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Shukra Pradosh Vrat: शुक्र को मनाया जाएगा शुक्र प्रदोष व्रत, जानिए इसका महत्व और पूजा विधि

पटना। हर माह के शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष तिथि का व्रत किया जाता है और जब यह तिथि शुक्रवार के दिन पड़ती है, तब शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनसुार, शुक्र प्रदोष तिथि का व्रत करने से जीवन में सुख समृद्धि बनी रहती है और शत्रुओं […]

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Shukra Pradosh Vrat
  • July 18, 2024 12:35 pm IST, Updated 9 months ago

पटना। हर माह के शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष तिथि का व्रत किया जाता है और जब यह तिथि शुक्रवार के दिन पड़ती है, तब शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनसुार, शुक्र प्रदोष तिथि का व्रत करने से जीवन में सुख समृद्धि बनी रहती है और शत्रुओं से भी मुक्ति मिलती है। ऐसे में आइए जानते हैं शुक्र प्रदोष व्रत का महत्व, पूजा विधि?

शुक्र प्रदोष व्रत का महत्व

शुक्र प्रदोष तिथि के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा- अर्चना की जाती है। पुराणों के मुताबिक प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और व्यक्ति मोक्ष की प्राप्ति होती है। भगवान भोलेनाथ, देवों के देव महादेव कहे जाते हैं। भगवान शिव को समर्पित इस तिथि का व्रत करने से सभी कष्टों का अंत होता है और आरोग्य की प्राप्ति होती है। साथ ही खुशियां, सौभाग्य, ऐशवर्य, सौंदर्य आदि की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि प्रदोष व्रत करने से शत्रुओं से मुक्ति भी मिलती है। साथ ही जो लोग संतान प्राप्ति की इच्छा रखते हैं, उनको खासतौर पर शुक्र प्रदोष तिथि का व्रत करना चाहिए।

शुक्र प्रदोष की पूजा विधि

प्रदोष तिथि के दिन ब्रह्म मुहूर्त में सुबह उठकर स्नान करना चाहिए। स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें और फिर हाथ में अक्षत और फूल लेकर व्रत का संकल्प करें। इस बाद पास के शिव मंदिर में जाकर भगवान शिव को गंगाजल, बेलपत्र, अक्षत, धूप दीप पूजा की सामग्री अर्पित करें। पूरे दिन उपवास रखकर ‘ॐ नमः शिवाय:’ मन ही मन जाप करना चाहिए। इसके बाद सूर्यास्त के बाद फिर से स्नान करें और शिवालय जाकर भगवान शिव का षोडषोपचार विधि से पूजन करना चाहिए। इसमें आप शिवलिंग पर दूध, जल, दही, शहद, गंगाजल आदि से अभिषेक करें। भगवान शिव को दूर्वा खिलाकर चरण स्पर्श करें। फिर भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें और प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें।


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