन्हें जगह नहीं मिली तो कुछ लोग पुलिस के लिए बने वॉच [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/01/download-46-2.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पटना: </strong>राजगीर में शनिवार से तीन दिवसीय राजगीर महोत्सव शुरू हो गया है. राजगीर महोत्सव के पहले दिन मशहूर गायक जुबिन नौटियाल का कार्यक्रम आयोजित किया गया. इस दौरान लोगों की भारी भीड़ पहुंची. जिन्होंने कुर्सियां ​​तक ​​तोड़ दीं, इतना ही नहीं जब उन्हें जगह नहीं मिली तो कुछ लोग पुलिस के लिए बने वॉच टावर पर भी चढ़ गये. जुबिन नौटियाल की एक झलक देखने के लिए लोग काफी बेताब दिखे.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>कई कलाकार देंगे अपनी प्रस्तुति</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बता दें कि राजगीर महोत्सव का उद्घाटन बिहार सरकार के ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने किया. हर साल इस महोत्सव का आयोजन किया जाता है जिसमें कई बॉलीवुड गायक पहुंचते हैं और उन्हें देखने के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ती है। महोत्सव का आयोजन आज (22 दिसंबर) और कल 23 दिसंबर को भी किया जाएगा. आज रविवार के कार्यक्रम में गायिका अरुणिता और पवनदीप शामिल होंगे. इसके अलावा 23 दिसंबर को लोकगीत गायिका मैथिली ठाकुर प्रस्तुति देंगी.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>व्यवस्था हुई खराब</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>शनिवार को गायक जुबिन नौटियाल को देखने और सुनने के लिए लोग उमड़ पड़े। यहां तक ​​कि उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था को भी खराब कर दिया. लोगों की भीड़ ने प्रशासनिक अधिकारियों की गाड़ी को भी नहीं छोड़ा. कुछ लोगों को जहां जगह मिली, वहां चढ़ गये. साउंड सिस्टम, बैरिकेडिंग सभी जगहों पर दर्शकों का कब्जा था. पंडाल के बाहर पंडाल की क्षमता से कई गुना ज्यादा लोग नजर आए.</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>January 29, 2025, 9:57 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/desh-pradesh/dozens-of-chairs-were-broken-people-climbed-on-the-judges-car-audience-went-crazy-to-see-jubin-nautiyal-in-rajgir-mahotsav/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[दिल्ली एम्स के ICU में शारदा सिन्हा भर्ती, स्थिति गंभीर]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/top-news/sharda-sinha-admitted-in-icu-of-delhi-aiims-condition-critical/</link>
                    <description><![CDATA[पटना: दिग्गज गायिका शारदा सिन्हा की तबीयत बेहद खराब है. फैंस उनकी सेहत को लेकर काफी चिंतित हैं और उनकी चिंता कर रहे हैं. शारदा सिन्हा फिलहाल आईसीयू में भर्ती हैं। हर कोई उनकी सलामती की दुआ कर रहा है. फैंस को उनकी चिंता सता रही है. सिंगर को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/01/download-46-2.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पटना:</strong> दिग्गज गायिका शारदा सिन्हा की तबीयत बेहद खराब है. फैंस उनकी सेहत को लेकर काफी चिंतित हैं और उनकी चिंता कर रहे हैं. शारदा सिन्हा फिलहाल आईसीयू में भर्ती हैं। हर कोई उनकी सलामती की दुआ कर रहा है. फैंस को उनकी चिंता सता रही है.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>सिंगर को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अभी तक शारदा सिन्हा के बारे में यही जानकारी मिल रही है कि उनकी हालत गंभीर है और वह अस्पताल में भर्ती हैं। साथ ही अस्पताल की ओर से अभी तक सिंगर को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है. शारदा सिन्हा को नई दिल्ली के एम्स में भर्ती कराया गया है.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>कई दिनों से खाने-पीने में दिक्कत</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>गौरतलब है कि शारदा सिन्हा पिछले हफ्ते से अस्पताल में भर्ती थीं. हालत ज्यादा गंभीर होने पर सिंगर को आईसीयू में भर्ती कराया गया। जानकारी मिली है कि शारदा सिन्हा को पिछले कई दिनों से खाने-पीने में दिक्कत हो रही थी.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>22 सितंबर को पति ने कहा अलविदा</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बता दें कि कुछ दिन पहले यानी 22 सितंबर को शारदा सिन्हा के पति ब्रजकिशोर सिन्हा का निधन हो गया था. ब्रजकिशोर सिन्हा ने 80 साल की उम्र में इस दुनिया को अलविदा कह दिया. हालांकि, ब्रेन हेमरेज के कारण ब्रजकिशोर की मौत हो गई. शादी के 54 साल बाद बृजकिशोर अपनी पत्नी शारदा को छोड़कर इस दुनिया से चले गए। पति की मृत्यु के बाद शारदा बीमार रहने लगीं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>स्थिति बिगड़ने पर आईसीयू में रखा गया</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>अब स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि दिग्गज गायक को आईसीयू में भर्ती कराना पड़ा। शारदा सिन्हा के प्रशंसक और शुभचिंतक उनके शीघ्र स्वस्थ होने के लिए महामृत्युंजय का जाप और विशेष प्रार्थना कर रहे हैं। सभी की दुआएं गायक के साथ हैं.'</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>January 29, 2025, 9:57 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/top-news/sharda-sinha-admitted-in-icu-of-delhi-aiims-condition-critical/</guid>
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                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[हनुमान जी पढ़ते थे नमाज…टीचर की बात से मची खलबली]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/top-news/hanuman-ji-used-to-offer-namaz-teachers-words-created-panic/</link>
                    <description><![CDATA[पटना: बिहार के बेगुसराय जिले के एक निजी स्कूल में पढ़ाते समय एक मुस्लिम शिक्षक ने हिंदुओं के पूज्य भगवान हनुमान जी को लेकर बेहद विवादित बयान दिया है. क्लासरूम में पढ़ाते समय उन्होंने हनुमान जी को मुस्लिम समुदाय से बताया था। इतना ही नहीं बल्कि टीचर ने कहा कि हनुमान जी नमाज पढ़ते थे. [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/01/download-46-2.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पटना:</strong> बिहार के बेगुसराय जिले के एक निजी स्कूल में पढ़ाते समय एक मुस्लिम शिक्षक ने हिंदुओं के पूज्य भगवान हनुमान जी को लेकर बेहद विवादित बयान दिया है. क्लासरूम में पढ़ाते समय उन्होंने हनुमान जी को मुस्लिम समुदाय से बताया था। इतना ही नहीं बल्कि टीचर ने कहा कि हनुमान जी नमाज पढ़ते थे. जिसके बाद हिन्दू सामाज में आक्रोश का माहौल है.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>बछवाड़ा थाना के एक स्कूल का मामला</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>मुस्लिम शिक्षक के विवादित बयान की खबर बछवाड़ा थाना क्षेत्र के मध्य विद्यालय हरिपुर कादराबाद की है. इस स्कूल में बच्चों को पढ़ाने वाले शिक्षक जियाउद्दीन ने क्लास में बच्चों को पढ़ाते समय विवादित बयान दे दिया. बच्चों का आरोप है कि क्लास में पढ़ाते समय टीचर ने कहा कि हिंदू भगवान हनुमान भी मुस्लिम थे. वह नमाज भी पढ़ते थे.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>मामले को लेकर बढ़ा हंगामा</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बता दें कि टीचर के इस दावे के बाद स्कूल में हड़कंप मच गया. बच्चों ने घर आकर यह सब बात अपने माता-पिता को बताई। इससे अभिभावक नाराज हो गये और तुरंत स्कूल पहुंच कर हंगामा करने लगे. हंगामा बढ़ता देख शिक्षक ने माफी मांगी. हालांकि, टीचर के माफी मांगने के बाद मामला शांत हो गया और स्कूल प्रबंधन ने भी टीचर को चेतावनी दी है.</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>January 29, 2025, 9:57 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/top-news/hanuman-ji-used-to-offer-namaz-teachers-words-created-panic/</guid>
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                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Pitru Paksha 2024: प्रेमानंद महाराज के विचार से क्या सही में लगानी चाहिए घर में पितरों की तस्वीर]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/culture/pitru-paksha-2024-according-to-premanand-maharaj-should-the-pictures-of-ancestors-be-kept-in-the-house/</link>
                    <description><![CDATA[पटना: हिंदू पौराणिक कथाओं के मुताबिक, हमारे पूर्वज हमें हमेशा आशीर्वाद देने और हमारी परेशानियों का रास्ता निकालने के लिए पितृ पक्ष के दौरान धरती पर आते हैं. बता दें पितृ पक्ष कुछ ही दिनों में शुरू होने जा रहा है. पितृ पक्ष 18 सितंबर से शुरू होकर 2 अक्टूबर तक चलने वाला है. ऐसे [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/01/download-46-2.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पटना:</strong> हिंदू पौराणिक कथाओं के मुताबिक, हमारे पूर्वज हमें हमेशा आशीर्वाद देने और हमारी परेशानियों का रास्ता निकालने के लिए पितृ पक्ष के दौरान धरती पर आते हैं. बता दें पितृ पक्ष कुछ ही दिनों में शुरू होने जा रहा है. पितृ पक्ष 18 सितंबर से शुरू होकर 2 अक्टूबर तक चलने वाला है. ऐसे में हम अपने घरों में पूर्वजों की कई फोटोज लगाते हैं. आइए पितृ पक्ष से पहले जानते है पितरों की फोटोज को लेकर प्रेमानंद जी महाराज के विचार।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>लड़की के पूछने पर महाराज जी ने बताई वजह</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>हाल ही में, प्रेमानंद महाराज जी के आश्रम में कथा के दौरान एक लड़की ने पूछा कि क्या हमें अपने पूर्वजों की फोटोज अपने मंदिरों में लगानी चाहिए. हालांकि, कई लोगों का कहना ​​है कि राधा रानी और कुंज बिहारी के आसपास अपने पूर्वज की तस्वीर नहीं लगानी चाहिए. तो इस प्रश्न का जवाब प्रेमानंद महाराज देते हुए बोले हैं कि यदि आपको ऐसा लगता है कि हमारे रक्षक ठाकुर जी के जीवन में कोई परेशानी नहीं है। इस स्थिति में ठाकुर जी का रूप कैसा है ये आपके अंदर के आत्मा ने मान लिया, आप जिस मन से उसे देखेंगे आपको ठाकुर जी की वैसी ही छवि दिखेगी।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>पूर्वजों की पूजा भगवान के पूजा के सामान</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बता दें कि प्रेमानंद महाराज का कहना हैं कि अगर आपके अंदर देवी देवता को लेकर भावनाएं हैं तो इसमें कुछ भी खराब या गलत नहीं है. यदि ऐसा आपके जीवन में नहीं है, तो आपके पूर्वजों की फोटोज नहीं सहेज सकते है. यदि आप सच्ची भावना से अपने पूर्वजों की तस्वीर लगाते हैं और विश्वास करते हैं कि ये लोग मेरे भगवान के सामान हैं और सच्ची श्रद्धा भाव से उनकी सेवा करते रहते हैं, तो आपको अवश्य भगवान का आशीर्वाद मिलेगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>January 29, 2025, 9:57 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/culture/pitru-paksha-2024-according-to-premanand-maharaj-should-the-pictures-of-ancestors-be-kept-in-the-house/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Garud Puran: मृत्यु के बाद आत्मा की इस तरह होती है अदालती कार्रवाई, रेप-हत्या करने वालों को मिलती है ये कड़ी सजा]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/culture/garud-puran-after-death-this-is-how-court-action-is-taken-against-the-soul-those-who-commit-rape-and-murder-get-this-severe-punishment/</link>
                    <description><![CDATA[पटना: गरुड़ पुराण में जीवन के बाद होने वाली सभी घटनाओं को विस्तार से बताया गया है। इस पुराण में यह भी विस्तार से बताया गया है कि किस तरह आत्मा को यमलोक में अदालती कार्यवाही से गुजरना पड़ता है। इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि यमलोक की अदालत कैसी होती है और वहां आत्माओं [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/01/download-46-2.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पटना:</strong> गरुड़ पुराण में जीवन के बाद होने वाली सभी घटनाओं को विस्तार से बताया गया है। इस पुराण में यह भी विस्तार से बताया गया है कि किस तरह आत्मा को यमलोक में अदालती कार्यवाही से गुजरना पड़ता है। इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि यमलोक की अदालत कैसी होती है और वहां आत्माओं को किस तरह से सजा दी जाती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>कैसा होता है यमलोक?</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>गरुड़ पुराण के अनुसार, यमराज की आज्ञा के बिना देवता भी यमराज के दरबार में प्रवेश नहीं कर सकते। यमराज की सेवा करने वाले लोगों को यमदूत कहा जाता है। दरबार के द्वार की रक्षा करने वाले दूतों को धर्म ध्वज के नाम से जाना जाता है। यमलोक में चार द्वार हैं। इन चार द्वारों को उत्तरी द्वार, दक्षिणी द्वार, पश्चिमी द्वार और पूर्वी द्वार के नाम से जाना जाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>पूरब द्वार को कहा गया है स्वर्ग का द्वार</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>गरुड़ पुराण में लिखा गया है कि पूरब के दरवाजे की तरफ से ऋषि-मुनि,योगी और सिद्ध पुरुषों की आत्मा की एंट्री होती है। इसे स्वर्ग का द्वार भी बोला जाता है।&nbsp; जो भी आत्माएं इस दरवाजे से यमलोक के अंदर प्रवेश करती है उसका स्वागत अप्सरा करती है। वहीं पश्‍च‍िमी दरवाजे से ऐसी आत्मा को एंट्री मिलती है जिसने अपने जीवन में धर्म की रक्षा की हो, दान-पुण्य किया हो अथवा जिसकी मृत्यु किसी तीर्थ स्थल पर हुई हो।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>पाप करने वालों को दक्षिणी द्वार से एंट्री</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>दक्षिणी दरवाजे से यमराज की न्यायालय में वैसी आत्माओं को प्रवेश होता है जो अपने जीवन में पाप ही पाप किया हो। इसलिए दक्षिणी दरवाजे को नरक का प्रवेश द्वार भी बोला गया है।&nbsp; जबकि उत्तरी द्वार से वैसी आत्माओं की एंट्री होती है जो अपने संपूर्ण जीवन में माता-पिता की खूब सेवा की हो, सदैव सत्य के साथ खड़ा रहा हो और जिसने कभी भी किसी पर कोई हिंसा न की हो।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>आत्माओं को कटघरे में किया जाता है खड़ा</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>वहीं जो आत्माएं पूर्वी द्वार से यमलोक में प्रवेश करती हैं, उन्हें यमराज के दरबार में उपस्थित होने की आवश्यकता नहीं होती। उन्हें सीधे स्वर्ग भेजा जाता है। जबकि अन्य तीन द्वारों से यमलोक में प्रवेश करने वाली आत्माओं को यमराज के दरबार में उपस्थित होना पड़ता है। इस दौरान यमराज दरबार में अपने सिंहासन पर बैठते हैं। आत्मा को दूतों द्वारा लाया जाता है और यमराज के सामने कटघरे में खड़ा किया जाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>यमराज करते हैं अच्छे व बुरे कर्मों की तुलना</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>उसके बाद चित्रगुप्त जी महाराज एक वकील की तरह यमराज को उस आत्मा के कर्मों का लेखा-जोखा बताते हैं। फिर यमराज उसके अच्छे और बुरे कर्मों की तुलना करते हैं।&nbsp; यदि पुण्य की मात्रा अधिक है तो उस आत्मा को सुख भोगने के लिए स्वर्ग भेजा जाता है और जब पुण्य की मात्रा समाप्त हो जाती है तो आत्मा को पाप की मात्रा के बराबर नरक का कष्ट भोगना पड़ता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>दुष्कर्मी व हत्यारों को लाखों वर्षों तक कष्ट</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>दूसरी ओर, जिस आत्मा ने अधिक पाप किए होते हैं, उसे पहले नरक की पीड़ा भोगनी पड़ती है, उसके बाद उसे सुख भोगने के लिए स्वर्ग भेजा जाता है। कुछ आत्माएं ऐसी होती हैं जो जीवित रहते हुए बलात्कार और हत्या जैसे जघन्य अपराध करती हैं, मृत्यु के बाद उन्हें तामिस्र नामक नरक में लाखों वर्षों तक कष्ट भोगना पड़ता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>January 29, 2025, 9:57 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/culture/garud-puran-after-death-this-is-how-court-action-is-taken-against-the-soul-those-who-commit-rape-and-murder-get-this-severe-punishment/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Ganesh Chaturthi : गजब की भक्ति, मुंबई से बिहार तक के लिए बप्पा का कटवाया ट्रेन टिकट]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/culture/ganesh-chaturthi-amazing-devotion-bappa-got-a-train-ticket-from-mumbai-to-bihar/</link>
                    <description><![CDATA[पटना : भारत में तरह-तरह के सोच वाले लोग रहते हैं। किसी को ईश्वर के प्रति इतनी आस्था होती है कि वो यथासंभव कुछ भी करने को तैयार हो जाते हैं. ठीक ऐसा ही एक मामला सामने आया है। देश में गणेश चतुर्थी को लेकर तैयारी शुरू हो चुकी है। इस दौरान लोग मूर्ति खरीदने [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/01/download-46-2.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पटना </strong>: भारत में तरह-तरह के सोच वाले लोग रहते हैं। किसी को ईश्वर के प्रति इतनी आस्था होती है कि वो यथासंभव कुछ भी करने को तैयार हो जाते हैं. ठीक ऐसा ही एक मामला सामने आया है। देश में गणेश चतुर्थी को लेकर तैयारी शुरू हो चुकी है। इस दौरान लोग मूर्ति खरीदने में लगे है तो कहीं पूजा पंडाल बनाने की तैयारी की जा रही है। बिहार के गया में बप्पा की मूर्ति मुंबई से लाइ गई है। ख़ास बात है कि मुंबई से मूर्ति लाने के लिए भगवान गणेश के लिए ट्रेन में रिजर्वेशन भी करवाया गया है। जिससे बप्पा को एक सिंगल पर्सनल सीट पर लाया गया।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>स्लीपर क्लास, बोगी S-1, सीट नंबर-46 पर बैठकर आए बप्पा</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>गणेश चतुर्थी के अवसर पर 7 सितंबर को बप्पा की स्थापना की जायेगी। बता दें कि हावड़ा-मुंबई मेल एक्सप्रेस के स्लीपर क्लास के बोगी S-1 में और सीट नंबर-46 पर बैठकर गणपति बप्पा बिहार के गया पहुंचे हैं. स्थापना होने के बाद धूमधाम से इनकी पूजा की जायेगी। ऐसे में भारी संख्या में लोग बप्पा के दर्शन करने पूजा पंडाल में पहुंचेंगे। 12 सितंबर तक गणपति पूजा उत्सव मनाया जाएगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>756 प्रकार के व्यंजनों का लगाया जाएगा भोग</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बता दें कि देवोत्तम कुमार बप्पा की मूर्ति को मुंबई से लेकर गया पहुंचे है। शुक्रवार (30 अगस्त) को उन्होंने बताया कि वह पिछले 7 सालों से पावरगंज मोहल्ले में गणपति पूजा का आयोजन करते आ रहे हैं. उनके अंदर गणपति बप्पा के लिए इतनी श्रद्धा और आस्था है कि उन्होंने मुंबई पहुंचकर आकर्षक और मनमोहक प्रतिमा खरीद कर बिहार लेकर आ गए . 3 फीट की प्रतिमा को लाने के लिए उन्होंने अपने साथ गणपति बप्पा की भी ट्रेन टिकट लिया। रोचक बात यह है कि उन्होंने प्रतिमा की उम्र 8 साल लिखा और नाम में उन्होंने गणपति जी महाराज मेंशन किया था. देवोत्तम कुमार ने मौके पर कहा कि 8 सितंबर को 756 प्रकार के व्यंजनों का भोग बप्पा को लगाया जाएगा.</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>January 29, 2025, 9:57 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/culture/ganesh-chaturthi-amazing-devotion-bappa-got-a-train-ticket-from-mumbai-to-bihar/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[सास शैला मर्चेंट ने दामाद अनंत के लिए किया &#8216;मिथिला का कण कण खिला&#8217; गाने पर डांस, वीडियो हुआ वायरल]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/desh-pradesh/mother-in-law-shaila-merchant-danced-on-the-song-mithila-ka-kan-kan-khila-for-son-in-law-anant-video-went-viral/</link>
                    <description><![CDATA[पटना : अनंत अंबानी ने 12 जुलाई को राधिका मर्चेंट से शादी कर नई जिंदगी की शुरुआत की। इस जोड़े की शादी में बॉलीवुड से लेकर खेल जगत, साउथ फिल्म इंडस्ट्री, हॉलीवुड और राजनीति की दुनिया की कई हस्तियां शामिल हुईं। अनंत और राधिका की शादी के वीडियो और फोटो सोशल मीडिया पर लगातार वायरल [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/01/download-46-2.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पटना </strong>: अनंत अंबानी ने 12 जुलाई को राधिका मर्चेंट से शादी कर नई जिंदगी की शुरुआत की। इस जोड़े की शादी में बॉलीवुड से लेकर खेल जगत, साउथ फिल्म इंडस्ट्री, हॉलीवुड और राजनीति की दुनिया की कई हस्तियां शामिल हुईं। अनंत और राधिका की शादी के वीडियो और फोटो सोशल मीडिया पर लगातार वायरल हो रहे हैं। इसी बीच एक शानदार वीडियो सामने आया है, जिसमें राधिका मर्चेंट की मां शैला मर्चेंट और बहन अंजलि मर्चेंट डांस करती हुई दिख रही हैं। वीडियो में देखा जा सकता है कि राधिका की मां शैला मर्चेंट और बहन अंजलि मर्चेंट ने शादी समारोह में अनंत अंबानी के लिए शानदार डांस किया। दोनों ने मान्या अरोड़ा के गाने 'मिथिला का कण कण खिला' पर अपने डांस से सभी का दिल जीत लिया। शैला मर्चेंट और अंजलि मर्चेंट का यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:image {"id":10439,"width":"703px","height":"auto","sizeSlug":"full","linkDestination":"none"} -->
<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/07/image-8.png" alt="" class="wp-image-10439" style="width:703px;height:auto"/></figure>
<!-- /wp:image -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>शादी में शामिल हुए ये सितारे</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>अनंत अंबानी और राधिका मर्चेंट की शादी में बॉलीवुड के कई सितारे शामिल हुए। वहीं, इंटरनेशनल सितारे भी मौजूद रहे। इनमें जॉन सीना, सलमान खान, निक जोनास, विक्की कौशल, कैटरीना कैफ, शाहरुख खान, आमिर खान, प्रियंका चोपड़ा, रणबीर कपूर, जान्हवी कपूर, आलिया भट्ट, दीपिका पादुकोण, रणवीर सिंह जैसे सितारों के नाम शामिल हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>आज है वेडिंग रिसेप्शन</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>अनंत अंबानी और राधिका मर्चेंट की शादी शुक्रवार को मुंबई के जियो वर्ल्ड कन्वेंशन सेंटर में हुई है। अंबानी परिवार ने भव्य तरीकें से शुभ विवाह समारोह की मेजबानी की। शादी समारोह का ड्रेस कोड भारतीय पारंपरिक था। इसके बाद 13 जुलाई को अंबानी परिवार ने अनंत अंबानी और राधिका के लिए शुभ आशीर्वाद समारोह का आयोजन किया। जिसमें देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई दिग्गज पहुंचे। सबने कपल को आशीर्वाद दिया। वहीं आज यानी 14 जुलाई को मंगल उत्सव यानी 'वेडिंग रिसेप्शन' है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:image {"id":10441,"sizeSlug":"full","linkDestination":"none"} -->
<figure class="wp-block-image size-full"><img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/07/image-9.png" alt="" class="wp-image-10441"/></figure>
<!-- /wp:image -->

<!-- wp:paragraph -->
<p><a href="https://www.instagram.com/reel/C9Xz2iogp2u/?utm_source=ig_web_copy_link">https://www.instagram.com/reel/C9Xz2iogp2u/?utm_source=ig_web_copy_link</a></p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>January 29, 2025, 9:57 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/desh-pradesh/mother-in-law-shaila-merchant-danced-on-the-song-mithila-ka-kan-kan-khila-for-son-in-law-anant-video-went-viral/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[राधिका के साथ मिलकर… अनंत ने किया शादी के दौरान ये खास वादे]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/culture/together-with-radhika-anant-made-these-special-promises-during-the-marriage/</link>
                    <description><![CDATA[पटना : कल यानी 12 जुलाई को अनंत अंबानी और राधिका मर्चेंट शादी के बंधन में बंध गए। दोनों ने सात फेरे लिए और एक-दूसरे से कई खास वादे किए। इस शादी में देश-विदेश की हस्तियां और चेहरे शामिल हुए। शादी के दौरान दोनों ने मंडप के सामने एक-दूसरे से खास वादा भी किया। इस [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/01/download-46-2.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पटना </strong>: कल यानी 12 जुलाई को अनंत अंबानी और राधिका मर्चेंट शादी के बंधन में बंध गए। दोनों ने सात फेरे लिए और एक-दूसरे से कई खास वादे किए। इस शादी में देश-विदेश की हस्तियां और चेहरे शामिल हुए। शादी के दौरान दोनों ने मंडप के सामने एक-दूसरे से खास वादा भी किया। इस इवेंट से जुड़े कई वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। अनंत और राधिका ने एक-दूसरे को लिखित प्रणाम यानी वादे भी किए। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शेयर किए गए इस वीडियो को लोगों का खूब प्यार मिल रहा है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>प्यार और एकजुटता से भरा होगा घर</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>शादी के दौरान राधिका ने अनंत से वादा किया था कि उनका घर एक सुरक्षित जगह होगा। यह प्यार और एकजुटता से भरा घर होगा। अनंत ने राधिका से वादा किया कि भगवान कृष्ण के आशीर्वाद से वह और राधिका इसे एक सपनों का घर बनाएंगे और चाहे वे कहीं भी हों, यह प्यार का एहसास होगा। वादा करते समय दोनों काफी भावुक दिखे।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>आज शुभ आशीर्वाद समारोह, पहनने होंगे फॉर्मल</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>अनंत अंबानी और राधिका मर्चेंट की शादी 12 जुलाई को हुई। अंबानी परिवार ने इस कार्यक्रम को बेहद खास और अनोखे अंदाज में आयोजित किया था। शादी के दौरान सभी ने भारतीय पारंपरिक कपड़े पहने हुए थे। शादी की खुशियों के बाद आज शुभ आशीर्वाद समारोह का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें सभी मेहमानों को फॉर्मल कपड़े पहनने होंगे। वहीं, कल यानी 14 जुलाई को रिसेप्शन का आयोजन होने वाला है। इस दिन सभी मेहमानों को भारतीय चिक ड्रेस कोड का पालन करना होगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>January 29, 2025, 9:57 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/culture/together-with-radhika-anant-made-these-special-promises-during-the-marriage/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[MadhuShravani: मिथिलांचल की अनोखी परंपरा, पहले सावन में नई दुल्हन को करना होगा मधुश्रावणी का उपवास]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/culture/madhushravani-a-unique-tradition-of-mithila-the-new-bride-has-to-fast-on-madhushravani-in-the-first-sawan/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। मिथिलांचल के लोकापर्व में सुहागिन महिलाओं द्वारा एक अनोखा पर्व मनाया जाता है जिसे मधुश्रावणी व्रत कहा जाता है। मधुश्रावणी पर्व श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि सोमवार से शुरू हो रहा है। यह पर्व 18 से 31 जुलाई तक चलेगा। मधुश्रावणी के व्रत के साथ अग्निपरीक्षा भी देनी होती है इस [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/01/download-46-2.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पटना।</strong> मिथिलांचल के लोकापर्व में सुहागिन महिलाओं द्वारा एक अनोखा पर्व मनाया जाता है जिसे मधुश्रावणी व्रत कहा जाता है। मधुश्रावणी पर्व श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि सोमवार से शुरू हो रहा है। यह पर्व 18 से 31 जुलाई तक चलेगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>मधुश्रावणी के व्रत के साथ अग्निपरीक्षा भी देनी होती है</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस पर्व में मिथिला की नई दुल्हनों को अपने पति की लंबी उम्र के लिए उपवास करना होता है। यह उपवास माता गौरी और भगवान भोलेनाथ को समर्पित है। इस दिन भगवान शंकर और माता गौरी की पूजा- अर्चना की जाती है। पूरे 14 दिन चलने वाले इस व्रत में बिना नमक का भोजन खाया जाता है। इस पूजा में पंडितों की भूमिका भी महिलाएं ही अदा करती हैं। इस अनुष्ठान के पहले और अंतिम चरण में बड़े विधि-विधान से साथ पूजा की जाती है। ऐसी धार्मिक मान्यता है कि इस दौरान माता पार्वती की पूजा को विशेष महत्व दिया जाता है। इसके साथ ही इस पर्व की अनोखी परंपरा भी मिथिला में देखने को मिलती है। नई दुल्हन जो पहले सावन में पति के लिए उपवास करती है वे उनकी अग्निपरीक्षा भी लेती हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>अग्निपरीक्षा में दुल्हन का जलाया जाता है घुटना</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बिहार के मिथिलांचल में प्यार का पता लगाने के लिए एक अनोखी परंपरा का पालन किया जाता है जिसमें महिला को अग्निपरीक्षा देनी होती हैं। जिसमे महिला का घुटना जलाया जाता है। पति अपनी पत्नी के घुटने पर पूजा घर में रखे गए दीपक की बाती से प्यार के साथ उसका घुटना जलाता है। इससे दोनों का करुण सार देखने को मिलता है।जब महिला को जलाया जात है। वह उफ्फ तक नहीं करती। ऐसा माना जाता है कि इस परीक्षा में विवाहिता के घुटने में जितना बड़ा फफोला पड़ता है। पति-पत्नी का प्यार उतना ही गहरा होता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>January 29, 2025, 9:57 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/culture/madhushravani-a-unique-tradition-of-mithila-the-new-bride-has-to-fast-on-madhushravani-in-the-first-sawan/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[शादी के बाद इस माह में मायके जानें से बचें, नहीं तो हो सकता है नुकसान]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/culture/after-marriage-avoid-knowing-your-maternal-home-in-this-month-otherwise-you-may-suffer-losses/</link>
                    <description><![CDATA[पटना : शादी एक पवित्र बंधन हैं। दो परिवारों के रिश्ते मिलने से शादी जैसा पवित्र रिश्ता बनता हैं। इस रिश्ते में दो परिवार बंध जाते हैं. विवाह के बाद अक्सर आपने देखा होगा कि नवविवाहिता कभी ससुराल तो कभी मायका का रुख करती है। लेकिन कुछ ऐसे समय व महीनें होते हैं जिनमें आपको [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/01/download-46-2.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पटना </strong>: शादी एक पवित्र बंधन हैं। दो परिवारों के रिश्ते मिलने से शादी जैसा पवित्र रिश्ता बनता हैं। इस रिश्ते में दो परिवार बंध जाते हैं. विवाह के बाद अक्सर आपने देखा होगा कि नवविवाहिता कभी ससुराल तो कभी मायका का रुख करती है। लेकिन कुछ ऐसे समय व महीनें होते हैं जिनमें आपको अपने मायके नहीं जाने चाहिए। अगर आप इसे नहीं मानते हैं और आप अपने मायके पहुंचते हैं तो इसका सीधा असर आपके पिता पर पड़ता हैं। इसका उल्लेख हिंदू धर्म के एक पौराणिक मार्तण्ड धर्म ग्रंथ में किया गया है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>पिता को होती हैं ये परेशानी</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस संबंध में तमाम ज्योतिषाचार्य का कहना है कि शादी के पहले साल नवविवाहिता दंपति और उनके परिवार वालों को कई बातों को ध्यान रखना चाहिए. अगर आप इन बातों को ध्यान में रखेंगे तो आपके ससुराल और मायके पक्ष पर आने वाली परेशानी समाप्त हो सकती है.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>चैत्र माह में गलती से भी न जाएं मायका</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>ज्योतिष शास्त्र से जुड़े मुहूर्त मार्तण्ड के मुताबिक, शादी के बाद पहले चैत्र माह में किसी भी नवविवाहित बेटी को अपने मायके में नहीं ठहरना चाहिए. इसका सीधा असर उसके पिता पर पड़ता है. मायके में इस कारण से हानि हो सकती है। यदि चैत्र माह में बेटी ससुराल से मायके आ जाए तो पिता को मानसिक और शारीरिक परेशानी होती हैं. इसके साथ-साथ उन्हें आर्थिक समस्या भी हो सकती है. इतना ही नहीं ऐसे हालात में उनके परिवार में आपसी रिश्ते भी खराब होने लगते है. इस वजह से नवविवाहिता को शादी के पहले साल के अंदर पड़ने वाले चैत्र महीना में अपने मायके गलती से भी नहीं जाना चाहिए.</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>January 29, 2025, 9:57 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/culture/after-marriage-avoid-knowing-your-maternal-home-in-this-month-otherwise-you-may-suffer-losses/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Numerology : पीएम मोदी ने 18 अंक को क्यों कहा शुभ, जानें हिंदू धर्म में इसका महत्व]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/ajab-gajab/numerology-why-did-pm-modi-call-the-number-18-auspicious-know-its-importance-in-hindu-religion/</link>
                    <description><![CDATA[पटना : बीते दिन सोमवार, 24 जून को 18वीं लोकसभा में नए सांसदों का शपथ ग्रहण समारोह हुआ. इस दौरान नई संसद भवन में नवनिर्वाचित सांसदों ने शपथ ग्रहण लिया. इस सत्र की शुरुआती में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई मुद्दों पर अपना बात रखते हुए वेद-पुराणों और हिंदू धर्म का भी जिक्र किया. हिंदू [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/01/download-46-2.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पटना </strong>: बीते दिन सोमवार, 24 जून को 18वीं लोकसभा में नए सांसदों का शपथ ग्रहण समारोह हुआ. इस दौरान नई संसद भवन में नवनिर्वाचित सांसदों ने शपथ ग्रहण लिया. इस सत्र की शुरुआती में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई मुद्दों पर अपना बात रखते हुए वेद-पुराणों और हिंदू धर्म का भी जिक्र किया.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>हिंदू धर्म में 18 अंक अति शुभ</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बता दें कि वैदिक ज्योतिष से लेकर हिंदू धर्म में 18 अंक को अति शुभ बताया गया है. वहीं इस अंक को ज्योतिष के मुताबिक 18 अंक का मूलांक 9 है, जिसे अति शक्तिशाली, गुरु से प्रभावित व मंगल ग्रह का अंक बताया जाता है. सत्र के दौरान पीएम मोदी ने 18वीं लोकसभा और 18 अंक के संयोग के महत्व के बारे में भी जिक्र किया. तो आइए जानते हैं पीएम मोदी ने 18 अंक के बारे में ऐसा क्या कहा, जो इतनी तेजी से वायरल हो रहा है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>पहले सत्र में पीएम मोदी ने बताएं 18 अंक के इतिहास</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>लोकसभा के पहले सत्र में प्रधानमंत्री मोदी ने देश को संबोधित करते हुए कहा कि 18वीं लोकसभा पर नए संकल्पों के साथ कार्यों की शुरुआत करें. उन्होंने 18 अंक को लेकर कहा कि, 18 अंक हमें कर्म, कर्तव्य और करुणा का संदेश देता है. हमारे पुराणों और लोकपुराणों का नंबर भी 18 है. इस दौरान उन्होंने आगे कहा कि हमारे देश में 18 साल में ही मताधिकार दिया जाता है. ऐसे में 18वीं लोकसभा का गठन भी एक शुभ संकेत है. यह लोकसभा भारत के अमृतकाल की लोकसभा होगी.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>हिंदू धर्म में 18 अंक का महत्व</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p><strong>Mahabharat </strong>: हिंदू धर्म में 18 अंक का अपना एक अलग महत्व है. गीता और महाभारत जैसे धर्म ग्रंथों में 18 अध्याय हैं. महाभारत का युद्ध भी 18 दिनों तक चला था. सनातन धर्म में पुराणों का नंबर भी 18 है.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p><strong>18 विद्याएं</strong>: हिंदू धर्म में छह वेदांग और चार वेद हैं. इसके साथ-साथ मीमांसा, न्यायशास्त्र, पुराण, धर्मशास्त्र, अर्थशास्त्र, आयुर्वेद, धनुर्वेद और गंधर्ववेद सभी को मिलाकर 18 तरह की विद्याएं हैं.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>श्रीकृष्ण के 18 अंक: गीता में भी 18 अध्याय है, जिसका ज्ञान संपूर्ण जगत को श्री कृष्ण ने दिया था।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>मां भगवती के रूप भी 18 हैं। इसके साथ मां भगवती की 18 भुजाएं भी हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>January 29, 2025, 9:57 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/ajab-gajab/numerology-why-did-pm-modi-call-the-number-18-auspicious-know-its-importance-in-hindu-religion/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Cultural News: पवन सिंह को मिला रंजना चेस ट्रॉफी का खिताब]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/culture/cultural-news-pawan-singh-won-the-ranjana-chess-trophy-title/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। रविवार को बेला के नयनदीप नेत्रालय कैंपस में आयोजित रंजना कुमारी मेमोरियल चेस ट्रॉफी में सातवें और अंतिम चरण की समाप्ति पर पवन कुमार सिंह साढ़े छह अंक से विजेता बने। अभिषेक सोनू 6 अंक के साथ रनअप बने रहे। वहीं तीसरे स्थान पर आर्यन व चौथे पर मरियम फातिमा रहीं। अलग अलग कैटेगरी [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/01/download-46-2.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पटना।</strong> रविवार को बेला के नयनदीप नेत्रालय कैंपस में आयोजित रंजना कुमारी मेमोरियल चेस ट्रॉफी में सातवें और अंतिम चरण की समाप्ति पर पवन कुमार सिंह साढ़े छह अंक से विजेता बने। अभिषेक सोनू 6 अंक के साथ रनअप बने रहे। वहीं तीसरे स्थान पर आर्यन व चौथे पर मरियम फातिमा रहीं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>अलग अलग कैटेगरी में पुरस्कार दिए गए</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बालक वर्ग में यश प्रथम स्थान पर आए। नथानी ने दूसरा ग्रहण प्राप्त किया। तीसरे पर अभिज्ञान मेहता बने रहें। बालिका वर्ग में वरीजा जायसवाल, नव्य गोयनका क्रमश और कीर्ति वैभव क्रम अनुसार पहले दूसरे व तीसरे स्थान पर बने रहें। अंडर-7 के वर्ग में पहला स्थान दिशा रानी, दूसरा पथ का और तीसरा स्थान दृश्या ने प्राप्त किया हैं। चित्रांश खेल एवं सांस्कृतिक मंच व यूग सृजन द्वारा आयोजित इस प्रतियोगिता में पुरस्कार वितरण किया गया। जिसमें सेंट्रल बैंक कोलकत्ता के सहायक महाप्रबंधक मनोज कुमार, मनीष कुमार सिन्हा, पार्षद संजय केजरीवाल इस समारोह में मौजूद रहें। सेंट्रल बैंक कोलकत्ता के सहायक महाप्रबंधक द्वारा विजेताओं को पुरस्कार वितरित किए गए।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>राजीव कुमार सिन्हा ने किया समारोह का संचालन</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>जूनियर खिलाड़ी शिवेन को उभरते हुए खिलाड़ी का पुरस्कार दिया गया। बेला के नयनदीप नेत्रालय कैंपस में आयोजित रंजना कुमारी मेमोरियल चेस ट्रॉफी का संचालन ऑल बिहार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष राजीव कुमार सिन्हा ने किया।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>January 29, 2025, 9:57 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/culture/cultural-news-pawan-singh-won-the-ranjana-chess-trophy-title/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[नालंदा यूनिवर्सिटी का हुआ उद्घाटन, पीएम मोदी ने कहा &#8211; बिहार अपने गौरव को वापस लाने…]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/top-news/nalanda-university-inaugurated-pm-modi-said-bihar-will-bring-back-its-glory/</link>
                    <description><![CDATA[पटना : पीएम नरेंद्र मोदी ने आज बुधवार को नालंदा यूनिवर्सिटी के नए कैंपस का उद्घाटन किया है. उद्घाटन से पहले पीएम मोदी यूनिवर्सिटी कैंपस में पौधारोपण किया. इस दौरान उन्होंने वहां के स्टूडेंट्स को संबोधित भी किया. संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि, &#8221;मुझे तीसरे कार्यकाल के लिए शपथ ग्रहण करने के बाद पहले [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/01/download-46-2.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पटना : </strong>पीएम नरेंद्र मोदी ने आज बुधवार को नालंदा यूनिवर्सिटी के नए कैंपस का उद्घाटन किया है. उद्घाटन से पहले पीएम मोदी यूनिवर्सिटी कैंपस में पौधारोपण किया. इस दौरान उन्होंने वहां के स्टूडेंट्स को संबोधित भी किया. संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि, ''मुझे तीसरे कार्यकाल के लिए शपथ ग्रहण करने के बाद पहले 10 दिनों में ही नालंदा आने का अवसर मिला है।"</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>शपथ ग्रहण के 10 दिन बाद नालंदा आने का अवसर</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, "मुझे तीसरे कार्यकाल के लिए शपथ ग्रहण करने के बाद पहले 10 दिनों में ही नालंदा आने का अवसर मिला है। यह मेरा सौभाग्य तो है ही, मैं इसे भारत की विकास यात्रा के एक शुभ संकेत के रूप में देखता हूं। नालंदा केवल एक नाम नहीं है। नालंदा एक पहचान है, एक सम्मान है। नालंदा एक मूल्य है, मंत्र है, गौरव है, गाथा है। नालंदा इस सत्य का उद्घोष है कि आग की लपटों में पुस्तकें भले जल जाएं लेकिन आग की लपटें ज्ञान को नहीं मिटा सकतीं।"</p>
<!-- /wp:paragraph -->

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<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>बिहार के लोगों को बधाई</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>नालंदा यूनिवर्सिटी के मंच से उन्होंने यह भी कहा कि, "मैं बिहार के लोगों को भी बधाई देता हूं। बिहार अपने गौरव को वापस लाने के लिए जिस तरह विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है, नालंदा का ये परिसर उसी की एक प्रेरणा है।" इस दौरान उन्होंने आगे कहा," "हम सभी जानते हैं कि नालंदा कभी भारत की परंपरा और पहचान का जीवंत केंद्र हुआ करता था… शिक्षा को लेकर यही भारत की सोच रही है… शिक्षा ही हमें गढ़ती है, विचार देती है और उसे आकार देती है। प्राचीन नालंदा में बच्चों का प्रवेश उनकी पहचान, उनकी राष्ट्रीयता को देख कर नहीं होता था।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

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<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>कई देशों से आज यहां कई विद्यार्थी हैं</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस कड़ी में पीएम मोदी ने कहा यहां पर हर देश हर वर्ग के युवा हैं। नालंदा यूनिवर्सिटी के इस नए परिसर में हमें उसी प्राचीन व्यवस्था को फिर से आधुनिक रूप में मजबूती देनी है और मुझे ये देख कर खुशी है कि दुनिया के कई देशों से आज यहां कई विद्यार्थी आने लगे हैं… ".</p>
<!-- /wp:paragraph -->

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<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>आज भारत में योग की सैंकड़ों विधाएं मौजूद</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>कर्यक्रम में उन्होंने कहा "भारत में शिक्षा मानवता के लिए हमारे योगदान का एक माध्यम मानी जाती है। हम सीखते हैं ताकि अपने ज्ञान से मानवता का भला कर सकें। 2 दिन के बाद ही 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस है। आज भारत में योग की सैंकड़ों विधाएं मौजूद हैं। हमारे ऋषियों ने इसके लिए कितना गहन शोध किया होगा लेकिन किसी ने योग पर एकाधिकार नहीं बनाया। आज पूरा विश्व योग को अपना रहा है। योग दिवस एक वैश्विस उत्सव बन गया है…" .</p>
<!-- /wp:paragraph -->

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                    <pubDate>January 29, 2025, 9:57 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/top-news/nalanda-university-inaugurated-pm-modi-said-bihar-will-bring-back-its-glory/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[May Panchak 2024: आज से न भूलकर भी न करें किसी नए काम की शुरूआत, शुरू हो रहे हैं मई माह के दूसरे पंचक]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/culture/may-panchak-2024-do-not-start-any-new-work-even-by-mistake-from-today-the-second-panchak-of-the-month-of-may-is-starting/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। ज्योतिष शास्त्र में पंचक काल (May Panchak 2024) को अशुभ माना गया है। ऐसे में 5 दिन बहुत संभलकर रहना चाहिए। ऐसा कहा जाता है कि पंचक में किए गए कार्य अशुभ फल देते हैं। ऐसे में व्यक्ति को भविष्य में धन हानि, रोग से पीड़ित और आग लगने का डर आदि समस्याओं से [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/01/download-46-2.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पटना।</strong> ज्योतिष शास्त्र में पंचक काल (May Panchak 2024) को अशुभ माना गया है। ऐसे में 5 दिन बहुत संभलकर रहना चाहिए। ऐसा कहा जाता है कि पंचक में किए गए कार्य अशुभ फल देते हैं। ऐसे में व्यक्ति को भविष्य में धन हानि, रोग से पीड़ित और आग लगने का डर आदि समस्याओं से जूझना पड़ सकता है। ऐसे में पंचक के अशुभ प्रभाव व्यक्ति के जीवन पर न पड़े, इसके लिए कोई भी शुभ कार्य नहीं करने चाहिए। पंचक हर महीने आते हैं लेकिन इस बार मई 2024 में पंचक दूसरी बार लग रहे हैं। जानें पंचक के शुरू होने और समाप्त होने का समय।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>कब से कब तक रहेंगे पंचक</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस बार 29 मई 2024 को रात 08.06 बजे पंचक शुरू हो जाएंगे। जिसके बाद इसका समापन 3 जून 2024, सोमवार को प्रात: 1 बजकर 40 मिनट पर होगा। ऐसे में अगर आप कोई काम शुरू करना चाहते हैं तो 3 जून तक का इंतजार करें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, पंचक वार (May Panchak 2024) के अनुसार तय होते हैं। साथ ही चंद्रमा (Moon) धनिष्ठा, पूर्वा भाद्रपद, रेवती, उत्तरा भाद्रपद, शतभिषा, नक्षत्र में से गुजरता है तो पंचक लगते हैं। वहीं बुधवार से शुरू होने वाले पंचक दोष रहित (Panchak dosh) होते हैं। इन्हें अशुभ नहीं माना जाता है। हालांकि, बुधवार से शुरू होने वाले पंचक में भी कुछ काम करना वर्जित होता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>इन कामों को न करें</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>पंचक के दौरान शादी, मुंडन, गृह प्रवेश, गृह निर्माण आदि जैसे शुभ कार्य नहीं करने चाहिए। पंचक की अवधि में चारपाई बनवाने या छत ढलवाने जैसे कार्य करना भी अशुभ माना गया है। साथ ही पंचक के दौरान पैसों के लेन-देन से जुड़े कार्य भी नहीं करने चाहिए। इससे धन हानि की संभवाना बनी रहती है। इसके अलावा दक्षिण दिशा में यात्रा नहीं करनी चाहिए। पंचक के दौरान लकड़ी इक्ठ्‌ठा न करें। पंचक में किसी की मृत्यु हो जाए तो दाह संस्कार के समय शव के साथ पांच कुश या आटे के पुतले जलाएं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>January 29, 2025, 9:57 am</pubDate>
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                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[बिहार की मिथिला पेंटिंग-मंजूषा कला की विदेश में धूम]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/culture/bihars-mithila-painting-manjusha-art-famous-abroad/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। दुबई में भारत की विविध और जीवंत लोक और आदिवासी कला परंपराओं को प्रदर्शित करने वाली &#8216;स्वदेश&#8217; नामसे एक अनूठी प्रदर्शनी आयोजित की गई। विदिशा क्रिएशन की तरफ से आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य भारत के विभिन्न क्षेत्रों से कम ज्ञात कला रूपों के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। कला को जागरुक करना इस [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/01/download-46-2.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p>पटना। दुबई में भारत की विविध और जीवंत लोक और आदिवासी कला परंपराओं को प्रदर्शित करने वाली 'स्वदेश' नामसे एक अनूठी प्रदर्शनी आयोजित की गई। विदिशा क्रिएशन की तरफ से आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य भारत के विभिन्न क्षेत्रों से कम ज्ञात कला रूपों के बारे में जागरूकता बढ़ाना है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>कला को जागरुक करना</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस 'स्वदेश' प्रदर्शनी में मंजुला कला और गोंड कला जैसे कम ज्ञात कला रूपों पर विशेष ध्यान दिया गया, जो अक्सर अधिक प्रसिद्ध मिथिला पेंटिंग से प्रभावित होते हैं। इसकी क्यूरेटर विदिशा पांडे ने कहा, 'बिहार जैसे एक ही राज्य में, हमारे पास मिथिला कला के अलावा टिकुली कला और मंजूषा कला जैसी कई समृद्ध कलात्मक परंपराएं हैं।'</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>बिहार की कला मचा रही विदेशों में धूम</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>विदिशा ने आगे कहा कि 'हालांकि, इनमें से कई कला रूप व्यापक जनता के लिए अपेक्षाकृत अज्ञात हैं।' प्रदर्शनी में विभिन्न प्रकार की लोक और आदिवासी कलाकृतियां प्रदर्शित की गईं। इनमें बिहार की रंगीन मिथिला पेंटिंग, महाराष्ट्र की आकर्षक वारली आदिवासी कला, तमिलनाडु की जटिल कोलम कलाकृतियां, केरल की प्रसिद्ध भित्ति कला परंपरा और चिकित्सीय मंडला कलाकृतियों में चित्रित पौराणिक कहानियां। इस प्रदर्शनी के अलावा, 'स्वदेश' कार्यक्रम में इंटरैक्टिव कार्यशालाएं भी शामिल थीं, जिनमें आगंतुकों को सीधे मास्टर कारीगरों से पारंपरिक तकनीक सीखने का अवसर मिला, तथा कलाओं की बिक्री भी हुई।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>January 29, 2025, 9:57 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/culture/bihars-mithila-painting-manjusha-art-famous-abroad/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Culture Of Bihar: कई विविधताओं से परिपूर्ण है बिहार की संस्कृति, ये हैं प्रमुख पांच महापर्व]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/culture/culture-of-bihar-the-culture-of-bihar-is-full-of-diversity-these-are-the-five-major-festivals/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। बिहार भारत का एक ऐसा राज्य है जो अपनी विरासत और संस्कृति (Culture Of Bihar) के लिए जाना जाता है। बिहार राज्य भोजपुरी, मैथिली, मगही, तिरहुत तथा अंग संस्कृति का मिश्रण है। यहां महापर्व छठ सहित अन्य क्षेत्रीय पर्वों को काफी विधि-विधान और धूम-धाम से मनाया जाता है। यहां के खान-पान से लेकर शादी [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/01/download-46-2.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पटना।</strong> बिहार भारत का एक ऐसा राज्य है जो अपनी विरासत और संस्कृति (Culture Of Bihar) के लिए जाना जाता है। बिहार राज्य भोजपुरी, मैथिली, मगही, तिरहुत तथा अंग संस्कृति का मिश्रण है। यहां महापर्व छठ सहित अन्य क्षेत्रीय पर्वों को काफी विधि-विधान और धूम-धाम से मनाया जाता है। यहां के खान-पान से लेकर शादी विवाह तक सभी में बिहारी संस्कृति की चमक झलकती है। बिहार की संस्कृति (Culture of Bihar) विविधताओं से भरी हुई है। ऐसे में आइए जानते हैं बिहार के पांच महापर्वों के बारे में।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

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<!-- /wp:image -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>लोक आस्था का महापर्व छठ</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>दरअसल, 4 दिवसीय महापर्व छठ, बिहार का सबसे बड़ा पर्व माना जाता है। सूर्योपासना का यह अनुपम लोकपर्व बिना किसी भेदभाव के मनाया जाता है। इस दिन छठव्रती भगवान सूर्य की पूजा करते हैं। यह पूरे चार दिनों तक चलता है। इस त्योहार में छठव्रतियों को पवित्र स्नान, निर्जला उपवास रखने के साथ-साथ पानी में खड़े होकर भगवान सूर्य को अर्घ्य देना होता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

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<!-- /wp:image -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>मिथिलांचल में मधुश्रावणी पूजा</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>वहीं बिहार में मिथिलांचल की परंपरा से जुड़ी मधुश्रावणी पूजा का अपना विशेष महत्व होता है। बता दें कि विवाह के बाद पहले सावन में ये पूजा होती है। जो 13 दिनों तक चलती है। पूजा शुरू होने से पहले दिन नाग-नागिन व उनके पांच बच्चे (बिसहारा) को मिट्टी से गढ़ा जाता है। इसके साथ ही हल्दी से गौरी बनाने की परंपरा भी है। इस पूजा के दौरान, 13 दिनों तक नवविवाहिताएं हर सुबह फूल और शाम में पत्ते तोड़ने जाती हैं। इन दिनों में सुहागिनें फूल-पत्ते तोड़ते समय और कथा सुनते वक्त एक ही साड़ी हर दिन पहनती हैं। इस पूजा के लिए नवविवाहिताओं के लिए उनके ससुराल से श्रृंगार पेटी दी जाती है जिसमें साड़ी, लहठी सिन्दूर, धान का लावा और जाही-जूही (फूल-पत्ती) शामिल होता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

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<!-- /wp:image -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>बिहुला</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>पूर्वी बिहार मे बिहुला एक प्रमुख त्योहार माना जाता है। विशेषकर भागलपुर जिले में इसे बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। इस दौरान लोग अपने परिवार के कल्याण के लिए देवी मनसा से प्रार्थना करते हैं। ऐसा माना जाता है कि सती बिहुला ने अपने मृत पति के लिए कड़ी तपस्या की थी, जिसके बाद मां मनसा देवी द्रवित हो गईं और उन्होंने बिहुला के पति को जिंदा कर दिया। उसी वक्त से बिहुला का नाम अमर हो गया।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

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<figure class="wp-block-image size-full"><img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/05/्ि्नमनि.png" alt="" class="wp-image-8246" /></figure>
<!-- /wp:image -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>सोनपुर मेला</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>प्रतिवर्ष कार्तिक पूर्णिमा में बिहार के सोनपुर में सोनपुर मेला आयोजित किया जाता है। सोनपुर मेला में एशिया का सबसे बड़ा पशु मेला लगता है। साथ ही इसे 'हरिहर क्षेत्र मेला' के नाम से भी जानते हैं। जबकि स्थानीय लोग इसे छत्तर मेला कहते हैं। सोनपुर मेला कार्तिक पूर्णिमा पर स्नान के बाद शुरू हो जाता है। लोग गंगा स्नान के बाद हरिहर नाथ मंदिर जाकर भगवान के दर्शन करते हैं और फिर मेला का आनंद लेते हैं। इस मेले की खासियत यह है कि इसमें कई प्रकार की चीजें मिलती हैं। यहां लोगों के मनोरंजन की पूरी व्यवस्था की जाती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

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<figure class="wp-block-image size-large"><img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/05/image-1-1024x576.png" alt="" class="wp-image-8247" /></figure>
<!-- /wp:image -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>धान रोपाई</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>आप सोच रहे होंगे की धान रोपाई त्योहार कैसे हो सकता है। बता दें कि बिहार में धान की रोपाई भी एक पर्व के तरह मनाई जाती है। बिहार में लोग अपने खेतों में गीत गाते हुए धान की रोपाई करते हैं। ये समय अद्रा कहलाता है। इस दिन सभी घरों में खीर-पूड़ी और कई अन्य तरह के पकवान बनाए जाते हैं। इस दौरान घर की औरतें, पुरूषों के साथ मिलकर पूरे विधि-विधान के साथ धान की रोपाई करती हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>January 29, 2025, 9:57 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/culture/culture-of-bihar-the-culture-of-bihar-is-full-of-diversity-these-are-the-five-major-festivals/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Sonpur Mela 2023: बिहार के ऐतिहासिक सोनपुर मेले की शुरुआत, डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने किया उद्घाटन]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/culture/sonpur-mela-2023-bihars-historic-sonpur-fair-begins-deputy-cm-tejashwi-yadav-inaugurated-it/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। बिहार में लगने वाले विश्व प्रसिद्ध हरिहर क्षेत्र सोनपुर मेले की शुरुआत हो चुकी है। दरअसल, शनिवार को बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के द्वारा इस मेले का उद्घाटन किया गया। बता दें कि यह मेला 26 दिसंबर 2023 तक चलेगा। इस मेले के उद्घाटन के समय &#8216;ससुराल गेंदा फूल&#8217; फेम बॉलीवुड गायिका श्रद्धा [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/01/download-46-2.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पटना।</strong> बिहार में लगने वाले विश्व प्रसिद्ध हरिहर क्षेत्र सोनपुर मेले की शुरुआत हो चुकी है। दरअसल, शनिवार को बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के द्वारा इस मेले का उद्घाटन किया गया। बता दें कि यह मेला 26 दिसंबर 2023 तक चलेगा। इस मेले के उद्घाटन के समय 'ससुराल गेंदा फूल' फेम बॉलीवुड गायिका श्रद्धा पंडित की टीम द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुत दी गई। यही नहीं संपूर्ण मेला अवधि के दौरान सांस्कृतिक पंडाल में सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए जाएंगे।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>26 दिसंबर तक चलेगा मेला</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस दौरान बिहार के डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने शनिवार को विश्व प्रसिद्ध सोनपुर मेले का उद्घाटन किया। सोनपुर मेले की शुरुआत शनिवार से हुई। जिसे लेकर लोगों में काफी उत्साह देखाई दिया। इस दौरान मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया। बता दें कि सोनपुर मेला 25 नवंबर से लगातार 26 दिसम्बर 2023 तक चलेगा। सोनपुर मेले के उद्घाटन के मौके पर बिहार के विज्ञान व प्रौद्योगिकी मंत्री सुमित कुमार सिंह की अध्यक्षता में कार्यक्रम की शुरुआत हुई।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>कार्यक्रम में शामिल हुए कई नेता</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>सोनपुर मेले के शुभारंभ के अवसर पर उपमुख्यमंत्री और पर्यटन मंत्री तेजस्वी यादव, राजस्व और भूमि सुधार मंत्री आलोक मेहता, कला संस्कृति विभाग के मंत्री जितेंद्र कुमार राय, सुनील कुमार सिंह सदस्य, बिहार विधान परिषद् (उप मुख्य सचेतक, सत्तारूढ़ दल), श्रीकांत यादव सदस्य, श्रम संसाधन विभाग के मंत्री सुरेंद्र राम, बिहार विधान सभा, छोटेलाल राय सदस्य बिहार विधानसभा, डॉ. रामानुज प्रसाद, डॉ. सत्येन्द्र यादव सदस्य बिहार विधानसभा, सदस्यबिहार विधानसभा और बिरेन्द्र नारायण यादव सदस्य बिहार विधान परिषद मौजूद रहे।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>सोनपुर मेले की खास बात</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बता दें कि सोनपुर मेले में देश-विदेश से बड़ी संख्या में लोग मेला देखने पहुंचते हैं। यहां मेले में पर्यटन विभाग द्वारा सांस्कृतिक पंडाल समेत आर्ट एंड क्राफ्ट विलेज का भी निर्माण किया गया। बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम द्वारा पर्यटन ग्राम में अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त कॉटेज का निर्माण कार्य भी किया गया। दरअसल, सोनपुर मेला विभिन्न तरह के पशुओं का आकर्षण का केंद्र बनता है। सोनपुर मेले को एशिया का सबसे बड़ा मेला माना जाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>तेजस्वी यादव ने विपक्ष पर बोला हमला</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>वहीं कार्यक्रम के दौरान उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि हम लोग कलम बांटने का काम कर रहे हैं, तो वो लोग तलवार बांट रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोग मेरे ऊपर जातिवाद का आरोप लगाते हैं। उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने कहा, मेरी बीवी ईसाई धर्म से हैं। अगर हम जातिवादी होते तो ईसाई धर्म मे शादी क्यों करते?</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>लालू यादव की तरफ से भी दी शुभकामनाएं</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इसके अलावा तेजस्वी यादव ने कहा कि सोनपुर मेले की शुरुआत की जा रही है। सोनपुर कितना पुराना स्थल है, ये बताने की जरूरत नहीं है। यह मेरे पिता की कर्मभूमि भी है। उन्होंने बताया कि यहां आने से पहले हम मुंगेर गए हुए थे, मुख्यमंत्री भी साथ में थे। हम लोगों ने मुंगेर में मेडिकल कॉलेज और अस्पताल का उद्घाटन किया। तेजस्वी यादव ने बताया कि मेले के उद्घाटन में आने से पहले पापा से बात भी हुई तो उन्होंने पूछा कहां जा रहे हो तो हमने बोला सोनपुर जा रहे हैं। इस पर उन्होंने कहा कि मेरी तरफ से भी शुभकामनाएं दे देना।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>उपमुख्यमंत्री ने किया मेले का बखान</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>उपमुख्यमंत्री ने आगे कहा, मेला लंबा चलने वाला है। आप लोग बढ़िया से मेले का लुफ्त उठाइए। जिला प्रशासन, पर्यटन विभाग और अन्य विभागों के सहयोग से इस मेले की शुरुआत की गई है। उन्होंने कहा कि सभी लोगों ने इसमें मेहनत की है, ताकि यह मेला सफलतापूर्वक हो सके। इस मेले का अपना इतिहास रहा है। यहां मुगलों के समय से ही पशु मेला लगता आ रहा है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>January 29, 2025, 9:57 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/culture/sonpur-mela-2023-bihars-historic-sonpur-fair-begins-deputy-cm-tejashwi-yadav-inaugurated-it/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Chhath Puja: उदयगामी सूर्य को अर्घ्य देकर संपन्न हुआ महापर्व छठ, 36 घंटे के निर्जला व्रत का पारण]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/top-news/chhath-puja-the-great-festival-chhath-concluded-by-offering-arghya-to-the-rising-sun-ending-the-36-hour-waterless-fast/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। पूरे देश में इस समय लोकआस्था का महापर्व छठ धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है। इसकी शुरुआत 17 नवंबर से नहाय खाय के साथ हुई थी। छठ पर्व आज (20 नवंबर) को सुबह उगते सूर्य को अर्ध्य देने के साथ संपन्न हुआ।इस दौरान देश के अलग-अलग राज्यों में छठ पूजा के लिए नदियों [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/01/download-46-2.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पटना</strong>। पूरे देश में इस समय लोकआस्था का महापर्व छठ धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है। इसकी शुरुआत 17 नवंबर से नहाय खाय के साथ हुई थी। छठ पर्व आज (20 नवंबर) को सुबह उगते सूर्य को अर्ध्य देने के साथ संपन्न हुआ।इस दौरान देश के अलग-अलग राज्यों में छठ पूजा के लिए नदियों और तालाबों के किनारे बनाए गए घाटो पर व्रती महिलाओं और उनके परिवार के सदस्यों ने उदयगामी सूर्य की पूजा करके चार दिन तक चले इस महापर्व का पारण किया। छठ व्रती सुबह से ही घाटों पर भगवान भास्कर के दर्शन देने का इंतजार कर रहे थे।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>जानें क्या हैं मान्यताएं</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस दौरान सूर्य उदय के साथ ही व्रतियों ने घुटने भर पानी में उतरकर उन्हें अर्घ्य समर्पित किया और 36 घंटे के निर्जला व्रत का समापन किया। यही नहीं इस दौरान व्रतियों ने नाक से लेकर माथे तक सिंदूर लगाया और भगवान भास्कर से अपने सुहाग की लंबी उम्र की कामना की। बता दें कि छठ को लेकर यह मान्यता है कि छठी मइया की पूजा करने से नि:संतान महिलाओं को संतान सुख की प्राप्ति होती है और जीवन भी सुखमय होता है। इस बार छठ में देश के कई बड़े राजनेताओं ने भी छठ घाटों पर पूजा-अर्चना किया।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>कैदियों ने भी मनाया छठ</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इसके साथ ही बताया जा रहा है कि बेउर की जेल में भी छठ का पर्व काफी धूम-धाम से मनाया गया। यहां कैदियों ने उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देते हुए छठ के महापर्व का समापन किया। पुलिसकर्मियों ने कैदी व्रतियों के पांव भी छुए। छठ को लेकर बेऊर जेल प्रशासन ने सभी तैयारियां पूरी करते हुए चार दिवसीय छठ पूजा को संपन्न कराया। बता दें कि छठ का व्रत महिलाएं और पुरुष व्रती अपने परिवार के कल्याण हेतु रखते हैं और उनके लिए छठी मइया से पार्थना भी करते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>जानें छठ के मायनें</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बता दें कि छठ का पर्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी को मनाया जाता है। यह महापर्व चार दिन तक चलता है। हमेशा कि तरह इस बार भी छठ की शुरुआत नहाय खाय के साथ हुई थी। इसके दूसरे दिन खरना होता है, जिसमें पूजा के लिए प्रसाद तैयार करते हैं। वहीं तीसरे दिन ढलते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता देकर, चौथे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद ये व्रत संपन्न हो जाता है। इसके साथ ही यह माना जाता है कि छठ पूजा में भगवान सूर्य की अराधना की जाती है। मान्यताओं के अनुसार इस व्रत को करने से संतान से संबंधित सारी परेशानियां समाप्त होती हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>January 29, 2025, 9:57 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/top-news/chhath-puja-the-great-festival-chhath-concluded-by-offering-arghya-to-the-rising-sun-ending-the-36-hour-waterless-fast/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Chhath Puja: सर्वप्रथम माता सीता ने मुंगेर में की थी छठ पूजा, जानिए क्या हैं मान्यताएं]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/culture/chhath-puja-mother-sita-first-performed-chhath-puja-in-munger-know-what-are-the-beliefs/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। देश भर में लोकआस्था के महापर्व छठ के चार दिवसीय अनुष्ठान की शुरुआत हो चुकी है। जहां एक तरफ इस पर्व का पौराणिक महत्व है वहीं, यह पर्व स्वच्छता, सादगी और पवित्रता का भी सूचक है। बताया जाता है कि धार्मिक मान्यता के अनुसार माता सीता ने सर्वप्रथम पहली छठ पूजा बिहार के मुंगेर [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/01/download-46-2.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पटना। </strong>देश भर में लोकआस्था के महापर्व छठ के चार दिवसीय अनुष्ठान की शुरुआत हो चुकी है। जहां एक तरफ इस पर्व का पौराणिक महत्व है वहीं, यह पर्व स्वच्छता, सादगी और पवित्रता का भी सूचक है। बताया जाता है कि धार्मिक मान्यता के अनुसार माता सीता ने सर्वप्रथम पहली छठ पूजा बिहार के मुंगेर में गंगा के तट पर की थी, जिसके बाद महापर्व छठ की शुरुआत हुई थी। बता दें कि छठ को बिहार का महापर्व माना जाता है। यही नहीं बिहार के साथ-साथ यह पर्व देश के अन्य राज्यों में भी बड़ी धूम-धाम के साथ मनाते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>यहां मौजूद हैं माता सीता के पद चिन्ह</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बिहार के मुंगेर में छठ पर्व का बड़ा ही विशेष महत्व है। यह माना जाता है कि माता सीता राम जी के साथ वनवास के लिए गई थी, उस समय उन्होंने बिहार के मुंगेर में गंगा तट पर सर्वप्रथम छठ पूजा की थी। यहीं से इस लोक आस्था के महापर्व की शुरुआत हो गई थी। बताया जाता है कि आज भी प्रमाण स्वरूप माता सीता के चरण चिन्ह यहां पर मौजूद है। यह चिन्ह एक विशाल पत्थर पर अंकित है। आज इस स्थान पर एक विशाल मंदिर का निर्माण कर दिया गया है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>जानिए छठ से जुड़ी पौराणिक कथा</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>छठ से जुड़ी एक विशेष कथा भी है। कहा जाता है कि वाल्मीकि और आनंद रामायण के अनुसार ऐतिहासिक नगरी मुंगेर के सीता चरण में कभी मां सीता ने छह दिन तक रहकर छठ पूजा पाठ किया था। कहते हैं कि जब भगवान श्री राम 14 वर्ष वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे तो रावण वध से पाप मुक्त होने के लिए उन्होंने ऋषि-मुनियों के आदेश पर राजसूय यज्ञ करने का फैसला लिया। जिसके लिए मुद्गल ऋषि को आमंत्रित किया गया था, लेकिन मुद्गल ऋषि ने भगवान राम एवं सीता को अपने ही आश्रम में आने का आदेश दिया। इसके बाद मुद्गल ऋषि ने माता सीता को सूर्य की उपासना करने की सलाह दी।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>सीताचरण मंदिर के नाम से विख्यात</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>यहां मुद्गल ऋषि की सलाह पर माता सीता ने व्रत रखा। मुद्गल ऋषि के आदेश पर भगवान राम और माता सीता पहली बार मुंगेर आए थे। यहां आने पर ऋषि के आदेश पर माता सीता ने कार्तिक की षष्ठी तिथि पर भगवान सूर्य देव की उपासना करते हुए मुंगेर के बबुआ गंगा घाट के पश्चमी तट पर छठ का व्रत किया। जिस स्थान पर माता ने व्रत किया था उसी स्थान पर उनका का एक विशाल चरण चिन्ह आज भी मौजूद है। इसके अलावा शिलापट्ट पर सूप, डाला और लोटा के भी निशान मिलते हैं। यह माना जाता है कि मंदिर का गर्भ गृह साल में छह महीने तक गंगा के गर्भ में समाया रहता है। वहीं जलस्तर घटने पर छह महीने यह ऊपर रहता है। यह मंदिर सीताचरण मंदिर के नाम से विख्यात है। माता सीता के पद चिन्ह के दर्शन के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु इस मंदिर में आते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>गंगा के बीचों-बीच स्थित है सीताचरण मंदिर</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस स्थान पर पूजा-पाठ करने वाली महिलाओं व ग्रामीणों ने का कहना है कि यहां माता सीता के पद चिन्ह के साथ-साथ सूप, नारियल, कलश आदि की आकृतियां भी पत्थरों पर मौजूद हैं। गांव वालों का कहना है कि यहां माता सीता ने पहली बार छठ व्रत किया था जिसके बाद से इस महापर्व को हर जगह मनाया जाने लगा। यही नहीं ग्रामीणों ने बताया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्र होने के कारण इस मंदिर के अंदर बने चिन्ह छह महीने तक पानी में डूबे रहते हैं, जबकि पानी घटने के बाद इसकी साफ-सफाई की जाती है जिसके बाद ही चिन्ह के दर्शन हो पाते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>विकास कार्य में कमी</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>गांव वालों ने यह भी बताया कि इतनी बड़ी धरोहर होने के बावजूद इस मंदिर से संबंधित कोई विकास का कार्य नहीं किया जा रहा, जबकि सरकार और जिला प्रशासन को इसे पर्यटन स्थल के रूप में घोषित कर देना चाहिए। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि यह मंदिर गंगा के बीचों-बीच स्थित है। इस कारण यहां आना थोड़ा कठिन है, लेकिन जब छठ पर्व शुरु होता है तब हमलोग यहां आते हैं और यहां माता सीता के चरण की पूजा-अर्चना करने के उपरांत महापर्व छठ की शुरुआत की जाती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>January 29, 2025, 9:57 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/culture/chhath-puja-mother-sita-first-performed-chhath-puja-in-munger-know-what-are-the-beliefs/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Chhath Puja 2023 : कई मुस्लिम परिवार भी मनाते हैं लोकआस्था का महापर्व छठ]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/culture/chhath-puja-2023-the-great-festival-chhath-is-beyond-religion-many-muslim-families-also-celebrate-this-festival-of-folk-faith/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। देश भर में लोकआस्था के महापर्व छठ के चार दिवसीय अनुष्ठान की शुरुआत हो चुकी है। जहां एक तरफ इस पर्व का पौराणिक महत्व है वहीं, यह पर्व स्वच्छता, सादगी और पवित्रता का भी सूचक है। इन सब से बढ़ कर जो बात सामने आती है वो ये कि इस अनुष्ठान या पर्व में [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/01/download-46-2.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पटना।</strong> देश भर में लोकआस्था के महापर्व छठ के चार दिवसीय अनुष्ठान की शुरुआत हो चुकी है। जहां एक तरफ इस पर्व का पौराणिक महत्व है वहीं, यह पर्व स्वच्छता, सादगी और पवित्रता का भी सूचक है। इन सब से बढ़ कर जो बात सामने आती है वो ये कि इस अनुष्ठान या पर्व में कोई मजहब आड़े नहीं आता। शायद इसी लिए कहा जाता है कि यह पर्व साम्प्रदायिक सौहार्द की पाठ भी पढ़ाता है। बता दें कि बिहार में कई ऐसे भी क्षेत्र हैं जहां मुस्लिम महिलाएं और पुरुष इस छठ पर्व को पूरे सनातन पद्धति और रीति-रिवाज से मनाते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>मुस्लिम परिवार भी मना रहा छठ</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>दरअसल, बात हो रही है गोपालगंज और वैशाली जिले के कई गांवों के मुस्लिम घरों में छठ के गीत गूंजने की। यही नहीं यहां छठ पर्व में उपयोग होने वाले मिट्टी के चूल्हे, धागा और अरता पात भी अधिकांश इलाकों में मुस्लिम परिवार की महिलाएं ही बनाती हैं। बता दें कि गोपालगंज जिले के संग्रामपुर गांव में मुस्लिम समुदायक की 8 महिलाएं 20 वर्षों से छठी मैया का व्रत कर रही हैं। इस साल भी यह सूर्योपासना के इस महापर्व छठ व्रत की शुरुआत नहाय खाय के साथ कर चुकी है। अब आज यह खरना कि भी तैयारी कर रही हैं। रविवार (19 नवंबर) को अस्ताचलगामी और सोमवार (20 नवंबर) को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। यहां गौर करने वाली बात यह है कि इन महिलाओं कि न केवल छठ व्रत को लेकर आस्था है बल्कि इन्हें इसपर पूरा विश्वास भी है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>घर के पुरुष भी देते हैं सरयोग</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>वहीं संग्रामपुर गांव की रहने वाली शबनम खातून, संतरा खातून, नूरजहां खातून का यह मानना है कि उनके घर छठी मईया की कृपा हुई उसके बाद ही घर में बच्चों की किलकारियां सुनाई दी। यही नहीं आज भी उनका विश्वास छठी मईया पर बना है। उनका मानना है कि वे पूरी शुद्धता और रीति रिवाज और नियमों के साथ इस छठ पर्व को मनाती हैं। इतना ही नहीं उनके घर के पुरुष सदस्य भी इसमें अपना पूरा सहयोग देते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>हिन्दुओं के साथ ही करते हैं पूजा की तैयारी</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>दूसरी तरफ वैशाली जिले के लालगंज और सराय थाना क्षेत्रों में भी कई मुस्लिम महिलाएं और पुरुष हर साल छठ की पूजा करते हैं। इन मुस्लिम परिवारोंं के लोगों का कहना है कि इस पर्व के बीच मजहब कभी आड़े नहीं आता। इस बीच ये लोग अन्य हिन्दू लोगों के साथ ही पर्व की तैयारी करती हैं और एक ही घाट पर भगवान भास्कर को अर्घ्य दिया है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>January 29, 2025, 9:57 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/culture/chhath-puja-2023-the-great-festival-chhath-is-beyond-religion-many-muslim-families-also-celebrate-this-festival-of-folk-faith/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Chhath Puja 2023: मौसम विभाग ने बताया छठ पूजा पर अर्घ्य देने का समय]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/festival/chhath-puja-2023-meteorological-department-told-the-time-of-offering-arghya-on-chhath-puja/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। देशभर में चार दिनों तक चलने वाले लोक आस्था के महापर्व छठ की शुरुआत हो गई है। बता दें कि आज छठ का पहला दिन नहाय खाय है। आज के दिन छठ व्रती, गंगा स्नान और भगवान भास्कर की पूजा करते हुए नहाय खाय के साथ छठ की शुरुआत करते हैं। आज नहाय खाय [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/01/download-46-2.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पटना।</strong> देशभर में चार दिनों तक चलने वाले लोक आस्था के महापर्व छठ की शुरुआत हो गई है। बता दें कि आज छठ का पहला दिन नहाय खाय है। आज के दिन छठ व्रती, गंगा स्नान और भगवान भास्कर की पूजा करते हुए नहाय खाय के साथ छठ की शुरुआत करते हैं। आज नहाय खाय के बाद शनिवार यानी 18 नवंबर को खरना है। इसके बाद 19 नवंबर को अस्ताचलगामी सूर्य को पहला अर्घ्य दिया जाएगा। वहीं 20 नवंबर को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। इसे लेकर पटना मौसम विभाग ने बिहार के किस जिले में कितने बजे अर्घ्य का समय है यह जारी कर दिया है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>19 नवंबर को इतने बजे अर्घ्य का समय</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बताया जा रहा है कि 19 नवंबर को पटना में अर्घ्य देने के लिए सूर्यास्त का समय 5.00 बजे है। वहीं गया में 5:02, भागलपुर में 4:53, नवादा में 4:59, नालंदा में 4:59, पूर्णिया में 4:50, जहानाबाद में 5:01, मुजफ्फरपुर में 4:58, सारण में 5:01, रोहतास में 5:05, मधुबनी में 4:55, पूर्वी चंपारण में 4:59, शेखपुरा में 4:58, गोपालगंज में 5:01, प. चंपारण में 5.00, जमुई में 4:57, बक्सर में 5:05, शिवहर में 4:58, भोजपुर में 5:02, वैशाली में 4:59, दरभंगा में 4:55, सुपौल में 4:53, अरवल में 5:02, सीतामढ़ी में 4:57, औरंगाबाद में 5:05, बेगूसराय में 4:56, सीवान में 5:2 और भभुआ में शाम के 5:07 सूर्यास्त के समय अर्घ्य दिया जाएगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>जानें 20 नवंबर को अर्घ्य का समय</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>छठ के समय पटना में 20 नवंबर को अर्घ्य देने के लिए सूर्योदय का समय 6.10 बजे है। वहीं गया में 6:09, भागलपुर में 6:02, पूर्णिया में 6:01, दरभंगा में 6:08, सुपौल में 6:05, अरवल में 6:11, रोहतास में 6:14, मधुबनी में 6:08, पूर्वी चंपारण में 6:13, शेखपुरा में 6:06, जहानाबाद में 6:10, मुजफ्फरपुर में 6:10, सारण में 6:12, गोपालगंज में 6:14, प. चंपारण में 6.15, भोजपुर में 6:12, वैशाली में 6:09, सीतामढ़ी में 6:10, औरंगाबाद में 6:12, बेगूसराय में 6:06, नवादा में 6:07, नालंदा में 6:08, जमुई में 6:05, बक्सर में 6:15, शिवहर में 6:11, सीवान में 6:14 और भभुआ में शाम के 6:15 सूर्योदय के समय अर्घ्य दिया जाएगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>इन क्षेत्रों में छाए रहेंगे बादल</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इसके अलावा मौसम विभाग ने यह भी बताया है कि 19 और 20 नवंबर को छठ के दिन पटना समेत 9 जिलों में आंशिक रूप से बादल भी छाए रहेंगे। जिसमें पटना, गया, भागलपुर, पूर्णिया, बांका, कटिहार, अररिया, किशनगंज और मधेपुरा जैसे क्षेत्र शामिल हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>January 29, 2025, 9:57 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/festival/chhath-puja-2023-meteorological-department-told-the-time-of-offering-arghya-on-chhath-puja/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Chhath Puja 2023: आज से लोक आस्था के महापर्व छठ की शुरुआत , जानें महत्व]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/culture/chhath-puja-2023-the-great-festival-of-folk-faith-chhath-starts-from-today-know-its-importance/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। देशभर में चार दिनों तक चलने वाले लोक आस्था के महापर्व छठ की शुरुआत हो गई है। बता दें कि आज छठ का पहला दिन नहाय खाय है। आज के दिन छठ व्रती, गंगा स्नान और भगवान भास्कर की पूजा करते हुए नहाय खाय के साथ छठ की शुरुआत करते हैं। वहीं छठ के [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/01/download-46-2.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पटना।</strong> देशभर में चार दिनों तक चलने वाले लोक आस्था के महापर्व छठ की शुरुआत हो गई है। बता दें कि आज छठ का पहला दिन नहाय खाय है। आज के दिन छठ व्रती, गंगा स्नान और भगवान भास्कर की पूजा करते हुए नहाय खाय के साथ छठ की शुरुआत करते हैं। वहीं छठ के पहले दिन नहाय खाय का भी एक विशेष महत्व है। बता दें कि आज के दिन को कद्दू भात भी कहा जाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>नहाय खाय पर बनता है विशेष प्रसाद</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>दरअसल, छठ के पहले दिन नहाय खाय पर कद्दू की विशेष परंपरा होती है। आज के दिन छठ व्रती प्रसाद के रुप में कद्दू का प्रयोग करते हैं। इसके साथ ही अरवा चावल का भात, चना दाल, अगस्त का फूल, नया आलू और फूल गोभी से बनी सब्जी से नहाए खाय के दिन बने प्रसाद को ग्रहण किया जाता है। इस पूरे प्रसाद को बनाने के लिए सेंधा नमक का ही इस्तेमाल किया जाता है। इसमें लाल मिर्च की जगह हरी मिर्च का उपयोग होता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>छठ के दौरान रखा जाता है स्वच्छता का ध्यान</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बता दें कि नहाए खाय के दिन से ही छठ व्रती शुद्धता का पूरा ध्यान रखते हैं। इस बीच प्रसाद बनाने की बात हो या फिर पूजा से जुड़े किसी भी काम की, साफ-सफाई और शुद्धता में कोई कोताही नहीं दिखाई जाती। सभी प्रकार के नियमों का पालन किया जाता है। इस दौरान छठ व्रती या उनके अन्य परिवार के सदस्य गंगा स्नान करने के बाद ही प्रसाद बनाना शुरू करते हैं। यही नहीं गंगा जल घर पर लाकर उसे भी प्रसाद में मिलाया जाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>20 नवंबर को देंगे उदयगामी सूर्य को अर्घ्य</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>वहीं नहाय खाय के दिन पटना के गंगा घाटों पर सुबह से ही छठ व्रतियों की भीड़ लगी हुई है। बता दें कि आज नहाय खाय के बाद कल शनिवार को खरना होगा। इसमें छठ व्रती पूरे दिन निर्जला उपवास रखकर शाम को गुड़ से बनी खीर और रोटी से खरना करेंगे। जिसके बाद 36 घंटे का निर्जला उपवास रखकर रविवार की शाम को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। इसके बाद 20 नवंबर यानी सोमवार की सुबह को उदयगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>January 29, 2025, 9:57 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/culture/chhath-puja-2023-the-great-festival-of-folk-faith-chhath-starts-from-today-know-its-importance/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Chhath Puja 2023: महापर्व छठ को लेकर पटना रूट में बदलाव, जारी हुई ट्रैफिक एडवाइजरी]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/top-news/chhath-puja-2023-patna-route-changed-traffic-advisory-issued/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। लोकआस्था का महापर्व छठ नजदीक है। ऐसे में छठ पूजा को देखते हुए राजधानी पटना के ट्रैफिक रूट में काफी बदलाव किया जा रहा है। बता दें कि 19 और 20 नवंबर को प्रदेश का रूट बदला रहेगा। यह नियम 19 नवंबर की दोपहर 12 बजे से लेकर शाम के 7 बजे तक लागू [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/01/download-46-2.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पटना।</strong> लोकआस्था का महापर्व छठ नजदीक है। ऐसे में छठ पूजा को देखते हुए राजधानी पटना के ट्रैफिक रूट में काफी बदलाव किया जा रहा है। बता दें कि 19 और 20 नवंबर को प्रदेश का रूट बदला रहेगा। यह नियम 19 नवंबर की दोपहर 12 बजे से लेकर शाम के 7 बजे तक लागू रहेगा। वहीं सुबह के अर्घ्य को लेकर रविवार देर रात से 20 नवंबर की सुबह 8 बजे तक कई इलाकों में वाहनों की आवाजाही पर रोक रहेगी। दरअसल इस संबंध में मंगलवार को ट्रैफिक एडवाइजरी जारी की गई। हालांकि अग्निशामक, एंबुलेंस, शव वाहन और छठ व्रतियों के वाहनों के लिए कोई प्रतिबंध नहीं होगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>अशोक राजपथ पर ऐसी होगी यातायात व्यवस्था</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>यहां कारगिल चौक से पूरब दीदारगंज तक वाहनों के परिचालन पर रोक होगी।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इसके अलावा अशोक राजपथ के सभी एंट्री प्वाइंट को बंद कर दिया जाएगा। सिर्फ खजांची रोड से पटना कॉलेज या साइंस कॉलेज परिसर में वाहनों की पार्किंग के लिए मात्र छठ व्रतियों के वाहनों का परिचालन हो सकेगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>कारगिल चौक से पश्चिम शाहपुर तक सभी छठ व्रतियों के वाहनों का परिचालन होगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>वहीं 19 नवंबर को 02:00 बजे अपराहन से शाम 05:30 बजे तक और 20 नवंबर को 03:00 बजे पूर्वाहन से 06:00 बजे पूर्वाहन तक दीघा मोड़ से आशियाना दीघा रोड में उत्तर से दक्षिण की ओर वाहनों के परिचालन पर रोक रहेगी। इसके अलावा उक्त अवधि में ये सभी वाहन रामजीचक मोड़ से नहर रोड होते हुए बेली रोड की तरफ जा सकेंगे।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>गाय घाट की ओर जाने के लिए</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>छठ के दौरान गाय घाट की ओर जाने के लिए गाड़ियां पुरानी बाइपास या न्यू बाइपास से सीधे धनुकी मोड़, शीतला माता मंदिर या बिस्कोमान गोलंबर से गाय घाट की ओर जा सकती हैं। वहीं नजदीकी निर्धारित पार्किंग स्थल में वाहनों को पार्क किया जा सकेगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इसके अलावा बाइपास थाना मोड़ से चौक शिकारपुर आरओबी होकर छठ व्रतियों के वाहनों को छोड़कर सभी प्रकार के व्यवसायिक वाहनों का प्रवेश वर्जित होगा। इस दौरान कंगन घाट/चौक मोड़ जाने वाले सिर्फ छठ व्रतियों के वाहनों को सिटी स्कूल के पास रोक कर सिटी स्कूल परिसर, चौक एवं मंगल तालाब परिसर में पार्क कराया जाएगा और वहां से छठ व्रती पैदल घाट तक जाएंगे।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>वहीं चौक शिकारपुर आरओबी से पूरब मोर्चा रोड/पूरब दरवाजा की ओर जाने वाले छठ व्रतियों के वाहन को गुरु गोविंद सिंह आरओबी के नीचे एवं पटना साहिब स्टेशन के पास पार्क कराया जाएगा। जहां से छठ व्रतियों एवं श्रद्धालुओं को घाट तक पैदल जाना होगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस दौरान न्यू बाइपास करमलीचक मोड़ से पटना सिटी आने वाले सभी प्रकार के वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाई गई है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>दीदारगंज से अशोक राजपथ में सभी प्रकार के व्यवसायिक वाहन का प्रवेश वर्जित रहेगा। इस दौरान सिर्फ छठ व्रती के वाहन ही यहां से प्रवेश करेंगे और कटरा बाजार समिति के प्रांगण में उनके वाहन पार्क कराए जाएंगे। छठ व्रती एवं श्रद्धालु लोग यहां से पैदल घाट तक जाएंगे।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>जेपी सेतु की तरफ का रूट</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बता दें कि जेपी सेतु पर 19 नवंबर को दोपहर 2 बजे से शाम के 6.30 बजे तक सोनपुर/छपरा से पटना और 5 बजे शाम से 7 बजे तक पटना से सोनपुर/छपरा की ओर यातायात का नहीं परिचालन हो सकेगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>वहीं 20 नवंबर को दोपहर 03:00 बजे से शाम 06:00 बजे तक सोनपुर/छपरा से पटना और सुबह 06:00 बजे से रात 08:00 बजे तक पटना से सोनपुर/छपरा की तरफ के यातायात परिचालन पर रोक है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस दौरान जेपी सेतु से पटना की ओर आने वाले वाहनों को गंगा पथ पर नीचे आने की अनुमति नहीं है। ये सभी वाहन सीधे जेपी सेतु के एप्रोच पथ से अशोक राजपथ पर जाएंगे।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस बीच आमजनों से अनुरोध किया गया है कि जेपी सेतु होकर सोनपुर/छपरा/हाजीपुर जाने के लिए उक्त अवधि में महात्मा गांधी सेतु का प्रयोग करें। वहीं आकस्मिक वाहनों के लिए रूपसपुर नहर रोड का प्रयोग कर सकते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>न्यू बाइपास एवं अन्य मार्ग</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>छठ के दौरान 19 नवंबर को 10:00 बजे पूर्वाहन से 20 नवंबर को 10:00 बजे पूर्वाह्न तक की पूरब बाढ़/मोकामा से पटना आने वाले भारी वाहनों (ट्रकों) का परिचालन फतुहा ओवरब्रिज से 2 किमी पश्चिम से यू-टर्न लेकर एनएच-30 होते हुए बिहटा सरमेरा पथ से किया जाएगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>वहीं बिहटा से पूरब आने वाले भारी वाहन कन्हौली मोड़ से बिहटा-सरमेरा पथ होते हुए न्यू बाइपास में फतुहा ओवरब्रिज के पास आएंगे।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>नगर बस सेवा</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस बीच नगर बस सेव के लिए बनाए गए नियमों के अनुसार पटना जंक्शन, जीपीओ होते हुए बेली रोड से दानापुर या खगौल जाने वाली बस कारगिल चौक पर न आकर गांधी मैदान के गेट नं-10 के अंदर पार्क की जाएंगी।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>January 29, 2025, 9:57 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/top-news/chhath-puja-2023-patna-route-changed-traffic-advisory-issued/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Chhath Puja 2023: छठ पूजा को लेकर प्रशासन एक्टिव, जानिए कैसी रहेंगी चिकित्सकीय सुविधा]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/culture/chhath-puja-2023-administration-active-about-chhath-puja-know-how-medical-facilities-will-be-available/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। इस समय देश भर में त्योहारी सीजन चल रहा है। ऐसे में लोकआस्था का महापर्व छठ नजदीक है। इस दौरान बिहार में किसी चिकित्सकीय आपात स्थिति से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने घाटों पर पुख्ता इंतज़ाम किया हुआ है। इस बीच अत्यधिक भीड़-भाड़ वाले पाटीपुल, 93 नंबर, कलेक्ट्रिएट, लॉ काॉलेज और गायघाट पर [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/01/download-46-2.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पटना।</strong> इस समय देश भर में त्योहारी सीजन चल रहा है। ऐसे में लोकआस्था का महापर्व छठ नजदीक है। इस दौरान बिहार में किसी चिकित्सकीय आपात स्थिति से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने घाटों पर पुख्ता इंतज़ाम किया हुआ है। इस बीच अत्यधिक भीड़-भाड़ वाले पाटीपुल, 93 नंबर, कलेक्ट्रिएट, लॉ काॉलेज और गायघाट पर दो-दो बेड के अस्थायी अस्पताल बनाया जा रहा है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>मिलेगी चिकित्सकीय सुविधा</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बताया जा रहा है कि चिकित्सकीय आपात की स्थिति में प्राथमिक उपचार के बाद रोगियों को तुरंत नजदीकी अस्पताल भेजने के लिए अलग से इन अस्पतालों व नियंत्रण कक्ष में एंबुलेंस तैयार रहेगी। वहीं अन्य 91 घाटों में से हर तीन-चार घाट के बीच एक एंबुलेंस, दवा व डाक्टर के साथ तैनाती की गई है। सिविल सर्जन डा. श्रवण कुमार और चिकित्सा व्यवस्था के नोडल पदाधिकारी महामारी पदाधिकारी प्रशांत कुमार ने मंगलवार को इसकी जानकारी दी है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>घाटों पर मौजूद रहेंगे डॉक्टर</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इसके अलावा पांच अस्थायी अस्पतालों समेत कई चिकित्सकीय सुविधाओं की तैयारियां भी शनिवार शाम तक पूरी कर ली जाएंगी। वहीं 19 नवंबर को शाम के अर्घ्य के पूर्व दोपहर 12 बजे से देर शाम तक और 20 नवंबर को रात 2 बजे से अर्घ्य की समाप्ति तक सभी मेडिकल टीमें निर्धारित स्थल पर मुस्तैद रहेंगी। इस दौरान डॉक्टरों को उनके नाम वाले एप्रन और बीपी इंस्ट्रूमेंट व स्टेथोस्कोप के साथ घाटों पर बने नियंत्रण कक्ष में रहने के लिए कहा गया है। यही नहीं हर एंबुलेंस पर स्ट्रेचर, ऑक्सीजन सिलेंडर और जीवनरक्षक दवाएं रहेंगी। इस दौरान मेडिकल टीम को 17 नवंबर की दोपहर तक सिविल सर्जन कार्यालय में योगदान देने के लिए कहा गया है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>इन अस्पतालों को मिला निर्देष</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस विषय में सिविल सर्जन ने बताया कि आपात स्थिति की दशा होने पर दानापुर से अशोक राजपथ व कंकड़बाग स्थित घाट के नजदीकी अस्पतालों को सम्बद्ध किया गया है। वहीं पारस एचएमआरआइ, राजेश्वर अस्पताल, एसपी रोड स्थित रूबन इमरजेंसी, श्री साई हास्पिटल, सहयोग हास्पिटल, कुर्जी हास्पिटल, महावीर वात्सल्य, तारा नर्सिंग होम, जगदीश मेमोरियल और अरविंद हास्पिटल आदि को निर्देश दिया गया है कि वे घाट से भेजे गए मरीजों का निशुल्क उपचार करेंगे और अर्घ्य के दौरान ऑपरेशन थिएटर, आइसीयू व इमरजेंसी में भी बेड रिजर्व रखें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>अटल पथ का एक लेन होगा खाली</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:list -->
<ul><!-- wp:list-item -->
<li>इस दौरान कलेक्ट्रेट, महेंद्रू घाट के रोग ग्रसितों को पीएमसीएच, अरविंद हास्पिटल व तारा हास्पिटल</li>
<!-- /wp:list-item -->

<!-- wp:list-item -->
<li>पहलवान व बांसघाट, उदयन हास्पिटल व उदय नारायण हास्पिटल</li>
<!-- /wp:list-item -->

<!-- wp:list-item -->
<li>कुर्जी घाट- कुर्जी हास्पिटल</li>
<!-- /wp:list-item -->

<!-- wp:list-item -->
<li>शिवाघाट, पाटीपुल, दीघा पोस्ट आफिस, मिनार घाट, बिंद टोली, गेट नंबर 92, 93, 88, 83 व जेपी सेतु घाट के लिए बीएम मंडल हॉस्पिटल रूपसपुर व एम्स पटना ले जाया जाएगा।</li>
<!-- /wp:list-item -->

<!-- wp:list-item -->
<li>अस्पताल जाते समय जाम आदि की समस्या का सामना न करना पड़े इसके लिए अटल पथ व जेपी गंगा पथ का एक लेन खाली रखा जाएगा।</li>
<!-- /wp:list-item --></ul>
<!-- /wp:list -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>January 29, 2025, 9:57 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/culture/chhath-puja-2023-administration-active-about-chhath-puja-know-how-medical-facilities-will-be-available/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Bhai Dooj 2023: भाई दूज आज, इस विधि से लगाएं टीका]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/festival/bhai-dooj-2023-today-is-bhai-dooj-get-vaccinated-with-this-method/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। देश भर में फेस्टिव सीजन चल रहा है। ऐसे में आज पुरे देश भर में भाई दूज का त्योहार मनाया जा रहा है। जैसा की हिंदू शास्त्र में भी कहा गया है कि दिवाली पर्व की आरंभ धनतेरस से होती है लेकिन इसका समापन भाई दूज के साथ होता है। गोवर्धन पूजा के अगले [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/01/download-46-2.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पटना। </strong>देश भर में फेस्टिव सीजन चल रहा है। ऐसे में आज पुरे देश भर में भाई दूज का त्योहार मनाया जा रहा है। जैसा की हिंदू शास्त्र में भी कहा गया है कि दिवाली पर्व की आरंभ धनतेरस से होती है लेकिन इसका समापन भाई दूज के साथ होता है। गोवर्धन पूजा के अगले सुबह भाई दूज का पर्व मनाया जाता है। तो चलिए ऐसे में हम आपको इस पर्व से जुड़ी तमाम जानकारी देंगे।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>माथे पर लाल टिका </strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>हिन्दू शास्त्रों के अनुसार हर पर्व का अपना अलग पहचान होता है। बता दें कि दिवाली पर्व की शुरुआत भले ही धनतेरस से होता है लेकिन इसका समापन भाई दूज से ही होता है। भाई दूज के शुभ अवसर पर बहनें अपने भाइयों के माथे पर लाल टिका लगाती है। इसके पीछे का कारण बताया गया है कि बहन अपने भाइयों की लंबी उम्र के लिए भाई के माथे पर तिलक लगा कर उसकी दीर्घ आयु की कामना करती है। इस पर्व को कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाते है। इस साल यह पर्व 15 नवंबर यानी आज बुधवार को मनाया जा रहा है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>सफल जीवन के लिए फास्टिंग</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>भाई दूज पर बहनें अपने भाइयों की दीर्घ आयु और सफल जीवन के लिए फास्टिंग रखती है। आपको बता दें कि हिन्दू शास्त्र में हर पर्व के लिए कुछ न कुछ नियम बताया गया हुआ है, ऐसे में भाई दूज के लिए भी कुछ नियम है जो हम आपको बतायेंगे - माना जाता है कि भाई दूज पर अगर हम नियमानुसार भाई के लिए फास्टिंग के साथ तिलक लगाते है तो ऐसे में हमें शुभ फलों की प्राप्ति होती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>तिलक के समय रखें इन बातों का ख्याल</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>भाई दूज के अवसर पर सभी बहनों को भाई को तिलक करने से पहले कुछ नियम का पालन जरूर करना चाहिए, जैसे में हिन्दू शास्त्र में भी कहा गया हुआ है कि अगर हम भाई दूज पर अपने भाइयों को शुभ मुहूर्त में तिलक करें तो यह अधिक शुभ माना जाता है। भाई दूज का शुभ मुहूर्त आज यानी 15 नवंबर को दोपहर 1:10 बजे से 3:19 बजे तक रहेगा। इस शुभ मुहूर्त में बहनें अपने भाइयों को तिलक कर सकती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>January 29, 2025, 9:57 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/festival/bhai-dooj-2023-today-is-bhai-dooj-get-vaccinated-with-this-method/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Chhath 2023: छठ पूजा को लेकर तैयारी में जुटे अधिकारी, लगातार किया जा रहा घाटों का निरीक्षण]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/culture/chhath-2023-officials-busy-in-preparations-for-chhath-puja-ghats-are-being-inspected-continuously/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। बिहार में छठ के महापर्व पर व्रतियों को कोई परेशानी न हो इसके लिए अभी से ही तैयारियां शुरू कर दी गई है। आज यानी मंगलवार को पटना आयुक्त कुमार रवि के साथ जिलाधिकारी चंद्रशेखर और एसपी के नेतृत्व में टीम ने दीघा घाट से लेकर कलेक्ट्रेट तक पैदल ही इसका निरीक्षण किया है। [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/01/download-46-2.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पटना।</strong> बिहार में छठ के महापर्व पर व्रतियों को कोई परेशानी न हो इसके लिए अभी से ही तैयारियां शुरू कर दी गई है। आज यानी मंगलवार को पटना आयुक्त कुमार रवि के साथ जिलाधिकारी चंद्रशेखर और एसपी के नेतृत्व में टीम ने दीघा घाट से लेकर कलेक्ट्रेट तक पैदल ही इसका निरीक्षण किया है। वहीं इससे पहले सोमवार को भी वरीय अधिकारियों एवं नगर निगम की टीम द्वारा घाटों का निरीक्षण किया था। बता दें कि सोमवार को स्टीमर से दीघा घाट से गाय घाट तक निरीक्षण किया गया था। इसके अलावा भद्र घाट और ज्यूडिशियल घाट पर भी अधिकारियों ने पैदल निरीक्षण किया।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>बेहतर घाट बनाने का प्रबंध किया जा रहा</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>दरअसल, चार दिनों तक चलने वाला यह लोक आस्था का महापर्व 17 से 20 नवंबर तक मनाया जाएगा। हालांकि इसमें अभी दो सप्ताह से ज्यादा दिन बचे हुए हैं, लेकिन छठ की तैयारियां अभी से ही शुरू हो चुकी है। यही नहीं छठ पर्व मनाने के लिए घाटों पर और रास्तों में सुदृढ़ व्यवस्था को लेकर जिला प्रशासन की टीम पूरी तरह तैयार है। वहीं इसे लेकर पटना के आयुक्त कुमार रवि ने बताया कि हमारी टीम सभी घाटों का निरीक्षण कर रही है। पिछले साल की अपेक्षा इस बार गंगा नदी का जलस्तर कम है और छठ के समय तक और ज्यादा कम होने का अनुमान लगाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन ज्यादा से ज्यादा बेहतर घाट बनाने का प्रबंध करेगा। पटना आयुक्त कुमार रवि ने आगे कहा कि हम लोग इसका जायजा ले रहे हैं। सभी घाटों पर चेंजिंग रूम, पार्किंग, वॉच टावर, रोशनी, मेडिकल और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाएगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>खतरनाक घाटों की संख्या होगी कम</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इसके अलावा पटना आयुक्त कुमार रवि ने बताया कि इस बार गंगा नदी में पानी कम रहेगा। इससे खतरनाक घाटों की संख्या कम होगी। उन्होंने यह भी कहा कि जहां खतरनाक घाट होंगे उस पर हम लोग विचार करेंगे। सभी घाटों पर क्षेत्रफल के हिसाब से एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीम तैनात की जाएगी। बता दें कि पटना में दीघा घाट से लेकर दीदारगंज घाट तक लगभग 25 किलोमीटर का रेंज है। यहां इतनी ही दूरी में 108 गंगा घाट हैं, जहां छठ मनाया जाता है। हालांकि जिला प्रशासन द्वारा अभी तक खतरनाक घाटों की सूची तैयार नहीं की गई है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>January 29, 2025, 9:57 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/culture/chhath-2023-officials-busy-in-preparations-for-chhath-puja-ghats-are-being-inspected-continuously/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Ravan Dahan Time : बिहार के अलग-अलग जिलों में इस समय पर होगा रावण दहन]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/politics/ravan-dahan-time-ravan-dahan-will-happen-at-this-time-in-different-districts-of-bihar/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। पूरे बिहार में नवरात्रि को लेकर जश्न का माहौल है। सभी को आज दशमी के दिन रावण वध देखने का इंतजार है। बता दें कि बिहार के अलग-अलग जिलों में दशमी के दिन रावण वध का कार्यक्रम होता है। खास तौर पर पटना के गांधी मैदान में रावण वध देखने के लिए काफी भारी [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/01/download-46-2.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पटना।</strong> पूरे बिहार में नवरात्रि को लेकर जश्न का माहौल है। सभी को आज दशमी के दिन रावण वध देखने का इंतजार है। बता दें कि बिहार के अलग-अलग जिलों में दशमी के दिन रावण वध का कार्यक्रम होता है। खास तौर पर पटना के गांधी मैदान में रावण वध देखने के लिए काफी भारी संख्या में लोग पहुंचते हैं। इस दौरान अगर आप भी मंगलवार को रावण दहन देखने की तैयारी कर रहे हैं तो फिर यह खबर पढ़ लें। बता दें कि पटना के गांधी मैदान में रावण वध की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। आज प्रदेश के कई जिलों में अलग-अलग समय पर रावण दहन होगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>गांधी मैदान पहुंचेंगे सीएम</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>दरअसल पटना में 5 बजे रावण दहन का समय रखा गया है। इस दौरान करीब 4.30 बजे तक सीएम नीतीश कुमार गांधी मैदान में पहुंचेंगे। यहां गेट नंबर एक से एंट्री दी जाएगी। पटना में इस बार 70 फीट का रावण का पुतला बनाया गया है। वहीं मेघनाथ का पुतला 65 फीट और कुंभकर्ण का पुतला 60 फीट का बनाया गया है। पटना के जिलाधिकारी ने बताया है कि पूरे पटना जिले में लगभग 20 जगह पर रावण दहन होना है। यहां सारी तैयारियां हो गई हैं। इसे देखते हुए सभी जगह पर विधि व्यवस्था का इंतजाम भी किया गया है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>बिहार के अन्य जिलों में दहन का समय</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>आज बिहार के कई जिलों में अलग-अलग समय पर रावण दहन होगा। बता दें कि पटना में 5 बजे रावण दहन का कार्यक्रम रखा गया है। इसके अलावा मधुबनी के सूरी स्कूल में शाम करीब 7 से 8 बजे के बीच रावण दहन होगा, रोहतास में रावण दहन का समय शाम के 5:00 बजे रखा गया है, समस्तीपुर जिला मुख्यालय सहित विभिन्न अनुमंडल क्षेत्र में शाम के 4 से 5 बजे के बीच रावण दहन का समय रखा गया है। बता दें कि पहली बार यहां जुलूस के साथ भगवान राम की झांकी भी निकाली जाएगी। वहीं नवादा के हरिश्चंद्र स्टेडियम में रावण वध का कार्यक्रम करीब 5:30 बजे रखा गया है, जहां कांग्रेस के नेता डॉ. अनुज कुमार के द्वारा रावण का वध किया जाएगा। इसके अलावा मुंगेर के पोलो मैदान में शाम 6 बजे रावण दहन होगा, यहां सुरक्षा के इंतजाम को देखते हुए 300 पुलिस बल को लगाया गया है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>इन जिलों में रावण वध का समय</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बता दें कि गया के गांधी मैदान में लगभग 4:30 से 5:00 बजे के बीच रावण दहन होना है। सुपौल के गांधी मैदान में शाम के 7 से 8 बजे के बीच रावण दहन का कार्यक्रम होगा। छपरा के राजेंद्र स्टेडियम में शाम 6 बजे रावण दहन का कार्यक्रम होगा। वहीं मधेपुरा में रेलवे स्टेशन के नजदीक दुर्गा मंदिर परिसर में शाम 4 बजे रावण , आरा के रामलीला मैदान में रात 8:00 बजे और बक्सर के एतिहासिक किला मैदान में शाम 4:00 बजे के बाद रावण वध होगा। बताया जा रहा है कि यहां 45 फीट का रावण बना है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>January 29, 2025, 9:57 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/politics/ravan-dahan-time-ravan-dahan-will-happen-at-this-time-in-different-districts-of-bihar/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Bihar : सीएम नीतीश ने बिहार वासियों को दी विजयदशमी की बधाई, भाईचारे एवं शांति बनाए रखने की अपील]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/politics/bihar-cm-nitish-congratulated-the-people-of-bihar-on-vijayadashami-appealed-to-maintain-brotherhood-and-peace/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। पूरे देश में आज मंगलवार को विजयादशमी का त्योहार बड़ी धूम-धाम के साथ मनाया जा रहा है। सीएम नीतीश ने सभी बिहार वासियों को विजयादशमी की बधाई दी है। सीएम नीतीश ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट द्वारा प्रदेश वासियों को त्योहार की बधाई दी है। सीएम नीतीश कुमार ने लिखा है कि [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/01/download-46-2.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पटना।</strong> पूरे देश में आज मंगलवार को विजयादशमी का त्योहार बड़ी धूम-धाम के साथ मनाया जा रहा है। सीएम नीतीश ने सभी बिहार वासियों को विजयादशमी की बधाई दी है। सीएम नीतीश ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट द्वारा प्रदेश वासियों को त्योहार की बधाई दी है। सीएम नीतीश कुमार ने लिखा है कि विजयादशमी के शुभ अवसर पर बिहारवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकमानाएं। इसे विजय पर्व के रूप में मनाया जाता है। यह असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक है। उन्होंने आगे लिखा कि यह हमारे जीवन में संयम एवं आत्मिक बल संरक्षण करने वाला पर्व है। इस पर्व को सद्भाव, भाईचारे एवं शांतिपूर्ण तरीके से हर्षोल्लास के साथ मनाएं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>दर्शन करने पहुंचे सीएम नीतीश</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>दरअसल सीएम नीतीश कुमार बीते रविवार को महाअष्टमी की शाम डाक बंगला चौराहे पर स्थित दुर्गा पुजा पंडाल में गए थे। जहां पूजा समिति की तरफ से उनका स्वागत किया गया। इस दौरान नीतीश कुमार ने माता रानी के दरबार में माथा टेक कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके अलावा सीएम नीतीश कुमार सोमवार को महानवमी पर अगमकुआं स्थित शीतला माता के मंदिर में पहुंचे। यहां उन्होंने माता दुर्गा की आरती उतारने के बाद नारियल फोड़कर मां को चढ़ाया। यही नहीं सीएम नीतीश कुमार बड़ी पटनदेवी और छोटी पटनदेवी भी गए जहां उन्होंने माता की पूजा की।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>आज गांधी मैदान जाएंगे सीएम</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बताया जा रहा है कि आज मंगलवार को विजयदशमी पर पटना के एतिहासिक गांधी मैदान में शाम 5 बजे रावण वध होगा। इसके लिए 4:30 बजे ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार गांधी मैदान पहुंचेंगे। यहां उनकी सुरक्षा को देखते हुए पुलिस पूरी तरह मुस्तैद है। आज पटना की ट्रैफिक व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>January 29, 2025, 9:57 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/politics/bihar-cm-nitish-congratulated-the-people-of-bihar-on-vijayadashami-appealed-to-maintain-brotherhood-and-peace/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Durga Puja 2023: समस्तीपुर में तैयार हुआ 60 फीट का रावण, पहली बार 4 झांकियों का आयोजन]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/culture/durga-puja-2023-60-feet-ravana-ready-in-samastipur-4-tableaux-organized-for-the-first-time/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। समस्तीपुर शहर से सटे हाउसिंग बोर्ड मैदान में मंगलवार को दशमी के दिन, रावण दहन कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। बताया जा रहा है कि इस बार रावण दहन के साथ-साथ झांकियां भी निकाली जाएंगी। पुलिस प्रशासन की ओर से चाक-चौबंद व्यवस्था बिहार के समस्तीपुर में बीते 67 सालों से रावण दहन किया जा [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/01/download-46-2.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पटना। </strong>समस्तीपुर शहर से सटे हाउसिंग बोर्ड मैदान में मंगलवार को दशमी के दिन, रावण दहन कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। बताया जा रहा है कि इस बार रावण दहन के साथ-साथ झांकियां भी निकाली जाएंगी।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>पुलिस प्रशासन की ओर से चाक-चौबंद व्यवस्था</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बिहार के समस्तीपुर में बीते 67 सालों से रावण दहन किया जा रहा है। इसे लेकर जिला मुख्यालय सहित दलसिंहसराय, रोसड़ा, पटोरी अनुमंडल में रावण दहन की विशेष तैयारियां की जा रही हैं। यही नहीं इस दौरान किसी भी तरह की अनहोनी से बचने के लिए जिला पुलिस प्रशासन की ओर से सुरक्षा की चाक चौबंद व्यवस्था की गई है। लोगों की सुरक्षा को देखते हुए रावण दहन स्थल और जुलूस को लेकर जगह-जगह पुलिस पदाधिकारी एवं मजिस्ट्रेट की तैनाती की गई है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>60 फीट ऊंचा होगा रावण का पुतला</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बता दें कि समस्तीपुर शहर से सटे हाउसिंग बोर्ड मैदान में दशमी के दिन रावण दहन कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इसे लेकर जिला दशहरा समिति द्वारा कार्यक्रम की तैयारी की चल रही है। वहीं पंजाबी कॉलोनी स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर में रावण, कुंभकरण और मेघनाथ का पुतला बनाया जा रहा है। इस बार रावण का पुतला 60 फीट उंचा होगा जबकि कुंभकरण 50 और मेघनाथ का पुतला 40 फीट का होगा। इसके साथ ही 100 फीट की परिधि में लंका नगरी का भी निर्माण होगा किया जाएगा। फिलहाल पुतला निर्माण का कार्य लगभग पूरा कर लिया गया है। अब बस कलाकार पुतला को अंतिम रुप देने में लगे हुए हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>झांकी प्रदर्शन की भी तैयारी</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>वहीं दशहरा समिति के अध्यक्ष विनोद तनेजा का कहना है कि बीते 67 सालों से समिति द्वारा यहां रावण दहन का आयोजन होता है। इस बार 68वां दहन का आयोजन किया जाएगा। इस कार्यक्रम से जुड़ी हुई सारी तैयारियां पूरी तैयारी कर ली गई हैं। आज नवमी के दिन पुतला को हाउसिंग बोर्ड मैदान में ले जाकर वहीं पर पटाखा लगाया जाएगा। इसके साथ ही पहली बार चार झांकी का भी आयोजन किया जाएगा। इसके लिए बाहर से कलाकारों को भी बुलाया गया है। इस बार कृष्ण दरबार के साथ ही शिवजी और रावण को भी उतारा जाएगा। इसके अवाला गणेश भी दिखाई देंगे। पूजा समिति सदस्य के ही बच्चे राम-लक्ष्मण बनेंगे। वहीं कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष साहिल चोपड़ा ने बताया कि दशमी के दिन लक्ष्मी नारायण मंदिर से राम-लक्षण के साथ जुलूस निकाला जाएगा। यह जुलूस हाउसिंग बोर्ड मैदान पहुंचकर रावण दहन में शामिल होगा। वहां से लौटने के दौरान मैदान मंदिर तक प्रसाद का वितरण किया जाएगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>सुरक्षा के लिए रखे गए हैं बाउंसर</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इसके अलावा यह भी जानकारी दी गई है कि कार्यक्रम स्थल पर जिला पुलिस की सुरक्षा रहेगी। इसके अलावा पहली बार समिति के सदस्य के साथ सुरक्षा में छह बाउंसर को भी लगाया जाएगा। ऐसा भगदडं की स्थिति से निपटने के लिए किया जा रहा है। वहीं समिति के कार्यकारी अध्यक्ष के अलावा सचिव मुकेश कटारिया, कोषाध्यक्ष सुमित झा ने लोगों से शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखते हुए रावण दहन का आनंद लेने की अपील की है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>January 29, 2025, 9:57 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/culture/durga-puja-2023-60-feet-ravana-ready-in-samastipur-4-tableaux-organized-for-the-first-time/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Bihar : दुर्गापूजा और दशहरा मेला को लेकर बिहार सरकार ने जारी किए निर्देश]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/culture/bihar-bihar-government-issued-instructions-regarding-durga-puja-and-dussehra-fair/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। प्रदेश में दुर्गा पूजा और दशहरा के समय बच्चों, महिलाओं और युवाओं की काफी भीड़ होती है। इसे लेकर सुरक्षा मद्देनज़र रखते हुए बिहार सरकर की तरफ से कुछ निर्देश जारी किए गए हैं। सरकार ने जारी किए निर्देश इस समय देशभर में नवरात्रि का त्योहार मनाया जा रहा है। इन दिनों सभी लोग [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/01/download-46-2.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पटना।</strong> प्रदेश में दुर्गा पूजा और दशहरा के समय बच्चों, महिलाओं और युवाओं की काफी भीड़ होती है। इसे लेकर सुरक्षा मद्देनज़र रखते हुए बिहार सरकर की तरफ से कुछ निर्देश जारी किए गए हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>सरकार ने जारी किए निर्देश</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस समय देशभर में नवरात्रि का त्योहार मनाया जा रहा है। इन दिनों सभी लोग सच्चे मन से मां दुर्गा की पूजा-अर्चना में लगे हुए हैं। ऐसे में बिहार सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग की तरफ से दुर्गापूजा और दशहरा को लेकर सुरक्षा के लिहाज से कुछ निर्देश जारी किए गए हैं। बता दें कि अगर आप भी पूजा पंडाल, दशहरा मेला और रावण वध देखने की तैयारी कर रहे हैं तो इन निर्देशों के बारे में जानकारी रखना आपके लिए सहायक हो सकता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>जारी किया गया हेल्पलाइन नंबर</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>मेले के दौरान किसी भी प्रकार कि समस्या आने पर आपातकालीन सहायता के लिए आपदा प्रबंधन विभाग के राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र पर संपर्क किया जा सकता है। वहीं इसके लिए आपदा प्रबंधन विभाग की तरफ से हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया गया है। हेल्पलाइन नंबर - 0612-2294204/ 205 पर संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा , टोल फ्री नंबर- 1070 और मो. नं.- 7070290170 पर भी कॉल कर करके मदद लिया जा सकता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>इन निर्देशों का पालन करें</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>दरअसल ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि दुर्गा पूजा के अवसर पर पूजा पंडालों में या दशहरा मेला के दौरान बच्चों, महिलाओं और युवाओं की भारी भीड़ उमड़ती है। ऐसे में भीड़ को कंट्रोल करना प्रशासन के लिए काफी चुनौती भरा काम हो जाता है। ऐसे में कई निर्देश जारी किए गए हैं जिससे त्योहार को सही तरीके से संपन्न कराया जा सके। इन निर्देशों में कई बातों पर ध्यान देने के लिए कहा गया है जैसे -</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:list -->
<ul><!-- wp:list-item -->
<li>मेले के दौरान किसी भी प्रकार का अफवाह न फैलाएं और न ही उन पर ध्यान दें।</li>
<!-- /wp:list-item -->

<!-- wp:list-item -->
<li>मेले में अपने साथ लाए बच्चों को अकेला न छोड़ें न और ही उन्हें अपने से ज्यादा दूर जाने दें।</li>
<!-- /wp:list-item -->

<!-- wp:list-item -->
<li>मेले में किसी भी प्रकार के पटाखे/ज्वलनशील पदार्थ न ले जाएं और इस दौरान वहां धूम्रपान न करें।</li>
<!-- /wp:list-item -->

<!-- wp:list-item -->
<li>इसके अलावा मेले में किसी भी प्रकार की अराजकता न फैलाएं।</li>
<!-- /wp:list-item -->

<!-- wp:list-item -->
<li>त्योहार के बाद मूर्ति विसर्जन के दौरान जो लोग तैराकी नहीं जानते हैं वो लोग पानी के भीतर न जाएं।</li>
<!-- /wp:list-item --></ul>
<!-- /wp:list -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>सामान्य नागरिक इन बातों का रखे ख्याल</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>अब अगर बात करें मेले में आने वाले सामान्य नागरिकों कि तो पूजा पंडालों और मेले में चलते-फिरते रहें। इस दौरान बेवजह एक ही जगह पर भीड़ न लगाएं। अगर आप छोटे बच्चों, महिलाओं, या परिवार के बुर्जुगों के साथ मेले में आए हैं तो उनके जेब में घर का पता और फोन नंबर अवश्य रख दें। अगर आप परिवार या समूह के साथ हैं तो किसी अपात स्थिति में मेला क्षेत्र के बाहर मिलने का एक स्थान सुनिश्चित कर लें। यहीं नहीं परिवार के सभी लोग एक दूसरे का फोन नंबर अपने पास रखें। अगर किसी वजह से भगदड़ की स्थिति आ जाए तो ऐसे समय संयम में बनाए रखें और घबराएं नहीं। किसी भी आपात स्थित में तत्काल नियंत्रण कक्ष में संपर्क करें। इसके साथ ही अपने सामान की रक्षा स्वयं करें। मेले के दौरान बिजली के तारों और उपकरणों से दूर रहें। अज्ञात वस्तुओं को न छुएं। प्रशासन की तरफ से की जाने वाली घोषणाओं को ध्यान से सुनते रहें और उसका पालन करें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>January 29, 2025, 9:57 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/culture/bihar-bihar-government-issued-instructions-regarding-durga-puja-and-dussehra-fair/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[बिहार: युद्ध में मारे गए लोगों का यूक्रेन की महिला ने किया पिंडदान, दिया शांति का संदेश]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/culture/bihar-ukrainian-woman-performed-pinda-daan-of-those-killed-in-war-gave-message-of-peace/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। गया में चल रहे पितृपक्ष मेला में, रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध मारे गये सैनिकों और नागरिकों की आत्मा की शांति तथा उनके मोक्ष के लिए यूक्रेन की एक महिला ने यहां एक मंदिर में ‘पिंडदान’ किया है। महिला ने बताया कि वह यहां शांति का संदेश फैलाने के लिए आई हैं। यूक्रेन [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/01/download-46-2.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पटना।</strong> गया में चल रहे पितृपक्ष मेला में, रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध मारे गये सैनिकों और नागरिकों की आत्मा की शांति तथा उनके मोक्ष के लिए यूक्रेन की एक महिला ने यहां एक मंदिर में ‘पिंडदान’ किया है। महिला ने बताया कि वह यहां शांति का संदेश फैलाने के लिए आई हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>यूक्रेन की महिला गया में कर रही पिंडदान</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>गया में विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेला 28 सितंबर से शुरू हो चुका है। यह मेला 14 अक्टूबर तक चलेगा। इस दौरान देश-विदेश से लाखों की संख्या में हिंदू सनातन धर्मावलंबी गया जी पहुंचे हुए हैं। ये मान्यता है कि पितरों को जल और तिल से पितृपक्ष में तर्पण किया जाता है। यहीं नहीं पितृपक्ष अवधि में गया जी धाम में पिंडदान करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दौरान एक दिलचस्प वाकया सामने आया है। बताया जा रहा है कि रूस और यूक्रेन के बीच हुए युद्ध में फरवरी 2022 से लेकर अब तक मारे गए सैनिकों और नागरिकों की आत्मा की शांति तथा उनके मोक्ष के लिए यूक्रेन की एक महिला ने गया के एक मंदिर में ‘पिंडदान’ किया।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>'दूसरा मौका है जब मैं पिंडदान करने आई हूं'</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस साल पितृ पक्ष की शुरूआत 29 सितंबर से हुई है। बता दें कि इसकी 16 दिनों की अवधि में हिंदू अपने पूर्वजों का श्राद्ध एवं तर्पण तथा पिंडदान करते हैं। वहीं यूक्रेनी महिला यूलिया ने संवाददाताओं से कहा कि यह दूसरा मौका है जब मैं पिंडदान करने आई हूं। यूलिया ने बताया कि मैं बीते साल भी इस पितृपक्ष दौरान अपने माता-पिता की आत्मा की शांति एवं मोक्ष के लिए यहां पर आई थी।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>यूलिया सनातन धर्म में दृढ़ विश्वास रखती हैं</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>यूक्रेनी महिला यूलिया ने कहा कि रूस-यूक्रेन के बीच जारी युद्ध निश्चित तौर पर समाप्त होना चाहिए। यूलिया ने बताया कि वह यहां शांति का संदेश फैलाने के लिए आई हैं। यूलिया ने इस्कॉन प्रचारक लोकनाथ गौड़ की मदद से पिंडदान किया है। इसे लेकर लोकनाथ गौड़ ने कहा कि यूलिया सनातन धर्म में दृढ़ विश्वास रखती हैं। उन्होंने गया और पितृ पक्ष के दौरान यहां पिंडदान करने के महत्व के बारे में बहुत अध्ययन किया है। बता दें कि गया में, यहां के विष्णुपद मंदिर में प्रतिवर्ष पितृ पक्ष मेले का आयोजन किया जाता है। हर वर्ष, दुनिया भर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पितृ पक्ष के दौरान पिंडदान करने के लिए मंदिर में आते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>January 29, 2025, 9:57 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/culture/bihar-ukrainian-woman-performed-pinda-daan-of-those-killed-in-war-gave-message-of-peace/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[बिहार: आज से शुरु हो रहा है पितृपक्ष, गया धाम में पिंडदान के दौरान बरतें ये सावधानियां]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/culture/bihar-pitru-paksha-is-starting-from-today-take-these-precautions-during-pind-daan-in-gaya-dham/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। बिहार के गया जी धाम में 15 दिनों की अवधि के दौरान देश-विदेश से लाखों तीर्थयात्री पिंडदान करने पहुंचते हैं। पितृपक्ष अवधि में अनेक नियमों और धर्मों का पालन करने के लिए बताया गया है। जानिए पूरी जानकारी। आज से शुरु हो रहा है पितृपक्ष गया में विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेला 28 सितंबर से [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/01/download-46-2.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पटना।</strong> बिहार के गया जी धाम में 15 दिनों की अवधि के दौरान देश-विदेश से लाखों तीर्थयात्री पिंडदान करने पहुंचते हैं। पितृपक्ष अवधि में अनेक नियमों और धर्मों का पालन करने के लिए बताया गया है। जानिए पूरी जानकारी।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>आज से शुरु हो रहा है पितृपक्ष</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>गया में विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेला 28 सितंबर से शुरू हो चुका है। यह मेला 14 अक्टूबर तक चलेगा। बता दें कि आज शुक्रवार से पितृपक्ष की शुरुआत हो गई है। इस दौरान देश-विदेश से लाखों की संख्या में हिंदू सनातन धर्मावलंबी गया जी पहुंचते हैं। यह कहा जाता है कि ये मान्यता है कि पितरों को जल और तिल से पितृपक्ष में तर्पण किया जाता है। यहीं नहीं पितृपक्ष अवधि में गया जी धाम में पिंडदान करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार गरुड़ पुराण में वर्णित है कि पृथ्वी के सभी तीर्थों में गया सर्वोत्तम तीर्थ है। वहीं, मत्स्य पुराण में गया को पितृतीर्थ भी कहा गया है। इसी कारण गया जी धाम में 15 दिनों की अवधि में देश-विदेश से लाखों तीर्थयात्री पिंडदान, तर्पण और कर्मकांडो को पूरा करने के लिए आते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>क्या है श्राद्ध</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बता दें कि गया के विष्णुपद मंदिर स्थित वैदिक मंत्रालय के पंडित राजा आचार्य ने बताया कि भारतीय हिंदुत्व और सनातन में अपने पूर्वज पितरों को समर्पित भाव से जो कार्य किया जाता है वही श्राद्ध होता है। जीवित अवस्था में पितृ अपने बच्चों का अच्छे से पालन-पोषण करते हैं। घर, भोजन आदि सहित जीवन कैसे जीना है? यह माता पिता ही सिखाते हैं। इसके साथ ही वह पूर्वज मृत्यु के बाद यह कामना करते हैं कि हमारी संतान हमारे मृत्यु के बाद हमारे उद्धार के लिए श्राद्ध करे और श्रद्धा से होने वाला पिंडदान ही श्राद्ध होता है। बताया जाता है कि जब सूर्य कन्या राशि में प्रवेश कर जाता है और पहले कृष्णपक्ष को महालया पक्ष यानी पितृपक्ष होता है इस अवधि में श्रद्धा से किए गए श्राद्ध से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति और उद्धार मिलता है। इससे पितर प्रसन्न होते हैं और अपनी संतान को सुखी रहने का आशीर्वाद देते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार साधू व संतों और बच्चों का पिंडदान नहीं किया जाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>पितृपक्ष के दौरान इन नियमों का करें पालन</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बताया जाता है कि पितृपक्ष अवधि में अनेक नियमों और धर्म का पालन किया जाता है। इस दौरान पिंडदानी को दूसरे के घर का भोजन नहीं करना चाहिए, झूठ नहीं बोलें, कपट न करें, पितृपक्ष में एक समय ही भोजन करें, इसके अलावा रात्रि भोजन का त्याग दें, वहीं अगर आप यात्रा में हों तो अपने भगवान और पितरों का ध्यान करें, किसी के साथ अपशब्द नहीं बोलें, ब्रह्मचर्य का पालन करें, गरीबों को भोजन कराएं, पशु-पक्षियों को भोजन दें, पितरों को तिल तर्पण करें, शुद्ध सात्विक अवस्था में रहें, 15 दिनों तक नित्य पितरों का ध्यान करें और विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें। भागवत या रामायण जी का पाठ अगर नहीं कर सकते हैं तो किसी ब्राह्मण से पाठ कराकर सुनना जरूरी होता है। पितृपक्ष की पूरी अवधि में इन नियमों का पालन करते हुए जीवन को सफल बनाया जा सकता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>इन सामग्रियों से करें पिंडदान</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>पितृ पक्ष के दौरान गया में पिंडदान करने से पितर तृप्त होते हैं और इसी के साथ ही वो संतान को आशीर्वाद भी प्रदान करते हैं। इसीलिए श्राद्ध करना बहुत ज्यादा जरूरी होता है। श्राद्ध में तर्पण करने के लिए तिल, जल, चावल, कुशा, गंगाजल आदि का उपयोग अवश्य ही किया जाना चाहिए। उड़द, सफेद पुष्प, केले, गाय के दूध, घी, खीर, स्वांक के चावल, जौ, मूंग, गन्ने आदि का इस्तेमाल करते हैं तो इससे श्राद्ध में पितर प्रसन्न होते हैं और घर में सुख शांति बनी रहती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>इन बातों का विशेष ध्यान</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>पिंडदान के समय कुछ बातों का ध्यान रखना बेहद आवश्यक है जैसे जब भी मृत व्यक्ति के घरवाले मृतक का पिंडदान करें तो सबसे पहले चावल या फिर जौ के आटे में दूध और तिल को मिलाकर उस आटे को गूथ लें। इसके बाद उसका गोला बना लें। वहीं जब भी आप तर्पण करने जाएं तो ध्यान रखें कि आप पीतल के बर्तन या फिर पीतल की थाली ही लें और उसमें एकदम साफ जल भरें। इसके बाद उसमें दूध व काला तिल डालकर अपने सामने रख लें और अपने सामने एक खाली बर्तन भी रखें। अब अपने दोनों हाथों को मिला लें। इसके बाद मृत व्यक्ति का नाम लेकर तृप्यन्ताम बोलते हुए अंजुली में भरे हुए जल को सामने रखे खाली बर्तन में डाल दें। इसके अलावा जल से तर्पण करते समय आप उसमें जौ, कुशा, काला तिल और सफेद फूल अवश्य मिला लें। ऐसा करने से पितर तृप्त हो जाते हैं। इसके बाद ब्राह्मणों को भोजन करवाएं और उन्हें दान-दक्षिणा दें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>January 29, 2025, 9:57 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/culture/bihar-pitru-paksha-is-starting-from-today-take-these-precautions-during-pind-daan-in-gaya-dham/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[बिहार: अगर इस बार पितृ पक्ष पर गया नहीं आ सकते तो करिए ई-पिंडदान, जानिए पूरी डिटेल]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/culture/bihar-if-you-cannot-come-to-gaya-for-pitru-paksha-this-time-then-do-e-pind-daan-know-the-complete-details/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। गया में 28 सितंबर से 14 अक्टूबर तक लगेगा पितृ पक्ष मेला। इस बार देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। पिंडदान से पूर्वजों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। ई-पिंडदान से करें पूर्वजों के मोक्ष की कामना गया में 28 सितंबर से विश्व प्रसिद्ध पितृ पक्ष मेले का शुभारंभ होने जा [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/01/download-46-2.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पटना।</strong> गया में 28 सितंबर से 14 अक्टूबर तक लगेगा पितृ पक्ष मेला। इस बार देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। पिंडदान से पूर्वजों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>ई-पिंडदान से करें पूर्वजों के मोक्ष की कामना</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>गया में 28 सितंबर से विश्व प्रसिद्ध पितृ पक्ष मेले का शुभारंभ होने जा रहा है। यहां मेले में जल्दी ही देश-विदेश से लाखों की संख्या में हिंदू सनातन धर्मावलंबियों के आने का सिलसिला शुरू होने वाला है। बता दें कि इस वर्ष पितृ पक्ष मेले के दौरान 10 से 12 लाख श्रद्धालुओं के गया जी पहुंचने की संभावना है। गया जी पहुंचकर तीर्थयात्री अपने पूर्वजों को मोक्ष दिलाने की कामना के साथ पिंडदान, तर्पण एवं कर्मकांड को पूरा करते हैं लेकिन जो लोग इस बार पितृ पक्ष पर गया जी नहीं आ सकते हैं वो लोग ई-पिंडदान का लाभ उठा सकते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>विशेष पैकेज से मिलेगी सारी सुविधा</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस साल बिहार सरकार ने ऐसे श्रद्धालुओं के लिए ई-पिंडदान की व्यवस्था की है जो विदेश में हैं और अपने पितरों का पिंडदान करना चाहते हैं। गया जिले के डीएम डॉ. त्यागराजन एसएम ने बताया कि यह व्यवस्था ऐसे लोगों के लिए है जो खासकर विदेशों में रहते हैं या फिर किसी अन्य कारणों से गया जी पिंडदान के लिए नहीं आ सकते हैं। इस ई-पिंडदान के जरिए विष्णुपद मंदिर, अक्षय वट और फल्गु नदी के किनारे पिंडदान करने की व्यवस्था की जा रही है। इस व्यवस्था के लिए बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम के द्वारा एक पैकेज भी बनाया गया है जिसमें पिंडदान के लिए सामग्री, ब्राह्मण का दक्षिणा और अन्य खर्च को शामिल किया गया है। इसकी जानकारी बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम की वेबसाइट पर भी उपलब्ध है। अपनी सुविधा के हिसाब से पैकेज के अनुसार ऑनलाइन बुकिंग कराया जा सकता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>इतना खर्च आ सकता है</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बता दें कि गया जी में विष्णुपद मंदिर, फल्गु नदी और अक्षयवट पर पिंडदान करने की व्यवस्था की जा रही है। तीनों स्थानों ई-पिंडदान के लिए प्रति श्रद्धालु 21,500 रुपये तय किए गए हैं। इसमें पूजन सामग्री, ब्राह्मण का दक्षिणा आदि सभी राशियां जोड़ी गई है। बताया जा रहा है कि ऑनलाइन पेमेंट बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम के बैंक खाते में करना होगा। यहां श्रद्धालुओं को ई-पिंडदान संपन्न कराने के बाद पेन ड्राइव की होम डिलीवरी कराई जाएगी।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>January 29, 2025, 9:57 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/culture/bihar-if-you-cannot-come-to-gaya-for-pitru-paksha-this-time-then-do-e-pind-daan-know-the-complete-details/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[बिहार: 28 सितंबर से बदल जाएगा गया का ट्रैफिक रूट, इन स्थानों पर होगी पार्किंग व्यवस्था]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/culture/bihar-gayas-traffic-route-will-change-from-september-28-parking-arrangements-will-be-made-at-these-places/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। पितृपक्ष मेले के दौरान कई रास्तों को वन–वे किया जाएगा साथ ही मेला क्षेत्र में आने वाले छोटे-बड़े बाहरी वाहनों के लिए पार्किंग व्यवस्था की गई है। मेला क्षेत्र में नो व्हीकल जोन गया में जल्दी ही विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेला लगने जा रहा है। बता दें कि ये मेला 28 सितंबर से 14 [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/01/download-46-2.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पटना।</strong> पितृपक्ष मेले के दौरान कई रास्तों को वन–वे किया जाएगा साथ ही मेला क्षेत्र में आने वाले छोटे-बड़े बाहरी वाहनों के लिए पार्किंग व्यवस्था की गई है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>मेला क्षेत्र में नो व्हीकल जोन</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>गया में जल्दी ही विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेला लगने जा रहा है। बता दें कि ये मेला 28 सितंबर से 14 अक्टूबर तक रहेगा। मेले के दौरान देश–विदेश से लाखों की संख्या में तीर्थयात्री गयाजी धाम आते हैं और पिंडदान, तर्पण और विभिन्न प्रकार के कर्मकांडों को पूरा करते हैं। इनमें से ज्यादातर यात्री रेल और सड़क मार्ग से गया पहुंचते हैं। मेले में तीर्थयात्रियों की भीड़ होगी इसलिए ऐसे में सुरक्षा-व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। इसके अलावा यातायात व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए मेला क्षेत्र में नो व्हीकल जोन बनाया गया है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>ये मार्ग रहेंगे वन-वे</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>ट्रैफिक व्यवस्था को बनाए रखने के लिए और मेले के दौरान लोगों को आने-जाने में दिक्कत न हो इसको लेकर कई मार्गों में बदलाव किए गए हैं। यहीं नहीं कई रास्तों को वन–वे किया गया है तो कई सड़कों पर बड़े वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। वहीं गया के डीएम डॉ. त्यागराजन एसएम के निर्देश पर जिला परिवहन पदाधिकारी विकास कुमार और एमवीआई अजय कुमार के द्वारा ट्रैफिक रूट तैयार किया गया है। बताया जा रहा है कि गया जंक्शन से चांदचौरा के लिए वन-वे मार्ग रहेगा। वहीं गया जंक्शन से बाटा मोड़, स्वराजपुरी रोड, काशीनाथ मोड़, दिग्घी तालाब, राजेंद्र आश्रम, एपीआर मॉल और नागमतिया रोड होते हुए स्टेशन तक वन-वे रहेगा। मेले के दौरान इस रूट पर बड़े वाहनों का प्रवेश वर्जित रहेगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>पार्किंग की सुविधा</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>मेला क्षेत्र में आने वाले छोटे-बड़े बाहरी वाहनों के लिए पार्किंग व्यवस्था की गई है। वहीं शहर के बाहर 11 जगहों पर वाहन पार्किंग की सुविधा भी दी जा रही है। इसके अलावा यात्रियों के आवागमन के लिए निःशुल्क ई-रिक्शा का परिचालन किया जाएगा। गया रेलवे स्टेशन से चांदचौरा पूर्वी, चांदचौरा पूर्वी से विष्णुपद मंदिर, बंगाली आश्रम से तुलसी पार्क और अंगरैली अंडर पास से प्रेतशिला तक रूट का निर्धारण किया गया है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>इन जगहों पर बनाए गए हैं पड़ाव स्थल</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>शहर में कई जगहों को पड़ाव स्थल के रुप में चुना गया है। बता दें कि सिकड़िया मोड़ बस स्टैंड, गया कॉलेज खेल परिसर, प्रेतशिला की पहाड़तली किसान कॉलेज मैदान, केंदुयी सूर्य मंदिर परिसर, आईटीआई पॉलटेक्निक कॉलेज, मैदान परिसर, रेलवे स्टेशन गया के पास, पंचायती अखाड़ा रेल अंडर पास से सटे पूर्वी भाग, कोलरा अस्पताल मैदान, भुसुंडा मैदान, सीताकुंड के पास सड़क किनारे/पंचदेव धाम और कुष्ठ अस्पताल परिसर में पड़ाव स्थल बनाए गए हैं। इसके अलावा बसों के लिए रिंग सेवा पड़ाव स्थल बनाए गए हैं। वहीं विष्णुपद से बोधगया–प्रेतशिला–रामशिला, गया रेलवे स्टेशन से विष्णुपद, गया कॉलेज खेल परिसर से रामशिला–प्रेतशिला और गांधी मैदान से विष्णुपद तक रिंग बस सेवा चलाई जाएगी। यहीं नहीं प्रीपेड छोटे वाहनों का प्रति घंटे के अनुसार रेट का निर्धारण किया गया है ताकि गयाजी आने वाले तीर्थयात्रियों को किसी भी प्रकार की कोई परेशानी का सामना न करना पड़े।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>January 29, 2025, 9:57 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/culture/bihar-gayas-traffic-route-will-change-from-september-28-parking-arrangements-will-be-made-at-these-places/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[बिहार: 28 सितंबर से शुरू हो रहा है विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेला, गया जाने की सोच रहे हैं तो जान लिजिए ये जानकारी]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/tourism/bihar-world-famous-pitru-paksha-fair-is-starting-from-28th-september-if-you-are-thinking-of-going-to-gaya-then-know-this-information/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। पितृपक्ष के दौरान लाखों की संख्या में देश–विदेश से हिंदू सनातन धर्मावलंबी गया पहुंचते हैं। अगर आप भी पितृपक्ष के समय गया जाने वाले हैं और वहां की तैयारी और सुविधाओं के बारे में जानना चाहते हैं तो यहां से जानकारी ले सकते हैं। देश-विदेश से लाखों तीर्थयात्री आते हैं गया में विश्व प्रसिद्ध [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/01/download-46-2.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पटना।</strong> पितृपक्ष के दौरान लाखों की संख्या में देश–विदेश से हिंदू सनातन धर्मावलंबी गया पहुंचते हैं। अगर आप भी पितृपक्ष के समय गया जाने वाले हैं और वहां की तैयारी और सुविधाओं के बारे में जानना चाहते हैं तो यहां से जानकारी ले सकते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>देश-विदेश से लाखों तीर्थयात्री आते हैं</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>गया में विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेला 28 सितंबर से शुरू होने वाला है। यह मेला 14 अक्टूबर तक चलेगा। मेले के दौरान यहां देश-विदेश से लाखों की संख्या में हिंदू सनातन धर्मावलंबी पहुंचते हैं। यहां वह अपने पितरों की मोक्ष की कामना के लिए पिंडदान, तर्पण और विभिन्न प्रकार के कर्मकांडों को पूरा करते हैं। कहा जाता है कि ये मान्यता है कि पितरों को जल और तिल से पितृपक्ष में तर्पण किया जाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>पिंडदान के स्थान</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बता दें कि शहर में पिंडदान करने के लिए 54 स्थान हैं। तीर्थयात्री यहां अलग-अलग तिथि को पिंडदान करते हैं। यहां प्रेतशिला, रामशिला, देव घाट, अक्षयवट, गोदावरी, पितामहेश्वर, विष्णुपद, सीता कुंड सहित अन्य 54 वेदियों पर तीर्थयात्री पिंडदान और तर्पण करने आते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>तीर्थयात्रियों के रहने का पूरा इंतज़ाम</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बताया जा रहा है कि सीताकुंड में प्याऊ बना हुआ है। इसके अलावा देव घाट पर भी तीन अलग-अलग प्याऊ बने है और विष्णुपद मंदिर गेट के बाहर भी गंगाजल की आपूर्ति की जाएगी। यहीं नहीं पाइपलाइन के जरिए भी तीर्थयात्रियों को गंगाजल उपलब्ध हो सकेगा। बता दें कि गांधी मैदान में लोगों के ठहरने के लिए जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग के द्वारा टेंट सिटी का निर्माण कराया जा रहा है। टेंट सिटी में लगभग 2500 लोगों के रहने की व्यवस्था है। यहां पर इसके अलावा बोधगया के निग्मा मोनेस्ट्री में 2400, सामुदायिक भवन और अन्य आवासन के लिए 41 आवासन स्थल में 10050 लोगों के ठहरने की व्यवस्था की गई है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>होटल, रेस्टहाउस, निजि भवन और धर्मशाला की व्यवस्था</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>मेले में 6000 पुलिस जवानों के ठहरने के लिए 23 स्थानों का चयन किया गया है। इसके अलावा लगभग 3452 यात्रीयों के लिए 63 होटल और रेस्टहाउस भी चिह्नित किए गए हैं। वहीं 368 पंडा के लिए निजी भवन और धर्मशाला को चिह्नित किया गया है। यहां पर 36544 यात्री ठहर सकेंगे। यहीं नहीं इसी तरह कुल 497 स्थानों पर करीब 60946 लोगों के रूकने की व्यवस्था की गई है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>ये हैं सुरक्षा के इंतजाम</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>मेले में पेयजल की व्यवस्था, शौचालय, बिजली, साफ–सफाई, चिकित्सा सुविधा सहित अन्य सभी सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी। जिसके लिए अलग-अलग कोषांग का गठन किया गया है। बता दें कि इसकी मॉनीटरिंग अधिकारी और खुद डीएम करेंगे। मेले में तीर्थयात्रियों की भीड़ होगी इसलिए ऐसे में सुरक्षा-व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। इसके अलावा यातायात व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए मेला क्षेत्र में नो व्हीकल जोन बनाया गया है। हालांकि तीर्थयात्री ई-रिक्शा से मंदिर तक जा पाएंगे।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>January 29, 2025, 9:57 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/tourism/bihar-world-famous-pitru-paksha-fair-is-starting-from-28th-september-if-you-are-thinking-of-going-to-gaya-then-know-this-information/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[बिहार: एक ऐसा गांव जहां के मुसलमानोंं को रहता है जन्माष्टमी का इंतजार, बढ़ाते हैं त्योहार की शोभा]]></title>
                    <link>https://bihar.inkhabar.com/culture/bihar-a-village-where-muslims-wait-for-janmashtami-enhance-the-beauty-of-the-festival/</link>
                    <description><![CDATA[पटना। जन्माष्टमी हिंदुओं का त्योहार है और हर साल सभी को इसका बेसब्री से इंतजार रहता है। वहीं बिहार में एक ऐसा गांव है जहां के मुस्लिम परिवार को हर साल जन्माष्टमी का इंतजार रहता है। यहां सभी बांसुरीवाले के दीवाने हैं। जन्माष्टमी पर बढ़ जाती बांसुरी की बिक्री यह माना जाता है कि जन्माष्टमी [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://bihar.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/01/download-46-2.png"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पटना।</strong> जन्माष्टमी हिंदुओं का त्योहार है और हर साल सभी को इसका बेसब्री से इंतजार रहता है। वहीं बिहार में एक ऐसा गांव है जहां के मुस्लिम परिवार को हर साल जन्माष्टमी का इंतजार रहता है। यहां सभी बांसुरीवाले के दीवाने हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>जन्माष्टमी पर बढ़ जाती बांसुरी की बिक्री</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>यह माना जाता है कि जन्माष्टमी या कृष्णाष्टमी हिंदुओं का त्योहार है। हर साल सभी लोग बेसब्री से अपने लड्डू गोपाल का जन्मोत्सव मनाने की तैयारी में लगे रहते हैं। वहीं मुजफ्फरपुर के कुढ़नी प्रखंड के बड़ा सुमेरा मुर्गिया चक गांव में लगभग 25 से 30 मुस्लिम परिवार ऐसे हैं, जो कई पीढीयों से बांसुरी बनाने का काम कर रहे हैं। इन परीवारों का कहना है कि जन्माष्टमी पर उनकी बांसुरी खरीदने वालों की संख्या बढ़ जाती है। इन परिवारों की जिविका चलाने का एकमात्र जरिया बांसुरी बनाना और बेचना है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>नरकट की लकड़ी से बनाते हैं बांसुरी</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>मुस्लिम परिवारों के अनुसार जन्माष्टमी के समय और दशहरा के मेले में भगवान कृष्ण के इस वाद्ययंत्र बांसुरी की बिक्री बढ़ जाती है। इन बांसुरियों को नरकट की लकड़ी से बनाया जाता है। इस क्षेत्र में नरकट की खेती भी की जाती है। गांव के ही बांसुरी बनाने वाले नूर मोहम्मद बताते हैं कि वह 12- 15 साल की उम्र से बांसुरी बना रहे हैं। उन्होंने बताया कि भले ही अब नरकट के पौधों में कमी आ गई है लेकिन यहां के लोग आज भी नरकट से बांसुरी का पारंपरिक तरीके से निर्माण कर रहे हैं। कारीगर बांसुरी बनाने के लिए दूसरे जिले से भी नरकट खरीदकर ले आते हैं। नरकट को छील कर सुखाया जाता है और इसके बाद बांसुरी तैयार की जाती है। एक बांसुरी को बनाने में लगभग पांच से सात रुपये का खर्च आता है। एक परिवार, एक दिन में करीब 100 से अधिक बांसुरी बना लेता है। यहां बांसुरी की कीमत 10 रुपए से लेकर 250 से 300 रुपये तक है। गांव में ऐसे लोग भी हैं जो बांसुरी बनाते भी हैं और उसे घूम-घूमकर बेचते भी करते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>देश-प्रदेश तक जाती है बांसुरी</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>गांव के ही बांसुरी बनाने में निपुण मोहम्मद आलम बताते हैं कि उन्होंने अपने पिता से करीब 40 साल पहले बांसुरी बनाने की कला सीखी थी। तब से अब तक वह इस कार्य में लगे हुए हैं। उन्होंने कहा कि यहां की बनाई बांसुरी की कोई जोर नहीं है। यहां की बांसुरी की खनक भरी धुन अलग होती है। यहां से बांसुरी न सिर्फ बिहार के सभी जिलों में बल्कि झारखंड, यूपी और नेपाल, भूटान तक जाती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>कला को बचाने के लिए चाहिए आर्थिक सहायता</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बांसुरी बनाने वाले कारीगरों ने अपनी पीड़ा बताई है कि उनकी कला को बचाए रखने के लिए कोई मदद नहीं मिल रहा। उनकी मांग है कि सरकार की ओर से उन्हें इसके लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जाए जिससे यह कला विलुप्त होने से बच सके। उनका कहना है कि वर्षों तक अपने दम पर उन्होंने इस कला को बचा कर रखा है, लेकिन अब उन्हें इस व्यापार को बढ़ाने के लिए सरकार के मदद की दरकार है। इन्हें नरकट की लकड़ी की ही नहीं, बाजार की भी जरूरत है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>January 29, 2025, 9:57 am</pubDate>
                    <guid>https://bihar.inkhabar.com/culture/bihar-a-village-where-muslims-wait-for-janmashtami-enhance-the-beauty-of-the-festival/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
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